Sunday, March 22, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 94

समुद्र के अंदर बनी देश की पहली मुंबई कोस्टल रोड सड़क

मुम्बई । एक तरफ कोलकाता में जहां देश की पहली अंडरवाटर मेट्रो की शुरुआत हो चुकी है, वहीं दूसरी देश के पहले अंडर सी  रोड का उद्घाटन भी किया जा चुका है। यह मुंबई में बना कोस्टल रोड है, जिसका उद्घाटन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने किया।
मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक के बाद मुंबईकरों को ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात दिलाने की ओर उठाया गया यह दूसरा महत्वपूर्ण कदम है। वर्ली से मरीन ड्राइव को जोड़ने वाली इस कोस्टल रोड का इस्तेमाल 12 मार्च से आम मुंबईकर कर रहे हैं। कोस्टल रोड पर सफर पूरी तरह से फ्री होने वाला है लेकिन गाड़ियों की अधिकतम स्पीड तय कर दी गयी है।
हां, कुछ खास तरह की गाड़ियां हैं जिन्हें मुंबई कोस्टल रोड पर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गयी है। मुंबई कोस्टल रोड का नाम धर्मवीर संभाजी महाराज कोस्टल रखा गया है। अभी कोस्टल रोड का एक हिस्सा ही खोला गया है। इस प्रोजेक्ट का दूसरा चरण इस साल मई में आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। पहले वर्ली से मरीन ड्राइव तक पहुंचने में करीब 40 मिनट का समय लगता था लेकिन कोस्टल रोड के खुल जाने के बाद यह दूरी महज 9 से 10 मिनट में ही तय की जा सकेगी।
कितनी है लागत – मुंबई कोस्टल रोड निर्माण का काम अक्टूबर 2018 में शुरू किया गया था। इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 13,898 करोड़ रुपए बतायी जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मुंबई कोस्टल रोड की कुल लंबाई 29.2 किमी होने वाली है। वर्तमान में इसका 10.58 किमी हिस्सा ही आम लोगों के लिए खोला गया है। अभी तक बने कोस्टल रोड को तैयार करने में लगभग 9,383 करोड़ रुपए की लागत आ चुकी है।
यह सड़क देश की पहली सड़क है जिसका एक बड़ा हिस्सा समुद्र के अंदर से बनाया गया है। इसमें 2 किमी लंबा टनल बनाया गया है। कोस्टल रोड के पहले फेज का काम बीएमसी की तरफ से किया गया है। इसमें तीन इंटरचेंज हैं, एमर्सन गार्डन, हाली अली और वर्ली।
निर्धारित स्पीड सीमा से ऊपर गये तो खैर नहीं – मुंबई कोस्टल रोड से गुजरने वाली हर गाड़ी को सख्ती से स्पीड की सीमा का पालन करना होगा। गाड़ियों के स्पीड पर नजर रखने के लिए यहां ट्रैफिक मैनेजमेंट कंट्रोल सिस्टम भी लगाया गया है। यदि कोई भी गाड़ी निर्धारित सीमा से ऊपर की स्पीड से इस रोड से होकर गुजरती है, तो उसे तुरंत कैमरे में कैद कर लिया जाएगा।
इस रोड पर गाड़ियों के लिए अधिकतम स्पीड की सीमा 80 किमी प्रति घंटा रखा गया है। वहीं 2 किमी लंबी सुरंग से होकर गुजरते समय गाड़ियों को 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से आगे बढ़ना होगा। इस सुरंग में प्रवेश करते और बाहर निकलते समय गाड़ियों की रफ्तार 40 किमी प्रति घंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए।
कुछ गाड़ियों की है No Entry – मुंबई कोस्टल रोड पर हर तरह की गाड़ियां नहीं चल सकेंगी। कोस्टल रोड पर कुछ वाहनों का प्रवेश वर्जित किया गया है। जो गाड़ियां कोस्टल रोड पर नहीं चल सकेंगी, उनमें ट्रेलर, मिक्सर, ट्रैक्टर, दो पहिया वाहन, तीन पहिया वाहन, साइकिल, दिव्यांग वाहन, जानवरों द्वारा खींची जाने वाली गाड़ियां, तांगा, हाथगाड़ी आदि शामिल है।

