Thursday, April 23, 2026
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भारत के रंकीरेड्डी-शेट्टी की जोड़ी ने जीता थाईलैंड ओपन

बैंकाक : सत्विसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी बीडब्ल्यूएफ सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय जोड़ी बन गयी। उन्होंने यहां रविवार को थाईलैंड ओपन के चुनौतीपूर्ण फाइनल में चीन के लि जुन हुई और लियू यु चेन की जोड़ी को पराजित किया। गैर वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ने एक घंटे दो मिनट तक चले मुकाबले में चीन ती तीसरी वरीय जोड़ी पर 21-19 18-21 21-18 से जीत हासिल की। पिछले साल राष्ट्रमंडल खेल में पुरूष युगल का रजत पदक जीतने वाले रंकीरेड्डी और शेट्टी के लिये यह 2019 सत्र का पहला फाइनल था। रंकीरेड्डी और शेट्टी ने अच्छी शुरूआत की, उन्होंने 3-3 की बराबरी के बाद 10-6 से बढ़त बना ली। पर चीन के प्रतिद्वंद्वियों ने वापसी करते हुए 14-14 से बराबरी हासिल की। इसके बाद दोनों जोड़ी कोशिश करती रहीं और दुनिया की 16वें नंबर की भारतीय जोड़ी 20-18 के स्कोर पर ही बढ़त बना सकी। चीनी खिलाड़ियों ने अंक जुटाकर इसे 19-20 कर दिया। रंकीरेड्डी और शेट्टी ने अहम प्वाइंट जुटाकर पहला गेम हासिल किया। दूसरे गेम में भारतीय जोड़ी 6-2 से आगे हो ली। जल्द ही चीनी जोड़ी ने इस अंतर को 5-6 कर दिया और फिर दोनों जोड़ियां 11-11 की बराबरी पर आ गयीं। चीनी जोड़ी ने फिर तेजी से 13-11 की बढ़त बनायी, भारतीय जोड़ी भी कहां हार मानने वाली थी, वह 13-13 का स्कोर बनाने के बाद 16-14 से आगे हो गयी। दोनों जोड़ियों ने फिर दो दो अंक जुटा लिये। पर चीनी खिलाड़ियों ने भारतीयों को हैरान करते हुए लगातार पांच अंक अपनी झोली में डालकर गेम अपने नाम किया। अब फैसला निर्णायक गेम से होना था।। तीसरे गेम में रंकीरेड्डी और शेट्टी थोड़े धीमे दिखे लेकिन फिर भी दोनों जोड़ियां 6-6 से बराबर थीं। इसके बाद भारतीय जोड़ी ने संयम बरता और अंत तक अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त कायम रखी। चीन की जोड़ी ने वापसी करने की कोशिश में अंतर 18-19 कर लिया लेकिन भारतीय जोड़ी इस मौके को गंवाने के मूड में बिलकुल नहीं थी, उन्होंने लगातार दो प्वाइंट जुटाकर मैच अपने पक्ष में कर लिया।

2000 रेलवे स्टेशनों पर निशुल्क वाईफाई सुविधा

नयी दिल्ली : रेलयात्रियों के लिए देश भर में करीब दो हजार रेलवे स्टेशनों पर निशुल्क वाईफाई की सुविधा उपलब्ध है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। रेलटेल के सीएमडी पुनीत चावला ने शनिवार को बताया कि राजस्थान में अजमेर मंडल का राणा प्रताप नगर रेलवे स्टेशन निशुल्क वाईफाई सुविधा वाला देश का 2000वां स्टेशन बन गया है। रेलवे के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम रेलटेल ने रेलवे स्टेशनों को डिजिटल समावेश का मंच बनाने के लिए निशुल्क वाईफाई सुविधा की शुरुआत की। पहले चरण में देश के 1600 स्टेशनों पर वाईफाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। अब रेलटेल ने शेष स्टेशनों पर इंटरनेट की सुविधा देने के लिए टाटा ट्रस्ट के साथ समझौता किया है। उन्होंने एक सरकारी बयान में बताया कि उनकी टीम वाई फाई उपलब्ध कराने के लिए 24 घंटे काम कर रही है।

