Friday, April 24, 2026
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जस्टिस एसए बोबडे ने 47वें मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली

नयी दिल्ली : जस्टिस अरविंद बोबडे ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के 47वें मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली। उन्होंने 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की जगह ली। जस्टिस बोबडे का कार्यकाल 17 महीनों का है। वे 23 अप्रैल 2021 में रिटायर होंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें शपथ दिलाई। जस्टिस बोबडे का जन्म 24 अप्रैल 1956 में महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था। उन्होंने नागपुर यूनिवर्सिटी से ही कानून की डिग्री ली। वे 2000 में बॉम्बे हाइकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए थे। फिर 2012 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला। अप्रैल 2013 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति दी गई। जस्टिस बोबडे पूर्व सीजेआई गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए बनी समिति में शामिल थे।जस्टिस बोबडे के करीबी बताते हैं कि वे बहुत ही खुशमिजाज और मृदुभाषी हैं। उन्हें बाइक राइडिंग और डॉग्स बहुत पसंद हैं। उन्हें खाली समय में किताबें पढ़ना पसंद है। वे घर पर बेहद सादगी से रहते हैं और यही सादगी उनकी हर जगह देखने को मिलती है। पूर्वचीफ जस्टिस गोगोई ने 3 अक्टूबर 2018 को 46वें मुख्य न्यायाधीश पद के रूप में शपथ ली थी। उनका कार्यकाल 13 महीने 15 दिन का रहा। जस्टिस गोगोई ने अपने कार्यकाल में कामाख्या देवी के दर्शन के लिए दो बार गए। उन्होंने अयोध्या विवाद पर ऐतिहासिक फैसला दिया। राफेल मामले में पुनर्विचार याचिका खारिज की। चीफ जस्टिस को आरटीआई के दायरे में शामिल किया।

बेल्जियम / 9 साल का बच्चा अगले महीने इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन पूरा करेगा

ब्रसेल्स :  बेल्जियम में 9 साल का बच्चा स्नातक की डिग्री हासिल करने वाला है। लॉरेंट सिमंस आइंडहोवन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (टीयूई) में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कर रहा है। यूनिवर्सिटी के स्टाफ का कहना है कि वह असाधारण है। लॉरेंट दिसंबर में अपनी डिग्री पूरी कर लेगा। लॉरेंट के पिता ने सीएनएन को बताया कि उसकी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी करने की योजना है। वह मेडिकल की डिग्री भी लेना चाहता है। लॉरेंट की मां लिडा और पिता एलेक्जेंडर सिमोंस ने कहा- उसके शिक्षकों ने लॉरेंट में कुछ खास देखा। हालांकि, माता-पिता ने यह भी कहा कि हम नहीं जानते कि लॉरेंट इतनी जल्दी सीखने में सक्षम क्यों है? इस पर उसकी मां ने मजाक में कहा कि ऐसा शायद इसलिए है, क्योंकि मैं प्रेगनेंसी के दौरान बहुत मछली खाती थी।
पढ़ने में तेज है लॉरेंट
अन्य छात्रों की तुलना में लॉरेंट अपना पाठ्यक्रम तेजी से समझता है। टीयूई के शिक्षा निदेशक जोएर्ड हल्शॉफ ने कहा कि विशेष छात्रों के लिए हम एक बेहतर कार्यक्रम की व्यवस्था करते हैं। उसी तरह से हम उन छात्रों की भी मदद करते हैं, जो मुख्य खेलों में भाग लेते हैं। लॉरेंट असाधारण है। युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा लॉरेंट यहां के छात्रों में सबसे बेहतर है। वह न केवल बुद्धिमान है, बल्कि बेहद शालीन भी है। लॉरेंट ने सीएनएन को बताया कि उसका पसंदीदा विषय इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग है। वह चिकित्सा के फील्ड में भी अध्ययन करने वाला है। 9 साल के बच्चों की तुलना में बिलकुल अलग है। लॉरेंट कृत्रिम अंगों का विकास करना चाहता है। हालांकि, उसे अभी स्नातक की डिग्री पूरी करनी होगी। ग्रेजुएशन के बाद उसकी जापान में छुट्टी मनाने की योजना है।

अमेरिका से अपने साथ 10 बक्से भरकर किताबें लाए थे गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह

पटना :आइंस्टीन के सिद्धांतों को चैलेंज करने वाले और नासा के कंप्यूटर्स को टक्कर देने वाले जाने-माने गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का शौक सिर्फ किताबें ही थीं। जब वह अमेरिका से लौटकर भारत आए तो अपने साथ 10 बक्से भरकर किताबे लाए थे। बंगलौर में जब उनका उपचार चल रहा था तब उनकी भाभी प्रभावती ने कहा था “हिंदुस्तान में मिनिस्टर का कुत्ता बीमार पड़ जाए तो डॉक्टरों की लाइन लग जाती है। अब हमें इनके इलाज की नहीं किताबों की चिंता है। यह पागल खुद नहीं बने, समाज ने इन्हें पागल बना दिया। वशिष्ठ नारायण सिंह के बारे में बताया जाता है कि किताब, कॉपी और एक पेंसिल उनकी सबसे अच्छी दोस्त थी। वह हाथ में पेंसिल लेकर यूं ही पूरे घर में चक्कर काटते रहते थे। कभी अखबार, कभी कॉपी, कभी दीवार, कभी घर की रेलिंग, जहां भी उनका मन करता, वहां कुछ लिखते, कुछ बुदबुदाते रहते थे। मानसिक बीमारी सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित वशिष्ठ नारायण सिंह पटना के एक अपार्टमेंट में गुमनामी का जीवन बिताते रहे।
पटना साइंस कॉलेज में बतौर छात्र वह गलत पढ़ाने पर वह अपने गणित के अध्यापक को टोक देते थे। कॉलेज के प्रिंसिपल को जब पता चला तो उनकी अलग से परीक्षा ली गई, जिसमें उन्होंने सारे अकादमिक रिकार्ड तोड़ दिए थे। पांच भाई-बहनों के परिवार में आर्थिक तंगी हमेशा डेरा जमाए रहती थी, लेकिन इससे उनकी प्रतिभा पर ग्रहण नहीं लगा।
उनके भाई अयोध्या सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि “भइया (वशिष्ठ जी) बताते थे कि कई प्रोफेसर्स ने उनके शोध को अपने नाम से छपवा लिए हैं। यह बात उनको बहुत परेशान करती थी।” आर्मी से सेवानिवृत्त वशिष्ठ के भाई अयोध्या सिंह इंटरव्यू में यह भी बताया था कि “उस वक्त तत्कालीन रक्षा मंत्री के हस्तक्षेप के बाद मेरा बेंगलुरु तबादला किया गया जहां भइया का इलाज हुआ, लेकिन फिर मेरा तबादला कर दिया गया और इलाज नहीं हो सका।” डॉ. वशिष्ठ का परिवार उनके इलाज को लेकर नाउम्मीद हो चुका था। घर में किताबों से भरे बक्से, दीवारों पर वशिष्ठ बाबू की लिखी हुई बातें, उनकी लिखी कॉपियां अब उनको डराती हैं। उन्हें डर इस बात का है कि क्या वशिष्ठ बाबू के बाद ये सब रद्दी की तरह बिक जाएगा।

