Sunday, July 5, 2026
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एक साँझ कविता की कार्यक्रम की 5वीं कड़ी सम्पन्न

कोलकाता : साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था नीलांबर कोलकाता ने हाल ही में कलाकुंज सभागार में एक साँझ कविता की-5 कार्यक्रम का आयोजन किया। पिछले कुछ वर्षों के दौरान नीलांबर ने अपने आयोजनों से पूरे देश के साहित्य प्रेमियों का ध्यान खींचा है। संस्था ने आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर साहित्य को आम लोगों के बीच पहुँचाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं।
हिंदी के वरिष्ठ कवि अरुण कमल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कृष्ण कल्पित, मृत्युंजय कुमार सिंह, सुधांशु फिरदौस और उज़्मा सरवत ने कार्यक्रम में कविताएं पढ़ी। इस अवसर पर अरुण कमल ने अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए साहित्य के क्षेत्र में नीलांबर के कार्यों की प्रशंसा की। कविता पाठ के अलावा उनकी कविताओं पर विभिन्न तरह की प्रस्तुतियां की गई जिनमें कविता गीत, कविता नृत्य, कविता मोंताज और कविता कोलाज शामिल हैं। सर्वप्रथम मशहूर नृत्यांगना मौसूमी दे ने शानदार काव्य नृत्य प्रस्तुत किया। नीलांबर की टीम ने उज्मा सरवत और सुधांशु फिरदौस की कविताओं पर आधारित कोलाज की प्रस्तुति की। युवा गायिका सुनोभा साहा ने मृत्यंजय कुमार सिंह के गीत पथिक हूँ थक गया हूँ की प्रस्तुति की। ऋतेश पांडेय के निर्देशन में कृष्ण कल्पित की कविताओं पर वीडियो मोंताज फिल्म का प्रदर्शन किया गया। नीलांबर की टीम ने अरुण कमल की कविताओं को जन-गीत के रूप में प्रस्तुत किया।विभिन्न प्रस्तुतियों में हिस्सा लेने वाले कलाकारों में शामिल थे ऋतेश पांडेय, कल्पना झा, स्मिता गोयल, ममता पांडेय, प्रतिमा सिंह, दीपक ठाकुर, विशाल पांडेय, निधि पांडेय।
इस मौके पर अतिथि के रूप में मौजूद थे वरिष्ठ आलोचक और वागर्थ पत्रिका के संपादक डॉ. शंभुनाथ, डॉ चंद्रकला पांडेय,अलका सरावगी, उमा झुनझुनवाला, डॉ आशुतोष और प्रियंकर पालीवाल। नीलांबर के अध्यक्ष यतीश कुमार ने स्वागत वक्तव्य दिया। उन्होंने नीलांबर संस्था और उसके आनेवाले कार्यक्रमों और योजनाओं की संक्षिप्त जानकारी देते हुए कहा कि नीलांबर साहित्य के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता और विस्तार बनाए रखेगी और हम नए सकारात्मक प्रयोग करते रहेंगे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. इतु सिंह ने किया। ममता पांडेय ने संस्था की विभिन्न समितियों का परिचय कराते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और शिक्षक उपस्थित हुए।

अलीगढ़ में बच्ची की बर्बर हत्या के खिलाफ वीरांगनाओं का कैंडल मार्च

कोलकाता : उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में रुपये के लेनदेन को लेकर ढाई साल की मासूम टि्वंकल की बर्बरता पूर्वक हत्या के प्रतिवाद में अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउंडेशन, पश्चिम बंगाल की ओर से महानगर के काशीपुर में कैंडल मार्च निकाला गया। संगठन की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने मामले की त्वरित व निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषियों को ऐसा सज़ा मिले जिससे बच्चों के जीवन से खेलने वालों को सबक मिले। आज देश में ऐसा माहौल बन गया है जिससे स्त्री कहीं भी महफूज नहीं है। स्त्रियों को खिलाफ अपराध करने वाले मनोरोगियों को किसी भी शर्त पर जमानत न मिले। बच्ची के हत्या के मामले में पकड़े गये अभियुक्तों में से एक ऐसा भी है जिस पर बच्चियों पर जुल्म ढाने का केस चल रहा है। वह कैसे समाज में घूम कर जघन्य अपराधों को अंजाम दे रहा था। कार्यक्रम में प्रतिमा सिंह, रीता सिंह, मीनू सिंह, इंदु सिंह काशीपुर, संचिता सिंह, गिरिजा दारोगा सिंह, गिरिजा दुर्गादत्त सिंह, ललिता सिंह काशीपुर, ललिता सिंह सोदपुर, अर्पिता सिंह, मीना सिंह, आशा सिंह, सुमन सिंह, रीता सिंह, सुनीता सिंह, रश्मि सिंह, राजेश्वरी सिंह, ललिता सिंह काशीपुर सहित अन्य कई वीरांगनाओं ने भाग लिया और टि्वंकल के प्रति किये गये अपराधों के लिए न्याय की मांग की तथा टि्वंकल की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

