Thursday, July 2, 2026
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दूरदर्शन की प्रस्तोता नीलम शर्मा का निधन

नयी दिल्ली : दूरदर्शन समाचार (डीडी न्यूज) चैनल की प्रस्तोता और नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित नीलम शर्मा का शनिवार को निधन हो गया। सार्वजनिक प्रसारणकर्ता ने यह जानकारी दी।
रिपोर्ट के अनुसार वह कैंसर से पीड़ित थीं। डीडी न्यूज ने ट्वीट किया, नीलम संस्थापक प्रस्तोता थीं और करीब 20 साल से प्रसारक से जुड़ी थीं।
‘बड़ी चर्चा’ और ‘तेजस्विनी’ कार्यक्रम की प्रस्तोता शर्मा को हाल में नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशि शेखर ने संगठन की ओर से शर्मा के निधन पर शोक जताया और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रसार भारती के अध्यक्ष सूर्य प्रकाश ने ट्वीट किया, ‘‘ हमने अपनी तेजस्विनी को खो दिया।’’

पैरालिंपियन दीपा मलिक को खेल रत्न, क्रिकेटर जडेजा समेत 19 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार

नयी दिल्ली : पैरालिंपिक में रजत पदक जीतने वाली दीपा मलिक का नाम शनिवार को देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार राजीव गाँधी खेल रत्न के लिए चुना गया। इसी पुरस्कार के लिए बजरंग पूनिया के नाम की घोषणा की गई थी। पूनिया ने एशियन और कॉमनवेल्थ खेलों में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा क्रिकेटर रवींद्र जडेजा समेत 19 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार दिया जाएगा। 48 वर्षीय दीपा ने 2016 में रियो पैरालिंपिक में शॉट पुट की एफ-53 कैटेगरी में रजत पदक जीता था। रिटायर्ड जस्टिस एम. शर्मा के नेतृत्व वाली 12 सदस्यीय समिति ने विजेताओं के नाम का ऐलान किया। इस बीच छह बार की वर्ल्ड चैम्पियन बॉक्सर मैरी कॉम ने विवाद से बचने के लिहाज से मीटिंग से खुद को अलग कर लिया। उनके कोच छोटेलाल यादव का नाम द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए नामांकित था।

19 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार
चयन समिति ने 19 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना है। इनमें क्रिकेटर रवींद्र जडेजा और पूनम यादव, ट्रैक और मैदान के सितारे तेजिंदर पाल सिंह तूर, मोहम्मद अनस, स्वपना बर्मन, फुटबॉलर गुरप्रीत सिंह संधू, हॉकी खिलाड़ी सी.सिंह कंगुजम और शूटर अंजुम मुदगिल शामिल हैं। पुरस्कार के लिए खिलाड़ी में खेल के अलावा नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और खेल भावना को भी बीरीकी से परखा जाता है।

द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए तीन नाम
द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए बैडमिंटन कोच विमल कुमार, टेबल टेनिस कोच संदीप गुप्ता और एथलेटिक्स कोच मोहिंदर सिंह ढिल्लो को चुना गया है। हॉकी के मेजबान पटेल, रामबीर सिंह खोखर (कबड्डी) और संजय भारद्वाज (क्रिकेट) को लाइफ टाइम अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।

नहीं रहीं अभिनेत्री विद्या सिन्हा

मुम्बई : बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या सिन्हा का गुरुवार को मुम्बई में 71 साल की उम्र में निधन हो गया। विद्या को दिल और फेफड़े संबंधी समस्या के कारण जुहू के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। विद्या आखिरी बार ‘कुल्फी कुमार बाजेवाला’ धारावाहिक में नजर आई थीं। इस धारावाहिक में विद्या ने सिकंदर की मां का रोल निभाया था। उन्होंने छोटी सी बात, रजनीगंधा, पति, पत्नी और वो में काम किया था।

