कोलकाता : द एन्थेना एडुकेशन ऐप सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य सामग्री दे रहा है। खासकर जरूरतमंद विद्यार्थियों का खास रखा गया है। यह विद्यार्थियों को बोर्ड एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी टिप्स दे रहा है जिनमें परीक्षाओं, फॉर्म्स, नतीजों से सम्बन्धित जानकारी भी होगी। विषय विशेषज्ञ विद्यार्थियों की सहायता और कॅरियर सम्बन्धी मार्गदर्शन करेंगे। द एन्थेना एडुकेशन ऐफ में सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों तथा उत्तर सहित क्वेश्चन बैंक भी है। विद्यार्थी लाइव डिस्कशन और संशय मिटाने के लिए विशेष सत्र का लाभ उठा सकते हैं। जेईई औऱ नीट के उम्मीदवारों के लिए अलग से व्यवस्था है। बच्चों के लिए आर्ट और क्राफ्ट वीडियो उपलब्ध हैं और मेधावी परीक्षार्थियों के लिए छात्रवृत्ति परीक्षा है। विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार दिये जाएंगे। यह ऐप आविष्कार के लिए विद्यार्थियों को फंड भी मुहैया करवाएगा। एन्थेना एडुकेशन ऐप के संस्थापक राजीव कुमार दत्ता ने कहा कि समाज के लिए उपयोगी किसी भी परियोजना होने पर उसका आकलन कर उसकी फंडिंग की जाएगी। जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद करने पर विशेष जोर है।
सभी सखियों को नमस्कार और करवा चौथ की शुभकामनाएँ । अरे, इतना चकित क्यों हो रही हो सखियों, “तीज” और “करवा चौथ” तो हम औरतों का राष्ट्रीय त्यौहार है। हम भले ही सब त्यौहार भूल जाएँ लेकिन “तीज” और “करवा चौथ” भूल गए तो इसकी सजा सात जन्मों तक भुगतनी पड़ेगी। कभी आपने ध्यान दिया है सखी, त्यौहार शब्द के आगे एक और शब्द जुड़ा है, वह है तीज। तो बूझिए तो जरा कि इसका मतलब क्या है, इसका अर्थ है भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को, भारतवर्ष की नारियों द्वारा बड़े स्तर पर मनाया जाने वाला त्यौहार या व्रत जिस दिन तमाम सती- साध्वी नारियाँ पति की लंबी उम्र की कामना के लिए पूरे चौबीस घंटे का निर्जला उपवास करती हैं। घर भर को पका कर खिलाने के बाद खुद भूखा रहकर सज -संवर कर शिव पार्वती की पूजा करती हैं ताकि उनका सुहाग अखंड रहे। भले ही बहुत से हास्य कवि जो चुटकुले नुमा कविताएँ सुनाकर मंच ही नहीं श्रोताओं का भी ह्रदय भी, क्षण भर के लिए ही क्यों न सही जीत लेते हैं, मंच पर से इस व्रत का मजाक उड़ाते हुए कहते हैं, “गाय के उपवास करने पर बैल की सेहत पर भला क्या असर पड़ता है” और पुरूषों के साथ स्त्रियाँ भी यह सुनकर पेट पकड़कर हँसती हैं, लेकिन इन कवियों और श्रोता पुरूषों की पत्नियाँ अगर उनके लिए यदि व्रत उपवास करना छोड़ दे तो वह निश्चित तौर भी चिंता के मारे दिल का रोग पाल लेंगे। तो इसीलिए त्यौहार शब्द के आगे इस “तीज” शब्द को स्थायी रूप से जोड़ दिया गया है ताकि इसे किसी भी तरह विस्मृत न किया जा सके। अर्थात सारे त्यौहार