हावड़ा । अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउंडेशन, पश्चिम बंगाल की वीरांगनाओं ने बादामी देवी शिशु कल्याण केन्द्र, मल्लिक फाटक, हावड़ा में अनाथ बच्चों के साथ वक्त बिताया। उनका हालचाल पूछा और उन्हें भोजन भी कराया।
संगठन की प्रदेश अध्यक्ष और विख्यात गायिका व अभिनेत्री प्रतिभा सिंह ने इस अवसर पर कहा कि दूसरों के दुखदर्द से जुड़ना ही मनुष्य जीवन की सार्थकता है। अनाथ बच्चों के बीच संगठन महासचिव प्रतिमा सिंह, संयुक्त महासचिव ममता सिंह, सोदपुर इकाई की अध्यक्ष सुनिता सिंह, महासचिव आशा सिंह, पदाधिकारी जयश्री सिंह, मंजू सिंह, कोलकाता की महासचिव इंदु संजय सिंह, कोषाध्यक्ष संचिता सिंह, पदाधिकारी मीरा सिंह, गीता सिंह, इंदु सिंह, सुमन सिंह तथा वीरांगना नारी शक्ति की पदाधिकारी शकुंतला साव तथा रंजना त्रिपाठी विशेष तौर पर उपस्थित थीं।
दूसरों के दुख-दर्द से जुड़ना ही मनुष्य जीवन की सार्थकताः प्रतिभा सिंह
समकालीन साहित्य में किन्नर विमर्श पर संगोष्ठी का आयोजन
कोलकाता। भारतीय भाषा परिषद में प्रगति शोध फाउंडेशन द्वारा पुस्तक विमोचन और ‘समकालीन साहित्य में किन्नर विमर्श’ पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत श्रीप्रकाश गुप्ता के शोक ज्ञापन के साथ किया गया। इस अवसर पर प्रकाश त्रिपाठी की संपादित पुस्तक ‘समकालीन साहित्य में किन्नर विमर्श’, अशोक आशीष की पुस्तक ‘गुम हुई पगडंडियों की तलाश’, गरिमा भाटिया की पुस्तक ‘पहल; बढ़ते कदम कामयाबी की ओर’ और डॉ. मीना घुमे निराली की पुस्तक ‘मुक्ति; स्त्री मुक्ति के आधुनिक संदर्भ’ का विमोचन हुआ। बीज वक्तव्य देते हुए महेंद्र भीष्म ने कहा कि कोई स्त्री लेखिका अपनी पीड़ा को लिख सकती है, दलित अपनी पीड़ा को दर्ज कर सकते हैं लेकिन किन्नर अपनी पीड़ा को शब्दबद्ध नहीं कर सकते क्योंकि ये अक्सर पढ़े-लिखे नहीं है इसलिए लेखक समाज को इनकी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए सामने आना चाहिए, परिषद के निदेशक डॉ. शम्भुनाथ ने कहा कि पौराणिक काल से लेकर आज तक किन्नर हमारे समाज में अपनी सह्रदयता, प्रतिभा और शुभाकांक्षा के साथ रहते आए हैं।विगत पंद्रह वर्षों से किन्नर विमर्श ने समाज में अपने लिए स्पेस बनाया है।उनको संवैधानिक अधिकार के साथ सामाजिक स्वीकृति अभी मिलना बाकी है। ताजा टीवी के निदेशक विश्वम्भर नेवर ने कहा कि किन्नर के जीवन में आर्थिक और सामाजिक दो समस्याएं मुख्य रूप से बनी हुई हैं। प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो मंजूरानी सिंह ने कहा कि दिवंगत श्रीप्रकाश गुप्ता के सपने का प्रतिफलन है किन्नर विमर्श पर आयोजित यह संगोष्ठी।किन्नर हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं।उन्हें उपेक्षित दृष्टि की जगह संवेदनशील ढंग से देखने की जरूरत है। डॉ. इतु सिंह ने समकालीन हिंदी कविता में मौजूद किन्नर विमर्श को रेखांकित करते हुए कहा कि किन्नर की स्थिति पर उपहास की जगह हमें उन्हें प्रोत्साहित करते हुए उन्हें उनकी विशिष्टताओं के साथ जीवन व्यतीत करने में मदद करना चाहिए।इस अवसर पर डॉ. मीना घुमे, डॉ रश्मि वार्ष्णेय और प्रिया पाण्डेय रोशनी में शोध सार का वाचन किया। दूसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए विजय किशोर पाण्डेय ने कहा कि हिंदी का समकालीन कथा साहित्य किन्नर विमर्श का आख्यान है।