Saturday, June 27, 2026
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रौनक कम हुई है मगर हिम्मत नहीं टूटी बड़ाबाजार के व्यवसायियों की

आज दिवाली है और दिवाली पर शहर की रौनक का कोई जवाब नहीं होता। कोरोना के कारण बाजार की चमक पर असर पड़ा है. यह सच है मगर शहर अपनी रौनक से महामारी पर जीवन की जीत का सिक्का जमा रहा है। कोलकाता में दिवाली पर बड़ाबाजार इलाके में दुकानें सज उठती हैं, नजारा ऐसा होता है कि इलाके की गलियों में तिल रखने की भी जगह नहीं मिलती मगर इस बार ऐसा नहीं है। अलबत्ता कोरोना के कारण व्यवसायी सजग हैं और जब आप बड़ाबाजार के कॉटन स्ट्रीट इलाके में दिवाली बाजार की हलचल देखने जाते हैं तो इस बात का पता तब चलता है जब आप स्टॉलों पर नो मास्क, नो सेल की नोटिस देखते हैं। मोलभाव पहले की तरह चल रहे होते हैं, थोड़ी नोंक – झोक…यही तो लॉकडाउन के दिनों में याद आती रही है। गलियों से गुजरते हुए मिठाई की खुशबू, तोरण, रंग – बिरंगे दीये, स्टीकर…जब दिखते हैं…तो कदम बस ठहर जाते हैं। धनतेरस की धमक बर्तनों की दुकानों पर मौजूद दिखी।


रवीन्द्र सरणी पर 100 साल से अधिक पुरानी बर्तनों की दुकान बैजनाथ प्रसाद महावीर प्रसाद स्थित है, वक्त के साथ अब यहाँ पर स्टील, पीतल और कांसे के बर्तन, बाल्टी, टिफिन बॉक्स से लेकर घरेलू उपकरण तक मिलते हैं। यहाँ के प्रतिनिधि किशन केसरवानी कहते हैं कि कोरोना का असर तो पड़ा है मगर बाजार पहले की तुलना में 10 – 15 प्रतिशत सुधर रहा है। जाहिर है कि कोरोना का असर खरीददारी पर पड़ा है…खरीददारी हो भी रही है बस बर्तनों के मामले में अब बजट पर जोर दिया जा रहा है।
रवीन्द्र सरणी से हम आगे बांसतल्ला की ओर चले तो गली में दिनेश सोनकर की सजी – धजी दुकान मिली और खासियत यह है कि आप यहाँ एक ही दुकान से दिवाली और पूजा का सारा सामान खरीदते हैं। लक्ष्मी – गणेश की मूर्ति, तोरण, रंगोली, पूजा सामग्री, मोमबत्ती, यहाँ पर सब उपलब्ध है। सोनकर बिक्री से खुश नजर नहीं आये…जाहिर है कि कोरोना की मार से जब बिक्री ठप हो जाए तो व्यवसायी खुश रहे भी तो कैसे।


जब आप बांसतल्ला से आगे निकलते हैं तो बड़ाबाजार का वह इलाका नजर आता है..जहाँ एक साथ कई दुकानें लगती हैं। दिवाली के तीन दिन पहले से ही यहाँ पर बड़े वाहनों का प्रवेश निषेध हो जाता है…। दूर – दूर तक सजे – धजे स्टॉल दिखते हैं और खरीददारों की भीड़। बड़ाबाजार छोड़कर कहीं और बस जाने वाले भी दिवाली की खरीददारी के लिए बड़ाबाजार का ही रुख करते हैं….दुकानें तो अब भी हैं मगर सख्त ताकीद के साथ ही मास्क न पहनने वालों से कोई सौदा नहीं होगा। सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मी भी हैं और इनकी पैनी नजर हर चीज पर है।

हैरत की बात यह है कि लोग उन चीजों को लेकर भी मोलभाव करते दिखे जिसे वे शॉपिंग मॉल से मनमानी कीमत पर खरीदते हैं। ख्याल अपना – अपना हो सकता है मगर क्या मनमानी न सही, कीमतें जब वाजिब हों तो क्या मोलभाव जरूरी है? ये तो निर्णय आपका है मगर लक्ष्य तो हम सबका एक ही है…आत्मनिर्भर भारत..तो बैठे क्यों हैं…और किसी त्योहार का ही इन्तजार क्यों…आम दिनों में भी स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन दीजिए…वोकल फॉर लोकल बनिए…खरीददारी…स्थानीय लोगों से ही करिए।