एक तरफ तो तीज दूसरी तरफ। हालांकि यह व्रत करवा चौथ की तुलना में ज्यादा कठिन है लेकिन इसकी सुख्याति उसकी तुलना में कम है। देखो सखी, वह जमाना गया जब अल्लाह के मेहरबान होने से गधे पहलवान हुआ करते थे। अब नये दौर का नया मुहावरा है कि “मीडिया मेहरबान तो गधा पहलवान” तो मीडिया करवा चौथ के महिमामंडन में जोर शोर से लगा हुआ है। अब “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे” की सिमरन अर्थात काजोल अगर सोलह शृंगार करके, अपने हाथ में पूजा की थाली लेकर गीत गाएगी, “तेरे हाथ से पीकर पानी, दासी से बण जाऊं रानी” और छल कौशल से शाहरुख जैसे नायक के हाथों पानी पीकर अंततः अपनी मनचाही जिंदगी जीने में सफल हो जाएगी तो किस लड़की का विश्वास करवा चौथ पर पुख्ता नहीं होगा। आज हर लड़की और लड़का अपने आपको फिल्मी नायक नायिका से कम नहीं समझते और फिल्मी नायिकाएँ तो करवा चौथ ही करती दिखाई जाती हैं तीज वीज नहीं। एक आध भोजपुरी सिनेमा में इसकी महिमा का गान होता होगा, तो हो। खैर सखी, असली मुद्दा तो यह है कि इस सर्वव्यापी मीडिया की बदौलत करवा चौथ हम नारियों का राष्ट्रीय त्यौहार बन गया है। शायद इसीलिए जो त्योहार कभी पंजाब, राजस्थान अथवा उत्तर प्रदेश के एक अंश विशेष में मनाया जाता था, आज देश भर की स्त्रियों द्वारा धूम धाम से मनाया जाता है। मीडिया ही नहीं आजकल बाजार ने भी सर्वशक्तिमान ईश्वर की जगह ले ली है और इसे राष्ट्रीय त्यौहार बनाने में मुख्य भूमिका निभाई है। इस अवसर पर बाजार महिलाओं के सामानों पर डिस्काउंट देकर उन्हें लूटता है तो बड़े- बड़े रेस्टोरेंट अपने यहाँ टेबल बुक कराने पर आकर्षक छूट का ललचाने वाला ऑफर भी देते हैं। वैसे भी मोहल्लेदारी का जमाना बीत चुका है जब मोहल्ले भर की औरतें किसी एक के पक्के घर की छत पर चाँद देखकर पूजा किया करती थीं। वैश्विक आंधी में चाँद भी वैश्विक हो गया हे जो किसी शानदार होटल की छत से बेहद लुभावना और आकर्षक दिखाई देता है और साथ में ढेर सारे चित्ताकर्षक प्रस्ताव भी लाता है, मसलन,.”हमारे होटल की छत से चाँद देखें और सपरिवार रात्रि भोजन पर आकर्षक छूट के साथ ही दिलकश उपहार भी जीतें।”
सखियों, कभी आपने सोचा है कि शक्ति पूजा के बीच में यह करवा चौथ का पावन पर्व क्यों आता है ? सोचिए तो सही, एक या दो नहीं बंगाल में तो तीन- तीन देवियों की पूजा अर्थात दुर्गा, लक्ष्मी और काली पूजा के बीच मध्यमणि सा सुशोभित है, यह पति पूजा का पर्व। देवियों की पूजा तो पूरा देश करता है लेकिन पतिदेव की पूजा सिर्फ घर की लक्ष्मी ही करती है। हाँ, हमारे इस महान नारीपूजक देश में पत्नी देवी की पूजा का कोई त्यौहार नहीं है क्योंकि या तो वह देवी है या फिर पाँव की जूती। घर की लक्ष्मी तो उसे कभी- कभार फुसलाने, बहलाने के लिए कह दिया जाता है।