साहित्य में उपस्थित विमर्श को आज समाज और जीवन में सहानुभूति के साथ रूपायित करने की जरूरत है। डॉ गरिमा भाटी ने कहा कि हमें किन्नरों के विकास के लिए पहल करनी चाहिए और उन्हें शिक्षा और रोजगार से सम्बद्ध करना होगा।इस अवसर पर रीता दास, डॉ करुणा पाण्डेय और स्वाति चौधरी ने शोध सार का वाचन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ संजय जायसवाल, प्रकाश कुमार त्रिपाठी और दिव्या प्रसाद ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन इंदु गुप्ता दिया। इस कार्यक्रम में सत्यप्रकाश गुप्ता,वंदना तिलावत, विनोद यादव,प्राची गुप्ता, श्रद्धा गुप्ता, शालिनी गुप्ता, प्रिया श्रीवास्तव और सुषमा कुमारी का विशेष सहयोग रहा।इस आयोजन में अजय राय,सेराज खान बातिश,मृत्युंजय, राज्यवर्धन, अल्पना नायक,सुरेश शा,इबरार खान,मधु सिंह, विकास कुमार सहित कोलकाता के सैकड़ों साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।
सफलता ने सम्मानित किए विभिन्न विभागों में चयनित 32 विद्यार्थी
नैहाटी। राजभाषा हिंदी में रोजगार के लिए प्रतियोगितामूलक तैयारी के क्षेत्र में बहुचर्चित नाम सफ़लता संस्थान की ओर से संस्था के 32 विद्यार्थियों को भारत सरकार के विभिन्न विभागों में चयनित होने पर सम्मान समारोह 2023के अवसर पर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बतौर अतिथि उपस्थित थे शिव कुमार राम, आईएएस, वरिष्ठ सचिव, वित्त विभाग, प. बं. सरकार, मनिंद्रनाथ विश्वकर्मा, सहायक निदेशक (राजभाषा), स्वाति बिस्वास, सहायक निदेशक (राजभाषा), डॉ. संजय जायसवाल, सहायक प्रोफेसर, डॉ विनोद कुमार, सहायक प्रोफेसर, नारायण साव, मुख्य प्रबंधक (राजभाषा)। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ । इस शुभ अवसर पर श्रद्धा साव के हाथों एक एप्पलीकेशन लांच किया गया जिसके माध्यम से देश के किसी भी भाग से अभ्यर्थी जुड़ कर तैयारी के साथ साथ ऑनलाइन मॉक टेस्ट भी दे सकते है। संस्थान के संस्थापक व शिक्षक धर्मेंद्र साव ने प्रगति के बारे में बताया तथा भविष्य में संस्थान के द्वारा किये जाने वाले प्रगतिमूलक कार्यों का रोडमैप भी प्रस्तुत किया। इस अवसर पर पर्यावरण जागरूकता पर केंद्रित नाटक का मंचन किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन अपराजिता विनय और शिवानी पांडे एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राहुल गौड़ ने दिया। संस्थान की शुरुआत श्री धर्मेद्र साव के प्रयास से मात्र 28 छात्रों के साथ हुई थी आज 700 से अधिक विद्यार्थी इस संस्थान से जुड़ चुके हैं। सम्मान समारोह कार्यक्रम में सरिता प्रसाद, देवानंद साव, राजेश कुमार पांडे, योगेश साव, राजकुमार साव, अमरजीत पंडित,डॉ. बिक्रम साव, धीरज केशरी उपस्थित थे। अतिथियों ने अपने संबोधन में बताया कि धर्मेंद्र साव के प्रयास से किस प्रकार गौरीपुर राजभाषा के क्षेत्र में एक नया नाम बनता जा रहा है ।
प्रेस क्लब, कोलकाता में प्रभाकर पुरस्कार निर्णायक मंडल की बैठक