अयोध्या से जुड़ी है स्वर्ग से पृथ्वी पर गंगा अवतरण की घटना

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को स्वर्ग में हबने वाली गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, इस कारण से इस तिथि को गंगा दशहरा के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष गंगा दशहरा 12 जून दिन बुधवार को मनाया जा रहा है। गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर आने की घटना मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम की अयोध्या नगरी से जुड़ी है।
गंगा अवतरण की पौराणिक कथा
सूर्यवंशी श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था। उनके पूर्वजों में एक चक्रवर्ती सम्राट थे महाराजा सगर। उनकी दो रानियों में से केशनी से एक पुत्र असमंजस था तो दूसरी रानी सुमति से 60 हजार पुत्र थे। असमंजस का पुत्र अंशुमान था। महाराजा सगर के सभी पुत्र दुष्ट थे, उनसे दुखी होकर राजा सगर ने असमंजस को राज्य से निकाल दिया। उनका पौत्र अंशुमान दयालु, धार्मिक, उदार और दूसरों का सम्मान करने वाला था। राजा सगर ने अंशुमान को ही अपना उत्तराधिकारी बना दिया।
ऐसे भस्म हो गए राजा सगर के 60 हजार पुत्र
इस बीच राजा सगर ने अपने राज्य में अश्वमेधयज्ञ का आयोजन किया, जिसके तहत उन्होंने अपने यज्ञ का घोड़ा छोड़ा था, जिसे देवताओं के राजा इंद्र ने चुराकर पाताल में कपिलमुनि के आश्रम में बांध दिया। इधर राजा सगर के 60 हजार पुत्र उस घोड़े की खोज कर रहे थे, लाख प्रयास के बाद भी उन्हें यज्ञ का घोड़ा नहीं मिला। पृथ्वी पर घोड़ा न मिलने की दशा में उन लोगों ने एक जगह से पृथ्वी को खोदना शुरू किया और पाताल लोक पहुंच गए।


घोड़े की खोज में वे सभी कपिल मुनि के आश्रम में पहुंच गए, जहां घोड़ा बंधा था। घोड़े को मुनि के आश्रम में बंधा देखकर राजा सगर के 60 हजार पुत्र गुस्से और घमंड में आकर कपिल मुनि पर प्रहार के लिए दौड़ पड़े। तभी कपिल मुनि ने अपनी आंखें खोलीं और उनके तेज से राजा सगर के सभी 60 हजार पुत्र वहीं जलकर भस्म हो गए। अंशुमान को इस घटना की जानकारी गरुड से हुई तो वे मुनि के आश्रम गए और उनको सहृदयता से प्रभावित किया। तब मुनि ने अंशुमान को घोड़ा ले जाने की अनुमति दी और 60 हजार भाइयों के मोक्ष के लिए गंगा जल से उनकी राख को स्पर्श कराने का सुझाव दिया।
गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए भगीरथ की तपस्या
पहले राजा सगर, फिर अंशुमान, राजा अंशुमान के पुत्र दिलीप इन सभी को गंगा को प्रसन्न करने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए। तब राजा दिलीप के पुत्र भगीरथ ने अपनी तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर गंगा को पृथ्वी पर भेजने का वरदान मांगा। ब्रह्मा जी ने कहा कि गंगा के वेग को केवल भगवान शिव ही संभाल सकते हैं, तुम्हें उनको प्रसन्न करना होगा। तब भगीरथ ने भगवान शिव को कठोर तपस्या से प्रसन्न कर अपनी इच्छा व्यक्त की। तब भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के कमंडल से निकली गंगा को अपनी जटाओं में रोक लिया और फिर उनको पृथ्वी पर छोड़ा। इस प्रकार गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ और महाराजा सगर के 60 हजार पुत्रों को मोक्ष की प्राप्ति हुई। भगीरथ की तपस्या से अवतरित होने के कारण गंगा को ‘भागीरथी’ भी कहा जाता है।
(साभार – दैनिक जागरण)

