Tuesday, April 21, 2026
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गर्मियों को चाय और दूध के स्वाद से बनाएं कूल

मसाला चाय कुल्फी

सामग्री : 1 कप मसाला चाय, 1 बड़ा चम्मच सौंफ, ¼ कप पिस्ता के टुकड़े, 1 छोटा चम्मच सौंठ का पाउडर, 2 कप रबड़ी

विधि : सौंफ को अच्छे से साफ करके नॉन-स्टिक पैन में भून लें, ठंडा होने के बाद मिक्सी में पीस लें। पिस्ता के टुकडों को भी ख़स्ता होने तक भून लें। एक भगौने में मसाला चाय, सौंफ, सौंठ का पाउडर, भुने पिस्ते और रबड़ी को मिला कर अच्छे से फेंट लें। फिर इस मिश्रण को कुल्फी के साँचो में भर कर 10 घंटे के लिए फ्रीजर में रख दे। 10 घंटे बाद अपने परिवार वालो के साथ इस कुल्फी का आनन्द लें।

 

दूध की कुल्फी


सामग्री : 1 लीटर दूध (भैंस का दूध हो तो बेहतर) ¼ कप चीनी, ½ कप खोया (फीका मावा), 1 छोटी कटोरी इलायची पाउडर, ¼ कप बादाम और काजू कटे हुये
विधि : सर्वप्रथम एक भगौना/चौड़े पैन में दूध लेकर गैस की मध्यम आंच पर बर्तन को रखेंगे। इसे चम्मच की सहायता से हिलाते रहेंगे जिससे दूध किनारों और नीचे न चिपके। दूध को तब तक उबालते रहेंगे जब तक दूध आधा ना रह जाये। जब दूध आधा हो जाये तो आंच को मध्यम से कम कर देंगे। फिर इसमें चीनी और खोया मिलायेंगे। इन सबको तब तक अच्छे से मिलायेंगे जब तक चीनी और खोया अच्छे से पक नहीं जाते। जब ये पक जायेंगे तब इसमे इलायची पाउडर, बादाम और काजू को डाल देंगे। फिर इसे ठंडा होने के लिए रख देंगे। थोड़ा ठंडा के बाद इस दूध को कुल्फी के साँचो में भरकर फ्रिज में रख देंगे। 15 मिनिट के बाद इसे बाहर निकाल कर परोस देंगे और स्वादिष्ट कुल्फी का लुत्फ उठाएंगे।

स्टाइल से दीजिए गर्मी को मात

गर्मी ने तेजी से अपना कहर ढाना शुरू कर दिया है। मौसम के गर्म मिजाज़ से आप समझ नहीं पाते कि क्या पहनना चाहिए जिससे कॉलेज, ऑफिस या कहीं भी जाने से उन्हें आराम महसूस हो। साथ ही स्टाइलिश भी लगे, ऐसे में गर्मी के मौसम में कपड़ों का चुनाव करना कठिन काम लगता है।

परिधान
गर्मी के दिनों में स्टाइलिश दिखने के साथ-साथ आरामदायक महसूस करने के लिए थोड़ा ढ़ीला-ढ़ाला कॉटन या लेनिन शर्ट, टी- शर्ट और जींस की जगह कॉटन पैंट, कॉटन चीनोस जींस पहने । कपड़ों का चुनाव करते समय उसके रंगो पर ध्यान देना बहुत जरुरी है, भड़कीले रंगो की जगह हल्के रंग के कपड़े उपयोग करें। इसके साथ ही काले रंग के कपड़े का दिन के समय उपयोग नही करना चाहिए।

चश्मा
गर्मियों में पुरुषों के लिए चश्मा सबसे पसंदीदा एक्सेसरीज़ है। यह क्लासी लुक के साथ-साथ आपको धूप की अल्ट्रावॉयलट किरणों से भी आराम देता है। गर्मी में स्टाइलिश लगने के लिए ब्लैक,ब्राउन और सी-ब्लू कलर के ग्लासेस वाले चश्मों को ही चुनना चाहिए। इसके अलावा मेटल की जगह फाइबर कोटेड़ फ्रेम का उपयोग करना सही रहेगा।


