Monday, July 6, 2026
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इन आसान तरीकों से करें पीतल की चीजों की सफाई

बाजार में पीतल से बने बर्तन से लेकर मूर्ति तक बिकते हैं। पीतल के बर्तन में पूजा करना शुभ माना जाता है। इसीलिए खासतौर पर मंदिर के बर्तन और मूर्तियां पीतल की बनाई जाती हैं। पीतल की वस्तुएं बहुत खूबसूरत लगती हैं, चाहे वह बर्तन हों या घर की साज-सज्जा की वस्तुएं। पीतल की वस्तुएं कुछ उपयोग के बाद अपनी चमक खो देती हैं। वह काला पड़ने लगता है। ऐसे में क्या आप भी इसका इस्तेमाल बंद कर देते हैं? आपको ऐसा नहीं करना चाहिए. आज इस आर्टिकल में हम आपको पीतल के बर्तन साफ ​​करने का घरेलू तरीका बताएंगे।
सॉस से पोंछ लें
नाश्ते का स्वाद बढ़ाने से लेकर सफाई तक, कई घरेलू कामों में सॉस का इस्तेमाल किया जाता है। कभी-कभी पीतल की मूर्ति की चमक फीकी पड़ जाती है। आप मिट्टी के बर्तनों से लेकर मूर्तियों तक सब कुछ साफ करने के लिए सॉस का उपयोग कर सकते हैं। बस मूर्ति पर चटनी की कुछ बूंदें डालें। थोड़ी देर बाद मूर्ति को साफ गीले कपड़े से पोंछ लें।
सिरके से साफ करें
शौचालय पर पीले दाग हटाने से लेकर दागदार गहनों की सफाई तक हर चीज में सिरके का उपयोग किया जा सकता है। जानिए पीतल की वस्तुओं को सिरके से कैसे साफ और चमकाया जा सकता है। पीतल की वस्तुओं को साफ करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें। 1/2 कप सिरका1 चम्मच नमक लें । एक कटोरे में 1/2 कप सिरका और 1 चम्मच नमक डालें। अब इस तरल पदार्थ में कपड़े को भिगो लें। इससे मूर्ति को साफ करें । मूर्ति को कुछ देर तक कपड़े से रगड़ें। अंत में मूर्ति को पोंछना न भूलें। आप देखेंगे कि मूर्ति बिल्कुल साफ हो गई है.
बेकिंग सोडा काम करेगा
बेकिंग सोडा एक ऐसी चीज है जिसका इस्तेमाल खाने से लेकर घर की साफ-सफाई और दाग-धब्बे हटाने तक हर चीज में किया जाता है। क्या आपके घर में पीतल की वस्तुओं की चमक फीकी पड़ गई है? पीतल को नया जैसा दिखाने के लिए आप बेकिंग सोडा का इस्तेमाल कर सकते हैं। बेकिंग सोडा के एक बार प्रयोग से पीतल की खोई हुई चमक वापस आ जाएगी।
2-3 चम्मच बेकिंग सोडा और नींबू का रस लें । एक कटोरी में 2-3 बड़े चम्मच बेकिंग सोडा में आधा नींबू का रस निचोड़ लें। अब इसे मिलाएं, ताकि यह पेस्ट बन जाए, अब इस पेस्ट को किसी पुराने ब्रश की मदद से पीतल के बर्तन पर लगाएं। इसे कुछ मिनट तक ब्रश से अच्छे से रगड़ें।
टूथपेस्ट काम करेगा
जिस तरह टूथपेस्ट की मदद से दांतों को साफ किया जाता है। इसी तरह आप टूथपेस्ट का इस्तेमाल जूतों से लेकर बर्तन तक साफ करने के लिए कर सकते हैं। इसके लिए आपको ब्रश पर थोड़ा सा टूथपेस्ट लगाना होगा और उसे पीतल पर रगड़ना होगा। कम से कम 5 मिनट तक साफ करें। अंत में पीतल को साफ गीले कपड़े से पोंछ लें।
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दुनिया का इकलौता पहाड़ जिस पर बने हैं 900 मंदिर