सरकार ने डॉक्टरों, उनके रिश्तेदारों को मिलने वाले उपहारों पर लगाई रोक

नयी दिल्ली । सरकार ने फार्मा मार्केटिंग प्रैक्टिस को लेकर यूसीपीएमपी 2024 नोटिफाई कर दिया है। इसके तहत फार्मा सेक्टर के लिए नई गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं। फार्मा सेक्टर के लिए जारी की गई इस नई गाइडलाइंस में सरकार ने डॉक्टरों और उनके रिश्तेदारों को मिलने वाले गिफ्ट्स पर रोक लगा दी है। जी हां, सरकार ने हेल्थकेयर इंडस्ट्री में किसी भी तरह के अनैतिक कार्यों को रोकने के लिए ये बड़ा फैसला लिया है।
ट्रैवल और ऐकोमोडेशन भी नहीं दे सकती फार्मा कंपनियां – फार्मा सेक्टर में होने वाली कई तरह की अनऐथिकल प्रैक्टिस को खत्म करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ फार्मा ने कुछ बड़ी और महत्वपूर्ण गाइडलाइंस जारी की हैं। इस नई गाइडलाइंस के मुताबिक फार्मा कंपनी, किसी भी डॉक्टर, हेल्थकेयर वर्कर या उनके परिवार के सदस्यों को किसी भी तरह का कोई गिफ्ट्स नहीं दे सकती हैं। इसके साथ ही फार्मा कंपनियां अब हेल्थकेयर वर्कर्स या उनकी फैमिली को देश में या देश के बाहर ट्रैवल या आवास भी ऑफर नहीं कर सकती हैं। इसके साथ ही कोई भी फार्मा कंपनी इन लोगों को किसी भी तरह का कोई आर्थिक फायदा भी नहीं दे सकती हैं।
फार्मा कंपनियों के सीएमई वर्कशॉप पर भी लगी रोक – सरकार की तरफ से जारी किए गए गाइडलाइंस के मुताबिक अब फार्मा कंपनियां सीएमई (कंटीन्यूइंग मेडिकल एडुकेशन) वर्कशॉप भी नहीं कर सकतीं। फार्मा कंपनियां पहले इस तरह के वर्कशॉप करती थीं, जिनमें डॉक्टरों को विदेशों के टूर पर भेजा जाता था। फार्मा कंपनियों को अपनी दवाइयों की सभी जानकारी बिल्कुल सही देनी होंगी, दवाइयों की जानकारियां मिसलीडिंग नहीं होनी चाहिए।
दवा कंपनियों को फ्री सैंपल का देना होगा पूरा हिसाब – इतना ही नहीं, फार्मा कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले फ्री सैंपल पर भी लगाम कसने की तैयारी हो गई है। गाइडलाइंस में कहा गया है कि फार्मा कंपनियां अपनी सालाना घरेलू बिक्री का सिर्फ 2 प्रतिशत की फ्री सैंपल दे सकती हैं। इसके साथ ही, फार्मा कंपनियों को फ्री सैंपल का पूरा हिसाब देना होगा। ये कंपनियां सिर्फ योग्य डॉक्टरों को ही प्रैक्टिस के लिए फ्री सैंपल दे सकती हैं।

