Friday, November 6, 2026
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जिन इलाकों में लगे होते हैं खूब सारे पेड़, वहां बुजुर्ग रहते हैं डिप्रेशन से कोसों दूर

सिडनी । संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, डिप्रेशन एक आम मानसिक विकार है। इससे दुनिया के लगभग 28.0 करोड़ लोग जूझ रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो दुनिया के 5.7 फीसदी बुजुर्ग डिप्रेशन से पीड़ित हैं। डिप्रेशन की वजह अनगिनत हैं, लेकिन हाल की एक स्टडी कैसे इससे बचा जा सकता है इस ओर ध्यान दिलाती है। ऑस्ट्रेलिया में हुए एक लंबे समय तक चले अध्ययन में पाया गया है कि अधिक वृक्षों वाले इलाकों में रहने से बुजुर्गों में बढ़ती उम्र के दौरान अवसाद (डिप्रेशन) से बचाव में मदद मिल सकती है। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने ऑस्ट्रेलिया की ‘न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के सिडनी सेंटर फॉर हेल्दी ब्रेन एजिंग’ (सीएचईबीए) की ओर से सोमवार को जारी रिपोर्ट के हवाले से बताया कि ‘जर्नल ऑफ अफेक्टिव डिसऑर्डर्स’ में प्रकाशित यह शोध स्वस्थ उम्र बढ़ने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अर्बन प्लानिंग की संभावित भूमिका को रेखांकित करता है। सीएचईबीए ने ऑस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी के सहयोग से यह अध्ययन किया। इसमें 70 से 90 वर्ष की आयु के 1,000 से अधिक बुजुर्ग ऑस्ट्रेलियाई लोगों को शामिल किया गया और 12 वर्षों तक उनका अध्ययन किया गया। शोध में पाया गया कि जिन लोगों ने ऐसे इलाकों में जीवन बिताया जहां पेड़ों की छाया और हरियाली अधिक थी, उनमें समय के साथ अवसाद के लक्षण कम देखने को मिले।
शोधकर्ताओं ने यह जांच की कि आसपास के पर्यावरण से जुड़ी कौन-कौन सी चीजें जैसे पेड़ों की छतरी (ट्री कैनोपी), पार्क, समुद्र, नदियों और झीलों तक पहुंच, जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता और वायु प्रदूषण अवसाद के लक्षणों में बदलाव से जुड़ी हैं।
अध्ययन में कहा गया कि लंबे समय तक अधिक पेड़ों वाले वातावरण में रहने का संबंध लगातार कम अवसाद स्तर से पाया गया। शोधकर्ताओं ने बताया कि दुनिया भर में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग हर पांच वयस्कों में से एक व्यक्ति अवसाद से प्रभावित होता है।
हालांकि, अध्ययन में यह पाया गया कि अन्य पर्यावरणीय कारकों, जैसे पार्कों की उपलब्धता, समुद्र या जल क्षेत्रों (ब्लू स्पेस) तक पहुंच, सेवाओं की उपलब्धता या लंबे समय तक कम स्तर के वायु प्रदूषण के संपर्क का अवसाद के लक्षणों पर कोई स्पष्ट और लगातार प्रभाव नहीं दिखा।
शोधकर्ताओं के अनुसार, शहरों में अधिक पेड़ लगाने और हरित क्षेत्रों को बढ़ावा देने जैसी योजनाएं बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

