Monday, March 23, 2026
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सर्दियों में रखें त्वचा का खास ख्याल

सर्दी के मौसम में चेहरे की चमक खोने लगती है। ऐसा मौसम में बदलाव के कारण होता है. इस दौरान अगर आप अपने चेहरे की चमक बढ़ाना चाहते हैं तो इन 3 तरीकों को अपना सकते हैं। सर्दी के मौसम में अक्सर त्वचा संबंधी समस्याएं हो जाती हैं। इस मौसम में त्वचा रूखी, पीली और बेजान दिखने लगती है। ऐसा ठंडी हवाओं के संपर्क में आने से होता है। सर्दियों में त्वचा धूप, ठंडी हवा और प्रदूषण के संपर्क में आती है जिससे त्वचा पर बुरा असर पड़ता है। जिसके कारण सर्दियों में त्वचा को खास देखभाल की जरूरत होती है। सर्दियों में अपने चेहरे की चमक बढ़ाने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं –
होममेड फेस पैक लगाएं- त्वचा की चमक बढ़ाने के लिए आप होममेड फेस पैक का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस फेस पैक को बनाने के लिए पपीते को मैश कर लें और फिर इसमें नींबू का रस मिलाएं। इसे अच्छे से मिलाकर चेहरे पर लगाएं। इसे कम से कम 15 मिनट के लिए छोड़ दें. फिर चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें.
तेल लगाएं- सर्दियों में अपनी त्वचा को हाइड्रेट करने के लिए अपने चेहरे पर तेल लगाएं। आप रात को सोने से पहले अपने चेहरे पर तेल लगा सकते हैं। इसके लिए अपनी पसंद का तेल इस्तेमाल करें. इसे अपने चेहरे पर लगाएं और हल्के हाथों से मसाज करें। इसे रात भर लगा रहने दें, फिर सुबह अपना चेहरा धो लें।
स्क्रबिंग है फायदेमंद- सर्दियों में अपने चेहरे की चमक बरकरार रखने के लिए आप चावल के स्क्रब का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए चावल और तिल को एक बर्तन में भिगो दें. जब यह अच्छे से भीग जाए तो इसे पीस लें। इसमें शहद मिलाएं और फिर इसे चेहरे और शरीर पर अच्छे से लगाएं। फिर 2 से 3 मिनट के लिए छोड़ दें और स्क्रब करें। फिर त्वचा को अच्छी तरह साफ कर लें।

निःस्वार्थ प्रेम की खामोश आवाज अमृता के इमरोज

मशहूर चित्रकार और अमृता प्रीतम के साथ एक लंबा अरसा गुज़ारने वाले इमरोज़ का निधन हो गया है। वे 97 साल के थे और बीमार थे। अमृता प्रीतम के साथ अपने रिश्ते की वजह से जाने जाते थे। खास बात है कि दोनों ने कभी शादी नहीं लेकिन 40 साल तक एक दूसरे के साथ रहे। अमृता प्रीतम ने अपनी आत्मकथा ‘रसीदी टिकट’ में साहिर लुधियानवी के अलावा अपने और इमरोज़ के बीच के आत्मिक रिश्तों को भी  बेहतरीन ढंग से क़लमबंद किया। इस किताब में अमृता ने अपनी ज़िंदगी कई परतों को खोलने की कोशिश की है। ‘रसीदी टिकट’ में अमृता ख़ुद से जुड़े हुए कई ब्योरे यहां खुलकर बताती हैं। इमरोज़, अमृता की जिंदगी में आए तीसरे पुरुष थे। हालांकि वह पूरे जीवन साहिर से प्यार करती रहीं। अमृता कई बार इमरोज़ से कहतीं- “अजनबी तुम मुझे जिंदगी की शाम में क्यों मिले, मिलना था तो दोपहर में मिलते।” अमृता इमरोज़ से अक्सर इस तरह के सवाल पूछती थीं, क्योंकि इमरोज़ अमृता की ज़िंदगी में बहुत देर से आये थे। मगर वो दोनों एक ही घर में एक ही छत के नीचे दो अलग-अलग कमरे में रहते थे।
मैं रात को शांति में लिखती थीं, तब धीरे से इमरोज़ चाय रख जाते थे…
अमृता के संग रहने के लिए इमरोज़ ने उनसे कहा था इस पर अमृता ने इमरोज़ से कहा कि “पूरी दुनिया घूमकर आओ फिर भी तुम्हें लगे कि साथ रहना है तो मैं यहीं तुम्हारा इंतज़ार करती मिलूंगी। उस समय इमरोज़ ने अपने कमरे के साथ चक्कर लगाने के बाद उन्होंने अमृता से कहा कि घूम लिया दुनिया, मुझे अभी भी तुम्हारे ही साथ रहना है।” अमृता ने इमरोज़ का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब मैं रात को शांति में लिखती थीं, तब धीरे से इमरोज़ चाय रख जाते थे। ये सिलसिला सालों साल चला। इमरोज़ जब भी अमृता को स्कूटर पर ले जाते तो अमृता अक्सर उंगलियोंं से हमेशा उनकी पीठ पर कुछ लिखती रहती थीं। इमरोज़ भी इस बात से अच्छे से वाक़िफ़ थे कि उनकी पीठ पर वो जो शब्द लिख रहीं हैं वो साहिर हैं।
मेरा इश्क़ यह किस मुकाम पर आ गया है…अमृता को जब राज्यसभा का मनोनीत सदस्य बनाया गया तो इमरोज़ उनके साथ संसद भवन जाते और घंटों बाहर बैठ कर अमृता के लौटने का इंतज़ार करते। अक्सर वहीं पर मौजूद लोग इमरोज़ को ड्राइवर मान लेते। इमरोज़ ने भी अमृता के लिए अपने कॅरियर के साथ समझौता किया। उन्हें बहुत जगह अच्छी नौकरी के अवसर मिले मगर अमृता की ख़ातिर उन्होंने ये अवसर ठुकरा दिये।
क़लम ने आज गीतों का क़ाफ़िया तोड़ दिया
मेरा इश्क़ यह किस मुकाम पर आ गया है
देख नज़र वाले, तेरे सामने बैठी हूं
मेरे हाथ से हिज्र का कांटा निकाल दे
जिसने अंधेरे के अलावा कभी कुछ नहीं बुना
वह मुहब्बत आज किरणें बुनकर दे गयी
उठो, अपने घड़े से पानी का एक कटोरा दो
राह के हादसे मैं इस पानी से धो लूंगी…
(अमृता प्रीतम की एक गज़ल)
(साभार – अमर उजाला)