सखियों, दिमाग पर जोर डालिए और सोचिए कि आखिर पति पूजा के त्यौहार ये क्यों और कब से मनाए जाते होंगे। इन त्यौहारों की पृष्ठभूमि में हमारी सामाजिक आर्थिक व्यवस्था है। मानव सभ्यता के आरंभिक चरण में या कबीलाई संस्कृति में इस तरह के त्यौहारों का अस्तित्व नहीं था क्योंकि वहाँ स्त्री- पुरूष दोनों कंधे से कंधा मिलाकर काम करते थे। लेकिन सभ्यता के बदलते दौर में जब समाज में गौरवशाली विवाह संस्था का जन्म हुआ और क्रमशः जब आर्थिक मोर्चा पूरी तरह से पुरूष ने संभाल लिया, वह परिवार का केन्द्र बिंदु बन गया। घर की देहरी के अंदर कैद कर दी गई स्त्रियाँ पूरी तरह से पुरूषों पर निर्भर या उनकी आश्रित हो गईं, तब से वह उनकी सलामती और लंबी उम्र के लिए तरह -तरह के व्रत उपवास करने लगीं। चूंकि पुरूष ने उनके भरण पोषण की जिम्मेदारी उठाई इसीलिए स्त्रियाँ उसकी सलामती के लिए पूजा पाठ करने लगीं। पति पर पूर्णतया निर्भर अबलाएँ जो पति के न रहने पर पूरी तरह से अनाथ हो जातीं, उनका अपने स्वामी अर्थात पति या मालिक की सलामती के लिए व्रत उपवास करना स्वाभाविक ही था। और इस तरह पुरूष का सामाजिक रूतबा लगातार ऊपर उठता गया और स्त्रियाँ इस पुरूषतांत्रिक समाज में अनवरत शोषण की आदी होती गईं। बदलते समय के साथ स्त्रियाँ पहले साक्षर हुईं फिर शिक्षित हुईं और धीरे धीरे आर्थिक स्वतंत्रता भी अर्जित की लेकिन मानसिक गुलामी से मुक्त होने में शायद थोड़ा वक्त और लगेगा। इसीलिए सखियों औरतों की आजादी सिर्फ पर्स से नहीं शुरू होती बल्कि अपनी रूढ़ियों और पारंपरिक बेड़ियों से मुक्त होना भी आवश्यक है। तो सखियों, थोड़ा सोचिए कि आपके लिए भी व्रत रखने की परंपरा समाज के किसी हिस्से में है क्या ? हाँ, आजकल बहुत से उदारमना पति लाड़ प्यार में अपनी पत्नी के लिए करवा चौथ का व्रत जरूर रखने लगे हैं लेकिन आनुपातिक स्थिति अभी भी विषम ही है। आप, थोड़ा सोचिए सखियों। आप से अगले हफ्ते फिर मुलाकात होगी।
विधि : बर्तन में बेसन छान लें। अब घी को हल्का गर्म कर लें और २ चम्मच घी और दूध बेसन में डालकर इसे आपस में अच्छी तरह मिला लें। फिर कड़ाही में बचा हुआ घी डालकर गैस पर गर्म करने रखें। कड़ाही में बेसन का मिश्रण और इलायची पाउडर डालकर चलाते हुए मध्यम आंच पर भूरा होने तक भूनें। अलग बर्तन में चीनी और पानी डालकर गैस पर धीमी आंच पर रखें. इसे 2 तार की चाशनी बनने तक पकाएं। जब भुना हुआ बेसन थोड़ा ठंडा हो जाए तो इसमें धीरे-धीरे चाशनी डालते हुए बेसन को लगातार चलाते रहें। अगर आपको मिश्रण सख्त लग रहा है तो इसमें आवश्यकतानुसार थोड़ा और दूध डालकर मिलाएं इससे मिश्रण नर्म हो जाएगा। अब मिश्रण को किसी थाली या ट्रे में डालकर फैलाएं। इसके ऊपर से बादाम और पिस्ता डालें। इसके बाद मिश्रण को चौकोर टुकड़ों में काटें। जब मोहनथाल पूरी तरह ठंडे हो जाएं तब जब चाहें मीठे में ये खास मिठाई सर्व करें।
