Sunday, June 28, 2026
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40 रुपये में भरपेट खाना खिलाते हैं, गरीबों से पैसे नहीं लेते बचुदादा

मोरबी : 72 साल के बचुदादा गुजरात के मोरबी शहर में अपना ढाबा चलाते हैं। कहते हैं कि जब तक थक नहीं जाता, लोगों को खाना खिलाना चाहता हूँ। कुछ दिन पहले दिल्ली के एक बुजुर्ग दंपती का वीडियो ‘बाबा का ढाबा’ नाम से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में बुजुर्ग दंपती लॉकडाउन और उसके बाद की अपनी वेदना बताते नजर आ रहे थे कि उनके यहां लोग खाना खाने नहीं आ रहे। इसके बाद यह वीडियो कुछ सेलिब्रिटीज ने भी अपलोड किया था और उनके ढाबे पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। कुछ ऐसी ही कहानी है गुजरात के मोरबी शहर में स्थित ‘बचुदादा का ढाबा’ की। जहां, सुबह 11 बजे से ही भीड़ उमड़ने लगती है और वह इसलिए कि बचुदादा पिछले 40 सालों से बहुत की कम पैसे में लोगों को भरपेट खाना खिलाते आ रहे हैं। इतना ही नहीं, जिनके पास पैसे नहीं होते, वे यहाँ मुफ्त में भी खा सकते हैं। 72 साल के हो चुके बचुदादा अकेले ही ढाबा चला रहे हैं। ढाबे पर रोजाना 100 से 150 लोग आते हैं। बचुदादा मोरबी के रंगपुर गांव के रहने वाले हैं और 30-40 सालों से मोरबी शहर में ही रह रहे हैं। वे मोरबी शहर के स्टेशन के पास एक झोपड़ी में रहते हैं और पास ही में उनका ढाबा चलता है। ढाबे का साइज तो काफी छोटा है, लेकिन इसका नाम आज बहुत बड़ा हो चुका है, यानी फेमस। वैसे तो खाने की पूरी थाली का रेट 40 रुपये है, लेकिन यह सिर्फ नाम का है। अगर किसी के पास कम हों तो वह 10 या 20 रुपए भी दे सकता है और बचुदादा खुशी-खुशी ये पैसे ले लेते हैं। जिनके पास बिल्कुल भी पैसे न हों तो वे मुफ्त में भी खा सकते हैं। बचुदादा बताते हैं कि अपनी थाली का रेट 40 रुपये उन्होंने इसलिए रखा है, जिससे खर्च निकल सके। इसी के चलते तो वे आज तक झोपड़ी में ही रह रहे हैं। बचुदादा की जिंदगी का मकसद सिर्फ गरीब लोगों को पेट भरने का है। इतना ही नहीं, उनकी थाली में तीन स्वादिष्ट सब्जियां, रोटी-दाल-चावल, पापड़ और छाछ भी शामिल रहता है। जबकि, आज के समय में एक सामान्य होटल में भी इतने खाने का रेट कम से कम 100 रुपए तो होता ही है। उनका ढाबा जिस जगह है, उसके आसपास गांवों में गरीब लोग रहते हैं इसलिए रोजाना 10 से 15 लोग यहां पेट भरने चले आते हैं। इनके लिए सबसे बड़ी बात है बचुदादा का स्वभाव और उनका गरीब लोगों के प्रति प्यार। वो कहते हैं कि उनके यहां आया व्यक्ति भूखा नहीं जाना चाहिए। चाहे उसके पास कम पैसे हों या बिल्कुल भी न हों। बचुदादा के परिवार में एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है और अब वह ससुराल में है। वहीं, 10 महीने पहले पत्नी की मौत हो गई। पहले ढाबे पर पत्नी के साथ बेटी भी हाथ बंटाया करती थी, लेकिन अब दोनों के न होने के चलते बचुदादा अकेले ही ढाबा संभाल रहे हैं। मोरबी शहर में रहने वाले कमलेश मोदी नाम के एक युवक ने बचुदादा के ढाबे का वीडियो यू-ट्यूब पर अपलोड किया था। यह वीडियो रातों-रात सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। बचुदादा के ढाबे पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी। पहले जहां दिन भर में उनके ढाबे पर 30 से 40 लोग ही आया करते थे। अब वहीं यह संख्या 150 तक पहुंच चुकी है।
72 साल के बचुदादा ने बताया कि एक बार मोरारी बापू यहां आए थे और मुझसे कहा था कि बचुदादा ये सेवाकार्य हमेशा जारी रखना। यह उनका आशीर्वाद ही है कि मेरा यह काम जारी है। बचुदादा कहते हैं कि अभी मैं एक थाली के 40, 30, 20, और 10 रुपए तक लेता हूं और जिनके पास पैसे नहीं होते, उन्हें फ्री में खिलाता हूं। फ्री में खाने वालों की संख्या रोजाना 10-15 हो जाती है और बाकी के 100 से 150 लोग रोज खाना खाते हैं। एक थाली में जो व्यक्ति जितना भी खाना चाहे, खा सकता है। मुझे तो यह काम तब तक करना है, जब तक कि मैं थक नहीं जाता।