घड़ी
हाथ घड़ी जो समय बताने के साथ आपके स्टाइलिश लुक को पूरा करता है, गर्मियों में स्टाइलिश लुक पाने के लिए ब्लू,यलो,ब्राउन डायल के साथ कॉटन या लेदर बेल्ट वाली घड़ी पहन सकते हैं।
स्टाइलिश और आरामदायक हो फुटवियर
गर्मी में पसीना आना लाज़मी है और पूरी तरह स्टाइलिश लगने के लिए ड्रेस के अनुसार ही फुटवियर होना चाहिए। इसलिए जिनके पैरों में पसीना आता है, वे घर में सैंडल, स्लीपर उपयोग कर सकते हैं। साथ ही कॉलेज, ऑफिस जाने वाले लोग टाइटलेस शूज़, बूट की जगह कॉटन मेड लोफर का उपयोग कर अपना स्टाइलिश लुक बनाए रख सकते हैं।

चुनाव की गर्मी में नेत्रियों का सहारा कॉटन साड़ियाँ

चुनावी जंग अपनी जगह है, हर एक दल की महिला नेत्रियाँ जमकर पसीना बहा रही हैं, उनके विचार अलग -अलग हैं मगर एक बात पर सब साथ हैं, वह है साड़ियों से उनका प्यार। इस पर तपती गर्मियों में पसीना बहाते समय सबकी पसन्द साड़ी और उसमें भी कॉटन, खादी जैसी हैंडलूम साड़ियाँ हैं, चलिए इनके साड़ी वाले अन्दाज पर डालते हैं एक नजर –
प्रियंका गांधी


कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी का बहुरंगी कॉटन साड़ियों वाला लुक काफी अच्छा लग रहा है। आँखों को ठंडक देने वाले रंग उनको पसन्द हैं और उनकी शख्सियत पर जँचती भी हैं। उनकी हैंडलूम साड़ियों में गहरे रंग के बॉर्डर देखे जा सकते हैं। प्रियंका गाँधी को अक्सर कॉटन या जूट कॉटन की साड़ी में देखा जाता है। प्रियंका का नो मेकअप लुक उनको और शानदार बनाता है, वह अपनी दादी इन्दिरा गाँधी का स्टाइल ज्यादा पसन्द भी करती हैं और कई बार तो उनकी तरह दिखती भी हैं।

सुप्रिया सुले


एनसीपी नेता और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले भी इन राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में लगी हुई हैं। सुप्रिया भी चुनावों में कड़ी मेहनत कर रही हैं और हमेशा ही रंगीन कॉटन-सिल्क साड़ियों में नजर आती हैं। आमतौर पर सुप्रिया महाराष्ट्रियन साड़ी पहनना पसंद करती हैं।
स्मृति ईरानी


केन्द्रीय मंत्री व अमेठी से प्रत्याशी  स्मृति ईरानी का साड़ी लुक छाया रहता है। गर्मी के मौसम में चटकीले रंगों से लेकर गहरे रंग की कॉटन साड़ी में नजर आने वाली स्मृति का साड़ी पहनने का अंदाज थोड़ा जुदा है। स्मृति साड़ी को काफी कैजुअल तरीके से कैरी करती हैं। इस समय भी चुनाव प्रचार के दौरान कई मौकों पर स्मृति प्रिंटेड कॉटन साड़ी में नजर आईं मगर स्मृति हर तरह की साड़ी पहनती हैं। वे हैंडलूम और मूंगा साड़ी और पटोला साड़ी पहनना पसंद करती हैं। उन्होंने हैंडलूम की साड़ियों को काफी ट्रेंडी बना दिया है। महिलाएं उनका स्टाइल फॉलो करती हैं।
निर्मला सीतारमण


