Thursday, September 24, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 842

महानगर में शुरू हुआ 22वाँ कोलकाता फिल्म फेस्टिवल

0

स्त्री सशक्तिकरण के आह्वान के साथ महानगर में कोलकाता फिल्म फेस्टिवल का आगाज हो चुका है। 22वें कोलकाता फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन  महानायक अमिताभ बच्चन ने किया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंंने फिल्मों में महिला सशक्तिकरण का उल्लेख किया और इसे विकास के लिए अनिवार्य बताया। इस अवसर पर उनके साथ जया बच्चन, शाहरुख खान, संजय दत्त, अभिनेत्री काजोल तथा परिणति चोपड़ा भी उपस्थित थीं।

camera-with-line

बंगाल के ब्रांड अम्बास्डर शाहरुख ने कहा कि वे बंगाल के ब्रांड अम्बास्डर हैं इसलिए फिल्म समारोह में हिस्सा लेना उनकी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने बांग्ला में अपनी बात रखी और सभी पर अपना जादू चला दिया। जया बच्चन ने भी बांग्ला में भाषण दिया। गौरतलब है कि इस बार फिल्म फेस्टिवल की फोकस थीम सभी के लिए सिनेमा और सब सिनेमा के लिए है। प्रचार पर खासा ध्यान देते हुए आयोजकों ने इस बार बेहतरीन वीडियो बनाया है जो महानगर में 100 से अधिक जगहों पर दिखाया जाएगा। फोकस कंट्री इस बार चीन हैै मगर कोई भी पाकिस्तानी फिल्म दिखाने में आयोजक सक्षम नहीं हो सके। 18 नवम्बर तक चलने वाले इस फिल्म समारोह में 65 देशों की 156 फिल्में दिखायी जाएंगी।

महानगर में नाटकों की छटा बिखेरने आ गया जश्न — ए – रंग

0

नाट्य संस्था लिटिल थेस्पियन से छठा राष्ट्रीय नाट्य उत्सव ‘जश्न-ए-रंग का आयोजन आज से 17 नवंबर 2016 तक ज्ञान मंच, कोलकाता में किया जा रहा है। लिटिल थेस्पियन की ओर से आयोजित किए जाने वाले इस आयोजन का मकसद नाटकों को आम जनता तक पहुँचाना है। इस बार के आयोजन की खास बात यह है कि इसमें कहानियों का अभिनयात्मक पाठ पेश किया जा रहा है। लिटिल थेस्पियन की अध्यक्ष उमा झुनझुनवाला तथा डायरेक्टर एस एम अजहर आलम की कड़ी मेहनत के कारण आज इस नाट्योत्सव को अलग पहचान मिली है। कोलकाता में आयोजित होने वाला यह एकमात्र हिन्दी नाट्योत्सव है। अगर आपको नाटकों से प्रेम है और नाटक देखना और उस पर बात करना पसंद हैं तो आप इस आयोजन में जरूर शामिल होना चाहिए। डालते हैं कि इस नाट्योत्सव के आगामी कार्यक्रमों पर एक नजर –

12 नवंबर 2016, शनिवार
शाम 6:00 बजे
उद्घाटन समारोह

शाम 6:30
कहाँ गए मोरे उगना (हिंदी)
प्रस्तुति : निर्माण कला मंच, पटना
नाटक : उषा किरण खान
निर्देशन : संजय उपाध्याय

13 नवंबर 2016, रविवार, सुबह 11:00 बजे
दुलारी बाई (राजस्थानी)
प्रस्तुति : अनुराग कला केंद्र, बीकानेर
नाटक : मणि मधुकर
निर्देशन : सुदेश व्यास

शाम 6:30
पद्मश्री राम गोपाल बजाज तथा अन्य हस्तियों के साथ एक थिएटर अड्डा
स्थान: ताज़ा टीवी सम्मेलन कक्ष, 37 शेक्सपियर सरणी, कोलकाता

14 नवंबर 2016, सोमवार, शाम 6:30
पद्मश्री राम गोपाल बजाज और अजहर आलम द्वारा कविताओं और कुछ साहित्यिक अंशों की प्रस्तुति

शाम 7:30 बजे
प्रेम अप्रेम (हिंदी)
प्रस्तुति : लिटिल थेस्पियन, कलकत्ता
कहानी : कुसुम खेमानी
निर्देशन : उमा झुनझुनवाला

15 नवंबर 2016, मंगलवार, शाम 6:00 बजे
May Be This Summer (हिन्दी)
प्रस्तुति : यूनिकॉर्न एक्टर्स स्टूडियो, दिल्ली
नाटक व निर्देशन : त्रिपुरारी शर्मा

शाम के 7:30
क़िस्सा ख्वानी (कहानी का अभिनयात्मक पाठ)
दिनेश वडेरा और दिलीप दवे द्वारा अवधेश प्रीत की कहानी ‘हमज़मीं’
और दिनकर शर्मा द्वारा कार्ल चैपल की कहानी ‘टिकटों का संग्रह’

16 नवंबर 2016, बुधवार, शाम 6:00 बजे
वेलकम ज़िन्दगी (हिंदी)
प्रस्तुति : आकार कला संगम, दिल्ली
नाटक : सौम्या जोशी
निर्देशन : सुरेश भारद्वाज

शाम के 7:30
क़िस्सा ख्वानी (कहानी का अभिनयात्मक पाठ)
ज्योतिष जोशी और उमा झुनझुनवाला द्वारा जैनेन्द्र कुमार की कहानी ‘गदर के बाद’
और जीतेंद्र सिंह तथा ममता पांडे द्वारा शफी जावेद की कहानी ‘मेरी रोटियाँ कहाँ हैं’