कोलकाता । प्रेस क्लब कोलकाता की ओर से इस बार संवाद प्रभाकर पुरस्कार 2023 दिये जाने की घोषणा की गयी है। ये पुरस्कार विभिन्न भाषाओं यथा बांग्ला, हिन्दी, अंग्रेजी जैसी में प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में सर्वोत्तम कृति को दिये जायेंगे। इस सिलसिले में गत 7 जुलाई 2023) क्लब परिसर में निर्णायकों व क्लब पदाधिकारियों की बैठक हुई । हिन्दी प्रिंट मीडिया के मामले में निर्णायकों में वरिष्ठ पत्रकार सीताराम अग्रवाल भी शामिल रहे । ये पुरस्कार क्लब के स्थापना दिवस पर आगामी 22 जुलाई को दिये जायेंगे। ज्ञातव्य है कि प्रेस क्लब की ओर से इस तरह का आयोजन पहली बार किया जा रहा है, जिसके लिए क्लब विशेष रूप से वर्तमान अध्यक्ष स्नेहाशीष सूर, सचिव किंगसुक प्रामाणिक सहित पूरी कार्यकारिणी बधाई के पात्र है। संवाद प्रभाकर पुरस्कार योजना को कार्यान्वित करने का गुरुतर भार क्लब के उपाध्यक्ष शैबाल विश्वास को सौंपा गया है।
लड़कियों को दहेज नहीं, पैतृक सम्पत्ति में से अधिकार दीजिए
सम्बन्धों का आधार विश्वास होता है परन्तु सम्बन्धों का महत्वपूर्ण आधार एक दूसरे के प्रति सम्मान भी होता है । सबसे आवश्यक यह जान लेना है कि एक दूसरे के प्रति सम्मान का आधार आयु नहीं होता, व्यक्ति, वर्ग और सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि नहीं होती बल्कि एक दूसरे के व्यक्तित्व का, चरित्र का सम्मान होता है । हम यह बात इसलिए कह रहे हैं कि श्रावण का महीना चल रहा है और यह शिव और शक्ति को समर्पित सबके लिए यह सम्भव नहीं होता और न ही यह सबके वश की बात है कि वह किसी को पूर्ण रूप से उपरोक्त आधारों को छोड़कर सम्मान दे । जब एक दूसरे के प्रति सम्मान और विश्वास समाप्त हो जाए तो यह उचित समय होता है कि दूरी बना ली जाए, थोड़ा समय दिया जाए, आत्ममंथन किया जाए और इस पर भी बात न बने तो आगे बढ़ जाया जाए ।
हम भारतीय परिवारों में संयुक्त परिवारों को महत्व अवश्य दिया गया है मगर उसका आधार प्रेम से अधिक सामाजिक बन्धन ही है । परिवारों में स्त्रियों की स्थिति एक आश्रित की होती है या उपेक्षिता की होती है । जो आश्रित रहकर परिवार की एकता के नाम पर अपने साथ होने वाले हर अन्याय को सहती जाए और हर अन्याय में सम्बन्ध निभाने के नाम पर खड़ी हो जाए…परिवार हो या समाज, जय -जयकार उसी की होती है, दूसरी तरफ उपेक्षिता वह है जो प्रश्न उठाती है, अपने अधिकारों की बात करती है और उसके लिए लड़ती है और हर तरफ से उसे त्याज्य समझा जाता है । कारण यह नहीं है कि उसके सवाल गलत हैं बल्कि कारण यह है कि आपके पास इन प्रश्नों के उत्तर ही नहीं है । आपको पीड़ित – प्रताड़ित, मौन रहने वाली घुट – घुटकर जीने वाली औरतें आदर्श लगती हैं मगर मुखर स्त्रियों से आप डरते हैं मगर आप सम्मान इनमें से किसी का नहीं करते , यही तथ्य है ।
इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर पारम्परिक मीडिया तक, रील और मीम निर्माताओं तक ज्योति मौर्य – आलोक मौर्य का प्रकरण छाया है । सबने अपने – अपने पक्ष चुन लिए हैं जबकि सत्य कोई नहीं जानता मगर दुःखद यह है कि इस घटना की आड़ में अपनी कुत्सिल और दमित इच्छाओं को पूरा करने का जरिए पितृसत्तात्मक समाज ने निकाल लिया है । ऐसा नहीं है कि इस तरह की घटना पहली बार हुई है परन्तु पुरुषों का बड़ा वर्ग खुद को स्वयंभू मानता है और स्त्रियों को अधीनस्थ..यह मानसिकता खुलकर सामने आ गयी है । क्या यह सिर्फ पति – पत्नी का मामला है, वास्तविकता यह है कि है मगर इसमें से अपने अहं की तुष्टि के लिए कैंची और जंजीर लेकर चलने वाले स्त्रियों के पर काटने निकल पड़े और अब होगा यह कि स्त्रियाँ अपनी जंजीरें निकाल फेकेंगी ।
