Saturday, June 27, 2026
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भाद्राजून..जहाँ श्रीकृष्ण ने करवाया सुभद्रा और अर्जुन का विवाह

भगवान श्री कृष्ण को लेकर जालोर के इतिहास में कई कथाएं प्रचलित है। बताया जाता है भगवान श्री कृष्ण जिले के कई गाँवों से होकर गुजरे थे। महाभारत तथा पौराणिक कथानुसार आर्यों की यादव शाखा के नेता बलराम और श्री कृष्ण मरूकांतर ((रेगिस्तानी क्षेत्र))होकर गुजरे।

भाद्राजून अपभ्रंश शब्द है

पौराणिक कथाओं में ऐसा उल्लेख है कि कृष्ण भगवान भाद्राजून में अपनी बहन सुभद्रा से मिलने आए थे। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण की सहमति से जब अर्जुन यादव कुमारी सुभद्रा का हरण कर सुभद्रा-अर्जुन गाँव में दोनों ने विवाह किया था। इसी कारण इस स्थान का नाम सुभद्रा-अर्जुन पड़ा जो कालांतर में भाद्राजून हो गया। सुभद्रा का हरण करने की बात को लेकर भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलभद्र कृष्ण से नाराज हुए। तब भगवान कृष्ण सुभद्रा के पास गए। माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण अपनी बहिन से मिलने इसी मार्ग से होते हुए गए थे।

अब यह छतरियाँ पुरात्व विभाग के संरक्षण में हैं
हर तरफ से पहाड़ियों से घिरा यह स्थान काफी सुरक्षिता माना जाता है

हल्देश्वर मठ के महंत शीतलाईनाथ के अनुसार भागवत कथा में वर्णित है कि भगवान श्री कृष्ण अपनी बहन के पास जाने से पहले हल्देश्वर मठ में कुछ देर विश्राम किया था। उन्होंने अपने रथ व घोड़े को हल्देश्वर मठ जालोर के पास छोड़ा था। यहां से वे जालोर स्थित जलंधरनाथजी के धुने पर दर्शन करने गए, जहां उन्होंने जलंधरनाथजी से आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे रायथल होते हुए भाद्राजून गए और अपनी बहन तथा अर्जुन को आशीर्वाद दिया।
नाथ बताते है कि ऐसा कहा जाता है उस समय हल्देश्वर मठ के आस पास जंगल ही था, जालोर किले की दूसरी तरफ था। मोहनलाल गुप्ता लिखित पुस्तक जालोर जिले का सांस्कृतिक इतिहास में सुभद्रा अर्जुन के भाद्राजून में विवाह करने तथा अपनी बहन सुभद्रा को आशीर्वाद देने से पूर्व कृष्ण का जालोर के वर्तमान हल्देश्वर मठ में विश्राम करने का वर्णन लिखा है।
यह स्थान महाभारतकाल में द्वारिका-हस्तिनापुर मुख्य मार्ग पर स्थित था।

कहा जाता है कि बलदेवजी का दैवीय हल किसी को भी 500 योजन की दूरी तक पकड़ लेता था। ऐसे में इस स्थान की दूरी द्वारिका से 500 योजन से अधिक होने के कारण श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस स्थान पर ही रुकने को कहा था। उस समय यह पर्वत अनेक ऋषि-मुनियों की तपोस्थलि हुआ करता था। तपस्वियों की उपस्थिति के बीच सुभद्रा व अर्जुन का गन्धर्व विवाह निकट के गाँव के पुरोहित ने सम्पन करवाया था।

सुभद्रा माता का मंदिर

विवाह उपरांत दक्षिणा रूप में अर्जुन ने पुरोहित को अपना शंख भेंट किया और  देवी सुभद्रा ने नाक की बाली भेंट स्वरूप दी थी। कालांतर में जिस स्थान पर पुरोहित रहते थे, उस स्थान का नाम शंख व बाली से शंखवाली पड़ा। वहीं धुम्बड़ा पर्वत स्थित जहां विवाह सम्पन हुआ उस स्थान का नाम सुभद्राअर्जुनपुरी पड़ा जो अपभ्रंश होते-होते वर्तमान में भाद्राजून के नाम से जाना जाता है। भाद्राजून गांव के निवट धुम्बड़ा पर्वत स्थित महाभारतकालीन सुभद्रा माता का ऐतिहासिक मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र है।

 

 

कैमरे की नजर से आलोक पर्व की झलकियाँ

प्रतिष्ठा तिवारी

 


 

निखिता पांडेय

 

 

 

दिवाली पर कीजिए सबका मुँह मीठा

रेसिपी – सुनीता सुराना, क्रेजी फॉर चॉकलेट्स

काजू कतली
सामग्री : 200 ग्राम मिल्क पाउडर, 100 ग्राम चीनी, 20 – 25 काजू

विधि :  सबसे पहले काजू को जार में डालकर मिक्सर में बारीक पीस लें। उसके बाद पीसे हुए काजू और मिल्क पाउडर को एक बर्तन में डाल कर अच्छे से मिला लें। फिर गैस पर एक कढ़ाई रख दें कढ़ाई में चीनी को डाल दें और और उसी में 50 मिली पानी डालकर चीनी पानी को मिलाते हुए चीनी को अच्छे से गलाएं। जब चीनी गल जाए तो उसको एक तार की चाशनी बनने तक पकाएं।
अब उसमें मिक्स किए हुए काजू और मिल्क पाउडर को डाल दें और उसको चाशनी मिलाते हुए मध्यम आग पर लगभग 5 मिनट तक अच्छे से पकाएं। अब एक चम्मच देसी घी डालकर 2 मिनट तक और पकाएं जिससे काजू और मिल्क पाउडर अच्छे से पक कर गूथे हुए आटे जैसे बन जाएं। काजू और मिल्क पाउडर पकने के बाद उसे 5 मिनट तक ठंडा कर लें। मिश्रण को एक पॉलिथीन पर रखकर अच्छे से गूंथकर मसलें और फिर बर्फी को बेलन से मोटे और गोले आकार में बेल लें और चांदी का वर्क लगा दें। बर्फी को चाकू से काजू कतली के आकार में काट लें।

 

रेसिपी – संगीता तिवारी

मलाई सन्देश

सामग्री :   डेढ़ लीटर दूध, 1 लीटर छेना, चीनी चार चम्मच, 1 चम्मच वनिला एसेंस, 1 चम्मच गुलाब जल, 4-5 बारीक कटे बादाम, पिस्ता, और केसर के धागे

विधि :  छेना निकालकर मिक्सी में पीसकर मिला लें। चीनी मिलाकर मिश्रण बना लें। कड़ाही में डाल लें। मध्यम आँच में छेने को चलाएं और वनिला एसेंस चला लें। ध्यान रहे, छेना कड़ाही से चिपके नहीं। इसे अलग रखें। दूध को कड़ाही में डालें और लगातार चलाएं, इसमें चीनी अपनी स्वादानुसार मिला लें । आधा चम्मच गुलाबजल डालकर चला लें। बारीक कटे बादाम डालें। पहले से तैय़ार किया गया छेना मिलाएं, अच्छी तरह चला लें और सामान्य तापमान पर ठंडा करें। केसर औऱ पिस्ता से सजा लें। फ्रिज में ठंडा होने के लिए सन्देश को रखें और ठंडा ही परोसें।

एचआईटीके में आयोजित हुआ वर्चुअल प्रवर्तन कार्यक्रम

कोलकाता : हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कोलकाता ने विद्यार्थी प्रवर्तन कार्यक्रम हाल ही में आयोजित किया। यह कार्यक्रम बी. टेक तथा एम.टेक के नये बैच के लिए वर्चुअल प्रणाली से जूम माध्यम से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रामकृष्ण मिशन विवेकानंद एडुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रो वाइस चांसलर स्वामी आत्मप्रियनंदजी महाराज ने सम्बोधित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उनको खुद को कमतर नहीं समझना चाहिए और दायित्व उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। इनके साथ प्रधान अतिथि द असम रॉयल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. डॉ. एस. पी, सिंह ने भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि असफलता, सकारात्मकता और परिश्रम की सफलता और खुशी की नींव रखते हैं। एचआईटीके के चेयरमैन पी. आर. अग्रवाल भी इस अवसर पर उपस्थित थे। कार्यक्रम में कल्याण भारती ट्रस्ट के निदेशक प्रबीर रॉय, सीईओ प्रदीप अग्रवाल, एचआईटीके के प्रिंसिपल डॉ. प्रणय चौधरीऔर रजिस्ट्रार डॉ.सुजीत कुमार बरुआ समेत कई अन्य अतिथि उपस्थित थे। विद्यार्थियों ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जेनर इंस्टीट्यूट में कार्यरत चन्द्रावली दत्ता तथा नासा जेट प्रोपल्सन लैबरोटरी में कार्यरत डॉ. चिरंजीत मुखर्जी के भी विचार सुने। दोनों ही एचआईटीके के पूर्व विद्यार्थी हैं।