अपनी सादगी के लिए मशहूर रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण साड़ी में बेहद गरिमामयी लगती हैं। उनका लुक भले ही सादा हो मगर फीका बिल्कुल नहीं है। गर्मी में उनकी कॉटन, लिनन, पटोला फैब्रिक्स की साड़ियां खूब पसंद की जाती हैं।

डिंपल यादव


समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव का साड़ी लुक काफी मशहूर है। डिम्पल साड़ी को बड़ी सादगी और खूबसूरती से पहनती हैं। चटकीले हों या कोई और रंग, उन पर हर तरह की साड़ियाँ अच्छी लगती हैं। डिंपल को कॉटन साड़ियों से खासा प्रेम है। साथ ही उन्हें अक्सर प्रिंटेड, प्लेन, लिनन साड़ियों में देखा जाता है।
हेमा मालिनी


भाजपा से मथुरा में चुनावी मैदान पर उतरी ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी अक्सर डिजाइनर साड़ियों में नजर आती हैं। उम्र के लिहाज से हेमा का स्टाइल और अंदाज और भी निखरता जा रहा है। उनके अक्सर चटकीले रंग की साड़ियों में देखा जाता है। वे हैंडलूम साड़ियाँ भी काफी पसन्द करती हैं।
ममता बनर्जी


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तो पहचान ही सफेद कॉटन साड़ी। ममता, हमेशा ही एक पतले रंगीन बॉर्डर वाली सफेद कॉटन साड़ी पहने नजर आती हैं। उनको आमतौर पर धनियाखाली साड़ी में देखा जा सकता है जो हुगली में बनती हैं। दीदी को देखकर यह तो सीखा ही जा सकता है कि सफेद रंग भी शानदार तरीके से स्टाइलिश बनाया जा सकता है।

हिन्दी व्यंग्य और बाल साहित्य के जानेमाने लेखक डॉ. शेरजंग गर्ग का निधन

नयी दिल्ली :  हिन्दी व्यंग्य व बाल साहित्य में अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. शेरजंग गर्ग नहीं रहे। 29 मई 1936 को देहरादून में जन्मे डॉ. शेरजंग हिन्दी के जानेमाने साहित्यकारों में एक थे। उनके निधन से साहित्य जगत, खासकर व्यंग्य और बाल साहित्य से जुड़े साहित्यकारों में गहरा शोक है। पिछले वर्ष ही 9 मई को ‘व्यंग्य यात्रा’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्हें प्रथम रवींद्रनाथ त्यागी स्मृति शीर्ष सम्मान से सम्मानित किया गया था। ऐसे में कई साहित्यकारों, पत्रकारों ने डॉ. शेरजंग गर्ग के निधन पर गहरा दुख जताया है। लोगों में वरिष्ठ साहित्यका ममता कालिया, डॉ दिविक रमेश, आलोक मेहता, स्मिता, धीरेंद्र अस्थाना, विनोद अग्निहोत्री, ममता किरण और लालित्य ललित आदि शामिल हैं।
डॉ. शेरजंग गर्ग अपनी गजलों में व्यंग्य की प्रहारक शक्ति के प्रयोग के लिए भी प्रसिद्ध थे। सरल भाषा में इनके गजल कहने का अंदाज बहुत चर्चित रहा। डॉ. शेरजंग गर्ग ने गद्य और पद्य दोनों में समाज सापेक्ष और मानवीय मूल्यों पर आधारित रचनाएं लिखीं। ‘चंद ताजा गुलाब मेरे नाम’ काव्य संकलन उनकी काव्य प्रतिभा का और ‘बाजार से गुजरा हूं’ उनकी गद्य व्यंग्य प्रतिभा का सजग उदाहरण है। बाल-साहित्य भी उनके योगदान को कभी विस्मृत नहीं कर सकता। ऐसे दौर में जब हिंदी साहित्य में शिशु गीत न के बराबर थे, डॉ. गर्ग ने उनकी शुरूआत की। बाल-साहित्य के प्रति उनके योगदान को देखते हुए हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा उन्हें साहित्यकार सम्मान व श्रेष्ठ बालसाहित्य के लिए दो बार पुरस्कृत किया गया था। वह काका हाथरसी हास्यरत्न सम्मान से भी अलंकृत हुए थे। उन्होंने कई पुस्तकों का संपादन भी किया, जिनमें लोकप्रिय गीतकार दुष्यंतकुमार, गोपालदास नीरज, वीरेंद्र मिश्र, गिरिजाकुमार माथुर, बालस्वरूप राही के संकलनों, हिंदी गजल शतक, बीरबल ही बीरबल शामिल है।