यह जो बार – बार आप कहते हैं कि हर पुरुष एक जैसा नहीं होता तो आप यह क्यों नहीं समझते कि हर एक महिला एक जैसी नहीं होती और सबसे बड़ी बात यह है कि आपने एक पक्ष को तो सुन लिया मगर दूसरे पक्ष की बात नहीं सुन रहे और न ही समझना चाहते हैं क्योंकि नहीं समझने में आपकी सत्ता है । नहीं समझने में आपकी कुंठा, अहंकार, अशिक्षा..सब छुप जा रही है…आप खुद को खड़ा नहीं कर सके तो अब जो स्त्रियाँ आगे बढ़ रही हैं, उनकी प्रगति में बाधक बन रहे हैं…जबकि वह स्त्री आपके घर में एक घरेलू सहायक नहीं है..। चाहे वह आपकी बहन हो या पत्नी हो, दोनों का अपना सम्मान है, उनका स्वतंत्र व्यक्तित्व है और आगे बढ़ना आपके द्वारा दी गयी भिक्षा नहीं बल्कि उनका अधिकार है जिसे आप छीन नहीं सकते ।
इसके साथ ही यह भी समझना होगा कि अपने सपने अपने दम पर पूरे किये जाते हैं, अगर आप किसी पर निर्भर रहकर आसमान छूना चाहती हैं तो आप शायद आसमान छू भी लें मगर उसे पा नहीं सकतीं और न ही वह पूरा आसमान आपका होगा । कम से कम शिक्षित स्त्रियों को अपना खर्च और अपनी जिम्मेदारियों का बोझ खुद उठाना चाहिए । कोई किसी पर भी निर्भर होगा तो जटिलताएं और बढ़ेंगी । बचपन से ही माता – पिता यह कड़वी सच्चाई अपने बच्चों को बताकर बड़ा करेंगे तो वह मानसिक रूप से मजबूत होंगे और भविष्य के लिए तैयार भी । इसके लिए जरूरी है कि समय की माँग को समझते हुए लड़कियों को दहेज की जगह पैतृक सम्पत्ति में उनका अधिकार दीजिए..क्लेश और कलुषता दोनों कम होगी ।
यह ठोकर बहुत जरूरी थी कि स्त्रियाँ अपनी नींद से जागें और अपना सम्मान प्राप्त करें..अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे बढ़ें ।
भारतीय प्रवासी बंगाली हेतु ‘आईएफए शील्ड यू.के. 2023’ आयोजित
हेरिटेज बंगाल ग्लोबल ने आयोजित किया फुटबॉल टूर्नामेंट
कोलकाता । यूके में रहनेवाले भारतीय प्रवासी बंगाली समुदाय के लोग पिछले 6 वर्षों से (2020 के कोरोना काल के वर्ष को छोड़कर) हर गर्मियों के मौसम में आयोजित फुटबॉल टूर्नामेंट आईएफए (इंडियन फैन्स अलायंस) शील्ड में खेले जानेवाले मैच में हमेशा अपने पसंदीदा क्लब ईस्ट बंगाल या मोहन बागान की जर्सी पहने हुए देखे जाते हैं। इस साल 9 जुलाई को आर्बर पार्क में एक दिवसीय इस सुप्रसिद्ध फुटबॉल टूर्नामेंट ‘आईएफए शील्ड यूके 2023’ का आयोजन किया गया है, इसमें खेलने के लिए वहां फुटबाल प्रेमियों का उत्साह पूरे चरम पर है, इस प्रतियोगिता को इंग्लैंड के एफए द्वारा मान्यता प्राप्त है। हर साल इस फुटबॉल प्रतियोगिता में मैच के दौरान बंगाली समुदाय में काफी लोकप्रिय मेनू इलिश और चिंगड़ी (झींगा) के साथ मजेदार व्यंजन के साथ फुटबॉल और फूड डे एकसाथ मनाया जाएगा। इस साल मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब के सचिव दीपेंदु बिस्वास के समर्थन और पहल से क्लब के प्रशंसक टूर्नामेंट में पहली बार दिखेंगे। इस वर्ष के आयोजन में सोने पर सुहागा यह है कि भारतीय उच्चायोग ने स्वयं उप उच्चायुक्त सुजीत घोष के नेतृत्व में इस आयोजन में शामिल होने के लिए एक टीम भेजी है। पूर्व भारतीय अंतर्राष्ट्रीय जूल्स अल्बर्टो और हैरो काउंसिल के सबसे युवा काउंसिलर मैथ्यू गुडविन फ्रीमैन के साथ टीम काफी यह टीम दिलचस्प और दमदार लग रही है!