बादाम का तेल है कुदरती ब्यूटी टॉनिक

आजकल बढ़ता प्रदूषण, धूल-मिट्टी, खराब खानपान और तनाव का असर सबसे पहले हमारी त्वचा और बालों पर दिखाई देता है। कम उम्र में ही बाल झड़ने लगते हैं और त्वचा अपनी प्राकृतिक चमक खोने लगती है। ऐसे में लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन अगर कुछ प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया जाए तो अच्छा फायदा मिल सकता है। इन्हीं में से एक है बादाम का तेल। बादाम के तेल में ऐसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा और बालों दोनों की देखभाल में मदद कर सकते हैं। बादाम के तेल में विटामिन ई, हेल्दी फैट, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह त्वचा की नमी बनाए रखने, बालों को मुलायम बनाने और बाहरी नुकसान से बचाने में मदद करता है। बादाम के तेल से हल्के हाथों से सिर की मालिश करने से बालों को नमी मिलती है और वे पहले से ज्यादा मुलायम महसूस होते हैं। कुछ लोग बादाम के तेल को जैतून के तेल के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं। इससे बालों की देखभाल बेहतर तरीके से होती है। हालांकि अगर बाल बहुत ज्यादा झड़ रहे हों, तो पहले त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, बादाम के तेल में ऐसे फैटी एसिड होते हैं, जो बालों की बाहरी परत को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। इससे बालों का रूखापन कम होता है और बालों के टूटने की संभावना भी कुछ हद तक कम हो जाती है।
आंखों के नीचे होने वाले काले घेरे यानी डार्क सर्कल्स की समस्या भी आजकल काफी आम हो गई है। देर रात तक जागना, तनाव, नींद की कमी और शरीर में पानी की कमी इसके बड़े कारण माने जाते हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रात में सोने से पहले आंखों के नीचे थोड़ी मात्रा में बादाम के तेल से हल्की मालिश करने से त्वचा को नमी मिलती है। हालांकि मेडिकल रिसर्च कहती है कि डार्क सर्कल्स का पूरा इलाज सिर्फ किसी एक तेल से संभव नहीं है। इसके लिए अच्छी नींद, पर्याप्त पानी और संतुलित जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी है।
बढ़ती उम्र के साथ चेहरे पर झुर्रियां आना एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन कई लोगों में यह बदलाव जल्दी दिखाई देने लगता है। डॉक्टरों का कहना है कि बादाम के तेल में मौजूद विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। नियमित रूप से त्वचा की देखभाल करने से त्वचा की नमी बनी रहती है, जिससे वह मुलायम और स्वस्थ दिखाई देती है।
यूरोपियन मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित कुछ रिसर्च के अनुसार, बादाम का तेल रूखी त्वचा वाले लोगों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। यह त्वचा की ऊपरी परत में नमी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे त्वचा कम रूखी महसूस होती है। एक्जिमा और सोरायसिस जैसी कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में भी डॉक्टर कई बार मॉइस्चराइजिंग के रूप में बादाम के तेल का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। हालांकि ऐसी बीमारियों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
फटी एड़ियों की समस्या भी बादाम के तेल से कुछ हद तक कम होती है। हालांकि, अगर घाव, एलर्जी या संक्रमण हो, तो तेल लगाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