कर्नाटक के मंगलुरु में है महात्मा गांधी का मंदिर

मंगलुरु : कर्नाटक के मैंगलुरु में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का एक मंदिर है। यहां रोजाना दिन में तीन बार पूजा और प्रार्थना की जाती है। इसे बनाने से पहले साल 1948 में बापू के मंदिर के लिए अलग से श्राइन बनाया गया था। साल 2006 में प्रतिमा को दोबारा तैयार किया गया। लोगों को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की सीख देने वाले महात्मा गांधी के अनुयायी इस मंदिर में आते हैं। उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं और उपासना करते हैं। ये मंदिर मंगलुरु मे श्री ब्रह्म बैदरकला क्षेत्र गरोडी में बना हुआ है। बापू के एक भक्त प्रकाश गरोडी कहते हैं, “साल 1948 में उनके लिए श्राइन बनाया गया था और साल 2006 में उनकी प्रतिमा का फिर से निर्माण कराया गया था।” देश में लगभग हर शहर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा लगी हुई है। ये मंदिर इसलिए खास हो जाता है, क्योंकि यहां न सिर्फ बापू की प्रतिमा है, बल्कि पुजारी द्वारा रोजाना तीन बार (सुबह 6 बजे, दोपहर 12 बजे और शाम 6 बजे) पूजा की जाती है। इस मंदिर में 13 साल पहले बापू की संगमरमर की प्रतिमा लगायी गई थी। गरोडी ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण लोगों की मांग पर ही किया गया।

दूरदर्शन के वो भूले-बिसरे एंकर, जो कभी करते थे लोगों के दिलों पर राज

15 सितंबर 1959, ये वो तारीख है जब भारत में एक नये युग की शुरुआत हुई थी। दूरदर्शन की शुरुआत। तब यह चैनल एक परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया था और 5 मिनट का एक न्यूज बुलेटिन प्रसारित किया गया था। प्रतिमा पुरी को दूरदर्शन या यूं कहें कि भारत की पहली न्यूज एंकर के तौर पर जाना जाता है। तब से लेकर अब तक दूरदर्शन ने सैकड़ों न्यूज एंकरों को देखा। उन्हीं में से एक थीं नीलम शर्मा, जिनका  निधन हो गया। अपने 20 साल के दूरदर्शन के करियर में उन्होंने कई लोकप्रिय कार्यक्रम किए हैं, जिनके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। आइए जानते हैं दूरदर्शन के कुछ ऐसे ही न्यूज एंकरों के बारे में, जो कभी लोगों के दिलों पर राज करते थे, लेकिन अब शायद लोग इन्हें भूल चुके हैं।
दूरदर्शन के दिग्गज एंकरों  में सलमा सुल्तान का नाम सबसे पहले आता है। उन्होंने 1967 से लेकर 1997 तक, 30 सालों तक दूरदर्शन में एंकर के तौर पर काम किया। वह पहली ऐसी एंकर थीं, जिन्होंने भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की खबर दूरदर्शन पर दी थी।
गीतांजलि अय्यर अनोखी हेयरस्टाइल को लेकर मशहूर थीं। उन्होंने 1971 में अंग्रेजी न्यूज एंकर के तौर पर दूरदर्शन ज्वाइन किया था। अपने 30 साल के करियर में उन्हें चार बार ‘बेस्ट एंकर’ से नवाजा गया है।
1980 और 1990 के दशक के दौरान दूरदर्शन पर जिस एंकर की आवाज का जादू चलता था, वो नीति रविंद्रन थीं। वह दूरदर्शन की एक बेहतरीन एंकर थीं। साल 1997 में मदर टेरेसा की मौत की खबर दूरदर्शन पर उन्होंने ही दी थी।
शम्मी नारंग की सबसे बड़ी उपलब्धि है कि वह दूरदर्शन में एक लाख उम्मीदवारों में से चुने गए थे और 1970-80 के दशक के दौरान वह दूरदर्शन का एक प्रसिद्ध चेहरा हुआ करते थे। आज भी वह एक लोकप्रिय और सफल वॉयस आर्टिस्ट हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि दिल्ली मेट्रो, रैपिड मेट्रो रेल गुड़गांव, मुंबई मेट्रो, बैंगलोर मेट्रो, हैदराबाद मेट्रो रेल और जयपुर मेट्रो में जिसकी आवाज सुनाई देती है, वह शम्मी नारंग ही हैं।
मीनू तलवार ने करीब 35 साल तक दूरदर्शन में एंकर और न्यूज रीडर का काम किया। वह बड़े ही स्पष्ट और शालीन तरीके से खबरें पढ़ती थीं। उनकी बेटी ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि वह उन दिनों इतनी कम उम्र की दिखती थीं कि लोगों को लगता था कि वह और उनकी बेटी दोनों बहन हैं।
अविनाश कौर सरीन दूरदर्शन के खूबसूरत चेहरों में से एक थीं। 1970 में उन्होंने एक न्यूज रीडर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। वर्तमान में वह दूरदर्शन पर निर्देशकों और निर्माताओं के आधिकारिक पैनल की सदस्य हैं।