(साभार – दैनिक भास्कर)

नौकरी छोड़ने या बदलने पर जल्द नहीं निकालें पीएफ खाते में जमा रकम

नयी दिल्ली : आप अगर वेतनभोगी तबके से आते हैं तो आप इस बात से अवगत होंगे कि हर महीने आपकी सैलरी से एक निश्चित राशि पीएफ फंड में जमा होती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) इस फंड को मैनेज करता है। दरअसल, पीएफ फंड में जमा राशि आपके लिए एक बड़ी पूंजी होती है। टैक्स और निवेश विशेषज्ञ हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि पीएफ फंड में जमा राशि को बहुत अपरिहार्य स्थिति में ही निकालना चाहिए। विशेषज्ञों की दलील यह होती है कि पीएफ खाते एवं पीएफ फंड में जमा रकम पर आपको कई तरह के एक्सक्लूसिव लाभ मिलते हैं, जो अन्य फंड्स में कम ही देखने को मिलते हैं। जानिए पीएफ से जुड़े खास फायदे
आपको कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ खातों में कई अन्य स्कीम के मुकाबले ज्यादा ब्याज मिलता है। ईपीएफओ हर वित्त वर्ष के लिए पीएफ राशि पर मिलने वाले ब्याज दर की घोषणा करता है। चालू वित्त वर्ष में ईपीएफओ ने 8.5 फीसद की दर से ब्याज देने का फैसला किया है।
इस स्कीम पर आपको आयकर अधिनियम की धारा 80 (सी) के तहत टैक्स छूट का लाभ मिलता है।
सरकार नौकरी जाने और अन्य जरूरतों के लिए पीएफ राशि में जमा रकम से आंशिक निकासी की अनुमति देता है। सरकार ने कोविड महामारी के समय में भी आंशिक निकासी की विशेष इजाजत पीएफ अंशधारकों को दी है।
इस स्कीम के तहत पेंशन स्कीम, 1995 (ईपीएस) के तहत आजीवन पेंशन मिलती है। अगर ईपीएफओ का सदस्य फंड में नियमित तौर पर अंशदान कर रहा है, तो उसकी दुर्भाग्यपूर्ण मौत की स्थिति में परिवार के सदस्य इंश्योरेंस स्कीम, 1976 का लाभ उठा सकते हैं। यह रकम पिछले वेतन के 20 गुना के बराबर हो सकती है। यह राशि अधिकतम 6 लाख तक हो सकती है।
पीएफ खाते में इस अनुपात में जमा होती है रकम
टीयर-2 एनपीएस खातों को हाल में विशिष्ट रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए कर मुक्त किया गया है। सब्सक्राइबर्स को टैक्स के मोर्चे पर जल्द मिल सकती है बड़ी खुशखबरी, पीएफआरडीए चेयरमैन ने दिया संकेत
आप इस बात से अवगत होंगे कि नियोक्ता एवं कर्मचारियों को कर्मचारी के मूल वेतन एवं महंगाई भत्ता के 12 फीसद के बराबर की रकम पीएफ फंड में जमा करना होता है। ईपीएफ एक्ट के तहत पंजीकृत कम्पनी के कर्मचारी ही पीएफ फंड में अपनी ओर से निवेश कर सकते हैं।

रिलायंस रिटेल ने अर्बन लैडर में 96 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी

182 करोड़ रुपये में हुआ सौदा

नयी दिल्ली : रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) की रिटेल सब्सिडियरी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (आरआरवीएल) ने होम डेकोर सॉल्यूशन कंपनी अर्बन लैडर की 96% हिस्सेदारी खरीद ली है। यह सौदा 182.12 करोड़ रुपए के कैश ट्रांजेक्शन में हुआ है। आरआरवीएल के पास अर्बन लैडर की शेष हिस्सेदारी खरीदने का भी विकल्प है। इससे कंपनी को अर्बन लैडर की 100% शेयर होल्डिंग मिल जाएगी। आरआईएल की ओर से बीएसई फाइलिंग में कहा गया है कि अभी आरआरवीएल अर्बन लैडर में 75 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। बाकी निवेश दिसंबर 2023 तक पूरा किया जाएगा। भारत में अर्बन लैडर की शुरुआत 17 फरवरी 2012 को हुई थी। अर्बन लैडर होम फर्नीचर और डेकोर उत्पादों की बिक्री से जुड़ा कारोबार करने वाला डिजिटल प्लेटफॉर्म है। साथ ही अर्बन लैडर के देश के कई शहरों में रिटेल स्टोर भी हैं।
वित्त वर्ष 2019 में अर्बन लैडर का टर्नओवर 434 करोड़ रुपये था। वहीं कम्पनी को 49.41 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। वित्त वर्ष 2018 में कंपनी का टर्नओवर 151.22 करोड़ रुपये रहा था, जबकि कम्पनी को 118.66 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था।
इस सौदे से रिलायंस ग्रुप के डिजिटल और न्यू कॉमर्स इनिशिएटिव को मदद मिलेगी। साथ ही अपने ग्राहकों को ज्यादा से ज्यादा उत्पाद उपलब्ध करा सकेगी। इस सौदे से रिलायंस रिटेल को ग्राहक बढ़ाने और बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी। आरआईएल का कहना है कि इस निवेश को सरकारी या रेगुलेटरी अप्रूवल की आवश्यकता नहीं है।
होम डेकोर सॉल्यूशन कंपनी अर्बन लैडर के दिल्ली-एनसीआर, पुणे, बेंगलुरु और चेन्नई में ऑफलाइन स्टोर हैं। कंपनी मुनाफे में आने के बाद ऑफलाइन स्टोर का अन्य शहरों में विस्तार की रणनीति पर काम कर रही थी। साथ ही कंपनी की योजना 2021 में शेयर बाजारों में लिस्टिंग कराने की थी।
मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ऑनलाइन और ऑफलाइन रिटेल में अपना दबदबा बनाना चाहती है। इसके लिए रिलायंस रिटेल कई कंपनियों में निवेश की योजना बना रही है। अगस्त में रिलायंस रिटेल ने फ्यूचर ग्रुप के रिटेल, होलसेल और लॉजिस्टिक्स कारोबार को 24,713 करोड़ रुपये में खरीदा था। हालांकि, अभी यह सौदा कानूनी फंदों में फंस गया है।

75 साल की वृद्धा ने स्तन कैंसर को दी दो-दो बार मात

कोलकाता : 75 साल की एक वृद्धा ने स्तन कैंसर को दो-दो बार मात देकर जिंदादिली की मिसाल पेश की है। बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर इलाके की रहने वाली वह वृद्धा 2017 में स्तन कैंसर से पीड़ित हो गयी थी। मामला इतना गंभीर था कि ऑपरेशन कर उनके स्तन को अलग करना पड़ा था।

चिकित्सकीय भाषा में इस तरह के ऑपरेशन को ‘मोडिफाइड रैडिकल मैसेकटामी’ कहा जाता है। ऑपरेशन के बाद वृद्धा स्वस्थ हो गई थीं लेकिन ढाई साल बीतते न बीतते कटे स्तन वाली जगह पर ट्यूमर पैदा हो गया। परीक्षा करने पर फिर से कैंसर पनपने का पता चला, हालांकि वृद्धा ने इस बार भी हार नहीं मानी। निजी अस्पतालों में इलाज काफी महंगा था इसलिए वृद्धा के परिजन उसे कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले आए।

अस्पताल के ब्रेस्ट एंड एंडोक्राइन सर्जरी डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉक्टर धृतिमान मैत्र ने बताया कि सबसे पहले हमने बायोस्पी कर कैंसर की पुष्टि की। गत सोमवार को इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। वृद्धा अब पूरी तरह स्वस्थ हैं, हालांकि उनके स्वास्थ्य पर कड़ी नजर रखी जा रही है।’

