Thursday, July 2, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 599

रंगमंच और छोटे परदे की कश्मकश में जूझता “निर्देशक”

जीतेन्द्र सिंह

हाल ही में प्रोसिनियम आर्ट सेंटर में यूनिवर्सल लिटिल थियेटर ने निर्देशक एम. एस.राशिद खान के निर्देशन में ‘निर्देशक’ नाम की नाट्य प्रस्तुति का प्रर्दशन किया गया। यह नाटक मुलतः गुजराती नाटक का अनुवाद है जिसे प्रीतम जानी ने लिखा था। आज से करीब चालीस साल पहले ,उस दौर में जब टेलीविजन का आगमन हुआ था, उस समय यह नाटक बहुत ही चर्चित हुआ था। यह वह समय था जब हर शहर से रंगमंच के अभिनेताओं का पलायन टीवी और फिल्मों की ओर शुरु हो गया था। नाटकों के प्रदर्शन पर असर पड़ने लगा था। उस समय के रंगमंच के कलाकारों के सामने प्रश्न उठाते हुए आज के रंगमंच के हालत पर गम्भीर मुद्दा उठाने की पुरजोर कोशिश करता है । नाटक की कहानी में एक उम्रदराज़ नाट्य निर्देशक रहता है जो नाटक के प्रति बहुत ही समर्पित है । यहाँ तक कि अपने परिवार तक को वह समय नहीं दे पाता। बेटे की कॉलेज फीस के रुपये भी नाटक के मंचन लगा देता है लेकिन इस बदले हुए समय में अब सिर्फ नास्टेल्जिया में जीने वाला जिदंगी से हार चुका कुफित व्यक्ति बनकर अभिनेताओं की खोज में बैठा हुआ है कि कोई आये और उसके साथ नाटक करे। एक नये अभिनेता को देख वह चहक उठता है । उस अभिनेता से अपना नाटक तैयार करवाता है । वही अभिनेता आज के दिन फिल्मों का चर्चित अभिनेता बन जाता है । बहुत दिनों बाद वह निर्देशक से मिलने एक दिन आता है और उसके साथ बातचीत के जरिए कभी फ्लैश-बैक कभी वर्तमान में इस नाटक का कथ्य प्रकट होता है लेकिन इस प्रस्तुति का यह द्वंद किसी तरह से उभर नहीं पाता बल्कि जनाब और सर के सम्बोधन में उलझ जाता है । दोनों अभिनेता डरे -डरे संवादों की अदायगी करते रहते है ,मानों ऐसा लगता है कि संवादों के रद्दोबदल से उसकी लय टूटती नजर आती है। दोनों अपने -अपने संवाद एवं मुवमेंट खोजने में लगे रहते है। प्रस्तुति को देखते हुए लगता है कि जैसे निर्देशक का नाट्य कथ्य और अपने कलाकारों पर कोई नियंत्रण ही नहीं रहा जबकि मो.एस.एम.राशिद कोलकाता के जाने माने अभिनेता और निर्देशकों में शुमार होते है । इस नाटक की विषय वस्तु में बड़ी नाटकीयता थी और अच्छे कलाकार भी थे। इस नाटक में मुख्य भूमिका प्रताप जायसवाल ने निर्देशक रुप में और अभिनेता के रूप में प्रतीक पटवारी ने निभायी है। निर्देशक के बेटे के एक छोटे से चरित्र में उबैर अहमद आते हैं और अपनी अदायगी से दर्शकों को मुग्ध कर चले जाते हैं। आजकल कोलकाता की हिन्दी नाट्य संस्थाओं में कुछेक नाट्य संस्थाओं को छोड़कर ज्यादातर संस्थाओं की प्रस्तुतियों को देखते हुए लगता है कि उनके निर्देशक ,अभिनेता, संगीत, प्रकाश -व्यवस्था, परिधान और रुप- सज्जा के महत्व को नहीं समझ पा रहे या उसे महत्त्व नहीं देना चाहते हैं । उन्हें यह बात समझनी होगी कि यह सभी किसी भी प्रस्तुति के लिए एक महत्वपूर्ण अंग होते हैं।

(समीक्षक वरिष्ठ नाट्यकर्मी हैं)
Mo.No.9830881661
[email protected]