दुनिया विविधताओं से भरी हुई है। इसके अलग-अलग भागों में मौजूद विभिन्न प्रकार की चीजें लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती हैं, जिनमें नदी, झरने, झील और पहाड़ भी शामिल हैं और इन्हीं सब चीजों में शामिल है दुनिया का इकलौता पहाड़, जिस पर 900 मंदिर मौजूद हैं।
यह दुनिया का इकलौता पहाड़ है, जिस पर इतनी बड़ी संख्या में मंदिर बने हुए हैं। खास बात यह है कि यह पहाड़ आपको भारत में देखने को मिल जाएगा, जो कि बड़ी संख्या में लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। हालांकि, क्या आपको पता है कि भारत के किस राज्य में यह पहाड़ स्थित है और क्या है इसके पीछे की कहानी। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस पहाड़ के बारे में जानेंगे।
कौन-सा है यह अनोखा पर्वत
दुनिया का यह इकलौता पर्वत पालीताना शत्रुंजय नदी के तट पर शत्रुंजय पर्वत कहलाता है, जिस पर करीब 900 मंदिर बने हुए हैं। अधिक मंदिर होने की वजह से यह लोगों की आस्था का भी केंद्र है। हर साल यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
किस राज्य में है यह पर्वत
भारत के यह अनोखा पर्वत गुजरात के भावनगर जिले में स्थित है। यह भावनगर शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम में पड़ता है। यह पर्वत जैन धर्म का प्रमुख तीर्थ है। इस पर्वत पर पहले जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने ध्यान किया था और अपना पहला उपदेश भी दिया था। पर्वत का प्रमुख मंदिर भी जैन धर्म के पहले तीर्थंकर को ही समर्पित है।
मंदिर जाने के लिए चढ़नी पड़ती हैं 3000 सीढ़ियां
इस पर्वत पर मुख्य मंदिर अधिक ऊंचाई पर स्थित है। ऐसे में यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 3,000 सीढ़ियों को चढ़ना पड़ता है। इस पर्वत पर 24 में से 23 तीर्थंकर भी पहुंचे थे। ऐसे में धार्मिक दृष्टि से इस पर्वत का अधिक महत्व है।
संगमरमर से बना हुआ है मंदिर
इस पर्वत पर बना मंदिर संगमरमर से बना हुआ है, जो कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को एकाएक अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां पहले मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में किया गया था। वहीं, मंदिरों को विशेष नक्काशी का ध्यान रखते हुए बनाया गया है। जिस समय इस मंदिर पर सूरज की रोशनी पड़ती है, तो यह मंदिर और भी चमक उठता है। वहीं, चंद्रमा की रोशनी में भी यह मोती जैसा लगता है।
दुनिया के इकलौते शाकाहारी शहर में है मंदिर
भारत में यह मंदिर दुनिया के इकलौते पालीताना शहर में मौजूद है, जो कि कानूनी रूप से शाकाहारी है। इस शहर में मांसाहार का बिल्कुल भी सेवन नहीं किया जाता है, जो कि इसे दुनिया के बाकी शहरों से अलग बनाता है।
(साभार – जागरण जोश)

‘कचरे से कमाई’ के नये रास्ते खुलेंगे, दौड़ेगी कार, आईआईटी इंदौर का कमाल

प्लास्टिक कचरे से हरित हाइड्रोजन गैस बनाने का आसान और असरदार तरीका खोजा

इंदौर । इंदौर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने पीईटी प्लास्टिक के कचरे से हरित हाइड्रोजन गैस बनाने का आसान और असरदार तरीका खोज निकाला है। आईआईटी प्रबंधन के मुताबिक तीन बरस की मेहनत से संपन्न यह अनुसंधान न केवल प्लास्टिक अपशिष्ट के निपटारे की वैश्विक समस्या हल कर सकता है, बल्कि ‘कचरे से कमाई’ के नये रास्ते भी खोल सकता है।
आईआईटी के रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर संजय के. सिंह ने बृहस्पतिवार को बताया,”हम पानी में प्लास्टिक के कचरे को बारीक टुकड़े, उत्प्रेरक और अन्य पदार्थ डालकर 160 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म करते हैं। इस रासायनिक प्रक्रिया से निकलने वाली 100 प्रतिशत शुद्ध हाइड्रोजन गैस को इकट्ठा कर लिया जाता है।”
उन्होंने बताया कि रासायनिक प्रक्रिया के जरिये पीईटी प्लास्टिक के 33 किलोग्राम कचरे से एक किलोग्राम शुद्ध हाइड्रोजन गैस बनाई जा सकती है और माना जाता है कि इतना हरित ईंधन हाइड्रोजन से चलने वाली कार को 100 किलोमीटर तक दौड़ाने के लिए काफी है। केंद्र सरकार ने इस साल की शुरुआत में 19,744 करोड़ रुपये का प्रावधान करते हुए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन अभियान को हरी झंडी दी थी।
ताकि भारत को इस ईंधन के उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाया जा सके। इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत वर्ष 2030 तक देश में कम से कम 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन बनाने की सालाना क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया गया है। आईआईटी इंदौर के एक अधिकारी ने कहा कि हरित हाइड्रोजन बनाने के संस्थान के अनुसंधान से इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है।