डॉक्टर मैत्र ने आगे कहा- ‘कोरोना काल में इस तरह का ऑपरेशन बेहद मुश्किल था लेकिन महिला मरीज जीना चाहती थी इसलिए हमने भी इस चुनौती को स्वीकार किया। मेडिकल जांच में वृद्धा की छाती की हड्डी में कैंसर फैलने का पता चला था।इस कारण उस हिस्से को काटकर अलग किया गया, जिसके कारण उनकी छाती में एक बड़ा सा गड्ढा हो गया। बहुत सी टिश्यू मांसपेशियों को भी ऑपरेशन करके अलग करना पड़ा है। पेट के निचले हिस्से के मांस को काटकर छाती में बने गड्ढे को भरा जाएगा।

(साभार – दैनिक जागरण)

बहनों को तोहफे में दें वित्तीय सुरक्षा वाला प्यार

बहनों को तोहफा देना हो तो सबसे बेहतर है कि आप वित्तीय स्तर पर उसे मजबूत बनाएं। आम तौर पर रक्षा बन्धन या भाई दूज, जन्मदिन पर ही ऐसे मौके आते हैं जब आप सोचते हैं कि आखिर आप बहनों को क्या दें। भारतीय परिवारों में यह मान लिया जाता है कि बहनों की जरूरत अच्छे भोजन, शौक, पढ़ाई या शादी तक सीमित है पर आज जब बहनें आगे बढ़ रही हैं तो उनको पंख देने के लिए आप ही आगे आ सकते हैं औऱ वह पंख है वित्तीय सुरक्षा जो आप अपनी छोटी या बड़ी बहन को दे सकते हैं या अपने घर की किसी भी महिला को दे सकते हैं –

‘कोरोना कवच’ पॉलिसी से दें स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी
सभी जनरल और स्टैंड लोन हेल्थ इंश्योरेंस कम्पनियों ने कोरोना कवच इंश्योरेंस पॉलिसी को लॉन्च किया है। इसे कोरोना काल में लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें कोरोना संक्रमित पाए जाने पर अस्पताल में भर्ती, भर्ती होने से पहले और बाद और घर में देखभाल सहित इलाज से जुड़े अन्य खर्चे कवर होंगे। कोरोना कवच पॉलिसी के लिए इंश्योरेंस की राशि न्यूनतम 50 हजार रुपये और अधिकतम 5 लाख रुपये है। इंश्योरेंस की अवधि कम से कम 3.5 महीने, 6.5 महीने और 9.5 महीने हो सकती है। इसमें मूल कवर का प्रीमियम 447 से 5,630 रुपये रहेगा।
बहन के नाम करा सकते हैं एफ डी या आर डी
अगर आपकी कोई छोटी बहन है तो आप भाई-दूज पर उसके लिए निवेश करके उसे वित्तीय सुरक्षा दे सकते हैं। इसके लिए आप फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या रिकरिंग डिपॉजिट (RD) में से अपनी सुविधा के हिसाब से निवेश कर सकते हैं। इन दोनों में ही आपको लगभग सामान ब्याज मिलता है। FD और RD दोनों फिक्स्ड-इनकम निवेश हैं, ये दोनों मैच्योरिटी पर गारंटेड रिटर्न देते हैं। FD और RD पर दी जाने वाली ब्याज दरें भी लगभग समान हैं। इन दोनों में ही आप जॉइंट अकाउंट खोल सकते हैं। ये दोनों ही निवेश किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में किए जा सकते हैं। इसके अलावा आप अपनी बहन के लिए SIP या म्यूचुअल फंड में भी निवेश कर सकते हैं।
क्रेडिट कार्ड करें गिफ्ट
अगर आपकी कोई छोटी बहन है जो कॉलेज में पढाई कर रही है और तो उसे उसकी आर्थिक जरूरत को पूरा करने के लिए उन्हें क्रेडिट कार्ड गिफ्ट दे सकते हैं। कई लोग क्रेडिट कार्ड के दुरुपयोग होने के डर से उसका इस्तेमाल करने से घबराते हैं, ऐसे में आप उन्हें समझदारी के साथ क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल के फायदे बताते हुए उसे अपने पास रखने के लिए तैयार कर सकते हैं। इससे पैसों की जरूरत पड़ने पर उसे परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। आप क्रेडिट कार्ड की लिमिट अपनी बहन की जरूरतों के आधार पर तय कर सकते हैं।
बहन के मोबाइल पर कराएं पूरे साल का रीचार्ज
अगर आप इस दिन अपनी बहन को कोई ऐसा तोहफा देने की योजना बना रहे हैं जो आपके बजट में भी हो और उनके काम का भी हो, तो आप उनका मोबाइल सालभर के लिए रीचार्ज करा सकते हैं। इससे उसे बार-बार रीचार्ज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। जियो, आइडिया-वोडाफोन और एयरटेल के पास 365 दिन की वैलिडिटी वाले कई रिचार्ज प्लान हैं। इन प्लान में अनलिमिटेड कॉलिंग, डाटा और फ्री एसएमएस जैसी कई सुविधाएं मिलती हैं। आप अपनी बहन की जरूरत के हिसाब से रीचार्ज प्लान चुन सकते हैं।
सेविंग बैंक अकाउंट खुलवाएं
अगर आपकी बहन का सेविंग अकाउंट (बचत खाता) नहीं है तो आप उसे एक निश्चित रकम के साथ किसी बैंक में बचत खाता खोलकर दे सकते हैं। इससे उसे हमेशा नकद लेकर चलने की जरूरत नहीं होगी और उसे जमा पर ब्याज भी मिलता रहेगा।

(मूल लेख में कुछ परिवर्तन के साथ साभार – दैनिक भास्कर)

बांग्ला सिनेमा का एक युग समाप्त, नहीं रहे वयोवृद्ध अभिनेता सौमित्र चटर्जी

कोलकाता :   दिग्गज बांग्ला फिल्म अभिनेता सौमित्र चटर्जी (85) का रविवार को कोलकाता के अस्पताल में निधन हो गया। सौमित्र को करीब एक महीने पहले कोरोना संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब से उनकी हालत में उतार-चढ़ाव चल रहा था। शनिवार को अस्पताल ने उनकी हालत बेहद गंभीर बताई थी। बुलेटिन में कहा था कि कोई चमत्कार ही उन्हें बचा सकता है।
सौमित्र को 6 अक्टूबर को अस्पताल लाया गया था। 7 अक्टूबर को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 15 अक्टूबर को वे कोरोना से मुक्त हो गए थे। चटर्जी ने सितंबर के आखिरी हफ्ते में ही एक सीरीज की शूटिंग पूरी की थी। वे परमब्रत चट्टोपाध्याय की फिल्म ‘अभिज्ञान’ की शूटिंग भी कर रहे थे। इसके अलावा वह अपनी बायोपिक और वृत्तचित्र पर भी काम कर रहे थे।
सौमित्र को खासकर ऑस्कर विजेता निर्देशक सत्यजीत रे के साथ कोलेबोरेशन के लिए जाना जाता है। दोनों ने साथ में 14 फिल्मों में काम किया था। ये बांग्ला फिल्में हैं – ‘अपुर संसार’, ‘देवी’, ‘तीन कन्या’, ‘अभिजन’, ‘चारुलता’, ‘कुपुरुष’, ‘अरंयेर दिन रात्रि’, ‘अशनी संकेत’, ‘सोनार केला’, ‘जोय बाबा फेलुनाथ’, ‘हीरक राजार देशे’, ‘घरे बैरे’, ‘गणशत्रु’ और ‘शाखा प्रोशाखा’।
चटर्जी ने अपने करियर में करीब 100 फिल्मों में काम किया है, जिनमें दो हिंदी फिल्में ‘निरुपमा’ और ‘हिंदुस्तानी सिपाही’ भी शामिल हैं। उन्होंने हिंदी में ‘स्त्री का पत्र’ नाम से फिल्म डायरेक्ट भी की है।
राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री ने शोक जताया
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, ‘सौमित्र चटर्जी के निधन से भारतीय सिनेमा ने एक दिग्गज अभिनेता खो दिया है। अपु ट्रायोलॉजी और सत्यजीत राय की फिल्मों में यादगार अभिनय के लिए याद किया जाएगा।’ 2012 में चटर्जी को मनोरंजन जगत का सबसे बड़ा सम्मान दादा साहब फाल्के सम्मान मिला। तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजे गए। 2004 में भारत सरकार ने सौमित्र को पद्म भूषण से सम्मानित किया।

जापान के नोबेल विजेता मासातोशी कोशिबा का निधन

टोक्यो : जापान के एस्ट्रो फिजिसिस्ट और फिजिक्स में नोबेल पुरस्कार विजेता मासातोशी कोशिबा का गुरुवार को निधन हो गया। टोक्यो विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी है। हलांकि मौत के कारणों के बारे में नहीं बताया गया है। 94 वर्षीय कोशिबा ने सूर्य से निकलने वाली न्यूट्रीनो किरणों को लेकर परीक्षण के लिए विशालकाय अंडरग्राउंड रूम तैयार किया था। बता दें कोशिबा को 2002 में नोबेल पुरस्कार मिला था।

डब्ल्यूएचओ भारत में खोलेगा पारंपरिक दवाओं का वैश्विक शोध केंद्र

नयी दिल्ली : भारत में पारंपरिक दवाओं के शोध के वैश्विक केंद्र खोलने की विश्व स्वास्थ्य संगठन की घोषणा चीन पर भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। पारंपरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में भारत का निर्यात चीन के निर्यात का लगभग पांच फीसद है। जाहिर है वैश्विक शोध केंद्र खुलने के बाद आयुर्वेदिक दवाओं को आधुनिक चिकित्सा पद्धति रूप में न सिर्फ वैश्विक मान्यता मिलेगी, बल्कि दुनिया के वैश्विक बाजार में धाक भी जमेगी। आयुष मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार पारंपरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में चीन की पकड़ को देखते हुए डब्ल्यूएचओ का भारत में शोध केंद्र खोलने का ऐलान सामान्य घटना नहीं है और इसका दूरगामी असर होगा। आयुष मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पारंपरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में चीन के दबदबे को इस बात से समझा जा सकता है, उसकी तुलना में भारतीय पारंपरिक दवाओं का निर्यात महज पांच फीसद के आसपास है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से वैश्विक शोध केंद्र के लिए चीन की दावेदारी के मजबूत माना जा रहा था। लेकिन चीन के बजाय भारत को शोध का केंद्र बनाने का डब्ल्यूएचओ के फैसला वैश्विक कूटनीति में भारत के बढ़ते दबदबे का दिखाता है।
आयुष मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार पारंपरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में चीन की पकड़ को देखते हुए डब्ल्यूएचओ का भारत में शोध केंद्र खोलने का ऐलान सामान्य घटना नहीं है और इसका दूरगामी असर होगा। आयुष मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पारंपरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में चीन के दबदबे को इस बात से समझा जा सकता है, उसकी तुलना में भारतीय पारंपरिक दवाओं का निर्यात महज पांच फीसद के आसपास है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से वैश्विक शोध केंद्र के लिए चीन की दावेदारी के मजबूत माना जा रहा था। लेकिन चीन के बजाय भारत को शोध का केंद्र बनाने का डब्ल्यूएचओ के फैसला वैश्विक कूटनीति में भारत के बढ़ते दबदबे का दिखाता है।

खेल मंत्रालय देगा 500 निजी अकादमियों को मदद

नयी दिल्ली : खेल मंत्रालय ने खेलो इंडिया योजना के तहत 500 निजी अकादमियों को अगले चार साल तक वित्तीय समर्थन देने का फैसला किया है। यह वित्तीय मदद 2020-21 वित्त वर्ष से लागू होगी।
इस मॉडल में कई पैमानों पर अकादमियों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। इनमें अकादमियों में खेले गए खिलाड़ियों की उपलब्धियां,अकादमियों के प्रशिक्षकों का स्तर जैसे पैमाने शामिल हैं।
स्कीम के तहत, साई और राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) मिलकर काम करेंगी। साई एनएसएफ के साथ चर्चा करेगी और अकादमियों को श्रेणियों में बांटने का काम करेगी।
इस पर खेल मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, देश के अलग-अलग हिस्सों में कई छोटी-छोटी अकादमियाँ हैं जो खिलाड़ियों को पहचानने का और प्रशिक्षण देने का काफी अच्छा काम कर रही हैं। यह कदम सभी अकादमियों को प्रेरित करेगा, खासकर निजी अकादमियों को कि वह लगातार सुधार कर सकें।