Friday, September 25, 2026
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आम आदमी ही देश को सरकार के साथ आगे ले जा सकता है

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देखते – देखते साल अलविदा कहने जा रहा है। सर्दियों की गुनगुनी धूप का इंतजार है और अब तक जाड़े का मजा लेने की तैयारी भी आप करने लगे होंगे और इन तमाम ख्यालों के बीच एक इंतजार अर्थव्यवस्था के खुशहाल होने का भी है। तकलीफदेह बात है कि मौत, कतार और किसी नेता का ट्वीटर अकाउंट हैक होना भी सियासत के खेल का हिस्सा हो गया है। देश को आगे बढ़ाने के लिए संसद का सकारात्मक होना जरूरी है मगर अफसोस यह है कि इस देश के नेता जनता को नाकारा समझ रहे हैं जो कभी आगे बढ़ने की कोशिश नहीं कर सकती। इस देश में जब कम्प्यूटर आया था, तब भी शोर मचा था मगर आज यह हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। हम मानते हैं कि देश में संरचना की कमी है मगर क्या इसका हवाला देकर देश के हर गाँव में जाने वाले विकास का रास्ता मोड़ देना चाहिए? हमारी समस्या यह है कि हम गिलास को आधा खाली देखने के आदी हो चुके हैं मगर हमारे दिमाग में गिलास को पूरा भरने की उम्मीद नहीं दिखती मगर आगे बढ़ने के लिए यह उम्मीद और एक नयी सोच जरूरी है। यह काम सरकार अकेले नहीं कर सकती। आज दुनिया के तमाम विकसित देश कैशलेस होने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं, हमारे यहाँ अर्थव्यवस्था का 80 प्रतिशत भाग अभी भी नकद पर टिका है।

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यह सही है कि इसे एकबारगी खत्म नहीं किया जा सकता मगर इस दिशा में शुरुआत तो की जा सकती है। अगर देश आपका है, आप उस पर अधिकार जताते हैं तो आपकी जिम्मेदारी महज वोट डालने पर खत्म नहीं होती, विकास की प्रक्रिया में आपको भागीदार बनना पड़ेगा। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो यह आपकी स्वार्थपरता है। हम विषमता का रोना रोते हैं मगर यह हमारा ही किया –धरा है, वरना क्या वजह है कि जितने रूपयों में एक गरीब का खर्च चल जाता है, वह आपका एक दिन या कुछ घंटों का खर्च है? यह देश किसी नेता और किसी सरकार का नहीं है बल्कि हमारा है और हमारे देश को आगे ले जाने में हाथ बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। कैशलेस होने की प्रक्रिया में एक आम आदमी भी कड़ी बन सकता है, अपने आस – पास के लोगों को जागरुक कीजिए, उनके खाते खुलवाने, आर्थिक रूप से सजग बनाकर ठगी से बचाने, एटीएम की जानकारी देने और ई –वॉलेट का उपयोग सिखाने में आप मदद कर सकते हैं, यह आपकी ताकत है।

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गरीब होने का मतलब जानकारी से वंचित रहना नहीं होता। सच तो यह है कि शहर की जीवनशैली में सुविधा से भरे जीवन के बीच हमें यह गवारा नहीं होता कि हमारी जिंदगी में खलल पहुँचे। परिवर्तन हमें चाहिए जरूर मगर उसके लिए हम तकलीफ उठाने को तैयार नहीं हैं। सरकारें आती हैं, जाती हैं मगर एक बात तय है कि आम आदमी ही देश को आगे ले जा सकता है, सरकार को उसकी जरूरत है। सांता क्लाज और नया साल दोनों आने वाले हैं। आप सभी को अपराजिता की तरफ से मेरी क्रिसमस।

बंगलुरु में कैनरा बैंक ने एटीएम बस शुरू कर, दी लोगो को लंबी कतारों से राहत!