निर्माता को थी 25 हजार की जरूरत, किस्मत से मिला10 लाख का चेक, साबित हुई युद्ध पर बनी कालजयी फिल्म

पहले फिल्मों को हिट कराने के लिए मजबूत स्क्रिप्ट, अच्छा अभिनय और निर्देशन कौशल ही फिल्म को कामयाब बनाने का एक सरल तरीका हुआ करता था । इन सब के आधार पर साल 1964 में धर्मेंद्र और बलराज साहनी स्टारर फिल्म ‘हकीकत’ बनाई गई थी । देवानंद के बड़े भाई फिल्म निर्माता चेतन आनंद की इस फिल्म को भारतीय सिनेमा में युद्ध पर बनी सबसे कालजयी फिल्म माना जाता है । इस फिल्म को बनाने से पहले चेतन आनंद महज 25 हजार रुपए ना होने को लेकर काफी परेशान थे लेकिन बाद में कुछ ऐसा हुआ कि उनके हाथ में सीधा दस लाख का चैक आ गया था ।
बात उस दौर की जब चेतन आनंद इस फिल्म को बनाने की तैयारी में थे और उनके पास फिल्म के लिए 25 हजार रुपए कम पड़ रहे थे । कोई फाइनेंसर भी मदद के लिए तैयार नहीं था। चेतन आनंद की पत्नी उमा की एक सहेली ने बताया कि उनके मामा प्रताप सिंह कैरो पंजाब के मुख्यमंत्री हैं, हम उनसे मदद ले सकते हैं । अगले दिन चेतन आनंद मुख्यमंत्री कैरो के सामने थे और मदद की गुहार लगा रहे थे। उन्होंने चेतन को 1962 के चीन युद्ध में पंजाब के शहीद हुए जवान पर फिल्म बनाने का सुझाव दिया । इसके बाद चेतन ने ‘हकीकत’ की कहानी उन्हें सुनाई और मुख्यमंत्री ने पंजाब के वित्त सचिव को आदेश दिया कि इन्हें 10 लाख रुपए का चेक दे दो । कहां वह 25 हजार के लिए तरस रहे थे और मिल गए दस लाख रुपए. ये दिलचस्प किस्सा अनु कपूर के शो ‘सुहाना सफर विद अनु कपूर’ में खुद अनु ने सुनाया था ।
कालजयी साबित हुई युद्ध पर बनी फिल्म
25 हजार की जगह 10 लाख का चैक पाकर चेतन आनंद का ये फिल्म बनाने का सपना हकीकत में बदल चुका था । निर्माता ने भी फिल्म ‘हकीकत’ इतनी शिद्दत के साथ बनाई कि वह फिल्म और गाने आज भी लोगों की आंखें नम कर देते हैं । इस फिल्म से बलराज साहनी, धर्मेन्द्र, विजय आनंद, प्रिया राजवंश, अमजद खान के पिता जयंत, शेख मुख्तार और सुधीर आदि कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आए थे । ‘हकीकत’ एक तरह से बॉलीवुड की पहली युद्ध फिल्म थी. फिल्म में धर्मेंद एक सैनिक की भूमिका में नजर आए थे । इस फिल्म ने न सिर्फ धर्मेंद्र की एक अलग इमेज गढ़ी बल्कि उस समय की चर्चित हीरो राजकपूर, देवआनंद और राजेंद्र कुमार को तगड़ी टक्कर भी दी थी ।