ऐ सखी सुन – एक दीपावली ऐसी हो जो मानव मुक्ति का प्रकाश बिखराए

गीता दूबे

भाग -4 

सभी सखियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ। दीपक की तरह जगमगाइए और दीपावली मनाइए। हर भारतीय त्यौहार की तरह यह त्यौहार भी बुराई पर अच्छाई की विजय के उपलक्ष्य में घर परिवार की खुशहाली के लिए मनाया जाता है। हालांकि है तो यह देवी पूजा का त्यौहार लेकिन इस देवी को प्रसन्न करने के लिए अपने घर को साफ सुथरा रखना, सजाना और संवारना पड़ता है जिसके लिए देवी की छोटी बहनें या पुत्रियां अतिरिक्त मेहनत करती हैं। याद कीजिए वह जमाना जब घर मिट्टी के हुआ करते थे। तब फर्श पर पोंछा नहीं लगाया जाता था बल्कि उसे लीपना पड़ता था। गोबर, मिट्टी और पानी को मिलाकर एक घोल बनाया जाता था और उस घोल को कपड़े (पोतनहर) की सहायता से जमीन पर फैलाते हुए फर्श को चिकनाया जाता था। मिट्टी की दीवारे भी वैसे ही लीपी जाती थीं। बहुधा यह काम घर की औरतें ही करती थीं। तब से आज तक भारतीय समाज और घरों में क्रांतिकारी परिवर्तन आ चुका है। तमाम तरह के फिनाइल और जमीन की सतह को कीटाणु मुक्त करनेवाले रसायनिक घोल बाजार में उपलब्ध हैं लेकिन एक बात अब भी नहीं बदली वह है, महिलाओं की भूमिका। जब भी हम टेलिविजन पर इन सफाई घोलों का विज्ञापन देखते हैं तो उस विज्ञापन में महिलाओं की उपस्थिति अनिवार्य होती है जैसे यह जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ महिलाओं की ही हो। वैसे विज्ञापन किसी भी वस्तु का क्यों ना हो महिलाओं और वह भी खूबसूरत और आकर्षक महिलाओं की उपस्थिति मानो अनिवार्य सी होती है। खैर बात करें दीपावली जैसे त्यौहार की जिसमें गृहलक्ष्मी पर न केवल घर को सजाने संवारने की जिम्मेदारी होती है बल्कि ढेरों पकवान बनाकर सबकी जिह्वा को संतृप्त करने का काम भी करना पड़ता है। और इन तमाम कमर तोड़ू कामों के उपरांत स्वयं भी सज संवर कर त्यौहार की खुशियों का हिस्सा होना पड़ता है। प्रश्न यह है कि होली हो या दीपावली, त्यौहार को आनंददायक बनाने एवं सबके चेहरे पर मुस्कान खिलाने की जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ महिलाओं की ही क्यों होती है। हालांकि कहने को जमाना बदल रहा है, हम आधुनिकता की परिधि को लांघ कर उत्तर आधुनिकता की ओर न जाने कब बढ़ गये लेकिन शायद यह आधुनिकता ऊपरी ताम झाम और साहित्य तक ही सुरक्षित रह गई हैं। अपनी मानसिक बुनावट में हम अब भी मध्ययुगीन ही हैं। तभी तो इस तथाकथित उत्तर आधुनिक दौर में भी स्त्री और‌ पुरूष के लिए अलग- अलग नियम कायदे हैं। अवसर कोई भी हो , स्त्रियों की जिम्मेदारियों का भार हमेशा पुरूषों से कुछ ज्यादा ही होता है। त्याग तपस्या की घुट्टी पिलाकर और मर्यादा का पाठ पढ़ाकर उनके इर्द-गिर्द जिम्मेदारियों की एक ऐसी लक्ष्मण रेखा खींच दी जाती है जिसके अंदर वह कितना भी क्यों ना कसमसा लें लेकिन उसे लांघने की हिम्मत नहीं कर पातीं क्योंकि वे उसका परिणाम जानती हैं। पौराणिक इतिहास के अध्यायों ने उन्हें सिखा दिया है कि लक्ष्मण रेखा का अतिक्रमण करनेवाली स्त्री को कहीं ठौर ठिकाना नहीं मिलता है। अगर जनक की दुहिता और दशरथ की पुत्रवधू सीता को न केवल अग्निपरीक्षा देनी पड़ी बल्कि गर्भावस्था में भी निष्कासन की पीड़ा तक झेलनी पड़ी तो साधारण नारी की बिसात ही क्या। याद कीजिए राम के वनवास काट कर अयोध्या लौटने की खुशी में दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है लेकिन सीता जो राम के हर दुख सुख में साथ रहीं। यह कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने सुख की अपेक्षा दुख ही अधिक देखा और इस दुख ने उन्हें राजरानी से विषाद की मूर्ति में परिवर्तित कर दिया। सीता का वनवास तो कभी समाप्त ही नहीं हुआ। वह तो अस्थायी राजरानी बनीं जिन्होंने अपने पति अयोध्या के राजा राम अथवा मर्यादापुरुषोत्तम राम की तथाकथित मर्यादा का  भार आजीवन ढोया। आज राम की अयोध्या दीपावली के लिए दुल्हन सी सज रही है लेकिन उस राम के बगल में सीता का स्थान अभी तक रिक्त हैं। न जाने सीता की अयोध्या वापसी कब होगी। लोक कवि तुलसीदास ने लिखा है-