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कैनरा बैंक ने बंगलुरु में एटीएम बस सेवा शुरू कर दी है। यह बस ग्रामीण इलाको में जाकर लोगों को निकासी की सुविधा मुहैया करा रही है।

बंगलुरु में मोबाइल एटीएम बस शाम को तकरीबन 5:30 बजे एम. जी. रोड पर दिखाई दी जिसे देखकर हताश लोगों की आँखों में चमक आ गयी। इस एटीएम बस से तकरीबन 800 लोगों ने  इस सेवा का लाभ उठाकर करीब 8 लाख रूपये की निकासी की।

मोबाइल बैंक एटीएम के विचार पर कैनरा के जनरल मेनेजर एम् एम् चिनिवार ने बताया, “मैं शाम को एम जी रोड से गुजर रहा था कि देखा वहां के किसी भी एटीएम में कैश नहीं है, तो हमने अपने मोबाइल एटीएम की सेवा शुरू कर दी ताकि बेंगलूर के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को पैसे के लिए दिक्कत न उठानी पड़े।”

उन्होंने आगे बताया कि अभी एटीएम से 2000 रूपये के नोट निकल रहे हैं। पर्याप्त करेंसी बैंक और एटीएम तक एक दो दिन में पहुंचा दी जायेगी ताकि लोगों को दिक्कत न हो।

कैनरा बैंक की पहल एक उम्मीद की तरह है। यदि ऐसी सुविधाएँ अन्य बैंक भी शुरू करें तो आम लोगों को हो रही भारी परेशानी में सहूलियत मिल सकेगी। लोगों को मूलभूत जरूरतों के लिए पैसे की जरूरत है और इस वक़्त देश के बैँको पर बेहतर सेवा देने की जिम्मेदारी बढ़ गयी है। अगर बैंक पहले से बने एटीएम केंद्रों के साथ-साथ इस तरह के और भी उपाय अपनाएं तो लोगों को पैसे निकलने में कठिनाइयां नहीं झेलनी पड़ेंगीं।

रीढ़ की हड्डी की मरम्मत के लिए अहम प्रोटीन का पता चला

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वॉशिंगटन,: वैज्ञानिकों ने एक ऐसे प्रोटीन का पता लगाया है जो मनुष्यों में रीढ़ की हड्डी की चोट से उबरने में अहम साबित हो सकता है और नष्ट हुए उतकों की मरम्मत की चिकित्सकीय पद्धति के लिए अहम हो सकता है।

एक जेब्राफिश अपनी रीढ़ की हड्डी के टूटने के बाद उसकी स्वत: पूर्ण मरम्मत कर लेती है जबकि वही मनुष्यों के लिए जानलेवा चोट साबित हो सकती है और वे लकवाग्रस्त हो सकते हैं।

अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों ने एक विशेष प्रोटीन का पता लगाया है जो मनुष्यों के उतकों की मरम्मत की प्रक्रिया में अहम साबित हो सकता है।

ड्यूक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर केन्नेथ पोस ने कहा, ‘‘नष्ट हुए उतकों की मरम्मत के लिए आज सीमित मात्रा में सफल चिकित्सा पद्वतियां उपलब्ध हैं, ऐसे में हमें उनकी पुन: उत्पत्ति प्रोत्साहित करने को लेकर जेब्राफिश जैसे जीवों की ओर देखने की आवश्यकता है।’’ जब जेब्राफिश की टूट चुकी रीढ़ की हड्डी की फिर से उत्पत्ति की प्रक्रिया शुरू होती है तो आठ सप्ताह में नए तंत्रिका उतक चोट से पैदा हुए फासले को भर देते हैं और जेब्राफिश गंभीर रूप से लकवाग्रस्त होने से बच जाती है।

वैज्ञानिकों ने इस शानदार प्रक्रिया के लिए संभावित रूप से जिम्मेदार अणुओं को समझने के लिए उनकी उन सभी जीन का अध्ययन किया जिनकी गतिविधि रीढ़ की हड्डी की चोट के बाद अचानक बदली।

इस प्रक्रिया में कनेक्टिंग टिशू ग्रोथ फेक्टर :सीटीजीएफ: अहम है। वैज्ञानिकों ने जब सीटीजीएफ को आनुवांशिक रूप से नष्ट करने की कोशिश की तो मछली उतक की फिर से उत्पत्ति नहीं कर पाई। मनुष्यों एवं जेब्राफिश में अधिकतर प्रोटीन कोडिंग जीन साझे हैं और सीटीजीएफ अपवाद नहीं है और जब वैज्ञानिकों ने मछली की चोट वाली जगह में सीटीजीएफ का मानवीय संस्करण जोड़ा तो इसने पुन: उत्पत्ति की प्रक्रिया को बढ़ाया और मछली चोट के दो सप्ताह बाद बेहतर तैरने लगी।

