Saturday, March 21, 2026
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कंट्रोवर्शियल भाभीजी’ की भूमिका में वापसी करेंगी शिल्पा शिंदे

शिल्पा शिंदे के प्रशंसकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। ‘भाभी जी घर पर हैं’ का साथ छूटने के बाद वो दोबारा से वापसी कर रही हैं। अपने एक नए शो ‘कंट्रोवर्सियल भाभीजी’ में वो भाभीजी के अवतार में नजर आएंगी। यह शो डिजिटल प्लैटफॉर्म पर लॉन्च होगा।

अपनी वापसी को लेकर शिल्पा ने कहा,’जो लोग बेचैन थे कि शिल्पा कहां गायब हो गईं, क्या कर रही हैं, इस शो से उन लोगों को जवाब मिल जाएगा।’

इसके साथ ही उन्होंने कहा,’मेरे शो छोड़ने के बाद हुए विवादों पर यह शो एक स्पूफ की तरह होगा। मैं एक साधारण महिला हूं लेकिन लोगों ने छोटी-छोटी बातों का बतंगड़ बनाते हुए मुझे विवादित बना दिया। अगर ऐसा ही है तो अच्छा है कि मैं इसे इंजॉय करूं।’

गौरतलब है कि कुछ महीनें पहले ही शिल्पा का अपने शो ‘भाभी जी घर पर हैं’ के डायरेक्टर के काफी विवाद हो गया था, जिसके बाद शिल्पा ने शो को अलविदा कह दिया था। हालांकि शिल्पा की जगह शो में शोभांगी आत्रे ने ले ली है लेकिन शिल्पा के प्रशंसक उन्हें आज भी शो में काफी मिस करते हैं।

 

खुद प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण बनाने में जुटे वृद्ध दंपति

सूरत के गौरांग और स्मिता देसाई, वीर सावरकर पार्क में जगह-जगह फैले प्लास्टिक के कचरे को उठाकर कूड़ेदान में फेंकते हैं। इनके इस योगदान के कारण बाग में सैर के लिए आने वाले लोगों को एक स्वच्छ वातावरण मिल पाता है।

गौरंग और स्मिता मुम्बई के टाटा पावर लिमिटेड से रिटायर्ड इंजीनियर हैं। प्लास्टिक के कचरे के प्रति लोगों के उदासीन रवैये और सार्वजनिक जगहों पर फैले गुटखा-तंबाकु के पैकेट से परेशान होकर इन्होंने खुद ही कचरा बटोर कर कुड़ेदान में डालने का निर्णय लिया। प्लास्टिक के कचरे को हटाने की इस मुहीम की शुरुआत इन्होने 2005 से कर दी थी ।

कुछ दिन पहले जब वे कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए थे तो वहाँ भी उनका ध्यान प्लास्टिक के कचरे पर था।

2005 में दांडी मार्च की 75वीं वर्षगाँठ मनाने के लिए साबरमति से दांडी तक पदयात्रा की गई थी।  गौरंग ने भी इसमें हिस्सा लिय़ा था। इसमें हिस्सा लेने वालों से मिलने आने वाले लोग इधर-उधर कचरा फेंक रहे थे। गौरंग ने उसे बटोरना शुरू कर दिया। इसके बाद 2014 में ये दोनों सूरत आ गए।

हमने ये काम गाँधी जी से प्रेरित होकर शुरू किया। शुरूआत में तो लगभग 12 बैग कचरा मिलता था। हालाँकि, अब स्थिति कुछ सुधरी है।गौरंग ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा।

इन्होंने करीब 200 कपड़े के थैले लोगों में बाँटें हैं। 1000 कपडे के थैलो का ऑर्डर और दिया है जिसे वो सब्जी मंडी में बाँटेंगे।

स्मिता का कहना है, “हमारा एकमात्र मकसद पर्यावरण को प्लास्टिक के खतरे से बचाना है।

 हमें यकीन है कि स्वच्छ भारत का जो सपना बापू ने देखा था वो देसाई दंपत्ति जैसे नेक लोगो की कोशिशो से एक दिन ज़रूर पूरा होगा!

(साभार – द बेटर इंडिया)

एमबीए पास राधिका ने नौकरी छोड़ खोला ढाबा

सपने छोटे हो या बड़े, उनको पूरा करने के लिए जरूरत होती है जोश और आत्मविश्वास की. इस बात को राधिका अरोड़ा की हिम्मत और जोश ने साबित कर दिखाया है। काम कोई भी हो उसे करने की लगन चाहिए होती है और फिर कामयाबी आपके साथ चल पड़ेगी.