79 साल के वरिष्ठ कॉमेडियन दिन्यार कॉन्ट्रेक्टर का निधन

मुम्बई : वरिष्ठ फिल्म और थिएटर अभिनेता दिन्यार कॉन्ट्रेक्टर नहीं रहे। वह 79 वर्ष के थे। परिवार के अनुसार वे लम्बे समय से बीमार चल रहे थे। दिन्यार का अंतिम संस्कार बुधवार को ही वरली मुंबई में शाम 3.30 बजे किया जाएगा। दिन्यार को 2019 में ही भारत सरकार द्वारा पद्मश्री अवॉर्ड दिया गया था। अपने नाम की घोषणा होने के बाद दिन्यार ने एक इंटरव्यू में बताया था- मुझे इस बात का भरोसा ही नहीं हो रहा था। मुझे लगा कोई बेवकूफ बना रहा है। लेकिन जब ढेर सारे फोन कॉल्स आए तब पता चला कि मुझे अवॉर्ड दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ट्विटर पर दिन्यार के साथ वाली एक फोटो शेयर करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा- पद्म श्री दिन्यार कॉन्ट्रेक्टर विशेष थे क्योंकि उन्होंने बहुत सारी खुशियां फैलाईं। उनके बहुमुखी अभिनय ने कई चेहरों पर मुस्कान ला दी। चाहे वह रंगमंच हो, टेलीविजन हो या फिल्में, उन्होंने सभी माध्यमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनके निधन से दुखी हूँ।
1966 से कॅरियर की शुरुआत करने वाले दिन्यार को खास तौर पर बाजीगर, 36 चाइना टाउन, खिलाड़ी, बादशाह जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। उन्होंने कई टीवी शो में भी काम किया था। दिन्यार ने अपना कॅरियर थिएटर आर्टिस्ट के तौर पर शुरू किया था। वे हिन्दी और गुजराती नाटकों में ज्यादा काम करते थे।

किराए की कोख लेने और देने वाली दोनों महिला कर्मचारियों को मिलेगा मातृत्व अवकाश

चंडीगढ़ :   हरियाणा सरकार ने कमीशनिंग और सरोगेट मदर दोनों को ही मातृत्व अवकाश देने का निर्णय लिया है। सरकार के फैसले के अनुसार अब कमीशनिंग मदर अर्थात वह महिला कर्मचारी जो गर्भधारण करने के लिए किसी अन्य महिला की सेवाएं लेती है और सरोगेट मदर अर्थात वह महिला कर्मचारी जो ऐसा करने के लिए अपनी कोख किराए पर देती है, दोनों को ही गर्भवती महिला कर्मचारियों के लिए लागू नियमों और शर्तों के आधार पर ही मातृत्व अवकाश मिलेगा।
वित्त विभाग ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, हरियाणा सरकार के सभी बोर्ड, निगमों, विश्वविद्यालयों के प्रमुखों, सभी मंडलायुक्तों, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय चंडीगढ़ के रजिस्ट्रार और सभी डीसी, एसडीएम को पत्र भेजकर कहा है कि यह निर्णय दिल्ली उच्च न्यायालय के कमीशनिंग मदर को मातृत्व अवकाश देने के संबंध में सुनाए गए फैसले के मद्देनजर लिया गया है।
केंद्र सरकार ने इसे नीतिगत निर्णय मानते हुए सभी राज्य सरकारों को आदेश अमल में लाने के निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश में जहां कमीशनिंग मदर और सरोगेट मदर दोनों कर्मचारी हैं और मातृत्व अवकाश के लिए पात्र हैं (इस आधार पर कि वह एक कमीशनिंग मदर है और दूसरी इस आधार पर कि वह गर्भवती महिला है), सक्षम प्राधिकारी एक ही समय या अन्यथा मातृत्व अवकाश देने के संबंध में उचित फैसला लेंगे। विभागाध्यक्षों को मातृत्व अवकाश देने के लिए सक्षम प्राधिकारी की शक्तियां प्राप्त हैं।

युवराज ने अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा, कहा अब आगे बढ़ने का समय