“सिय राम मय सब जग जानी, करहु प्रणाम जोरी जुग पानी ।।” 

हालांकि राम के साथ सीता हर मंदिर में खड़ी दिखाई देती हैं लेकिन राम के जीवन में वह अपने निष्कासन के उपरांत दोबारा कभी नहीं लौटी, यह रामकथा का सामान्य पाठक भी जानता है, शायद इसीलिए लोक गीतों की सीता अपना विषाद और आक्रोश इस तरह व्यक्त करती हैं-

“सवना भादौना क रतिया, मैं गरुए गरभ से रे

गुरु ऊई रामा घर से निकारें, लौटि नहीं चितवहि रे?

*****  *****   ******

गुरु फाटै जो धरती समाबे, अजोध्या नहीं जाबै रे

गुरु फेर हियें चली औबे, राम नहीं देखबै रे”

 तो सखियों जब सीता जैसी रानी की ऐसी स्थिति हो सकती है तो सामान्य स्त्री अपने साधारण से जीवन में न जाने कितने दुख, दर्द संताप झेलने को विवश होती है। यह दीपावली उन तमाम स्त्रियों को समर्पित है जो सीता की तरह दर्द तो झेलती हैं लेकिन उनकी व्यथा कथा अलिखित ही रह जाती है। दीयों की झिलमिलाहट और उसकी रोशनी की पृष्ठभूमि में उन तमाम स्त्रियों का दर्द संचित रहता है जो समाज निर्मित तथाकथित मूल्यों, यथा- समर्पण, त्याग और तपस्या के बल पर गृहालक्ष्मी के पद पर न केवल आसीन होती हैं बल्कि उस पर निरंतर बने रहने का दंड भी झेलती हैं। यह यंत्रणादायक गौरवमई परंपरा कभी ना कभी अवश्य अंतिम साँस लेगी, इस कामना के साथ दीपावली मनाएँ। एक ऐसी दीपावली जो मानव मुक्ति का प्रकाश बिखराए और उस प्रकाश में असूर्यम्श्या नारियाँ भी आलोकित हो मुक्ति की साँस ले सकें। तो फिलहाल विदा सखियों। अगले हफ्ते फिर मुलाकात होगी।

ग्लोबल मेंहदी ब्राइडल कॉन्टेस्ट

मेंहदी लगाने का शौक है तो आप इस प्रतियोगिता में हाथ आजमा सकती हैं। अंतिम तिथि 7 दिसम्बर 2020 है

दिवाली की शुरुआत और धन्वन्तरी के आगमन का दिन है धनतेरस

सुनीता सुराना, युग्म एस्ट्रो कन्सल्टेंसी

धनतेरस के दिन से ही भगवान गणेश, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा शुरू हो जाती है। कुबेर को चांदी अत्याधिक प्रिय है। इसलिए धनतेरस के दिन चांदी के सिक्के खरीदने का भी विधान है। धनतेरस पर बर्तन खरीदना काफी शुभ माना जाता है।
हिंदू धर्म में धनतेरस को विशेष महत्व दिया जाता है। धनतेरस के दिन से ही भगवान भगवान गणेश , मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा शुरू हो जाती है और यह पूजा दीवाली तक चलती है। मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन नई चीजें घर में लाने से घर में मां लक्ष्मी और कुबेर का वास होता है और घर में कभी भी पैसों की कमीं नहीं होती ।