हरियाणा के अंबाला की राधिका ने पहले बी.कॉम किया फिर उच्‍च शिक्षा के लिए एमबीए करने चंड़ीगढ़ आ गई। राधिका ने पहले तो नौकरी की. फिर उन्‍हें कुछ ऐसा सूझा कि उसके बाद रिलायंस कंपनी में मिली नौकरी छोड़ कर खाने की रेहड़ी लगा ली।

हरियाणा के अंबाला की राधिका ने मोहाली इंडस्‍ट्रियल एरिया में एक फूड ज्‍वाइंट खोला है। सबसे मजेदार और अनोखी बात ये है कि राधिका ने एमबीए किया है और वे रिलायंस में एचआर की शानदार नौकरी छोड़कर मोहाली में खाने की रेहड़ी लगा रही हैं।

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बीकॉम की पढ़ाई के बाद एमबीए करने के लिए राधिका अंबाला से चंडीगढ़ आ गई थी और उसी दौरान उन्‍होंने पेइंग गेस्‍ट बनकर रहना शुरू किया। यहां रहने के दौरान राधिका को पेइंग गेस्ट का खाना अच्छा नहीं लगता था। खाने की समस्या ने राधिका को नौकरी के दौरान काफी परेशान किया. तभी उन्हें लगा कि बजाय कहीं और नौकरी करने के अच्छा है अपना काम शुरू किया जाए। राधिका ने पढ़ाई के दौरान सबसे ज्‍यादा घर के खाने को याद किया था इसलिए उन्‍हें फूड ज्‍वाइंट खोलना तय किया.

राधिका स्‍वभाव से चुलबुली और काफी एक्टिव हैं। रास्‍ता चुन लेना और उस पर चलना बहुत मुश्किल होता है. उन्‍होंने अपने बुलंद हौसले के साथ इस काम की शुरुआत की। लोगों को अपनेपन का एहसास कराने के लिए उन्‍होंने रेहड़ी का नाम रखा है माँ का प्यार। आज वो हर रोज घर से बाहर रहने वालों को घर का खाना बनाकर खिलाकर खुशियां फैला रही हैं। उन्‍हें इस काम का रिस्‍पान्स भी बहुत अच्‍छा मिल रहा है.

उनके फूड कोर्ट में राजमा-चावल, कढ़ी चावल, दाल-चावल और रोटी सब्जी सहित वो सब कुछ मिलता है जो घर में बनता है। मोहाली के इंडस्ट्रियल एरिया में वो रोजाना एक बजे से तीन बजे तक रेहड़ी लगाती हैं। आज 70 लोगों का खाना रोज बनाने वाली लड़की को कभी खाना बनाना पसंद नहीं था, पर अब ऐसा जोश चढ़ा है की अकेले ही राधिका सब संभाल रही हैं। इस काम को शुरू करने के लिए उन्‍होंने एक लाख रुपये का निवेश किया है.

जब ये काम शुरू करना था तब उनके बिजनेसमैन पिता को कामयाबी मिलने पर संदेह था। इसकी वजह राधिका का लड़की होना था, क्‍योंकि किसी काम को करना आज के आधुनिक समाज में भी लड़कियों के लिए लड़कों की अपेक्षा अक्‍सर थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इन सबके बावजूद राधिका के हौसल को देखते हुए परिवार के सभी सदस्‍यों ने उनका पूरा साथ दिया। आज कामयाबी मिलने के बाद वो भविष्‍य में चंडीगढ़ के आईटी पार्क में अपना फूड कोर्ट खोलने की प्‍लानिंग कर रही हैं।

 

कर्नाटक की लक्ष्मी ने उम्र भर की कमाई से गाँव में खुदवाया कुआँ

कर्नाटक के बेहद सुदूर हिस्से में बसे एक गाँव में पेंशन के सहारे बेहद कम साधनों में अपनी जीविका चलनेवाली एक महिला ने अपनी पेंशन से मिलने वाली रकम बचाकर गाँव के लोगो के लिए एक कुआँ खुदवाया है।

60 वर्षीय लक्ष्मी कर्नाटक में मंगलुरु के निकट उडुपी जिले के एक बेहद छोटे और सुखा पीड़ित गाँव आमपारू में रहती है। आम्रपारू ग्राम पंचायत पथरीले  भू-भाग में स्थित है जहा पीने योग्य पानी के साधनों की बेहद कमी है। भीषण गर्मी में जब आस पास कही पानी उपलब्ध नहीं होता तो गाँव वालो को टैंकर के पानी से काम चलाना पड़ता है और बाकि पुरे साल उन्हें अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए सबसे नजदीकी पानी के स्त्रोत से पानी लाने के लिए 2-3 किमी चलना पडता है। इस इलाके के हैण्डपंप भी पीने योग्य पानी की जरुरत को पूरा नहीं कर पाते है।