विधि : एक पैन गरम करें और रवा डालें, आंच कम करें और रवा को तब तक भूने जब तक अच्छी खुशबू न आ जाए, रवा रंग न बदलें और समान रूप से भूनें। इसे सुनिश्चित करने के लिए, लगातार हिलाते रहें। ठंडा करें और मिक्सर का उपयोग करके इसे बहुत महीन पाउडर में पीस लें। चीनी को एक बहुत ही महीन पाउडर में, इलायची के साथ मिलाएं। एक बड़े कटोरे में पीसा हुआ रवा और चीनी डालें। टूटे हुए काजू को घी में भूनें और इन्हें रवा और चीनी के मिश्रण में
अच्छी तरह मिलायें। थोड़ा ठंडा करें। इस मिश्रण में से छोटी-छोटी बॉल्स बना लें, इसे कसकर रोल करें, यदि मिश्रण सूखा लगे, इसमें थोड़ा दूध और गर्म घी डालें और फिर से बॉल्स बनाएं।
विधि: पनीर को अच्छी तरह से अपनी उँगलियों से रगड़ें। मिक्सी के जार में क्रम्बल किया हुआ पनीर भी ले सकते हैं । इसमें कंडेन्स्ड मिल्क, दूध, केसर और इलायची मिलाएं। इसे एक चिकने पेस्ट होने तक पीसें। एक बड़ी कड़ाही में, पनीर का पेस्ट लें और उसमें 1 छोटा चम्मच घी डालें। आंच को मध्यम कर दें और लगातार हिलाते रहें जब तक कि मिश्रण गाढ़ा न हो जाए और पैन के किनारों को छोड़ते हुए एक साथ हो जाए। घी लगी प्लेट में निकाल दें । मिश्रण को अच्छी तरह से गूंध लें और एक साथ ले आएं। अब केवड़ा एसेंस मिला लें और अपना मनपसंद आकार देकर केसर और पिस्ता से सजा कर सर्व करें।
डी.पी. सिंह, चीफ बिजनेस ऑफिसर, एस बी आई म्यूचुअल फंड
यह साल का ऐसा समय है जबकि हम साथ मिलकर परिवार और दोस्ती के जज़्बे का जश्न मनाते हैं। यह साल का ऐसा भी समय है जबकि हम अंदर-बाहर की सफाई करते हैं जिसका लक्ष्य होता है, “पुराने को विदा, नए का स्वागत।” भारत में त्योहारी मौसम आम तौर पर अक्तूबर अंत से शुरू होकर साल के आखिर तक चलता है और ख़रीदारों तथा दुकानदारों के लिए बहुत अच्छा मौका होता है। इस पवित्र मौके पर घर सजाये जाते हैं, उपहारों का आदान-प्रदान होता है, नये कपड़े खरीदे जाते हैं और नए उपकरण, गैजेट, यहाँ तक कि वाहन भी लिए जाते हैं।
साल का यह समय ऑनलाइन ख़रीदारी उत्सव का भी होता है जो इस त्योहारी उत्साह की मांग पूरी करते हैं। इस साल विशेष तौर पर ऑनलाइन शॉपिंग का विशेष तौर पर प्रसार हुआ है क्योंकि कोरोना वाइरस के डर से लोग घर के बाहर नहीं निकल रहे और दुकानों पर जाकर ख़रीदारी करने से बच रहे हैं। मीडिया में आई रपट के मुताबिक लगभग 85 प्रतिशत लोग ऑनलाइन शॉपिंग पसंद करते हैं।
मौजूदा ऑनलाइन शॉपिंग उत्सव की सफलता का श्रेय लोगों में लॉकडाउन आदि की वजह से जमा मांग और वायरस को त्योहारी मौसम को प्रभावित न करने देने और परंपरा का पालन करने की दृढ़ता हो दिया जा सकता है।
सोने की ऑनलाइन ख़रीदारी
त्योहारी मौसम में एक जो पवित्र काम होता है वह है किसी भी रूप में सोने की ख़रीदारी। पारंपरिक तौर पर लोग सोना जेवरात और सोने के सिक्के के रूप में खरीदना ज़्यादा पसंद करते हैं लेकिन पिछले कुछ सालों में डिजिटल फ़ारमैट में सोने की मांग में बढ़ोतरी दिखी है।