17 नवंबर 2016, वृहस्पतिवार, शाम 6:30
बलकान की औरतें (उर्दू / हिंदी)
प्रस्तुति : लिटिल थेस्पियन, कलकत्ता
नाटक : जुलेस तास्का
निर्देशन: मुश्ताक काक

 

ऐसे होंगे 2 हजार और 500 रुपए के नोट

1

नए नोट बाजार में आ चुके हैं। आइए जानते हैं इनसे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें जो जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। डालते हैं मुख्य फीचर्स पर एक नजर –

– दो हजार रुपए का नया करेंसी नोट मैजेंटा (गहरा गुलाबी) रंग का होगा। इसमें महात्मा गांधी की नई सीरीज वाली फोटो होगी

– नए नोट में किसी तरह का कोई लेटर नहीं होगा। इसके अलावा, इसमें आरबीआई के नए गवर्नर उर्जित पटेल के सिग्नेचर होंगे।

– नोट के पीछे की तरफ इसका प्रिंटिंग ईयर ‘2016’ पब्लिश होगा। वहीं, पीछे की ओर मंगलयान की फोटो होगी। नोट के आगे और पीछे का डिजाइन जियोमेट्रिक पैटर्न कलर के हिसाब से होगा।

फीचर्स में जानें नए 2000 के नोट की खासियत

#1. नोट के आगे की तरफ सी थ्रू रजिस्टर में दो हजार रुपए लिखा होगा। आइडेंटिफिकेशन मार्क के ऊपर दिखाई देने वाली फूल-सी आकृति सी थ्रू रजिस्टर के नाम से जानी जाती है। दो हजार के नोट में फूल की जगह इसका मूल्य होगा, जो रोशनी में दिखेगा।

#2. नोट पर दो हजार की लेटेंट इमेज भी होगी। गांधीजी की फोटो के साइड में लेटेंट इमेज होती है। इसमें जितने का नोट है, उसकी संख्या लिखी होती है।
#3. नोट में देवनागरी में भी नोट की वैल्यू यानी 2000 लिखा होगा।
#4. इसके बीच में महात्मा गांधी की पोर्ट्रेट होगी।
#5. लेफ्ट साइड में छोटे अक्षरों में आरबीआई और दो हजार लिखा होगा।
#6. सिक्युरिटी थ्रेड में ‘भारत’, आरबीआई और 2000 लिखा होगा। नोट को झुकाने पर इसका कलर ‘थ्रेड ग्रीन’ से ‘ब्लू’ में बदलेगा।
#7. नोट के दाएं तरफ गारंटी क्लॉज, प्रॉमिस क्लॉज और गवर्नर के सिग्नेचर होंगे। वहीं, इसी तरफ आरबीआई का चिह्न भी होगा।
#8. नीचे से दाएं तरफ रुपए के सिंबल के साथ 2000 लिखा होगा। ये कलर चेंज इंक में लिखा है, जो ग्रीन से ब्लू रंग में बदलेगा।
#9.नोट के ऊपर से लेफ्ट साइड और नीचे से राइट साइड नंबर पैनल होगा। पैनल में नंबर छोटे से बड़े होंगे। कमजोर आंखों वालों के लिए महात्मा गांधी की पोर्ट्रेट, अशोक स्तम्भ और ब्लीड लाइन और आइडेंटिटी मार्क उभरा हुआ होगा।

#10.दाएं तरफ 2000 का इलेक्ट्रोटाइप वाटरमार्क होगा

#11.नोट के दाएं तरफ ही अशोक स्तम्भ होगा।

#12.राइट साइड में रेकट्राएंगल का साइन उभरा हुआ होगा, जिसमें 2000 लिखा होगा।

#13.लेफ्ट और राइट साइड सात एंगुलर ब्लीड लाइन उभरी हुई होगी।

नोट के पीछे की तरफ होंगे ये चार फीचर्स 

#14.  नोट की पीछे की तरफ लेफ्ट साइड प्रिंटिंग ईयर छपा होगा।
#15. लेफ्ट साइड पर ही स्वच्छ भारत का लोगो और स्लोगन होगा।  #16. पीछे की तरफ लैंग्वेज पैनल बीच में होगा।
#17. मंगलयान की फोटो होगी। नोट में देवनागरी में नोट की वैल्यू यानी २००० लिखा होगा।  पीछे की तरफ इसका डायमेंशन 66mm*16mm भी होगा।

500 रु. के नोट में आगे की तरफ होंगे ये फीचर्स

#1. नोट के आगे की तरफ सी थ्रू रजिस्टर में पांच सौ रुपए लिखा होगा। आइडेंटिफिकेशन मार्क के ऊपर दिखाई देने वाली फूल-सी आकृति सी थ्रू रजिस्टर के नाम से जानी जाती है। दो हजार के नोट में फूल की जगह इसका मूल्य होगा, जो रोशनी में दिखेगा।