सर्दियों में पराठा और चीला का आनंद

पुदीना पराठा
सामग्री – 1 कप गेहूं का आटा, 1/2 कप कटी हुई पुदीना पत्तियां, 1/2 छोटा चम्मच कसा हुआ अदरक, 1/4 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर , 2 बड़े चम्मच सूखा पुदीना, 1/2 छोटा चम्मच मक्खन, 2 बड़े चम्मच चाट मसाला, 3 बड़े चम्मच देसी घी, नमक स्वादानुसार
विधि – पुदीना पराठा बनाने के लिए सबसे पहले आटे को छान कर एक मिक्सिंग बाउल में डाल लें। इसके बाद आटे में कटी हुई पुदीने की पत्तियां डालकर मिलाएं। अब आटे में कसा हुआ अदरक, 2 चम्मच तेल और स्वादानुसार नमक डालें और आटे को अच्छे से छान लें. ताकि आटे में पुदीना और अन्य सामग्री अच्छे से मिल जाए। अब थोड़ा पानी डालकर आटा गूंथ लें । इसके बाद आटे को ढककर 15 मिनट के लिए अलग रख दीजिए। तय समय के बाद आटा लें और इसे एक बार फिर से गूंथ लें। इसके बाद आटे की मध्यम आकार की लोइयां बना लीजिए। सबसे पहले एक बाउल लें और उसमें सूखा पुदीना, लाल मिर्च पाउडर और थोड़ा सा नमक डालकर तीनों को मिला लें। अब आटे की एक लोई लें और उसे बेल लें। इसके ऊपर सूखा पुदीना मिश्रण डालें और चारों तरफ फैला दें। अब परांठे को बेल लें और लच्छा परांठे की तरह बेल लें, इसके बाद परांठे को बीच में दबाकर बेल लें। अब एक नॉनस्टिक पैन लें और उसे मध्यम आंच पर गर्म करें। तवा गर्म होने पर उस पर परांठे डालकर तल लें। इसी बीच पराठों के दोनों तरफ घी लगाकर इन्हें क्रिस्पी होने तक तल लीजिए। जब परांठे का रंग सुनहरा भूरा हो जाए तो इसे पैन से उतार लें। सारे पुदीना परांठे इसी तरह तैयार कर लीजिये। अब परांठे को दही या चटनी के साथ परोसें।