शादीशुदा रहते लिव इन रिलेशन में नहीं रह सकते हैं विवाहित

प्रयागराज ।  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप से जुड़े एक मामले में सुनवाई के बाद अपने फैसले में कहा है कि हिन्दू विवाह अधिनियम के मुताबिक यदि पति-पत्नी जीवित हैं और तलाक नहीं लिया गया है, तो उनमें से कोई भी दूसरी शादी नहीं कर सकता । कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि कानून के खिलाफ रिश्तों को अदालत का समर्थन नहीं मिल सकता। हाईकोर्ट ने इसी तल्ख टिप्पणी के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली विवाहिता की याचिका को खारिज कर दिया है । अदालत ने अर्जी खारिज करने के साथ ही याचिकाकर्ताओं पर दो हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया ।
कोर्ट ने खारिज की याचिका – जस्टिस रेनू अग्रवाल ने कासगंज की एक विवाहिता व अन्य की याचिका खारिज करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि विवाहित महिला अपने पति से तलाक लिए बिना किसी अन्य के साथ लिव इन में नहीं रह सकती। ऐसे रिश्तों को मान्यता देने से समाज में अराजकता बढ़ेगी और देश का सामाजिक ताना-बाना तहस नहस हो जाएगा।
विवाहिता और लिव इन रिलेशनशिप में उसके साथ रहने वाले प्रेमी ने सुरक्षा की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में कहा गया था दोनों याची लिव इन पार्टनर हैं। उन्होंने कासगंज जिले के एसपी से सुरक्षा की मांग की थी। कोई सुनवाई न होने पर यह याचिका दाखिल की गयी ।
शादीशुदा होने के बावजूद लिव इन रिलेशन – सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला और उसका प्रेमी दोनों ही पहले से शादीशुदा हैं। दोनों अपने जीवनसाथियों को छोड़कर सिर्फ शारीरिक संबंध बनाने के लिए लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। याचिका का प्रेमी युवक की पत्नी द्वारा विरोध भी किया गया। अदालत में लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े के पहले से शादीशुदा होने के सबूत भी पेश किए गए। अदालत में सुनवाई के दौरान यह भी साफ हुआ कि दोनों में से किसी याची का अपने पति या पत्नी से तलाक नहीं हुआ है। विवाहिता याची दो बच्चों की मां है और दूसरे याची के साथ लिव इन में रह रही है। कोर्ट ने इसे कानून के खिलाफ माना और सुरक्षा देने से इंकार कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया।

केंद्र सरकार ने कुत्तों की 23 खूंखार नस्लों पर लगाया लगाया प्रतिबंध

 पिटबुल-जर्मन शेफर्ड हैं शामिल
नयी दिल्ली । । पालतू कुत्तों के हमलों से लोगों की मौत की बढ़ती घटनाओं के बीच केंद्र सरकार ने राज्यों को पिटबुल टेरियर, अमेरिकन बुलडॉग, रॉटविलर और मॉस्टिफ्स सहित खूंखार कुत्तों की 23 नस्लों की बिक्री और उनके प्रजनन पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है। पशुपालन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति ने ऐसी नस्ल के कुत्तों के आयात पर रोक लगाने की सिफारिश भी की है। पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया की अपील और दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक रिट याचिका के बाद केंद्र ने यह कदम उठाया है। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के संयुक्त सचिव ओपी चौधरी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को एक पत्र भेजकर स्थानीय निकायों, पशुपालन विभाग से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि खतरनाक नस्लों के रूप में चिह्नित कुत्तों के प्रजनन और उन्हें बेचने के लिए आगे कोई लाइसेंस जारी न किया जाए या अनुमति न दी जाए।
प्रजनन रोकने को कहा । इसके साथ ही कहा है कि इन नस्लों के कुत्तों को जिन लोगों ने पाल भी रखा है, उनका बंध्याकरण किया जाए, ताकि वे आगे प्रजनन न कर सकें। केंद्र ने डॉग ब्रीडिंग एंड मार्केटिंग रूल्स 2017 और पेट शाप रूल्स 2018 को सख्ती से लागू करने के लिए कहा है। इन देशों में प्रतिबंधित हैं यह कुत्ते – पेटा इंडिया के शौर्य अग्रवाल ने कहा कि मनुष्यों की सुरक्षा के लिए केंद्र ने यह सराहनीय कदम उठाया है। यहां यह भी बता दें कि पिटबुल अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, डेनमार्क, स्पेन, कनाडा, इटली और फ्रांस समेत 41 देशों में प्रतिबंधित है। इसके अलावा भी कई देशों में इस नस्ल के कुत्ते को रिहायशी इलाकों में रखना वर्जित किया गया है। पिटबुल जब एक बार किसी को अपने शिकंजे में ले लेता है तो उसके जबड़े एक तरह से लॉक हो जाते हैं और फिर उससे छुड़ाना बेहद मुश्किल होता है।
खूंखार नस्लों में ये कुत्ते शामिल – पिटबुल टेरियर्स, टोसा इनु, अमेरिकन स्टैफोर्डशायर टेरियर, फिला ब्रासीलेरियो, डोगो अर्जेंटीनो, अमेरिकन बुलडॉग, बोअरबोएल, कांगल, टार्नजैक, बैंडोग, सरप्लानिनैक, जापानी टोसा, अकिता, मॉस्टिफ्स, राटविलर, रोडेशियन रिजबैक, कैनारियो, अकबाश और मास्को गार्डडॉग, वोल्फ डॉग, जर्मन शेफर्ड आदि। अमेरिका में कुत्तों के काटने से हुई मौतों में पिटबुल का योगदान 66 प्रतिशत अमेरिका में 2005 से 2019 के 15 वर्षों के दौरान कुत्तों के काटने से होने वाली मौतों में पिटबुल का योगदान 66 प्रतिशत (346) रहा। संयुक्त रूप से पिटबुल और रॉटविलर का कुत्तों के काटने से हुई कुल मौतों में हिस्सा 76 प्रतिशत का रहा।
हाल में हुई घटनाएं – करीब एक माह पहले दिल्ली में एक पिटबुल द्वारा काटे जाने के बाद एक बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। उसका पैर तीन जगह से टूट गया। उसे 17 दिन अस्पताल में रहना पड़ा। इससे कुछ दिन पहले एक व्यक्ति ने राजधानी में अपने पड़ोसी पर हमला करने के लिए अपने पिटबुल को उकसाया था।
एक सप्ताह पहले गाजियाबाद में एक पिटबुल ने 10 वर्षीय बच्चे को गंभीर रूप से जख्मी कर दिया था।
दिसंबर में भी एक 70 वर्षीय महिला को पिटबुल ने गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
एक अन्य मामले में लखनऊ में एक जिम मालिक के पिटबुल ने उसकी मां की जान ले ली थी।