#2. वहीं, पांच सौ रुपए की लेटेंट इमेज होगी। गांधी जी की फोटो के साइड में लेटेंट इमेज होती है। इसमें जितने का नोट है, उसकी संख्या लिखी होती है।
#3. देवनागरी में नोट पर वैल्यू यानी ५०० लिखा होगा।
#4. इसके बीच में महात्मा गांधी की पोर्ट्रेट होगी। पहले ये नोट पर दाएं तरफ थी।
#5. इसमें सिक्युरिटी थ्रेड होगा। नोट को झुकाने पर इसका कलर थ्रेड ग्रीन से ब्लू में बदलेगा।
#6. नोट के दाएं तरफ गारंटी क्लॉज, प्रॉमिस क्लॉज और गवर्नर के सिग्नेचर होंगे। वहीं आरबीआई का चिह्न होगा।
#7. पोर्ट्रेट और इलेक्ट्रोटाइप वाटरमार्क।
#8.  नोट के ऊपर से लेफ्ट साइड और नीचे से राइट साइड नंबर पैनल होगा। पैनल में नंबर छोटे से बड़े होंगे।
#9. नीचे से दाएं तरफ रुपए के सिंबल के साथ नोट की नंबर वाली वैल्यू होगी। ये ग्रीन से ब्लू में बदल जाएगी।
#10. नोट के दाएं तरफ ही अशोक स्तम्भ होगा। कमजोर आंख वालों के लिए महात्मा गांधी की पोर्ट्रेट, अशोक स्तम्भ, ब्लीड लाइन और आइडेंटिटी मार्क उभरा हुआ होगा।

#11. राइट साइड में रेकट्राएंगल का साइन उभरा हुआ होगा, जिसमें 500 लिखा होगा।
#12. लेफ्ट और राइट साइड सात एंगुलर ब्लीड लाइन उभरी हुई होगी।

500 के नोट में पीछे की तरफ होंगे ये पांच फीचर्स 

#13.  नोट की पीछे की तरफ लेफ्ट साइड प्रिंटिंग ईयर छपा होगा।

#14. लेफ्ट साइड पर ही स्वच्छ भारत का लोगो और स्लोगन होगा।
#15. पीछे की तरफ लैंग्वेज पैनल बीच में होगा।
#16. इसके पीछे की तिरंगा फहरे हुए लाल किले की फोटो होगी। ये भारत के हेरिटेज को दर्शाता है।
#17. नोट के पीछे देवनागरी में नोट की वैल्यू यानी ५०० लिखा होगा।

 

 

अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को मजबूती देने का तरीका है बड़े नोटों पर लगी पाबंदी

0

सरकार ने आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सशक्त कदम उठाया है। जाहिर है कि हर निर्णय की तरह इस निर्णय के भी इफेक्ट और साइड इफेक्ट हैं। फिलहाल साइड इफेक्ट तो आम आदमी पर पड़ रहा है और रोजमर्रा की जिंदगी थोड़ी मुश्किल हो रही है मगर इसका इफेक्ट या यूँ कहें कि इम्पैक्ट अच्छा ही होगा। बहुत बार विरोध सिर्फ विरोध के लिए होता है क्योंकि आप उस व्यक्ति को पसंद नहीं करते। इस मामले में भी काँग्रेस समेत अन्य दलों का विरोध भी कुछ ऐसा है। जब हम घर को नए सिरे से सजाते हैं तो तकलीफ होती है और यह तो पूरी अर्थव्यवस्था को फिर से सजाने जैसा है और इस फैसले के पीछे एक सटीक रणनीति है। परिवर्तन का परिणाम सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है मगर इस डर से बदलाव लाने की कोशिश ही न की जाए तो यह तो और भी गलत है। आप कतार में लगकर थक जाते हैं और अपनों की तकलीफ नहीं देखी जाती मगर आपको यह याद रखना चाहिए कि आपकी यह चिंता कुछ दिनों की है मगर यही बड़े नोट जब आतंकियों को ताकत देते हैं और सीमा पर हमारे जवान मारे जाते हैं तो उनके परिवारों के लिए यह जिंदगी भर का मातम होता है। सोशल मीडिया पर शहीदों को श्रद्धांजलि देना एक और बात है मगर बदलाव की प्रक्रिया में सक्रिय होकर हाथ बढ़ाना एक और बात है। आप फेसबुक पर सैनिकों का साथ देते हैं, बड़ी – बड़ी बातें करते हैं, आपको बदलाव चाहिए मगर बगैर किसी परेशानी के चाहिए, ये कैसे सम्भव है? लोग 15 लाख लाने की बातें करते हैं मगर ये काम सरकार को क्यों करना चाहिए? बगैर परिश्रम के आपके खाते में 15 लाख आते हैं तो यह क्या श्रम का अवमूल्यन नहीं है।