चुकंदर चीला


सामग्री –2 मध्यम आकार के चुकंदर (बीट), 2 मध्यम आकार के आलू , 1 (कटी हुई) हरी मिर्च , 2 बड़े चम्मच धनिया पत्ती, 1 छोटा टुकड़ा अदरक, 2 लहसुन, 1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच जीरा पाउडर., नमक – स्वादानुसार, 2 बड़े चम्मच तेल ।
विधि – चुकंदर चीला बनाने के लिए सबसे पहले चुकंदर और आलू को अच्छे से धोकर उबाल लें। इन्हें उबलते पानी में रखें और 15-20 मिनट तक पकाएं। चुकंदर और आलू को ठंडा होने दें। फिर छीलकर कद्दूकस कर लें।अब एक बड़े कटोरे में कद्दूकस किया हुआ चुकंदर और आलू, हरी मिर्च, धनिया के बीज, अदरक, लहसुन, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, जीरा और नमक मिलाएं। सभी चीजों को अच्छे से मिला लीजिए। – अब एक नॉन स्टिक पैन में तेल गर्म करें। तेल गर्म होने पर चुकंदर के मिश्रण को पैन में डालें और मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक पकाएं, ताकि चीला कुरकुरा हो जाए।. इसमें लगभग 10-12 मिनट का समय लग सकता है। जब चीला सुनहरा हो जाए तो उसे पलट दें और दूसरी तरफ से भी पकाएं, ताकि वह समय पर पक जाए।

सर्दियों की धूप से बच्‍चे बनते हैं लोहे जैसे मजबूत 

सर्दियां में धूप को बहुत पसंद किया जाता है। धूप से सेहत को फायदे भी मिलते हैं और छोटे बच्‍चों एवं शिशु के लिए भी धूप बहुत लाभकारी होती है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पीडियाट्रिक विभाग के शोध में भी यह बात साबित हो चुकी हैं क‍ि गर्भवती महिलाओं में विटामिन डी की कमी का असर नवजात शिशुओं में देखने को मिलता है। इससे बच्चों की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इसे दूर करने के लिए जन्म के 5 से 15 दिन बाद सर्दी में नियमित रूप से शिशु को 15 से 20 मिनट धूप में जरूर ले जाना चाहिए। बच्‍चों की सेहत के ल‍िए धूप अच्‍छी होती है और इस आर्टिकल में हम आपको शिशु या छोटे बच्‍चों को धूप से मिलने वाले फायदों के बारे में बता रहे हैं। –
विटामिन डी म‍िलता है – धूप से शरीर को विटामिन डी बहुत मिलता है। हमारे शरीर को विटामिन डी की जरूरत होती है और इसे बनाने के लिए शरीर को रोज कम से कम 15 मिनट तक यूवी किरणों के सामने बैठना चाहिए।
पील‍िया से बचाव – धूप बिल्‍रूबिन को तोड़ने में मदद करती है। यह एक पीले रंग का तत्‍व होता है जो प्राकृतिक कैटाबोलिक पैथवे में बनता है। इससे बेबी का लिवर बिल्‍रूबिन को और आसानी से प्रोसेस कर पाता है। बिल्‍रूबिन बढ़ने पर शिशु की त्वचा पीली पड़ सकती है। सुबह 15 से 20 मिनट तक धूप में रहने से पीलिया के हल्‍के लक्षण कम हो सकते हैं।
हैप्‍पी हार्मोन का विकास – छोटे बच्चे के दिमाग के विकास के लिए सर्दियों की धूप बहुत जरूरी होती है। धूप में रहने से बच्चे के शरीर में सेरोटोन‍ि हार्मोन की बढ़ोतरी होती है। सेरोटोनिन को हैप्‍पी हार्मोन भी कहते हैं जिससे खुशी और सुरक्षा की भावना आती है। सेरोटोनिन बच्‍चों में नींद और पाचन को नियंत्रित करता है।
डायबिटीज का खतरा टलता है – कम उम्र में ही धूप लेने से डायबिटीज जैसी बीमारियों से बचने में मदद मिल सकती है। धूप से बॉडी को विटामिन डी मिलता है, जो शरीर को इंसुलिन लेवल को नॉर्मल रखने में भी सहायता करता है।
हड्डियां बने मजबूत – हेल्‍थलाइन के मुताबिक धूप से बच्चों को विटामिन डी मिलता है जो कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है। इससे बच्चों की हड्डियां मजबूत होती हैं।
इतनी देर जरुर बच्‍चों को खिलाएं धूप – सूरज निकलने के एक घंटे बाद और सूरज ढलने से एक घंटे पहले का समय सबसे अच्‍छा होता है। हालांक‍ि बच्चों की त्वचा बहुत संवेदनशील होती है इसलिए 30 मिनट से ज्‍यादा उसे धूप में न बिठाएं। इस समय बच्‍चे की छाती और पीठ पर धूप जरूर लगनी चाहिए।

