Sunday, March 22, 2026
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ऐसे कीजिए बचे हुए खाने का सही उपयोग 

अक्सर खाना बच जाता है और हम सोच में पड़ जाते हैं कि इसका क्या करें….और ऐसा क्या करें कि खाना सही तरीके से इस्तेमाल किया जा सके और बर्बाद न हो। अगर आप भी यही सोच रहे हैं तो इंटरनेट की दुनिया से हम आपके लिए खोज लाए हैं बचे हुए भोजन का सदुपयोग करने के कुछ तरीके…तो चलिए आप भी देख लीजिए –
1.यदि चावल बच गया है तो उसमें सूजी,नमक, दही और गुनगुना  पानी मिलाकर मिक्सी में पीस लें और इस से इडली बना लें।
2. बचे हुए चावल में सफेद तिल, साबूत धनिया, सौंफ ,लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, बेसन और नमक मिलाकर उसके पकौड़े भी बना सकते हैं।
 3. नूडल्स बच जाये तो सूप ,स्प्रिंग रोल बनाने में इस्तेमाल कर सकते हैं या मिक्स सब्जियों को मिलाकर कटलेट भी बना सकते हैं।
4. रोटियां बच जाए तो मिक्सर में पीस कर घी , सूखे मेवे और गुड़/ चीनी मिलाकर लड्डू बना सकते हैं।
 5. साबूत उड़द की दाल बच गई हो तो 1/2 कप दूध और थोडा बटर मिलाकर  पकाएं।   प्याज ,लहसून, ,अदरक ,हरी मिर्च और थोड़ा गरम मसाला मिलाकर  तड़का लगा दे । स्वादिष्ट दाल मक्खनी तैयार है।
6. बची हुई रोटी को गर्म घी में तलकर/ तवे पर सेक कर ऊपर जीरावन डालें। कुरकुरा पापड़ तैयार है।
7. मावे की मिठाई बच जाए तो मसलकर थोड़े से घी में भून लें। आटे को गूंथ लें और इसे भरकर मीठी पूरियां तल लें।पूरन पोली तैयार है।
8. इडली बच जाये तो राई, लाल मिर्च और कढ़ी पत्ते का तड़का  लगा दें। नमक और धनिया मिलाये.फ्राइड इडली तैयार है।
9. गाजर के हलवे को आटे में भरकर  मीठी पूरी या परांठे बना लें।
10. बची हुई ब्रेड स्लाइस पर शिमला मिर्च,प्याज और चीज को कद्दूकस करके लगाए और ग्रिल  कर लें। ब्रेड पिज्जा तैयार।
11. बचे हुए ब्रेड का चूरा कर ले । दूध , मलाई,घी और मैदा मिलाकर छोटे-छोटे गोले बनाकर तल लें और चीनी की चाशनी में डाल दें। ब्रेड के गुलाब जामुन तैयार है।
12. बची हुई सब्जियों को मैश करके उसमें ब्रेड का चूरा या बेसन, अदरक और हरी मिर्च मिलाकर  कटलेट बना लें।
13. सब्जी को मैश करके, बेसन के घोल में डुबाकर तल लें। कोफ्ते तैयार। ग्रेवी में डाल कर कोफ्ते की सब्जी बना सकते हैं।
14. सब्जियां बच गयी है तो एक पैन में घी गरम कर के राई का तड़का लगाए. टमाटर, गरम मसाला, पाव भाजी मसाला डाल कर मैश कर लें। पाव भाजी तैयार है।
15. बची हुई पूरी /रोटी को सुखा ले और चुरा कर ले. तेल में राई, जीरा, हींग,कढ़ी पत्ते का तड़का  लगाकर प्याज व तले हुए मूंगफली के दाने भी मिला दें। इसमें पूरी या रोटी का चूरा डालकर पोहा बना लें। नींबू, हरा धनिया मिलाए।
16. बची हुई  रोटी के बीच में बची हुई पत्ता गोभी की सब्जी रख कर मोड़ दे और तवे पर घी लगा कर सेक ले….रोटी पिज़्ज़ा तैयार है।
17. दही बड़े बच जाएं तो कढ़ी में डाल दें। बड़े वाली कढ़ी तैयार है।
18.कटे टमाटर, प्याज, पनीर, हरा धनिया और बचे हुए छोलों को एक साथ मिला लें। ऊपर से कालीमिर्च पाउडर, काला नमक , चाट मसाला, जीरा पाउडर, नमक, चटनी ,नींबू का रस मिलाएं चना चाट तैयार है।
19. बची हुई दाल/ सब्जी में हरी मिर्च, हरा धनिया, कसूरी मेथी, सौंफ, अजवाइन, नमक और आटा डालकर गूंथ लें और परांठे बना लें।
20. बची हुई दाल में आटा, सूजी, व घी मिलाकर गूंथ लें और छोटी-छोटी मठरियां बेलकर तल लें।
21. बची हुई अरहर की दाल, लौकी और अन्य सब्जियां, सांभर मसाला और टमाटर  डालकर उबाल लें।राई और कढ़ी पत्ते का तड़का लगाए. सांबर तैयार.
22. बचे हुए चावल में बारीक कटी सब्ज़ियाँ मिलाकर वेजीटेबल पुलाव बना लें।
23. बचे हुए चावल में घी, चीनी या गुड़ और ड्राई फ्रूड्स डालकर मीठे चावल बना ले.
24. बचे हुए चावल में उबला आलू ,ब्रेड का चूरा, नमक, हरी मिर्च, हरा धनिया, गरम मसाला मिलाकर कटलेट बना लें।
25. बची ही चाशनी में मैदा और सूजी मिलाकर मीठे शक्कर पारे बना लें।
26. बची हुई चाशनी में इमली का गूदा, ,सोंठ, नमक आदि डालकर मीठी चटनी भी बना सकते हैं।
27. चाशनी को शरबत/ खीर, हलवा  बनाने मे उपयोग कर सकते हैं।
28. छाछ खट्टी हो गई हो तो उसमें पानी मिला कर कुछ देर रख दें। उसके बाद ऊपर से पानी निकाल दें, छाछ का खट्टापन कम हो जाएगा।
29. यदि दही ज्यादा खट्टा हो गया है तो उसमें थोड़ा दूध मिला दे खटाई  कम हो जाएगी.