 

निटको ने अपने शोरूम का किया विस्तार

कोलकाता : टाइल्स और फर्श डिजाइन कम्पनी निटको ने शहर में अपने शोरूम का विस्तार किया है। शोरूम का आकार 2 हजार वर्ग फीट की जगह अब 2752 वर्ग फीट होगा। शोरूम में निटको टाइल्स, मार्बल और मोजैक की पूरी रेंज देखने को मिलेगी। निटको का मुम्बई मुख्यालय ग्राहकों को डिजिटल समाधान देगा और साथ ही व्हाट्सऐप सेवा से भी मदद मिलेगी। अगले तीन महीनों में निटको कई राज्यों में अपने कई स्टोर खोलेगा। पिछले कुछ सालों में कम्पनी ने 60 स्टोर खोले हैं और इसके 120 फ्रेंचाइजी हैं। निटको लिमिटेड के एम डी विवेक तलवार के मुताबिक कम्पनी का कारोबार 40 से अधिक देशों में फैला है।

2 लाख करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज भारत को बनाएगा वैश्विक निर्माण केन्द्र : एसोचेम

कोलकाता : एसोचेम के महासचिव दीपक सूद ने कहा है कि 1,45,980 करोड़ रुपये के अतिरिक्त परिव्यय के साथ 10 और क्षेत्रों के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की कैबिनेट की मंजूरी देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए भारत के बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन है ।
सूद ने कहा, ” पहले से ही संचालन में पीएलआई योजना के साथ, वैश्विक विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रमुख कार्यक्रम के लिए 2 लाख करोड़ रुपये की बड़ी प्रोत्साहन राशि है। इसका प्रभाव ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, खाद्य उत्पादों और दूरसंचार जैसे विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करेगा, आर्थिक गतिविधियों पर इसका प्रभाव होगा। फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, सौर उपकरण जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। देगा।
उन्होंने कहा कि कपड़ा, विशेष रूप से तकनीकी वस्त्र जैसे क्षेत्र, कोविद -19 महामारी से लड़ने के लिए पीपीई जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के अवसर पर बढ़े हैं। पीएलआई के साथ, “भारत ने वैश्विक निवेशकों के लिए अपने वैश्विक विनिर्माण सुविधाओं को स्थापित करने के लिए और भी दरवाजे खोल दिए हैं, यहां तक ​​कि घरेलू फर्मों को भी मजबूती प्रदान की गई है। इन उपायों से आर्थिक सुधार में तेजी आएगी, न केवल बहाल करने से। उपभोक्ता मांग लेकिन निवेश जलवायु ” को भी किनारे कर रहा है।
एसोचैम के महासचिव ने कहा, विशेष इस्पात और सौर मॉड्यूल जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहन से भारत को निवेश के साथ-साथ एक नवीनतम तकनीक प्राप्त करने में मदद मिलेगी। वैश्विक भूस्थैतिक प्रतिमान वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एक महत्वपूर्ण केंद्र बनने के लिए भारत का पक्षधर है। श्री सूद ने कहा कि सरकार भारत के लिए इस महान अवसर को हासिल करने के लिए सभी प्रयास कर रही है।

सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी ने किया मास्क वितरण

कोलकाता : कोरोना महामारी को देखते हुए सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी ने मास्क वितरण किया। विश्व बांग्ला जंक्शन, काठालबेड़िया गाँव और उससे संलग्न इलाकों में माक्स वितरण किया गया। सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. फिलिक्स राज ने बताया कि मास्क वितरण 5 किमी के तक के क्षेत्र में किये गये। यह विद्यार्थियों की कक्षाओं के आगे की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ई कॉमर्स बाजार में उतरा ओके क्रेडिट, शुरू किया ओके शॉप