समानता और अधिकार का सूर्य ही न्याय का प्रभात लाकर गढ़ सकता है स्वस्थ समाज

नया साल आ चुका है। बीते साल में बहुत से खट्टे – मीठे अनुभव हुए और कुछ मायनों में इतिहास भी बना। भारत के लिए यह वर्ष ऐतिहासिक रहा और जब महिलाओं की बात आती है तो इसने उपलब्धि दी, बहुप्रतीक्षित महिला आरक्षण बिल कानून बन चुका है। वहीं महिलाओं के साथ जब अपराध की बात आती है तो युग आज भी बर्बर है। श्रद्धा कांड ने झकझोरा और जब लिख रही हूँ तो महिला पहलवानों के उत्पीड़न और उनकी निराशा के बीच मन फंसा पड़ा है। अगर समाज अन्याय का साथ देता रहा और हर मोड़ पर बृजभूषण ही लड़कियों को मिलते रहे तो उनकी उपलब्धियों को रास्ता कैसे मिलेगा? हस्तिनापुर की द्यूत सभा में दुर्योधन मद में जंघा पीट रहा है और आज भी उसे रोकने वाला कोई नहीं, लड़कियों का मनोबल गिराने के लिए सब के सब खड़े हैं। घर – परिवार, समाज कोई भी स्त्री के सच का साथ नहीं देता और वह भी उस देश में जो महिषासुरमर्दिनी का देश है। स्त्री को देवी मत बनाइए मगर उसके हिस्से का सुख तो उसे मिलना ही चाहिए। आखिर माता – पिता कैसे अपनी बेटियों को अपने बेटों के रहमो करम पर छोड़ देते हैं। आखिर लड़कियां कब समझेंगी कि सुख का रास्ता आत्मसम्मान और अपने अधिकारों की रक्षा से होकर गुजरता है। भावनात्मक जाल में बहनें ही सबसे अधिक फंसी रहती हैं और उनकी भावुकता का लाभ उठाकर उनकी खुशियों पर परिवार कब्जा कर लेता है। सम्पत्ति के अधिकार को अदालत ने मान्यता दे दी मगर किसी भी सरकार में इतनी शक्ति नहीं है कि वह उसे लागू करे। तमाम सरकारी योजनाएं महिलाओं को लॉलीपॉप थमाने जैसी हैं। कभी मुफ्त बस का टिकट तो कभी बैंक खाते में 5-6 हजार रुपये भेज देना, कभी मुफ्त सिलिंडर दे देना और वह भी चुनाव आने पर…मगर स्त्री की पहचान, उसकी अस्मिता को मजबूत करने के लिए, परिवारों में उसकी स्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिए उसकी सम्पत्ति प्राप्त करने के अधिकार को अधिकार मानने के लिए कोई भी कुछ नहीं कर रहा है। असमानता तो स्त्रियां बचपन से ही झेलती हैं और अधिकतर मामलों में अपनी ही मां के अन्याय का शिकार बनती हैं। माताओं की शह पर ही भाई बहनों की पढ़ाई छुड़वाने , नौकरी छीनने से लेकर उनके जीवन के हर फैसले में अजगर की भांति हावी होने का प्रयास करते हैं। अगर किसी स्त्री ने विवाह नहीं किया तो मान लिया जाता है कि उसे भाइयों पर निर्भर रहकर उनकी जूठन पर निर्भर रहना होगा, उनका टूटा – फूटा सामान रखना होगा और घरेलू सहायिका से बदतर जीवन गुजारना होगा। हम ननदों और बुआ पर मीम्स बनाते हैं, कहानियों में वह खलनायिका है मगर संयुक्त परिवार में जब आधे – अधूरे संबंधों को ही आपने तमाम अधिकार दे रखे हैं तो आप कैसे उम्मीद करते हैं कि बाकी रिश्ते जीवित रहेंगे? अगर भारतीय संयुक्त परिवार टूट रहे हैं और लोग एकल रहना पसन्द कर रहे हैं तो इसका दायित्व उन पर नहीं, बल्कि उस समाज पर है जो सच के साथ और पीड़ित के पास खड़ा नहीं होता। परिवारों में जो भी शक्तिशाली रहता है, उसने अपने लालच की पराकाष्ठा दिखाते हुए छोटे – भाई बहनों के तमाम अधिकारों पर कब्जा जमा रखा है और  आप उसे मान्यता भी देते हैं। आपको पीड़ित की चिन्ता नहीं है, उसके दुःखों से आपको कोई मतलब नहीं है, आपको चिन्ता है कि खोखले सम्मान की जो चादर आपने ओढ़ रखी है, उस पर आंच न आए…तो यह चादर तो एक दिन फटनी ही है। ऐसी स्थिति में परिवार का टूटना तय है। जब तक समाज सच और न्याय की जगह शक्ति के  नाम पर अहंकार को प्रश्रय देगा, तब तक वह आगे नहीं बढ़ सकता। समानता और अधिकार का सूर्य ही न्याय का प्रभात लाकर एक सुखी समाज गढ़ने की क्षमता रखता है।
बहरहाल, व्यस्तताओं के कारण दिसम्बर अंक निकाला नहीं जा सका। नववर्ष के इस अंक में हम बहुत नहीं तो तीन आमुख कथाओं के साथ इसे समाहित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह चुनौतियों सुरंग से निकलकर नये न्याय के आलोक में नववर्ष का प्रभात लाने की यात्रा है। सुरंग से निकला है न्याय का नया सवेरा। यह मिशन उत्तरकाशी से लेकर नयी न्यायिक संहिता और नववर्ष की यात्रा है। हम विश्वास करना चाहते हैं कि नारी शक्ति को उसके हिस्से के सुख का सूरज मिले और अधर्मियों को दंड मिले। घोर निराशा के बीच भी हमें महिला पहलवानों के साथ न्याय की प्रतीक्षा है, हमें प्रतीक्षा है कि बहनों को उनकी सम्पत्ति और भावनात्मक दृढ़ता का अधिकार मिले। नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाओं के साथ आप सभी को शुभ नववर्ष ।