कानून को पलट यूएई ने हिन्दू पिता और मुस्लिम मां की बेटी को दिया जन्म प्रमाणपत्र

दुबई :  संयुक्त अरब अमीरात सरकार ने प्रवासियों के लिए शादी के नियमों से इतर भारत के एक हिन्दू व्यक्ति और मुस्लिम महिला की बेटी को जन्म प्रमाणपत्र दे दिया। मीडिया में आई खबर के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में प्रवासियों के लिए शादी के नियम के अनुसार, मुस्लिम पुरुष तो किसी गैर मुस्लिम महिला से शादी कर सकता है लेकिन मुसलमान महिला किसी गैर मुस्लिम व्यक्ति से विवाह नहीं कर सकती। खलीज टाइम्स की खबर के अनुसार शारजाह में रहने वाले किरण बाबू और सनम साबू सिद्दीकी ने 2016 में केरल में शादी की थी। उन्हें तब परेशानी का सामना करना पड़ा जब जुलाई 2018 में उनके यहां बेटी का जन्म हुआ। बाबू ने कहा, ‘मेरे पास अबु धाबी का वीजा है। मेरा वहां बीमा हो रखा है। मैंने अपनी पत्नी को अमीरात के मेदीवर 24X7 अस्पताल में भर्ती कराया। बेटी के जन्म के बाद, मेरे हिन्दू होने की वजह से जन्म प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया गया।’
उन्होंने कहा, ‘इसके बाद मैंने अदालत के जरिए अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। इसके लिए चार महीने तक सुनवाई चली, मगर मेरे मामले को खारिज कर दिया गया।’ बाबू ने कहा कि उनकी बेटी के पास कोई कानूनी दस्तावेज नहीं था तो उनकी सारी उम्मीदें माफी मिलने पर टिक गईं। यूएई ने 2019 को ‘सहिष्णुता’ वर्ष के तौर पर घोषित किया है। इसके तहत यूएई सहिष्णु राष्ट्र की मिसाल पेश करेगा और अलग-अलग संस्कृतियों के बीच संवाद की कमी को पूरा करेगा तथा ऐसा माहौल बनाएगा जहां लोग एक-दूसरे को अपनाएं।
बाबू ने कहा कि वे दिन काफी तनावपूर्ण थे और माफी ही एक उम्मीद थी। भारतीय दूतावास ने मदद की। उन्होंने बताया कि न्यायिक विभाग ने उनके मामले को एक अपवाद बनाया। बाबू फिर से अदालत गए और इस बार उनके मामले को मंजूरी मिल गई। दंपति को 14 अप्रैल को उनकी बेटी के जन्म का प्रमाणपत्र मिल गया