दिल को रखना है मजबूत तो अपनाएं ये योगासन

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खान-पान और तनाव के कारण हृदय रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में अपनी दिनचर्या में सुधार लाना बेहद जरूरी है, जिनमें योगासन बेहद जरूरी होता है। योग एक ऐसी प्राचीन पद्धति है जो न सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखती है, बल्कि दिल को भी मजबूत बनाती है। नियमित योगासन करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, तनाव कम होता है और हृदय स्वस्थ रहता है। ताड़ासन, अर्धचक्रासन, त्रिकोणासन, वीरभद्रासन, गोमुखासन, अधोमुख श्वानासन, भुजंगासन, विपरीतकरणी आसन, मत्स्यासन, नाड़ीशोधन प्राणायम जैसे योगासन करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। ताड़ासन: सीधे खड़े होकर हाथों को ऊपर की ओर खींचने वाला योगासन है, जो शरीर का संतुलन सुधारता है और रक्त संचार को बेदतर करने में मदद करता है, जिससे हृदय और मांसपेशियों को सही पोषण मिलता है और मांसपेशियों को सही पोषण मिलता है।
अर्धचक्रासन: अर्धचक्रासन छाती और फेफड़ों को फैलाकर हृदय क्षेत्र को खोलता है, जिससे रक्त संचार और ऑक्सीजन का स्तर बेहतर होता है। गहरी सांस लेने की प्रक्रिया से तंत्रिका तंत्र शांत होता है, जिससे दिल पर मानसिक तनाव का असर कम होता है।
त्रिकोणासन: नियमित अभ्यास से हृदय प्रणाली सक्रिय होती है, जिससे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है। लंबी और गहरी सांसों के साथ इसे करने से मानसिक तनाव और चिंता कम होती है, जो अप्रत्यक्ष रूप से हृदय को स्वस्थ रखता है।
वीरभद्रासन: यह आसन शरीर की ताकत और लचीलापन बढ़ाता है। यह दिल तक ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और नसों में ब्लॉकेज की संभावना को कम करता है। इसके नियमित अभ्यास से छाती, कंधे और जांघों की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।
गोमुखासन: यह आसन छाती की मांसपेशियों को खींचता और फैलाता है, जिससे हृदय क्षेत्र में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। बेहतर मेटाबॉलिज्म और रक्त प्रवाह के कारण यह शरीर में वसा और कोलेस्ट्रॉल को जमने से रोकने में मददगार साबित हो सकता है।
अधोमुख श्वानासन: इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर के सभी अंगों में रक्त संचार बेहतर होता है। इसे करने से खासतौर पर सिर की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ता है, जिससे दिमाग को आराम मिलता है और मानसिक शांति महसूस होती है। जब मानसिक तनाव कम होता है, तो नींद अपने आप अच्छी आने लगती है।
भुजंगासन: गहरी सांस लेने की प्रक्रिया से पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है, जिससे तनाव और कोर्टिसोल का स्तर कम होता है और दिल को सुकून मिलता है। यह आसन छाती (चेस्ट) और फेफड़ों के हिस्से को चौड़ा करता है, जिससे हृदय और फेफड़ों तक ऑक्सीजन का प्रवाह सुधरता है।
विपरीतकरणी: यह आसन गुरुत्वाकर्षण के विपरीत काम करता है, जिससे पैरों और निचले शरीर से रक्त का प्रवाह वापस हृदय और मस्तिष्क की ओर सुचारू रूप से बढ़ता है। यह हाइपोएक्टिव थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं को प्रबंधित करने में सहायक है।
मत्स्यासन: इस आसन में पीठ को ऊपर उठाने से छाती फैलती है, जिससे दिल और फेफड़ों पर दबाव कम होता है और उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है। बेहतर ब्लड सर्कुलेशन से हृदय तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व सही मात्रा में पहुंचते हैं, जिससे दिल स्वस्थ रहता है।
नाड़ीशोधन प्राणायम: धीमी गति से सांस लेने और छोड़ने से रक्त वाहिकाओं को आराम मिलता है, जिससे उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है। यह प्राणायाम पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है, जिससे हृदय की गति सामान्य और शांत होती है।

जब राजीव गांधी को फिल्म के लिए साइन करना चाहते थे महमूद, झट से निकाल लिए थे 5 हजार रुपये