एक नया अभियान शुरू किया # चन्देरीकीदिवाली ~
चन्देरी शिल्प से जुड़े कारीगरों को मिलेगा प्रोत्साहन
कोलकाता : ओके क्रेडिट ने ई कॉमर्स बाजार में दस्तक दे दी है और ‘ओके शॉप – आपकी ऑनलाइन शॉप’ शुरू किया है। इसके साथ ही कम्पनी हस्तशिल्प को प्रोत्साहित कर रही है और मध्य प्रदेश के चन्देरी शिल्प को आगे बढ़ाने के लिए आगे बढ़ रही है जो कोविड -19 के कारण काफी प्रभावित हुए हैं। ओकेशॉप सभी छोटे व्यापारियों को दो सरल चरणों में अपनी ऑनलाइन उपस्थिति स्थापित करने की अनुमति देकर व्यापार करने में आसानी प्रदान करता है। यह व्हाट्सएप पर छवियों, विवरण और मूल्य निर्धारण, सुरक्षित ऑनलाइन भुगतान और उत्पादों के आसान साझाकरण विकल्प के साथ उत्पाद कैटलॉग बनाने में मदद करता है। विक्रेता अपनी स्टॉक उपलब्धता के अनुसार कैटलॉग से जोड़ या हटा भी सकते हैं। यह स्थानीय विक्रेताओं को एक डिजिटल व्यवसाय चलाने में सक्षम बनाता है। यह वास्तव में मेड इन इंडिया ऐप है।
आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को आगे ले जाते हुए ‘वोकल फॉर लोकल’ के लिए काम कर रहा है। इस अभियान के साथ ओके शॉप 3000 से अधिक करघों से जुड़ेगा और 6 हजार कारीगरों को इससे सहायता मिलेगी। यह अवसर अब बुनकरों को अपनी बिक्री बढ़ाने और भारत के साथ अपने उत्पादों की उच्च दृश्यता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने के साथ-साथ अपने संभावित उपभोक्ताओं तक सीधे पहुंचने में सक्षम करेगा। इससे जुड़ा कोई आयोग नहीं है, इसलिए बुनकर उपभोक्ताओं को समाप्त करने के लिए अपने उत्पादों को मुफ्त में बेच सकते हैं।
ओके क्रेडिट ने बुनकरों को अपने उत्पादों को जोड़ने के लिए और ग्राहकों को सीधे खरीदने के लिए एक विशेष वेबसाइट भी लॉन्च की है: http://chanderi.okshop.in/
चंदेरी समाज ने सरकार और स्थानीय प्राधिकरणों का भी बड़ा समर्थन देखा है, और शुरुआती 100% मुक्त वाई-फाई समुदाय में से एक है, जो बुनकरों को नवाचार करने और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए अगले कदम उठाने के लिए प्रेरित और सक्षम बनाता है। । डिजिटल सशक्तिकरण का नेतृत्व करने के लिए और इस तरह के छोटे भारतीय व्यवसायों को विकसित करने के लिए ओकेशॉप के माध्यम से ओ’क्रेडिट शीर्ष पर है।
अभियान को लेकर ओके क्रेडिट के सह संस्थापक और सीईओ हर्ष पोखरना ने कहा, ‘ओके शॉप छोटे व्यवसायियों को डिजिटल रूप से सशक्त करने के लिए एक मंच प्रदान करता है, और इस वर्ष दिवाली अभियान छोटे व्यापारियों को इस चुनौतीपूर्ण स्थिति के दौरान विस्तारित निःस्वार्थ समर्थन के लिए आभार और सराहना दर्शाता है; हमें उम्मीद है कि हम चंदेरी समाज में एक बदलाव लाने में सक्षम हैं। ”

आस्था और विश्वास के साथ मनाएं आलोक पर्व दीपावली

सुनीता सुराना, युग्म ऐस्ट्रो कन्सल्टेंसी

दीपावली हमारा सबसे प्राचीन धार्मिक पर्व है। यह पर्व प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह पर्व ‘प्रकाश-पर्व’ के रूप में मनाया जाता है। यह बात और है कि आज का युग दिखावे का युग हो गया है और महंगी लाइट और साज सज्जा को ही हम दीवाली मानते हैं। हकीकत यह है कि दीवाली पर्व के साथ अनेक धार्मिक एवं पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। मुख्यतया: यह पर्व लंकापति रावण पर विजय हासिल करके और अपना चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अपने घर आयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब श्रीराम अपनी पत्नी सीता व छोटे भाई लक्ष्मण सहित आयोध्या में वापिस लौटे थे तो नगरवासियों ने घर-घर दीप जलाकर खुशियां मनाईं थीं। इसी पौराणिक मान्यतानुसार प्रतिवर्ष घर-घर घी के दीये जलाए जाते हैं और खुशियां मनाई जाती हैं।