मस्जिद ने खोले महिलाओं के लिए अपने दरवाजे, रमजान में होंगे खास इंतजाम

पटना : पहली बार पटना में रहने वाली महिलाएं तरावीह की दुआ में हिस्सा ले सकेंगी। यह एक विशेष प्रकार की प्रार्थना होती है जो रमजान के पवित्र महीने में मस्जिद के अंदर की जाती है। पटना शहर के मितान घाट में स्थित खानक्वाह मुनीमिया और मस्जिद जिसे कि सूफी सेंटर के लिए जाना जाता है उसने फैसला लिया है कि महिलाओं को मस्जिद के अंदर दुआ करने दी जाए और इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है।
छह मई में रमजान शुरू हो रहे हैं। मितान घाट मस्जिद में महिला नमाजियों के लिए न केवल प्रार्थना के लिए विशिष्ट स्थान होगा बल्कि वह वहां कुरान पढ़ सकेंगी। इसके अलावा उन्हें एक हाफिज भी मुहैया करवाया जाएगा जो कुरान के विशेषज्ञ होते हैं। मस्जिद अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं को वजू के लिए विशेष स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा। वजू औपचारिक प्रार्थना से पहले एक तरह का कर्मकांड शुद्धिकरण होता है जिसे इस्लाम में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मस्जिद बिहार की राजधानी में स्थित मस्जिदों से कई मायनों में अलग है। इसमें सूफी संतों और विद्वानों की कब्रें शामिल हैं। जिसमें मुल्ला मितान और हजरत मखदूम मुनेम पाक शामिल हैं। खानक्वाह सूफीवाद की पांडुलिपियों और पुस्तकों के अपने विशाल संग्रह के लिए दुनिया भर में लोकप्रिय है। जिसकी वजह से विभिन्न धर्मों और आस्था के लोगों की एक बड़ी संख्या यहां आती है। मस्जिद में भी बड़ी संख्या में गैर-मुस्लिम भक्त आते हैं।
खानक्वाह के प्रशासनिक प्रमुख हजरत सैयद शाह शमिमुद्दीन अहमद मुनेमी सज्जाद नशीन ने कहा, ‘आने वाले महीनों में यह खानक्वाह सूफीवाद पर एक विश्वविद्यालय में बदल जाएगा। हमारी योजना है कि समुदायों के बीच सद्भाव को बढ़ावा दिया जाए और सूफी अध्ययन केंद्र के जरिए इस देश की साझा संस्कृति को उजागर करें। ठीक इसी समय हम अपने समुदाय की महिलाओं की इच्छा और आकांक्षाओं से भी परिचित हैं और चाहते हैं कि उन्हें महसूस हो कि इस्लाम उनके लिए क्या है।’ मुनेमी ने कहा कि सदस्यों के साथ कुछ विचार-विमर्श और चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया कि महिलाओं के लिए तरावीह की दुआ के लिए मस्जिद में विशेष इंतजाम किए जाएं। उन्होंने कहा, ‘हम इस सुविधा को मस्जिद की पहली मंजिल पर करने की योजना बना रहे हैं। जबकि भूतल पुरुषों को समर्पित किया जाएगा।