पोस के समूह में शोधार्थी मायस्सा मोकाल्लड ने कहा, ‘‘मछली लकवे की समस्या से उबरकर टैंक में तैरने लगी। इस प्रोटीन का प्रभाव विचित्र है।’’ इस अध्ययन को पत्रिका ‘साइंस’ में प्रकाशित किया गया है।

 

सलमान लड़कियों को करते थे परेशान इसलिए कभी नहीं लिया उनका इंटरव्यू: सयानी

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पुणे.अमीन सयानी ने सलमान खान को लेकर एक खुलासा किया है। पुणे में एक प्रोग्राम के दौरान मशहूर रेडियो एनाउंसर ने कहा,” सलमान लड़कियों को परेशान करते थे इसलिए मैंने जानबूझकर उनका एक भी इंटरव्यू नहीं लिया।” बता दें कि शनिवार को यहां पुलोत्सव में सयान को सम्मानित किया गया। अमीन ने कहा- सलमान ने महिलाओं का आदर नहीं किया…

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सयानी ने बताया, ”जब मैं रेडियो में काम करता था तब कई बड़े फिल्म स्टार के इंटरव्यू लिए थे।”

”एक दौर एेसा भी था कि सलमान , शाहरुख और आमिर खान तीनों अपने करियर में तरक्की कर रहे थे।”
”मुझे सलमान खान के बारे में बता चला कि वे लड़कियों को परेशान करते हैं तो मैंने जानबूझकर उनका इंटरव्यू नहीं किया।”
”मैं पहले से ही महिलाओं का सम्मान करता आ रहा हूं, लेकिन सलमान ने महिलाओं का आदर नहीं किया इसलिए मैंने उन्हें टाल दिया।”

अमीन ने कहा- हीरो बनना चाहता था

अमीन सयानी ने इंटरव्यू में बताया, ”मैं पहले से फिल्मों में हीरो बनने की कोशिश कर रहा था।”

“कई कोशिशों के बाद भी मुझे फिल्मों में मौका नहीं मिला। इसलिए मैं रेडियो अनाउंसर बन गया।”
– सयानी बोले, “मैंने अपने करियर के दौर में कई दिग्गजों के इंटरव्यू लिए, जिनकी काफी तारीफ भी हुई।”

अब बदल चुकी है रेडियो की दुनिया

सयानी ने रेडियो में आए बदलाव को लेकर कहा कि हमारे दौर में रेडियो सुनने वालों की तादाद ज्यादा थी।

कहा- “आज के दौर में रेडियो एफएम की तादाद बढ़ गई लेकिन ऑडियंस कम होती जा रही है।”
”आज के दौर में प्रेजेंटेशन जल्बादी में होता है। रेडियो जाॅकी या अनाउंसर क्या बात करता है, ये ऑडियंस को समझ में नहीं आता है।”

 

इस कैब ड्राइवर ने दिखायी दरियादिली, बताया भारतीयता और मानवता का मतलब

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जब प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने अचानक ही पांच सौ और हज़ार रुपयों के नोटों को बंद करने का ऐलान किया तब केवल काला धन छुपाये रखने वालो में  ही नहीं बल्कि आम जनता में भी हफरा-तफरी का माहौल छा गया।

जहाँ पुरे देश ने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री की इस कड़ी पहल का स्वागत किया वहीँ कई ऐसे लोग भी थे जिन्हें इस फैसले की वजह से कई मुसीबतों का सामना करना पडा। ऑटो चालक, पेट्रोल पंप तथा छोटी दुकानों पर जहाँ दुकानदारों के 500 और 1000 के नोट लेने से मना कर देने से लोग मुश्किल में पड़ गए वही सोशल मीडिया पर एक ओला कैब ड्राईवर की दरियादिली की कहानी खासी चर्चित रही।

विपिन कुमार नाम के इस ओला कैब ड्राईवर ने अपने हिस्से के पैसे इसलिए छोड़ दिए क्यूंकि उनके ग्राहक के पास केवल 500 के ही नोट थे।

मंगलवार की ही ऐतासिक रात को दिल्ली के एक आर्किटेक्ट विप्लव अरोरा को अपनी ट्रेन पकड़ने स्टेशन तक जाना था।  हालांकि उनके बटुए में केवल 500 के ही नोट थे फिर भी उन्होंने ये सोच कर ओला कैब बुलवा ली कि उनके ओला मनी अकाउंट में कुछ पैसे है। पर उन्हें इस बात का अंदेशा नहीं था कि उनका किराया ओला मनी अकाउंट में बचे हुए पैसो से ज्यादा हो जायेगा।