यह टूर्नामेंट पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के समूह के बीच खेला जाता है, जिसमें केवल महिलाएँ पेनल्टी शूटआउट करती हैं। इसके कारण इस आयोजन में शुरुआत से लेकर अंत तक भरपूर मजा ही मजा है । इस आयोजन में हेरिटेज बंगाल ग्लोबल के राजीब साहा, सौरव पॉल, रमिता घोष, सुदीप्तो भौमिक के लिए इस साल सबसे बड़ी संख्या में टीमों को शामिल करना एक नई चुनौती बन गई है। वही दूसरी ओर पॉइंटर्स बिजनेस फोरम (पीबीएफ) पिछले दो वर्षों से इस टूर्नामेंट का एक अभिन्न अंग रहा है, जिसका नेतृत्व इसके अध्यक्ष आईआईएचएम के सुबर्नो बोस, मुंबई स्थित एक्विस्ट रियल्टी के सचिव संजय गुहा, कोलकाता के देबाशीष घोष और हैरो के शौमो चौधरी कर रहे हैं।
एचबीजी के उपाध्यक्ष महुआ बेज हर इसकी तैयारियों में व्यस्त हैं, जो टूर्नामेंट की लगातार बदलती आवश्यकताओं को दर्शाते हैं और सुचारू वितरण सुनिश्चित करने के लिए बाहरी निकायों के साथ संपर्क कर रहे हैं। ईस्ट बंगाल, मोहन बागान और मोहम्मडन स्पोर्टिंग के लिए खेलने वाले खिलाड़ी सायंतन चक्रवर्ती, अबिरभाव बंद्योपाध्याय और ऋषिक बोस इस टूर्नामेंट की ट्रॉफी जीतने का लक्ष्य लेकर पिछले कुछ महीनों से हर हफ्ते अभ्यास में व्यस्त हैं। दिब्येंदु दूसरी बार खेलने के लिए स्विट्जरलैंड से आ रहे हैं। एचबीजी के निदेशक अनिर्बान मुखोपाध्याय कहते हैं, ‘इसकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि यह इस तरह का आयोजन ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी होने जा रहा है। सिडनी 23 सितंबर को अपने आईएफए शील्ड की मेजबानी करेगा। यूके में रहनेवाले प्रवासी बंगाली का एक बड़ा हिस्सा अब इस टूर्नामेंट से अपनी पहचान बना रहा है।
सांगवी डांस सेंटर’ का 10वां वार्षिक कार्यक्रम ‘सांगवी मोमेंट्स 2023’ सम्पन्न
कोलकाता । ‘सांगवी डांस सेंटर’, डांस और फिटनेस प्रीमियर डांस अकादमी सेंटर की ओर से कोलकाता के कला मंदिर में रंगारंग वार्षिक कार्यक्रम ‘सांगवी मोमेंट्स’ का भव्य आयोजन किया गया। यह शहर का एक दशक पुराना स्टूडियो है, जो महानगर में पश्चिमी अनुशासन सहित कुछ बेहतरीन अंतरराष्ट्रीय नृत्य शैली को संजोहे हुए है। इस कार्यक्रम का प्रबंधन मैप5 इवेंट्स द्वारा किया गया है। सांगवी मोमेंट्स के ग्रैंड फिनाले कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर डॉ. आर.के. गुप्ता (ऋषिकेश के आयुर्वेदिक ऑन्कोलॉजिस्ट), डॉ. ममता बिनानी (सीएस, सलाहकार, एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम पश्चिम बंगाल चैप्टर की अध्यक्ष), नीता कनोरिया (निदेशक विंग्स), डॉ. गरिमा अग्रवाल (भारत गौरव रत्न और ज्योतिष, वास्तु और हीलिंग के लिए ब्रावो इंटरनेशनल वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स धारक), गगन सचदेव (बॉडीलाइन के मालिक), श्रीमती श्रद्धा पारेख अग्रवाल (बैंकर), विपुल कृष्ण अग्रवाल (व्यवसायी), श्री आशीष मित्तल (निदेशक, गोल्डन ट्यूलिप होटल), श्रीमती संगीता भुवालका (सांगवी नृत्य केंद्र की निदेशक) और श्रीमती विनीता मजीठिया (सांगवी डांस सेंटर की निदेशक) के अलावा कई अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां इसमें शामिल थे।
सांगवी डांस सेंटर कोलकाता की प्रमुख नृत्य अकादमी है। इनके पास नृत्य और फिटनेस क्षेत्र में 23 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां अनुभवी प्रशिक्षकों की टीम अबतक 3-70 वर्ष की आयु के बीच के 5 लाख से अधिक छात्रों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित कर चुके है। यहां हिप-हॉप, जैज़, कंटेम्पररी, व्हैकिंग, सेमी-क्लासिकल और बॉलीवुड जैसे कई नृत्य रूप सिखाया जाता हैं। यहां न केवल नृत्य, बल्कि एक्सपर्ट प्रशिक्षकों के साथ उनकी देखरेख में नियमित ज़ुम्बा कक्षाएं प्रदान करके फिटनेस रक भी पूरा ध्यान दिया जाता हैं। खास तौर पर वयस्कों के लिए ज़ुम्बा कक्षाएं नृत्य और फिटनेस के मिश्रण से उनमें