रवि किशन के साथ नजर आ रहे हैं कोलकाता के अमित विक्रम पांडेय

मुम्बई । अमित विक्रम पांडेय, जो ट्रेंडिंग नेटफ्लिक्स सीरीज “मामला लीगल है” में “लॉ” के रूप में उज्ज्वल हैं, मुख्य किरदार मिस्टर वी डी त्यागी के सहायक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिनका चित्रण रवि किशन ने किया है। अपनी वर्तमान सफलता के पार, अमित विक्रम उत्साहित करने वाले परियोजनाओं की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें इच्छुक परिवारिक फिल्म ” जस्सी वेड्स जस्सी” भी शामिल है, जहां वे रणवीर शॉरी, सिकंदर खेर, हर्ष वर्धन देव, मनु ऋषि चड्ढा, सुदेश लेहरी जैसे प्रसिद्ध अभिनेताओं के साथ स्क्रीन शेयर करेंगे। उनकी अभिनय यात्रा उनके दादाजी की कहानियों के साथ शुरू हुई, जिसने सिर्फ 14 साल की उम्र में स्टेज के प्रति प्यार को जगाया। उन्होंने स्वर्गीय उषा गांगुली, रसिका अगाशे और श्रुति शर्मा जैसे प्रमुख थिएटर व्यक्तित्वों के साथ काम किया है। अब, नौ साल बाद, अमित विक्रम अभी भी प्रकाश के नीचे प्रदर्शन करने में आनंद और आराम ढूंढते हैं।  ” नेबर्स किचेन सीजन 2″ और ” छोटा भीम द म्यूजिकल” जैसे शोज में यादगार भूमिकाओं के साथ, अमित विक्रम ने सितारों जैसे कि अक्षय कुमार, एमएस धोनी, शक्ति कपूर, तापसी पन्नू के साथ विज्ञापनों में भी अपनी पहचान बनाई है।