पुरुष वनडे में अंपायरिंग करने वाली पहली महिला बनीं ऑस्ट्रेलिया की क्लेयर

दुबई : ऑस्ट्रेलिया की क्लेयर पोलोसेक पुरुष वनडे इंटरनेशनल मैच में अंपायरिंग करने वाली पहली महिला बन गई हैं। 31 साल की क्लेयर ने आईसीसी वर्ल्ड क्रिकेट लीग डिविजन 2 के फाइनल मैच में यह उपलब्धि हासिल की। यह मैच शनिवार को नामीबिया और ओमान के बीच खेला जा रहा है। क्लेयर इससे पहले महिलाओं के 15 वनडे मैच में अंपायरिंग कर चुकी हैं। 2016 में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका की महिला टीम के बीच हुए वनडे मैच में उन्होंने पहली बार अंपायरिंग की थी। उन्होंने पिछले साल वुमन्स टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भी अंपायरिंग की थी। वह मैच इंग्लैंड और भारत के बीच खेला गया था।
वे इसके अलावा 2017 में वुमन्स वनडे वर्ल्ड कप के 4 मुकाबलों में भी अंपायरिंग की जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। क्लेयर 2017 में ऑस्ट्रेलिया में पुरुषों के किसी क्रिकेट मैच में अंपायरिंग करने वाली पहली महिला अंपायर बनी थीं। तब उन्होंने पुरुषों के लिस्ट ए के मैच में अंपायरिंग की थी। पिछले साल दिसंबर में क्लेयर और साउथ ऑस्ट्रेलिया की एलोइस शेरीडेन ने महिला बिग बैश लीग में अंपायरिंग की थी। यह पहला मौका था जब ऑस्ट्रेलिया में प्रोफेशनल क्रिकेट में पहली बार मैच में दोनों फील्ड अंपायर महिलाएं थीं।
महिला अंपायरों को बढ़ावा देना जरूरी : क्लेयर
पुरुष वनडे की अंपायर बनने पर क्लेयर ने कहा, ‘पुरुष वनडे में अंपायरिंग करने वाली पहली महिला बनकर मैं रोमांचित हूं। मैंने अंपायर के तौर पर कितना लंबा सफर तय कर लिया है। वास्तव में महिला अंपायरों को बढ़ावा देना बहुत अहम है। कोई कारण नहीं है कि महिलाएं क्रिकेट में अंपायर नहीं हो सकती हैं। यह बाधाएं तोड़ने, जागरुकता फैलाने वाला है, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इस भूमिका में आ सकें।’
क्लेयर महिलाओं की रोल मॉडल : आईसीसी मैनेजर
इससे पहले आईसीसी के सीनियर मैनेजर (अंपायर्स और रेफरी) एड्रियान ग्रिफिथ ने कहा, ‘यह ऑस्ट्रेलियाई उन महिलाओं के लिए रोल मॉडल हैं, जो ऑफिशियल बनना चाहती हैं और यह साबित करती हैं कि एक बार वे सही रास्ते पर चलकर सफल हो सकती हैं और अवसर पा सकती हैं।’

पांच साल से छोटे बच्चों को स्क्रिन पर बिताने चाहिए केवल 60 मिनट: डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, एक वर्ष से कम उम्र के शिशुओं को इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन से बिल्कुल भी परिचित नहीं होना चाहिए और पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्क्रीन देखने का समय एक दिन में एक घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए। इन दिशानिर्देशों को वैश्विक मोटापे के संकट से निपटने के लिए एक अभियान के तहत जारी किया गया है, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया कि छोटे बच्चे फिट रहें और उनका विकास अच्छी तरह से हो, खासकर जीवन के पहले पांच वर्षों में, जिस दौरान बच्चों के विकास का आजीवन उसके स्वास्थ्य पर प्रभाव रहता है। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने पहली बार पांच साल से छोटे बच्चों के लिए विशेष रूप से दिशानिर्देश तैयार किए हैं, जिसमें कहा गया कि दुनिया भर में लगभग 4 करोड़ बच्चों का वजन सामान्य से अधिक है, जो कुल का लगभग छह प्रतिशत हैं। उनमें से आधे अफ्रीका और एशिया के हैं।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन देखने में बहुत कम समय बिताना चाहिए, या प्रैम और सीट पर एक ही जगह नहीं बैठे रहना चाहिए। स्वस्थ रहने के लिए पूरी नींद लेनी चाहिए और सक्रिय खेलकूद पर अधिक समय देना चाहिए। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रियेसस ने कहा, ‘सभी लोगों के स्वस्थ रहने का मतलब लोगों के जीवन की शुरुआत से स्वास्थ्य का ध्यान रखना है।’ घेब्रियेसस ने कहा, ‘बचपन के प्रारंभिक दौर में बच्चों का विकास तेजी से होता है और यह ऐसा समय है जब स्वस्थ रहने के लिए परिवार की जीवन शैली को उसके अनुकूल ढाला जा सकता है।’