स्टेशन पहुँचकर किराए की रकम सुनते ही विप्लव असमंजस में पड़ गए क्यूंकि उनके पास देने के लिए 500 रूपये के अब बेकार हो चुके नोटों के अलावा कुछ भी नहीं था। पर ऐसे में कैब ड्राईवर विपिन कुमार के जवाब ने उन्हें भावविभोर कर दिया।

कैब ड्राईवर विपिन ने विप्लव से कहा, “सर बाकी के पैसे रहने दीजिये।  दो पैसे कम कमा लेंगे, थोड़ी सी तकलीफ होगी और वो तो सबको हो रही है।  अब सरकार के फैसले का सम्मान करते हुए, देश की तरक्की में ये हमारा योगदान ही समझ लेंगे।  आप बेफिक्र होकर अपनी ट्रेन लीजिये।”

इसके बाद विप्लव ने विपिन कुमार के इस दरियादिली की कहानी ओला के फेसबुक पेज पर साझा की और कुछ घंटो में ही ये पोस्ट वायरल हो गया। ओला ने भी इस बात की जानकारी मिलते ही कैब ड्राईवर विपिन कुमार के बाकी पैसो का भुगतान कर दिया।

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विप्लव अरोरा का फेसबुक पोस्ट इस प्रकार था –

इस पुरे पोस्ट का हिंदी अनुवाद पढ़े –

“आज घर से रेलवे स्टेशन जाने के लिए मैंने ओला बुक की। दुर्भाग्यवश उस वक़्त मेरे बटुए में सिर्फ 500 के ही नोट थे और मुझे 500 और 1000 रूपये के नोट रद्द किये जाने के बारे में भी पता था। इसलिए मैंने ओला मनी से किराया देने का फैसला किया।

पर मेरा किराया मेरे ओला मनी में बचे पैसो से थोडा ज्यादा हो गया और अब मुझे बाकी के पैसे ड्राईवर को नगद में ही देना था।

कोई एटीएम भी काम नहीं कर रहा था और ये बात तो तय थी कि ऐसे समय में कोई भी 500 का छुट्टा नहीं देता।

पर ऐसे वक़्त में उस ड्राईवर का जवाब हम सभी के सम्मान का हकदार है और इसीलिए मैं ये पोस्ट लिख रहा हूँ।

उन्होंने कहा, “सर बाकी के पैसे रहने दीजिये। दो पैसे कम कमा लेंगे, थोड़ी सी तकलीफ होगी और वो तो सबको हो रही है।  अब सरकार के फैसले का सम्मान करते हुए, देश की तरक्की में ये हमारा योगदान ही समझ लेंगे।  आप बेफिक्र होकर अपनी ट्रेन लीजिये।”

कैब ड्राईवर #vipinkumar (विपिन कुमार) को मेरा सलाम। उन्होंने प्रधानमंत्री की कही उस बात को सच कर दिखाया, जिसमे उन्होंने कहा था कि – भारत की आम जनता देश हित में योगदान देने के लिए किसी भी मुश्किल का सामना करने को हमेशा तत्पर होती है। #oladriver #appreciation #respect

(साभार – द बेटर इंडिया)

भारतीय मूल की ‘चायवाली’ उपमा बनीं बिजनेस वूमन ऑफ द इयर

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अगर आप मेलबर्न में रहते हैं तो आपके लिए ‘चायवाला’ या ‘चायवाली’ बनना आसान नहीं है। चूंकि ऑस्‍ट्रेलिया में लोग कॉफी का अधिक सेवन करते हैं इसलिए यहां चाय बेचकर अपनी पहचान बनाना आसान काम नहीं है।

पर ये कारनामा कर दिखाया है 26 साल की उपमा विरदी ने। उपमा भारतीय मूल की हैं और वकील हैं. उपमा फुल टाइम चाय का रेस्‍टोरेंट या कैफे नहीं चलातीं लेकिन चाय का ऑनलाइन बिजनेस जरूर करती हैं. वे चाय पर वर्कशॉप्‍स भी करती हैं.

चाय से उनका ये प्‍यार उनके दादा जी के कारण है, जो आयुर्वेदिक डॉक्‍टर थे। वे जब छोटी थीं तब पूरे परिवार के लिए चाय बनाती थीं। बस वहीं से उन्‍हें महसूस हुआ कि वे परफेक्‍ट चायवाली बन सकती हैं। विरदी का परिवार चंडीगढ़ में है। वे भी उसी तरह चाय बनाती हैं जितने प्‍यार से हम भारतीय बनाते हैं। विरदी ने कहा, ‘भारतीय परंपरा में लोग चाय के माध्‍यम से पास आते हैं. चाहे खुशी का माहौल हो या गम का, लोग चाय पीते ही हैं। मैंने बहुत कोशिश की लेकिन मैं ऑस्‍ट्रेलिया में चाय के अच्‍छे ठिकाने नहीं ढूंढ़ सकी.’

वे कहती हैं, ‘लोग अब ऑस्‍ट्रेलिया में चाय को पसंद कर रहे हैं क्‍योंकि वे कॉफी का अच्‍छा विकल्‍प तलाश रहे हैं। मेरा असली मकसद तो चाय के बहाने से ऑस्‍ट्रेलियाई लोगों को भारतीय संस्‍कृति से रूबरू करना है.।

विरदी को इंडियन ऑस्‍ट्रेलियन बिजनेस एंड कम्‍युनिटी अवॉर्ड्स यानी IABCA ने बिजनेस वूमन ऑफ द ईयर 2016 के खिताब से नवाजा है।

 

शादी से एक दिन पहले तक अभ्यास करेगी गीता फोगाट

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नयी दिल्ली,क्या आपने कभी हाथों में मेहंदी लगाए किसी महिला को शादी से एक दिन पहले या शादी के तीन दिन बाद अखाड़े में दांव पेंच लगाते या कुश्ती मैट पर लोटते देखा है। देश की पहली महिला ओलंपियन पहलवान गीता फोगाट को अगले महीने होने वाले पेशेवर कुश्ती लीग : पीडब्ल्यूएल : में इस रूप में देखा जा सकता है। गीता पीडब्ल्यूएल को लेकर इतनी गम्भीर हैं कि 20 नवम्बर को होने वाली अपनी शादी से एक दिन पहले तक वह अ5यास करती रहेंगी और हनीमून पर जाने के बजाय तीन दिन बाद अखाड़े में लौट आएंगी। यह पहलवान अभी अपने घर के परिसर में बने अखाड़े में अपने पिता और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता महावीर की देखरेख में अ5यास कर रही है। गीता के एक भाई दुष्यंत अ5यास में उनकी मदद कर रहे हैं। पूरे परिवार का एक ही मकसद है कि गीता एक बार फिर से अपने वजन में शीर्ष स्थान हासिल करें। हाथों में मेहंदी लगाए अ5यास करने की यह मिसाल आपको शायद ही कहीं मिले। गीता ने कहा, ‘‘मेरे मंगेतर पवन भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान हैं। उनसे उनकी कुश्ती पर भी खूब बात होती है। हम पीडब्ल्यूएल में खेलना चाहते हैं। किसी एक टीम में खेलने की बात कहकर हम किसी फ्रेंचाइज़ी मालिक पर दबाव नहीं बनाना चाहते। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम दोनों का यही मानना है कि हम चाहे किसी भी टीम में रहें, हमारी शुभकामनाएं एक दूसरे के प्रति हमेशा रहेंगी। हमने फिलहाल शादी के बाद कहीं घूमने का कार्यक्रम पीडब्ल्यूएल तक टाल दिया है। इस लीग में एक मुकाम हासिल करने के बाद घूमने के बारे में सोचूंगी।

 

नोट बंदी के बाद अपनी दरियादिली से लोगो का दिल जीत रहे ये लोग!