सोने को हमेशा महत्वपूर्ण खर्च के तौर पर देखा जाता है और इसके लिए बहुत योजना बनाने की ज़रूरत होती है। लेकिन डिजिटल सोने की सुविधा है कि यह कम राशि और अपनी सुविधानुसार मात्रा में ऑनलाइन खरीदा जा सकता है।
सोने के जेवरात खरीदने का अर्थ है कि इसमें बनाने का शुल्क भी शामिल होता है और इसके साथ सुरक्षा की चिंता भी जुड़ी होती है। ये इकाइयां सोने के जेवरात के विपरीत कम मात्रा की होती हैं। साथ ही डिजिटल सोना जिस तरह की तरलता प्रदान करता है वह बहुत सुविधाजनक है क्योंकि निवेशकों के लिए इसे रीडीम करना बैंक से पैसे निकालने की तरह आसान है।
गोल्ड ईटीएफ और फंड ऑफ फंड्स
डिजिटल फ़ारमैट में सोना गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड ऑफ फंड्स से भी खरीदा जा सकता है। गोल्ड ईटीएफ म्यूचुअल फंड हैं जो स्टॉक एक्स्चेंज में सूचीबद्ध हैं। ये ईटीएफ सोने की रीयल टाइम कीमत का अनुसरण करते हैं और इनकी इकाइयां शेयर की तरह खरीदी तथा बेची जा सकती हैं। ईटीएफ सोना रखने का सुविधाजनक और दक्ष माध्यम है।
दीर्घकालिक स्तर पर ठोस सोने की कीमत हमेशा बढ़ेगी। हालांकि, महामारी के कारणवैश्विक वृद्धि के बारे में हाल में पैदा अनिश्चितता के बीच सोने की मांग बढ़ी है जिससे कीमत में इज़ाफ़ा हुआ है। ऐसी स्थिति में गोल्ड ईटीएफ खरीदना सोना खरीदने के मुक़ाबले ज़्यादा सस्ता है।
मसलन, एक ग्राम सोने की कीमत करीब 4,500-5,000रुपए के बीच होगी जबकि यदि आप गोल्ड ईटीएफ़ में निवेश करना चाहें तो 1,000 रुपए तक का भी निवेश कर सकते हैं। जिनके पास डीमैट खाते नहीं हैं उनके लिए गोल्ड फंड ऑफ फंड्स निवेश का अच्छा विकल्प हो सकता है। ये फंड गोल्ड ईटीएफ़ में निवेश करते हैं और म्यूचुअल फंड जैसे परिचालन करते हैं। आप इनमें एकमुश्त निवेश या 500 रुपए तक की एसआईपी के जरिये भी निवेश से कर सकते हैं।
सुविधा के अलावा सोने में निवेश से आपके निवेश पोर्टफोलियो में विविधता आती है। अच्छे पोर्टफोलियो में विभिन्न किस्म की परिसंपत्तियों का मिश्रण होना चाहिए ताकि अधिकतम मुनाफा दर्ज़ हो सके और जोखिम कम हो सके। परिसंपत्ति के तौर पर सोना मुद्रास्फीति के जोखिम और इक्विटी एवं ऋण जैसे अन्य परिसंपत्ति वर्गों द्वारा पेश विभिन्न किस्म के जोखिम से सुरक्षा प्रदान करता है। सोना भू-राजनैतिक जोखिमों से बचाव का अच्छा रास्ता है। चाहे महामारी हो या व्यापार संघर्ष या तेल की कीमतों में अप्रत्याशित बदलाव की स्थिति, सोना ही है जो ज़्यादातर देशों की रक्षा करता है और यही वजह है कि सोने की मांग अब तक के उच्चतम स्तर पर है।
भारतीयों के लिए सोना परंपरा, धन के प्रति प्रेम और निवेश का मिलाजुला रूप है। यह परिवार की विरासत का हिस्सा है और परिसंपत्ति तथा प्रगति का संकेत है। इसलिए फैशन, गैजेट, और एलईडी टीवी पर बेपनाह खर्चते हुए डिजिटल गोल्ड में भी कुछ पैसे खर्च करें और अपने भविष्य को शानदार बनाएँ।