गाँववालो की पीने के पानी की भीषण समस्या के लिए लक्ष्मी ने पहल की और गाँव की चार और महिलाओ के साथ मिलकर एक टीम बनायीं। इसके बाद एक निश्चित स्थान तलाश कर के इन लोगो ने एक कुआँ खोदना शुरू कर दिया।

लक्ष्मी और उसकी टीम की बाकि महिलाओ ने कठिन परिश्रम के बाद एक 52 फीट गहरा और 6 फीट चौड़ा कुआँ खोदने में सफलता पाई और आज ये कुआँ आम्रपारु ग्राम पंचायत के विवेक नगर कॉलोनी में गाँव वालो के इस्तेमाल के लिए पूरी तरह से तैयार है। आज गाँव के 10 से भी ज्यादा घर अपनी पानी की जरुरत के लिए पूरी तरह से इस कुएं के ऊपर निर्भर है और साथ ही साथ ये अन्य गांववालों  की जरुरत भी पूरी करता है। ये कुआं सरकार की मनरेगा योजना के तहत बनाया गया जिसमे गाँव के बेरोजगार व्यक्तियों को 100 दिन के पक्के रोजगार देने का वायदा किया जाता है। ग्राम पंचायत ने भले 82000 रुपये  योजना को पूरा करने के लिए दिए पर यह धनराशी इस योजना को असली जामा पहनने के लिए अपर्याप्त थी। इस योजना को पूरा करने में 1.18 लाख की धनराशी की आवश्यकता थी। पर लक्ष्मी अपने इरादों में पक्की थी। उसने अपनी पेंशन से बचाकर जमा की गयी पूरे जीवन की धनराशी और साथ ही साथ मानरेगा के तहत दी गयी राशि को इस कुए के निर्माण में लगा दी।

आम्रपारु ग्राम पंचायत के उप-प्रधान किरण हेगड़े नेटाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया, “लक्ष्मी काफी साहसी और इरादों में काफी दृढ महिला है और बाकि लोगो के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।

इस महिला ने अपनी उम्रभर की जमा पूंजी को समाज की बेहतरी के काम में खर्च कर दिया।

(साभार – द बेटर इंडिया)

नये अंदाज में फिर से इस्तेमाल करें शादी का लहंगा

शादी आपकी हो या आपने किसी की शादी में पहनने के लिए लहंगा खरीदा हो, वह आलमारी में पड़े – पड़े खराब हो जाए, आप हरगिज नहीं चाहेंगी। फिर भी शादी में एक बार पहनने के बाद वो लहंगा हमेशा के लिए आपकी अलमारी में बंद हो जाता है. आज एक बार फिर से उस लहंगे को बाहर निकालें और उसे नया लुक देकर पहनें, हम बताते हैं कैसे –

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दुपट्टें को करें ऐसे इस्तेमाल – आपका लंहगा किसी भी कलर का हो, उसके दुपट्टे को अलग-अलग स्टाइल्स में अलग-अलग कपड़ों के साथ पेयर करें. इसे स्ट्रेट फिट वाले सूट, अनारकली, या फिर पटियाला सलवार-कमीज़ के साथ पहनें। अगर आपका वेडिंग दुपट्टा नेट या टिशू का है तो इसे सिर्फ उसी कलर के रॉ सिल्क सूट या वेल्वेट अनारकली के साथ ट्राय करें। अगर आपका दुपट्टा जॉर्जेट का है तो इसे क्रेप या कॉटन सलवार-कमीज़ के साथ पहनें।

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चोली से बनाएं ब्लाउज़ – शादी के लहंगे की चोली के साथ एक्सपेरिमेंट करें और इसे किसी साड़ी के साथ पहनें। जैसे अगर आपके पास एम्ब्रॉइडरी वाली क्रेप चोली है तो इसे सिंपल क्रेप साड़ी के साथ पेयर करें। वेलवेट चोली को नेट साड़ी या वेलवेट साड़ी के साथ पहनें. ऐसे में किसी को भी पता नहीं चलेगा कि आपने साड़ी के साथ अपनी शादी की चोली पहनी है। दोस्त की शादी या कोई फंक्शन अटेन्ड करना हो तो आप कोई सिंपल लहंगा खरीदें और उसे शादी की चोली और दुपट्टे के साथ पहन लें। ऐसा करके आपके पैसे भी बचेंगे और आपका शादी का लहंगा भी इस्तेमाल हो जाएगा. ब्लाउज़ आगे से ही नहीं पीछे से भी हो।