हिंदी सिनेमा में महमूद उन सितारों में शामिल थे, जिनकी मौजूदगी से फिल्म में जान आ जाती थी। उन्होंने कॉमेडी से एक अलग पहचान बनाई। उनका करियर कई दशकों तक चला और इस दौरान उन्होंने एक्टिंग के साथ-साथ फिल्म निर्माण और निर्देशन में भी हाथ आजमाया। महमूद की जिंदगी से जुड़े कई दिलचस्प किस्से हैं। ऐसा ही एक किस्सा अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी से जुड़ा है, जब महमूद ने अमिताभ के साथ आए एक युवा को देखकर उसे अपनी अगली फिल्म के लिए साइन करने के इरादे से 5 हजार रुपये तक दे दिए थे। उन्हें बाद में पता चला कि वह कोई फिल्मी कलाकार नहीं, बल्कि राजीव गांधी थे। इस किस्से का जिक्र लेखक हनीफ जावेरी की किताब ‘महमूद: ए मैन ऑफ मैनी मूड’ में मिलता है। महमूद अली का जन्म 29 सितंबर 1932 को बॉम्बे यानी आज के मुंबई में हुआ था। उनके पिता मुमताज अली अपने समय के जाने-माने डांसर और एक्टर थे। घर में फिल्मी माहौल था, लेकिन महमूद का बचपन आसान नहीं रहा। परिवार में आर्थिक परेशानी आई तो उन्हें छोटी उम्र से ही काम करना पड़ा। उन्होंने बतौर बाल कलाकार 1943 की फिल्म ‘किस्मत’ से बॉलीवुड में कदम रखा। आगे चलकर उन्होंने कई तरह के छोटे-मोटे काम भी किए और एक समय फिल्ममेकर पी.एल. संतोषी के ड्राइवर के तौर पर भी काम किया।
धीरे-धीरे महमूद को फिल्मों में मौके मिलने लगे। ‘दो बीघा जमीन’ और ‘प्यासा’ जैसी फिल्मों में उन्होंने छोटे रोल किए। 1958 में आई ‘परवरिश’ उनके करियर का बड़ा मोड़ बनी, जिसमें उन्होंने राज कपूर के भाई का किरदार निभाया। इसके बाद वह लगातार फिल्मों में नजर आने लगे। 1960 और 70 के दशक में उनकी कॉमेडी ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। ‘गुमनाम’, ‘प्यार किए जा’, ‘पड़ोसन’, ‘बॉम्बे टू गोवा’, ‘दो फूल’, ‘कुंवारा बाप’ और ‘सबसे बड़ा रुपैया’ जैसी फिल्मों में उनके काम को खूब पसंद किया गया। ‘पड़ोसन’ में मास्टर पिल्लई का किरदार आज भी उनकी सबसे यादगार भूमिकाओं में गिना जाता है।
महमूद की खास बात यह थी कि वह सिर्फ कमीडियन बनकर नहीं रहे। वह फिल्म के पोस्टर और क्रेडिट में भी दर्शकों के लिए बड़ा आकर्षण बन चुके थे। उनके भाई अनवर अली ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक समय ऐसा भी आया जब उनकी मौजूदगी से फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर उत्साहित हो जाते थे। महमूद ने कई नए कलाकारों की प्रतिभा को भी पहचाना। इस कड़ी में उन्होंने अमिताभ बच्चन को भी ‘बॉम्बे टू गोवा’ में बड़ा मौका दिया।
उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने चार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते। इनमें ‘प्यार किए जा’, ‘वारिस’ और ‘वरदान’ के लिए बेस्ट कमीडियन का अवॉर्ड शामिल था। वह फिल्म इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले कॉमेडी कलाकारों में गिने जाने लगे और चार दशकों से ज्यादा के करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों का हिस्सा रहे।
लेखक हनीफ जवेरी की किताब के मुताबिक, ‘बॉम्बे टू गोवा’ की रिलीज से कुछ समय पहले अमिताभ बच्चन दिल्ली से आए अपने एक युवा दोस्त को मुंबई लेकर आए थे। इस युवा दोस्त को देख महमूद को लगा कि यह लड़का अमिताभ से भी ज्यादा स्मार्ट और आकर्षक है और आगे चलकर इंटरनेशनल स्टार बन सकता है।
महमूद ने 5 हजार रुपए निकाले और अनवर अली को देते हुए कहा कि इसे अमिताभ के दोस्त को दे दो। उनका इरादा उस युवा को अपनी अगली फिल्म के लिए साइन करना था। अनवर को कुछ समझ नहीं आया। इसके बाद उन्होंने महमूद को बताया कि वह युवा कोई नया एक्टर नहीं, बल्कि राजीव गांधी हैं, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे हैं। यह सुनकर महमूद ने पैसे वापस ले लिए। अमिताभ और राजीव गांधी दोनों इस बात पर हंस पड़े।
बाद में जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने तो अमिताभ ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि महमूद की बात आखिर सच निकली, राजीव सच में इंटरनेशनल स्टार बने, लेकिन फिल्मी दुनिया में नहीं, राजनीति में।
महमूद का निधन 71 साल की उम्र में 23 जुलाई 2004 को अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में हुआ था।