लिटिल थेस्पियन ने आयोजित की नाट्य प्रतियोगिता

कोलकाता । लिटिल थिस्पियन एक बड़े उद्देश्य के तहत हिंदी और उर्दू भाषा-भाषियों युवाओं के लिए नाटक प्रतियोगिता का आयोजन जोगेश माईम अकादेमी में किया गया। लिटिल थेस्पियन की संस्थापक और वरिष्ठ रंगकर्मी उमा झुनझुनवाला का कहना है कि उनका यह सपना है कि कलकत्ता में भी हिंदी और उर्दू नाटक समृद्ध हो और नये नाट्यदल आगे आए | यहाँ पर हिंदी और उर्दू नाटकों के प्रशिक्षण के लिए कोई नाट्य केन्द्र नहीं,जिसके कारण बंगाल में हिन्दी-उर्दु नाटकों की स्थिति दैन्य है। इस लिए उन्होंने इस नाटक प्रतियोगिता का आयोजन किया है | ताकि इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले युवाओं में नाटक के प्रति आकर्षण पेदा हो और नये नाट्यदल आगे आएं| उन्होंने कहा कि वो और अज़हर भी इसी तरह कि नाटक प्रतियोगिता में भाग लेते थे और यहीं से उन लोगों ने अपनी संस्था बनाने का निर्णय लिए था |
लिटिल थेस्पियन ने इस प्रतियोगिता का आयोजन इस उद्देश्य से और भी किया है कि नई पीढ़ी रंगमंच की परिभाषा समझे, रंगमंच की समझ हो। नाटक प्रतियोगिता का उद्देश्य एक दूसरों के बीच प्रतिस्पर्धापन करना नहीं बल्कि आज जिन पांच दल इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आए हैं , उनमें से किन्हीं तीन दलों का चयन कर, लिटिल थेस्पियन उन्हें हर चीज मोहिम करवाएगा और पूरी प्रशिक्षण के साथ चयनित दल‌ को लिटिल थिस्पियन के 13वे राष्ट्रीय नाट्य उत्सव ज़श्न-ए-अज़हर के आखिरी दिन उनको मंच प्रदान करेगा। दर्शकों के सामने प्रस्तुति के जरिए इनके अंदर रंगमंच की समझ पैदा होगा | इससे इन में यह समझ आएगी कि एक बेहतरीन नाटक कैसे बन सकता है | इस प्रतियोगिता का एकमात्र उद्देश्य है उन्हें रंगमंच में प्रशिक्षित करना।
प्रथम नाट्य प्रस्तुति खिदिरपुर कॉलेज की टीम राजेंद्र क्रिएटिव ग्रुप (खिदिरपुर कालेज) का नाटक “अब नहीं सहेंगे” जिसके नाटककार और निर्देशक थे राजेन्द्र राय। इस नाटक में नारी शक्ति को केंद्र में रखकर समाज में मोजूदा स्त्रियों को तमाम बुराइयों और समाज की कुप्रथाओं से लड़ने की प्रेरणा देता है।
दूसरा नाट्यदल एस.एम. रशीद थिएटर ग्रुप ने नाटक “ बदलते मौसम के दिन” प्रस्तुत किया जिसके नाटककार शब्बीर अहमद थे तथा निर्देशन आतिबा बतुल ने दिया । ये नाटक पुरूष के जीवन में स्त्री के महत्व को दर्शाता है। तीसरा नाट्यदल का नाम स्टेपिंग स्टोन स्कूल था जिसने मनु भंडारी कि कहानी मजबूरी का मंचन किया| इसका निर्देशन परी सराफ़ ने किया था। ये नाटक पारिवारिक उलझनों को दर्शाने के साथ-साथ रिश्तों के महत्व को उद्घाटित करता है जो आज के आधुनिक समय में कहीं ना कहीं लुप्त होती नज़र आती है। चौथा नाट्यदल स्वांग ड्रामा क्लब (विद्यासागर कालेज) का था जिसने नाटक लाल इश्क का मंचन किया | इस नाटक के नाटककार थे सिप्रा अरोरा। ये नाटक समलैंगिक संबंधों को उद्घाटित करता है और समाज में इस विषय पर विचार करने के लिए विवश किया है। समाज की सोच से ऊपर उठकर अपनी इच्छाओं को प्रकट करने के लिए प्रेरित करता है।
पाँचवाँ वा अंतिम नाटक प्रवासी था जिसे हमारा प्रयास नाट्यदल ने प्रस्तुत किया ,इस नाटक के नाटककार थे श्री रामा शंकर सिंह वा निर्देशक थे शम्भू सिंह। ये नाटक कोराना के दौरान जनता की दर्दनाक स्थितियों को चित्रित करता है कि किस तरह बीमारी से बचते बचते जनता भुखमरी से मरने की स्थिति पैदा होने लगती है। इन पांचों नाटक में से तीन टीम का चयन किया गया है जिनका नाम राजेंद्र क्रिएटिव ग्रुप, एस. एम. रशीद थिएटर ग्रुप एवं सवांग ड्रामा क्लब है और उन तीनों टीम के नाटकों में सुधार करने की जिम्मेदारी खुद लिटिल थेस्पियन की संस्थापक उमा झुनझुनवाला ने ली है। चयन किए हुए प्रतिभागियों की पुनः प्रस्तुति राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले छह दिवसीय नाट्य उत्सव जश्न-ए-अज़हर में होगी जिसके दौरान ही टीमों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर चयनित कर पुरस्कृत किया जायेगा। यह नाट्य उत्सव 19 से 24 जनवरी 2024 को ज्ञान मंच में होगा।

