कोलकाता : केएमएएमसी क्लाइमेट एक्शन हन्ड्रेड प्लस पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल हो गया है। केएमएएमसी यानी कोटाक महिन्द्रा ऐसिट कम्पनी संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वीकृत पीआरआई (प्रिंसिपल्स फॉर रिस्पॉन्सिबल इन्वेस्टमेंट) पर हस्ताक्षर करने वाली पहली घरेलू सम्पत्ति प्रबन्धन कम्पनी बन गयी है। यह पहल केएमएमसी की सीमा स्थायीत्व और दायित्वपूर्ण निवेश रणनीति का हिस्सा है जिनमें भारतीय परिप्रेक्ष्य में ईएसजी फैक्टर्स और अवसरों पर जागरुकता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में काम किया जाता है। क्लाइमेट एक्शन हन्ड्रेड प्लस का जोर स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के संचालन पर है और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है।क्लाइमेट एक्शन 100+ के लिए हस्ताक्षरकर्ता के रूप में कम्पनी को अपने कॉरपोरेट क्षेत्र में प्रतिबद्ध होना पड़ता है। अंतर्निहित स्थिरता का एजेंडा यह है कि भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र, व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से, पेरिस समझौते के लक्ष्यों के अनुरूप ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए काम करे। कोटाक महिन्द्रा एसेट मैनेजमेंट कम्पनी की सीनियर ईवीपी, (फंड मैनेजर तथा इक्वेलिटी रिसर्च की हे़ड) शिवानी सरकार कुरियन ने कम्पनी की इस उपलब्धि पर खुशी जतायी।
डॉ. वर्गीज कुरियर मेमोरियल ओरायन में पर्यावरण कार्यकर्ता आशीष कोठारी का व्याख्यान
कोलकाता/ जमशेदपुर : एक्सएलआरआई- जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ने हाल ही में 7 वें डॉ वर्गीज कुरियन मेमोरियल ओरेशन का आयोजन किया। फ्रॉम अर्रुप सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड सस्टेनेबिलिटी (फेसेज), एक्सएलआरआई के तत्वावधान में, एएमयूएल के संस्थापक डॉ. वर्गीज कुरियन की याद में, जिसे “द मिल्कमैन ऑफ इंडिया” के नाम से जाना जाता है, का उद्देश्य ओरायन को सुनने के लिए एक मंच प्रदान करना है। विचारशील नेताओं, सामाजिक उद्यमियों, विकास क्षेत्र के पेशेवरों और नीति निर्माताओं से सीखें जिन्होंने एक सशक्त, समृद्ध और टिकाऊ समाज के विचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस साल प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता और कल्पवृक्ष के संस्थापक आशीष कोठारी ने इको -स्वराज : रिकवरी टुवार्ड्स जस्टिस एंड सस्टेनिबिलिटी विषय पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने अपने वक्तव्य में पिछले 10 साल में विकास के नाम पर वृक्षों के काटने तथा वन भूमि को नष्ट करने पर चिन्ता जतायी। उन्होंने इसे प्रकृति, संस्कति और समुदायों के प्रति हिंसा करार दिया। उन्होंने कहा कि हमें एक बार ठहरकर सोचने की जरूरत है। इस अवसर पर एक्सएलआरआई के एस. जे. निदेशक फादर पी. क्रिस्ट्री तथा एक्सएलआरआई के यरोप सेन्टर फॉर इकोलॉजी एंड सस्टेनिबिलिटी के संयोजक प्रो, रघुराम टाटा ने भी विचार रखे।
आईसीएआई ने जारी किया एमएसएमई मेंटरशिप प्रोग्राम
एमएसएमई व जीएसटी के लिए 100 सुविधा केन्द्र खोलेगा
कोलकाता : द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टेड अकाउंटेट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) और ईस्टर्न इंडिया रीजनल काउंसिल (ईआईआरसी) का 45 वाँ दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन की थीम ‘चार्टेड अकाउंटेंट्स – क्रूसेडिंग द न्यू नॉर्मल’ थी और इसमें वर्चुअल तरीके से 2500 सदस्य पूरे भारत से जुड़े। यह क्षेत्रीय सम्मेलन सदस्यों का ज्ञान, दक्षता और उनके कौशल को बेहतर बनाने का तरीका है। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल जगदीप धनकड़ और प्रथम महिला सुदेश धनकड़ उपस्थित थीं। आईसीएआई के सी ए अतुल कुमार गुप्ता, ईआईआरसी के चेयरमैन सीए नितेश कुमार मोरे व अन्य पदाधिकारियों के अतिरिक्त यूको बैंक के ई डी रोहित जैन, जी बिजनेस के प्रबन्ध सम्पादक सी ए अनिल सिंघवी, एनएफएल की पूर्व एम डी नीरू ओबेराय, ऑयल इंडिया के निदेशक (वित्त) समेत अन्य अतिथि उपस्थित थे। आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को मजबूत करने के लिए एमएसएमई का महत्व समझते हुए तथा कोविड -19 की चुनौतीपूर्ण स्थिति को देखते हुए आईसीएआई ने एमएसएमई मेंटरशिप प्रोग्राम आरम्भ किया है। इसके साथ ही एमएसएमई व जीएसटी के लिए 100 फेसिलिटेशन सेंटर यानी सुविधा केन्द्र खोलने की भी घोषणा की। दो सत्रों में विभाजित इस कार्यक्रम में विभिन्न मुद्दों पर परिचर्चा भी आयोजित की गयी।
5 की संख्या इसलिए है इतनी शुभ

पंचामृत से लेकर पंचमेवा तक का महत्व
पंचदेव :
सूर्य, गणेश, शिव, शक्ति और विष्णु ये पंचदेव कहलाते हैं। सूर्य की दो परिक्रमा, गणेश की एक परिक्रमा, शक्ति की तीन, विष्णु की चार तथा शिव की आधी परिक्रमा की जाती है।
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पांच उपचार पूजा :
गंध, पुष्प, धूप, दीप और नेवैद्य अर्पित करना पंच उपचार पूजा कहलाती है।
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पंच पल्लव :
पीपल, गूलर, अशोक, आम और वट के पत्ते सामूहिक रूप से पंच पल्लव के नाम से जाने जाते हैं।
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पंच पुष्प :
चमेली, आम, शमी (खेजड़ा), पद्म (कमल) और कनेर के पुष्प सामूहिक रूप से पंच पुष्प के नाम से जाने जाते हैं।
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पंच गव्य :
भूरी गाय का मूत्र (8 भाग), लाल गाय का गोबर (16 भाग), सफेद गाय का दूध (12 भाग), काली गाय का दही (10 भाग), नीली गाय का घी (8 भाग) का मिश्रण पंचगव्य के नाम से जाना जाता है।
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पंच गंध :
चूर्ण किया हुआ, घिसा हुआ, दाह से खींचा हुआ, रस से मथा हुआ, प्राणी के अंग से पैदा हुआ ये पंच गंध है।
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पंचामृत :
दूध, दही, घी, चीनी (शकर), शहद का मिश्रण पंचामृत के नाम से जाना जाता है।
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पंचांग :
जिस पुस्तक या तालिका में तिथि, वार, नक्षत्र, करण और योग को सम्मिलित रूप से दर्शाया जाता है उसे पंचांग कहते हैं।
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पंचमेवा :
काजू, बादाम, किशमिश, छुआरा, खोपरागिट पंचमेवा के नाम से जाने जाते हैं।
अब सीधे यूट्यूब वीडियो से होगी खरीददारी, कम्पनी ने शुरू किया परीक्षण
यूट्यूब एक नए फीचर का परीक्षण कर रहा है। नया फीचर यूजर को सीधे वीडियो से उन उत्पादों को खरीदने की अनुमति देगा, जो उस वीडियो में दिखाई दे रहे हैं। व्यूअर्स यूट्यूब वीडियो में दिखाई दे रहे प्रोडक्ट खोज पाएंगे और उसे खरीद पाएंगे। वर्तमान में इस फीचर की टेस्टिंग अमेरिका में एंड्रॉयड, आईओएस और वेब पर लिमिटेड यूजर्स के साथ की जा रही है। क्रिएटर, जो टेस्टिंग का हिस्सा हैं, वे अपने वीडियो में कुछ प्रोडक्ट को जोड़ सकते हैं जो शॉपिंग बैग आइकन के माध्यम से खरीदने के लिए उपलब्ध होंगे। कंपनी ने गूगल सपोर्ट पेज पर टेस्ट किए जा रहे इस नए फीचर की जानकारी दी। कंपनी का कहना है कि इस फीचर्स से व्यूअर्स को वीडियो में दिखाई दे रहे प्रोडक्ट की जानकारी और उसे खरीदने के विकल्प मिलेंगे। यूट्यूब का कहना है कि वह इस पायलट प्रोजेक्ट पर फिलहाल चुनिंदा क्रिएटरों के साथ काम किया जा रहा है।