100 करोड़ लोगों को मिटा देगा एआई : बिल गेट्स

नयी दिल्ली, एजेंसी। माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बेतहाशा बढ़ती ताकतों को लेकर एक खौफनाक तस्वीर दुनिया के सामने रखी है। हाल ही में एक खास बातचीत के दौरान उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर इस एडवांस्ड तकनीक को बिना किसी नियंत्रण के छोड़ दिया गया, तो यह भयानक स्तर पर तबाही मचा सकती है। गेट्स ने यहां तक कह दिया कि यह 1 अरब लोगों की जान ले सकती है। गेट्स का मानना है कि एआई अपने आप में शायद विनाशकारी न हो, लेकिन अगर यह गलत और आपराधिक इरादे वाले लोगों के हाथ लग जाए, तो इससे बड़ा हथियार आज तक मानव इतिहास में नहीं बना है। इस संभावित सर्वनाश से बचने के लिए उन्होंने सरकारों और कानून निर्माताओं से तुरंत दखल देने की जोरदार अपील की है। टेक अरबपति का कहना है कि सिर्फ इंडस्ट्री के भरोसे इस तकनीक को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। राजनेताओं और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को अब यह तय करना होगा कि इसके लिए कौन से सख्त नियम और निगरानी के तरीके अपनाए जाएं। उनके मुताबिक, अगर कंपनियों पर कुछ लीगल पाबंदियां लगाई जाती हैं, तो इससे उनका कामकाज धीमा नहीं होगा, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद तकनीकी माहौल तैयार हो सकेगाबिल गेट्स का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले ब्रिटेन के प्रतिष्ठित एलन ट्यूरिंग संस्थान ने भी इसी तरह की खौफनाक चेतावनी जारी की थी। संस्थान ने अपनी ताजा रिपोर्ट में इस बात की प्रबल संभावना जताई है कि अगले 5 वर्षों के अंदर ही इंसान ‘सुपरइंटेलिजेंट’ मशीनों से अपना नियंत्रण पूरी तरह खो सकता है। यह रिपोर्ट साफ करती है कि एआई हमारी सोच और समझ से कहीं ज्यादा तेज हो जाएगा, जिससे इंसानी फैसले बेमानी हो जाएंगे। इसके अलावा यह तकनीक हमारे लोकतांत्रिक ढांचे को तहस-नहस करने के साथ-साथ खतरनाक रासायनिक और जैविक हमलों का भी आसान जरिया बन सकती है।

चार साल में 111 सांसद-विधायकों ने पार्टी बदली

नयी दिल्ली, एजेंसी। देश में 2022 से 2026 के बीच चुनाव जीतने के बाद 111 सांसदों और विधायकों ने पार्टी बदली। इनमें 26 लोकसभा सांसद, 7 राज्यसभा सांसद और 78 विधायक शामिल हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इसके मुताबिक, पार्टी बदलने के सबसे ज्यादा मामले नगालैंड और पश्चिम बंगाल में सामने आए। नगालैंड में 32 विधायक एनपीएफ में शामिल हुए। इनमें से 25 विधायक पहले एनडीपीपी के टिकट पर चुने गए थे। दूसरी पार्टियों में शामिल होने वाले सांसदों-विधायकों में 29 यानी 26 फीसदी भाजपा में गए। वहीं कांग्रेस में 9 यानी 8 फीसदी सांसद-विधायक शामिल हुए। रिपोर्ट में विधानसभा चुनाव और उपचुनाव के दौरान हुए पार्टी बदलावों को शामिल किया गया है। इसमें दलबदल, पार्टी विलय और इस्तीफे के बाद उपचुनाव जीतने जैसे मामले भी शामिल हैं। पश्चिम बंगाल में पार्टी बदलने के 20 मामले लोकसभा सांसदों के हैं। ये सभी एआईटीसी के टिकट पर चुनाव जीते थे और बाद में एनसीपीआई में चले गए। इन सांसदों ने पार्टी में विलय का दावा किया है। अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को फैसला लेना है कि विलय वैध है या नहीं।तेलंगाना में 9 विधायक पार्टी बदलने वालों में शामिल हैं। ये सभी बीआरएस से चुने गए थे और कांग्रेस में गए। गोवा में 8 कांग्रेस विधायकों के भाजपा में जाने के मामले सामने आए। महाराष्ट्र में 6 लोकसभा सांसदों ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना से एकनाथ शिंदे की शिवसेना का रुख किया। जिन पार्टियों के नेताओं ने पार्टी बदली, उनमें सबसे ज्यादा एनडीपीपी के 25, तृणमूल कांग्रेस के 20 और कांग्रेस के 19 नेता शामिल हैं।