कोलकाता : त्योहारों के मौसम में महानगर को एक और बुटीक मिल गया है। ‘व्याघ्री’ सिग्नेचर से दो शो रूम महानगर में काकुड़गाछी और कैमक स्ट्रीट में खुले हैं। पहला स्टोर काकुड़गाछी में खुला है। 2019 में व्याघ्री डॉट कॉम की शुरुआथ हुई थी। यहाँ पर महिलाओं के लिए पारम्परिक परिधान, कुरती, सूट सेट्स, बॉटम वेयर और इंडो – वेस्टर्न कपड़े हैं। ऑनलाइन खरीददारी की सुविधा मुहैया करवाने के लिए ‘व्याघ्री’ की अपनी वेबसाइट है। भारतीय वस्त्र कारीगरी, कला और हस्तशिल्प को सामने रखना इस बुटीक की खासियत है। व्याघ्री की परिकल्पना सौरभ सिंह की है जो एक सिविल इंजीनियर हैं और वैधिकी समूह के निदेशक हैं। यह पूर्वी भारत का एक प्रख्यात रियल इस्टेट समूह है।
कोलकाता : बिड़ला कॉरपोरेशन ने सितम्बर की तिमाही में उम्दा प्रदर्शन किया है। तिमाही में कम्पनी का ईबीआईटीडीए और नकद लाभ रिकॉर्ड ऊँचाई पर जा पहुँचा। कम्पनी का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की तिमाही में पिछले साल की तुलना में 88.6 प्रतिशत बढ़ गया और 166.62 करो़ड़ रुपये हो गया। सितम्बर की तिमाही में कम्पनी का ईबीआईटीडीए 21.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 403.85 करोड़ रुपये और नकद लाभ 43.2 प्रतिशत बढ़कर 327.86 करोड़ रुपये हो गया। बिड़ला कॉरपोरेशन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक यह अब तक का उच्चतम प्रदर्शन है। इस तिमाही में राजस्व 1675.41 करोड़ रुपये रहा और बिक्री भी बढ़ गयी। बिड़ला कॉरपोरेशन के चेयरमैन हर्षवर्द्धन लोढ़ा ने इस उम्दा प्रदर्शन को निरन्तर किये जा रहे प्रयासों का परिणाम बताया।
कोलकाता : कोटक महिन्द्रा बैंक लिमिटेड (कोटक) ने आज होम लोन ब्याज दरों में 15 बेसिस पाॅइंट की अतिरिक्त कटौती करने की घोषणा की जिसके फलस्वरूप अब नई ब्याज दर 6.75 प्रतिशत सालाना हो गई है, यह नई दर 1 नवंबर, 2020 से लागू हो चुकी है। इसके साथ ही अब कोटक होम लोन और बैलेंस ट्रांस्फर लोन की दरें 6.75 प्रतिशत सालाना से शुरु होंगी जो कि इस कारोबार में सबसे कम दरों में से हैंै।
इस न्यू नॉर्मल ज़माने ने कामकाज के तरीकों को बदल कर रख दिया है। ब्याज दरें पिछले 15 सालों की अवधि में सबसे निचले स्तर पर हैं, प्रॉपर्टी डैवलपरों ने रिहाइशी जायदाद की कीमतें कम कर दी हैं, रैडी-टू-मूव-इन होम्स की तादाद बहुत ज़्यादा है और स्टैम्प ड्यूटी में भी कटौती की जा चुकी है। इन सब पहलुओं के मद्देनज़र इस वक्त घर खरीदना बहुत ही आकर्षक हो चुका है।
शांति एकम्बरम, ग्रुप प्रेसिडेंट-कंज़्यूमर बैंकिंग, कोटक महिन्द्रा बैंक ने कहा, ’’ग्राहकों के हित को ध्यान में रखते हुए तथा घर की खरीद को अधिक किफायती बनाते हुए, कोटक होम लोन की ब्याज दरें अब 6.75 प्रतिशत सालाना से शुरु होती हैं। जो लोग घर खरीदना चाहते हैं और जो लोग अपने पहले से जारी होम लोन का बैलेंस ट्रांस्फर करना चाहते हैं, ऐसे दोनों ही प्रकार के ग्राहकों के लिए यह बहुत ही बढ़िया अवसर है। इसलिए इसका लाभ अवश्य उठाईए और अपनी ईएमआई को कम कर लीजिए।’’