व्यूअर्स शॉपिंग बैग आइकन पर क्लिक करके चुनिंदा प्रोडक्ट की एक लिस्ट देख पाएंगे, जो वीडियो के निचले बाएं कोने में दिखाई देगा। यहां से, वे हर प्रोडक्ट के पेज का पता लगा सकते हैं, जहां उन्हें प्रोडक्ट खरीदने के लिए अधिक जानकारी, संबंधित वीडियो और विकल्प मिलेंगे।
उस्ताद गुलाम मुस्तफा का 89 साल की उम्र में निधन
मुम्बई : भारतीय शास्त्रीय संगीत के रामपुर सहसवान घराने से ताल्लुक रखने वाले उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान का 89 साल की उम्र में निधन हो गया। खान साहब के निधन पर लता मंगेशकर और एआर रहमान ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। भारत सरकार ने उन्हें 1991 में पद्म श्री, 2006 में पद्म भूषण और 2018 में पद्म विभूषण अवॉर्ड से नवाजा था। उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान के निधन की खबर उनकी बहू नम्रता ने सोशल मीडिया पर शेयर की। मुस्तफा खान का जन्म 3 मार्च, 1931 को उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ था। उस्ताद गुलाम मुस्तफा के शिष्यों में सोनू निगम के अलावा हरिहरन, शान, आशा भोंसले, गीता दत्त, मन्ना डे, एआर रहमान और लता मंगेशकर का नाम भी शुमार है। हाल ही में सोनू ने अपने व्लॉग में उनकी तरह गाते हुए एक वीडियो शेयर किया था।
बहू नम्रता गुप्ता खान के साथ मिलकर लिखे गए अपने संस्मरण ‘ए ड्रीम आई लिव्ड एलोन’ की लॉन्चिंग खान साहब ने अपने कब्रिस्तान में किए रियाज का राज भी खोला था। बकौल खान साहब- “मेरी उम्र करीब 12 बरस रही होगी। डर और झिझक से बचने के लिए कब्रिस्तान में जाता था। मेरे उस्ताद रोज दोपहर के खाने के बाद सोते थे और मुझसे घर जाकर रियाज करने कहते थे, लेकिन घर में बहुत शोर-गुल होता था, इसलिए कब्रिस्तान बिलकुल सुनसान और सही जगह थी रियाज के लिए। मुझे किसी का डर नहीं था। मैं वहां खुलकर गा सकता था।”
वैज्ञानिक रोहिणी गोडबोले को फ्रेंच ऑर्डर ऑफ मेरिट का प्रतिष्ठित सम्मान
मुम्बई की भौतिकी वैज्ञानिक रोहिणी गोडबोले को फ्रांस के प्रतिष्ठित सम्मान ऑर्डर नेशनल ड्यू मेरिट से सम्मानित किया गया। उन्हें ये पुरस्कार न सिर्फ फ्रांस और इंडिया के बीच सहयोग के कारण बल्कि विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को आने के लिए प्रोत्साहित करने की वजह से भी मिला। यह घोषणा 13 जनवरी 2021 को आईआईएससी बेंगलुरु द्वारा की गई। रोहिणी सेंटर फॉर हाई एनर्जी फिजिक्स, भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलुरु में प्रोफेसर हैं। रोहिणी का जन्म महाराष्ट्र के पुणे में हुआ। उन्होंने सर परशुराम भाऊ कॉलेज, पुणे से बीएससी की डिग्री ली। इसके बाद रोहिणी ने भारतीय प्रौघोगिकी संस्थान मुंबई से एमएससी किया। 1979 में इस महिला वैज्ञानिक ने ब्रूक स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क से पीएचडी की। उन्होंने 1982 में 1995 तक बॉम्बे यूनिवर्सिटी के फिजिक्स डिपार्टमेंट में लेक्चरर और रीडर के तौर पर काम किया। 1995 में रोहिणी ने इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप मे काम किया है। 1998 में वह प्रोफेसर बनीं।फिजिक्स के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए सराहनीय कार्यों के लिए 2019 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इससे पहले 2009 में उन्हें सत्येंद्रनाथ बोस पदक मिला। रोहिणी ने अब तक तीन किताबों का संपादन किया। उनकी एक किताब लीलावती की बेटियों, भारत की महिला वैज्ञानिकों पर आधारित थी। उन्होंने 150 से अधिक शोध पत्रों का लेखन भी किया है।
दो कश्मीरी बहनों ने बर्फ से बना दी महिला डॉक्टर की मूर्ति