हावड़ा राइटर्स एसोसिएशन की ओर से सम्मानित किये गये साहित्यकार

हावड़ा ।  हावड़ा राइटर्स एसोसिएशन के वार्षिक साहित्यिक सम्मान शिवपुर में इदारा इमदादुल गुर्बा में प्रदान किये गये। हिन्दी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह सम्मान डॉ.अभिज्ञात, बांग्ला के लिए अमित मुखोपाध्याय और उर्दू के लिए शब्बीर जुल मनान को दिया गया। संस्था के संस्थापक और विख्यात साहित्यकार स्वर्गीय कैसर शमीम की स्मृति में किसी उर्दू साहित्यकार को दिया जाने वाला कैसर शमीम अवार्ड हलीम साबिर को मिला। एसोसिएशन के सदस्य लेखक का सम्मान डॉ.सुल्तान साहिर को और विशेष
सम्मान से शहनाज रहमत को नवाजा गया। समारोह को संस्था के अध्यक्ष डॉ.मुहम्मद शमसुल हसन अंसारी, सचिव जावेद मजीदी ने सम्बोधित किया। समारोह की अध्यक्षता डॉ.शाहिद अख्तर ने की।

महिला सशक्तीकरण की गतिविधियों में तेजी लायेंगी वीरांगनाएं

कोलकाता । अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फाउंडेशन, पश्चिम बंगाल ने नववरष में महिला सशक्तीकरण की गतिविधियों को और तेज करने का संकल्प लिया। विक्टोरिया मेमोरियल परिसर में संस्था की वार्षिक गतिविधियों की समीक्षा की गयी और अगले वर्ष की योजनाओं की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। प्रतिभा सिंह ने कहा कि महिलाओं ने अपनी साहिस और उद्यम के जरिए यह संकेत दिया है कि वे बहुत कुछ कर सकती हैं। विश्वास है कि यह सदी महिलाओं की होगी।
बैठक की अध्यक्षता वीरांगना की प्रदेश अध्यक्ष और विख्यात गायिका-अभिनेत्री प्रतिभा सिंह ने किया। कार्यक्रम में वीरांगना की प्रदेश महासचिव प्रतिमा सिंह, उपाध्यक्ष रीता सिंह, कोलकाता इकाई की अध्यक्ष मीनू सिंह, महासचिव इंदु संजय सिंह, कोषाध्यक्ष संचिता सिंह, उपाध्यक्ष ललिता सिंह, पदाधिकारी मीरा सिंह, गीता सिंह, प्रेमशीला सिंह, मीनाक्षी तिवारी,  सोदपुर इकाई की अध्यक्ष सुनिता सिंह,  पदाधिकारी जयश्री सिंह, मंजू सिंह उपस्थित थीं।