“दिव्यांग त्रिकोणीय टी-20 क्रिकेट प्रतियोगिता की आकर्षक ट्रॉफी 2024” का अनावरण

कोलकाता । दिव्यांग त्रिकोणीय टी-20 क्रिकेट ट्रॉफी 2024 के लिए प्रतियोगिता की शुरुआत 15 मार्च, 2024 को होने वाली है। इस क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन दिव्यांग क्रिकेट काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से किया गया है। हाल ही में इस मौके पर आकर्षक ट्रॉफी का अनावरण किया गया। इस समारोह में पूर्व भारतीय क्रिकेटर अरुण लाल (पूर्व भारतीय क्रिकेटर), चिन्मय नायक (सीईओ, सीएबी), रवि चौहान (डीसीसीआई के महासचिव), स्क्वाड्रन लीडर अभय प्रताप सिंह (डीसीसीआई के संयुक्त सचिव),  अरुण सराफ (पश्चिम बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन फॉर डिफरेंटली-एबल्ड के मुख्य संरक्षक), राजेश भारद्वाज (डीसीसीआई के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन कमेटी के अध्यक्ष), और सुरेन्द्र अग्रवाल (डीसीसीआई के दक्षिण भारत के अध्यक्ष) के साथ समाज में कई कई अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां इसमें शामिल हुए। विभिन्न दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा खेला जाने वाला एक अन्य फॉर्मेट का क्रिकेट है। इसमे मुख्यधारा के क्रिकेट की चकाचौंध और ग्लैमर के बीच, दिव्यांग क्रिकेटर के रूप में क्रिकेट प्रेमियों का एक ऐसा वर्ग भी मौजूद है, जिसे लंबे समय से अनदेखा किया गया है। दिव्यांग क्रिकेट में ब्लाइंड क्रिकेट, मूक-बधिर क्रिकेट, शारीरिक विकलांगता क्रिकेट और व्हीलचेयर क्रिकेट जैसे विभिन्न रूप शामिल हैं। दिव्यांग त्रिकोणीय टी-20 ट्रॉफी 2024 तीन राज्यों, पंजाब, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बीच 15 से 17 मार्च, 2024 को बारासात में स्थित आदित्य अकादमी में खेला जाएगा। डीसीसीआई के महासचिव रवि चौहान ने कहा, दिव्यांग त्रिकोणीय टी-20 ट्रॉफी एक अनूठा मंच है, जो दिव्यांग क्रिकेटरों की प्रतिभा और दृढ़ संकल्प को समाज के सामने लाता है। हम हमेशा समाज में हर संभव तरीके से बदलाव लाना चाहते हैं। हम इस आयोजन के जरिए समाज में यह जागरूकता पैदा करना चाहते हैं कि, दिव्यांग लोग जीवन में जो कुछ भी करना चाहते हैं, वह कर सकते हैं बल्कि एक सामान्य व्यक्ति से भी बेहतर कर सकते हैं। इस अवसर पर, पश्चिम बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन फॉर डिफरेंटली-एबल्ड के मुख्य संरक्षक श्री अरुण सराफ ने कहा, डीसीसीआई द्वारा डिफरेंटली-एबल्ड लोगों के लिए पश्चिम बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन का मुख्य संरक्षक नियुक्त किए जाने पर मैं अविश्वसनीय रूप से सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मैं अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा पश्चिम बंगाल में सभी क्रिकेटरों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।