2019 का रमन मैगसायसाय पुरस्कार पत्रकार रवीश कुमार को

मनीला : भारत के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार को इस साल के रमन मैगसायसाय पुरस्कार के लिए चुना गया है। इस पुरस्कार को नोबेल पुरस्कार का एशियाई संस्करण माना जाता है।
रमन मैगसायसाय पुरस्कार फाउंडेशन ने इसकी घोषणा की। फाउंडेशन ने पुरस्कार की घोषणा करते हुए 44 वर्षीय कुमार को भारत के सबसे प्रभावशाली टीवी पत्रकारों में से एक बताया । वह एनडीटीवी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी संपादक हैं। उनका नाम उन पांच व्यक्तियों में शुमार है जिन्हें इस पुरस्कार का विजेता घोषित किया गया है।
बिहार के जितवारपुर गांव में जन्मे कुमार 1996 में न्यू दिल्ली टेलीविजन नेटवर्क (एनडीटीवी) से जुड़े थे और उन्होंने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के तौर पर की थी। एनडीटीवी के 24 घंटे वाले हिंदी भाषी समाचार चैनल – ‘एनडीटीवी इंडिया’ शुरू होने के बाद उन्हें उनका रोजाना का शो ‘प्राइम टाइम’ दिया गया। फाउंडेशन ने कहा कि कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम “आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है।’ उसने साथ ही कहा, “अगर आप लोगों की आवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं।” कुमार को गंभीर, प्रभावशाली एवं मुद्दों पर अच्छी पकड़ रखने वाले प्रस्तोता (एंकर) के रूप में जाना जाता है। हालांकि फाउंडेशन ने कहा कि वह जिस तरह की पत्रकारिता करते हैं, वही उनकी विशेषता है। इसमें कहा गया, “मीडिया का ऐसा वातावरण जिसमें सरकार का हस्तक्षेप है, जो कट्टर राष्ट्रवाद के हिमायतियों के कारण विषाक्त है, जिसमें ट्रोल एवं ‘फर्जी खबर’ फैलाने वाले लोग हैं और जहां बाजार की रेटिंग की प्रतियोगिता के चलते ‘मीडिया हस्तियों’ को कीमत चुकानी पड़ रही है, जहां खबरों को सनसनीखेज बनाया जा रहा है, ऐसी स्थिति में, रवीश इस बात पर जोर देने में मुखर रहे हैं कि गंभीर, संतुलित और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग के पेशेवर मूल्यों को जिंदा रखना होगा।”
इस साल के रमन मैगसायसाय पुरस्कार के चार अन्य विजेताओं में म्यामां के को स्वे विन, थाइलैंड की अंगखाना नीलापाइजित, फिलीपीन के रैयमुंडो पुजंते कायाबायऐब और दक्षिण कोरिया के किम जोंग की शामिल हैं। पुरस्कार विजेताओं को 31 अगस्त, 2019 को आयोजित होने वाले आधिकारिक समारोह में मैगसायसाय पुरस्कार प्रदान किया जाएगा 1957 में शुरू हुए इस पुरस्कार को एशिया का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।

संसद ने दी पॉक्सो संशोधन विधेयक को मंजूरी

नयी दिल्ली : संसद ने ‘लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2019’ को मंजूरी दी जिसमें अश्लील प्रयोजनों के लिए बच्चों का उपयोग (चाइल्ड पोर्नोग्राफी) को परिभाषित करने के अलावा बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में मृत्यु दंड का भी प्रावधान किया गया है। लोकसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि इस विषय को राजनीति के चश्मे से न देखा जाए, इस पर राजनीति करने का प्रयास नहीं किया जाए । उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी पहल है जो बच्चों और देश के भविष्य को सुरक्षित दिशा में ले जाने का प्रयास है। इस विधेयक का यही मकसद है । उन्होंने कहा कि अपराध कानून संशोधन अधिनियम 2018 हो, पॉक्सो कानून में संशोधन की बात हो, अगर जघन्य अपराध होगा तो देश में संसद ने न्यायाधीशों को यह अधिकार दिया है कि वे मौत की सजा दें । मंत्री ने कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध और बलात्कार के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए केन्द्र सरकार ने 1023 विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि अभी तक 18 राज्यों ने ऐसी अदालतों की स्थापना के लिए सहमति जतायी है। महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि सरकार ने यौन अपराधों का एक राष्ट्रीय डाटा बेस तैयार किया है। ऐसे 6,20,000 अपराधी हैं। यदि कोई ऐसे व्यक्तियों को रोजगार पर रखता है तो संबंधित व्यक्ति के बारे में इससे जानकारी लेने में मदद मिलेगी। मंत्री के जवाब के बाद लोकसभा ने विधेयक को मंजूरी दे दी। इससे पहले यह विधेयक राज्यसभा में पारित हो चुका है । मौजूदा विधेयक में बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों में 20 साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा तथा ‘‘दुर्लभतम मामलों’’ में मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक के माध्यम से लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 का और संशोधन किया गया है।
सरकार का मानना है कि कानून में संशोधन के जरिए कड़े दंडात्‍मक प्रावधानों से बच्‍चों बच्‍चों से जुड़े यौन अपराधों में कमी आने की संभावना है। इससे विपत्ति में फंसे बच्‍चों के हितों की रक्षा हो सकेगी और उनकी सुरक्षा और सम्‍मान सुनिश्चित किया जा सकेगा। संशोधन का लक्ष्‍य बच्‍चों से जुड़े अपराधों के मामले में दंडात्‍मक व्‍यवस्‍थाओं को अधिक स्‍पष्‍ट करना है। विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि इसका मकसद लैंगिक उत्पीड़नों और बच्चों को निशाना बनाने, अश्लील साहित्य के अपराधों से बालकों का संरक्षण करने और ऐसे अपराधों पर नजर रखने के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना करना तथा उनसे संबंधित विषय है ।
इसमें कहा गया है कि विधेयक लिंग निरपेक्ष है और यह बालकों के सर्वोत्तम हित और कल्याण को सर्वोपरि महत्व देगा ताकि बालक के अच्छे शारीरिक, भावनात्मक, बौद्धिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित किया जा सके। इसमें कहा गया है कि हाल के समय में देश में अमानवीय मानसिकता दर्शाने वाले बाल यौन अपराध के मामलों में वृद्धि हुई है। देश में बाल यौन अपराध की बढ़ती हुई प्रवृत्ति को रोकने के लिए कड़े कदम उठाये जाने की सख्त आवश्यकता है, इसलिए विधेयक में विभिन्न अपराधों के लिए दंड में वृद्धि के नाते उपबंध करने के लिहाज से संशोधन किया जा रहा हैं।

परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी का निधन

गाजीपुर : भारत-पाकिस्‍तान युद्ध के नायक ‘परमवीर चक्र’ विजेता शहीद वीर अब्‍दुल हमीद की धर्मपत्‍नी रसूलन बीबी का शुक्रवार की दोपहर यहां निधन हो गया। वह 95 वर्ष की थीं। उन्होंने अपने पौत्र जमील आलम के दुल्‍लहपुर स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। वह काफी लंबे अरसे से बीमार चल रही थीं। दुल्‍लहपुर क्षेत्र के धामुपुर गांव के निवासी ‘परम वीर चक्र’ विजेता वीर अब्‍दुल हमीद 10 सितंबर 1965 को खेमकरण सेक्‍टर में पाकिस्तान से जंग लड़ते समय शहीद हो गये थे। उन्हें मरणोपरांत सेना के सर्वोच्च सम्मान ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया गया था। पाकिस्तान के खिलाफ वर्ष 1965 की जंग में पाकिस्तान के पैटन टैंकों से लोहा लेने वाले अदम्य साहसी अब्दुल हमीद को मरणोपरांत परमवीर चक्र प्रदान किया गया था। उनकी पत्‍नी रसूलन बीबी परिवार के साथ गाजीपुर में ही रह रही थीं।  जिले में अब्‍दुल हमीद की स्‍मृतियों को सहेजने के लिए रसूलन बीबी के प्रयासों की लोग प्रशंसा करते हैं। वीर अब्‍दुल हमीद की ही प्रेरणा से आज पूर्वांचल में गाजीपुर जिले से बड़ी संख्या में युवा सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जनवरी 2017 में नए आर्मी चीफ बनने के बाद शहीद की धर्मपत्नी रसूलन बीबी आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत से मिली थीं और ये आग्रह किया था कि उनके जीते जी वो एक बार शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके मेमोरियल आएं। हर साल 10 सितम्बर को शहीद अब्दुल हमीद का परिवार उनके लिए एक सभा का आयोजन करता है। शहीद परमवीर चक्र अब्दुल हमीद की पत्नी की वृद्धावस्था को देखते हुए जनरल रावत ने खुद गाजीपुर जाने का फैसला किया था।

काँचरापाड़ा श्रीमानधारी हाई स्कूल(एच.एस.) में प्रेमचन्द जयन्ती

काँचरापाड़ा: काँचरापाड़ा श्रीमानधारी हाई स्कूल(एच.एस.) में हिंदी के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद का 139वीं जयन्ती मनायी गयी । कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाध्यापक रवीन्द्र कुमार सिंह ने की। उन्होंने मुंशी प्रेमचन्द को भारतीय समाज और संस्कृति का मील का पत्थर कहा। इस अवसर पर छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया साथ ही प्रेमचंद की कहानी ” बड़े भाई साहब” पर बनी फिल्म की प्रस्तुति भी की गयी। कार्यक्रम का संचालन धर्मेंन्द्र राय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक मनोज कुमार तिवारी ने किया।

बंगीय हिन्दी परिषद ने आयोजित की हिन्दी – नेपाली काव्य सन्ध्या

कोलकाता :  मित्र राष्ट्र नेपाल से आए कवियों के सम्मान में गत 30 जुलाई को बंगीय हिन्दी परिषद की ओर से उसके सभाकक्ष में एक काव्य संध्या का आयोजन किया गया ।कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए परिषद् के संयुक्त मंत्री डॉ कुमार संकल्प ने स्वागत भाषण दिया और यह बताया कि परिषद् द्वारा हिन्दी और नेपाली साहित्य को जोड़ने का यह पहला ऐतिहासिक प्रयास है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध कवि गिरिधर राय ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य दिया। मुख्य अतिथि डॉ बीरेंद्र मृधा ने बांग्ला में अपनी कविता सुनाई । मित्र राष्ट्र से आये कवियों और साहित्यकारों ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के संयोजन हेतु बंगीय हिंदी परिषद के प्रति अपना आभार व्यक्त किया । डॉ. देवी नेपाल ने कहा कि दोनों देशों की संस्कृति तो एक है ही ,हमारी कई साझी विरासतें भी हैं। भारत से हमारा गहरा और अटूट रिश्ता है।ऐसे कार्यक्रमों से यह और अटूट होगा।नेपाल से आये कवि एवं साहित्यकार प्रो० हेमनाथ पौडेल और गोपी कृष्णा ढुंगाना ने भी दोनों देशों की साझी विरासत और सांस्कृतिक सौंदर्य को अपनी कविता में चित्रित किया। योगेंद्र शुक्ल ‘सुमन’, काली प्रसाद जायसवाल, सुषमा राय पटेल, शकील गोण्डवी , रणविजय श्रीवास्तव ,विश्वजीत शर्मा, जीवन सिंह , रमाकांत सिन्हा,चंद्रिका प्रसाद पांडेय ‘अनुरागी’ , राम पुकार सिंह ,चक्रधर प्रधान ने हिंदी में कविता पाठ किया तो नारायण प्रसाद होमगाई, राजू पाठक ,संजीव गुरुंग ,नीमा निष्कर्ष ,आइता आदिम ,टी जी भित्रीकोटी , रामायण धमाल, आशा उपाध्याय ने नेपाली में अपनी कविताएं सुनाईं । कार्यक्रम का संचालन डॉ सत्य प्रकाश तिवारी ने एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ कुमार संकल्प ने किया ।

जनवादी लेखक संघ’ तथा ‘इदारा महफ़िल-ए-ख़ुश रंग’ ने मनायी प्रेमचन्द जयन्ती

हावड़ा :   हावड़ा के कल्पना चावला ऑडिटोरियम के प्रांगण में ‘जनवादी लेखक संघ’ तथा ‘इदारा महफ़िल-ए-ख़ुश रंग’ के सौजन्य से ‘प्रेमचंद जयंती समारोह’ मनाया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार कपिल आर्य ने की। कार्यक्रम में स्वागत भाषण कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रो. राम आह्लाद चौधरी ने दिया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने साझा संस्कृति को केवल अपनाया नहीं, बल्कि उसकी बुनियाद को पुख़्ता बनाया। इस कार्यक्रम का संचालन युवा कवि नीरज सिंह ने किया, जिन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने हिंदी और उर्दू के बीच के अंतर को अपने शब्दों के ताने-बाने से बुना है।
इस कार्यक्रम में महफ़िल-ए-ख़ुश रंग की ओर से रघुनाथ अग्रवाल, डॉ. अहमद मीराज़, रिफ़त ख़ान तथा उरूसा अर्शी को उनके साहित्यिक एवं सामाजिक स्तर पर योगदान के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का दूसरा सत्र कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का रहा , जिसमें हिंदी एवं उर्दू के कई कवि एवं शायरों ने हिस्सा लिया । जिसमें प्रमुख तौर पर आरती सिंह, सिराज़ खान बातीश, फराग रोहवी, हालीम सबीर, इस्माइल परवाज़, सुल्तान साज़िद,मुश्ताक़ अंजुम, आतिश रज़ा, फ़िरोज़ मिर्ज़ा, ताहीर बेग देहलवी, नसीम हबीबी तथा रौनक़ अफ़रोज़ प्रमुख थें। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रसिद्ध समाज सेवी उसमान जावेद मंज़िल, विप्लव मजूमदार, आइशा जावेद, डॉ. अमित बनर्जी, अनिल कुमार सिंह, इम्तियाज़ अहमद आदि प्रमुख थें। कार्यक्रम के संयोजक के तौर पर अफ़ज़ल ख़ान की प्रमुख भूमिका रही। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक एकता को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में भारी संख्या में युवाओं ने भाग लिया, जिसमें प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के कई छात्र शामिल थे।

कोलकाता से मुलाकात करवाता नजरिया का कोलकाता अंक

नज़रिया का यह अंक कोलकाता को समर्पित है। इसके सम्पादक हैं दिनेश चारण और कार्यकारी सम्पादक हैं दुष्यंत। 9 हिस्सों में विभाजित इस अंक में कला और साहित्य के सभी अंगों और क्षेत्रों पर विचार-विमर्श है। कलात्मकता आपको पूरी पत्रिका में दिखायी पड़ेगी। कोलकाता को परिभाषित करने वाली तस्वीरें भी इस अंक की खूबसूरती और बढ़ाती हैं। परिचर्चा खंड में कोलकाता के साहित्यिक परिदृश्य पर यहीं के लोगों की समसामायिक टिप्पणियाँ हैं। कोलकाता साहित्य जगत के और कोलकाता से जुड़े मगर फिलहार बाहर बसे लोगों की टिप्पणियाँ कोलकाता के प्रति समझ को मजबूत करेंगी। उमा झुनझुनवाला, अरुण माहेश्वरी, डॉ. एस आनन्द, सौरभ घोष के साथ नवारुण भट्टाचार्य की कहानी और कविता, मन्द्राकान्ता सेन की तीन कहानियाँ हैं|अनुवाद इस अंक की खूबसूरती है जहाँ आप रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कविताओं के साथ जीवनानंद दास, नारायण मुखोपाध्याय, सुनील गंगोपाध्याय, शक्ति चट्टोपाध्याय, विष्णु दे, रवीन्द्र गुहा, जॉय गोस्वामी, देबी रॉय, सुकांत भट्टाचार्य,शंख घोष, सुबोध सर्कार, ईशिता भादुरी, शुभ्रो बंदोपाध्याय, ट्रिना निलीना मुखर्जी, नवनीता सेन, सुदीप रंजन सरकार जैसे बंगला के श्रेष्ठ कवियों की चुनिन्दा कविताएँ पढ़ सकेंगे। हिंदी के तमाम नए और पुराने कवि हैं। #साथ ही एक उपन्यासिका भी है – लीला मजुमदार के पीले पक्षी का पंख। कुसुम खेमानी की रश्मिरथी माँ और अलका सरावगी की एक सच्ची-झूठी गाथा का भी आनन्द आप ले सकेंगे इस पत्रिका में|नज़रिया का कोलकाता यह अंक भी नॉटनल पर भी उपलब्ध है। प्रिंट के साथ साथ ई- संस्करण वाला 350 पेज का यह वृहद अंक 80 रूपये में उपलब्ध है। अपने मोबाइल/ कम्प्यूटर पर। क्लिक कीजिए, प्रिव्यू देखिए। अच्छा लगेगा।

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किसिम – किसिम की दोस्ती, किसिम -किसिम के दोस्त

दोस्त… और दोस्ती, जितने दोस्त, उतनी ही अलग उनकी फितरत, उतना ही अलग उनका अन्दाज, बहुत मुश्किल होता है…इनको हैंडल करना…जिन्दगी में जो भी दोस्त होते हैं, वह एक दूसरे से काफी अलग होते हैं…अब आपके पास किस तरह के दोस्त हैं…वह इस लेख से जानिए –
जिन्दगी भर वाले : लाइफटाइम या टिकाऊ टाइप के दोस्त आजकल कम ही दिखाई देते हैं। हां अगर आपकी दोस्ती पुरानी है, और लंबे समय से चली आ रही है, तो आपने जरूर इस दोस्ती का आनंद लिया होगा, लेकिन असल जिंदगी में तो अब इस तरह के दोस्त फिल्मों या किताबों में ही मिलते हैं। इस प्रकार के दोस्त हर हाल में ताउम्र साथ निभाते हैं, और हमारी खुशी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान करने का जज्बा रखते हैं।
ख्याल रखने वाले : इस तरह के दोस्त आपकी हर बात का पूरा ध्यान रखते हैं, बिल्कुल मां की तरह। आपकी पढ़ाई और एक्जाम से लेकर तबियत और खाने-पीने तक का ख्याल उसे रहता है, और वह हर वक्त आपके लिए एक पैर पर हाजिर होता है। अगर आपके पास ऐसा दोस्त है, तो आप खुशकिस्मत हैं। लेकिन संभल कर कहीं इतनी ज्यादा केयर से आप भी असहज न महसूस करने लगे।
पकाने वाले  : इस तरह के दोस्तों को इससे कोई मतलब नहीं होता कि आप उनकी बातों और हरकतों से बोर हो रहे हैं, उसे केवल हर बात में अपनी राय रखने की बीमारी होती है। इन्हें लोग फेंकू के नाम से भी जानते हैं। इन्हें बस कोई सुनने वाला चाहिए होता है, जिन्हें यह कभी ज्यादा बोलने का मौका नहीं देते, और यह खुद के सबसे बड़े फैन होते हैं। इनसे बचकर रहने की कोशिश ही आपके लिए बेहतर उपाय है।
अपना उल्लू सीधा करने वाले  : इस तरह के दोस्त मौकापरस्त और मतलबी टाइप के होते हैं, जो कई बार आपसे दोस्ती भी मौके का फायदा उठाकर करते हैं।यह आपको अपना लक्ष्य प्राप्त करने की सीढ़ी की तरह इस्तेमाल करता है, और काम हो जाने के बाद आपको याद तक नहीं करता। इस तरह के दोस्तों को पहचानने में आप जितनी देर करेंगे, उतना ही नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मूडी दोस्त : इस तरह के दोस्तों का मिजाज बदलते देर नहीं लगती। या तो यह बिल्कुल मेहरबान होते हैं, या फिर खबरदार की मुद्रा में। इन्हें हैंडल करना बहुत ही टेढ़ी खीर साबित होता है, क्योंकि इनका मूड कभी भी ऑन या ऑफ हो सकता है और इन्हें शांत करने के लिए आपको इंतजार भी करना पड़ सकता है। अगर आपको यह कला आती है, तभी इनसे दोस्ती बेहतरीन होती है, वरना बात बिगड़ भी सकती।
मस्तमौला : इस तरह के दोस्त बिल्कुल बेफिक्र और अपनी मस्ती में होते हैं। ऑल टाइम फन इसका फंडा होता है, और यह जियो और जीने दो की तर्ज पर चलना बेहतर समझते हैं। इन्हें खुद भी कोई चिंता नहीं होती और यह आपको भी वैसा ही रखने की चाह रखते हैं। आपके दुख- सुख में यह दोस्त ऑल टाइम अवेलेबल रहते हैं, और बेरंग जिंदगी में भी रंग भरने में सक्षम होते हैं।
बेचारी रोनी सूरत वाले : हमेशा किसी बात का दुख या चिंता में खोए रहना, इस दोस्त की खासियत होती है। इस तरह के दोस्त को हमेशा आपक कंधे की जरूरत होती है, और आपका साथ भर भी इन्हें हिम्मत दिलाने के लिए काफी होता है। कई बार समस्याओं में उलझे रहने के कारण इनका आत्मविश्वास कम होने लगता है, ऐसे में इन्हें आपकी जरूरत होती है। ये इमोशनल और कलाकार होते हैं
कंजूस यानी दमड़ी बचाने वाले : कैंटीन या खर्चीली जगहों पर इनकी जेब से कभी वॉलेट नहीं निकलता। किसी चीज को व्यर्थ गंवाने के बजाय इन्हें चीजों का आखरी दम तक प्रयोग करना अच्छा लगता है। कम खर्चे में काम चलाना इन्हें अच्छी तरह से आता है। इनसे किसी भी तरह के आमंत्रण की उम्मीद आप न ही करें तो बेहतर होगा। साथ ही किसी मौके पर इनके हिस्से का खर्च देने के लिए भी आप तैयार रहें।
टाइमपास करने वाले : किसी यात्रा के दौरान बस या ट्रेन में इस तरह के दोस्त आसानी से मिल जाते हैं, और फोन, लेटर, मैसेज या फेसबुक तक ही सीमि‍त रहते हैं। कुछ देर गॉसिपिंग, जोक्स शेअरिंग व अन्य आवश्यकतानुसार बातों के अलावा इनसे ज्यादा आपसी समझ विकसित नहीं हो पाती। इन्हें पूरी तरह से जानना संभव नहीं होता, अत: अपनी पर्सनल बातें शेअर करने से बचना चाहिए।
पजेसिव होने वाले : इस तरह के दोस्त आपके लिए काफी संवेदनशील और केअरिंग और मददगार होते हैं। लेकिन कई बार आपका कोई काम अकेले और इन्हें बगैर शामिल किए करना इन्हें रास नहीं आता। अगर आप किसी दोस्त के ज्यादा करीबी बन रहे हैं, तो यह इन्हें बिल्कुल गवारा नहीं होता, और वे आपसे अनकही शि‍कायत रखकर मुंह फुला लेते हैं। दरअसल इन भावनाओं के पीछे उनका आपके प्रति प्यार होता है, लेकिन अति किसी भी चीज की ठीक नहीं है।
(साभार – वेबदुनिया)