500-and-1000

इस पाबंदी के बहाने कई गरीबों ने खाते खोले हैं। काला धन रखने वालों की मुश्किल यही है कि अब तक जिन नौकरों और कर्मचारियों को पैर की जूती समझते थे, अब उनसे ही जबरन मुस्कराकर अदब से बात करनी पड़ रही है। अमीरों को झुकना रास नहीं आ रहा है। कतार में लगना उनकी शान के खिलाफ है। ममता दीदी को अगर उधार लेकर मिठाई खरीदनी पड़ी तो उनको खीझ नहीं होनी चाहिए क्योंकि वो तो माँ, माटी और मानुष की बात करती हैं तो उनकी खीझ से यह मान लें कि उनकी कथनी और करनी में अंतर है या फिर ये मान लें कि उनको ये चिंता सता रही है कि उनकी पेंटिंग कौन खरीदेगा और पार्टी फंड में पैसा कहाँ से आएगा? विरोधियों की चिंता का कारण भी यही है। इस पाबंदी का सामाजिक रूप से सकारात्मक पक्ष तो यही है कि ऊँच  – नीच का फर्क कुछ दिन के लिए ही सही कम होगा। आयकर की नजर होगी तो काले को सफेद बनाने के लिए जो भव्य धार्मिक प्रवचन होते हैं, उन पर लगाम लगेगी और इन पर लगाम लगने का मतलब बहुत हद तक अंधविश्वास और आसाराम बापुओं जैसों की कमाई पर लगाम लगना है। बैंक घाटे में चल रहे हैं और अब जिस तरह उन पर नोटों की बरसात हो रही है, उससे उम्मीद की जानी चाहिए कि बैंकों की स्थिति सुधरेगी और सरकार पर निर्भर होना कम होगा। अचानक सोने की माँग बढ़ रही है और साल में दूसरा धनतेरस मनाया जा रहा है। मंदिरों में बेकार नोट चढ़ाए जा रहे हैं। जिन्होंने रेलवे स्टेशन का चेहरा अरसे से नहीं देखा, अब वे रेलवे में टिकट आरक्षित करवा रहे हैं कि एक दिन में टिकटों की बिक्री 25 प्रतिशत बढ़ जाती है। एयरलाइंसों के अग्रिम टिकट खरीदे जा रहे हैं तो इसके सहारे सरकार भी ऐसे लोगों तक पहुँच रही है। पहली बात यह अचानक लिया गया निर्णय नहीं है क्योंकि इसकी तैयारी लगभग साल भर पहले  से हो रही थी। जो लोग निजी अस्पतालों में प्रतिबंधित नोटों को स्वीकारने की बात कर रहे हैं, उनको ये नहीं भूलना चाहिए कि ये अस्पताल वही कॉरपोरेट सेक्टर चलाता है जिनकी काली कमाई भरपूर है और टेबल के नीचे लेन – देन होते हैं। जानकारी देने का मतलब उनको सजग कर देना औऱ ऐसा होता तो इस मुहिम का ही कोई मतलब नहीं रह जाता। यही बात बैंकों पर भी लागू होती है क्योंकि बहुत से बैंक अपने ग्राहकों का काला धन सफेद करने में मददगार साबित हो सकते थे और अधिकतर निजी क्षेत्र के बैंकों में भी काली कमाई होने का अंदेशा है। विजय माल्या जैसे अरबपतियों की काली कमाई बेकार होगी। ऐसे लोग अगर बैंक जाते हैं तो भी कर चोरी के आरोप में जो 200 प्रतिशत राजस्व कर लगेगा, उससे सरकार की भी कमाई होगी। रिश्वत और भ्रष्टाचार, अनुदान या डोनेशन या फिर आतंकी कारर्वाई का साधन बड़े नोट ही हैं, इन पर भी प्रहार होगा। कॉरपोरेट कम्पनियों के कर्मचारी बैंकिंग प्रक्रिया से जोड़े जाएंगे क्योंकि कम्पनियाँ अब नोटों के झमेले में नहीं पड़ना चाहेंगी। यह दल से ऊपर उठकर लिया गया फैसला है तो भाजपा के फंड पर भी असर पड़ना तय है तो यकीन मानिए कि छुपे तौर पर पीएम साहेब को तो उनकी पार्टी से ही गालियाँ पड़ रही होंगी। जरा सोचिए, कि कितने साल बाद आपने गुल्लक की शक्ल देखी और बचपन की आदत आपके काम आ रही है। अभिभावकों को यही सीख बच्चों को देने की जरूरत है। हाथ खोलकर बेकार के खर्चों से आप दूर हैं तो यह आपकी आदत सुधारेगा। न चाहते हुए भी अब आप प्लास्टिक मनी युग में प्रवेश कर रहे हैं। जो नए नोट आ रहे हैं, उनमें चिप भले न हो मगर आप पर नजर रखने का उसमें पूरा इंतजाम है। यह निर्णय उच्च मध्यवर्ग के अहं पर चोट करने वाला निर्णय है और यह पाबंदी अर्थव्यवस्था के साथ ही हमारी आदतों को सुधारने जा रही है तो जरा सब्र रखिए और परिर्वतन की प्रक्रिया से जुड़कर देखिए।

 500, 1000 के नोट बंद होने के बाद अब क्या होगा? जानिए ऐसे 25‍ सवालों के जवाब

केंद्र सरकार ने 500 और 1000 के मौजूदा नोटों का चलन बंद करने का ऐलान कर दिया है।  इनकी जगह पर अब 500 और 2000 के नए नोट आएंगे. 500 और 1000 के पुराने नोट आधी रात से अवैध हो जाएंगे। इन्हें बैंकों या डाकघरों में जमा किया जा सकता है. इसके लिए 50 दिनों की समयसीमा तय की गई है। सरकार के इस फैसले को लेकर लोगों के मन में तमाम सवाल उठ रहे हैं. ऐसे सवालों के जवाब हाजिर हैं।

प्र.    इस योजना की जरूरत क्यों पड़ी?

उ. जाली नोटों की खेप में अधि‍कतर बड़े नोट हैं. एक आम आदमी के लिए जाली नोटों की पहचान कर पाना मुश्किल होता है क्योंकि ये असली नोट की तरह ही दिखते हैं जबकि सिक्योरिटी फीचर भी कॉपी नहीं किए होते हैं। जाली नोटों का इस्तेमाल राष्ट्रविरोधी और गैरकानूनी गतिविधियों में होता है। बड़े नोट आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं और ब्लैक मनी छुपाकर रखने के काम आते हैं। भारत की इकोनॉमी कैश आधारित है, ऐसे में जाली नोटों का चलन एक बड़ी समस्या बना हुआ है। जाली नोटों के चलन और ब्लैक मनी की जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए यह योजना शुरू की गई ह

प्र.   क्या है यह योजना?