सार्थक परिवर्तन हमारे सामूहिक प्रयास से संभव

हावड़ा । हिंदी विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से पर्यावरण और राजनीति विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय कुलपति प्रोफेसर डॉ विजय कुमार भारती, बांग्लादेश के विशिष्ट शोधार्थी डॉ सजल रॉय एवं काजी नजरूल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ देवाशीष नदी के द्वारा दीप प्रज्वलन से शुरू हुआ ।उद्घाटन संबोधन में कुलपति महोदय ने पर्यावरण पर बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप की ओर संकेत करते संतुलन और सहयोग को बनाए रखने की बात कही।प्रो. प्रेम बहादुर मांझी ने स्वागत वक्तव्य देते हुए सभी वक्ताओं का हार्दिक स्वागत किया। डॉ सजल रॉय ने अपने वक्तव्य में कहा ढाका और कोलकाता सहित बड़ेऔद्योगिक शहरों में औद्योगीकरण के कारण प्रदूषण का ग्राफ बढ़ता जा रहा है।साथ ही पर्यावरण संरक्षण की ओर भी इशारा किया जो राजनीतिक सदिच्छा के बिना संभव नहीं है।
डॉ देवाशीष नंदी ने पर्यावरण राजनीति और कूटनीति के संबंधों पर चर्चा करते हुए युद्ध को एक बड़ा कारण माना।साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ग्लोबल वार्मिंग पर चर्चा करने वाले विकसित देश ही सबसे अधिक पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुल सचिव सुकृति घोषाल सहित अध्यापक जे . के. भारती डॉ. अभिजीत सिंह, प्रो. प्रतीक सिंह, प्रो.मंटू दास,डॉ अजीत कुमार दास, प्रो. विश्वजीत हजाम, प्रो.राजा दत्त, प्रो. संगीता बारी, प्रो. पारोमिता दास, प्रो. प्रशस्ति सिंह, उपस्थित थे । इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का कुशल संचालन राजनीति विज्ञान की प्राध्यापिका प्रो. मधुवंती गांगुली और धन्यवाद ज्ञापन डॉ विकास कुमार साव ने दिया