कलकत्ता विश्वविद्यालय में एकल व्याख्यान 

कोलकाता । ऐतिहासिक संस्थान कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में एकदिवसीय व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का विषय ‘हिंदी कविता और सांस्कृतिक प्रतिरोध’ था। इस कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता केरल विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका एस. आर. जयश्री जी थी। विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर रामप्रवेश रजक और श्रीमती राजश्री शुक्ला जी ने सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए एस. आर. जयश्री, उपस्थित समस्त सारस्वत शोधार्थियों एवं छात्रों का स्वागत किया। प्रोफ़ेसर राजश्री शुक्ला ने कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रति गौरव बोध प्रकट करते हुए कहा कि भारत की संस्कृति सर्वसमावेशी  है और प्रत्येक भारतीय भाषा का एक विशेष महत्व है। एस. आर. जयश्री जी ने “हिंदी कविता और सांस्कृतिक प्रतिरोध” के विषय में कहते हुए कहा कि साहित्य केवल दर्पण मात्र नहीं होता, वह अपने पाठकों को आलोचनात्मक अंतर्दृष्टि देता है। सांस्कृतिक प्रतिरोध तब शुरू होता है जब देश के सभी समुदाय अपने व्यक्तिगत अस्मिता को लेकर लड़ने लगते हैं, वर्चस्ववादी खतरा उत्पन्न होने पर कोई भी देश पूर्ण नहीं बन पाता। साहित्य कलात्मक सौंदर्य है जो ईमानदारी के साथ वैचारिक परिवर्तन से जुड़ता है और नई संभावनाओं को जन्म देता है।
स्वर्ण , पितृसत्ता , भाषा , कॉर्पोरेट, और सांप्रदायिक वर्चस्व जैसी शक्तियों ने देश में सांस्कृतिक प्रतिरोध को जन्म दिया है। वर्चस्व का प्रतिरोध करने की सृजनात्मक शैली ही साहित्य का प्रतिरोध है। अंत में एस. आर. जयश्री जी ने भारत की हर भाषा व संस्कृति को एक समान बतलाया, इस प्रकार के भाव से वर्चस्व का सूक्ष्म से सूक्ष्म कण भी नष्ट हो जाने की संभावना जतायी है। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने प्रश्न पूछा तथा विभागाध्यक्ष डॉ. राम प्रवेश रजक जी ने कार्यक्रम का समापन करते हुए सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