फिल्म के गाने आज भी कर देते हैं आंखें नम
फिल्म के गाने कैफी आजमी ने और संगीत मदन मोहन ने दिया था । साल 1964 में बनी फिल्म ‘हकीकत’ के कई गाने काफी हिट साबित हुए थे. होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा.., जरा सी आहट होती है तो दिल सोचता है, कहीं वो तुम तो नहीं…, मैं ये सोचकर उसके दर से उठा था, इसके अलावा खासतौर पर इस फिल्म का सबसे लोकप्रिय गाीत साबित हुआ था ‘कर चले हम फिदा जाने तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों’ हुआ था। इस गाने के लिए कैफी साहब ने कहा था कि जब फिल्म खत्म हो जाएगी, उसके बाद ये गीत सिनेमाघरों में बजेगा…
ये गीत था फिल्म की असली जान
कैफी साहब की बात से चेतन बिल्कुल वाकिफ नहीं थे उन्होंने कहा था कि फिल्म खत्म होने के बाद तो दर्शक सिनेमा हॉल से चले जाएंगे, गाना कौन सुनेगा । तब उन्होंने कहा था कि ये गीत ही फिल्म की असली जान है और जब दर्शक घर जाने के लिए खड़े हो जाएंगे, जब हॉल में आवाज गूंजेगी…’कर चले हम फिदा जाने तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों’ असल में दर्शक उन तमाम शहीदों के सम्मान में खड़े रहेंगे और उन्हें श्रद्धांजलि देंगे ।
बता दें कि जैसा कैफी साहब ने कहा ऐसा ही हुआ फिल्म खत्म होने पर गीत हॉल में गूंजता तो लोगों की आंखें नम हो जाती थीं । आज भी लोग इस गाने को सुनते हैं तो उनकी आंखें नम हो जाती है । कैफी आजमी का ये प्रयोग किसी चमत्कार से कम नहीं था । हिंदी सिनेमा में ऐसा पहली बार हुआ था कि कोई गाना फिल्म खत्म होने के बाद बजता है । चेतन आनंद की इस फिल्म को दूसरी सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के पुरस्कार से भी नवाजा गया था ।

भारत ही नहीं कई देशों और कई भाषाओं में लिखी गई है रामायण

सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली हिंदू महाकाव्यों में से एक, रामायण एक मनोरम कथा है जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रेरित और मार्गदर्शन करती रहती है। यह भगवान राम की कहानी, उनके वीरतापूर्ण कारनामे और अपनी प्यारी पत्नी सीता को राक्षस राजा रावण के चंगुल से बचाने की उनकी खोज को बताता है। भगवान राम की वीरतापूर्ण यात्रा की इस कालजयी कहानी को विभिन्न भाषाओं में संजोया और दोहराया गया है, जो इसकी सार्वभौमिक अपील और गहरे प्रभाव को दर्शाती है। आज आपको बताएंगे रामायण को दुनिया भर में कितनी भाषाओं में इसकी प्रस्तुतियां की गई है…

उत्पत्ति और लेखकत्व:-
रामायण की उत्पत्ति का पता प्राचीन भारत में लगाया जा सकता है, पारंपरिक रूप से ऋषि वाल्मिकी को इसके मूल लेखक के रूप में मान्यता दी गई है। हालाँकि, महाकाव्य की स्थायी लोकप्रियता और गहन नैतिक शिक्षाओं ने अनगिनत कवियों और विद्वानों को कहानी को अपने अनूठे तरीकों से दोबारा कहने के लिए प्रेरित किया है। इसके परिणामस्वरूप विभिन्न भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों में रामायण का उल्लेखनीय प्रसार हुआ है।

विभिन्न प्रकार की प्रस्तुतियाँ:-
विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक बारीकियों और भाषाई स्वादों को ध्यान में रखते हुए, रामायण को कई भाषाओं में लिखा और दोहराया गया है। कुछ प्रमुख संस्करणों में शामिल हैं:

वाल्मिकी रामायण:-
ऋषि वाल्मिकी द्वारा रचित मूल रचना, प्राचीन संस्कृत में लिखी गई, इसका मूल संस्करण बनी हुई है। वाल्मिकी की काव्य प्रतिभा और गहन अंतर्दृष्टि ने बाद के पुनर्कथन के लिए आधार तैयार किया।

तुलसीदास रामायण (रामचरितमानस):-
16वीं सदी के कवि-संत तुलसीदास ने रामचरितमानस को अवधी में लिखा था। यह अपने काव्यात्मक छंदों और भक्ति उत्साह के साथ भक्तों के दिलों में एक विशेष स्थान रखता है।

कम्ब रामायण:-
12वीं शताब्दी में तमिल कवि कंबन द्वारा लिखित, कम्ब रामायण एक उत्कृष्ट तमिल प्रस्तुति है। यह स्थानीय सांस्कृतिक तत्वों को शामिल करते हुए मूल महाकाव्य के सार को खूबसूरती से दर्शाता है।