भारत के 42 धरोहर स्थल यूनेस्को की ‘संभावित धरोहरों की सूची’ में

नयी दिल्ली : भारत के 42 धरोहर स्थल काफी लंबे समय से यूनेस्को की ‘धरोहर सूची’ में शामिल किए जाने का इंतजार कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए अब सरकार यूनेस्को के मापदंडों सहित इन धरोहरों का तुलनात्मक अध्ययन करायेगी ताकि इन्हें जल्द वैश्विक सूची में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त हो सके। इन धरोहर स्थलों को यूनेस्को की ‘संभावित धरोहरों की सूची’ में तो शामिल किया गया है लेकिन पूर्ण रूप से वैश्विक धरोहर के रूप में मान्यता अभी तक नहीं मिली है।
संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन, यूनेस्को के भारत में संभावित धरोहरों की सूची में पश्चिम बंगाल का विष्णुपुर मंदिर, केरल के कोच्चि स्थित मात्तानचेरी पैलेस, मध्यप्रदेश के मांडू स्थित ग्रुप ऑफ मॉन्यूमेंट और उत्तर प्रदेश के वाराणसी के सारनाथ स्थित प्रचीन बौद्ध स्थल साल 1998 से यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं हालांकि अब तक पूर्ण रूप से विश्व धरोहर की मान्यता नहीं मिली है। यूनेस्को के विश्व धरोहर की संभावित सूची के बारे में पूछे जाने पर संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि यह सही है कि यूनेस्को की संभावित या अस्थायी धरोहरों की सूची में करीब 50 धरोहर हैं। ये यूनेस्को के मानदंडों को पूरा करते हैं। हमने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एएसआई से कहा है कि इन मानदंडों के तहत इन स्थलों का तुलनात्मक अध्ययन करें। यूनेस्को के संभावित धरोहरों की सूची में भारतीय धरोहरों में पंजाब के अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब और असम में ब्रह्मपुत्र नदी की मुख्यधारा से लगे माजुली द्वीप साल 2004 से ही शामिल है । वहीं, नामदाफा राष्ट्रीय उद्यान और लिटिल रन आफ कच्छ का वाइल्ड एस सैंचुरी साल 2006 से संभावित सूची में तथा नेउरा वैली नेशनल पार्क और डेजर्ट नेशनल पार्क साल 2009 से यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल है। सिल्क रोड साइट्स इन इंडिया, शांति निकेतन, चारमिनार, कुतुबशाही मकबरा, गोलकोंडा किला तथा कश्मीर का मुगल गार्डन 2010 से यूनेस्को की संभावित धरोहरों में शामिल है। दिल्ली हेरिटेज सिटी साल 2012 से संभावित विश्व धरोहर में शामिल है। साल 2014 में यूनेस्को की संभावित धरोहरों की सूची में दक्कन सल्तनत के किले और धरोहर, अंडमान द्वीप के सेल्यूलर जेल, ककातिया मंदिर और गेटवे, भारत के बुनाई केंद्र से जुड़ी विख्यात साड़ी, धौलावीरा हड़प्पा शहर, अपतांज सांस्कृति दृश्यस्थली, श्रीरंगम स्थित श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर, चिल्का झील, पद्मनाभपुरम मंदिर, होयसाला से जुड़े पवित्र स्थल, भारत में अहिंसक स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े सत्याग्रह स्थल, थेमबांग किलेबंद गांव, नार्कोडाम द्वीप, अहोम राजवंश से जुड़े मोइडाम स्थल, भुवनेश्वर स्थित इकाम्रा क्षेत्र, बुर्जहोम, लोथल, हड़प्पा स्थल, भारत के पर्वतीय रेलवे का विस्तार, चेट्टीनाड ग्रामीण क्षेत्र, दिल्ली का बहाई पूजा स्थल शामिल हैं। साल 2015 में एहोल बादामी स्थल, कोल्ड डेजर्ट, उत्तरापथ से लगी बादशाही सड़क, सड़क ए आजम, ग्रैंड ट्रंक रोड को यूनेस्को के संभावित धरोहरों की सूची में शामिल किया गया था। वहीं केईबुल लामजाव संरक्षित स्थल को साल 2016 में, गारो हिल्स संरक्षित क्षेत्र को साल 2018 में तथा ओरछा के ऐतिहासिक स्थल को संभावित धरोहर स्थल में शामिल किया गया था। गौरतलब है कि भारत के 38 धरोहर स्थल को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया जा चुका है।