धनतेरस के दिन सोना, चांदी, पीतल और धातुओं के बर्तन आदि खरीदने से उन्नति के सभी रास्ते अपने आप खुल जाते हैं। धनवंतरी जिस समय समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे । उस समय उनके हाथ में पीतल का अमृत कलश था । इसलिए इस दिन पीतल के बर्तन भी खरीदे जाते हैं। धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
धनतेरस से ही दीपोत्सव का आरंभ होता है।
जैन साहित्य प्राचीनत में धनतेरस को ‘धन्य तेरस’ या ‘ध्यान तेरस’ भी कहते हैं। जैन मान्यता के अनुसार भगवान महावीर इस दिन ध्यान के लिए चले गए थे और तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुए दिवाली के दिन निर्वाण (मोक्ष) को प्राप्त हुए। तब से धनतेरस का दिन जैन आगम में धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध है।

धनतेरस के दिन झाडू खरीदने को भी काफी शुभ माना जाता है। मान जाता है कि इस दिन झाडू खरीदने और सफाई करने से सभी नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। इस दिन घर के प्रत्येक कोने में सफाई की जाती है जिससे माँ लक्ष्मी और कुबेर की कृपा सदैव बनी रहे और भगवान गणेश रिद्धि-सिद्धि के साथ घर मे प्रवेश करें

अमेरिका के नए राष्ट्रपति चुने गए जो बाइडेन

4 दिनों तक चली वोटों की गिनती के बाद अमेरिका को अपना 47वां राष्ट्रपति जो बाइडेन के तौर पर मिल गया है। 78 साल के बाइडेन ने राष्ट्रपति बनकर एक दिलचस्प रिकॉर्ड बनाया है। वह अमेरिका के सबसे युवा सिनेटर बने थे और अब सबसे बुजुर्ग राष्ट्रपति बन गए हैं। राष्ट्रपति चुनाव में बाइडेन को 290 इलेक्टोरल सीट हासिल हुआ है जबकि जीतने के लिए उन्हें 270 इलेक्टोरल सीट की जरूरत थी। दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप को सिर्फ 214 इलेक्टोरल सीट हासिल हुई थी।

चुनाव जीतने के बाद बाइडेन ने कहा, “मैं हर अमेरिकी नागरिक का राष्ट्रपति हूं, चाहे उन्होंने मुझे वोट किया हो या ना किया हो।” बाइडेन का राष्ट्रपति बनना भारत-अमेरिका संबंधों के लिए बेहतर होगा। जुलाई में बाइडेन ने फंड रेजिंग के दौरान कहा था कि भारत और अमेरिका नेचुरल पार्टनर हैं। उन्होंने कहा था, “हमारी सुरक्षा के लिए पार्टनरशिप..यानी एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की जरूरत है।”

बाइडेन का सफर

बाइडेन का जन्म 1942 में एक कैथोलिक परिवार में हुआ था । जो बाइडेन ने यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर से पढ़ाई की और 1968 में साइराकुज यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की थी।  1972 में बाइडेन पहली बार सीनेटर चुने गए थे। वह स्टेट ऑफ डेलावेयर से 6 बार सीनेटर चुने गए हैं। 29 साल में बाइडेन को पहली बार अमेरिका का सीनेटर नियुक्त हुए थे। इसके बाद 1988 और 2008 में बाइडेन डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रेसिडेंट पद के कैंडिडेट तो बने लेकिन तीसरी बार में ही पार्टी ने उनका नाम राष्ट्रपति पद के लिए आगे बढ़ाया।

 

जिंदगी का मुश्किल सफर 

बाइडेन का पारिवारिक जीवन काफी मुश्किल भरा रहा है। 1972 में एक कार क्रैश में उनकी पत्नी नेलिया और उनकी 13 साल की बेटी नाओमी की मौत हो गई थी। इस हादसे में बाइडेन के दोनों बेटे ब्यू (Beau) और हंटर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद 1975 में बाइडेन जिल जैकब से मिले और जून 1977 में शादी की। उनसे 1981 में बाइडेन को एक बेटी-एश्ले-हुई। 2015 में ब्यू की 46 साल में ब्रेन ट्यूमर से मौत हो गई। ब्यू इराक वॉर में शामिल थे और डेलावेयर के अटर्नी जनरल थे। बाइडेन का दूसरा बेटा हंटर युवा अवस्था में ड्रग की लत से जूझ रहे थे।  बाइडेन की सेहत भी 1988 में काफी खराब हो गई थी। वह brain aneurysms से जूझ रहे थे। 2019 में उनकी पूर्व स्टाफ तारा रीडे ने उनपर सेक्सुअल हैरासमेंट का आरोप लगाया था। तारा का आरोप था कि 90 के दशक में बाइडेन के साथ काम करते हुए वह असहज थीं। वह 1993 में भी सेक्सुअल असॉल्ट का आरोप लगा चुकी है। लेकिन 2020 में बाइडेन और उनकी कैंपेन टीम ने इस आरोप का खंडन किया।

बिहार चुनाव: राजग को पूर्ण बहुमत, एक बार फिर नीतीश सरकार

पटना : बिहार में सत्ता विरोधी लहर और विपक्ष की कड़ी चुनौती को पार करते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 243 सीटों में से 125 सीटों पर जीत प्राप्त कर बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया।

भले ही राजग ने बहुमत हासिल किया है, लेकिन इस चुनाव में विपक्षी ‘महागठबंधन’ का नेतृत्व कर रहा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 75 सीटें अपने नाम करके सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरा है। मतगणना के शुरुआती घंटों में बढ़त बनाती नजर आ रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 16 घंटे चली मतों की गिनती के बाद 74 सीटों के साथ दूसरा स्थान मिला। विपक्षी महागठबंधन ने कुल 110 सीटें जीतीं। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद के सर्वाधिक सीटें हासिल करने के बावजूद महागठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर पाया।

राजग के बहुमत हासिल करने के साथ ही नीतीश् कुमार के लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की राह साफ हो गई है। हालांकि इस बार उनकी पार्टी जद(यू) को 2015 जैसी सफलता नहीं मिली है। जद(यू) को 2015 में मिली 71 सीटों की तुलना में इस बार 43 सीटें ही मिली हैं। उस समय कुमार ने लालू प्रसाद की राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव जीता था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा प्रमुख जे पी नड्डा समेत राजग पहले ही कुमार को मुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार घोषित कर चुका हैं। इसलिए भले ही कुमार की पार्टी का प्रदर्शन गिरा है, कुमार चौथी बार सरकार का नेतृत्व करेंगे।
जद(यू) को चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के कारण काफी नुकसान झेलना पड़ा है। लोजपा को एक सीट पर जीत मिली, लेकिन उसने कम से कम 30 सीटों पर जदयू को नुकसान पहुंचाया।

जद(यू) के प्रवक्ता के सी त्यागी ने नयी दिल्ली में ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि एक ‘‘साजिश’’ के तहत नीतीश कुमार के खिलाफ ‘‘अपमानजनक अभियान’’ चलाया गया। उन्होंने बगैर किसी का नाम लिए कहा, इसमें ‘‘अपने भी शामिल थे और बेगाने भी।’’

उन्होंने हालांकि उम्मीद जताई कि नीतीश कुमार फिर से बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार ही राजग सरकार का नेतृत्व करेंगे।

भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने गठबंधन की जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया। उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘राजग ने अपनी गरीब हितैषी नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण जीत दर्ज की। जनता ने मोदी के नेतृत्व पर एक बार फिर विश्वास जताया है।’

यह पूछे जाने पर कि क्या मुख्यमंत्री को लेकर कोई बदलाव किया जाएगा, क्योंकि भाजपा को अपने गठबंधन सहयोगी जद(यू) से अधिक सीटों पर विजय मिली है तो जायसवाल ने कहा कि दोनों दल एक साथ लड़े और चुनाव से पहले ही नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया था।

भाजपा की 74 और जदयू की 43 सीटों के अलावा सत्तारूढ़ गठबंधन साझीदारों में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को चार और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को चार सीटें मिलीं। विपक्षी महागठबंधन में राजद को 75, कांग्रेस को 19, भाकपा माले को 12 और भाकपा एवं माकपा को दो-दो सीटों पर जीत मिली।

इस चुनाव में एआईएमआईएम ने पांच सीटें और लोजपा एवं बसपा ने एक-एक सीट जीती है। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहा है। हालांकि जद(यू) की घटी हुई ताकत के बाद भाजपा मंत्रिपदों के बंटवारे में अधिक हिस्सा दिए जाने का दबाव बना सकती है। महागठबंधन को मुस्लिम वोट बंटने का भी नुकसान हुआ। मुस्लिम वोट एआईएमआईएम, बसपा और आरएसएलपी समेत पार्टियों के बीच बंटने का लाभ राजग को मिला।

असदुद्दीन आवैसी की एआईएमआईएम ने चुनाव में हैरान करते हुए पांच सीटों पर कब्जा किया और उसकी सहयोगी बसपा ने भी एक सीट पर जीत हासिल की। तेजस्वी यादव पिछले साल लोकसभा चुनाव में राजद के खाता भी न खोल पाने के बाद इस बार पार्टी को सर्वाधिक सीटें जीतने वाली पार्टी बनाने में कामयाब रहे।

मुख्य रूप से दो गठबंधनों के बीच हुए इस मुकाबले में वाम दलों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। भाकपा माले को 12 और उसके बाद भाकपा एवं माकपा को दो-दो सीटें मिली। निवर्तमान विधानसभा में भाकपा माले की तीन सीटों के अलावा सदन में वाम दलों की कोई मौजूदगी नहीं थी।

तेजस्वी यादव और तेज प्रताप ने राघोपुर एवं हसनपुर सीटों पर क्रमश: 38,174 और 21,139 मतों के अंतर से शानदार जीत हासिल की।

पोत परिवहन मंत्रालय का नाम हुआ बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल में की गयी घोषणा के अनुरूप केंद्र सरकार ने पोत परिवहन मंत्रालय का नाम बदलकर बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय कर दिया है।
मंत्रिमंडल सचिवालय की अधिसूचना के मुताबिक इस मंत्रालय के तहत पोत परिवहन और नौवहन, समुद्री व्यापार के लिए शिक्षण एवं प्रशिक्षण, प्रकाशस्तंभ और प्रकाशपोत, बंदरगाहों, पोत परिवहन और नौवहन का प्रशासन काम करेगा। इसमें राष्ट्रीय जलमार्गों के जरिए यात्रियों एवं माल की आवाजाही भी शामिल है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना में कहा गया है कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 77 के खंड (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके और भारत सरकार (कार्य का आवंटन) नियम, 1961 में संशोधन करके लिया गया था।
विभिन्न स्वायत्त निकाय जैसे मुंबई, कोलकाता और अन्य बंदरगाह न्यास, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और भारत के पोत परिवहन निगम भी मंत्रालय के अंतर्गत आएंगे।
मोदी ने रविवार को गुजारत के घोघा और हजीरा के बीच रोपैक्स फेरी सेवा के शुभारंभ के मौके पर कहा था कि पोत परिवहन मंत्रालय का विस्तार किया जा रहा है और अब इसका नाम बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय होगा।

व्हाट्सऐप करने जा रहे हैं भुगतान तो रखिए यह जानकारी

नयी दिल्ली : कई सालों तक कानूनी अड़चनों का सामना करने के बाद पिछले हफ्ते ही फेसबुक के स्वामित्व वाले वाट्सएप ने डिजिटल पेमेंट्स के क्षेत्र में कदम रखा है। वाट्सएप (WhatsApp) ने शुरुआती दौर में अपने लगभग 40 करोड़ के यूजर बेस में से दो करोड़ ग्राहकों के लिए इस सेवा की पेशकश की है। आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जो आपको पता होना चाहिए, अगर आप वाट्सएप के जरिए पेमेंट्स करने जा रहे हैं।
रजिस्ट्रेशन
वाट्सएप के माध्यम से पेमेंट करने के लिए आपके पास एक बैंक अकाउंट और उससे लिंक्ड एक मोबाइल नंबर होना चाहिए। इसके बाद आपको पहले अपना बैंक अकाउंट एड करना होता है और एक यूपीआई पिन सेट करना होता है। अगर आपके पास पहले से यूपीआई पासकोड है, तो आप उसका भी उपयोग कर सकते हैं।
यूपीआई पर काम करती है वाट्सएप पेमेंट सुविधा
वाट्सएप पर पेमेंट्स की सुविधा गूगल पे, फोन पे, भीम और अन्य बैंक एप्स की तरह ही यूपीआई (UPI) पर कार्य करती है। इसलिए आपको वाट्सएप के वॉलेट में पैसा रखने की जरूरत नहीं है। आप अपने बैंक अकाउंट से सीधे पेमेंट कर सकते हैं। जब आप पेमेंट्स के लिए रजिस्टर करेंगे, तो वाट्सएप एक फ्रेश यूपीआई आईडी क्रिएट करेगा। आप ऐप के पेमेंट्स सेक्शन पर जाकर इस आईडी को देख सकते हैं।