ऋषि व्यास द्वारा रामायण:-
ऋषि व्यास, जिन्हें महाभारत के संकलन के लिए जाना जाता है, ने संस्कृत में रामायण के एक संस्करण की भी रचना की। उनकी पुनर्कथन महाकाव्य पर विशिष्ट अंतर्दृष्टि और दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव:-
रामायण का प्रभाव भारत की सीमाओं से परे कई देशों और संस्कृतियों तक फैला हुआ है। इसका विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया गया है, जिससे इसकी कालजयी शिक्षाओं और मनोरम आख्यानों का प्रसार हुआ है। कुछ उल्लेखनीय उदाहरणों में शामिल हैं:

इंडोनेशिया:-
रामायण, जिसे रामायण काकाविन के नाम से जाना जाता है, इंडोनेशिया में अत्यधिक सांस्कृतिक महत्व रखती है। पुरानी जावानीज़ में लिखी गई, इसने पारंपरिक नृत्य-नाटकों और छाया कठपुतली प्रदर्शनों को प्रेरित किया है।

थाईलैंड:-
थाई रामकियेन रामायण का स्थानीय रूपांतरण है, जो देश के राष्ट्रीय महाकाव्य के रूप में कार्यरत है। इसने थाई और हिंदू-बौद्ध परंपराओं के अनूठे मिश्रण को चित्रित करते हुए थाई साहित्य, कला और प्रदर्शन कला को आकार दिया है।

कंबोडिया:-
रीमकर के रूप में संदर्भित, रामायण का खमेर संस्करण कंबोडिया में अत्यधिक पूजनीय है। इसने कम्बोडियन कला, मूर्तिकला और नृत्य, विशेष रूप से प्रतिष्ठित अप्सरा नृत्य को प्रभावित किया है।

मलेशिया और सिंगापुर:-
रामायण ने मलेशिया और सिंगापुर के सांस्कृतिक ताने-बाने पर अपनी छाप छोड़ी है। मलय रूपांतरण, जिसे हिकायत सेरी राम के नाम से जाना जाता है, ने उनकी साहित्यिक और नाटकीय परंपराओं को समृद्ध किया है।

विरासत:-
कई भाषाओं में रामायण की व्यापक उपस्थिति इसकी स्थायी अपील और सार्वभौमिक विषयों को रेखांकित करती है। यह विविध पृष्ठभूमि के लोगों को प्रेरित करता है, नैतिक मूल्यों को स्थापित करता है, धार्मिकता का पाठ पढ़ाता है और बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाता है। विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों में रामायण की अनुकूलन क्षमता मानव आध्यात्मिकता और सामूहिक मानव अनुभव पर इसके गहरे प्रभाव का प्रमाण है।

ऋषि वाल्मिकी से निकली रामायण ने अपने सार्वभौमिक महत्व को स्थापित करने के लिए भाषाई और सांस्कृतिक बाधाओं को पार किया है। विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों में रामायण के कई संस्करण विभिन्न संस्कृतियों के लोगों के साथ जुड़ने की इसकी क्षमता को प्रदर्शित करते हैं। महाकाव्य की स्थायी विरासत समय और भूगोल से परे, धार्मिकता के मार्ग को प्रेरित करने, मार्गदर्शन करने और रोशन करने की क्षमता में निहित है।
(साभार – न्यूज ट्रैक)

पिता ने उधार पैसे लेकर भेजा ऑस्ट्रेलिया, अरुणा ने पैरा ताइक्वांडो में जीता गोल्ड

लखनऊ । पैरा ताइक्वांडो ओपन चैंपियनशिप-जी4-जी-2 में लखनऊ साई की पैरा खिलाड़ी अरुणा तंवर ने शुक्रवार को गोल्ड जीतकर बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। लखनऊ सेंटर के एनसीओई की अरुणा ने ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में खेली जा रही चैंपियनशिप में महिला-47 किलोग्राम भार वर्ग में यह कमाल किया है।
अरुणा के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अब उनका अगला टारगेट डब्ल्यूटी प्रेसिडेंट कप ओशिनिया (जी2) और ऑस्ट्रेलिया पैरा ओपन 2023 (जी-1) में भारत के लिए मेडल जीतना है। हालांकि एक ड्राइवर की बेटी अरुणा तंवर का पैरा ताइक्वांडो में यहां तक का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने बताया कि पिता ने उधार रुपयों की व्यवस्था कर ट्रेनिंग के लिए उन्हें यहां भेजा। वहीं, अरुणा तंवर की इस उपलब्धि पर साई लखनऊ सेंटर के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक संजय सारस्वत ने कहा कि अरुणा ने टोक्यो 2020 पैरा ओलिंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था और अंतिम आठ में पहुंचने में कामयाब रही थी। अक्टूबर 2023 में चीन के हांगझू में होने वाले पैरा एशियन गेम्स के लिए भी उनका चयन पहले ही हो चुका है।