तनाव-बस्टर के लिए डिज़ाइन की गई हैं। कार्यक्रम में इन विषयों पर विभिन्न शो का प्रदर्शन किया गया, जिसमे- आदियोगी (शिव के प्रति समर्पण), जियो, प्यार करो और डांस करो, जैस्मीन द्वारा अरेबियन नाइट्स का प्रदर्शन (बेली डांस), संयुक्त परिवार, 10 बॉलीवुड दिवस के साथ एक डांस जिगल, इंद्रधनुष के पार कहीं, काला रंग (प्रेम जुनून), द मैजिक टॉय स्टोरी, 10 दोहरे अंक वाली संख्या (दोहरा व्यक्तित्व) है, ज़ुम्बा, गंगू बाई, जब मैं बड़ा हो जाऊँगा, कोविड, भगवद गीता से 10 पाठ, सूफी कथक, 10 कदम (बच्चों के लिए स्वास्थ्य जागरूकता) के अलावा और भी काफी कुछ इस कार्यक्रम में प्रदर्शित किया गया।
सांगवी डांस सेंटर की निदेशक संगीता भुवालका और विनीता मजीठिया ने कहा, हमारे लिए 10वां वार्षिक शो ‘सांगवी मोमेंट्स 2023’ को प्रस्तुत करना एक बड़े सम्मान की बात है। इस रंगारंग भव्य कार्यक्रम में 3-60 वर्ष की आयु के कुल 400 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। इस तरह के आयोजन छात्रों में आत्म-विश्वास, निर्णय लेने, स्मृति और आत्मविश्वास की गहरी भावना पैदा करने के अलावा, एक ही समय में उनकी रचनात्मकता का पोषण करते हैं। हमें खुशी है कि हमारा सांगवी परिवार आपस में एक गहरा बंधन साझा करता है। हम इस आयोजन को सफल बनाने के लिए अपने सभी प्रतिभागियों को उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण के लिए तहे दिल से धन्यवाद देते हैं।
मालदीव के शिक्षा मंत्री डॉ. अब्दुल्ला रशीद अहमद ने दिए विद्यार्थियों को शिक्षा के मंत्र सूत्र
कोलकाता । सर्वश्रेष्ठ शिक्षाविद् मालदीव के शिक्षा मंत्री डॉ अब्दुल्ला रशीद अहमद ने भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों को एमर्जिंग ट्रेंड्स इन एजूकेशन विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों को जीवन के उद्देश्य और शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्टता प्राप्त करने के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की । वैश्विक युग में जहांँ विभिन्न भाषाएँ, संस्कृतियाँ और कार्य हैं ऐसे युग में अपने देश को समृद्ध करने के लिए विद्यार्थियों को स्वयं सुदृढ़ होना होगा।डॉ अब्दुल्ला ने चौदह बिजनेस लॉ में विशिष्टता प्राप्त की है जो एक मिसाल है। एक अच्छे विद्यार्थी में छह सी की उपयोगिता बताई जिनमें कोलेबोरेशन, क्रिटिक्स थिंकिंग , क्रिएटिविटी , कम्युनिकेशन, सीटीजन, कैरेक्टर प्रमुख बिंदु हैं जिनको अपने जीवन में उतारना होगा तभी विद्यार्थी अपने उद्देश्यों पर खरे उतरेंगे। सफलता उन्हें ही मिलती है जो अपने जीवन में आराम के दायरे से बाहर निकल कर कार्य करते हैं। हम आज पूछते नहीं हैं स्वीकार कर लेते हैं अतः जिज्ञासु होना आवश्यक है।

डॉ वसुंधरा मिश्र ने एक साक्षात्कार में डॉ अब्दुल्ला रशीद से कई प्रश्न किए जिनमें स्त्री सशक्तीकरण, वेशभूषा, खानपान, भाषा और शिक्षा के आदान – प्रदान पर चर्चा की। डॉ अब्दुल्ला रशीद ने बताया कि यह इस्लामिक देश है, टूरिज्म के लिए मालदीव बहुत प्रसिद्ध है, लोग शूटिंग और हनीमून डेस्टिनेशन वहाँ जा कर मनाते हैं, हमारे यहाँ स्त्री- पुरुष में कोई भेद नहीं है।मालदीव की आधिकारिक भाषा दिवेही है लेकिन मुख्य रूप से अंग्रेजी में ही सभी कार्य होते हैं । 1192 द्वीपों से मिल कर मालदीव बना है, हमारी करेंसी रूफिया है। डॉ अब्दुल्ला सर्वश्रेष्ठ प्रिंसिपल के अवार्ड से सम्मानित किए गए जो मालदीव के इतिहास में पहली बार है । शिक्षा मंत्री के पूर्व डॉ अब्दुल्ला रशीद बतौर प्रिंसिपल अट्ठारह वर्ष तक कार्य किए। उनका मानना है कि वे शिक्षक हैं और अंत तक शिक्षक ही रहना चाहेंगे। इस अवसर पर विद्यार्थियों और शिक्षकों ने कई प्रश्न पूछे जिनके जवाब शिक्षा मंत्री ने दिए।
कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने कॉलेज मोमेंटो, शॉल और उपहार से डॉ अब्दुल्ला रशीद को सम्मानित किया। स्वागत वक्तव्य में प्रो दिलीप शाह ने डॉ अब्दुल्ला का परिचय दिया और कहा कि मालदीव के साथ एमओयू करने का प्रस्ताव रखा है जिससे भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों और मालदीव के विद्यार्थियों का शिक्षा के क्षेत्र में आदान-प्रदान होगा। आने वाला समय बहुत तेजी से बदल रहा है जिससे हमें और मेहनत करने की आवश्यकता है। प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी के संयोजन में कार्यक्रम किया गया ।प्रो चंदन झा, प्रो दिव्या उदेशी, प्रो विवेक पटवारी की उपस्थिति रही। प्रो हर्षित चोखानी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।कार्यक्रम में एनसीसी के कैडट और नब्बे से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति रही ।कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
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पुस्तक समीक्षा – कविता सृजन से मुझे ऊर्जा मिलती है : प्रो प्रेम शर्मा को पढ़ते हुए

“एक दीप जलाकर तो देखो” प्रो प्रेम शर्मा का सद्य प्रकाशित कविता संग्रह है।भाषा नहीं, भाव ही कविता को संप्रेषित करते हैं। 50 से अधिक कविताओं में से किसी भी कविता को पढ़ते हुए पाठक समाज कल्याण की ही भावना को महसूस करता है। एक आदर्श समाज कैसे निर्मित हो? कैसे देश का गौरव बढ़ाया जा सकता है? कैसे बच्चों में अच्छे चरित्र का निर्माण किया जा सकता है? आधुनिक अपसंस्कृति की आंधी से दूर भारतीय संस्कृति को कैसे रोपित किया जाए? आदि द्वन्द्वों से गुजरती हुई कवयित्री प्रेम शर्मा विविध भावों को शब्दों में उतारती है। अपने आशावादी विचारों से अनुप्रेरित कवयित्री ने अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति में एक आदर्श परिवार समाज और देश की कल्पना की है।
कवयित्री जानती है –
‘आँखों से अश्क जो बहा सकते नहीं
पीकर गम जो घटा सकते नहीं
खुद को उतार देते हैं, कागज पर वो
बस फिर कुछ और वो करते नहीं’
कविता अपने ख़्यालात, अपने जज़्बात को पेश करने का एक बेहद ख़ूबसूरत ज़रिया है। कविताओं में भाव तत्व की प्रधानता है। रस को कविता की आत्मा माना जाता है जो कविता के अवयवों में आज भी सबसे अहम है।कवयित्री शब्दों के द्वारा अपनी अनकही बातों को आकार देती है।
इन कविताओं में एक लय है, भावों की लय, जो पाठक को बांँधे रखती हैं।एक और अंडर करेंट भी है जो देश, समाज और सत्ता में बैठे लोगों के लिए एक चेतावनी भी है। आधुनिकता की आँधी और तृष्णा की चाह में जो मनुष्य अपनी लालसाओं को पूरा करने में लगा हुआ है, इंसान से जानवर बन चुका है। ऐसे लोगों के पापों के सर्वनाश के लिए काल के अवतार का अवतरण होना निश्चित है। वह प्रकृति के इस नियम को जानती है कि काल के आगे बड़े -बड़े लोग धराशायी हुए हैं।
हृदय में यदि कोई तीक्ष्ण हूक उठती है। एक अनाम-सी व्यग्रता संपूर्ण व्यक्तित्व पर छा जाती है और कुछ कर गुज़रने की उत्कट भावना आत्मा को झिंझोड़ती रहती है। ऐसी परिस्थिति में कितने ही लंबे समय का अंतराल हो, रचनाशीलता अवसर मिलते ही हृदय में एकत्रित समस्त भावनाओं , विचारों और संवेदनाओं को अपनी संपूर्णता से अभिव्यक्त होती हैं। सिर्फ़ ज्वलंत अग्नि पर जमी हुई राख को हटाने मात्र का अवसर मिलना होता है, तदुपरांत प्रसव पीड़ा के पश्चात जिस अभिव्यक्ति का जन्म होता है, वह सृजनात्मक एवं गहन अनुभूति का सुखद चरमोत्कर्ष होता है। यह काव्य संग्रह ऐसी ही प्रसव पीड़ा के पश्चात जन्मी अभिव्यक्ति का संग्रह है।
गुणों की भरमार है धनिया पत्ती, मिलते हैं कई फायदे