उ. 500 और 1000 रुपये के मौजूदा नोटों का चलन बंद कर दिया गया है।  इन नोटों का इस्तेमाल किसी बिजनेस ट्रांजैक्शन और/या किसी दुकान पर नहीं हो पाएगा। इन नोटों को रिजर्व बैंक के 19 दफ्तरों में से किसी में या किसी बैंक की शाखा, किसी पोस्ट ऑफिस में नए नोटों से बदला जा सकता है

प्र. नोटों को बदलने परकीमत क्या मिलेगी?

आपको बैंक की शाखाओं या आरबीआई दफ्तरों में इन नोटों की पूरी कीमत मिलेगी।

 प्र. क्या यह मुझे कैश में मिलेगा?

उ. नहीं, आपको प्रति व्यक्ति 4000 रुपये तक कैश मिलेगा. चाहे आपके पास कितना भी पैसा क्यों न हो।

प्र.  मैं सारा कैश लेकर आया हूं तो पूरी रकम क्यों नहीं मिल सकती?

उ. बड़े नोट वापस लिए जाने की योजना में इसकी सुविधा नहीं है

प्र. 4000 रुपये से मेरा काम चल जाएगा. मैं क्या करूं?

उ. आप अपनी दूसरी जरूरतों के लिए चेक या इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट जैसे इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल वॉलेट, आईएमपीएस, क्रेडिट/डेबिट कार्ड्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

प्र.  मेरे पास कोई बैंक खाता नहीं है तो क्या करूं?

उ. आप जरूरी कागजातों के साथ बैंक की शाखा में संपर्क कर कभी भी खाता खुलवा सकते हैं।

प्र.  मेरे पास केवल जनधन योजना अकाउंट है तो क्या करूं?

उ.जनधन अकाउंट खाताधारक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए पैसे बदलने की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

प्र. मैं अपने नोट कहां बदल सकता हूं?

नोट बदलने की सुविधा रिजर्व बैंक के सभी दफ्तरों, बैंकों की शाखाओं या किसी पोस्ट ऑफिस में उपलब्ध है।

  प्र.     क्या मुझे   बैंक जाने की जरूरत है?

उ. 4000 तक का कैश बदलने के लिए आप पहचान पत्र के साथ किसी बैंक की शाखा में जा सकते हैं। 4000 से ज्यादा के एक्सचेंज के लिए जो केवल बैंक खाते में जमा होंगे, आप उस ब्रांच में जा सकते हैं जहां आपका खाता है या उस बैंक की किसी ब्रांच में जा सकते हैं।अगर आप किसी दूसरे बैंक की ब्रांच में जाना चाहते हैं जहां आपका खाता नहीं है, तो आपको अपने साथ एक वैध पहचान पत्र रखना होगा और आपके अकाउंट में इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर के लिए बैंक अकाउंट के डिटेल देने होंगे

प्र. क्या  मैं अपने बैंक की किसी शाखा में जा सकता हूं?

उ. हां

500-2000-new-note-620x400

अचानक नहीं लिया गया 500-1000 के नोट को बंद करने का फैसला

केंद्र सरकार ने कहा है कि काले धन पर शिकंजा कसने के लिए यह फैसला अचानक नहीं लिया गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा कि इस मुहिम के लिए पिछले छह माह से तैयारी चल रही थी, लेकिन इसको पूरी तरह गोपनीय रखा गया।

पिछले दो माह में दो हजार रुपये के बड़ी संख्या में नोट बैंकों में पहुंचाए गए थे, लेकिन ये किस प्रकार के नोट हैं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई। प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि हमने 500 और हजार के पुराने नोट के बदले में 500 और 2000 रुपये के नए नोट जारी करने के लिए पर्याप्त संख्या में नए नोटों की छपाई की है। मैसूर में कई माह से इसकी छपाई हो रही थी।

आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि काले धन के खिलाफ पहले भी तमाम कदम उठाए गए हैं। लेकिन जाली नोट के कारण मुद्रास्फीति और देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा था। लिहाजा यह बड़ा फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास में बढ़ोतरी और बड़े नोटों की संख्या के बीच अंतर बताता है कि बड़ी रकम काला धन छिपाने में इसका इस्तेमाल किया जा रहा था। उन्होंने साफ किया कि बड़े नोटों के आंकड़ों के साथ बताया कि काले धन का आकार तेजी से बढ़ रहा था, ऐसे में कड़े कदम की जरूरत थी।

काले धन के जमाखोरों का साथ न दें
दास ने आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी काले धन के जमाखोरों के हाथों में न खेलें। उन्होंने कहा कि कोई भी नागरिक काले धन के जमाखोरों से ऐसा धन लेकर अपने खातों में जमा न करें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रानिक लेनदेन में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। बैंकों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिससे पता चल सके कि कौन किसके लिए रकम बैंक में जमा कर रहा है।

रिजर्व बैंक ने कंट्रोल रूम बनाया
दो दिन सरकारी संस्थान, बैंक-डाकघर, अस्पताल, पेट्रोल पंप आदि, 500 से 100 नोट स्वीकार करेंगे, ताकि आम आदमी को कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि लोगों को 500-1000 रुपये के नोट बदलने के लिए 50 दिन का समय दिया है, लिहाजा घबड़ाने की कोई जरूरत न हो। रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय में इसके लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। राज्य सरकारों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशकों को इस बदलाव के लिए जरूरी कदम उठाने को कहागया है।

एसआईटी ने सरकार के कदम का स्वागत किया
एसआईटी चेयरमैन जस्टिस एमबी शाह ने सरकार के कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने काला धन घोषित करने की सरकार को योजना का लाभ नहीं उठाया, अब उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। गैर कानूनी धन की बढ़ती समस्या को देखते हुए ऐसा कदम उठाना जरूरी था।