भारत जैन महामंडल लेडीज विंग ने मनाया रंगारंग होली मिलन

कोलकाता। भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता शाखा की सदस्याओं ने होली का कार्यक्रम आयोजित किया। प्रसिद्ध रेस्टोरेंट स्टन द सन में विनय सेठिया के शानदार आयोजन में सभी ने डीजे पार्टी के जरिए राजस्थानी गीतों का जमकर आनंद लिया । कई तरह के गेम, धमाल, मस्ती, लज़ीज़ खाना, स्टार्टर, शीतय पेय और राजस्थानी व्यंजनों के साथ कुल्फी के जायके के साथ‌ सबने खूब एन्जॉय किया। सभी बहनों में उत्साह देखने लायक था। रंग – बिरंगी पोशाकें मे सजी बहनों ने मस्ती धमाल के साथ राजस्थानी भाषा में बातचीत करते हुए मायड़ भाषा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। जो बहनें फर्राटेदार अंग्रेजी बोला करती है वो भी प्रोग्राम में राजस्थानी भाषा में ही बातें करने के साथ राजस्थानी गीत गा रही थीं। समाजसेवी और भारत जैन महामंडल लेडिज विंग की संस्थापक, सलाहकार श्रीमती अंजू सेठिया ने बताया जबतक राजस्थानी भाषा की शुरुआत अपने घर से नहीं होगी सकारात्मक परिणाम नहीं मिल पाएंगे। प्रोग्राम में मुख्य अतिथि के रुप में डाक्टर वसुंधरा मिश्र विशेष रुप से उपस्थित रही। वसुंधरा मिश्र का स्वागत अध्यक्ष चंदा गोलछा ने उत्तरीय ओढ़ाकर किया। रेस्टोरेंट के मालिक विनय सेठिया का सुंदर सहयोग रहा, समाज सेवा के तौर पर उन्होंने काफी डिस्काउंट दिया। भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता शाखा की अध्यक्ष चंदा गोलछा ने विनय सेठिया को भारत जैन महामंडल का मोमेंटो और उत्तरीय ओढ़ाकर सम्मानित किया। अध्यक्ष चंदा गोलछा, संस्थापक और सलाहकार सरोज भंसाली, अंजू सेठिया, कोषाध्यक्ष अंजु बैद ,रुबी गोलछा, राजश्री भंसाली, कान्ता लुनिया, कविता बोहरा’, सीमा बेगानी, अंजु सुराना, रेशम दुगड, कविता दुगड , उषा बैद, राज कोठारी, इन्द्रा बागरेचा, सज्जन भंसाली, सीमा भावसिंहका, सुमन फुलफगर, सरिता बैद,सुषमा नाहटा, मंजु चोरडिया, कनकलता चोपड़ा ,सुमन कोठारी, सुनीता सेठिया, बेला सेठिया, सीमा बैद, चंदा प्रहलादका, अमराव रामपुरिया, सरोज बैद, गुलाब बैगानी, सुपयार पुगलिया, सुमित्रा सेठिया, स्नेह बागरेचा, निर्मला बागरेचा, भारती लुनिया, सुनीता कुडलिया, प्रमिला कुंडलिया, मीना सोनी आदि सदस्याएं आयोजन की सफलता के लिए सक्रिय रही । उपस्थित सभी बहनों को प्रताप मल गोविंद राम विक्रम सरिता भसालीकी तरफ से होली रंग उपहार स्वरूप दिया गया। चंदा गोलछा,सरोज भंसाली, इंद्रा बागरेचा‌ का आज के प्रोग्राम मे सहयोग रहा।

भारतीय भाषा परिषद का कर्तृत्व समग्र सम्मान-2024

कोलकाता । भारतीय भाषा परिषद का हर साल चार भारतीय भाषाओं को दिए जाने वाले कर्तृत्व समग्र सम्मान और युवा पुरस्कारों की आज घोषणा हुई। कर्तृत्व समग्र सम्मान 1 लाख  की राशि और युवा पुरस्कार 51 हजार रुपये का है। परिषद की अध्यक्ष डॉ. कुसुम खेमानी और निदेशक शंभुनाथ ने आज प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए सर्वसम्मति से तय किए गए पुरस्कारों की घोषणा की।
कर्तृत्व समग्र सम्मान प्रदान किया जाएगा- जसवीर भुल्लर (पंजाबी), एम. मुकुंदन (मलयालम), राधावल्लभ त्रिपाठी (संस्कृत) और भगवानदास मोरवाल (हिंदी) को। युवा पुरस्कार से सम्मानित किए जाएंगे- आरिफ रजा (कन्नड़), संदीप शिवाजीराव जगदाले (मराठी), गुंजन श्री (मैथिली) और जसिंता केरकेट्टा (हिंदी) को। यदि विशेष स्थिति पैदा नहीं हुई तो ये पुरस्कार 20 अप्रैल को प्रदान किए जाएंगे।
भारतीय भाषा परिषद भारतीय भाषाओं और साहित्य के विकास और प्रोत्साहन के लिए कार्य कर रही देश की प्रतिनिधि सांस्कृतिक संस्था है। इसकी स्थापना 1975 में हुई थी। कर्तृत्व समग्र सम्मान की शुरुआत 1980 में की गई थी। बाद में युवा पुरस्कार भी जुड़े। भारत की सभी राष्ट्रीय भाषाओं के अब तक सौ से अधिक वरिष्ठ और युवा साहित्यकार पुरस्कृत किए जा चुके हैं। परिषद भारतीय भाषाओं के बीच सेतुबंधन के लिए अपने सभागार में राष्ट्रीय स्तर के सेमिनारों के आयोजन के अलावा ‘वागर्थ’ मासिक का भी प्रकाशन करती है। इसने महानगर कोलकाता के सांस्कृतिक गौरव और हिंदी की राष्ट्रीय भूमिका के तौर पर अपनी सारस्वत परंपराओं को अक्षुण्ण रखा है।