एफटीएस युवा के एकल रन के 5वें संस्करण का गीता फोगाट ने किया उद्घाटन

फ्रेंड्स ऑफ ट्राइबल्स सोसाइटी की युवा शाखा है
 कोलकाता । फ्रेंड्स ऑफ ट्राइबल्स सोसाइटी की युवा शाखा एफटीएस युवा की ओर से गत रविवार को कोलकाता के गोदरेज वाटरसाइड में अपने वार्षिक कार्यक्रम एकल रन का आयोजन किया गया। जिसमें 5 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने समयबद्ध दौड़ की अपनी चुनी हुई श्रेणी – 21 किमी, 10 किमी, 5 किमी और के लिए एक दूसरे के साथ दकम से कदम मिलाया। इस मैराथन में सबसे दिलचस्प 3 किमी की गैर-समयबद्ध दौड़ में सभी आयु वर्ग के लोगों ने भाग लिया। रविवार सुबह एकल दौड़ का उद्घाटन एथलीट गीता फोगाट ने किया। इसके साथ इस कार्यक्रम में नील भट्टाचार्य (अभिनेता), राहुल देव बोस (अभिनेता), देबद्रिता बसु (अभिनेत्री), सौमोजीत अदक (निदेशक), एके आर्या (डीआइजी बीएसएफ), सुरजीत सिंह गुलेरिया (डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (जी), मुख्यालय, एसडीआर (ईसी), बीएसएफ) के साथ आईसीएआई के उपाध्यक्ष सीए रणजीत कुमार अग्रवाल के अलावा कई अन्य  गणमान्य व्यक्ति इस मौके पर मौजूद थे।  एफटीएस युवा कोलकाता चैप्टर के अध्यक्ष श्री गौरव बागला ने कहा, एकल रन के 5वें संस्करण में गीता फोगाट को अपने साथ पाकर हम काफी अभिभूत हैं। हर व्यक्ति के जीवन में दौ़ड़ना सबसे बड़ा रूपक माना जाता है। ग्रामीण बच्चों को शिक्षित करने की प्रेरणा के साथ यह एकल रन सिटी ऑफ जॉय के निवासियों को काफी उत्साहित करता है। इस मैराथन में हिस्सा लेनेवाले प्रतिभागियों को टी-शर्ट, गुडी बैग और फूड बॉक्स दिए गए। इसके विजेताओं के साथ उपविजेताओं को पदक और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। एफटीएस युवा बोर्ड के प्रमुख सदस्यों में – अनिरुद्ध मोदी (सलाहकार), नीरज हरोदिया (राष्ट्रीय समन्वयक), गौरव बागला (अध्यक्ष), ऋषभ सरावगी (उपाध्यक्ष), विकास पोद्दार (उपाध्यक्ष), अभय केजरीवाल (उपाध्यक्ष), विनय चुघ (सलाहकार), रौनक फतेसरिया (सचिव), रोहित बुचा (संयुक्त सचिव), ऋषव गादिया, (कोषाध्यक्ष), रचित चौधरी (संयुक्त कोषाध्यक्ष), मयंक सरावगी (हेड, डोनेशन एंड फंड रेजिंग), अंकित दीवान (प्रमुख सदस्यता), योगेश चौधरी (पीआरओ), वैभव पांड्या और मनीष धारीवाल (बोर्ड सदस्य) हमेशा सक्रिय रहते हैं।

55वें गारमेंट बायर्स एंड सेलर्स मीट और बी2बी एक्सपो में 850-900 करोड़ के कारोबार की उम्मीद

पश्चिम बंगाल गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन का आयोजन
कोलकाता । पश्चिम बंगाल गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन ने अपने समर्पित सेवा के गौरवशाली 58 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। राज्य में गारमेंट सेक्टर के व्यवसायियों के लिए तीन दिवसीय 55वां गारमेंट बायर्स एंड सेलर्स मीट और बी2बी एक्सपो का आयोजन 8, 9 और 10 जनवरी 2024 को कोलकाता के इको पार्क फेयरग्राउंड में किया गया है। 55वें गारमेंट बायर्स एंड सेलर्स मीट और बी2बी एक्सपो में 900 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड भाग लें रहे हैं। इससे करोड़ों रुपये की आय होने की उम्मीद है। इस एक्सपो में थोक सौदों में 850-900 करोड़ रुपये का व्यापारिक लेनदेन होने की उम्मीद जतायी जा रही है । राज्य की अर्थव्यवस्था को विकसित करने में एसोसिएशन के इस प्रयास के महत्व को ध्यान में रखते हुए, इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के साथ बड़े-बड़े उद्योगपति के साथ प्रमुख व्यापारिक घरानों के व्यवसायी इसमें शामिल हुए। इस कार्यक्रम का उद्घाटन सुजीत बोस (अग्निशमन राज्य मंत्री, पश्चिम बंगाल सरकार) ने किया। इस कार्यक्रम में उपस्थित रहनेवाले अन्य प्रतिष्ठित हस्तियों में निर्मल जैन (संस्थापक, एवरग्रीन होजियरी उद्योग), हरि किशन राठी (डब्ल्यूबीजीएमडीए के अध्यक्ष), विजय करीवाला (डब्ल्यूबीजीएमडीए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष), प्रदीप मुरारका (डब्ल्यूबीजीएमडीए के उपाध्यक्ष), देवेन्द्र बैद (डब्ल्यूबीजीएमडीए के माननीय सचिव), डी मित्रा (संयुक्त निदेशक, एमएसएमई- डीएफओ, कोलकाता) के साथ समाज के अन्य क्षेत्र से जुड़ी कई अन्य प्रसिद्ध हस्तियां इसमें शामिल हुए। यह एसोसिएशन एक आधुनिक जीवंत और प्रतिस्पर्धी परिधान उद्योग, मुख्य रूप से एमएसएमई विकसित करने और देश को वैश्विक गारमेंट आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करने में सक्षम बनाने के लिए अपनी स्थापना के बाद से लगातार गारमेंट मेला और बी2बी एक्सपो का आयोजन करता आ रहा है। अब बायर एंड सेलर्स मीट का यह आयोजन देश के पूर्वी हिस्से में सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद कंपनियों के लिए एक संगम स्थल बन गया है। इस अवसर पर वेस्ट बंगाल गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हरि किशन राठी ने कहा, पिछले कुछ वर्षों में हमें अपने व्यपारी भाईयों से जो अपार समर्थन मिला है वह अभूतपूर्व है। इस उद्योग के हमारे पूर्व पीढ़ी के लोगों ने ऐसे रास्ते बनाए हैं, जहां से हमे आगे बढ़ने के मार्ग को सरल बनाती हैं। हम खुशी से उनके नक्शेकदम पर चल सकते हैं, और व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ नयी-नयी नौकरियों का सृजन कर सकते हैं। यह नई पीढ़ी के लिए नया और ब़ड़ा अवसर है। वेस्ट बंगाल गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के सचिव देवेन्द्र बैद ने कहा कि हमारे एसोसिएशन द्वारा आयोजित खरीदारों और विक्रेताओं की इस तरह के आयोजन ने देश के पूर्वी हिस्से में पिछले पांच दशकों के दौरान लगातार कारोबार में सफलता हासिल की है। यह पूर्वी भारत की सबसे बड़ी रेडीमेड गारमेंट मीट है। इस बैठक को एमएसएमई विभाग द्वारा मंजूरी दे दी गई है, जिससे हमारी बैठक इस क्षेत्र में अपनी तरह की पहली बैठक बन गई है। वेस्ट बंगाल गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन में उपस्थित अन्य प्रमुख समिति के सदस्यों में श्री कन्हियालाल लखोटिया (कोषाध्यक्ष), प्रेम कुमार सिंहल (संयुक्त कोषाध्यक्ष), अमरचंद जैन, तरूण कुमार झाझरिया, आशीष झंवर, मनीष राठी, कमलेश केडिया, मनीष अग्रवाल, किशोर कुमार गुलगुलिया, विक्रम सिंह बैद, सौरव चांडक, साकेत खंडेलवाल, अजय सुल्तानिया, राजीव केडिया, संदीप राजा, बृज मोहन मूंधड़ा, भुवन अरोड़ा, मोहित दुगड़ के अलावा कार्यकारी समिति के सदस्य और पूर्व अध्यक्ष हरि प्रसाद शर्मा के साथ चांद मल लाढ़ा ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में काफी अहम भूमिका निभाई।