दो हजार के नोट में मंगलयान की तस्वीर 
दो हजार रुपये का नया नोट गुलाबी और सफेद रंग का है। इसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर के साथ मंगलयान की फोटो भी है, जो विज्ञान की प्रगति का प्रतीक है। जबकि 500 रुपये का नोट हरे मटमैले रंग का है, इसमें महात्मा गांधी के साथ लालकिले की तस्वीर है।

पांच साल में बड़े नोट बेतहाशा बढ़े 
40 प्रतिशत छोटे से बड़े नोट बढ़े
76 प्रतिशत 500 के नोट
109 प्रतिशत 1000 के नोट
30 प्रतिशत बड़ी अर्थव्यवस्था
(सरकार ने दिए आंकड़े)

  दो हजार रुपए का नया करेंसी नोट

दो हजार रुपए का नया करेंसी नोट मैजेंटा (गहरा गुलाबी) रंग का होगा। इसमें महात्मा गांधी की नई सीरीज वाली फोटो होगी।

– नए नोट में किसी तरह का कोई लेटर नहीं होगा। इसके अलावा, इसमें आरबीआई के नए गवर्नर उर्जित पटेल के सिग्नेचर होंगे।

– नोट के पीछे की तरफ इसका प्रिंटिंग ईयर ‘2016’ पब्लिश होगा। वहीं, पीछे की ओर मंगलयान की फोटो होगी। नोट के आगे और पीछे का डिजाइन जियोमेट्रिक पैटर्न कलर के हिसाब से होगा।

(इनपुट साभार – दैनिक भास्कर व आज तक)

 

महिला हॉकी : एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब भारत के नाम

0

भारतीय महिला हॉकी टीम ने शनिवार को चीन को 2-1 से हराकर एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब पहली बार अपने नाम किया. भारत ने अंतिम मिनट में पेनाल्टी कॉर्नर के जरिए विजयी गोल दागा. मैच का पहला गोल भारत ने किया. लगातार आक्रामण कर रही भारतीय टीम को 13वें मिनट में पेनाल्टी कॉर्नर मिला. दीप ग्रेस इक्का ने इसे गोल में बदलने में कोई गलती नहीं की और टीम को बढ़त दिलाई.

भारत ने चीन को हराया
44वें मिनट में चीन के लिए झोंक मेंगलिंग ने बराबरी का गोल दागा. लेकिन दीपिका ने अंतिम मिनट में पेनाल्टी कार्नर पर गोल कर भारत को जीत दिलाई. भारत ने यह खिताब पहली बार जीता है. खास बात यह है कि एक हफ्ते पहले भारत की पुरुष टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को हराकर यह खिताब जीता था.

 

प्रेगनेंसी में संबंध बनाने से इंकार करना नहीं है तलाक का आधार-हाईकोर्ट

0

 

नई दिल्ली,यदि पत्नी प्रेगनेंट है और उस दौरान पति से शारीरिक संबंध बनाने से इन्कार कर देती है तो इसे तलाक का आधार नहीं माना जा सकता। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में यह बात कही है।

दरअसल, एक दिलचस्प मामले में पति ने पत्नी के ऐसे बर्ताव को क्रूरता बताते हुए तलाक मांगा था। पति ने फैमिली कोर्ट में यह शिकायत भी दर्ज कराई थी कि पत्नी सुबह देर से उठती है और बिस्तर में ही बैठे-बैठे चाय मांगती है।

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि बेड में ही चाय मांगने वाली पत्नी आलसी जरूर है, लेकिन आलसीपन क्रूरता नहीं है। इसलिए तलाक नहीं मांगा जा सकता। फैमिली कोर्ट ने भी तलाक की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था।

जस्टिस प्रदीप नंद्रजोग और जस्टिस प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने कहा, सही है कि अगस्त 2012 के बाद पत्नी ने पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से मना कर दिया, लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि उसके पेट में भ्रूण था। इससे पहले फैमिली कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि पति के लगाए आरोप आधारहीन हैं।

–

जीएसटी की नई दरों में आम लोग हुए खास

0

गुड्स एवं सर्विसेज टैक्स-जीएसटी की चार दरों पर सहमति बन गई है. इसमें आम आदमी को बड़ी राहत दी गई है. जीएसटी काउंसिल ने गुरुवार चार स्तरीय जीएसटी दर का फैसला किया. ये दरें होगीं 5, 12, 18, 28 फीसदी.

जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस फैसले का ऐलान किया. जेटली ने कहा कि

जीएसटी को लागू करने की तैयारियां सही दिशा में चल रही हैं. काउंसिल की बैठक में कर दरों के ढांचे और मुआवजे के फॉर्मूले को अंतिम रूप दिया गया.

ये होंगी जीएसटी दरें

जिन वस्तुओं पर इस समय उत्पाद शुल्क और वैट सहित कुल 30-31 प्रतिशत कर लगता है उन पर जीएसटी दर 28 प्रतिशत होगी. आम लोगों की सामान्य उपभोग की वस्तुओं पर जीएसटी की दर 5 प्रतिशत होगी. जीएसटी में 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो मानक दरें होंगी. जेटली ने कहा, जीएसटी के तहत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में शामिल खाद्यान्न सहित आम व्यक्तियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली 50 प्रतिशत वस्तुओं पर शून्य कर लगेगा.

राजस्व का क्या होगा ढांचाअनाज पर नहीं लगेगा कोई टैक्स
जेटली ने ऐलान किया कि आम आदमी के द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे खाद्यान्न पर कोई टैक्स नहीं होगा.