राहुल सांकृत्यायन एशियाई जागरण पर सोचते थे

कोलकाता । भारतीय भाषा परिषद में ’इतिहास और साहित्य अध्ययन केंद्र’ द्वारा मिलकर आयोजित एक व्याख्यान कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया और कोरिया के विश्वविद्यालयों तथा नालंदा विश्वविद्यालय में  प्रोफेसर रह चुके वरिष्ठ शिक्षाविद ने राहुल सांकृत्यायन के इतिहास, दर्शन और साहित्य के क्षेत्र में योगदान पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि  राहुल ने एशिया की महानता की अवधारणा दी और एशिया का इतिहास लिखने की शुरुआत की। राहुल एक विश्वकोशीय सोच के व्यक्तित्व थे। मुख्य स्थिति के रूप में व्याख्यान देते हुए प्रो. पंकज मोहन ने बताया कि  राहुल ने कहा था कि यदि हमें अपनी प्राचीन महानता के बारे में चिंतन करना है तो सबसे पहले  एक–दूसरे को समझना होगा। सभी संस्कृतियों को एक–दूसरे को समझना होगा। आज एशिया में दूरियां और तनाव हों, पर एक समय सभी जातियां आपस में संवाद करती थीं। खासकर बौद्ध धर्म के प्रचार के काल में इस महादेश के लोग एक दूसरे के नजदीक आ रहे थे। खासकर नालंदा बौद्ध धर्म से ऊपर उठकर हिंदू धर्म और और विभिन्न पंथों के अध्ययन का केंद्र था।
डा. शंभुनाथ ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन ने एशिया के इतिहास लेखन का काम शुरू करके अपने समय में पगडंडी निर्माण का काम किया जो आज चौड़ी सड़क बनाने से ज्यादा कठिन था। वह जमाना आज की तरह विशेषज्ञता का न होकर बहुज्ञता का था। वे नवजागरण और प्रगतिशील आंदोलनों के बीच पुल थे। प्रो. हितेंद्र पटेल ने कहा कि ’इतिहास और साहित्य अध्ययन केंद्र’ कोलकाता के युवा बौद्धिक जगत को विचारों की दुनिया में, बहसों में शामिल करने के लिए है। हम चाहते हैं कि शोधकर्ता, शिक्षक और उच्च शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को विचार विमर्श का एक खुला मंच मिले। आज इसके पहले आयोजन का उद्घाटन डा. कुसुम खेमानी की उपस्थिति में हुआ। सभा के प्रश्न काल के बाद डा.सोमा बसु ने धन्यवाद दिया। इस चर्चा में  डा. कुसुम खेमानी, डा टेरेसा चोई ( कोरिया) , मृत्युंजय श्रीवास्तव, मंजर जमील, डा देबारती तरफदार, डा  बुलू मोदक , डा नंदिता बनर्जी समेत बहुत सारे  शोधार्थी और छात्र छात्राऐं उपस्थित थे।