 सॉल्टलेक में खुला एचपी घोष अस्पताल

कोलकाता । ईस्टर्न इंडिया हार्ट केयर एंड रिसर्च फाउंडेशन की इकाई एचपी घोष हॉस्पिटल का साल्टलेक के सेक्टर-3 में रविवार को उद्घाटन किया गया। 184 बेड वाले इस मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल का उद्घाटन प्रसिद्ध क्रिकेटर एवं बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने किया।
इस अवसर पर सम्मानीय अतिथि सुजीत बोस (अग्निशमन राज्य मंत्री, पश्चिम बंगाल), बंधन बैंक के एमडी और सीईओ चंद्र शेखर घोष और समाज के अन्य गणमान्य व्यक्ति यहां उपस्थित थे। 75,000 वर्ग फुट में फैले 10 मंजिली इस अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसाज्जित विदेशी तकनीक की लेटेस्ट मशीने उपलब्ध हैं। अत्याधुनिक तकनीकों के साथ सर्वोत्तम श्रेणी की चिकित्सा सेवाओं से लैस इस अस्पताल में प्रतिष्ठित हेल्थकेयर विशेषज्ञों की पूरी टीम मौजूद है। एचपी घोष अस्पताल में कार्डियोलॉजी, न्यूरो, स्पाइन और ऑर्थोपेडिक उपचार पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। इस अस्पताल में बेहतरीन सेवाओं की पूरी श्रृंखला प्रदान की जायेगी। इस अस्पताल में अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर मौजूद हैं, जिसे सभी आधुनिक और अद्यतन उपकरणों से सुसज्जित किया गया हैं। एच पी घोष अस्पताल के सीईओ श्री सोमनाथ भट्टाचार्य ने कहा, हम इस अस्पताल में मरीजों के लिए विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं लाये हैं। हमारी कोशिश यहां चिकित्सा के हर क्षेत्र में रोगी-अनुकूल समग्र स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देना है, जिससे रोगियों को घर जैसा माहौल फील हो सके। हम इस अस्पताल में मरीजों की सेवा जुनून, करुणा और विशेष अनुभव के साथ करेंगे, जिससे वे जल्द से जल्द स्वस्थ हो सकें।
इस अवसर पर सौरव और डोना गांगुली ने एचपी घोष अस्पताल को एक ऐसी जगह बनाने के लिए बधाई दी, जहां मरीज़ अपनी चिकित्सा आरामदायक और शांत वातावरण में करा सकेंगे। सौरव के साथ डोना ने अस्पताल को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उसके नेक प्रयास के लिए शुभकामनाएं दीं।