मुम्बई : कैंसर पर विजय हासिल करने के आठ साल बाद भावुक युवराज सिंह ने सोमवार को उतार चढ़ाव से भरे अपने करियर को अलविदा कहने की घोषणा की जिसमें उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि भारत की 2011 की विश्व कप जीत में अहम योगदान रहा। प्रतिभा के धनी इस करिश्माई खिलाड़ी को सीमित ओवरों की क्रिकेट का दिग्गज माना जाता रहा है लेकिन उन्होंने इस टीस के साथ संन्यास लिया कि वह टेस्ट मैचों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाये।
बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने हालांकि संन्यास लेने से पहले कई बार परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ने के प्रयास किये। इस 37 वर्षीय क्रिकेटर ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मैंने 25 साल 22 गज की पिच के आसपास बिताने और लगभग 17 साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के बाद आगे बढ़ने का फैसला किया है। क्रिकेट ने मुझे सब कुछ दिया और यही वजह है कि मैं आज यहां पर हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं बहुत भाग्यशाली रहा कि मैंने भारत की तरफ से 400 मैच खेले। जब मैंने खेलना शुरू किया था तब मैं इस बारे में सोच भी नहीं सकता था। ’’
इस आक्रामक बल्लेबाज ने कहा कि वह अब ‘जीवन का लुत्फ’ उठाना चाहता है और बीसीसीआई से स्वीकृति मिलने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न टी20 लीग में फ्रीलांस खिलाड़ी के रूप में खेलना चाहता है। लेकिन अब वह इंडियन प्रीमियर लीग में नहीं खेलेंगे। युवराज ने भारत की तरफ से 40 टेस्ट, 304 वनडे और 58 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। उन्होंने टेस्ट मैचों में 1900 और वनडे में 8701 रन बनाये। उन्हें वनडे में सबसे अधिक सफलता मिली। टी20 अंतरराष्ट्रीय में उनके नाम पर 1177 रन दर्ज हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह इस खेल के साथ एक तरह से प्रेम और नफरत जैसा रिश्ता रहा। मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता कि वास्तव में यह मेरे लिये कितना मायने रखता है। इस खेल ने मुझे लड़ना सिखाया। मैंने जितनी सफलताएं अर्जित की उससे अधिक बार मुझे नाकामी मिली पर मैंने कभी हार नहीं मानी।’’ बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने अपने करियर के तीन महत्वपूर्ण क्षणों में विश्व कप 2011 की जीत और मैन आफ द सीरीज बनना, टी20 विश्व कप 2007 में इंग्लैंड के खिलाफ एक ओवर में छह छक्के जड़ना और पाकिस्तान के खिलाफ लाहौर में 2004 में पहले टेस्ट शतक को शामिल किया।
विश्व कप 2011 के बाद कैंसर से जूझना उनके लिये सबसे बड़ी लड़ाई थी। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस बीमारी से हार मानने वाला नहीं था। ’इसके बाद हालांकि उनकी फार्म अच्छी नहीं रही। उन्होंने भारत की तरफ से आखिरी मैच जून 2017 में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे के रूप में खेला था। उन्होंने अपना अंतिम टेस्ट मैच 2012 में खेला था।
इस साल आईपीएल में वह मुंबई इंडियन्स की तरफ से खेले लेकिन उन्हें अधिक मौके नहीं मिले। दक्षिण अफ्रीका में 2007 में खेले गये विश्व कप में उनकी उपलब्धि का कोई सानी नहीं है। उन्होंने किंग्समीड में स्टुअर्ट ब्राड के एक ओवर में छह छक्के लगाये थे जिसे क्रिकेट प्रेमी कभी भूल नहीं पाएंगे। इंग्लैंड के खिलाफ इस प्रदर्शन के दौरान उन्होंने केवल 12 गेंदों पर अर्धशतक पूरा किया जो कि एक रिकार्ड है।
युवराज वनडे में मध्यक्रम के मुख्य बल्लेबाज बन गये थे और इस बीच उन्होंने अपनी गेंदबाजी से भी प्रभावित किया। उन्होंने विश्व कप 2011 में अपनी आलराउंड क्षमता का शानदार नमूना पेश किया तथा 300 से अधिक रन बनाने के अलावा 15 विकेट भी लिये। इस दौरान उन्हें चार मैचों में मैन आफ द मैच और बाद में मैन आफ द टूर्नामेंट चुना गया। युवराज ने कहा, ‘‘विश्व कप 2011 को जीतना, मैन आफ द सीरीज बनना, चार मैन आफ द मैच हासिल करना सब सपने जैसा था जिसके बाद कैंसर से पीड़ित होने के कारण मुझे कड़वी वास्तविकता से रू ब रू होना पड़ा। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह सब तेजी से घटित हुआ और तब हुआ जब मैं अपने करियर के चरम पर था। मैं अपने परिवार और दोस्तों से मिले सहयोग को शब्दों में बयां नहीं कर सकता जो मेरे लिये उस समय मजबूत स्तंभ की तरह थे। बीसीसीआई और बीसीसीआई के तत्कालीन अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने भी मेरे उपचार के दौरान सहयोग किया। ’ युवराज ने सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी को अपना पसंदीदा कप्तान बताया तथा अपने करियर में जिन गेंदबाजों को खेलने में उन्हें मुश्किल हुई उनमें श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन और आस्ट्रेलिया के ग्लेन मैकग्रा का नाम गिनाया।