भवानीपुर कॉलेज  में मनाया गया सात दिवसीय  फिट इंडिया 

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने 9 दिसंबर से 15 दिसंबर 2023 तक फिट इंडिया सप्ताह आयोजित किया। इस अभियान का पहला दिन 9 दिसंबर 2023 को आयोजित किया गया था ताकि छात्रों को उनके व्यक्तिगत शरीर की फिटनेस के महत्व के बारे में अधिक जागरूक किया जा सके, जिसके लिए कॉलेज ने एक आहार विशेषज्ञ सौम्येंदु घोष, दैनिक ​​​​आहार विशेषज्ञ, पोषण विशेषज्ञ और जीवन शैली परामर्शदाता को अपना योगदान देने के लिए आमंत्रित किया था। में विशेषज्ञता फिटनेस और स्वास्थ्य.यह कार्यक्रम सुबह 9 बजे शुरू हुआ और एक घंटे तक चला, जिसमें कॉलेज के सोसाइटी हॉल में 120 से अधिक छात्र उपस्थित थे।
एक लंबा और स्वस्थ जीवन काल मुख्य रूप से व्यक्ति की फिटनेस के स्तर पर निर्भर करता है और इसी दृष्टिकोण के साथ भारत सरकार ने 2019 में “फिट इंडिया” के विचार की कल्पना स्कूलों और उच्च संस्थानों में बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों के बीच फिटनेस के बारे में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से, संस्थानों को सप्ताह में 4 से 6 दिन दौड़/दौड़ जैसी विभिन्न गतिविधियों में साइकिल दौड़, लोकप्रिय खेल और मनोरंजक खेल, आदि शामिल रहे।
इस कार्यक्रम को आधिकारिक तौर पर रेक्टर और छात्र मामलों के डीन, प्रो. दिलीप शाह के स्वागत भाषण के साथ मनाया गया।  उद्घाटन समारोह में प्रबंधन के सदस्यों उमेश ठक्कर और  जितेंद्र शाह का स्वागत किया गया । इसके बाद उन्होंने कॉलेज के खेल अधिकारी  भाविन परमार और पूरे खेल विभाग को इस सप्ताह भर चलने वाली पहल की मेजबानी के लिए धन्यवाद दिया गया । कार्यक्रम की आधिकारिक शुरुआत से पहले,  परमार ने इस अवसर की शोभा बढ़ाने के लिए मानद अतिथि को धन्यवाद दिया और उपस्थित लोगों से शारीरिक फिटनेस को अधिक महत्व देने और प्राथमिकता देने का आग्रह किया।  प्रो. शाह ने प्रबंधन प्रतिनिधियों के साथ सौम्येन्दु घोष का अभिनंदन किया जिन्होंने वर्तमान  में स्वस्थ रहने की उपेक्षा पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ”जीवनशैली रोग” शब्द व्यक्ति की मनगढ़ंत कहानी है। उन्होंने और उनकी टीम ने प्रत्येक आहार संबंधी दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए एक प्रस्तुति दी, जिससे विकसित होने वाली बीमारियों से निपटने के प्रयास में फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए अपनाया जाना आवश्यक है। उनकी टीम ने दैनिक आहार वाले कुछ चार्ट प्रदर्शित किए, जिनका हम पालन कर सकते हैं। हमारे स्वास्थ्य को रोकने के लिए विपत्तियों से.छात्रों को फिटनेस को अत्यंत महत्वपूर्ण चीज़ के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए, कॉलेज ने 10 नवंबर 2023 को फिट इंडिया वीक के दूसरे दिन की मेजबानी की। छात्रों को सामान्य रूप से एथलेटिक्स में रुचि लेने के लिए कॉलेज में दो समानांतर गतिविधियाँ आयोजित की गईं। छात्रों की सामान्य भलाई में सुधार के लिए, द हिंदुस्तान क्लब में सुबह 3 किमी, 5 किमी और 10 किलोमीटर की मैराथन आयोजित की गई, जिसमें 190 से अधिक छात्रों और शिक्षकों ने भाग लिया। समानांतर, कॉलेज में छात्रों को खेल के नियमों और विनियमों की जानकारी प्राप्त करने के बाद कैंपस टर्फ पर वॉलीबॉल आज़माने के लिए प्रेरित किया गया। फिट इंडिया वीक के तीसरे दिन के हिस्से के रूप में, कॉलेज ने सोमवार, 11 दिसंबर, 2023 को एक फिटनेस मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की, ताकि छात्रों को उनकी शारीरिक क्षमता के संबंध में कमजोरी के क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिल सके, जैसे मूल्यांकन के क्षेत्र में, पुश अप्स, सिट अप्स, फ्लेमिंगो बैलेंस, वी सिट एंड रीच टेस्ट। आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्रों के शारीरिक फिटनेस के बारे में ज्ञान बढ़ाना और इसके महत्व पर जोर देना था। फिट इंडिया वीक के चौथे दिन सबसे पहले विद्यार्थियों को योग से परिचित कराया गया। नियमित योगाभ्यास मन को शांत करता है, शरीर की जागरूकता में सुधार करता है, एकाग्रता को तेज करता है, ध्यान बनाता है और पुराने तनाव पैटर्न को तोड़ता है। कॉलेज ने प्रशिक्षक, पश्चिम बंगाल योग और प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. तुषार सिल के साथ परिसर में एक योग सत्र आयोजित किया। कराटे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने के लिए आदर्श कसरत है। छात्रों को मार्शल आर्ट में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के प्रयास में, कॉलेज ने फिट इंडिया वीक के पांचवें दिन कॉलेज टर्फ में कराटे कक्षा का आयोजन किया। छात्रों को कराटे के सिद्धांत सिखाने के लिए, कॉलेज ने फुल कॉन्टैक्ट कराटे में थर्ड डैन ब्लैक बेल्ट  श्यामंतक गांगुली का स्वागत किया। कक्षा का मुख्य ध्यान कई आत्मरक्षा तकनीकों पर था जो शिक्षार्थियों ने अपनी ताकत में सुधार करते हुए शारीरिक फिटनेस बनाए रखने के लिए हासिल कीं। कराटे आत्मरक्षा सिखाने के अलावा किसी के सामान्य स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार के लिए बहुत अच्छा है।
कबड्डी एक उच्च संपर्क वाला खेल है जिसमें ताकत और फुर्ती सहित कुछ निश्चित शारीरिक कौशल की आवश्यकता होती है। 14 दिसंबर, 2023 को, फिट इंडिया वीक के छठे दिन, कॉलेज ने छात्रों को स्वदेशी पारंपरिक खेल कबड्डी से परिचित कराने के लिए एक सत्र आयोजित किया। महाविद्यालय के कबड्डी टीम प्रशिक्षक स्वरूप घोष, जिन्होंने टीम को कई ट्रॉफियां जीतने में मदद की है, को छठे दिन प्रशिक्षण का नेतृत्व करने के लिए कहा गया था। बैठक टर्फ परिसर में हुई। फिट इंडिया वीक के अंतिम दिन, कॉलेज ने कॉलेज के खेल क्षेत्र में एक टेबल टेनिस सत्र आयोजित किया।  सत्र के प्रशिक्षक अफनान असलम ने छात्रों को टेबल टेनिस का प्रशिक्षण दिया। कॉलेज के खेल अधिकारी  रूपेश गांधी ने छात्रों से फिटनेस को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने की आदत विकसित करने का आग्रह किया। कबड्डी का खेल खेलने से मानसिक निपुणता के साथ-साथ फोकस और चौकसता में भी सुधार होता है।
सात दिवसीय सत्र, जिसका उद्देश्य छात्रों को अपनी शारीरिक फिटनेस बनाए रखने में भाग लेने के लिए प्रेरित करना था, निश्चित रूप से एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। छात्रों को उद्योग के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षकों से दैनिक निर्देश प्राप्त हुए, और इस प्रदर्शन ने निस्संदेह उन्हें उस फिटनेस व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित किया जो कॉलेज ने छात्रों के लिए शुरू की है। फिट इंडिया वीक के सभी 7 दिनों को पूरा करने वाले 80 से अधिक छात्रों के साथ, कॉलेज ने उन्हें प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर छात्रों की भागीदारी का जश्न मनाया।रिपोर्टर अब्जनी डी. हिंडोचा, फ़ोटोग्राफ़र पारस गुप्ता, निचाय आलोकित लाकड़ा, अग्रग घोष, वीडियोग्राफर आर्यन नसीम, ​​आयुष शुक्ला, दिशानु साहा रहे ।कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
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हर दिन नया नया ही होता : स्वरचित कविताओं से नव वर्ष का स्वागत