‘माधुरी दीक्षित’ झील, जहाँ जा सकते हैं केवल भारतीय

भारत में खूबसूरती की कमी नहीं है। जहां नजर घुमाएंगे वहीं कला और प्रकृति के अद्भुत उदहारण देखने को मिलेंगे। आज हम आपको ऐसी ही जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे देखकर धरती पर स्वर्ग के दर्शन हो जाएंगे। सबसे अनोखी बात तो ये है कि यहां स्थित झील को माधुरी दीक्षित झील भी कहते हैं।
दरअसल, इस झील के पास माधुरी दीक्षित का एक गाना फिल्माया गया था, जिसके बाद लोग सांगेसर झील को माधुरी झील कहने लगे। समुद्र तल से 15,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित सांगेसर झील भूकंप की वजह से बनी थी। स्थानीय लोगों के अनुसार ये झील अपनी वर्तमान जगह से कुछ दूरी पर स्थित थी। मगर टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने के कारण झील आज अपनी जगह से खिसक गई। जिसकी वजह से देवदार के जंगल का एक बड़ा हिस्सा पानी में समा गया।
आज भी पेड़ों के ऊपरी हिस्से बड़े अजीब तरह से पानी की सतह के ऊपर निकले हुए देखे जा सकते हैं। झील भारत-चीन सीमा के करीब स्थित है और झील देखने के लिए आपको जिला आयुक्त से इजाजत लेनी होगी। तवांग से इस झील तक पहुंचने में दो घंटे लगेंगे और केवल भारतीयों को ही इस झील तक जाने की अनुमति है।

उत्तरी ध्रुव से उड़ान भरने वाली देश की पहली एयरलाइन बनी एयर इंडिया

नयी दिल्ली :  एयर इंडिया ने भी एक खास उपलब्धि अर्जित की। एयर इंडिया उत्तरी ध्रुव से उड़ान भरने वाली देश की पहली एयरलाइन बन गयी है। नयी दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को जाने वाले एयर इंडिया के बोइंग-777 एयरक्राफ्ट ने गत गुरुवार 15 अगस्त को उत्तरी ध्रुव के ऊपर से उड़ान भरी। यह रास्ता सैन फ्रांसिस्को जाने वाले सामान्य रास्ते के मुकाबले छोटा लेकिन चुनौतीपूर्ण है। इस नए रूट से उड़ान के समय में करीब डेढ़ घंटे की कमी आएगी, साथ ही हर उड़ान पर 2000 से 7000 किलो ईंधन की बचत भी होगी। उड़ान का समय अब 14.5 के बजाय 13 घंटे हो जाएगा। एयर इंडिया की दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को की फ्लाइट गुरुवार को 243 यात्रियों के साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, रूस के ऊपर से उड़कर 12.27 बजे उत्तरी ध्रुव से गुजरी। सामान्य रास्ता बांग्लादेश, म्यांमार, चीन और जापान होकर जाता है और प्रशांत महासागर पार करने के बाद अमेरिका में प्रवेश मिलता है। उत्तरी ध्रुव के ऊपर से उड़ान भरने की चुनौती उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने देश की सभी एयरलाइनों के सामने रखी थी। इस बारे में छह अगस्त को सर्कुलर भी जारी किया गया था, लेकिन एयर इंडिया के अलावा किसी निजी एयरलाइन ने इसके लिए हिम्मत नहीं दिखाई।
अमेरिका के लिए तीन रूटों का इस्तेमाल करने वाली दुनिया की पहली एयरलाइन
इस कीर्तिमान के साथ एयर इंडिया अमेरिका के लिए तीनों रूटों का इस्तेमाल करने वाली विश्व की पहली एयरलाइन बन गई। अभी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की एतिहाद एयरलाइन ही अमेरिका जाने के लिए उत्तरी ध्रुव के रास्ते का इस्तेमाल करती है।
यात्रा के समय के साथ कार्बन उत्सर्जन में भी आएगी कमी, ईंधन की भी होगी बचत
इस नए रूट से दूरी और समय के अलावा कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। इस रास्ते से उड़ान भरने पर कार्बन उत्सर्जन में 6000 से 21000 किलोग्राम तक की कमी आएगी। एयर इंडिया की इस ऐतिहासिक उड़ान में अभिनेता विवेक ओबेरॉय भी सवार थे। उन्होंने उत्तरी ध्रुव पर जमी बर्फ का वीडियो शेयर किया।
बेहद कम तापमान, अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण उड़ान के लिए खड़ी करता है समस्या
अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण होने से दिशा की सही जानकारी देने वाले चुंबकीय कंपास उत्तरी ध्रुव के ऊपर काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में विमान में लगे अत्याधुनिक उपकरण और जीपीएस से उपलब्ध डाटा की मदद से ही पायलट सही रास्ते पर उड़ान भरते रहने का फैसला करते हैं। उत्तरी ध्रुव पर तापमान भी बहुत कम रहता है, ऐसे में ईंधन के जमने का का खतरा भी होता है।

सैयद अकबरुद्दीन जिन्होंने यूएन में कर दी पाक की बोलती बंद

नयी दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान और चीन के भारत के खिलाफ सभी मंसूबे नाकाम हो गए। सैयद अकबरुद्दीन ने अपने तर्कों से ही पाकिस्तान और चीन की बोलती बंद कर दी। अकबरुद्दीन साल 1985 में भारतीय विदेश सेवा से जुड़े थे। वह पश्चिम एशिया के विशेषज्ञ भी माने जाते हैं। सैयद अकबरुद्दीन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में स्थित भारतीय उच्चायोग में काउंसलर के पद रह चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र में शुक्रवार को पाकिस्तान और चीन ने भारत के जम्मू-कश्मीर पर लिए गए फैसले का विरोध करते हुए ये बैठक बुलाई थी। लेकिन भारत ने इनकी नापाक साजिशों को अपने तर्कों और सबूतों से हरा दिया। भारत की बातें इतनी शानदार थीं कि रूस तक ने भारत का ही समर्थन किया। हालांकि बंद कमरे में संयुक्त राष्ट्र की बैठक होने से पहले ही कई देशों ने भारत और पाकिस्तान से द्विपक्षीय बातचीत करने को कहा था। बैठक के खत्म होने के बाद जब भारत ने अपनी बात रखी तो हर कोई उससे सहमत था। इसकी कमान संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन ने संभाली। उन्होंने तर्कों से ही पाकिस्तान और चीन की बोलती बंद कर दी। भारत के तर्कों का असर ये रहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य करने के भारतीय प्रयासों की प्रशंसा की। यहां तक कि चीन और पाकिस्तान की कोशिश फेल होने के बाद भी उनका कोई औपचारिक बयान नहीं आया। भारत की इस वैश्विक सफलता का सारा श्रेय विदेश मंत्रालय को जाता है, जिसका नेतृत्व सैयद अकबरुद्दीन ने किया है।
1985 में भारतीय विदेश सेवा से जुड़े
अकबरुद्दीन साल 1985 में भारतीय विदेश सेवा से जुड़े थे। वह पश्चिम एशिया के विशेषज्ञ भी माने जाते हैं। अकबरुद्दीन ने विदेश मंत्रालय में अब तक कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। अगर उनके परिवार की बात करें तो उनके पिता एस बदरुद्दीन हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष थे। बदरुद्दीन कतर में भारत के राजदूत भी बनाए गए थे। अकबरुद्दीन की मां डॉक्टर जेबा अंग्रजी की प्रोफेसर थीं। अकबरुद्दीन ने भारतीय विदेश नीति को आगे बढ़ाने का काम किया है। वह साल 2015 में हुए भारत और अफ्रीका फोरम समिट के चीफ कोऑर्डिनेटर यानी मुख्य संयोजक भी रह चुके हैं। ये समिट ऐसे समय में हुआ था जब अफ्रीका में चीन का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन फिर भी ये काफी सफल रहा था। वह साल 2012 से 2015 तक भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता भी रह चुके हैं और सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं।
कई देशों में विभिन्न पदों पर रहे
सैयद अकबरुद्दीन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में स्थित भारतीय उच्चायोग में काउंसलर के पद रह चुके हैं। इसके साथ ही वह सऊदी अरब और मिस्र में भी काम कर चुके हैं। वह साल 1995 से 1998 तक संयुक्त राष्ट्र में फर्स्ट सेक्रेटरी भी थे। क्रिकेट के फैन अकबुरुद्दीन ने राजनीतिक विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध में एमए किया है।
पाकिस्तान की बोलती की बंद
भारत की कूटनीति बंद कमरे के बाहर भी हावी रही। सैयद अकबरुद्दीन ने अपनी हाजिरजवाबी, तथ्यों और कूटनीतिक जवाबों से पाकिस्तानी पत्रकारों की बोलती बंद कर दी। कश्मीर पर चर्चा के बाद प्रेस कांफ्रेंस चल रही थी जिसमें पाकिस्तान के कई पत्रकार बार-बार अकबरुद्दीन से कश्मीर और मानवाधिकारों को लेकर सवाल पूछ रहे थे। पाकिस्तानी पत्रकारों ने सवालों के जरिए भारतीय राजनयिक को घेरने की नाकाम कोशिश की। अकबरुद्दीन ने एक-एक करके उनके सभी सवालों के जवाब देकर उन्हें चुप करवा दिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के एक खंड को छोड़कर बाकी सभी खंडों को हटाने का फैसला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। कश्मीर पर लिए गए फैसले से बाहरी लोगों को कोई मतलब नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “जेहाद के नाम पर पाकिस्तान हिंसा फैला रहा है। सभी मसले बातचीत से सुलझाए जाएंगे। हिंसा किसी भी मसले का हल नहीं है।” अकबरुद्दीन ने कहा, “इस मसले पर बातचीत से पहले पाकिस्तान को आतंकवाद फैलाना बंद करना होगा।” उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर फैसला विकास के लिए किया गया है। हम धीरे-धीरे वहां से पाबंदी हटा रहे हैं। अकबरुद्दीन ने कहा कि हम अपनी नीति पर हमेशा की तरह कायम हैं। आतंकमुक्त माहौल में शांति से मसले को द्विपक्षीय बातचीत से ही सुलझाया जाएगा। पाकिस्तान के एक पत्रकार को उन्होंने बिना जवाब दिए बस हाथ मिलाकर चुप करा दिया। एक पत्रकार ने सवाल पूछते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 आपके लिए आंतरिक मुद्दा हो सकता है। जिसे टोकते हुए अकबरुद्दीन ने कहा कि बहुत शुक्रिया यह स्वीकार करने के लिए।
चीन को दिया संदेश
अकबरुद्दीन ने चीनी और पाकिस्तानी मीडिया को संबोधित करने के बाद कहा, “सुरक्षा परिषद की बैठक समाप्त होने के बाद हमने पहली बार देखा कि दो देश (चीन और पाकिस्तान) अपने देश की राय को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की राय बताने की कोशिश कर रहे थे।” ऐसा पहली बार नहीं है जब उन्होंने भारत को सफलता दिलाई हो। इससे पहले वह पुलवामा हमले के बाद भी अमेरिकी टेलिवीजन चैनल के एंकर को लाजवाब जवाब दे चुके हैं। हाल ही में नौ जुलाई को यूएनएससी में बहस के दौरान उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना ही उसे धो दिया था। इस दौरान अकबरुद्दीन ने दाऊद इब्राहिम, लश्कर-ए-तैयबा की मदद करने के लिए पाकिस्तान को लताड़ लगाई थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि अकबरुद्दीन ऐसे शख्स हैं, जो पर्दे के पीछे काम करते हैं। उनकी इसी विशेषता के कारण उन्हें संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधि बनाया गया है।

एक अन्धेरी गुफा की कहानी

सुचेतना डे वे वेसर वेग़ल स्टेट यूनिवर्सिटी की शोध छात्रा हैं। कई काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। रंगमंच, अभिनय, संगीत और लेखन में रुचि है। वह जिन्दगी को ऊर्जा की तरह देखती हैं और मानती हैं कि आप जैसा सोचते हैं, आपकी जिन्दगी भी वैसी ही होगी। सुचेतना शायरी के नाम से लिखती हैं। वह अब आपसे करेंगी ‘बेखौैफ बातें’ जो जिन्दगी जीने का देगी सलीका –

समाज एक ऐसे मोड़ पर पहुँच चुका है जहाँ अन्धेरा ज़्यादा और रोशनी कम है। सब जैसे हताश ,अकेले और सन्नाटे में जी रहे हैं। मुस्कुराहट मानो खो सी गयी है। न तो कोई किसी को वक्त दे रहा है और न ही किसी से बात करता है। सब जीती -जागती कठपुतलियों में बदल रहे हैं, जैसे हिम्मत हार चुके हैं। कई बार ज़िन्दगी बेज़ुबा हो जाती और हम बेगुनाह होकर उस गुनाह को ढोते है जिन्दगी भर।
इसी सोच को तो बदलना है । आज सबसे ज़्यादा युवा इसके बीच जी रहे हैं। उनमें जुनून है पर सही दिशा नहीं मिल पा रही है । गति, विधि, आहुति यह तीन आज त्रिकोण बन चुके हैं। न ये षटकोण पूजा है न कोई लकीर। ये एक सोच है सही मार्ग की तरफ। गति तभी सम्भव है जब इन्सान का मन शुद्ध हो। मन की शुद्दि सम्भव है सिर्फ अच्छी परवरिश और अच्छी परिवेश से। यहाँ जो माता- पिता, परम गुरु ,दोस्तों का बहुत बरा योगदान हैं। दूसरा है विधि, हर युवा आज मुकाम तक पहुँचने की कोशिश कर रहा है। वह सफल नही हो पा रहा। हताश हो रहा है । वे अपने आप को कमरे मे बंद कर रहे हैं । सबसे सम्बन्ध तोड़ रहे हैं, खुद को नशे की ओर धकेल रहे हैं और जब खुद को सम्भाल नहीं पा रहे हैं तो आत्महत्या कर रहे हैं। युवाओं की अपनी परेशानियाँ हैं और वजहें भी। वह दूसरों के लिए त्याग नहीं करना चाहता, अपने स्वार्थीपन की आहुति नहीं देना चाहता। वह खुद में गुम है। कभी प्रेमी या प्रेमिका के जाने का गम, कभी नौकरी न मिलने की चिन्ता और इन सबके बीच वह खुद को धकेलता है नशे की तरफ। सावधान होने की जरूरत है क्योंकि युवाओं में जज्बा और जाँबाजी, दोनों हैं जिससे आप एक नयी रोशनी की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। भरोसा रखिए अपनी चेतना पर। उमंग को दीजिये उड़ान। आपको जीनी है एक बेखौफ ज़िन्दगी। हाथ बढ़ाए और बस पार करते है एक साथ ये मुश्किल और वह भी होगी आसान –

‘ख़िलाफों को लिफाफों मे बंद रख/खयालों मे उमंग भर/ खयालातों को बदल /तू आगे बढ़ ।’