प्रख्यात नाटककार-अभिनेता गिरीश कर्नाड का निधन

बेंगलुरु :  प्रख्यात नाटककार, अभिनेता, निर्देशक एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित गिरीश कर्नाड का लंबी बीमारी के बाद सोमवार को उनके आवास पर निधन हो गया। साहित्य, रंगमंच एवं सिनेमा जगत पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले कर्नाड 81 वर्ष के थे।
अपने विचारों को खुल कर प्रकट करने को लेकर निशाने पर रहे बहुआयामी व्यक्तित्व और बहुमुखी प्रतिभा के धनी कर्नाड के परिवार में पत्नी सरस्वती, बेटे रघु कर्नाड (पत्रकार एवं लेखक) और बेटी राधा हैं। रघु ने बताया कि उनके पिता फेफड़ों से संबंधित बीमारी से पीड़ित थे। रघु ने यहां संवाददाताओं को बताया, ‘‘उनका निधन आज सुबह किसी वक्त हुआ और हमें इसकी जानकारी सुबह करीब साढ़े आठ बजे हुई। जैसा कि आप सब को पता है कि वह कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उन्हें फेफड़े संबंधी बीमारी थी-जिससे अंतत: उनकी मौत हुई।’’
उन्होंने कहा, “मैं उनके सभी प्रशंसकों का शुक्रगुजार हूं और हमें उम्मीद है कि उनकी याद कर्नाटक के हर व्यक्ति के जहन में लंबे वक्त तक रहेगी। पद्मश्री एवं पद्म भूषण से सम्मानित कर्नाड मौजूदा युग के सबसे महत्त्वपूर्ण साहित्यकारों में से एक थे जिन्होंने अपनी मातृभाषा कन्नड़ में अपनी मौलिक कृतियों से भारतीय साहित्य को समृद्ध किया था। उन्होंने कई नाटक एवं फिल्में लिखीं, उनमें अभिनय किया और निर्देशन किया जिन्हें आलोचकों की खूब वाहवाही मिली। उनके नाटक ‘‘नागमंडल’’, ‘‘ययाति’’ और ‘‘तुगलक’’ ने उन्हें काफी ख्याति दिलाई जिनका कन्नड़ से अंग्रेजी एवं अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया।
कर्नाड हिंदी एवं कन्नड़ सिनेमा में एक प्रसिद्ध चेहरा थे। उन्होंने ‘‘संस्कार”, “निशांत”, “मंथन” जैसी समानांतर फिल्मों से लेकर “टाइगर जिंदा है” और “शिवाय” जैसी व्यावसायिक फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरा। कर्नाड का अंतिम संस्कार शहर के ‘कलपली विद्युत शवदाहगृह’ में दोपहर में किया गया। कर्नाड की इच्छाओं का ध्यान रखते हुए उनके परिवार ने अंतिम संस्कार के दौरान किसी भी धार्मिक परंपरा का पालन नहीं करने या राजकीय सम्मान स्वीकार नहीं करने का निर्णय किया।