श्रीनगर : श्रीनगर की भारी बर्फबारी के बीच कश्मीर की दो बहनों ने कोरोना वॉरियर्स को श्रद्धांजलि देने के लिए बर्फ से प्रतिमा बनायी। इनमें से एक बहन डॉक्टर तो दूसरी वकील है। इनकी प्रतिमा को देखने कई लोग यहां आ रहे हैं। इन बहनों के नाम डॉ. कुर्तुल एन जोहरा और एमन जोहरा है। इस खूबसूरत स्नो आर्ट में एक लेडी डॉक्टर और कोविड वैक्सीन वाली सिरिंज दिखाई दे रही हैं। इसके अलावा स्टेथेस्कोप और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का शॉर्ट फॉर्म भी लिखा हुआ है। डॉ. कुर्तुल एन जोहरा ने इस प्रतिमा से कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने वाले योद्धाओं को शुक्रिया कहा है। ये महिलाएं अपने प्रतिमा से महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दे रही हैं। उन्होंने कहा कि महामारी में डॉक्टर्स, पुलिस, एंबुलेंस ड्राइवर्स और मीडिया ने खास भूमिका अदा की है। महिला डॉक्टर की प्रतिमा बनाकर जोहरा उन महिलाओं को श्रद्धांजलि देना चाहती हैं जो महामारी के बीच दिन-रात लोगों की सेवा में लगी रहीं। कुर्तुल एन ने बताया कि वैक्सीन के साथ सिरिंज उम्मीदों की ओर इशारा करती है।
तेलंगाना की बाबुरी सिरिशा बनीं पहली लाइन विमेन
तेलंगाना के बिजली विभाग में लाइनमैन की पोस्ट के लिए जो भर्ती निकाली गई थी उसमें महिलाओं को वर्जित लिखा गया था। लेकिन सिरिशा ने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर इस बैन का विरोध किया। उन्होंने ये कहा कि जो काम लड़के कर सकते हैं, उसे मेरी तरह लड़कियां क्यों नहीं कर सकतीं। सिरिशा ने ट्रेड में आईटीआई की पढ़ाई पूरी की है।
आखिर सिरिशा की जीत हुई और उसके साथ आठ और लड़कियों ने इस पोस्ट के लिए आवेदन किया। उनमें से सिरिशा ने ये परीक्षा पास की। इसके साथ ही उसने बिजली के खंभे पर चढ़ने की परीक्षा भी पास की। इस साहसी लड़की ने खंभे पर चढ़ने और फिर उतरने में एक मिनट से भी कम समय लिया। सिरिशा को तेलंगाना की पहली लाइन वुमन बनने का सम्मान मिला है।
सिरिशा की उम्र 20 साल है। वे सिद्दीपट्ट राज्य के मारकूक मंडल में गणेशपल्ली गांव की निवासी हैं। सिरिशा का कहना है कि एक लाइन वुमन के तौर पर उन्हें कड़ी मेहनत करना होती है। वे अपने काम के बल पर ये बताना चाहती हैं कि महिलाएं किसी भी काम में पुरुषों से कम नहीं हैं।
(साभार – दैनिक भास्कर)
भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू
पहली खुराक लगभग दो लाख कोरोना योद्धाओं को
नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शनिवार को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ शुरू किए गए दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के तहत गत शनिवार को भारत में अग्रिम पंक्ति के लगभग दो लाख स्वास्थ्यकर्मियों और सफाईकर्मियों को टीके की पहली खुराक दी गई। इसके साथ ही दुनियाभर में 10 महीनों में लाखों जिंदगियों और रोजगार को लील लेने वाली इस महामारी के भारत में खात्मे की उम्मीद जगी है। भारत में करीब एक करोड़ लोगों के संक्रमित होने और 1,52,093 लोगों की मौत के बाद देश ने ‘कोविशील्ड’ और ‘कोवैक्सीन’ टीके के साथ महामारी को मात देने के लिए पहला कदम उठाया है और देशभर के स्वास्थ्य केंद्रों पर टीकाकरण किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि भारत में टीकाकरण के पहले दिन 3,352 केंद्रों पर 1,91,181 स्वास्थ्यकर्मियों और सफाईकर्मियों को टीके की पहली खुराक दी गयी।
स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ एम्स दिल्ली के निदेशक रणदीप गुलेरिया, नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल, भाजपा सांसद महेश शर्मा और पश्चिम बंगाल के मंत्री निर्मल माजी उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें टीके की पहली खुराक दी गयी। पॉल कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए चिकित्सा उपकरण एवं प्रबंधन को लेकर गठित अधिकार समूह के प्रमुख भी हैं।