’’मौजूदा हालात में लोगों ने अपना घर होने के महत्व को समझा है। इसके अलावा, अब बड़े घरों की मांग बढ़ रही है जहां परिवार के कामकाजी सदस्य काम कर सकें और बच्चे पढ़ सकें। अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है, ब्याज दरें कम हो गई हैं, प्राॅपर्टी पर आकर्षक आॅफर मिल रहे हैं – बेशक, अपना खुद का घर खरीदने की ख़्वाहिश को हकीकत में बदलने का यह बेहतरीन मौका है,’’ शांति ने कहा। कोटक होम लोन की खासियत
होम लोन और बैलेंस ट्रांस्फर लोन की ब्याज दरें 6.75’ प्रतिशत सालाना से शुरु
नौकरी करने वाले एवं स्वरोज़गार करने वाले, दोनों प्रकार के ग्राहकों के लिए आकर्षक दरें
कोटक डिजी होम लोन और आसान डाॅक्यूमेंटेशन के साथ 48 घंटों से भी कम वक्त में लोन की ऑनलाइन मंज़ूरी
कोटक होम लोन हेतु ऑनलाइन आवेदन करने के लिए वैबसाइट पर होम लोन पर विज़िट करें। पूरे भारत में फैली कोटक की बैंक शाखाओं के द्वारा भी लोन हेतु आवेदन किया जा सकता है। वर्तमान कोटक ग्राहक कोटक मोबाइल बैंकिंग ऐप या नैट बैंकिंग द्वारा भी आवेदन कर सकते हैं। कोटक होम लोन भारतीय रिज़र्व बैंक के रैपो रेट से जुड़े हैं।
कोलकाता : प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज के शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों के आपसी सहयोग से दुर्गोत्सव के अवसर पर गोराबागान,पियाराबागान और रंगमहल की झुग्गियों में रहने वाले बच्चों, महिलाओं में कपड़ें,बिस्किट,खिलौने बांटे गए। कार्यक्रम दुर्गा पूजा के दौरान हुआ था। इस मौके पर कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ सुबीर कुमार दत्ता ने कहा कि दुर्गोत्सव उल्लास का पर्व है और हमारे कॉलेज का यह प्रयास एक मानवीय और नागरिक पहल है।इस अवसर पर मच्छरदानी का भी वितरण किया गया ताकि डेंगू जैसी घातक बीमारी से लोग अपनी रक्षा कर सकें। इस अवसर पर कॉलेज के शिक्षक समिति के सचिव अशोक राय चौधरी ने कहा कि यह पहला अवसर है कि शिक्षकों की ओर से यह पहल किया गया और हम आगे भी इसे जारी रखेंगे। जीबी मेंबर प्रो. विमल शंकर नंदी ने कहा कि ये समय मुश्किल का है। ऐसे में कॉलेज की तरफ से उठाया गया यह कदम सराहनीय है। इस आयोजन के दौरान सभी शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों ने सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए इस कार्यक्रम को सम्पन्न किया।
ताशु अली आयोजित कर रही हैं विंटर बोनान्जा। यह प्रदर्शनी सह बिक्री होगा। आप अगर उद्यमी हैं और अपना स्टॉल लगाना चाहती हैं तो इस लिंक पर जाकर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते/सकती हैं। आयोजन में सहयोगी हैं शी – शगुफ्ता हनाफी इवेन्ट्स। शुभजिता इस आयोजन की मीडिया सहयोगी है।