कर्नाटक के मंत्रियों – डी के शिवकुमार, आर वी देशपांडे और बी जयश्री एवं सुरेश हेबलिकर समेत फिल्म एवं रंगमंच की कई हस्तियों ने श्रद्धांजलि दी। परिवार ने उन्हें श्रद्धांजलि देने की चाह रखने वाले उनके प्रशंसकों एवं पदाधिकारियों से सीधे श्मशान घाट आने को कहा था क्योंकि वह अंतिम संस्कार को निजी रखना चाहते थे।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने कर्नाड के सम्मान में सोमवार को छुट्टी घोषित करते हुए एक बयान में तीन दिवसीय राजकीय शोक की भी घोषणा की। सीएमओ ने घोषणा की कि कर्नाड को राजकीय सम्मान दिया जाएगा जो पूर्व में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वालों को दिया जाता रहा है। हालांकि, कर्नाड एवं उनके परिवार की इच्छाओं का सम्मान करते हुए राजकीय सम्मान नहीं दिया गया।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाड के निधन पर शोक प्रकट किया और कहा कि उन्हें उनके काम के लिए उन्हें आने वाले कई वर्षों तक याद किया जाएगा। कोविंद ने कहा कि कर्नाड के निधन से भारत की सांस्कृतिक दुनिया गरीब हो गई।
मोदी ने कहा कि कर्नाड को सभी माध्यमों के जरिए अपना बहुमुखी अभिनय दिखाने के लिए याद किया जाएगा।
कर्नाड के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने कहा कि हमने एक सांस्कृतिक दूत खो दिया। कर्नाड का जन्म 1938 में महाराष्ट्र में डॉ रघुनाथ कर्नाड और कृष्णबाई के घर हुआ था। बाद में उनका परिवार कर्नाटक के सिरसी एवं धारवाड़ आकर बस गए थे जहां उनका आगे का जीवन बीता और परिवार के नाट्य कला के प्रति झुकाव ने साहित्यिक जगत में उनके भविष्य की नींव रखी। महाराष्ट्र में नेताओं ने पार्टी विचारधारा से ऊपर उठते हुए कर्नाड को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट किया, “प्रख्यात अभिनेता, लेखक एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित गिरीश कर्नाड के निधन के साथ ही हमने भारतीय सिनेमा खासकर रंगमंच की एक महान हस्ती को खो दिया। वह मराठी रंगमंच से भी जुड़े हुए थे। मेरी विनम्र श्रद्धांजलि..उनके परिवार, दोस्तों एवं प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदनाएं।”
राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि कर्नाड के निधन की खबर दुखी करने वाली है। कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख अशोक चव्हाण ने कहा कि कर्नाड एक संवेदनशील कलाकार थे जो सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरुक थे। शिवसेना ने भी उन्हें श्रद्घांजलि दी। पार्टी के प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने साहित्य के क्षेत्र में एक अलग पहचान स्थापित करने के लिए कर्नाड की प्रशंसा की। वह ‘नव्या’ साहित्य अभियान का हिस्सा भी रहे। उनके नाटक ‘‘नागमंडल’’, ‘‘ययाति’’ और ‘‘तुगलक’’ ने उन्हें काफी ख्याति दिलाई। फिल्मों की बात करें तो ‘संस्कार’ एवं ‘वामशा वृक्ष’ काफी लोकप्रिय रहीं।
कर्नाड सलमान खान की ‘‘टाइगर जिंदा है’’ और अजय देवगन अभिनीत ‘‘शिवाय’’ जैसी व्यावसायिक फिल्मों में भी दिखाई दिए। उन्होंने मालगुडी डेज में स्वामी के पिता और इंद्रधनुष में अप्पू के पिता का किरदार निभाया था। उन्होंने दूरदर्शन के प्रसिद्ध विज्ञान कार्यक्रम “टर्निंग प्वाइंट” को भी प्रस्तुत किया था। राजनीतिक कथनों में निर्भीकता दर्शाने वाले और अपने विचारों से समझौता न करने वाले कर्नाड रंगमंच की उन 600 हस्तियों में शुमार थे जिन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले ‘‘भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों को सत्ता से बाहर करने की लोगों से की गई अपील वाले पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।’उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता वी एस नायपॉल के भारत के मुस्लिमों पर विवादित विचारों की आलोचना की थी। कर्नाटक सरकार के टीपू जयंती मनाने के निर्णय के बाद उत्पन्न विवाद पर कर्नाड ने कहा था कि 18वीं सदी के शासक अगर मुस्लिम की जगह हिंदू होते तो उन्हें भी छत्रपति शिवाजी की तरह सम्मान मिलता। कर्नाड की इस पर खासी आलोचना हुई थी। गौरी लंकेश हत्याकांड की जांच करने वाले विशेष जांच दल के अनुसार वह उस दक्षिणपंथी समूह के भी निशाने पर थे जिसने पत्रकार की कथित रूप से हत्या की थी।