द हेरिटेज स्कूल, कोलकाता में ‘चोल हेटे चोल’ का आयोजन

कोलकाता । द हेरिटेज स्कूल, कोलकाता ने ‘चोल हेटे चोल’ का आयोजन किया । इस आयोजन में द हेरिटेज स्कूल, द बीएसएस स्कूल, श्री शिक्षायतन स्कूल, द बिड़ला हाई स्कूल, डीपीएस रूबी पार्क, डोलना डे स्कूल और सुशीला बिड़ला गर्ल्स जैसे कोलकाता के प्रख्यात शिक्षण संस्थानों ने भाग लिया। वॉक का उद्घाटन सत्र गत 8 जनवरी को दोपहर 2 बजे द हेरिटेज स्कूल परिसर से आयोजित किया गया था। यह पदयात्रा संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों का प्रचार करने के लिए आयोजित की गयी थी । कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को पहाड़पुर कूलिंग टावर्स लिमिटेड एवं मैराथन धावक वरुण स्वरूप द्वारा किया गया। द हेरिटेज स्कूल की प्रिंसिपल सीमा सप्रू, हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ पी.के.अग्रवाल और छात्रों ने संबोधित किया। स्कूल के शिक्षक. द हेरिटेज स्कूल के शिक्षक आकाश बसु, सौरव दत्ता और भाग्यधर पहाड़ इस 24 घंटे की नॉनस्टॉप वॉक में शामिल हुए। द हेरिटेज स्कूल, कोलकाता की प्रिंसिपल सीमा सप्रू ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों के बारे में बड़े पैमाने पर जागरूकता पैदा करना बहुत जरूरी है। मुझे खुशी है कि हमारे छात्रों और शिक्षकों ने इतनी बड़ी पहल की है।”

रोज़गार की चाहत

नेहा जयसवाल
खाली कंधों पर थोड़ा सा भार चाहिए,
बेरोजगार हूं साहब रोजगार चाहिए।
जेब में पैसे नहीं है डिग्री लिए फिरती हूं,
 दिनोदिन अपनी ही नजरों में गिरती हूं।
कामयाबी के घर में खुले किवाड़ चाहिए,
 बेरोजगार हूं साहब मुझे रोजगार चाहिए।।
प्रतिभा की कमी नहीं है भारत की  सड़कों पर ,
दुनिया बदल  देंगे भरोसा करो इन लड़कियों पर।
लिखते लिखते मेरी कलम तक घिस गई,
नौकरी कैसे मिले जब नौकरी ही बिक गई।
नौकरी की प्रक्रिया में अब सुधार चाहिए,
बेरोजगार हूं साहब मुझे रोजगार चाहिए।।
दिन रात करके मेहनत बहुत करती हूं,
सूखी रोटी खाकर ही चैन से पेट भरती हूं।
भ्रष्टाचार से लोग खूब नौकरी पा रहे हैं,
रिश्वत की कमाई खूब मजे में खा रहे हैं।
नौकरी पाने के लिए यहां जुगाड़ चाहिए,
बेरोजगार हूं साहब मुझे रोजगार चाहिए।।
” युवतियों की अंतर्आत्मा की आवाज़”