उच्चतम दर के प्राप्त होने वाले कर से होने अतिरिक्त राजस्व आय का इस्तेमाल आवश्यक उपभोग की वस्तुओं पर कर की दर पांच प्रतिशत रखने में किया जाएगा और आम उपभोग की कुछ वस्तुओं को 18 प्रतिशत के दायरे में हस्तांतरित किया जायेगा. लक्जरी कारों, तंबाकू, पान मसाला, कार्बोरेटेड पेय पदार्थों पर उपकर लगाया जायेगा, और इसके साथ इनपर स्वच्छ उर्जा उपकर के अलावा एक और उपकर लगाया जाएगा जिससे मिलने वाली राशि का इस्तेमाल राज्यों को राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिये किया जायेगा. जीएसटी लागू होने के पहले साल में राज्यों को उनके राजस्व नुकसान की भरपाई के लिये 50,000 करोड़ रपये की आवश्यकता होगा.

नुकसान की भरपाई को लेकर सहमति
इससे पहले वित्त मंत्री जेटली ने बताया था कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद में नई कर प्रणाली से राज्यों को होनेवाले नुकसान की भरपाई पर लगभग आम सहमति बन गई है.

 

छठ के गीतों में अब है बेटी की कामना

0

सांझ के देबई अरघिया, और किछु मांगियो जरूर,

पांचों पुत्र एक धिया (बेटी), धियवा मंगियो जरूर.

रोहतास के नोखा गांव का अंकित छठ के ऐसे ही गीत सुनते हुए बड़ा हुआ है. वो कहता है, “बहुत अच्छा लगता है जब मां के मुंह से ये गीत सुनता हूं. इस गीत में बेटी को सूर्य भगवान से मांगा जा रहा है और ये ही इस महापर्व की ख़ासियत है.”

19 साल का अंकित जो बात कह रहा है वो हाल के सालों में छठ के मौके पर बड़ी शिद्दत के साथ रेखांकित की जा रही है. छठ के पारंपरिक गीतों में छठी माता से बेटी देने की प्रार्थना की जाती है. एक गीत जो बहुत लोकप्रिय है, उसके बोल है –

रूनकी झुनकी बेटी मांगीला, पढ़ल पंडितवा दामाद

छठी मइया दर्शन दींही ना आपन. ( खेलती कूदती बेटी और पढ़ा लिखा दामाद चाहिए)

इस बारे में बात करते हुए लोकगायिका चंदन तिवारी कहती हैं, “आप देखें हमारे यहां जब आशीर्वाद में कहा जाता है दूधो नहाओ पूतो फलो या फिर पुत्रवती भव. यानी बेटी की कामना कहीं नहीं है. लेकिन छठ में बेटी की भी कामना है और धनवान नहीं बल्कि पढ़े लिखे दामाद की कामना व्रती करती है.”

छठ मुख्य रूप से बिहार-झारखंड में मनाया जाता है. बहुत पवित्रता के साथ मनाए जाने वाले इस पर्व में डूबते और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है.

इस महापर्व और स्त्रियों की भूमिका के बारे में हिंदू धर्म के जानकार पंडित रामदेव पाण्डे बताते हैं, “छठ के बारे में तो कहा ही जाता है कि इस व्रत को पहली बार सतयुग में राजा शर्याति की बेटी सुकन्या ने रखा था. इसलिए इसमें स्त्री स्वर की प्रधानता है. कोई ऐसा पर्व नहीं है जिसमें बेटी की कामना हो, छठ व्रत में ये कामना है. दुर्गापूजा में भी नारी की पूजा होती है लेकिन वहां बेटी की कामना नहीं है.”

छठ के गीतों में सभी तरह का काम करने वाले लोगों की बेटियों का जिक्र है. एक गीत के बोल है-

छोटी रे मोटी डोमिन बेटी के लामी लामी केश,

सुपवा ले आइहा रे डोमिन, अरघ के बेर

छोटी रे मोटी मालिन बेटी के लामी लामी केश,

फुलवा ले आइहा रे मलिन, अरघ के बेर …..

वरिष्ठ साहित्यकार और लोकगायक शांति जैन कहती है, ”आप इन गीतों को देखिए इसमें ऊंच नीच, छोटे बड़े सभी तरह के भेदभाव टूटते हैं. जातीय जकड़नें टूटती हैं. एक तरफ साक्षात देवता होते हैं और दूसरी तरफ पूजा की सारी सामग्री प्रकृति से ली हुई जिसको बनाने में समाज के सभी वर्गों की जरूरत है. इसी पर्व में आप डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते है, इसी में आप बेटी देने की प्रार्थना करते है. बाकी किसी पर्व में ऐसा कहां है ?”

ये जातीय और धार्मिक जकड़नें किस तरह टूटती है इसका ज़िक्र वरिष्ठ मैथिली लेखिका उषा किरण ख़ान करती हैं.

वो बताती हैं, “हमारे यहां तो मुसलमान औरतें भी छठ करती हैं. बस वो छठ के पकवान नहीं पकाती हैं, सिर्फ फल और सब्जियां ही चढ़ाती हैं. जब हम छोटे थे तो हमने उनसे पूछा कि वो पकवान क्यों नहीं पकाती है, तो उन्होंने बड़े भोलेपन से इसका जवाब दिया कि हमारा छुआ वो( भगवान) नहीं खाएंगे इसलिए. इस एक बात से आप समझे कि पर्व कितना व्यापक है.”