तोक्यो ओलंपिक के बाद संन्यास लेना चाहती हैं मेरीकाम

नयी दिल्ली  : छह बार की विश्व चैम्पियन एमसी मेरीकाम ने गुरूवार को कहा कि उनकी योजना तोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद संन्यास लेने की है। भारतीय मुक्केबाजी में 18 साल के लंबे करियर के दौरान छत्तीस वर्षीय मेरीकाम ने छह विश्व चैम्पियनशिप जीती हैं और एक ओलंपिक कांस्य पदक हासिल किया है। इसके अलावा पांच एशियाई चैम्पियनशिप भी अपने नाम कर चुकी हैं। वह राज्य सभा सदस्य भी हैं। मेरीकाम ने कोलगेट द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के मौके पर कहा, ‘‘2020 के बाद मैं संन्यास लेना चाहती हूं। इसलिये मेरा मुख्य लक्ष्य भारत के लिये स्वर्ण पदक जीतना है। मैं सचमुच स्वर्ण पदक जीतना चाहती हूँ। ’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं हमेशा अपने देश को पदक दिलाने के लिये अपना सर्वश्रेष्ठ कोशिश करती  हूँ। मैं ओलंपिक क्वालीफायर और विश्व चैम्पियनशिप के लिये अपनी तैयारियां शुरू करूंगी। मैं इस बार स्वर्ण पदक जीतना चाहती हूँ। ’’
अगले साल होने वाले ओलंपिक से पहले मुक्केबाजी जगत को काफी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (एआईबीए) को तोक्यो ओलंपिक में स्पर्धओं की मेजबानी से रोक दिया है। आईओसी ने घोषणा की कि वह अगले साल जनवरी और मई के बीच में ओलंपिक क्वालीफायर के लिये नया कैलेंडर तैयार करेगा और यह शायद वजन वर्गों पर भी दोबारा विचार कर सकता है। भारतीय मुक्केबाज दुविधा में फंसे हैं लेकिन मेरीकाम को लगता है कि अगर क्वालीफायर अगले साल कराये जाते हैं तो यह उनके लिये फायदेमंद होगा।

स्वच्छ हवा चाहिए तो घर में लगाइए पौधे और रहिए स्वस्थ

भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में से एक है। प्रदूषित हवा संबंधी बीमारियों की वजह से यहां एक साल में करीब 12 लाख लोग असमय मर जाते हैं। स्टेट ग्लोबल एयर 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदूषित हवा की वजह से वैश्विक स्तर पर आयु औसतन 1 साल 8 महीने कम हो गई। हवा में प्रदूषण पार्टिकल्स की अधिकता है। ऐसे में फेफड़ों का कैंसर, शुगर, हार्ट अटैक व स्ट्रोक जैसी बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। लोग इलेक्ट्रॉनिक एयर प्यूरिफायर इस्तेमाल कर शुद्ध हवा लेने की कोशिश करते हैं लेकिन जरूरत पेड़ों की है, जो अपने आप में नैचुरल प्यूरिफायर हैं। हमारे पर्यावरण में कुछ ऐसे इनडोर पौधे भी मौजूद हैं, जो किसी एयर प्यूरिफायर से कम नहीं, खुद नासा ने इस बात को माना है –
एरेका पाम: गर्मी-सर्दी हर मौसम बर्दाश्त कर लेता है। यह बहुत तेजी से बढ़ता है। इस वजह से आक्सीजन भी ज्यादा देता है और हवा भी ज्यादा फिल्टर करता है। यह कार्बन डाईऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदलता है।
जैड-जैड प्लांटः मैदानी इलाकों के मौसम के लिए उपयुक्त पौधा है। इस पौधे की टहनी को किसी दूसरे गमले में लगा देने से उसमें पौधा तैयार हो जाता है। यह घर की हवा से टोल्यूनि व जाइलीन को खत्म करता है और आक्सीजन लेवल बढ़ता है। हवा से एयरबोर्न बैक्टीरिया भी खत्म करता है।
मनी प्लांटः यह मिट्टी और पानी दोनों जगह पैदा हो सकता है। इसकी खासियत यह है कि इसकी डंठल भी लगा दें तो यह जड़ पकड़ लेता है। यह हवा से फोर्मलडीहाइड को भी दूर करने में मदद करता है।
एग्लोनिमा प्लांटः यह कई रंग में आता है। आक्सीजन तो छोड़ता है। साथ साथ हवा से फॉर्मलडिहाइड, कॉर्बन मोनोअॉक्साइड और बेंजीन को अपने अंदर समाहित कर लेता है।
सिंगोनियम प्लांटः यह प्लांट सफेद पत्तों से लेकर लाल, पीला, ग्रीन आदि रंगों में आता है। यह डेकोरेशन के साथ-साथ एक एंटी पोल्यूटेंट का काम करता है। घर के अंदर की हवा से प्रदूषण कम करता है। यह पौधा हवा से बेंजीन, फॉर्मलडिहाइड को कम करता है। यह वायु जनित रोगाणुओं को घटा कर वातावरण में नमी बढ़ाता है।
सान्सेवीरिया प्लांटः यह पौधा हर वातावरण में रह सकता है। यह कॉर्बन मोनोऑक्साइड, बेंजीन, एक्सलीन, फॉर्मलडिहाइड, ट्राईक्लोरोइथीलीन को कम करता है।
नासा ने रिसर्च के बाद की पुष्टि
अमेरिका की नेशनल ऐरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) के शोधकर्ता बीसी वोलवर्टन ने इनडोर प्लांट पर 10 साल तक रिसर्च की। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि ये पौधे न केवल हवा की गुणवत्ता में सुधार करते हैं बल्कि जहरीले कणों को भी खत्म करते हैं। इसके अलावा हल्के स्तर के जहरीले कणों को खत्म कर हवा को साफ करते हैं।
मानसिक तनाव होता है कम: रिसर्च
2015 में कोरिया के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया शोध बताता है कि इनडोर प्लांट मानसिक तनाव कम करता है। इसके साथ-साथ वर्क प्लेस पर होने वाले तनाव को भी कम करता है। आंखों को देखने में अच्छे लगते हैं और मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में स्वास्थ्य संबंधी मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण वायु प्रदूषण है। 2017 में भारत में 12 लाख लोगों की असमय मौत वायु प्रदूषण की वजह से हुई। जबकि चीन में प्रदूषण से मरने वालों की संख्या 14 लाख था। प्रदूषण की वजह से एशिया में बच्चों की औसत उम्र 30 महीने कम हो गई है जबकि यह लेवल विश्व स्तर पर 20 महीने का है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