चल पड़ी देश की पहली एलएनजी ट्रेन

अहमदाबाद, एजेंसी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात में 1,542 करोड़ रुपए से अधिक की रेल परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने भारत की पहली एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) से चलने वाली ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि 2015-16 में रेलवे ने 293 करोड़ लीटर डीजल की खपत की। यह आंकड़ा 2024-25 में घटकर 108 करोड़ लीटर रह गया है और 2030 तक हम इसे शून्य तक ले आएंगे, जिससे भारतीय मुद्रा की बचत होगी। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है जिस पर अक्सर ध्यान नहीं जाता।

उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेन पर्यावरण संबंधी चिंताओं का समाधान करती है, यात्रियों की सुविधा बढ़ाती है और सुरक्षा को मजबूत करती है। यह ट्रेन पूरी तरह से एलएनजी बेस्ड होगी। हालांकि, इसका इंजन एलएनजी और डीजल दोनों पर चल सकता है। यानी कि फ्यूल की मात्रा के हिसाब से इंजन एलएनजी और डीजल के बीच स्विच कर सकता है। ट्रेन की खास बात यह है कि यह एक बार पूरी तरह से भरे टैंक में 2200 किलोमीटर तक की लंबी दूरी तय कर सकती है।

इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 1400 एचपी क्षमता वाले दो ड्राइविंग पावर कार (डीपीसी) को एलएनजी ड्यूल-फ्यूल प्रणाली में ट्रांसफॉर्म किया गया है। ट्रेन का 2,000 किलोमीटर से अधिक का सफल फील्ड ट्रायल पूरा किया जा चुका है। गुजरात के मेहसाणा और साबरमती के बीच करीब 8 महीनों तक ट्रेन का ट्रायल हुआ। आने वाले समय में 8 से 10 और ट्रेनों में एलएनजी तकनीक को अपनाने की योजना है। अहमदाबाद के डीआरएम वेद प्रकाश ने बताया कि एलएनजी डीजल से सस्ता होने के कारण ट्रेन चलाने की कुल लागत कम हो जाती है। एलएनजी ईंधन से प्रदूषण में भी भारी कमी आएगी। इससे कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और धूल के कण जैसे हानिकारक तत्व कम मात्रा में उत्पन्न होंगे। इससे रेलवे ट्रैक के आसपास की हवा भी शुद्ध रहेगी। इसके साथ ही, ईंधन की लागत में भी काफी बचत होगी।

कोलकाता-हावड़ा के निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण

कोलकाता,नि.सं. । पश्चिम बंगाल में कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। दोनों नगर निगमों के परिसीमन के मसौदे में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत से अधिक वार्ड आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। मसौदे के मुताबिक, कोलकाता नगर निगम में वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 और हावड़ा में 50 से बढ़ाकर 68 करने का प्रस्ताव है। दोनों जगह महिला आरक्षण के साथ वार्डों की नई तस्वीर चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकती है। कोलकाता नगर निगम के वार्डों की संख्या 144 से बढ़कर 209 प्रस्तावित है। कोलकाता में 209 में से 70 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे। यह कुल वार्डों का 33 प्रतिशत से अधिक है। हावड़ा नगर निगम में वार्डों की संख्या 50 से बढ़ाकर 68 करने का प्रस्ताव है। हावड़ा में 68 में से 23 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। यहां महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों का हिस्सा करीब 34 प्रतिशत होगा। परिसीमन की सूची पर आपत्ति या सुझाव 5 अक्तूबर तक संबंधित अधिकारियों को दिए जा सकते हैं।