पेटीएम छोटे व्यवसायियों को देगी 1000 करोड़ का कर्ज

नहीं देनी होगी कोई गारंटी
नयी दिल्ली : पेटीएम ने अगले साल मार्च तक दुकानदारों को 1,000 करोड़ रुपये के कर्ज वितरण यानी लोन डिस्ट्रीब्यूशन का लक्ष्य रखा है। कम्पनी ने कहा कि वह अपने बिजनेस ऐप के यूजर्स को ‘दुकानदार ऋण कार्यक्रम’ के तहत बिना गारंटी वाला कर्ज उपलब्ध कराना जारी रखेगी। पेटीएम ने बयान में कहा है, ‘‘हम अपने 1.7 करोड़ दुकानदारों के आंकड़ों के आधार पर कारोबार क्षेत्र को 1,000 करोड़ रुपये का ऋण प्रदान करेंगे। इस ऋण के जरिये दुकान मालिक अपने कारोबार का डिजिटलीकरण कर सकेंगे और परिचालन में विविधता ला सकेंगे। इससे उनकी दक्षता में सुधार होगा और उन्हें डिजिटल इंडिया मिशन में शामिल होने में मदद मिलेगी।’’
कम्पनी का कहना है कि उसका लक्ष्य 1,000 करोड़ रुपये का कर्ज मार्च तक वितरित करने का है। पेटीएम दुकानदारों के रोजाना के लेनदेन के आधार पर उनकी ऋण पात्रता तय करती है और उसके बाद गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों (एनबीएफसी) और बैंकों के साथ भागीदारी में बिना गारंटी वाला ऋण उपलब्ध कराती है।
बयान में कहा गया है कि वह सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) की वृद्धि के लिए निचली ब्याज दरों में पाँच लाख रुपये तक के गारंटी-मुक्त ऋण का विस्तार कर रही है। इस ऋण की वसूली दुकानदार के पेटीएम के साथ रोजाना के निपटान के आधार पर की जाती है और इसके समय से पहले भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। पेटीएम का दावा है कि उसने पिछले वित्त वर्ष में 1 लाख से ज्यादा मर्चेंट पार्टनर्स को 550 करोड़ रुपये के कर्ज दिए।

मशहूर उद्योगपति रतन टाटा ने किया हेल्थकेयर स्टार्ट अप आई क्योर में निवेश

नयी दिल्ली : हेल्थकेयर सर्विसेज स्टार्टअप आईक्योर ने कहा कि दिग्गज उद्योगपति और टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा ने कम्पनी में निवेश किया है। कम्पनी ने निवेश की रकम के बारे में जानकारी नहीं दी। आईक्योर क्लिनिक्स, डिजिटल टेक्नोलॉजीज और प्रशिक्षित फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों के जरिये प्राइमरी हेल्थकेयर सर्विसेज प्रदान करती है।
कम्पनी ने कहा कि नए फंड से वह देशभर में और ग्लोबल लेवल पर तेजी से अपना कारोबार बढ़ाना चाहती है। टाटा के निवेश के बारे में आईक्योर के संस्थापक और सीईओ सुजय सांतरा ने कहा कि हमें खुशी है कि रतन टाटा ने निवेश के बारे में सोचा है। हम अत्यधिक सम्मान और प्रोत्साहन महसूस करते हैं।
अगले 5 साल में 1 करोड़ ग्राहकों तक पहुँचने का लक्ष्य
अभी तक आईक्योर ने देश के 7 राज्यों में 11 लाख से ज्यादा लोगों को प्राइमरी हेल्थकेयर सर्विसेज दी है। कंपनी अगले 5 साल में 1 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों तक अपनी सेवा पहुंचाना चाहती है। कंपनी ने बताया कि प्राइमरी हेल्थकेयर सर्विसेज देने में उसे एक्सेसेबिलिटी, अफॉर्डेबिलिटी, अवेलेबिलिटी और अवेयरनेस जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
अफ्रीका के कई देशों में आईक्योर के टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है।