आर्सनल 90% कचरे को रिसाइकल करता है, प्लास्टिक इस्तेमाल नहीं करता यूनाइटेड 

यूरोप के फुटबॉल क्लब पर्यावरण बचाने के लिए अपने स्तर पर काम कर रहे हैं। कोई रिन्यूएबल एनर्जी पर काम कर रहा है तो किसी ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सोलर सिस्टम तो अधिकतर क्लबों ने लगवाया है। बीबीसी और यूएन की क्लाइमेट चेंज पर काम करने वाली कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, इंग्लिश प्रीमियर लीग (ईपीएल) के सभी 20 क्लब फैंस को पर्यावरण के प्रति जागरुक कर रहे हैं। वे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं और फैंस से भी ऐसा करने को कहते हैं। 20 में से 15 क्लब स्टेडियम में वीगन फूड उपलब्ध कराते हैं। 16 क्लबों के पास पानी का सही तरीके से कैसे इस्तेमाल हो, इसे लेकर प्लानिंग है। रिपोर्ट के बाद इन क्लबों को रेटिंग भी मिली है, कि कौन सा क्लब कितना ग्रीन है। आर्सनल 90% वेस्ट को रिसाइकल करता है जबकि मैनचेस्टर यूनाइटेड और सिटी सिंगल यूज प्लास्टिक इस्तेमाल नहीं करता। टॉटेनहैम ने ग्रीन रूफ लगवाई है।
फुटबॉल क्लबों को 8 मानक के आधार पर रेटिंग दी गई है
बीबीसी और क्लाइमेट चेंज पर काम करने वाली यूएन की कमेटी ने क्लबों को रेटिंग देने के लिए एनर्जी उपयोग करने वाला पहला क्लब मानक निर्धारित किए गए थे। जैसे- क्लब क्लीन एनर्जी इस्तेमाल करता है या नहीं। उसके पास वाटर मैनेजमेंट सिस्टम है या नहीं वगैरह। अगले साल यूएन की स्पोर्ट पॉजिटिव समिट होनी है। पहली बार होने वाली इस समिट में इन सभी क्लबों के काम की भी चर्चा होगी।
टॉप-4 ग्रीन क्लब: आर्सनल ग्रीन एनर्जी उपयोग करने वाला पहला क्लब
आर्सनल: आर्सनल रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग करने वाला पहला क्लब बना था। वह 2017 से इसका उपयोग कर रहा है। उसने एलईडी फ्लड लाइट और ऑटोमेटिक लाइट लगाई हैं। क्लब अपने फैंस द्वारा पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल करने की वकालत करता है। प्लास्टिक को छोड़कर पेपर और लकड़ी का उपयोग करता है। स्टेडियम के वॉशरूम और मैदान में वाटर रिसाइकल सिस्टम लगा है।
मैनचेस्टर सिटी: फुटबॉल एकेडमी में वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाया है, जो कई कीड़ों, तितलियों और पक्षियों का घर है। रियूजेबल कप की स्कीम है, जो हर मैच के 29 हजार कप रिसाइकल करती है। साइकल पार्किंग और इलेक्ट्रिक चार्जिंग पॉइंट हैं। वाटर रिसाइकल सिस्टम के कारण क्लब 83% रिसाइकल पानी इस्तेमाल करता है।
मैनचेस्टर यूनाइटेड: ग्रीन एनर्जी खरीदकर इस्तेमाल करता है। सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करता। वेस्ट फूड को कंपोस्ट में बदलता है। बारिश का पानी और गंदे पानी को रिसाइकल कर स्टेडियम में प्रयोग करता है। मैन्यू में वीगन फूड का विकल्प है। क्लब का वार्षिक कार्बन उत्सर्जन दो हजार टन तक कम हो गया है। इतना कार्बन उत्सर्जन 400 घर एक साल तक करते हैं।
टॉटेनहैम: ट्रेनिंग सेंटर की छत पर पौधे लगाए हैं। रेन वाटर का इस्तेमाल करता है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के प्रयोग को प्रमोट करता है। उसके खिलाड़ी कार पूलिंग कर स्टेडियम आते हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सपोर्ट करने के लिए फैंस को बस और ट्रेन के पास दिए हुए हैं। कम पानी इस्तेमाल करने वाले वॉशरूम और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है।

फेसबुक ने लॉन्च की ई-वॉलेट सुविधा

 मैसेंजर, वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम से कर सकेंगे भुगतान
डिजिटल पेमेंट के बढ़ते दायरे को देखते हुए फेसबुक ने भी अपना ई-वॉलेट ‘फेसबुक पे’ लॉन्च किया है। शुरुआत में ये पेमेंट सर्विस सिर्फ फेसबुक और मैसेंजर पर उपलब्ध कराई गई है। बाद में इसे वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। फंडरेजिंग, इन-गेम खरीदारी, कार्यक्रमों की टिकटों, मैसेंजर पर लोगों से लोगों को भुगतान (पर्सन टू पर्सन पेमेंट) और फेसबुक मार्केट प्लेस पर पेजेज और व्यापारों पर खरीदारी करने के लिए फेसबुक पे को शुरू किया गया है। फिलहाल यह सुविधा US में शुरू की गई है। फेसबुक ने अपने ब्लॉग में कहा कि इससे पेमेंट करने के लिए यूज़र्स को सिक्योरिटी ऑप्शंस दिए जाएंगे, जिसमें PIN और बायोमेट्रिक जैसी सुविधा मिलेगी। इस पेमेंट सिस्टम से शॉपिंग, इवेंट की टिकट बुकिंग, डोनेशन या फिर किसी को पैसे ट्रांसफर किए जा सकेंगे। जानकारी के अनुसार फेसबुक पे किसी भी ट्रांजेक्शन के लिए सिंगल सिस्टम उपलब्ध कराएगा, जिसका मतलब ये हुआ कि इससे यूजर्स का डेटा जैसे क्रेडिट कार्ड नंबर जैसी डिटेल सेफ रहेंगी।