सिखाएं घर के काम और बच्चे को बनाएं स्वतंत्र एवं जिम्मेदार

पूर्ण और आत्मविश्वासी व्यक्तियों के पोषण की हमारी खोज में, बच्चों में स्वतंत्रता की भावना पैदा करना सर्वोपरि है। इसे हासिल करने का एक प्रभावी तरीका उन्हें छोटे-छोटे घरेलू काम सौंपना है। ये साधारण प्रतीत होने वाले कार्य बच्चे के चरित्र को आकार देने, जिम्मेदारी को बढ़ावा देने और आत्मविश्वास पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आइए उन कारणों पर गौर करें कि क्यों बच्चों को घरेलू कामों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना एक पालन-पोषण की रणनीति है।
1. जिम्मेदारी की भावना पैदा करना – जब बच्चों को विशिष्ट कार्य दिए जाते हैं, तो वे जिम्मेदारी का सार सीखते हैं। चाहे उनका बिस्तर बनाना हो या खाने की मेज सजाना हो, ये काम छोटी उम्र से ही कर्तव्य और जवाबदेही की भावना पैदा करते हैं।
2. आत्म-सम्मान बढ़ाना – कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा करने से बच्चों को उपलब्धि का एहसास होता है। आत्म-सम्मान में यह वृद्धि उनके जीवन के अन्य पहलुओं में भी काम करती है, जिससे वे चुनौतियों से निपटने में अधिक लचीला और आश्वस्त हो जाते हैं।
3. जीवन कौशल का विकास करना – घरेलू कामकाज व्यावहारिक जीवन कौशल सिखाते हैं जो वयस्कता में अपरिहार्य हैं। बुनियादी सफाई तकनीकों से लेकर समय प्रबंधन तक, बच्चे कौशल का भंडार हासिल करते हैं जो जीवन भर उनके काम आएगा।
4. टीम वर्क और सहयोग को बढ़ावा देना – काम सौंपने में अक्सर भाई-बहनों या परिवार के सदस्यों का सहयोग शामिल होता है। यह टीम वर्क की भावना को बढ़ावा देता है, बच्चों को एक समान लक्ष्य के लिए मिलकर काम करने का मूल्य सिखाता है।
5. अनुशासन स्थापित करना – कामकाज में नियमित रूप से शामिल होने से बच्चों में अनुशासन स्थापित होता है और दिनचर्या स्थापित होती है। वे निरंतरता और संगठन के महत्व को सीखते हैं, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं में सफलता के लिए महत्वपूर्ण गुण हैं।
6. प्रयास की सराहना – काम पूरा करना बच्चों को सिखाता है कि प्रयास सीधे परिणामों से जुड़ा होता है। यह समझ एक मजबूत कार्य नीति और उनके प्रयासों में समय और ऊर्जा निवेश करने की इच्छा की नींव रखती है।
7. क्रियाओं और परिणामों के बीच संबंध – कार्य कार्यों और परिणामों के बीच एक ठोस संबंध प्रदान करते हैं। जब बच्चे अपनी जिम्मेदारियों की उपेक्षा करते हैं, तो वे अपनी पसंद के स्वाभाविक परिणाम का अनुभव करते हैं, जिससे उन्हें जीवन के मूल्यवान सबक मिलते हैं।
8. समय प्रबंधन कौशल – अपने काम कब करने हैं इसकी योजना बनाने से लेकर उन्हें एक निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने तक, बच्चे आवश्यक समय प्रबंधन कौशल विकसित करते हैं जो बाद में जीवन में शैक्षणिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर लागू होते हैं।
9. व्यावहारिक ज्ञान का निर्माण – घरेलू कामों में व्यस्त रहने से बच्चों को घर के माहौल के बारे में व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है। वे बुनियादी घरेलू वस्तुओं, उनके उपयोग और रखरखाव से परिचित हो जाते हैं, जिससे एक सर्वांगीण शिक्षा में योगदान मिलता है।
10. उत्साहवर्धक पहल – जैसे-जैसे बच्चे अपने निर्धारित कार्यों के आदी हो जाते हैं, वे अक्सर अतिरिक्त कार्यों को पहचानने और उन्हें पूरा करने की पहल करते हैं। यह सक्रिय व्यवहार उनकी स्वतंत्रता को और बढ़ाता है।
11. औजारों और उपकरणों को संभालना सीखना – कुछ कार्यों में औज़ारों और उपकरणों का उपयोग शामिल होता है। इन वस्तुओं को सुरक्षित रूप से संभालना सीखने से न केवल क्षमता का निर्माण होता है बल्कि जिम्मेदारी की स्वस्थ समझ को भी बढ़ावा मिलता है।
12. वयस्कता की तैयारी – घरेलू कामकाज के माध्यम से हासिल किए गए कौशल वयस्कता की चुनौतियों के लिए नींव के रूप में काम करते हैं। चाहे घर संभालना हो या करियर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना हो, ये अनुभव अमूल्य साबित होते हैं।
13. समस्या-समाधान क्षमताओं को बढ़ाना – कामकाज अक्सर अप्रत्याशित चुनौतियाँ पेश करते हैं। बच्चे इन व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से अपने पैरों पर खड़ा होकर सोचना, परिस्थितियों के अनुरूप ढलना और प्रभावी समस्या-समाधान कौशल विकसित करना सीखते हैं।
14. पात्रता कम करना – जब बच्चे घर के कामकाज में सक्रिय रूप से योगदान करते हैं, तो इससे अधिकार की भावना कम हो जाती है। वे समझते हैं कि परिवार का हिस्सा होने के नाते साझा ज़िम्मेदारियाँ शामिल होती हैं।
15. व्यक्तिगत रुचियों के अनुरूप कार्य तैयार करना – बच्चे की रुचियों के आधार पर कार्यों को अनुकूलित करने से कार्य अधिक आकर्षक हो जाते हैं। चाहे वह बागवानी हो, खाना बनाना हो, या आयोजन करना हो, कामों को रुचियों के साथ जोड़ना उत्साह जगाता है।
16. खुले संचार को प्रोत्साहित करना – काम सौंपने और चर्चा करने से परिवार के भीतर खुले संचार को बढ़ावा मिलता है। बच्चे महसूस करते हैं कि उनकी बात सुनी गई है और यह सहयोगात्मक दृष्टिकोण पारिवारिक संबंधों को मजबूत करता है।
17. स्वामित्व की भावना का निर्माण – काम पूरा करने से स्वामित्व और अपनेपन की भावना आती है। बच्चे समझते हैं कि घर के सुचारु संचालन में उनका योगदान अभिन्न है।
18. प्रगति का जश्न मनाना – काम के पूरा होने को स्वीकार करना और उसका जश्न मनाना, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, सकारात्मक व्यवहार को मजबूत करता है। यह उत्सव बच्चों के लिए प्रेरक कारक बनता है।
19. सहानुभूति का पोषण – ऐसे काम जिनमें पालतू जानवरों की देखभाल करना या जरूरतमंद परिवार के सदस्यों की सहायता करना शामिल है, बच्चों में सहानुभूति विकसित करते हैं। वे दूसरों की भलाई के बारे में सोचना सीखते हैं और दयालु दृष्टिकोण विकसित करते हैं।
20. उम्र और क्षमता के अनुसार काम करना – काम सौंपते समय अनुकूलनशीलता महत्वपूर्ण है। बच्चे की उम्र और क्षमता के अनुसार कार्यों को तैयार करना यह सुनिश्चित करता है कि जिम्मेदारियाँ चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ प्राप्त करने योग्य भी हों। निष्कर्षतः, घरेलू कामों को बच्चे की दिनचर्या में शामिल करना स्वतंत्रता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने का एक समग्र दृष्टिकोण है। ये छोटे-छोटे कार्य दुनिया का सामना करने के लिए तैयार जिम्मेदार और सक्षम व्यक्तियों के भविष्य की नींव तैयार करते हैं।
(साभार – न्यूज ट्रैक)