हावड़ा नगर निगम के लिए भी वार्डों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। मौजूदा 50 वार्डों को बढ़ाकर 68 करने की योजना है। इनमें 23 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे। यह कुल प्रस्तावित वार्डों का करीब 34 प्रतिशत है। इस तरह हावड़ा में भी एक तिहाई से ज्यादा वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। दोनों नगर निगमों के लिए परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया चुनाव की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद पुराने वार्डों की तुलना में चुनावी क्षेत्र की तस्वीर बदल जाएगी। परिसीमन के मसौदे को लेकर राजनीतिक दलों या किसी अन्य पक्ष को अगर कोई आपत्ति या सुझाव है तो उसे 5 अक्तूबर तक संबंधित अधिकारियों के पास जमा कराया जा सकता है। इसका मतलब है कि फिलहाल सामने आया परिसीमन और आरक्षण प्रस्ताव अंतिम नहीं माना जाएगा। आपत्तियों और सुझावों पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम व्यवस्था तय की जाएगी। इसलिए कोलकाता और हावड़ा में कौन सा वार्ड किस श्रेणी के लिए आरक्षित होगा, इसकी अंतिम तस्वीर आगे स्पष्ट होगी।

 

 

 

ओडिशा में संवेदनशील जगहों पर फोटो-वीडियो नहीं बना सकेंगे पुलिसकर्मी

-बिना अनुमति रिकॉर्डिंग पर रोक, जारी हुई गाइडलाइन

भुवनेश्वर, एजेंसी । ओडिशा के भुवनेश्वर कमिश्नरेट पुलिस ने पुलिसकर्मियों के लिए संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों में फोटो और वीडियो बनाने को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। 19 सितंबर 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों में तैनात पुलिसकर्मी सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से फोटो नहीं खींच सकेंगे और वीडियो रिकॉर्ड नहीं कर सकेंगे।

कमिश्नरेट पुलिस के अनुसार, हाल के दिनों में कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा अपनी ड्यूटी, तैनाती और कार्यस्थल से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया और दूसरे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर साझा किए जा रहे थे। कुछ मामलों में ऐसे वीडियो के जरिए गोपनीय जानकारी और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की संवेदनशील जगहों की जानकारी अनजाने में सार्वजनिक हो सकती है। पुलिस ने माना है कि इस तरह की लापरवाही से सुरक्षा से जुड़ी परेशानी पैदा हो सकती है और संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक हो सकती है।

कमिश्नरेट पुलिस के आदेश के अनुसार महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से फोटो या वीडियो रिकॉर्ड नहीं कर सकेंगे। यह रोक किसी एक खास उद्देश्य तक सीमित नहीं है। आदेश में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि किसी भी उद्देश्य के लिए फोटो लेने या वीडियो रिकॉर्ड करने से पहले संबंधित सक्षम अधिकारी की अनुमति जरूरी होगी। आदेश में कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रतिष्ठानों का नाम दिया गया है। इनमें लोक भवन, लोक सेवा भवन, श्री लिंगराज मंदिर, ओडिशा विधानसभा, ओडिशा हाईकोर्ट, भारतीय रिजर्व बैंक की ओडिशा शाखा, आर्मरी जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान शामिल हैं। इन जगहों पर तैनात पुलिसकर्मियों को फोटो और वीडियो रिकॉर्ड करने से पहले सक्षम अधिकारी से अनुमति लेनी होगी।

कमिश्नरेट पुलिस ने सेंट्री ड्यूटी को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किया है। आदेश के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात सेंट्री को ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की सख्त मनाही है। यानी सेंट्री ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। आदेश में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के इंचार्ज को भी जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि पुलिसकर्मियों द्वारा इन निर्देशों का पालन किया जाए और फोटो-वीडियो बनाने जैसी गतिविधियों को रोका जाए।

 