इम्तियाज अली बनाएंगे मधुबाला की जिन्दगी पर फिल्म

परिवार से ली इजाजत
मुम्बई : जब वी मेट, रॉकस्टार, हाईवे और लव आज कल जैसी सुपरहिट फिल्में बना चुके फिल्ममेकर इम्तियाज अली जल्द ही बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री मधुबाला की जिन्दगी को पर्दे पर लेकर आने वाले हैं।हालांकि अभी तक यह तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वे मधुबाला पर फिल्म बना रहे हैं या वेबसीरीज। एशियन एज की एक खबर के मुताबिक, इम्तियाज ने मधुबाला पर बायोपिक बनाने के लिए अधिकार भी प्राप्त कर लिए हैं। फिल्म ‘बसंत’ से 14 साल की उम्र में बतौर बाल कलाकार से डेब्यू करने से लेकर फिल्म ‘नील कमल’ में राज कपूर के साथ काम करने तक मधुबाला की जिन्दगी को दर्शाया जाएगा। ऐसी थी मधुबाला की लाइफ : मधुबाला ने अपने 22 साल तक चले फिल्मी करियर में कुल 73 फिल्में कीं। जिनमें से किसी के लिए भी उन्हें कोई अवॉर्ड नहीं मिला था। मुगल-ए-आजम के लिए भी उन्हें केवल नॉमिनेशन ही दिया गया था। फिल्म में उनके दिलीप कुमार से रिश्ते, किशोर कुमार से शादी और आखिरी वक्त के अकेलेपन को भी दिखाया जा सकता है। दिल्ली के मैडम तुसाद म्यूजियम में अगस्त 2017 में मधुबाला का वैक्स स्टेच्यू लगाया गया था। तभी से मधुबाला के जीवन पर बायोपिक बनाने की बातें चल रही थीं। बॉलीवुड के कई लोग बहन की लाइफ पर फिल्म के राइट्स पाने मधुर से अप्रोच कर रहे थे। मधुर का कहना था कि फिल्म में उनकी बहन की कहानी के साथ पूरा न्याय होना चाहिए, इसलिए वे इसे खूबसूरत अंदाज में बनाएंगी। मधुर ने कहा था कि मधुबाला के चाहने वाले और बॉलीवुड में काम करने वाले या फिर कोई और सिनेमा से जुड़े व्यक्ति मेरी बहन की बायोपिक या कोई और फिल्म, टीवी शो न बनाएं। खास तौर पर मेरी इजाजत के बिना तो बिलकुल नहीं। मधुर ने यह भी बताया था कि वे फिल्म को डायरेक्ट नहीं करेंगी। हालांकि वे चाहती हैं कि मधुबाला की बायोपिक उनका किरदार बॉलीवुड करीना कपूर खान निभाएं। खूबसूरती का दूसरा नाम मधुबाला की लाइफ के किस्से भी बेहद अजब-गजब हैं। मधुबाला ने दिलीप कुमार से ब्रेकअप के बाद किशोर कुमार से शादी की थी। लेकिन इस लव स्टोरी को पूरा करने किशोर कुमार ने इस्लाम अपनाया और वे अब्दुल करीम बन गए थे। मधुबाला बिमल रॉय की फिल्म ‘बिराज बहू’ में काम करना चाहती थीं, जिसमें रोल पाने उन्होंने बिमल दा के ऑफिस के कई चक्कर लगाए थे। लेकिन बिमल ने उन्हें कास्ट नहीं किया। 1954 में आई फिल्म बिराज बहू शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के बांग्ला उपन्यास पर बनी थीं।
अमेरिकन डायरेक्टर प्रैंक कैपरा मधुबाला को अपनी फिल्म् में कास्ट करना चाहते थे, लेकिन मधुबाला के पिता अताउल्ला खान ने इसके लिए मना कर दिया। पिता के कारण ही दिलीप कुमार और मधुबाला की प्रेमकहानी अधूरी रह गई।
मधुबाला का आखिरी वक्त बेहद तकलीफों भरा था, मधुबाला के शरीर में जरूरत से ज्यादा खून बनता था, जो उनके नाक और मुंह से बाहर आ जाता था। वहीं दिल में छेद के कारण मौत से पहले हडि्डयों की ढांचा रह गयी थीं।