धनिया हम सभी के किचन का एक अहम हिस्सा है। दाल हो या सब्जी या किसी भी प्रकार की चाट उसमें ऊपर से धनिया पत्ती तो जरूर डाली जाती हैं। धनिये के पत्तों में एक बेहतरीन खुशबु होती है, जिससे यह न सिर्फ हमारे भोजन को अद्भुत सुगंध प्रदान करता है, बल्कि उनका स्वाद भी बढ़ाता है। धनिया के पत्ते बड़े ही गुणकारी होते हैं और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं में लाभदायक होते हैं। इसमें विटामिन ए व सी, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। सब्जियों के अलावा इसके उबले हुए पानी का सेवन करना भी फायदेमंद साबित होता हैं। अपने गुणकारी गुणों के चलते यह सेहत को जो फायदे पहुंचाती हैं उनके बारे में हम आपको आज यहां बताने जा रहे हैं। इन फायदों को जानकर आप भी धनिया पत्ती के दिवाने हो जाएंगे। आइये जानते हैं इसके फायदों के बारे में…
दिल को रखें सेहतमंद
उम्र बढ़ने के साथ दिल की सेहत में भी गिरावट आने लगती है। ऐसे में विटामिन्स और प्रोटीन्स से भरपूर भोजन खाना महत्वपूर्ण है। एक रिसर्च के मुताबिक, धनिया रोजाना खाने से दिल से जुड़ी समस्याओं और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है। ये ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रोल लेवल को काबू में भी रखती है।
थायराइड में फायदेमंद
ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने से थायराइड की समस्या बढ़ सकती है। धनिया ब्लड शुगर और थायराइड को नियंत्रित करता है। थायराइड को नियंत्रित रखने के लिए रात के समय धनिया की पत्ती को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें और अगले सुबह इस पानी को छानकर पी लें। खाली पेट धनिया का पानी पीने से थायराइड को नियंत्रण में रखा जा सकता है।
लिवर को करे डिटॉक्स
लिवर फंक्शन में सुधार और बेहतर बनाने में मदद मिलती है। धनिया पत्ती के उबले हुए पानी को एक बेहतरीन डिटॉक्स ड्रिंक माना जाता है, क्योंकि यह शरीर में जमा गंदगी, अपशिष्ट पदार्थों, टॉक्सिन्स को हमारे शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं। यह लिवर को साफ करते हैं और रक्त को भी शुद्ध करते हैं।
वजन को नियंत्रित करे
धनिया पत्ती का पानी मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में बहुत लाभकारी होता है। अगर आप रोजाना नियमित तौर पर सुबह खाली पेट धनिया की पत्तियों को उबालकर पानी पीते हैं तो इससे आपका मेटाबॉलिज्म तेज होता है। जिससे ये कैलोरी और अतिरिक्त चर्बी को बर्न करने में मददगार होता है।
एनीमिया से दिलाए राहत
धनिया आपके शरीर में खून को बढ़ाने में तो फायदेमंद होता ही है साथ ही यह आयरन से भरपूर होता है। इसलिए यह एनीमिया को दूर करने में फायदेमंद हो सकता है। साथ ही एंटी ऑक्सीडेंट, मिनरल, विटामिन ए और सी से भरपूर होने के कारण धनिया कैंसर से भी बचाव करता है।
डायबिटीज में फायदेमंद
हरा धनिया ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए रामबाण माना जाता है। डाइबिटीज रोगियों के लिए हरा धनिया किसी जड़ी-बूटी से कम नहीं है। इसके नियमित सेवन से ब्लड में इंसुलिन की मात्रा को कंट्रोल किया जा सकता है।
अच्छे पाचन तंत्र के लिए
धनिये के पत्ते का उपयोग पाचन तंत्र को ठीक करने के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसमें लिनालूल नामक कंपाउंड पाया जाता है, जो पेट फूलने से राहत देने वाली दवा की तरह काम करता है। इस आधार पर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए धनिये के पत्तों के उपयोगी माना जा सकता है।
तनाव कम करती है
धनिया की पत्तियां आपके पाचन को बढ़ाती हैं और इस तरह आपके शरीर पर तनाव कम करती है। ये पत्तियां हमारे पाचन तंत्र के माध्यम से हमें हल्का महसूस कराकर मूड को तेजी से बदलने में मदद करती हैं। धनिया में पाए जानेवाले पोषक तत्व ऑक्सिडेटिव तनाव को भी कम करते हैं।
आंखों के लिए फायदेमंद
आंखों के लिए धनिया के पत्ते के फायदे की बात करें, तो यह आंखों से संबंधित कई परेशानीयों के इलाज में फायदेमंद हो सकता है। एक रिसर्च में आंखों के लिए धनिया का इस्तेमाल अच्छा बताया गया है। इसके अलावा, आंखों में खुजली और जलन को शांत करने के लिए धनिया का इस्तेमाल उपयोगी हो सकता है। वहीं, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आंखों से जुड़ी बीमारियों और समस्याओं को भी दूर कर सकते हैं।