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पुराने पांच सौ और हज़ार के नोट बंद हो जाने से जहाँ आम जनता को कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है वहीँ आम भारतियों के बीच संयम और सोहार्द की कहानियां भी सामने आ रही है। देश में काले धन के खिलाफ इस जंग में अपना पूरा योगदान करते ऐसे ही तीन कहानियां आज हम आपके सामने ला रहे है।

मोदी की नोटबंदी को चायवाले ने किया हिट, ऑनलाइन पेमेंट पर दे रहा चाय

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान ये बात कही थी कि वो बचपन में चाय की दुकान चलाते थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद नोटबंदी को मोदी की सबसे बड़ी घोषणा के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इस घोषणा से हुई परेशानी को देखते हुए दिल्ली के एक चाय वाले ने अनोखी पहल की है।

दिल्ली के आरके पुरम इलाके में चाय की दुकान चलाने वाला शख्स अपने सभी ग्राहकों से चाय के लिए खुले पैसे मांगने की बजाए उनसे ऑनलाइन पैसे ले रहा है।चाय की दुकान चलाने वाले मोनू का कहना है कि वो सात रुपये से कम का भी पेमेंट ऑनलाइन ही ले रहा है क्योंकि वो सरकार की नोटबंदी का समर्थन करता है। मोनू के यहां चाय पीने वाले एक कस्टमर का कहना है कि एक चायवाले की ये पहल काबिलेतारीफ है, क्योंकि फिलहाल कैश और छुट्टे पैसों की लोगों के पास बेहद कमी है। बता दें कि पिछले कई दिनों से देशभर में बैंकों से लेकर एटीएम के बाहर लंबी कतारें लगी हुई हैं क्योंकि सरकार द्वार 1000 और 500 के पुराने नोटों की बंदी के बाद से लोगों के पास कैश की बेहद कमी पैदा हो गई है।

रांची के इस अस्पताल में मिल रहा है मुफ्त इलाज

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जहाँ मिडिया में ऐसे अस्पतालों के बारे में बताया गया जो पुराने नोट होने की वजह से मरीजों का इलाज करने से इनकार कर रहे है, वहीँ रांची के विनायक अस्पताल के मुख्य, डॉ. चंदन कुमार ने इंसानियत की एक नयी मिसाल खड़ी कर दी है

डॉ. चंदन कुमार ने नोटबंदी होने के बाद 10 से 13 अक्टूबर तक अपने अस्पताल में ऐसे सभी मरीजों का इलाज निःशुल्क किया, जिनके पास सिर्फ 500 या हज़ार के ही नोट बच गए थे।

डॉ. चंदन कुमार ने कहा, ‘मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद अच्छा निर्णय लिया है। फिलहाल नोटों की कमी को देखते हुए 10 से 13 नवंबर तक यहां इलाज मुफ्त किया गया है, ताकि लोगों को परेशानी न हो।”

मुसाफिरों को मुफ्त में खाना खिलाता होटल मालिक

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अकोला के नॅशनल हायवे क्रमांक 6 पर बालापुर में स्थित मराठा हॉटेल के आगे आपको आजकल एक बोर्ड नज़र आएगा, जिसपर लिखा है,

‘गाँव के बाहर से आये मुसाफिरों, यदि आपके पास सिर्फ 500 या हज़ार का ही नोट है तो बिलकुल चिंता न करे। आप यहाँ खाना खाकर जाएँ और अगली बार आकर बिल का भुगतान करे।’

इस होटल के मालिक, मुरलीधर राउत ने 8 नवम्बर को नोटबंदी होने के बाद इस बात पे गौर किया कि इस बात से सबसे ज्यादा परेशानी उन मुसाफिरों को हो रही है जिनके पास हाईवे या अन्य छोटी जगहों पर खाना खाने तक के लिए खुल्ले पैसे नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपने होटल के आगे ये बोर्ड लगाकर काफी लोगों की परेशानी दूर कर दी।

हम सभी देश में बदलाव की आशा रखते है। पर उसमे योगदान देने की बारी आती है, तो थोडा डगमगा जाते है। पर इस तरह की कहानियां ये साबित करती है कि यदि सभी भारतीय एक-जुट हो जाएँ तो  हर मुसीबत का हंस कर सामना कर सकते है।

(साभार – द बेटर इंडिया)

500 और 1000 के नोटों की लुग्दी से बनेगी ईंटे, पूरी दुनिया में अलग-अलग इस्तेमाल

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इस बात को लेकर माथापच्ची में लगा है कि हजारों टन पुराने नोटों को कैसे ठिकाने लगाया जाए। इस काम को लेकर कई तरह के प्रस्ताव आ रहे हैं और इस काम को अंजाम देने के लिए ठेकेदारों की तलाश भी शुरू हो गई है। जानकारों का कहना है कि आरबीआई को इस बारे में कई रोचक विकल्प मिले हैं। इनमें बारीक टुकड़े कर नोटों की सड़कें बनाना, उनसे ईंटें बनाना और नोटों से गड्ढे भरना, पुराने नोटों से स्मारक बनाना और उनकी मदद से कपड़ा बनाकर उसे स्मारक के तौर पर बेचने के विकल्प शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि इन नोटों के अलावा आरबीआई के पास पहले से पड़े करोड़ों लोगों द्वारा लौटाए जाने वाले पुराने नोटों को नष्ट करने का जिम्मा है।