सिनेमाहॉल में खाना हुआ सस्ता, कैंसर की दवाओं पर नहीं लगेगा टैक्स

ऑनलाइन गेमिंग और कैसिनो पर 28 प्रतिशत जीएसटी
नयी दिल्ली । जीएसटी काउंसिल की बैठक में बड़े फैसले लिए गए हैं। मंगलवार को नई दिल्ली में जीएसटी काउंसिल की 50वीं बैठक हुई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बैठक की अध्यक्षता की। सीतारमण ने मंगलवार शाम प्रेस ब्रीफिंग कर मीटिंग में लिये गए फैसलों की जानकारी दी। जीएसटी काउंसिल ऑनलाइन गेमिंग, घुड़दौड़ और कैसिनो की फुल वैल्यू पर 28 फीसदी जीएसटी लगाने पर सहमत हो गई है। साथ ही अब सिनेमाहॉल में खाना सस्ता होगा। जीएसटी काउंसिल ने सिनेमाहॉल में खाने-पीने के सामान पर जीएसटी कटौती का फैसला लिया है। जीएसटी काउंसिल ने सिनेमाहॉल में सर्व होने वाले खाने पर टैक्स को घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। इसके अलावा अब कैंसर की इंपोर्टेड दवा पर आईजीएसटी नहीं लगेगा। जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी ट्रिब्यूनल के गठन को भी मंजूरी दी गई है।
सिनेमाहॉल में खाना अब मिलेगा सस्ता
अगर आप मूवी लवर हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। जीएसटी काउंसिल की 50वीं बैठक में एक बड़ा फैसला हुआ है। सिनेमा हॉल्स में सर्व होने वाले फूड्स पर जीएसटी रेट को घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। यह पहले 18 फीसदी था। इसके अलावा कुछ अन्य उत्पादों पर भी जीएसटी घटाया गया है। बैठक में अनकुक्ड फूड पैलेट, मछली और सॉल्यूब पेस्ट पर भी टैक्स घटाया गया है। इन उत्पादों पर जीएसटी को 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।
कैंसर मरीजों को बड़ी राहत
जीएसटी काउंसिल ने कैंसर के मरीजों को एक राहत दी है। अब कैंसर की इंपोर्टेड दवा पर आईजीएसटी नहीं लगेगा। जीएसटी काउंसिल की बैठक में कैंसर से लड़ने में काम आने वाली दवाओं और दुर्लभ बीमारियों के लिए काम आने वाली दवाओं को जीएसटी से छूट देने का फैसला लिया है। इससे कैंसर की दवा Dinutuximab सस्ती हो जाएगी।
इन ऑनलाइन गेमिंग स्टॉक्स पर रहेगा फोकस
जीएसटी काउंसिल में हुए एक फैसले से बुधवार के सत्र में ऑनलाइन गेमिंग स्टॉक्स पर फोकस बढ़ जाएगा। जीएसटी काउंसिल ऑनलाइन गेमिंग को एक झटका दिया है। काउंसिल ने ऑनलाइन गेमिंग की फुल वैल्यू पर 28 फीसदी जीएसटी लगाने का फैसला लिया है। इस समय टॉप गेमिंग शेयरों में रेखा झुनझुनवाला समर्थित नाजारा टेक्नोलॉजीज, जेनसर टेक्नोलॉजीज, डेल्टा कॉर्प, ऑनमोबाइल ग्लोबल, टेक महिंद्रा, टीसीएस और इंफोसिस शामिल हैं।
एसयूवी की परिभाषा में बदलाव
बैठक के बाद सीतारमण ने संवाददाताओं से कहा कि वर्तमान में उपकर लगाने के लिये एसयूवी की परिभाषा में चार मानदंड रखे गये हैं। ये मानदंड हैं- वह एसयूवी के रूप में लोकप्रिय हो, लंबाई चार मीटर या उससे अधिक, इंजन क्षमता 1,500 सीसी या उससे अधिक होनी चाहिए और बिना वजन के उसका ‘ग्राउंड क्लियरेंस’ न्यूनतम 170 मिमी होना चाहिए। हालांकि, अब एसयूवी की परिभाषा में बदलाव करते हुए केवल तीन मापदंडों को ही रखा गया है और उसके एसयूवी के रूप में लोकप्रिय होने वाला मानदंड हटा दिया गया है।

यह हुआ है संशोधन
वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना के जरिए से धन शोधन रोधक अधिनियम (पीएमएलए), 2022 में संशोधन किया है। इसके तहत जीएसटी की प्रौद्योगिकी इकाई संभालने वाली जीएसटीएन को उन इकाइयों में शामिल कर लिया गया है, जिनके साथ ईडी सूचना शेयर कर सकता है। इसके अलावा परिषद ने निजी कंपनियों की तरफ से दी जाने वाली उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं को भी जीएसटी से छूट देने का भी फैसला किया।

80 प्रतिशत लोग प्लास्टिक नहीं, पेपर बैग चाहते हैं – सर्वे

नयी दिल्ली । भारत में प्लास्टिक की थैलियों के इस्तेमाल को लेकर एक सर्वे किया गया है। पूरे भारत में 8 लाख से अधिक लोगों को सर्वे में शामिल किया गया। जिनमें से 80 प्रतिशत लोगों का कहना है कि प्लास्टिक की थैलियों को पूरी तरह से पेपर बैग से बदल दिया जाए। यह पर्यावरण के बारे में बढ़ती जागरूकता को प्रदर्शित करता है। विश्व पेपर बैग दिवस के अवसर पर, न्यूज एग्रीगेटर इनशॉर्ट्स ने बुधवार को प्लास्टिक बैग के विकल्प के रूप में पेपर बैग को अपनाने के प्रति लोगों की जागरूकता और इच्छा को जानने के लिए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण को सार्वजनिक किया। प्लास्टिक प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाने को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रति वर्ष 12 जुलाई को विश्व पेपर बैग दिवस मनाया जाता है। सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 85 प्रतिशत लोगों को जानकारी है कि भारत में एकल-उपयोग प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध है। सर्वे के परिणामों से यह भी पता चला कि करीब 79 प्रतिशत लोग जब किराने का सामान और रोजमर्रा की वस्तुओं की खरीदारी के लिए बाहर निकलते हैं तो अपना बैग खुद ले जाते हैं।
इसके अलावा, सर्वेक्षण में शामिल 46 प्रतिशत लोग दुकानदारों द्वारा प्लास्टिक बैग की पेशकश करने पर सक्रिय रूप से स्वीकार करने से इनकार कर देते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे खरीदारी करते समय दुकानों द्वारा उपलब्ध कराए गए पेपर बैग के लिए थोड़ी सी राशि का भुगतान करने में सहज हैं, तो 62 प्रतिशत लोगों ने पॉजिटिव जवाब दिया।
सर्वेक्षण में शामिल लगभग 80 प्रतिशत लोगों का मानना है कि शानदार भविष्य के निर्माण की दिशा में एक कदम के रूप में सभी दुकानों में प्लास्टिक की थैलियों के स्थान पर पेपर बैग का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पता चला कि 53 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि प्लास्टिक बैग, पेपर बैग की तुलना में अधिक सुविधाजनक हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट में रविचंद्रन अश्विन के 700 विकेट पूरे

डोमिनिका । वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में रविचंद्रन अश्विन ने इतिहास रच दिया है। अश्विन इंटरनेशनल क्रिकेट में 700 विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन विकेट लेते ही अश्विन ने इस उपलब्धि को हासिल कर लिया है। इस मामले में उन्होंने हरभजन सिंह और अनिल कुंबले के खास क्लब में एंट्री मार ली है।
वेस्टइंडीज के खिलाफ इस मैच में अश्विन ने सबसे पहले टेगेनारिन चंद्रपॉल को अपना शिकार बनाया। इसके बाद अश्विन ने कप्तान क्रेग ब्रेथवेट को आउट किया। वहीं उनका तीसरा शिकार अल्जारी जोसेफ बने। टेस्ट क्रिकेट में अश्विन के अब 477 विकेट हो गए हैं। अश्विन अपने करियर का यह 93वां टेस्ट मैच खेल रहे हैं।
वहीं भारत के खिलाफ इस मुकाबले में वेस्टइंडीज के कप्तान क्रेग ब्रेथवेट ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था। हालांकि उनका यह फैसला कारगार नहीं रहा और लगातार अंतराल विकेट गंवाते रहे। गेंदबाजी में टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने लंच ब्रेक तक ही 68 रन के स्कोर 4 विकेट झटक लिए थे।
बैटिंग बना चुके हैं 4 हजार रन
अश्विन अनिल कुंबले के बाद टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। सिर्फ गेंदबाजी में ही नहीं, बैटिंग में अश्विन ने अपना कमाल दिखाया है। अश्विन भारत के लिए बैटिंग में कुल 4 हजार बना चुके हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट में 700 विकेट और 4 हजार रन बनाने वाले वह भारत के पहले खिलाड़ी बने हैं।
भारत के लिए सबसे अधिक इंटरनेशनल विकेट लेने के मामले में अनिल कुंबले पहले स्थान पर हैं। उन्होंने भारत के लिए कुल 956 विकेट हासिल किए हैं। वहीं पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह दूसरे स्थान पर हैं। हरभजन ने अपने करियर में तीनों फॉर्मेट को मिलाकर 711 विकेट लिए हैं।
टेस्ट में दूसरे नंबर हैं अश्विन
रविचंद्रन अश्विन टेस्ट क्रिकेट में विकेट लेने के मामले में दूसरे स्थान पर हैं। भारत के लिए सबसे अधिक अनिल कुंबले ने 132 मैचों में 619 विकेट अपने नाम किए हैं। कुंबले ने 35 बार टेस्ट मैचों में पंजा खोला है। वहीं अश्विन अपने 93वें टेस्ट में 479 विकेट हासिल कर चुके हैं। उन्होंने 33 बार मैच में पांच या इससे विकेट अपने नाम किया है। इसके अलावा हरभजन सिंह के खाते में 474 विकेट दर्ज है। हरभजन ने टेस्ट मैच में 23 बार पांच या इससे विकेट लिया है।