पटना में नीलांबर कोलकाता ने छोड़ी छाप

पटना : प्रतिरोध का सिनेमा ने कविता गोष्ठी और फिल्म प्रदर्शन पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में जिन कवियों ने कविता पाठ किया वे थे-बालमुकुंद,उत्कर्ष,रघुनाथ मुखिया (पटना से),अनिला राखेचा,शैलेश गुप्ता,रौनक अफरोज,आशा पांडेय,यतीश कुमार (नीलांबर कोलकाता से)। इस कार्यक्रम में कोलकाता से आमंत्रित टीम नीलांबर ने मुक्तिबोध की कविता ‘भूल गलती’,और नरेश सक्सेना की कविता ‘गिरना’ पर वीडियो मोंताज प्रस्तुत किया जिसकी आवृत्ति क्रमशः ममता पांडेय एवं स्मिता गोयल ने की थी। नीलांबर ने तीन साहित्यिक फिल्मों -गोष्ठी (विनोद कुमार शुक्ल),अनथाही गहराइयाँ (मन्नू भंडारी),ज़मीन अपनी तो थी (चंदन पांडेय) का प्रदर्शन किया।इन फिल्मों का निर्देशन ऋतेश पांडेय ने किया है। फिल्मों की प्रस्तुति के बाद निर्देशक के साथ दर्शकों की बातचीत भी हुई। कार्यक्रम में पटना के दर्शकों के अतिरिक्त कई गण्यमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की जिनमें अविनाश दास (निर्देशक -अनारकली ऑफ आरा), संतोष दीक्षित, प्रभात सरसीज , संजय कुमार कुंदन , अँचित ,प्रत्युष मिश्र, नरेंद्र कुमार , सदफ इक़बाल, प्रशांत विप्लवी ,श्रीधर करुणानिधि ,सुशील कुमार भारद्वाज,संतोष संहार ,प्रीति प्रभा ,अरुण शीतांश,नताशा उपस्थित थे।फिल्मों पर बातचीत के क्रम में अविनाश दास ने कहा कि नीलांबर का यह प्रयास मुम्बई के पूंजीवादी दबाव को आईना दिखाने की तरह है। अध्यक्ष (नीलांबर कोलकाता) यतीश कुमार ने नीलांबर के बारे में एवं कुमुद कुंदन (प्रतिरोध का सिनेमा ) ने अपनी संस्था और इस कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन राजेश कमल और ममता पांडेय ने किया।धन्यवाद ज्ञापन संतोष झा ने किया।