केरल के स्कूलों में बजती है वॉटर बेल

ताकि बच्चों को पानी पीने की याद दिलाने के लिए घंटी
तिरुअनंतपुरम : केरल के सरकारी स्कूलों ने बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए नई पहल शुरू की है। इसके तहत बच्चों को पानी पिलाने के लिए वॉटर ब्रेक दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, इसके लिए दिन में तीन बार घंटी भी बजाई जा रही है। इसे वॉटर बेल का नाम दिया गया है। घंटी बजने पर स्कूल में सभी बच्चों को पानी पीना होता है। पहली घंटी सुबह 10.35 बजे बजती है। दूसरी घंटी दोपहर 12 बजे और तीसरी घंटी 2 बजे बजाई जाती है। यह वॉटर ब्रेक 15 से 20 मिनट का होता है। अब तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार केरल के इस तरीके को अपनाने लगी हैं। कर्नाटक के शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने इस संबंध में प्रशासन को निर्देश भी दे दिए हैं।
स्वच्छ शौचालयों की कमी से लड़कियां पानी नहीं पीतीं
एक रिपोर्ट के मुताबिक, पानी की कमी और डिहाइड्रेशन से कई बच्चे बीमार पड़ते हैं। इसे लेकर डॉक्टरों का कहना है कि खास तौर पर लड़कियां समय पर जरूरी मात्रा में पानी नहीं पीती हैं। हालांकि, लड़कियों के पानी नहीं पीने की दूसरी वजह स्कूलों में स्वच्छ शौचालयों की कमी भी है।

भारत में 700% बढ़कर 466 करोड़ रुपये हुआ नेटफ्लिक्स का राजस्व

 मुनाफा भी 5.1 करोड़ रुपए तक पहुँचा
मुम्बई : दुनिया की सबसे बड़ी वीडियो स्ट्रीमिंग कंपनी नेटफ्लिक्स की भारतीय इकाई ने 2018-19 में 700% की विकास दर दर्ज की। कंपनी को यह सफलता भारतीय दर्शकों को ध्यान में रख कर बनाए गए देसी कंटेंट की वजह से मिली। नेटफ्लिक्स इंडिया ने वित्त वर्ष 2018-2019 में 466.7 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया। साथ ही कंपनी को भारत में 5.1 करोड़ रुपए का लाभ भी हुआ। यह जानकारी कंपनी द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को दी गई सूचना से सामने आई। 2017-18 में कंपनी ने भारत में 58 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल किया था। तब उसे सिर्फ 20 लाख रुपये का फायदा हुआ था। इसमें उस वित्त वर्ष के सात महीनों के आंकड़े शामिल हैं।

2012 में भारत में 12 कंपनियां इस बिजनेस में थी, अब इनकी संख्या 39 हुई
कैलिफॉर्निया बेस्ड ओटीटी कंपनी नेटफ्लिक्स ने 2016 में भारतीय बाजार में एंट्री की थी। तब यह कदम इसके ग्लोबल रोलआउट का हिस्सा था। 2017 में कंपनी ने लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) के तहत रजिस्ट्रेशन कराया और भारतीय कंटेंट निर्माण की शुरुआत की। कंपनी क्षेत्रवार तरीके से कंटेंट निर्माण की लागत साझा नहीं करती है लिहाजा इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट पता कर पाना मुश्किल है।
देश में ऑनलाइन वीडियो देखने वाले 30 करोड़ दर्शक, 2023 तक 55 करोड़ हो जाएंगे
नेटफ्लिक्स की सफलता भारत डिजिटल वीडियो देखने वाले दर्शकों की तेजी से बढ़ती संख्या का भी योगदान है। अभी करीब 30 करोड़ लोग ऑनलाइन वीडियो कंटेंट देखते हैं। वित्त वर्ष 2023 तक यह आंकड़ा 55 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। भारत में अभी 39 कंपनियां वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विस दे रही है। 2012 में इनकी संख्या महज 12 थी। भारत में नेटफ्लिक्स के पास कई प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की तुलना में अभी कम दर्शक हैं। सब्सक्रिप्शन चार्ज ज्यादा होने और स्थानीय कंटेंट कम होने के कारण ऐसा है।
अमेजन प्राइम का मासिक प्लान 129 रुपये में और सालाना प्लान 999 रुपये में उपलब्ध है। एपल टीवी प्लस का मासिक प्लान 99 रुपए में उपलब्ध है।
नेटफ्लिक्स का ऑल डिवाइस सब्सक्रिप्शन 500 रुपए से शुरू होता है। इसके तहत एक साथ अलग-अलग डिवाइस पर कंटेंट देखने की सुविधा नहीं मिलती है।
650 और 800 रुपये वाले प्लान में अलग-अलग डिवाइसों पर कंटेंट देखने का विकल्प मिलता है। कम्पनी ने 200 रुपए में मोबाइल ऑनली प्लान भी लॉन्च किया है।
प्रतिद्वंद्वी कंपनी हॉटस्टार का करीब तीन चौथाई मार्केट पर कब्जा है। इसका वीआईपी प्लान 365 रुपये सालाना और प्रीमियम प्लान 999 रुपए सालाना की दर पर उपलब्ध है। नेटफ्लिक्स क्षेत्रवार सब्सक्राइबर की संख्या जारी नहीं करती है। अनुमान के मुताबिक मार्च 2019 तक भारत में कंपनी के 10-12 लाख सब्सक्राइबर थे।

सेवानिवृत्त हुए सीजेआई रंजन गोगोई, अयोध्या समेत कई बड़े फैसलों के लिए याद किए जाएंगे

नयी दिल्ली : अयोध्या विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाले सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई अपने 13 महीने का कार्यकाल पूरा कर गत रविवार को सेवानिवृत्त हो गए। बतौर जज और प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) उनका कार्यकाल कई बार विवादों में रहा लेकिन, उन्होंने इसे अपने न्यायिक काम के बीच आने नहीं दिया। चीफ जस्टिस गोगोई ने रविवार को आंध्र प्रदेश के तिरुमाला स्थित भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए। इस दौरान उनकी पत्नी रूपांजलि गोगोई भी मौजूद थीं। रविवार सुबह मंदिर पहुंचने पर पुजारियों ने चीफ जस्टिस और उनकी पत्नी का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। पूजा अर्चना के बाद चीफ जस्टिस दिल्ली रवाना हो गए। सेवानिवृत्ति से करीब एक सप्ताह पहले सीजेआई गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने अयोध्या में दशकों पुराने भूमि विवाद का सफलतापूर्वक निपटारा किया। इसके साथ ही उनका नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। पिछले साल जनवरी में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा के कार्यकाल के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले चार जजों में जस्टिस गोगोई भी शामिल थे। इसके बाद एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि स्वतंत्र न्यायाधीश और शोरगुल वाले पत्रकार लोकतंत्र की रक्षा की पहली पंक्ति हैं।
सबरीमाला पर महिलाओं को दिया हक
चीफ जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने पिछले साल केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। पांच सदस्यीय पीठ के तीन जजों ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के हक में फैसला दिया था। इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है, जिसे अब संविधान पीठ के पास सुनवाई के लिए भेजा गया है।
केंद्र की मोदी सरकार को दी बड़ी राहत
चीफ जस्टिस गोगोई को लड़ाकू विमान राफेल की खरीद को लेकर मोदी सरकार को क्लीन चिट देने के लिए भी याद रखा जाएगा। विपक्ष ने इस रक्षा सौदे में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग की थी, जिसे गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने खारिज कर दिया था। असम से ताल्लुक रखने वाले गोगोई ने 3 अक्तूबर, 2018 को देश के 46वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली थी। उनका कार्यकाल 13 महीने का था।

कम मेहनताने के विरोध में महिला फुटबॉल टीम ने 20 फीसदी कम लिखा गोल स्कोर

ब्राजील में महिला फुटबॉल खिलाड़ियों ने पुरुष खिलाड़ियों की तुलना में कम मेहनताना मिलने का अनोखे अंदाज में विरोध किया। इन खिलाड़ियों ने एक मैच के दौरान गोल स्कोर को 20 फीसदी कम करके दिखाया। जानकारी के अनुसार महिला खिलाड़ियों को पुरुष खिलाड़ियों की तुलना में 20 फीसदी कम मेहनताना मिलता है।
यह वाकया शनिवार को हुए पाओलिस्टा वूमेन्स चैंपियनशिप के फाइनल मैच में हुआ। इस मैच में साओ पाओलोस को कोरिंथियंस ने 3-0 के अंतर से हराया था। इस मैच का पहला गोल शुरू के पांचवें मिनट में विक्टोरिया अल्बुकर्क ने दागा था, जिसे 20 फीसदी कम करके स्कोर बोर्ड पर 0.8 दिखाया गया था।
मैच में मौजूद रहे 28 हजार से ज्यादा दर्शक
इसके बाद जूलियट ने दूसरा गोल किया, जिसके बाद स्कोर 1.6 दिखाया गया, वहीं तीसरे गोल के बाद स्कोर 2.4 दिखाया गया। इस मैच की दूसरी खास बात यह रही कि यहां 28,863 दर्शक मौजूद थे। ब्राजील में अब तक किसी भी महिला फुटबॉल मैच में इतने दर्शक नहीं आए थे।