माता-पिता को बच्चों की पढ़ाई के लिए निकालना चाहिए अधिक समय: सर्वेक्षण

नयी दिल्ली : नए शैक्षणिक सत्र के साथ पूरे भारत में छात्र-छात्राएं अपनी नई कक्षाओं और पाठ्यक्रम सामग्री पर चर्चा कर रहे हैं। एकेडेमिक्स के संबंध में माता-पिता के सपोर्ट का महत्व समझने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन पीयर-टू-पीयर एकेडेमिक लर्निंग कम्युनिटी ब्रेनली ने हाल ही में अपने भारतीय यूजर्स के बीच एक सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण में टियर-2 और टियर-3 शहरों से 2,500 से अधिक छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी की। इससे इस विषय पर कुछ नई और महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। सर्वेक्षण में पता चलता है कि माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए सक्रियता से अपना समय और प्रयास लगाते हैं लेकिन बच्चों ने महसूस किया कि उन्हें कंसेप्ट्स बेहतर ढंग से समझाए जाने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए लगभग 50% माता-पिता अपने बच्चों के साथ हर दिन दो घंटे से अधिक समय बिताते हैं, ताकि उन्हें अध्ययन में मदद कर सके। यह महसूस किया गया कि उन्हें और अधिक समय देना चाहिए। इसके अलावा इन बच्चों में से 50% ने स्वीकार किया कि उनके माता-पिता को उनके विषयों और पाठ्यक्रमों के बारे में पर्याप्त ज्ञान व विशेषज्ञता है, लेकिन वे चाहेंगे कि उनके माता-पिता इन विषयों के बारे में और जानें ताकि वे उनकी बेहतर मदद कर सकें। सकारात्मक पहलू यह है कि आधे से अधिक बच्चों (55%) ने इस बात को लेकर अपने माता-पिता की तारीफ की कि वे उन्हें सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उन्हें कोई भी संदेह होने पर वे बेझिझक अपने माता-पिता से सवाल पूछ सकते हैं। इन विषयों में गणित सबसे ऊपर है। करीब 40% बच्चों ने अपने माता-पिता से गणित के प्रश्न हल करने में मदद मांगी। इसके बाद भाषा से जुड़े विषय 24% के साथ दूसरे स्थान पर, जबकि 19% के साथ विज्ञान तीसरा विषय रहा। बच्चों ने बताया कि उनकी मां उन्हें सबसे अधिक मदद करती हैं। यह भी देखा गया कि करीब 48% माता-पिता पाठ्यपुस्तकों और नोट्स पर भरोसा करते हैं, जबकि उनमें से लगभग 24% अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए ब्रेनली जैसी ऑनलाइन लर्निंग साइट्स से मदद लेते हैं।