कई ट्रक नोट 

आरबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि भारत के केंद्रीय बैंक के पास कई ट्रक ऐसे नोट हैं। इन नोटों के ऐसे टुकड़े किए जाएंगे कि इन्हें दोबारा जोड़ा न जा सके। उसके बाद इन्हें तपा कर ईंट की शक्ल में बदल दिया जाएगा। उसके बाद इन्हें गड्ढे भरने  वाले ठेकेदारों को दे दिया जाएगा। मार्च 2016 तक 500 के करीब 1570 करोड़ नोट प्रचलन में थे। वहीं 1000 के करीब 632 करोड़ नोटों का इस्तेमाल हो रहा था।

कुछ जगहों पर जलाया भी जाता है

दुनिया में प्रचलन से बाहर कर दिए गए नोटों को नष्ट करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं। कुछ जगहों पर जलाया भी जाता है। बैंक ऑफ इंग्लैंड 1990 तक ऐसे नोटों को जलाकर बैंक की इमारत को गर्म रखने का काम लेता था। 2000 के दशक की शुरुआत में बैंक ने पुराने नोटों को रिसाइकिल करना शुरू कर दिया। रिसाइकलिंग में नोटों को जमीन के नीचे दबाकर सड़ाया जाता है और बाद में इसका इस्तेमाल खाद के तौर पर किया जाता है।

नोटबंदी का असर – 80% गिरा हवाला कारोबार, कश्मीर में पत्थरबाजी हुई कम

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नोटबंदी के फैसले के बाद हवाला कारोबार में 80% तक गिरावट आ गई है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के मुताबिक 3 दिनों के भीतर खाड़ी देशों और कश्मीर घाटी के बीच एक भी हवाला ट्रांजैक्शन सामने नहीं आया है। रिपोर्ट बताती है कि ब्लैक मनी बाहर लाने के लिए नोटबंदी का फैसला असर दिखा रहा है। इधर कश्मीर में भी सुरक्षा बलों पर होने वाला पथराव अचानक बंद हो गया है। खुद रक्षामंत्री तथा गृहमंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है।  8 नवंबर को लिए गए नोटबंदी के फैसले चलते दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद और मुंबई में हवाला ऑपरेटर्स अंडरग्राउंड हो गए हैं।

– IB ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “नोटबंदी के बाद ऑपरेटर्स के अंडरग्राउंड होेने के चलते मनी लॉन्ड्रिंग थम-सी गई है।” IB ने अपनी रिपोर्ट होम मिनिस्ट्री को सौंपी है। मिनिस्ट्री ने IB और नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी (NIA) को नोट बंदी के असर की मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा है।  बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद हो रहे प्रदर्शनों के चलते IB और NIA कश्मीर घाटी में हवाला फंडिंग की डिटेल इन्वेस्टिगेशन कर रही है।

डर रहे हैं हवाला ऑपरेटर्स
– IB की रिपोर्ट के मुताबिक, “कश्मीर घाटी में सिक्युरिटी फोर्सेज की कार्रवाई के चलते हवाला कारोबारी डर रहे हैं। “हवाला ऑपरेटर्स ब्लैक मनी लेने में घबरा रहे हैं, वो ऐसा खतरा मोल लेने को तैयार नहीं हैं।”इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सर्वे में भी इसी तरह के फैक्ट्स सामने आए हैं।हवाला के जरिए टेररिज्म, ड्रग कारोबार को फंडिंग की जाती है। हवाला कारोबार में किसी तरह के बिल या पेपर्स का यूज नहीं होता है। ये कारोबार केवल ‘जुबान’ पर चलता है, जिसकी फीस ली जाती है।बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किए बगैर एक जगह पर डिलिवर किया गया कैश दूसरी किसी भी जगह पर उपलब्ध करा दिया जाता है।