पुरुषों के लिए मॉडर्न फॉर्मल शर्ट खरीदते समय रखें ध्यान

ऑफिस की मीटिंग हो या कोई खास मौका पुरुषों का लुक तब तक पूरा नहीं होता जब तक वे एक परफेक्ट फॉर्मल शर्ट नहीं पहनते। कई बार पुरुष काफी महंगी शर्ट तो खरीद लेते हैं लेकिन सही जानकारी न होने की वजह से उन्हें वह परफेक्ट लुक नहीं मिल पाता। अपनी पर्सनैलिटी को दमदार और अट्रैक्टिव बनाने के लिए आपको शर्ट पहनने के कुछ खास और आधुनिक तरीकों के बारे में जरूर जानना चाहिए।
​फिटिंग पर दें सबसे ज्यादा ध्यान : ​किसी भी शर्ट का लुक उसकी फिटिंग से तय होता है। आपकी शर्ट न तो शरीर से बहुत ज्यादा चिपकी होनी चाहिए और न ही बहुत ढीली ढाली होनी चाहिए। आजकल स्लिम फिट और टेलर्ड फिट शर्ट काफी ट्रेंड में हैं जो आपके शरीर को एक अच्छा शेप देती हैं।​

रंगों का सही चुनाव : ​फॉर्मल वियर में रंगों का खेल बहुत बड़ा होता है। आपके पास सफेद और लाइट ब्लू जैसे क्लासिक रंग तो होने ही चाहिए। इसके अलावा आजकल ऑलिव ग्रीन और हल्के लैवेंडर जैसे पेस्टल शेड्स भी काफी पसंद किए जा रहे हैं। ये रंग प्रोफेशनल दिखने के साथ साथ आपको भीड़ से अलग दिखाते हैं।​

कॉलर स्टाइल और टाई का तालमेल :​ शर्ट चुनते समय उसके कॉलर पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। आजकल स्प्रेड कॉलर और कटअवे कॉलर काफी फैशन में हैं जो बिना टाई के भी बहुत अच्छे लगते हैं। अगर आप टाई पहन रहे हैं तो ध्यान रखें कि टाई की चौड़ाई आपकी शर्ट के कॉलर के हिसाब से ही होनी चाहिए।​

शर्ट को सही से इन करना :​ फॉर्मल शर्ट को पैंट के अंदर दबाते समय इस बात का ध्यान रखें कि कमर के पास कपड़ा ज्यादा बाहर न निकला हो। शर्ट को बिल्कुल सीधा और साफ तरीके से इन करना चाहिए ताकि सामने से कोई सिलवट दिखाई न दे। इससे आपका लुक बहुत ही साफ और प्रोफेशनल नजर आता है।​

मैचिंग ट्राउजर्स का कमाल : शर्ट के साथ पहनी गई पैंट आपके पूरे लुक को बदल सकती है। अगर आपकी शर्ट हल्के रंग की है तो उसके साथ डार्क चारकोल या ब्लैक ट्राउजर्स पहनें। आजकल एंकल लेंथ फॉर्मल ट्राउजर्स भी काफी चलन में हैं जो युवाओं को खूब पसंद आते हैं।

​सस्टेनेबल और रिंकल फ्री फैब्रिक : ​आजकल पुरुष ऐसे कपड़ों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जिनमें बार-बार प्रेस करने की जरूरत न पड़े। इसके लिए आप रिंकल फ्री कॉटन या बंबू फैब्रिक चुन सकते हैं। बंबू फैब्रिक पर्यावरण के लिए भी अच्छा है और यह पूरी तरह से पसीना सोखने में मददगार होता है।​

जैकेट और ब्लेजर से करें लेयरिंग : अपने लुक को और भी ज्यादा रॉयल बनाने के लिए आप शर्ट के ऊपर एक अच्छा ब्लेजर या नेहरू जैकेट पहन सकते हैं। अगर मौसम थोड़ा ठंडा है तो फॉर्मल शर्ट के ऊपर वी नेक स्वेटर पहनना भी एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।​सही एक्सेसरीज और फुटवियर:​कम चीजें पहनकर भी आप शानदार दिख सकते हैं। फॉर्मल लुक के साथ हमेशा एक सिंपल और क्लासिक घड़ी पहनें। आपकी बेल्ट और जूतों का रंग हमेशा एक जैसा होना चाहिए। जैसे अगर जूता काले रंग का है तो बेल्ट भी काली ही होनी चाहिए।