 

द्वारकाधीश मंदिर में अब पांच नहीं हर रोज लगेंगी छह ध्वजा

बुकिंग सिस्टम में होगा बदलाव

अहमदाबाद । गुजरात के द्वारका में स्थित विश्व प्रसिद्ध जगत मंदिर में पांच की बजाए छह ध्वजा फहराई जाएंगी। मंदिर का प्रबंधन संभालने वाली द्वारकाधीश देवस्थान समिति की बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया है। ऐसे में अब द्वारकाधीश मंदिर में ध्वजा फहराने का नया नियम लागू किया गया है। पिछले दिनों जब गुजरात में बिपरजॉय चक्रवात आया था तो मंदिर तीन दिनों तक ध्वजा नहीं फहराई जा सकी थी, हालांकि बिपरजॉय संकट को टालने के लिए मंदिर एक साथ दो ध्वजा लगाई गई थी, लेकिन बाद में उन्हें तेज हवा के चलते नहीं बदला जा सका था।द्वारकाधीश देवस्थान समिति की बैठक में प्रतिदिन पांच की बजाए छह ध्वजा फहराने के नियम से वेटिंग कम होने की उम्मीद है। भगवान द्वारकाधीश के जगत मंदिर में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु आते हैं। जगत मंदिर के शिखर पर प्रतिदिन 5 ध्वजा फहराई जाती थी। अब छह ध्वजा लगने से लोगों का इंतजार जल्दी खत्म होगा। बिपरजॉय चक्रवात के गुजरने के बाद मंदिर समिति ने पिछले 15 दिनों तक छह-छह ध्वजा लगाने का फैसला लिया था, ताकि बिपरजॉय के चलते जो वेटिंग हुई थी उसे खत्म किया जा सके। अब समिति ने आगे हर रोज छह ध्वजा लगाने का नियम लागू कर दिया है।2024 तक की है वेटिंग
द्वारकाधीश मंदिर में ध्वजा चढ़ाने के लिए लंबी वेटिंग है। मंदिर प्रशासन के अनुसार अगले साल 2024 तक ध्वजा चढ़ाने के लिए बुकिंग हो चुकी है। मसलन अगर आज कोई बुकिंग करता है तो उसे 2024 में आखिर को कोई स्लॉट मिलेगा। खंभालिया में कलेक्टर सह द्वारकाधीश देवस्थान समिति के अध्यक्ष अशोक शर्मा की अध्यक्षता में समिति की हुई बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया।
ऑनलाइन होगा ध्वजा आवंटन
द्वारकाधीश मंदिर में ध्वजा चढ़ाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा। इससे लोग घर बैठे द्वारकाधीश मंदिर में ध्वजा चढ़ाने के लिए बुकिंग कर पाएंगे। मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों का कहना है कि ऑनलाइन सिस्टम से देश और विदेश के श्रद्वालुओं को सुविधा होगी और पूरी व्यवस्था पारदर्शी हो जाएगी। आगे ध्वजा चढ़ाने का आवंटन एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा।