Friday, November 6, 2026
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विद्यासागर विवि में मनाई गयी विद्यासागर जयंती

मिदनापुर । महान शिक्षाविद, समाज सुधारक और मानवतावादी विचारक पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की 207वीं जयंती विद्यासागर विश्वविद्यालय में गरिमा और सम्मान के साथ मनाई गई । इस अवसर पर ‘विद्यासागर रचना समग्र’ के चौथे खंड और ईश्वरचंद्र विद्यासागर द्वारा रचित ‘शकुंतला उपाख्यान ‘ का विद्यासागर विश्वविद्यालय की ओर से चार अलग-अलग भाषाओं ( हिंदी, अंग्रेजी, संताली एवं बांग्ला) में अनूदित ‘शकुंतला’ का भी विमोचन किया गया। यह विद्यासागर की साहित्यिक और बौद्धिक विरासत को संरक्षित और प्रसारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो दीपक कुमार कर ने अपने संबोधन में कहा विद्यासागर विश्वविद्यालय में विद्यासागर म्यूजियम एवं डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी रीडर्स पार्क का उद्घाटन किया गया । ईश्वरचंद्र विद्यासागर राजा राममोहन राय के उत्तराधिकारी थे। उन्होंने स्त्री शिक्षा को सामाजिक बदलाव के लिए जरूरी माना। उच्च शिक्षामंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने उद्घाटन संबोधन में कहा कि नई पीढ़ी से आह्वान किया कि आने वाले समय में बंगाल की ऐतिहासिक उपलब्धि को पुनर्स्थापित करने की जरूरत है । नीति आयोग के सदस्य प्रो.गोवर्धन दास ने विद्यासागर मेमोरियल लेक्चर देते हुए कहा विद्यासागर सामाजिक सुधार के प्रेणता थे। विशेष व्याख्यान देते हुए डॉ सायन भट्टाचार्य ने कहा म्यूजियम के जरिए भी शिक्षा को विस्तार दिया जा सकता है । विद्यासागर म्यूजियम की स्थापना का अर्थ है आमलोगों तक विद्यासागर के विचारों को पहुंचाना। विद्यासागर का हिंदी के प्रसिद्ध लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र से गहरा संबंध था।
मिदनापुर के विधायक डॉ शंकर गुच्छाइत ने कहा कि मिदनापुर ज्ञान और स्वतंत्रता संग्राम की भूमि है। विद्यासागर विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा, ज्ञान और प्रगति का बड़ा केंद्र है। कार्यक्रम का संचालन प्रो.जयजीत घोष और सागरिका घोष ने एवं धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ जयंत किशोर नंदी ने दिया।

परिवार बचाने के लिए हाउस-हसबैंड भी जरूरी : चेन्नई हाईकोर्ट

चेन्नई । हाउस-हसबैंड अब समाज में सामान्य बात होनी चाहिए। परिवार और शादियां बचाने के लिए यह जरूरी है। मद्रास हाई कोर्ट ने शादी से जुड़े एक विवाद पर सुनवाई करते हुए यह अहम टिप्पणी की। जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और एमडी सुमति की बेंच ने सवाल किया कि आखिर महिलाओं से ही यह अपेक्षा क्यों की जाती है कि वे होममेकर बनें। अदालत ने कहा कि होममेकर तो जेंडर न्यूट्रल टर्म है। बेंच ने यह भी कहा कि होममेकर्स के द्वारा जो काम किया जाता है, उसकी बहुत आर्थिक महत्ता है। बेंच ने 23 सितंबर को सुनवाई करते हुए कहा, ‘यदि हाउसवाइफ हो सकती हैं तो फिर हाउस हसबैंड भी हो सकते हैं। इसे अब सामान्य बन जाने दीजिए।’
अदालत ने कहा, ‘हमारी यह राय है कि इससे परिवार और शादियों को बचाया जा सकेगा। होममेकर शब्द ही जेंडर न्यूट्रल है।’ अदालत ने कहा कि भारत का समाज पश्चिम से अलग है। यहां शादी परिवार का हिस्सा होती है और परिवार एक सोशल यूनिट होता है। इस व्यवस्था में पुरुष आर्थिक व्यवस्था करने वाले होते हैं, जबकि महिलाएं घर संभालती रही हैं। बेंच ने कहा, ‘यह समझने की जरूरत है कि दोनों भूमिकाओं की एक समान इज्जत है। अब बीते 50 सालों में हालात बदले हैं। कुछ वक्त पहले तक महिलाएं खुशी से खुद को हाउसवाइफ कहलाती थीं। अब वे इसे अच्छे ढंग से नहीं लेतीं। सिर्फ हाउस वाइफ कहा जाना उन्हें चुभता है। ‘महिलाएं अब तेजी से करियर पर फोकस कर रही हैं। इसके चलते कई बार रिश्तों पर भी असर पड़ रहा है। खासतौर पर आईटी सेक्टर और अन्य कुछ पेशों में ऐसा हो रहा है। कई बार करियर वुमन के लिए शादी बहुत अच्छी साबित नहीं होती। वे अपने करियर में शादी को बाधा मानती हैं। इसलिए वे उससे बचने लगती हैं। अविवाहित महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। इस समस्या का समाधान ऐसे हो सकता है कि पुरुष भी होममेकर बनने को तैयार हों।’ उच्च न्यायालय की ये टिप्पणियां एक डॉक्टर कपल के वैवाहिक विवाद को लेकर आईं। दोनों ने फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने पति के तलाक के केस को खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘शादियां दोनों को परेशान कर सकती हैं। लेकिन कानूनी लड़ाई में कोई फैसला किसी एक को खुश कर सकता है। लेकिन फैमिली कोर्ट ने तो दोनों को नाखुश कर दिया।’ अदालत ने कहा कि एक तरह जहां महिला डेंटिस्ट अपने माता-पिता के पास रहते हुए बच्चों की परवरिश कर रही थी तो वहीं पति ने कार्डियोलॉजी की पढ़ाई कर ली। इस तरह शादी में भी पति ने करियर में सफलता पा ली, लेकिन महिला के साथ ऐसा नहीं हुआ। अदालत ने कहा कि महिला ने परिवार को संभालने के लिए अपनी शिक्षा और करियर से समझौता किया।

भारत जैन महिला मंडल द्वारा पूर्व दुर्गा पूजा पर किया गया सैनिकों का सम्मान

कोलकाता  । पूर्व दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर भारत जैन महिला मंडल, कोलकाता शाखा के तत्वावधान में फोर्ट विलियम, नेता जी बैरक,कोलकाता में सैनिकों से भेंट एवं सम्मान समारोह का कार्यक्रम रखा गया जो गरिमामय, भावपूर्ण और सफल रहा। देश की सीमाओं की सुरक्षा में समर्पित वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला यह आयोजन राष्ट्रनिष्ठा, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक संवेदना का संगम बनकर उभरा।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं महिला मंडल की लगभग बीस सदस्याओं ने सैनिकों का अभिनंदन करते हुए उनके साहस, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति सम्मान प्रकट किया। वंदे मातरम् और राष्ट्रगीत से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सभी सैनिकों और प्रमुख अधिकारी प्रवीण जी के साथ समारोह में देशभक्ति गीत और कविताएं सुनाईं गई । कार्यक्रम का विशेष आकर्षण डॉ वसुधरा मिश्र द्वारा रचित काव्य-पुस्तक “नव दुर्गा नव रूप” का भेंट-स्वरूप प्रदान किया जाना रहा। दुर्गा के विविध रूपों के माध्यम से नारीशक्ति, आस्था और जीवन-मूल्यों की अभिव्यक्ति करने वाली यह कृति अवसर की सांस्कृतिक गरिमा को और अधिक अर्थवत्ता प्रदान करती दिखाई दी।यह पूर्व दुर्गा पूजा पर सभी सैनिकों और अधिकारी को काव्य संग्रह भेंट किया गया साथ में केसरिया रंग का दुपट्टा और मिठाई के डिब्बे दिए गए।
आयोजन की अध्यक्षता चंदा गोलछा ने की। संस्था की संस्थापक अंजू सेठिया ने स्वागत भाषण दिया।साथ सरोज भंसाली, अंजु सेठिया, नेहा रामपुरिया, सुषमा छाजेड, अनु जैन बोहरा, तारिका जैन, सुनीता कुण्डलिया, विनिता डागा, प्रांजल डागा, मनन सिघी, सुमन सिगी, रोमा दास, जतन श्यामसुखा, गुलाब बैगाणी, मंजु पारख, सुधा मालु तथा जय श्री भूतोडीया सहित मंडल के सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही।

समारोह का वातावरण केवल औपचारिक सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सैनिकों और समाज के बीच भावनात्मक सेतु को सुदृढ़ करने वाला अनुभव बना। उपस्थित जनों ने माना कि राष्ट्र की रक्षा में अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।

उल्लेखनीय रहा कि पूरे कार्यक्रम में सेवा, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की त्रयी निरंतर केंद्र में रही। सैनिकों के प्रति सम्मान की यह अभिव्यक्ति नई पीढ़ी को यह संदेश भी देती है कि स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के पीछे असंख्य त्यागों की दीर्घ परंपरा निहित है, जिसे स्मरण रखना आवश्यक है।

समापन अवसर पर आयोजन की सफलता के लिए सभी सहयोगियों और सहभागी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। समग्र रूप से यह समारोह पूर्व दुर्गा पूजा की आध्यात्मिक चेतना को राष्ट्रसेवा की भावना से जोड़ते हुए एक प्रेरणादायी एवं अविस्मरणीय सामाजिक-सांस्कृतिक पहल के रूप में स्मरणीय रहा।

” हृदय पुष्प “काव्य संग्रह को पढ़ते हुए

डॉक्टर वसुंधरा मिश्र ,भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज, कोलकाता

तुम मिले रूह को ताजगी मिल गई/ जिंदगी को नयी जिंदगी मिल गयी/बाद मुद्दत खिला ये हृदय का कंवल/ बेवसी मिट गई बंदगी मिल गयी (पृष्ठ 96भाव अभिव्यंजना)
रचनाकार मीतू कानोड़िया के काव्य संग्रह ‘हृदय पुष्प’ की ये पंक्तियाँ किसी भी पाठक को पढ़ने के लिए उत्सुक कर सकती हैं । माता-पिता के दिए संस्कारों से युक्त सहृदय मीतू कानोड़िया ने काव्य संग्रह का नाम भी अपने पिता और माता के प्रथम शब्दों को मिला कर दिया है जो अनूठा प्रयोग है। संवेदनशील और भावनात्मक लगाव से संबंधित कवयित्री का यह प्रथम काव्य संग्रह इस कारण भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें 81 रचनाएं हैं जिसमें 41 गीत 33 गजल गीतिकाएं एवं साथ अन्य रचनाएं हैं। हृदय की विविध अनुभूतियों को कवयित्री ने काव्य सौंदर्य के विविध छंदों और शब्द आभूषणों से सुसज्जित किया है और अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।जैसे मापनी,अवधी गीतिका ,बर्वे छंद, मनोरम छंद , आनंदवर्धक छंद ,पियूष रजनी छंद, मनोरम रूप माला छंद, बरवै छंद ,विधाता छंद आदि गीत विधा में लिखा है जो बहुत ही सटीक मात्राओं में छंद के नियमों को स्वीकारते हुए किया है और भावपूर्ण हैं।
‘छंद गीतों की कहानी ।
शब्द भावों की रवानी ।।
बह रही अविरल युगों से,
काव्य की धारा सुहानी।। ‘
मनोरम छंद में आपकी रचना ‘काव्य की धारा ‘पृष्ठ 80 में बारह मात्राओं में छंद सजाया गया है । काव्य छंदों की जानकारी रखने वाला ही इस प्रकार से लिख सकता है, साथ में भावपूर्ण स्पर्श । दोनों का ज्ञान रखने वाली कवयित्री ने अपनी सभी रचनाओं में मानो प्राण डाल दिए हैं। कोई भी रचना पढ़ने वाले पाठक को विवेकवान बनाती है। “बेटी के लिए “कविता की ये पंक्तियां –
शोरगुल में कृष्ण की वो बाँसुरी है।(पृ99)
काव्य संग्रह हृदय पुष्प में भावों की कोमलता के साथ भाषा भी परिष्कृत और सुगम है। रचना के अनुरूप शब्दों का चयन किया गया है। निश्चित ही मीतू कानोड़िया का यह प्रथम संग्रह संग्रहणीय है और इसकी गीत- ग़ज़ल फिल्मी धुनों में गाई जा सकती हैं ।आशा है सभी पाठक इसका आनंद ले सकेंगे। शुभकामनाओं के साथ।

काव्य वीणा सम्मान 2026 से सम्मानित हुए आचार्य ओम नीरव

कोलकाता। कोलकाता की राष्ट्रीय, सामाजिक,सांस्कृतिक एवं साहित्यिक चेतना जागरण केन्द्र संस्था परिवार मिलन ने आचार्य ओम नीरव को काव्य वीणा सम्मान 2026 से सम्मानित किया। उन्हें यह सम्मान उनकी प्रभावशाली छंद लालित्य, लयबद्धता, शब्द माधुर्य, एवं अलंकृत शैली में लिखित काव्य–कृति पांखुरी-पांखुरी के लिए दिया गया।
सुशील ठाकुर ‘साहिल’ की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मान समारोह में सम्मानित विभूति आचार्य नीरव ने परिवार मिलन को विशेष धन्यवाद दिया। उन्होंने छंद के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए अपनी पुस्तक की कुछ चुनिंदा कविताओं का पाठ कर सभागार को छंदमय एवं भावमय बना दिया।
चयन समिति की ओर से वरिष्ठ साहित्यकर डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने पुस्तक चयन में आने वाली चुनौतियों को साझा करते हुए कहा कि आज भी छंद लालित्य से ओत-प्रोत ऐसी कविताएं लिखी जा रही हैं इससे हम सब का साहित्य सचमुच समृद्ध हो रहा है।
समारोह की प्रधान वक्ता गोखले मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज की सह प्राध्यापिका एवं साहित्यिक क्षेत्र में विशेष स्थान रखने वाली विदुषी डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी ने चयनित पुस्तक पर अपनी विशेष टिप्पणी करते हुए कहा कि यह पुस्तक अपने छांदसिक स्वरूप, व्यंजनात्मक शैली, वैज्ञानिक सोच एवं भाव सौंदर्य वर्णन के कारण हृदय स्पर्शी है।
समारोह का शुभारंभ चित्रा नेवटिया द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ।
संस्था की पूर्व अध्यक्ष दुर्गा व्यास ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था का संक्षिप्त परिचय दिया,पूर्व सचिव अंजु गुप्ता ने प्रशस्ति पत्र का वाचन किया
सम्मान समारोह में महावीर प्रसाद मानकसिया, विनीता मनोत,सुधा चूड़ीवाल,,हरिमोहन मरदा,डाॅ प्रेमशंकर त्रिपाठी,सुशील साहिलएवं अरुण चूड़ीवाल ने आदरणीय नीरव जी को तिलक विभूषित कर पुष्पहार, शाल,सम्मान पत्र,श्रीफल, प्रतीक चिह्न एवं 51,000 की राशि अर्पित कर नमन निवेदित किया।  गौरीशंकर अग्रवाल अजयेन्द्र त्रिवेदी, बी के त्रिपाठी, सुरेश चौधरी, गिरिधर राय,रंजना झा,शशि लाहोटी,उषा श्रीवास्तव आदि महानगर के कई साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति में यह समारोह सुसंपन्न हुआ।
समारोह को सफल बनाने में कुलदीप मनोत,आशाराज कानूनगो,राजेश रुंगटा सुनन्दा रुंगटा राजेश चतुर्वेदी,अमिता चतुर्वेदी की सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम का सुरुचिपूर्ण संचालन किया राजेन्द्र कानूनगो ने।

हरिजनों के लिए देश में सबसे पहले खोला गया वर्धा में बजाज परिवार का लक्ष्‍मीनारायण मंदिर

विजयदत्‍त श्रीधर

विदर्भ के प्रमुख उद्योगपति सेठ बच्‍छराज बजाज ने सन 1905 में वर्धा में निवास के लिए बनी हवेली के परिसर में श्रीलक्ष्‍मीनारायण मंदिर का निर्माण प्रारंभ कराया था। यह बजाज परिवार का मंदिर था। जयपुर में निर्मित श्रीलक्ष्‍मी-नारायण की दिव्‍य मूर्तियों की मंदिर में प्राण-प्रतिष्‍ठा 7 फरवरी, 1908 को शास्‍त्रोक्‍त विधि से संपन्‍न हुई। बजाज परिवार ने मंदिर की व्‍यवस्‍था का दायित्‍व 29 जुलाई, 1909 को श्रीलक्ष्‍मीनारायण देवस्‍थान ट्रस्‍ट को सौंप दिया।
निर्माण के 20 वर्ष 5 माह 10वें दिन इस मंदिर ने भारत में सामाजिक समरसता का नया अध्‍याय लिखा। महात्‍मा गांधी की प्रेरणा और गांधी जी के पाँचवें बेटे के रूप में समादृत श्री जमनालाल बजाज के आग्रह से आचार्य विनोबा भावे के नेतृत्‍व में मंदिर में हरिजनों का प्रवेश हुआ। भारत में हरिजनों के लिए खोला जाने वाला यह पहला मंदिर है।


श्रीलक्ष्‍मीनारायण मंदिर की मूर्तियाँ विशुद्ध खादी के वस्‍त्र धारण करती हैं। उनका श्रृंगार सोना, चाँदी, रत्‍न आदि आभूषणों से रहित होता है। प्रसाद में भी केवल गाय के दूध, घी का प्रयोग होता है। पूजन के लिए मंदिर प्रांगण में बने कुएँ के जल का प्रयोग किया जाता है।
सन 1942 के 8-9 अगस्‍त को भारत छोड़ो आंदोलन के लिए वर्धा से महात्‍मा गांधी ने इसी मंदिर में दर्शन करके मुंबई प्रस्‍थान किया था।

श्री लक्ष्‍मीनारायण मंदिर के निर्माण के 118 वर्ष पूरे हो गए हैं। हरिजनों के मंदिर प्रवेश की सामाजिक-धार्मिक युगांतरकारी पहल के भी 98 वर्ष हो चुके हैं। मंदिर परिसर में मनुष्‍यता की वह दैवी सुवास की अनुभूति अभी भी की जा सकती है। इस आध्‍यात्मिक धाम से दो पीढि़यों से जुड़े राष्‍ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के प्रधानमंत्री प्रोफेसर डा. हेमचन्‍द्र वैद्य जब यह विवरण सुना रहे थे, तब उनकी आँखें चमक रही थीं और भावभीनी भी थीं। महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय, वर्धा में जनसंचार के प्राध्‍यापक डा. कृपाशंकर चौबे ने छायाचित्रों में इस स्‍मृति को बसाया।

एनटीए की सुरक्षा अब सीआईएसएफ के हवाले

-39 जवान संभालेंगे गोपनीय क्षेत्र

नयी दिल्ली । पेपर लीक को लेकर लगातार उठते सवालों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली स्थित एनटीए कार्यालय में अब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ के 39 जवान तैनात किए गए हैं। ये जवान परीक्षा से जुड़े गोपनीय क्षेत्रों की निगरानी, प्रवेश नियंत्रण और कर्मचारियों व आगंतुकों की जांच की जिम्मेदारी संभालेंगे। संवेदनशील परीक्षा सामग्री तक किसी भी अनधिकृत पहुंच को रोकने के लिए गोपनीय क्षेत्रों को अलग से चिह्नित किया गया है और वहां होने वाली गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
सीआईएसएफ के जवानों को मिंटो रोड स्थित भारत सरकार के प्रेस भवन में बनाए गए गोपनीय क्षेत्रों के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर तैनात किया गया है। इन जवानों की जिम्मेदारी में प्रवेश नियंत्रण और जांच व्यवस्था शामिल होगी।
कर्मचारियों और आगंतुकों की तलाशी के लिए एक्स-रे सामान जांच मशीनों और डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर यानी डीएफएमडी का इस्तेमाल किया जाएगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भवन में गोपनीय क्षेत्रों को अलग से चिह्नित किया गया है। इन क्षेत्रों में आवाजाही और कामकाज की सख्त निगरानी की जाएगी, ताकि परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील सामग्री की सुरक्षा के लिए एक पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

सेंसर बताएगा नसों का हाल, कदमों से तय होगा उपचार

पटना। अब न्यूरो यानी नसों व तंत्रिका तंत्र संबंधी रोगों से जूझ रहे मरीज के उपचार में सिर्फ चिकित्सक की नजर नहीं होंगी। सेंसर मशीन आपके हर कदम को माप कर बताएगी कि नसों में अभी कितनी कमजोरी शेष है।
जब रोगी इस सेंसर मशीन पर चलेंगे तो उनके कदमों की गति, लंबाई व समय को रिकार्ड कर वह दोनों पैरों की चाल में अंतर और असंतुलन की रिपोर्ट देगा।
दोनों पैरों में कितना भार पड़ रहा है, संतुलन कहां बिगड़ा, हाथ-पैर की गतिविधियों में कितना सुधार हुआ, चलने में लड़खड़ाहट, कमजोरी या लय में गड़बड़ी तो नहीं है, इसे डॉक्टर आसानी से समझ सकेंगे। इन तथ्यों के बाद हर रोगी के लिए और अधिक सटीक फिजियोथेरेपी तकनीक अपनाई जा सकेगी। डॉ. रत्नेश चौधरी व डॉ. अविनाश कुमार ने बताया कि इस तकनीक की मदद से घर पर रह रहे मरीज की गतिविधियों की निगरानी और उसके अनुसार फिजियोथेरेपी की योजना बनाना आसान होगा। उन्होंने बताया कि हड्डी-नस की समस्या, न्यूरोलाजिकल रोग, मोटापा और फिटनेस में फिजियोथेरेपी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। रोबोटिक थेरेपी, वर्चुअल रियलिटी, इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और टेली-रिहैबिलिटेशन ने न्यूरो रिहैब को नई तकनीक से जोड़ दिया है।

आजमाकर देखें ये फ्यूजन रेसिपीज

शाम की हल्की भूख हो या वीकेंड पर कुछ अलग खाने का मन, अक्सर सबसे पहले मैगी या पास्ता का ख्याल आता है। लेकिन अगर आप इन दोनों चीजों से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं तो किचन में रखी रोजमर्रा की सामग्री से कुछ मजेदार फ्यूजन रेसिपीज भी बनाई जा सकती हैं। फ्यूजन फूड की खासियत यही है कि इसमें अलग-अलग स्वाद और देसी अंदाज को मिलाकर एक नई डिश तैयार की जाती है। कभी इंडियन मसालों के साथ कोई कॉन्टिनेंटल ट्विस्ट दिया जा सकता है, तो कभी देसी स्नैक्स को बिल्कुल नए अंदाज में परोसा जा सकता है। इन रेसिपीज के लिए बहुत ज्यादा मेहनत या महंगी सामग्री की जरूरत नहीं होती। बस थोड़ी क्रिएटिविटी और स्वाद के हिसाब से मसालों का संतुलन जरूरी है। तो इस बार मैगी-पास्ता छोड़कर इन फ्यूजन रेसिपीज को जरूर ट्राई करें। पनीर टिक्का रैप में दें देसी और कॉन्टिनेंटल ट्विस्ट
अगर घर में रोटी या पराठा और थोड़ा पनीर मौजूद है तो इससे स्वादिष्ट फ्यूजन रैप तैयार किया जा सकता है। पनीर को दही, लाल मिर्च, हल्दी, गरम मसाला और थोड़ा नींबू डालकर मैरिनेट करें और तवे पर अच्छी तरह सेंक लें। अब रोटी या पराठे पर हरी चटनी और थोड़ा मेयोनीज लगाकर पनीर, प्याज, शिमला मिर्च और सलाद रखें। इसे रोल करके हल्का-सा तवे पर सेंकें। देसी मसालों और रैप के कॉम्बिनेशन से इसका स्वाद रोज के स्नैक्स से बिल्कुल अलग लगेगा।
देसी मसाला चीज़ टोस्ट बनाएं
ब्रेड से हमेशा सैंडविच या टोस्ट ही बनाना जरूरी नहीं। देसी मसाला चीज़ टोस्ट एक आसान फ्यूजन विकल्प हो सकता है। इसके लिए बारीक कटा प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च, हरी मिर्च और थोड़ा चाट मसाला मिलाएं। ब्रेड पर बटर लगाकर सब्जियों का मिश्रण और ऊपर चीज़ डालें। इसे तवे या ओवन में तब तक सेंकें जब तक चीज़ पिघल न जाए। ऊपर से थोड़ा ऑरिगैनो या चिली फ्लेक्स डालकर सर्व करें।
दाल के चीले को बनाएं पिज्जा स्टाइल
पिज्जा पसंद है लेकिन कुछ देसी ट्राई करना चाहते हैं तो दाल का चीला एक मजेदार बेस बन सकता है। मूंग या बेसन का बैटर तैयार करके तवे पर चीला बनाएं। इसके ऊपर पिज्जा सॉस, प्याज, शिमला मिर्च, कॉर्न और चीज़ डालें। इसे ढककर धीमी आंच पर पकाएं ताकि चीज़ अच्छी तरह पिघल जाए। कुरकुरे चीले और चीजी टॉपिंग का कॉम्बिनेशन बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आ सकता है।
समोसा चाट को दें मैक्सिकन टच
बचे हुए समोसे को सिर्फ दोबारा गर्म करने के बजाय उससे फ्यूजन चाट तैयार की जा सकती है। समोसे को तोड़कर उसके ऊपर चटनी, दही, प्याज और टमाटर डालें। इसके बाद थोड़ा कॉर्न, चीज़ और चाट मसाला डालकर सर्व करें। चाहें तो ऊपर से हल्के मसालेदार सालसा जैसा टमाटर-प्याज का मिश्रण भी डाल सकते हैं। इसमें देसी समोसे के साथ थोड़ा मैक्सिकन फ्लेवर जुड़ जाएगा।
इडली को बनाएं चटपटा मंचूरियन स्टाइल
बची हुई इडली को छोटे टुकड़ों में काटकर हल्का क्रिस्पी होने तक तवे पर सेंक लें। अब एक पैन में थोड़ा तेल, लहसुन, प्याज और शिमला मिर्च भूनें। इसमें हल्का सोया सॉस और अपनी पसंद के मसाले डालें और इडली को अच्छी तरह टॉस करें। ऊपर से हरा प्याज डालकर गर्मागर्म परोसें। यह डिश नाश्ते की इडली को शाम के मजेदार स्नैक में बदल सकती है।
छोटी-सी टिप
फ्यूजन रेसिपी बनाते समय एक साथ बहुत सारे फ्लेवर न मिलाएं। दो या तीन स्वादों का संतुलन रखें, ताकि डिश का असली स्वाद भी बना रहे और नया ट्विस्ट भी महसूस हो।

 

रिश्ते में मिठास घोल रही सिबलिंग थैरेपी

भाई बहन का रिश्ता दुनिया का सबसे अनूठा और गहरा नाता माना जाता है। बचपन का साथ खिलौनों के लिए नोकझोंक और बड़े होकर एक दूसरे की सबसे बड़ी ताकत बनना इस रिश्ते की खूबसूरती है। लेकिन समय के साथ अक्सर इस प्यार भरे बंधन में कड़वाहट आ जाती है। बचपन की अनकही बातें आपस में तुलना संपत्ति के विवाद या माता पिता की देखभाल की जिम्मेदारी जैसे मुद्दे इस मजबूत रिश्ते में दरार डाल देते हैं । ऐसी ही दूरियों को खत्म करने के लिए आजकल सिबलिंग थैरेपी एक वरदान की तरह उभर रही है।
क्या है सिबलिंग थैरेपी और कैसे करती है काम
सिबलिंग थैरेपी वास्तव में फैमिली थैरेपी का ही एक आधुनिक हिस्सा है इसमें एक पेशेवर काउंसलर भाई बहनों को एक साथ बिठाकर उनकी समस्याओं को समझता है। यह प्रक्रिया किसी एक को सही या गलत ठहराने के लिए नहीं बल्कि रिश्ते को सुधारने के लिए होती है। थैरेपी के दौरान दोनों पक्षों को बिना किसी डर या झिझक के अपनी भावनाएं व्यक्त करने का पूरा मौका मिलता है जिससे सालों पुरानी जमी गलतफहमी की बर्फ पिघलने लगती है।
सिबलिंग थैरेपी के सबसे बड़े फायदे
संवाद का बेहतर होना : थैरेपी का सबसे मुख्य उद्देश्य बातचीत के रास्ते खोलना है लोग एक दूसरे को ध्यान से सुनना और सामने वाले के नजरिए को समझना सीखते हैं।
भावनात्मक सुरक्षा : अगर बचपन में किसी पक्षपात या अनदेखी का एहसास हुआ हो तो थैरेपी में उस पर खुलकर बात करके पुरानी कड़वाहट मिटाई जाती है।
पूरे परिवार पर सकारात्मक असर: जब भाई बहनों का रिश्ता सुधरता है तो घर का तनाव अपने आप खत्म हो जाता है और पूरे परिवार में खुशहाली लौट आती है।
रिश्ते को नयी जिंदगी देने वाले विशेष टिप्स
अगर आप भी अपने भाई या बहन के साथ रिश्ते में दूरियां महसूस कर रहे हैं तो इन आसान टिप्स को आजमा सकते हैं
​नो पास्ट रूल: जब भी नए मुद्दे पर बात करें तो पुरानी गलतियों या बचपन की बातों को बीच में न लाएं।
चाय पर चर्चा: हफ्ते में कम से कम एक बार साथ बैठें और उस दौरान केवल एक दूसरे की तारीफ या अच्छी पुरानी यादों को साझा करें।
सीमाओं का सम्मान: एक दूसरे की निजी जिंदगी और फैसलों में जरूरत से ज्यादा दखल देने से बचें और सम्मान बनाए रखें।