दीपावली पर्व से कई अन्य मान्यताएं, धारणाएं एवं घटनाएं भी जुड़ी हुई हैं। कठोपनिषद् में यम-नचिकेता का प्रसंग आता है। इस प्रसंगानुसार नचिकेता जन्म-मरण का रहस्य यमराज से जानने के बाद यमलोक से वापिस मृत्युलोक में लौटे थे। एक धारणा के अनुसार नचिकेता के मृत्यु पर अमरता के विजय का ज्ञान लेकर लौटने की खुशी में भू-लोकवासियों ने घी के दीप जलाए थे। यही आर्यवर्त की पहली दीपावली भी मानी जाती है।

इसी दिन श्री लक्ष्मी जी का समुन्द्र-मन्थन से आविर्भाव हुआ था। इस पौराणिक प्रसंगानुसार ऋषि दुर्वासा द्वारा देवराज इन्द्र को दिए गए शाप के कारण श्री लक्ष्मी जी को समुद्र में समाना पड़ा था। लक्ष्मी जी के बिना देवगण बलहीन व श्रीहीन हो गए। इस परिस्थिति का फायदा उठाकर असुर सुरों पर हावी हो गए। देवगणों की याचना पर भगवान विष्णु ने योजनाबद्ध ढ़ंग से सुरों व असुरों के हाथों समुद्र-मन्थन करवाया। समुन्द्र-मन्थन से अमृत सहित चौदह रत्नों में श्री लक्ष्मी जी भी निकलीं, जिसे श्री विष्णु भगवान ने ग्रहण किया। श्री लक्ष्मी जी के पुनार्विभाव से देवगणों में बल व श्री का संचार हुआ और उन्होंने पुन: असुरों पर विजय प्राप्त की। लक्ष्मी जी के इसी पुनार्विभाव की खुशी में समस्त लोकों में दीप प्रज्जवलित करके खुशियां मनाईं गई। इसी मान्यतानुसार प्रतिवर्ष दीपावली को श्री लक्ष्मी जी की पूजा-अर्चना की जाती है।

मार्कंडेय पुराण के अनुसार समृद्धि की देवी श्री लक्ष्मी जी की पूजा सर्वप्रथम नारायण ने स्वर्ग में की।
इसके बाद श्री लक्ष्मी जी की पूजा दूसरी बार ब्रह्मा जी ने,
तीसरी बार शिव जी ने, चौथी बार समुन्द्र मन्थन के समय विष्णु जी ने, पांचवी बार मनु ने और छठी बार नागों ने की थी।

दीपावली पर्व के सन्दर्भ मे भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा एक प्रसंग भी प्रचलित है। इस प्रसंग के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण इसी दिन बाल्यावस्था मे पहली बार गाय चराने के लिए वन में गए थे। संयोगवश इसी दिन श्रीकृष्ण ने इस मृत्युलोक से प्रस्थान किया था। एक अन्य प्रसंगानुसार इसी दिन श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक नीच असुर का वध करके उसके द्वारा बंदी बनाई गई देव, मानव और गन्धर्वों की सोलह हजार कन्याओं को मुक्ति दिलाई थी। इसी खुशी में लोगों ने दीप जलाए थे, जो बाद मे एक परंपरा में परिवर्तित हो गई।
मेरा आप सभी से अनुरोध है कि हमें यह पर्व पौराणिक तरीकों से ही मनाया जाना चाहिए ना कि दिखावे के साथ।

दिवाली पर जगमाती रोशनी की तरह जगमगायें आप

दिवाली की बहुत जोरों-शोरों के साथ तैयारी होती है। दिवाली के दिन क्या पहनें, ये सवाल बहुत से लोगों के मन में आता है जिसके लिए पहले से ही तैयारियां और शॉपिंग में जाना भी शुरू कर देते हैं। लेकिन कोरोना काल की वजह से यदि आप भीड़भाड़ वाली जगह जाने से बचना चाहते हैं और अपनी शॉपिंग नहीं कर पा रहे हैं तो फिक्र करने की जरूरत नहीं है। हम आपको कुछ ऐसे फैशन टिप्स बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने वार्डरोब में रखी पुरानी ड्रेसेस के साथ थोड़ा-सा एक्सपेरिमेंट करके दिवाली का एक बेहतरीन फ्यूजन लुक क्रिएट कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं आपके काम की टिप्स।
प्लाजो आजकल अधिकतर महिलाओं की पहली पसंद बनी हुआ है। अगर आपके पास कोई सिल्क या सेमी गिल्टर शर्ट है तो आप इसे किसी प्लाजो के साथ टीमअप करके पहन सकती हैं। ये आपको स्टाइलिश लुक देगा। आजकल आपने अधिकतर बॉलीवुड डीवा को रफल टॉप के साथ साड़ी कैरी करते हुए देखा ही होगा। यह लुक आप भी रिक्रिएट कर सकती हैं। आप रफल टॉप के साथ साड़ी कैरी कर सकती हैं।

इन दिनों पटियाला सलवार के ऊपर शार्ट कुर्ती पहनने का फैशन काफी चल रहा हैं। फेस्टिवल माहोल में पूरी तरह ढलने के लिए आप इस सलवार कुर्ती के ऊपर मोतियों की माला और अन्य गहने भी पहन सकती हैं। इस सलवार कुर्ती पर चार चाँद लगाने के लिए एक ट्रेंडी दुपट्टा डालना ना भूले। दिवाली एक ब्राईट फेस्टिवल हैं इसलिए इस दिन ब्राईट कलर की सलवार कुर्ती पहनना सही रहेगा। आप चाहे तो नारंगी, हरा, नीला, गुलाबी जैसे रंगों का चुनाव कर सकती हैं। यदि आपको लम्बे और लहराते हुए कपड़े पहनना पसंद हैं तो आप अनारकली सूट आजमा सकती हैं। जब आप दिवाली के लिए अनारकली सूट खरीदने जाए तो कोशिश करे कि आप कढ़ाई (एम्ब्राईडी) वाले सूट ही ख़रीदे। यह ख़ास डिजाइन वाले सूट त्योहारों पर बहुत जचते हैं और आपको एक बोल्ड व रॉयल लुक देते हैं। इस सूट के ऊपर डिजाइनर गहने पहनना ना भूले और दीये जलाते समय इनको न पहनें। इस दिन आप हरा, नारंगी, नीला कलर का लहंगा ट्रॉय कर सकती हैं। लहंगा सिंपल या मीडियम वर्क वाला होना चाहिए। इसके ऊपर ज्यादा गहने ना पहनें। इस त्योहार के सीजन में अलग अंदाज में नजर आने के लिए आप गले के लंबे हार के साथ एक कम लंबाई वाला हार और परंपरागत कड़े के साथ कफ्स या चौड़ा ब्रेसलेट पहन सकती हैं।
आप ब्रेसलेट के साथ प्रयोग कर सकती हैं।आप स्नेक चेन ब्रेसलेट, बैंगल या लेदर ब्रेसलेट पहन सकती हैं। ये भारतीय और पश्चिमी परिधान दोनों के साथ खूब जमते हैं।
इस प्रकार बनी रहेगी चेहरे की चमक 
दिवाली में पटाखों से होने वाले प्रदूषण से स्वास्थ्य पर खराब असर तो पड़ता ही है साथ ही इससे चेहरे का ग्लो भी कम हो जाता है। वहीं दिवाली के समय हम अपने खाने पर भी नियंत्रण नहीं रख पाते। मीठे के साथ ही मसालेदार, तीखा, चटपटा खाना हमारी डाइट में शामिल हो जाता है। इससे चेहरे पर पिंपल हो जाते है। इन सब समस्याओं से बचाव के लिए विटामिन ई युक्त क्रीम का प्रयोग करें।
रोजाना 8-10 ग्लास पानी जरूर पीयें। इससे चेहरे की चमक बरकरार रहती है।
मीठे पर नियंत्रण रखें। ज्यादा मीठा और तला खाना खाने से वजन बढ़ने का डर तो रहता ही है, साथ ही त्वचा में एलर्जी होने का भी खतरा रहता है।