अपनी शूटिंग में व्यस्त छोटे पर्दे की लाली यानी रतन राजपूत छठ के मौके पर पटना नहीं आ पा रही है. रतन राजपूत ने भी कुछ साल छठ व्रत किया था. फोन पर बातचीत में वो कहती हैं, “औरत के बिना तो सब कुछ अधूरा है. वो अगर अपने महत्व को समझ जाए तो औरत को बढ़ने से कौन रोक सकता है.”

 

कोरिया में मिसेज वर्ल्ड 2016 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी मोहिनी शर्मा

0

मुंबई- उद्यमी मोहिनी शर्मा माने मिसेज वर्ल्ड प्रतियोगिता के 2016 के संस्करण में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह प्रतियोगिता कल कोरिया में होगी। 28 वर्षीय मोहिनी के सिर पर इस वर्ष मई में मिसेज इंडिया का ताज सजा था।
डिजाइनर मासूमी मेवावाला ने खास तौर पर उनके गाउन और पारपंरिक पोशाक पर काम किया है जो भारत की आत्मा का प्रतिनिधित्व करेगा। मोहिनी ने कहा कि परिवार, काम और प्रतियोगिता की तैयारी के बीच संतुलना बनाना आसान काम नहीं था।
बहरहाल, वह खुश हैं कि वह आखिरकार इन सब में संतुलन बैठाने में कामयाब रही। उन्हें खुशी है कि वह भारत का प्रतिनिधत्व एक वैश्विक मंच पर कर रही हैं।
उन्होंने कहा ‘‘ यह अबतक आनंदपूर्ण सफर रहा है। छोटी से छोटी तैयारी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। मैं अतंरराष्ट्रीय मंच पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का इंतजार कर रही हूं।’’ मोहिनी ने एक बयान में कहा, ‘‘ यह हमेशा से मेरा सपना था और आखिरकार मैं इसे सच होते हुए देख रही हूं। मुझे आप सभी के समर्थन और स्नेह की आशा है।’’

 

ये शख्स है जायकेे की दुनिया के बेेताज बादशाह

0

जायके की दुनिया में संजीव कपूर चर्चित नाम  है। भारत का शायद ही ऐसा कोई घर होगा जहां लोग इस शेफ को चेहरे से न पहचानते हों। पिछले कुछ सालों से टीवी पर उनके कुकरी शो बेहद पसंद किए जाते हैं। अपने खाने के दम पर संजीव कपूर सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया में पहचाने जाते हैं। टीवी के एक चर्चित शो में इस बार वे नहीं दिखाई दे रहे हैं। इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानते हैं उनके बारे में…

संजीव कपूर का जन्म हरियाणा में हुआ था, लेकिन उनका ज्यादातर बचपन नई दिल्ली में गुजरा। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि एक बार पिता को किचन में खाना बनाते देख उन्होंने शेफ बनने की ठानी थी। उस वक्त उनकी उम्र महज 10 साल थी। उस उम्र से हुई शुरुआत बाद में उनका प्रोफेशन बन गया। 1992 में उन्होंने एल्योना कपूर से शादी की, वे कारोबार में भी उनका हाथ बंटाती हैं। उनकी कुल नेट वर्थ 12 करोड़ रुपए है। उनकी150 से ज्यादा किताबें छप चुकी हैं।

संजीव का जन्म 10 अप्रैल 1964 को हरियाणा के अंबाला जिले में हुआ था। उन्होंने इंस्टीट्ट यू ऑफ होटल मैनेजमेंट (आईएचएम) कैटरिंग एंड न्यूट्रीशन, पूसा, नई दिल्ली से अपनी पढ़ाई की है। 1984 में आईटीडीसी के साथ रसोई ट्नर रे के रूप में शेफ करियर शुरू किया था। मुंबई के सेंटूर होटल के साथ कार्यकारी शेफ के रूप में उन्होंने सबसे लंबे वक्त तक काम किया। आज वे ‘येलो चिली’ के नाम से रेस्त्रां चेन चलाते हैं, जिसकी विदेशों में भी कई ब्रांच हैं। इतना ही नहीं वे एक फूड चैनल के भी मालिक हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने 2011 में की थी।

खाना खजाना से मिली पहचान
उनका सबसे पॉपुलर टीवी शो ‘खाना खजाना’ एशियाई देशों में चाव से देखा जाता है। यह शो 120 देशों में टेलीकास्ट होता है और इसके करीब 500 मिलियन दर्शक हैं। कुकिंग को लेकर संजीव 150 से ज्यादा किताबें भी लिख चुके हैं, जो हिंदी गुजराती, मराठी, इंग्लिश जैसी भाषाओं में पब्लिश हो चुकी हैं। उनकी एक बुक ‘हाऊ टू कुक इंडियन’ पश्चिमी देशों में काफी पॉपुलर है। न्यूयार्क टाइम्स में ‘समर कुक बुक ऑफ द ईयर 2011’ में यह बुक सिलेक्ट हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे के दौरान संजीव कपूर भी उनके साथ गए थे। उन्होंने मोदी के लिए कई वेजीटेरियन डिसेस तैयार की थीं।

सामाजिक योगदान
– ऑटिज्म के बच्चों के लिए संजीव कपूर पूरा सहयोग देते हैं। सामाजिक दायित्व के रुप में ग्रामीण दूरवर्ती इलाकों के बच्चों के लिए और समाज के पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए स्कूलों में खाना दिया जाता है।
– वे मिनिस्ट्री ऑफ टूरिज्म के पैनल में हैं और भारतीय पाक शैली का विशेष दस्तावेज तैयार करते हैं।
– उनका ब्रांड वंडरशेफ महिलाओं को व्यापार शुरू करने में मदद करता है