“एक विद्यार्थी एक पेड़” जागरूकता अभियान : भवानीपुर कॉलेज की महत्वपूर्ण पहल 

कोलकाता : भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज के विद्यार्थियों को पेड़ लगाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया जो कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज डी शाह की परिकल्पना रही ।” एक विद्यार्थी एक पेड़ “परियोजना में ग्यारह हजार फलदायी पेड़ों को लगवाने के लिए सुंदर बन बाली द्वीप 2 के स्थान को चुना गया। यहाँ प्रकृति के साथ- साथ मनुष्य जीवन भी कष्ट दायक है।जल क्षरण और प्रदूषण रोकने के लिए भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने फलदायी पेड़ों को वहाँ जा कर लगाया। सस्टेनेबल ग्रीन प्लेनटेशन, एनजीओ और सुंदरवन ग्रीन स्पेनडर के सहयोग से भवानीपुर कॉलेज की पहल पर ग्यारह हजार फलदायी पेड़ों को लगाने का कारण कॉमर्शियल यानी व्यावसायिक स्तर पर लाभ पहुँचाना है। पौधों के संरक्षण और जैव विविधता के संदर्भ में वृक्षारोपण सुंदरवन के स्थानीय लोगों में चेतना फैलाना है। वृक्षारोपण से जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन को भी रोकने में महत्वपूर्ण कदम है। चार फीट ऊँचे होने पर पेड़ों में फल लग जाएंगे और आने वाले चार साल में सुंदरवन के निवासी और परिवार लाभान्वित होंगे । वहाँ की पारंपरिक खेती के साथ साथ स्थानीय निवासियों की आय में वृद्धि होगी।
भवानीपुर कॉलेज की टीम ने गत ग्यारह अगस्त को इस बड़े कार्यक्रम को आयोजित किया। इसमें नब्बे शिक्षक- शिक्षिकाओं , विद्यार्थियों के साथ रोटरी कलकत्ता विक्टोरिया और रोटरेक्ट क्लब विक्टोरिया का सहयोग रहा। स्नातकऔर स्नातकोत्तर के विद्यार्थी, एन एस एस के सत्तर से अधिक छात्र – छात्रा,स्थानीय हाईस्कूल के पाँच सौ विद्यार्थी और स्थानीय किसानों ने पेड़ लगाने के लिए सहयोग दिया। अनिल मिस्त्री और प्रदीप शुक्ला ने कार्यक्रम का संयोजन किया । सभा को संबोधित करते हुए टीचर इन चार्ज डॉ. सुचंद्रा चक्रवर्ती ने पेड़ और पर्यावरण संरक्षण के अटूट संबंध के विषय में जानकारी दी। कॉलेज के विद्यार्थियों ने स्थानीय स्तर पर स्कूल के विद्यार्थियों और वहाँ के निवासियों से बातचीत की जिससे शहरी विद्यार्थी अनभिज्ञ रहते हैं। फलदायी पेड़ लगाने से एक ओर मिश्रित वृक्षारोपण से वनीकरण होगा और दूसरी ओर ग्लोबल वार्मिंग का प्रतिरोध होगा जो पर्यावरण मित्रता का प्रतीक है।
बड़े पैमाने पर इस प्रकार पेड़ लगाने के महनीय कार्य में प्रत्येक विद्यार्थी ने एक पेड़ में अपना नाम लिख कर पौधा लगाया और पानी से सींचा। सोहिला, नंदिनी, डॉ दिव्येष शाह, प्रो. आत्रैय आदि शिक्षकों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। भविष्य में सुंदरवन का पर्यावरण संरक्षित रहे और भारत की वनसंपदा सुरक्षित रहे हमें जमीनी स्तर पर पहुंच कर बच्चों को और लोगों को जागरूक कराने के लिए भवानीपुर कॉलेज ने कदम उठाकर एक अच्छी पहल की । डॉ. वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी।

हिन्दी साहित्य ज्ञानकोश राष्ट्रपति को समर्पित

कोलकाता/नयी दिल्ली :  गत 16 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में भारतीय भाषा परिषद द्वारा प्रकाशित हिन्दी की उपलब्धि ‘हिंदी साहित्य ज्ञानकोश’ माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद को अर्पित किया गया। प्रधान संपादक डॉ.शंभुनाथ और परिषद की अध्यक्ष डॉ.कुसुम खेमानी ने उन्हें यह प्रदान किया। भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने ज्ञानकोश देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर समाजसेवी विवेक गुप्ता, परिषद की मंत्री बिमला पोद्दार, वाणी प्रकाशन के अरुण माहेश्‍वरी और अदिति माहेश्‍वरी उपस्थित थे। इस अवसर पर भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष कुसुम खेमानी ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति के द्वारा ज्ञानकोश सहर्ष स्वीकार करना हमारे लिए एक ऐतिहासिक घटना है। डॉ.शंभुनाथ ने कहा कि हमने देश के हिन्दी संसार और भारतीय भाषा परिषद की ओर से यह ज्ञानकोश आज भारतीय राष्ट्र को अर्पित किया है ताकि भावी पीढ़ी इसकी नींव पर ज्ञान की अधिक बड़ी इमारत बना सके। गौरतलब है कि भारतीय भाषा परिषद में लगभग पाँच वर्षों की मेहनत और देशभर के लगभग 300 लेखकों के सहयोग से यह ज्ञानकोश निर्मित और प्रकाशित हुआ है जिसका देशभर में स्वागत हो रहा है। 4560 पृष्ठों के इस कोश में हिन्दी साहित्य से संबंधित इतिहास, साहित्य सिद्धांत आदि के अलावा समाज विज्ञान, धर्म, भारतीय संस्कृति, मानवाधिकार, पौराणिक चरित्र, पर्यावरण, पश्‍चिमी सिद्धांतकार, अनुवाद सिद्धांत, नवजागरण, वैश्‍वीकरण, उत्तर-औपनिवेशिक विमर्श आदि कुल 32 विषय हैं। इसमें हिन्दी क्षेत्र की 48 लोक भाषाओं और कला-संस्कृति पर सामग्री भी है। इस ज्ञानकोश के निर्माण में संपादक मंडल के सदस्य राधावल्लभ त्रिपाठी, जवरीमल्ल पारख, अवधेश प्रधान, अवधेश कुमार सिंह, अवधेश प्रसाद सिंह और राजकिशोर जैसे ख्याति प्राप्त विद्वानों शामिल हैं। इस ग्रंथ का मुद्रण हिंदी दैनिक सन्मार्ग के सहयोग से हुआ है।

क्योंकि हर दिन आजादी के नाम होना चाहिए

कोलकाता :  आजादी की खुशी एक अलग तरीके से भी मनायी जा सकती है। हाल ही में द सिटिजन टाइम्स न्यूज पोर्टल ने बेस्ट फ्रेंड्स सोसायटी इस दिन को कुछ ऐसा ही अलग अन्दाज दिया। इस मौके पर दुर्वार महिला समन्वय समिति के सहयोग ये 50 लड़कियों को सेनेटरी नैपकिन व दाल के पैकेट वितरित किये गये। द सिटिजन टाइम्स की सीईओ पायल तथा सम्पादक शगुफ्ता हनाफी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में कवियित्री सुचेतना डे तथा अपराजिता की संस्थापक व सम्पादक सुषमा कनुप्रिया भी उपस्थित थीं। अतिथियों ने इनको राखी भी बाँधी। टीसीटी की सम्पादक शगुफ्ता हनाफी ने बताया कि रेडलाइट इलाकों को उन्नत करने के लिए शिक्षा ही काफी नहीं है बल्कि स्किल यानी कौशल का होना भी जरूरी है। योजना इस इलाके के युवाओं को पत्रकार के रूप में चयन करने की है और यह प्रशिक्षण शीघ्र ही आरम्भ होगा।

ब्रेथवेट एंड कंपनी लिमिटेड में 73 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह

कोलकाता :      ब्रेथवेट एंड कंपनी लिमिटेड में भव्यपूर्ण तरीके से 73वाँ  स्वतंत्रता दिवस मनाया गया । इस अवसर पर कम्पनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक यतीश कुमार ने कॉरपोरेट कार्यालय / क्लाइव वर्क्स और विक्टोरिया वर्क्स में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। यतीश कुमार की धर्म पत्नी  स्मिता गोयल ने भी इस अवसर पर उपस्थित होकर कर्मचारियों को मिठाइयाँ बाँटीउपस्थित सभी कर्मचारियों और यूनियन नेताओं को संबोधित करते हुए, अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेशक ने स्वतंत्रता दिवस के महत्व को समझायाउन्होंनेकहा कि ब्रेथवेट, लोगों को एकजुट करने और सफलता प्राप्त करने का सबसे अच्छा उदाहरण है तथा स्वतंत्रता दिवस समारोह देश भरके लोगों को एकजुट करता है। एक जुट होकर कार्य करने से ही सब कुछ हासिल किया जा सकता है, सफलता कदम चूमती है। यतीश कुमार ने कहा कि ‘स्वतंत्रता दिवस’ के साथ  ‘रक्षा बंधन’ का पावन त्योहार मनाना बेहद खुशी की बात है और ब्रेथवेट परिवार का हिस्सा होना वास्तव में जीवन का एक बहुत ही खास अनुभव हैI उन्होंने सभी कर्मचारियों को उनके समर्थन और समर्पण के लिए प्रोत्साहित किया और आशा व्यक्त की कि ब्रेथवेट भविष्य में आईपीओ इस्यु के साथ अग्रणी और सफल कंपनियों में से एक होगी। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर कर्मचारियों के बच्चों द्वारा विक्टोरिया वर्क्स में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। एंगस वर्क्स में, श्री पी.के.सिन्हा, डीजीएम (फाउंड्री) ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और कर्मचारियों को संबोधित किया।

क्योंकि आज रक्षाबन्धन और स्वाधीनता दिवस एक साथ है

कागज से बनायी गयी है यह राखी
धागे से बनायी गयी राखी
अभिनन्दन से डोरेमॉन तक…यही तो छोटे भाई चाहते हैं

 

भाभियों को चाहिए फैशनेबल तिरंगा लुम्बा

 

अगर भाई हो सोशल मीडिया पसन्द करने वाला
पीएम भी हैं डिमांड में