भवानीपुर कॉलेज में समय और तनाव को नियंत्रण विषय पर सेमिनार 

कोलकाता ।  भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज परिसर के सोसाइटी हॉल में “संतुलन अधिनियम: आधुनिक दुनिया में समय और तनाव को नियंत्रित करना” विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया, जिसमें लगभग 46 विद्यार्थियों  ने भाग लिया। यह 4 मार्च को सुबह साढ़े दस बजे से साढ़े ग्यारह बजे तक हुआ।
माइकल अल्टशुलर ने कहा है कि बुरी खबर यह है कि समय उड़ जाता है,अच्छी ख़बर यह है कि आप पायलट हैं।
छात्र तनाव को कैसे दूर करें इसके बारे में सही मार्गदर्शन चाह रहे थे। समय प्रबंधन के मास्टर कैसे बनें।एक बार हमने समय खो दिया तो हम उसे कभी वापस नहीं पा सकते। आज पूरी दुनिया समय के पीछे भाग रही है क्योंकि 21वीं सदी में समय प्रबंधन बहुत बड़ी बात है। समय के साथ तालमेल न बिठा पाने का तथ्य हमें तनावपूर्ण बना देता है। इस अवसर पर बीईएससी ने श्री रमेश मिश्रा, एजुकेशन मैनेजमेंट प्रोफेशनल , एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट का स्वागत किया । उन्होंने टाइम मैनेजमेंट के तरीकों को सरल बनाया और तनाव दूर करने के टिप्स साझा किए। पहले श्री मिश्रा ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी, एनएमआईएमएस, टाइम्स इंस्टीट्यूट और मलयालम मनोरमा मीडिया हाउस से जुड़े थे और 15 वर्षों से अधिक समय से मार्केटिंग और ब्रांड रणनीति की अवधारणा और विकास से जुड़े हुए हैं। सेमिनार की शुरुआत डीन कार्यालय से सुश्री समीक्षा खंडूरी द्वारा श्री मिश्रा को सम्मानित करने के साथ हुई।
श्री मिश्रा ने अपने व्याख्यान की शुरुआत करते हुए कहा कि समय का प्रबंधन करने के लिए हमें न केवल एक समय सारिणी बनानी चाहिए बल्कि उस पर अमल भी करना चाहिए। श्री मिश्रा के अनुसार समय सारिणी के साथ-साथ एक उचित योजना का होना पहली आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा, “एक मिलीसेकंड का मूल्य समझने के लिए उस व्यक्ति से पूछें जिसने ओलंपिक में स्वर्ण खो दिया था।” उन्होंने साझा किया कि एक बार जब हम जीवन में प्रगति करते हैं तो समय का मूल्य और तनाव प्रबंधन बढ़ जाता है, उन्होंने सलाह दी कि तनाव को कम करने के लिए आप जो भी करें उसे प्यार से करें। उन्होंने सभी से सकारात्मक सोचने और खुद को सकारात्मकता से घेरने के लिए भी कहा क्योंकि नकारात्मक भावनाएं हमें अधिक तनावग्रस्त महसूस कराती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें हवा में महल बनाना बंद कर देना चाहिए क्योंकि वह हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य और हमारे व्यवहार पैटर्न पर तनाव के प्रभावों को समझाते रहे। उन्होंने तनाव से बचने के गुर साझा किए जिनमें स्वस्थ शरीर, आध्यात्मिक मन और बौद्धिक मस्तिष्क शामिल है।
सत्र संवादात्मक था। अंत में, विद्यार्थियों की शंकाओं को स्पष्ट और उनका समाधान किया गया । एक प्रश्न में यह भी शामिल था कि नकारात्मक विचारों से कैसे बचा जा सकता है, जिसके उत्तर में सर ने कहा कि आत्मविश्वास बढ़ाना और सकारात्मक वातावरण हमें नकारात्मक विचारों से दूर रहने में मदद कर सकता है। उन्होंने एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के बारे में कुछ प्रकाश डालते हुए सत्र का समापन किया और बताया कि यह एमबीए के क्षेत्र में अग्रणी स्कूलों में से एक है।
रिपोर्टर मौबानी मैती, फ़ोटोग्राफ़र अग्रग घोष रहे ।कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने