Monday, September 21, 2026
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सादे कागज पर पिता के शव के अंगूठा लगवाता रहा बेटा

-सम्पत्ति के लालच में खोला कफन

लखनऊ । लखनऊ में रहीमाबाद के खड़ौहा गांव में इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। पिता की मौत के बाद जहां घर में मातम पसरा था, वहीं उनका एकलौता बेटा जमीन के लालच में मृत शरीर के अंगूठे का निशान सादे कागज पर लगवाता रहा। इस दौरान वह अपने चचेरे भाई की मदद लेता रहा। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने चोरी से इसका वीडियो बना लिया। वीडियो सामने आने के बाद मामले की चर्चा क्षेत्र में है। जानकारी के मुताबिक, खड़ौहा गांव के रहने वाले महेंद्र ने अपनी पत्नी लक्ष्मी के साथ मिलकर अपने बुजुर्ग पिता छत्रपाल और मां शिवदेवी से प्रतिदिन अभद्र व्यवहार किया करते थे। साथ ही उक्त दोनों लोगों ने मिलकर  सन 2023 में उनको अपने ही पैतृक घर से निकाल दिया था। जिस कारण छत्रपाल अपनी पत्नी के साथ इधर उधर अपने रिश्तेदारों के पास रहे। 2024 में दोनों बुजुर्ग अपनी विवाहित बड़ी बेटी बुद्धेश्वर लखनऊ निवासी सुमन के घर चले गए थे। साथ ही दो अन्य विवाहित बेटियों के घर पर भी रुकते करते थे। बेटियों की सेवा खुश होकर उन्हानें अपने लगभग साढ़े छः बीघा जमीन में से एक–एक बीघा तीनों बेटियों को जमीन दे दी थी और बेटे महेंद्र और बहू से नाराज होकर दैनिक समाचार के माध्यम से सार्वजनिक सूचना के जरिए उक्त बेटे और बहू बेदखल भी कर दिया था। बेटी सुमन ने बताया कि पिता क्षत्रपाल (75) की बीते 7 जुलाई को तबीयत बिगड़ी थी। तो भाई महेंद्र को भी सूचना मिली थी। भाई और भाभी अपने परिजनों के साथ लखनऊ पहुंचकर उससे झगड़ा कर  पिता को लेकर इलाज कराने की बात कहकर लेकर चले गए थे। उसके तीसरे दिन 9 जुलाई को पिता की मौत हो गई थी। अंतिम संस्कार में पहुंची बहनों से भी गाली गलौज की थी। सुमन के पति रमेश ने बताया कि इस कृत्य से वहां मौजूद सभी लोग दंग थे।

 

 

 

 

 

 

 

“एक दूरदर्शी का सम्मान, एक विरासत का जश्न” – डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

कोलकाता । बीईएससी के शिक्षा विभाग ने 3 अगस्त 2026 को “एक दूरदर्शी का सम्मान और एक विरासत का जश्न – डॉ. श्यामा प्रसाद” नाम का एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम छात्रों को अनुभव से जुड़ी और उससे जुड़ी सीख देने के लिए बनाया गया था, जो सीवीएसी (वीओएलएस 2) कोर्स का एक ज़रूरी हिस्सा है। उन्होंने बताया कि कैसे इस कार्यक्रम को अनुभव से सीखने के एक मंच के तौर पर देखा गया था, जो भूमिका बदलकर लोकतांत्रिक भावना को अपनाता है। उन्होंने बताया कि ऐसे अनुभव उन्हें भविष्य में निभाई जाने वाली भूमिकाओं के लिए तैयार करने में मददगार थे ताकि वे अपने मकसद की गहरी समझ विकसित कर सकें, जिससे इस अवसर की एक गंभीर और शानदार शुरुआत हुई। भाषण देने वाले समूह ने डॉ. मुखर्जी के जीवन, उनके आदर्शों और देश बनाने में उनके योगदान के बारे में सोच-समझकर अपनी राय दी।

शानदार संगीत प्रदर्शनों से माहौल और भी बेहतर हो गया, जिससे कार्यक्रम में गहराई और ऊर्जा आ गई। “भाषाई विविधता को संतुलित करना” पर एक सार्थक चर्चा हुई। और नेशनल आइडेंटिटी: रीविज़िटिंग डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी” ने उनके विज़न और आज के समय में इसकी अहमियत पर सोचने को कहा। स्टूडेंट्स ने एक दिलचस्प डांस परफॉर्मेंस भी दी, जिसमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के दिल को छूने वाले डायलॉग थे, जिससे इवेंट में चार्म और गहराई दोनों आ गई।

प्रोग्राम की खास बात ड्रामा वाली प्रेजेंटेशन थी, जिसे दर्शकों ने उसकी क्रिएटिविटी और असर के लिए खूब सराहा। इवेंट का अंत ज़बरदस्त तरीके से हुआ, क्योंकि पूरा ऑडिटोरियम नेशनल सॉन्ग से गूंज उठा, जिससे गर्व, सम्मान और प्रेरणा की भावना पैदा हुई।

भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज में रैगिंग विरोधी जागरूकता कार्यक्रम

कोलकाता । “रैगिंग को ना कहें। सम्मान को हाँ कहें।”भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज का छात्र मामलों का विभाग, सभी छात्रों को एक व्यावहारिक एंटी-रैगिंग जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका उद्देश्य एक सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी परिसर वातावरण को बढ़ावा देना है। प्रमुख वक्ताओं में सलोनी प्रिया – निदेशक, उम्मीद और फैसल फसीह – सहायक प्रोफेसर, पश्चिम बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साइंसेज (एनयूजेएस) में रहे। यह कार्यक्रम दिनांक: 12 अगस्तसमय: प्रातः 11:00 बजे से कॉन्सेप्ट हॉल में हुआ।
सलोनी प्रिया ने कहा कि रैगिंग अभी भी कई लोगों के लिए एक आघात है, कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उत्साह अक्सर रैगिंग के डर से धूमिल हो जाता है।कई विद्यार्थियों के लिए इसकी शुरुआत केवल मनोरंजन या मज़ाक के रूप में होती है और फिर वे पीड़ित असहाय, फँसे हुए और अपमानित महसूस करते हैं ।
12-18 अगस्त को राष्ट्रीय रैगिंग विरोधी सप्ताह में कई कॉलेजों ने सेमिनार आयोजित किए थे और मुझे कोलकाता के भवानीपुर कॉलेज के छात्रों को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया था।
वरिष्ठों द्वारा पूछे गए एक हानिरहित परिचय को जब वरिष्ठतम लोग अपने अहंकार, पावर के साथ घुला मिला कर गलत तरीके से पेश करते हैं तो वह व्यवहार बदसूरत और क्रूर हो जाता है। मौज-मस्ती, फ्रीडॉन फेस्ट और कॉलेज लाइफ से जुड़ी दोस्ती में डर, निराशा और झगड़ों में बदल जाती है।
कभी-कभी सन्नाटा छा जाता है…आज सभी से अपील है कि उन्हें बोलना चाहिए, चुप न रहें ।रैगिंग को रोकने और अपने परिसर को सुरक्षित बनाने के लिए —पीआरएस मॉडल का पालन करें जो तीन तरह से है -रोकें ,रिपोर्ट करें और समर्थन।
सभी कॉलेजों में अधिकारियों से नियम और प्रतिक्रिया प्रत्येक छात्र को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। संदेश यह है कि आप अकेले नहीं हैं… बोलें और मदद मांगें क्योंकि किसी को पीड़ित होने की जरूरत नहीं है।
वक्तव्य में दर्शकों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला; केवल दर्शक नहीं बल्कि सक्रिय प्रदर्शनकारी कक्षाओं, गलियारों और साइबर स्पेस में सुरक्षा घेरा बनाना चाहिए।इस अवसर पर प्रातः कालीन कॉमर्स विभाग की वाइस प्रिंसिपल प्रोफेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी ने बताया कि एंटी रैगिंग विषय पर कई प्रतियोगिताएं जैसे पोस्टर, फिल्म और नारे पर विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए।एंटी रैगिंग विषय पर विद्यार्थियों ने सेमिनार भी रखा।
जब एक युवा व्यक्ति परिचित लोगों और दिनचर्या से दूर एक नए संस्थान में प्रवेश कर रहा है, तो सुरक्षित और स्वीकार्य महसूस करने की आवश्यकता अधिक है और कॉलेज इसे प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं; लेकिन उसके लिए सहकर्मी समूह का समर्थन महत्वपूर्ण और आवश्यक है। जानकारी देते हुए डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और शिक्षा मंत्रालय के सौजन्य से भवानीपुर कालेज में एंटी रैगिंग जागरूकता कार्यक्रम द्वारा भयमुक्त शिक्षा के वातावरण का संदेश दिया।

भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज लेखकों से रूबरू हुए विद्यार्थी

– अलका सरावगी और जॉन वाटर के साथ बातचीत
कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज के रीडर्स क्लब की ओर से साहित्यकार ,लेखक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हिंदी लेखिकाअलका सरावगी के उपन्यास ‘कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिए ‘के अंग्रेजी अनुवाद पर महत्वपूर्ण चर्चा का आयोजन किया गया । इस उपन्यास का अंग्रेज़ी अनुवाद यूएसए और सिंगापुर निवासी अनुवादक संपादक और लेखक जॉन वाटर ने रजिस्टर मी एस कुल भूषण के रूप में किया । भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज के रीडर्स क्लब द्वारा आयोजित कार्यक्रम लेखक से रूबरू में लेखिका के साथ अपने अनुभवों को साझा किया।
इस अवसर पर प्रो चंपा श्रीनिवासन ने एंकरिंग और स्वागत करते हुए इसे महत्वपूर्ण विषय बताया जिसमें बंगलादेश के विभाजन को लेकर उपन्यास लिखा गया है।
उपन्यासकार अलका सरावगी और अनुवादक जॉन वाटर के साथ उपन्यास पर मोडरेडर के रूप में डॉ वसुंधरा मिश्र और डॉक्टर देविना गुप्ता ने विभिन्न प्रश्नों के द्वारा उपन्यास की विषयवस्तु और कथा पर चर्चा की।
मोडरेटर डॉ वसुंधरा मिश्र ने हिंदी और डॉक्टर देविना गुप्ता ने अंग्रेजी में प्रश्नोत्तर किए।
अलका सरावगी ने कहा यह एक ऐसी कथा है जिसे लिखने के लिए मेरा मन बहुत छटपटा रहा था । लाखों लोगों का पलायन,विभाजन,रिफ्यूजी कैंप, मुक्ति संग्राम और विस्थापन का जीवन 1947 से 1971तक बंगाल में रहा । उपन्यास का नायक कुलभूषण जैन घर,देश और अपने परिवार से टूट कर अपनी पहचान को अपने जीवन के छह दशकों के बीतने के बाद भी खोजता रहा।उसका नाम गोपाल चंद्र दास ही उसकी पहचान बन गई थी। मारवाड़ी धनी परिवार का लड़का अपनी पहचान के लिए छटपटाता है।जड़ों से उखड़े हुए,स्त्रियों, बच्चों और युवाओं पर अत्याचार की पराकाष्ठा और उसी में मनुष्य की आशा और उम्मीद की किरणें भी जगाता है कुलभूषण।
हिंदी में बंगाल के विभाजन को लेकर संभवतः यह पहला उपन्यास है।
जॉन वाटर ने कहा अनुवादक के तौर पर मैंने उपन्यास की बारीकियों को अंग्रेजी में अनुवाद करने का भरसक प्रयास किया है, संभवत पाठकों को मेरा अनुवाद अच्छा लगेगा। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए कई प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर दिए।
कॉलेज के डायरेक्टर और डीन प्रोफेसर दिलीप शाह और प्रातः कालीन कॉमर्स विभाग की वाइस प्रिंसिपल प्रोफेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी के आयोजन और संयोजन में रीडर्स क्लब का यह कार्यक्रम हमें पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करता है। प्रो दिलीप शाह ने अपने वक्तव्य में कहा कि उपन्यास सभी को पढ़ना चाहिए क्योंकि यह मानवी संवेदनाओं के साथ उनकी भावनाओं को दर्शाता है। विभाजन के दौरान होने वाले कष्ट ,दर्द और बेसहारा असहनीय जीवन को किस तरह एक अनजान देश में पुनर्वास किया यह उपन्यास उसी को दर्शाता है।

प्रातः कालीन सत्र कॉमर्स विभाग की वाइस प्रिंसिपल प्रोफेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी और प्रो दिलीप शाह ने कोलेज मोमेंट प्रदान किया। दोनों अतिथियों का स्वागत किया और हार्दिक शुभकामनाएं दी।
कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तरी सेशन में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भी प्रश्न किया जिनका उत्तर दोनों लेखकों ने दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कलेक्टिव के छात्र द्वारा गिटार पर जिंदगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं गीत गाया जो बहुत ही पसंद किया गया।इस अवसर पर कला संकाय की प्रिंसिपल डॉ देवजानी गांगुली ने भी अपना वक्तव्य रखा और लेखकों को शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम की व्यवस्था में तेरह विद्यार्थी वोलेंटियर्स ने भाग लिया। धन्यवाद दिया प्रो चंपा श्रीनिवासन ने। कार्यक्रम की जानकारी दी डा वसुंधरा मिश्र ने।

सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में कन्वर्जनेंस 2026 का आयोजन

कोलकाता ।  सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में तीसरा कन्वर्जनेंस 2026 आयोजित किया गया । गत 31 जुलाई व 1 अगस्त को स्कूल परिसर तथा विद्या मंदिर ऑडोटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में 14 स्कूलों ने 27 प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया । मेजबान स्कूल ने फेस्ट में आयोजित प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया प्रतियोगी के रूप में नहीं । महादेवी बिड़ला वर्ल्ड अकादमी समग्र रूप से विजेता बना जबकि बिड़ला हाई स्कूल ने रनर अप ट्रॉफी जीती । 31 जुलाई को फेस्ट का उद्घाटन सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की प्रिंसिपल के. दे और सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की को करिकुलर कोऑर्डिनेटर आर. चटर्जी ने किया । पहला कार्यक्रम टग ऑफ वॉर था। दूसरे दिन 1 अगस्त को म्यूजिकल बैंड टी.आर.ए.पी में शेन हायरापिट ने समां बांध दिया । इस अवसर पर रंगमंचकर्मी चैती घोषाल भी उपस्थित थीं ।

झारखंड का आंदोलन बहुत अलग है…और यहां के युवा भी

सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया

वह कहती है पीसीएस  का मेरा सपना टूट गया….ये दुख कहीं बहुत गहरा है….भीतर तक….चलो खुद के लिए कुछ न कर पाऊं पर इन बच्चों के लिए आवाज जरूर बन जाऊंगी मैं….हेमंत सोरेन ने यदि सुना नहीं तो इसी धरती पर हिसाब करके जाना पड़ेगा । वह कहती है कि सामान्य वर्ग से हूं मैं….हमारे यहां ज्यादा से ज्यादा 24 25 साल में शादी हो जाती है….मेरे पापा ने दो साल एकस्ट्रा दिया….लेकिन इन लूट मचाने वालों ने सब छीन लिया….घर नहीं जाती मैं….मेरी शादी भी नहीं हो सकती अब तो …………मैं रो भी नहीं सकती….यहां कोई भी स्टूडेंट जंतर मंतर जैसे फैंसी नहीं हैं….यहां सब गरीब हैं….यहां सब मजदूर के बच्चे हैं….यहां खाने के लिए भी एक आध सूखी रोटी मिल जाए वही बहुत है….।  यह कहानी इस छात्र आन्दोलन में संघर्ष कर रहे हर दूसरे छात्र की है । झारखंड में चल रहे छात्र आन्दोलन की यह झलक है । रांची की सड़कों पर जेपीएससी और जेएसएससीपरीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ हजारों छात्र आंदोलन कर रहे हैं।

2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी किया था। इसमें 2,204 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के लिए चुने गए। इसके बाद 18 से 20 जुलाई के बीच मेंस परीक्षा होनी थी। रिजल्ट आने के बाद कई उम्मीदवारों ने गड़बड़ी के आरोप लगाए। उनका कहना था कि कट-ऑफ जारी नहीं की गई। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक उम्मीदवार की कथित ओएमआर शीट वायरल हुई। दावा किया गया कि उसने सिर्फ 48 सवाल हल किए, फिर भी वह मेंस के लिए चुन लिया गया। वहीं, रिजल्ट पर आयोग के अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होने को लेकर भी सवाल उठे। विवाद बढ़ने के बाद जेपीएससी ने मेंस परीक्षा रद्द कर दी।

कुछ समय पहले ही नीट परीक्षा में धांधली को लेकर एक आन्दोलन हुआ जहां भाषा और मर्यादा की तमाम दीवारें तोड़ दी गयीं । इस आन्दोलन को छात्रों के साथ विपक्ष के नेताओं का व्यापक समर्थन मिला। राहुल गाँधी ने पीएम आवास का घेराव किया तो दूसरी तरफ डिंपल यादव से लेकर अरुंधती राय तक सबने हाजिरी लगाई । इस आन्दोलन में अधिकतर संभ्रांत घरों के युवा मोदी विरोधी और सेना विरोधी मांगों को लेकर रील बनाते नजर आए क्योंकि इनके पास सुविधाओं की कमी नहीं थी इसलिए बेपरवाह भी थे । मांग से अधिक मनमानी दिख रही थी और हाव-भाव ऐसे जैसे इसकी आयोजक कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके, सौरभ दास, विजय दहिया, आशुतोष रंका और रत्ना सिंह ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र के बाद जमकर जश्न मनाया । अगर आपको लगता है कि छात्र आन्दोलन ऐसे ही होते हैं तो रुकिए…….हम आपको असली छात्रों तक लिए चलते हैं…झारखंड चलते हैं। यहां सोनम वांग्चुक नहीं, एक युवा देवेंद्र नाथ महतो अनशन पर बैठा है जिसका निर्जला अनशन खुद वांग्चुक ने फोन कर तुड़वाया ।

हेमंत सोरेन सरकार दिखती सीधी है मगर अंदरूनी तौर पर छात्रों के आन्दोलन को तुड़वाने और बच्चों में फूट डलवाने की कोशिश जारी है। यहाँ फाइव-स्टार टेंट नहीं, टूटी-फूटी तिरपाल है। यहाँ पेशेवर आंदोलनजीवी नहीं, यहां असली छात्र हैं। कोडरमा के एक छात्र ने कहा कि हम कभी भी अपने प्रधानमंत्री के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। हम छात्र हैं और एक छात्र कभी भी असभ्य नहीं हो सकता। एक अच्छा छात्र प्रधानमंत्री के प्रति वैसा बदतमीजी भरा व्यवहार नहीं करेगा, यह तो उपद्रवी तत्वों का काम था। वहीं, एक और छात्र ने कहा, ‘हम झारखंड से हैं और हमारे लोगों के बीच छीना-झपटी या चोरी जैसी घटनाएं नहीं होतीं। हम कभी भी असभ्य नहीं रहे हैं। दिल्ली में जो विरोध-प्रदर्शन हुआ, वह बिल्कुल भी ठीक नहीं था। वहां का कल्चर अलग है। दिल्ली का प्रोटेस्ट असभ्य था, हम यहां सभ्य तरीके से प्रोटेस्ट कर रहे हैं और करेंगे।

दोनों ही आन्दोलनों में अंतर है…एक में उद्दंडता थी तो यहाँ विद्रोह के बीच भी अनुशासन है। गालियां नहीं, व्यंग्य है, व्यवस्था पर तंज है। यहां जुनैद की बिरयानी नहीं मगर सोशल मीडिया पर आन्दोलन की तस्वीरें देखकर देश भर के लोगों का प्रेम इन बच्चों तक पहुंच रहा है । लोग अपना प्यार चिप्स, बिस्कुट, खाना पहुंचाकर दिखा रहे हैं । प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि कई प्रतियोगी परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इनमें प्रश्नपत्र लीक होने, ओएमआर शीट में कथित हेरफेर, मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और भर्ती प्रक्रिया में देरी जैसे मुद्दे शामिल हैं।छात्रों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होता है और मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। हालत यह है कि रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कई छात्र डटे हुए हैं। छात्र यहीं रह रहे हैं। अपना खाना खुद बना रहे हैं और यहीं खा रहे हैं। इस धरने के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी है, वे टेंट के अंदर ही किताबें खोलकर पढ़ाई भी कर रहे हैं। फिलहाल बारिश के चलते उनकी परेशानी और बढ़ गई है। ऐसे में छात्रों ने तिरपाल लगाकर अपने लिए टेंट बना लिया है। छात्रों ने यह तय कर लिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं कर देती और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की गारंटी नहीं दे देती, तब तक वे इस धरने से नहीं उठेंगे और उनका यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन पर बैठे छात्रों द्वारा 6 अगस्त को झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विधानसभा घेरा का कार्यक्रम है। विधानसभा घेराव के दौरान झारखंड के कई जिलों से हजारों की संख्या में छात्रों के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में किसी भी आराजक स्थिति से निपटने के लिए पुलिस विभाग को अलर्ट किया गया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी ) ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य (लिखित) प्रतियोगिता परीक्षा-2025 को स्थगित कर दिया है। जेपीएससी के अध्यक्ष रहे एल. खियांगते ने इस्तीफा दे दिया है और जेपीएससी परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों मामले की जांच सीआईडी कर रही है।  जेपीएससी कार्यालय के साथ-साथ खियांगते के आवास पर भी सीआईडी और रांची पुलिस की टीम ने छापेमारी की है। अब तक लगभग एक दर्जन के करीब लोगों को सीआईडी ने गिरफ्तार किया है।

 

 

 

 

 

 

मासव्यापी श्रावण सेवा में बच्चों में दूध वितरण

भारत रिलीफ सोसाइटी का आयोजन

कोलकाता । सुप्रसिद्ध मानव सेवी संस्था भारत रिलीफ सोसाइटी का मास व्यापी श्रावण सेवा रविवार से प्रारंभ हुआ। प. बंगाल के उद्योग मंत्री तापस राय के साथ विधायक विजय ओझा, पूर्व उपमेयर मीना पुरोहित, पूर्व पार्षद संतोष पाठक, युवा उद्योगपति नवीन सोमानी, सोसाइटी के अध्यक्ष संदीप शाह ने सोसाइटी प्रांगण में दो सौ बच्चों में दूध, बिस्कुट, स्टेशनरी किट आदि का वितरण कार्य का उद्घाटन किया। सोसाइटी के प्रधान सचिव, विश्वम्भर नेवर, कोषाध्यक्ष विनीत पेड़ीवाल, सं. सचिव संदीप सोमानी, डा. महेश माहेश्वरी, गुलाब दुधानी, भागचन्द मूंधड़ा, सनी पेड़ीवाल, जयगोविन्द इन्दौरिया, संजीव शर्मा, श्याम राठी, आशाराम झंवर, रमेश लाखोटिया, मदनलाल बिन्नानी, अंजू सेठिया, रूमा दास, चंदा गोलछा ने अतिथियों के स्वागत के साथ उद्घाटन समारोह को सफल एवं सुव्यवस्थित बनाने में सहयोग दिया।
उल्लेखनीय है कि विगत कुछ वर्षों से सोसाइटी बच्चों में दूध आदि वितरण का अनुकरणीय कार्य कर रही है। इस बार भी श्रावण मास में पन्द्रह हजार बच्चों को यह सेवा दी जायेगी। दूसरी तरफ बैद्यनाथधाम देवघर में कांवडिय़ों की सेवा सुश्रुषा हेतु ईनारावरण में एक विशाल शिविर शुरू किया गया है जहां चिकित्सा, भोजन आदि की व्यवस्था है। सोसाइटी की ओर से नाथूराम गुप्ता के नेृतत्व में कई कार्यकर्ता शिविर की व्यवस्था में एक माह सेवारत रहेंगे।

बंगवासी मॉर्निंग कॉलेज के हिंदी विभाग में प्रेमचंद  जयंती पर संगोष्ठी

कोलकाता। बंगवासी मॉर्निंग कॉलेज के हिंदी विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में “प्रेमचंद का कथा साहित्य : सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्य और समकालीन भारत” विषय पर एक सार्थक एवं विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी साहित्य के महान कथाकार प्रेमचंद के साहित्य में निहित सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदना, सामाजिक न्याय तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की समकालीन प्रासंगिकता पर गंभीर विमर्श हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज की छात्रा द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। तत्पश्चात महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार, विशिष्ट वक्ता डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी तथा विभाग के अन्य प्राध्यापकों द्वारा मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्पार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रीपर्णा तरफदार ने किया। स्वागत वक्तव्य विभाग के प्राध्यापक माननीय पीयूष कांत राय ने दिया । इसके पश्चात विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार ने विषय-प्रवेश करते हुए साहित्य को संवेदना के समन्वय के रूप में व्याख्यायित किया। संगोष्ठी की विशिष्ट एवं मुख्य वक्ता डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी ने प्रेमचंद के कथा-साहित्य के विविध आयामों पर अत्यंत प्रभावशाली एवं विद्वतापूर्ण वक्तव्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं उपस्थित प्राध्यापकों की सहभागिता ने संगोष्ठी को और अधिक जीवंत बनाया। कार्यक्रम के अंत में हिंदी विभाग की प्राध्यापिका प्रियंका सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

सीयू, हिन्दी विभाग में व्यास पूजन व राष्ट्रीय संगोष्ठी

साहित्य, समाज और शिक्षा: वर्तमान परिदृश्य’ पर चर्चा

कोलकाता । भारतीय शिक्षण मंडल एवं हिंदी विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में व्यास पूजन एवं एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन दिनांक गत 3 अगस्त को कलकत्ता विश्वविद्यालय के एतिहासिक ‘सीनेट हॉल’ में किया गया। इस संगोष्ठी में विभिन्न विद्वानों ने गुरु पूर्णिमा एवं भारतीय परंपरा में गुरु के महत्व पर विचार व्यक्त किया | कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आशुतोष घोष की अध्यक्षता में सभी आगत अतिथियों ने भारत माता, देवी सरस्वती और महर्षि वेद व्यास की तस्वीर पर पुष्पार्पण कर अपनी श्रद्धा निवेदित की | मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. दीपांकर कर्मकार (संस्कृत विभाग, सुरेन्द्रनाथ कॉलेज फॉर वीमेन), विशिष्ट वक्ता माननीय डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी (अवकाश प्राप्त, सुरेन्द्रनाथ सांध्य कॉलेज), मुख्य अतिथि प्रो. अरिंदम भट्टाचार्य (विभागाध्यक्ष, जंतु विज्ञान, कलकत्ता विश्वविद्यालय), के साथ सीयू की हिन्दी विभागाध्यक्ष व कार्यक्रम संयोजक प्रो. राजश्री शुक्ला, प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय एवं डॉ. रामप्रवेश रजक सहित विविध महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों  से आगत भारतीय शिक्षण मंडल के अध्यापक एवं प्राध्यापक, कर्मचारी, हिंदी विभाग के शोधार्थियों, विद्यार्थियों की उपस्थिति से कार्यक्रम को पूर्ण सफलता प्राप्त हुई ।  कार्यक्रम का आरम्भ पारंपरिक रीति के अनुरूप दीप प्रज्वलन, व्यास पूजन के साथ हुआ | कार्यक्रम के समापन में आशुतोष कॉलेज के प्रो. प्रीतम घोष द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया | भारतीय शिक्षण मंडल, दक्षिण बंग प्रांत के विस्तारक श्लोक पांडे द्वारा कल्याण मंत्र का पाठ किया गया तथा प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ | विभागाध्यक्ष व कार्यक्रम संयोजक प्रोफेसर राजश्री शुक्ला ने सभी वक्ताओं एवं श्रोताओं का स्वागत करते हुए बीज वक्तव्य दिया । कुलपति ने व्यास पूजन की परम्परा को चलते रहने की कामना व्यक्त की | मुख्य वक्ता डॉ. दीपांकर कर्मकार द्वारा विश्वविद्यालयी अनुभवों एवं गुरु शिष्य परंपरा पर प्रकाश डाला गया | उन्होंने विस्तार से व्यास पूजन और गुरु तत्व को समझाया | प्रो. अरिंदम भट्टाचार्य ने कहा कि भारत की एकता हिंदी के माध्यम से ही संपन्न हो सकती है | संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता प्रो. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु- शिष्य परंपरा की उपादेयता पर प्रकाश डाला समाज में शिक्षा की भूमिका को अभिव्यक्ति प्रदान की | हिंदी विभाग की प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय ने संस्कृत भाषा के महत्व का उल्लेख करते हुए संस्कृत को पाठ्यक्रम में शामिल किये जाने का प्रस्ताव दिया | सम्पूर्ण कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ. रामप्रवेश रजक ने किया |

भारत दूसरा सबसे तेजी से बढ़ने वाला सोलर एनर्जी मार्केट बना

नयी दिल्ली, एजेंसी। भारत में स्थापित सोलर एनर्जी क्षमता 2014 में सिर्फ 3 गीगावाट से बढ़कर 30 जून, 2026 तक 162.15 गीगावाट के स्तर पर पहुंच गई है, जो देश में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। यह जानकारी सरकार की ओर से रविवार को दी गई। सरकारी फैक्टशीट में कहा गया है कि देश ने 2025 में 37 गीगावाट सोलर क्षमता जोड़ी, जिससे सालाना क्षमता बढ़ोतरी के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए, यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बन गया। सोलर सेक्टर में सबसे अहम बदलावों में से एक पिछले दशक में बिजली की दरों में आई कमी है। यह ‘ई-रिवर्स ऑक्शन’ सिस्टम के जरिए हुई बोली की वजह से हुआ, जिसमें कंपनियां सबसे कम दर पर बिजली आपूर्ति करने के लिए मुकाबला करती हैं। जैसे-जैसे अधिक डेवलपर्स ने हिस्सा लिया, दरें 2010 में लगभग 18 रुपए प्रति यूनिट से घटकर 2.44 रुपए प्रति यूनिट के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गईं। दरों में कमी ने सोलर पावर को काफी सस्ता बना दिया है। इसके चलते, भारत दुनिया के सबसे कम लागत वाले सोलर पावर मार्केट में से एक बनकर उभरा है। 2025 में, यूटिलिटी-स्केल सोलर पीवी से बिजली की ‘लेवेलाइज्ड कॉस्ट ऑफ इलेक्ट्रिसिटी’ (एलसीओई) 35 डॉलर प्रति मेगावाट थी, जो 44 डॉलर प्रति मेगावाट के ग्लोबल औसत से काफी कम है।
31 जुलाई, 2026 को ‘प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना’ (पीएम-एसएसवाई) को मंजूरी मिलने से भारत के सोलर सेक्टर को बड़ा बढ़ावा मिला है। इस योजना का मकसद ‘एनर्जी स्टोरेज सिस्टम’ (ईएसएस) के साथ 5,000 मेगावाट के ‘फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक’ (एफएसपीवी) प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट करना है। कम से कम दो घंटे (10,000 मेगावाट) की स्टोरेज क्षमता वाला ईएसएस राज्यों को पीक डिमांड को मैनेज करने में और मदद करेगा। मौजूदा जलाशयों और इंडस्ट्रियल तालाबों का इस्तेमाल करके, यह योजना जमीन जैसे सीमित संसाधनों पर दबाव कम करेगी। यह इंटीग्रेटेड एनर्जी स्टोरेज के जरिए ग्रिड की विश्वसनीयता को भी बेहतर बनाएगी। 5,070 करोड़ रुपए के बजट के साथ, यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू की जाएगी। भारत में बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स की स्थापित क्षमता 118.79 गीगावाट है। कुछ बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स में भादला सोलर पार्क (राजस्थान), पावगाडा सोलर पार्क (कर्नाटक) और रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क (मध्य प्रदेश) शामिल हैं। इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर सिस्टम से 27.88 गीगावाट की क्षमता मिलती है। बाकी क्षमता हाइब्रिड सोलर प्रोजेक्ट्स और ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम से आती है। हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स में सोलर पावर के साथ बैटरी स्टोरेज या दूसरे पावर सोर्स का इस्तेमाल होता है, जबकि ऑफ-ग्रिड सिस्टम उन इलाकों में बिजली पहुंचाते हैं जो ग्रिड से नहीं जुड़े हैं।