कोलकाता । अर्चना संस्था की ओर से कविताओं के माध्यम से नये वर्ष 23 की अग्रिम शुभकामनाएँ दी गई।  इंदू चांडक ने माँ शारदे की स्तुति से संचालन का शुभारंभ किया। 22 दिसम्बर को 4.30 बजे जूम पर हुए इस संगोष्ठी में अर्चना संस्था के 10 से अधिक कवियों ने स्वरचित कविताएँ पढ़ीं। बनेचंद मालू,  शशि कंकानी, विद्या भंडारी, नौरतनमल भंडारी, हिम्मत चौरडिया, उषा श्राफ, इंदू चांडक, वसुंधरा मिश्र, मृदुला कोठारी ने नये वर्ष और पुराने वर्ष की संधि स्थल से संबंधित विभिन्न विचारों को अपनी कविताओं, रचनाओं और गीतों की प्रस्तुति दी। मृदुला कोठारी ने टुकड़े-टुकड़े धूप लेकर दिवस चला है रात की ओर गीत और पुराना साल जा रहा/नव वर्ष आ रहा प्रस्तुति दी। पुरातन की विदाई/ नव वर्ष का आगमन/शिकायत है हमें अवसर ही नहीं मिला बनेचंद मालू की सकारात्मक ऊर्जा से भरी कविताओं को सुना गया। उषा श्राफ ने कविता में अपनी इच्छा व्यक्त  – फिर ज़िन्दगी को एक बार फिर पलट कर जीना चाहती हूं। नौरतनमल भंडारी ने गजल और कविता हरा भरा मेरा मन/हो गया है रेगिस्थान।/मेघो के गरजने/या बादलों के बरसने से/एक हूक सी उठती है ।  ग़ज़ल उठ गया लोगों से /ऐतबार,क्या करे /जहर उग्लते बैरी संसार, पसंद की गई ।पंच चामर छंद आधारित गीतिका सुनाते हुए हिम्मत चौरडिया ने लोगों को महत्वपूर्ण संदेश देते हुए छंदों के साथ कहा कि राम कहो रहमान कहो तुम, बंद करो नित ये झगड़े।विद्या भंडारी ने दो कविताओं में भविष्य में मनुष्यता पर होने वाले खतरे पर ध्यान दिलाया हर दिन एक नया  सूरज उगाना चाहती हूँ / इससे  पहले कि शहर  जंगल में बदल जाए /आओ कुछ करें ।शशि कंकानी ने नए वर्ष का अभिनंदन करते हुए कहा कि नये वर्ष की नयी सुबह काश/आओ हम सब करें अभिनन्दन ।/ हम सब पक्षी डाल – डाल के/कब उड़ जायें कौन दिशा में।। इंदू चांडक ने स्मृतियों के खजाने में एक वर्ष फिर समाया /लक्ष्य हमारा आसमान है बढ़े चलें बढ़े चलें सुनाया। वसुंधरा मिश्र ने  हर दिन नया और शरद कविता सुनाते हुए कहा कि क्या ही अच्छा होता हर दिन नया नया ही होता /मन का त्योहार बन आ जाता /अणु अणु में उष्मा भर जाता। संगीता चौधरी, मीना दूगड़, भारती मेहता, सुशीला चनानी, गुलाब वैद, प्रसन्न चोपड़ा, निशा कोठारी, देवी चितलांगिया, सुधीर पाटोदिया आदि सदस्यों ने नववर्ष की अग्रिम शुभकामनाएँ दी। सूचना दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।