भारतीय मूल की गायिका ने 6 धुनों पर गाई हनुमान चालीसा

भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी गायिका वंदना नारन के छह अलग-अलग धुनों पर हनुमान चालीसा गाकर उसकी सीडी लांच करने के बाद बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई है। जोहान्सबर्ग के दक्षिण स्थित इंडियन टाउनशिप लेनासिया में आयोजित वार्षिक संयुक्त हनुमान चालीसा कार्यक्रम में नारन ने कुछ पर प्रस्तुतियां भी दीं।
कार्यक्रम में देश भर के भजन समूहों ने 20-20 मिनट के सत्र में 12 घंटे तक बिना रुके प्रार्थना का जाप किया। नारन ने कहा, ‘हमने इस सीडी में हनुमान चालीसा की विभिन्न धुनों को एक साथ रखने का फैसला किया ताकि यह हर आयु वर्गों के लोगों को आकर्षित कर सके।’ उन्होंने कहा, ‘पारम्परिक धुन बुजुर्गों को अधिक आकर्षित करेंगी, युवाओं के लिए इसमें अधिक आधुनिक संगीत है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संगीत का उपयोग शामिल है।’ नारन के मुताबिक, ‘इनके बोल वही हैं लेकिन प्रस्तुतियां अलग-अलग धुनों पर हैं।’ नारन के पूरे परिवार ने नेल्सन मंडेला की 150वीं पुण्यतिथि पर गतवर्ष आयोजित कार्यक्रम में भी प्रस्तुति दी थी।
वंदना नारन ने कई स्थानीय स्पर्धाएं जीती हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियां भी दी हैं। उन्होंने अमेरिका में बचपन से अपनी बहन जागृति के साथ शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षण लिया, जहां उनके पिता जगदीश ने चार साल के लिए काम किया था। दक्षिण अफ्रीका आने के बाद उनकी संगीत में रुचि और बढ़ गई। यहां आने के बाद नारन ने गायन पर ध्यान लगाया और जागृति ने संगीत रचना पर। उनका पूरा परिवार संगीत में रुचि रखता है।

पैरों से लिखी परीक्षा और प्रथम श्रेणी से पास हुए तुषार

लखनऊ :  लखनऊ के अमौसी स्थित अवध विहार कॉलोनी के राजेश विश्वकर्मा के बेटे तुषार ने परीक्षा में बड़ी सफलता पायी। सरोजिनीनगर के क्रिएटिव कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने वाला तुषार दोनों हाथों से दिव्यांग हैं। जिसके कारण उसे लिखने में दिक्कत होती थी। मगर लगन के पक्के तुषार ने पढ़ाई नहीं छोड़ी। कठिन परिश्रम व अभ्यास के जरिए पैरों से हाथ का भी काम लेना शुरू कर दिया। इसका नतीजा शनिवार को आया, जब पता चला कि तुषार ने 67 प्रतिशत से 10वीं की बोर्ड परीक्षा पास कर ली है। तुषार ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से उन लोगों के लिए मिसाल पेश की है जो छोटी-छोटी मुश्किलें आने पर ही जीवन से हार जाते हैं। पिता राजेश विश्वकर्मा बताते हैं कि तुषार ने यह सिद्ध कर दिया कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। तीन भाई बहनो में तुषार सबसे छोटा है। बाकी दोनों बच्चे सामान्य हैं पर तुषार को जन्म से शारीरिक दिक्कत है। अपने भाई-बहन को स्कूल जाता देख वह भी साथ जाने की जिद करता। पहले उसे घर पर ही पढ़ाने की कोशिश हुई लेकिन उसकी जिद स्कूल जाने की थी, सो परिवार को मानना पड़ा। पहले काफी परेशानी हुई लेकिन फिर अपनी कोशिशों, शिक्षको के प्रोत्साहन से तुषार ने पैरों से लिखना शुरू किया और आज मिसाल बन चुका है।