संक्षिप्त महाभारत

अभिषेक दम्मानी

सत्यवती के लिए कभी हस्तिनापुर का रथ नहीं होता
जो स्त्री मोह फंसे शांतनु का कोई मनोरथ नहीं होता
कुंती ने कौतूहलता में जब सूर्य देव का आह्वान किया
तब प्रत्यक्ष देव ने पुत्र रूप में अपना अंश वरदान दिया
उत्कट इच्छा पर काबू रख जो पांडव ने संयम ना छोड़ा होता
तो धृतराष्ट्र ने अपनी उच्चाकांछा का पृष्ठ नही जोड़ा होता
द्रोणाचार्य ने अर्जुन हित की रक्षा में मर्यादा को लाँघ लिया
और एकलव्य से गुरु दक्षिणा में उसका अंगूठा मांग लिया
अपमानित द्रुपद प्रतिशोध की अग्नि में इस हद तक जला गया
और मित्र वध की तीव्र मंशा में दिव्य पुत्र प्राप्ति को चला गया
दानवीर कर्ण होकर भी हो गया एक ऐसे ऋण का आभारी
और कृतज्ञ मित्रता के आगे एक निष्ठ हो गई निष्ठा सारी
सत्य, अहिंसा और धर्म फिर अन्याय, कपट से हारा था
जब धृतराष्ट्र का पुत्र मोह उसके राज धर्म का हत्यारा था
किसने जाना था षडयंत्रो से लाक्षागृह जलने वाला था
बातों में प्रेम मधुर रखकर यूं अंतर्मन से छलने वाला था
विदुर नीति का कर अनुसरण अगर भरत वंश चल जाता
क्या दृश्य मनोहर होता वह और हर दुर्भाग्य बदल जाता
एकचक्रा नगरी में ब्राह्मण बन पांडवों ने जीवन की शिक्षा ली
जब सबको भोजन बांटने वालों ने खुद के भोजन को भिक्षा ली
दो माता के आधे- आधे शिशुओं का शरीर जुड़कर जब संग हुआ
प्राण चेतना आ गई शिशु में और फिर दो से एक जरासंध हुआ
जब जब मर्यादा का बांध तोड़ कर कोई भी शिशुपाल बनेगा
तब तब गिरीवर धारी का चक्र सुदर्शन उसका काल बनेगा
पूर्ण पुरुषोत्तम होकर भी नटवर ने रणछोड़ नाम स्वीकार किया
और राजधानी को द्वारिका लाकर उसका निष्कंटक विस्तार किया
महलों में रहने वालों ने कैसे अपने दिन काटे वनवासों में
जब पांडवों का भाग्य बदल डाला था शकुनी वाले पासों ने
राज सभा भी मौन विवश थी कोई रोक ना पाया दु:शासन को
और द्रोपदी का चीरहरण भरी सभा में चुनौती था सिंहासन को
जब पांडवों ने अपना अज्ञातवास बताया सेवकों के वेश में
तब जाना कि जीवन कितना दुर्गम हैं दासत्व के परिवेश में
शांति का मूल्य समझता और जो दुर्योधन क्रुद्ध नहीं होता
केवल पांच ग्राम दे देता तो महाभारत का युद्ध नहीं होता
युद्ध ठहर जाने पर ऋषि वेदव्यास ने संजय को संज्ञान दिया
और भूत भविष्य वर्तमान देखने को दिव्य दृष्टि का दान दिया
इच्छा मृत्यु का वर पाकर भी भीष्म ने मृत्यु को जान लिया
और पुनर्जन्म की राजकुमारी अंबा को शिखंडी में पहचान लिया
अगर सुभद्रा अर्जुन से चक्रव्यूह का पूर्ण रहस्य सुनकर सोई होती
तो उत्तरा कदाचित अभिमन्यु वध पर कभी नहीं रोई होती
पितृ वध की क्रोधाग्नि का अश्वत्थामा ने अनुचित उपयोग किया
और पांडव कुल का वध करने को दिव्यास्त्रों का दुरुपयोग किया
जब गांधारी ने अपने निन्यानवे पुत्रों की मृत्यु का अवसाद किया
तब शेष दुर्योधन को एक दृष्टि में वज्र शरीर का आशीर्वाद दिया
किंतु वज्र कवच भी बचा न पाया दंभी दुर्योधन के प्राण को
और धर्म ध्वज ले पांडव आगे बढ़ गए नवयुग के निर्माण को
नाश सुनिश्चित हो जाता है, जब अभिमान शिखर पर जाता है
और एक भूल, निर्णय से फिर संपूर्ण कुटुंब बिखर सा जाता है
जब ह्रदय में पंच दोष की प्रवृत्ति हद से ज्यादा बढ़ जाती है
तब आदर्श जीवन मूल्यों की परिभाषा दुविधा में पड़ जाती है
महाभारत कोई कथा नहीं यह शाश्वत जीवन का सार है
कर्म श्रेष्ठ है, कर्म सर्वोपरि ,कर्म ही जीवन का आधार है
सशक्त समाज की स्थापना ही महाभारत का संदेश है
और कर्तव्य पथ पर अविरल बढ़ना ही गीता का उपदेश है