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साथ पहनें – ऐसे में किसी को भी पता नहीं चलेगा कि आपने साड़ी के साथ अपनी शादी की चोली पहनी है। दोस्त की शादी या कोई फंक्शन अटेन्ड करना हो तो आप कोई सिंपल लहंगा खरीदें और उसे शादी की चोली और दुपट्टे के साथ पहन लें। ऐसा करके आपके पैसे भी बचेंगे और आपका शादी का लहंगा भी इस्तेमाल हो जाएगा।

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ड्रेप से लुक बदलें – क्रिएटिव बनें और अपने लहंगे के लुक को पूरा बदल दें, क्योंकि फैशन का मतलब है कुछ नया करना और कुछ ख़ास बनाना. आप अपने लहंगे को अलग-अलग तरह से ड्रेप करें. जैसे साड़ी स्टाइल, गुजराती लंहगा स्टाइल या रिस्ट स्टाइल (जिसमें दुपट्टे का एक कोना अपनी कलाई पर बांधते हैं). आप अलग से एक कॉट्रैस्टिंग दुपट्टा को भी अपने लहंगे के साथ स्टाइल कर सकती हैं।

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प्रयोग करें – शादी के टाइम आप लहंगे के रंग, डिज़ाइन, एंबेलिशमेंट सब पर ध्यान देती हैं, लेकिन सिर्फ एक बार उसे पहन कर क्यों बरबाद करना? एक बार फिर से नए लुक के लिए अपने हेवी लहंगे को बैन्डो या कॉर्सेट के साथ पहनें. प्लेन, हल्के काम वाले कॉर्सेट आपके भारी भरकम लहंगे पर बहुत अच्छे लगेंगे। इसके अलावा इसे आप शीयर जैकेट के साथ भी पहन सकती हैं। इन जैकेट लहंगों को खरीदने के बजाय अपनी शादी के लहंगे को जैकेट लहंगा बनाएं। अपनी पसंद के फैब्रिक और इम्ब्रॉइडरी से डिज़ाइन कराएं।

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लहंगे को बनाएं अनारकली – अगर आपके पास कोई अच्छा टेलर है, तो आप अपने लहंगे या चोली (ब्लाउज़) का अनारकली भी बनवा सकती हैं। ऊपर के लिए सिंपल फैब्रिक को लहंगे के घेरे के साथ सिलवा लें। ऐसे ही अगर चोली का अनारकली बनवाना है तो इसके नीचे किसी अच्छे फैब्रिक की कलियां जुड़वा लें।

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सेरेना ने 7वीं बार जीता विबंलडन का खिताब, स्टेफी ग्राफ के 22 ग्रैंड स्लैम की बराबरी

सेरेना विलियम्स ने इतिहास रच दिया है। विंबलडन में एकल महिला वर्ग के फाइनल में सेरेना विलियम्स ने जीत हासिल कर स्टेफी ग्राफ के 22 ग्रैंडस्लैम के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। स्टेफी ग्राफ ने 20 साल पहले यहां विंबलडन खिताब जीता था।

चौंतीस साल की सेरेना ने सातवीं बार विंबलडन खिताब अपने नाम कर लिया है। सेरेना ने शानदार खेल खेलते हुए जर्मनी की एंजेलिक कर्बर की चुनौती का सामना किया और जीत हासिल की। 28 साल की कर्बर उन्हें ऑस्ट्रेलियन ओपन के खिताबी मुकाबले में हरा चुकी हैं।

सेरेना ने कोर्ट में काफी चुस्ती दिखाते हुए कर्बर को 7-5, 6-3 के सीधे सेट में हराया। कर्बर ने साल के पहले ग्रैंडस्लैम ऑस्ट्रेलियन ओपन के फ़ाइनल में सेरेना को हराकर अपना पहला ग्रैंडस्लैम खिताब जीता था।

दोनों शानदार खिलाड़ियों के बीच अब तक कुल 7 बार मुकाबला हो चुका है और 5 बार बाजी सेरेना के हाथ रही है।

इसके पहले सेमीफाइनल मुकाबले में सेरेना ने गुरुवार को रुस की एलेना वेसनीना को सीधे सेटों में 6-2,6-0 से मात दी थी. सेमीफानल का मैच उन्होंमे सिर्फ 48 मिनट में अपने नाम कर लिया था।

 

बजाज इलेक्ट्रिकल्स ने उतारा प्लाटिनी किचेन अप्लाएंसेज

बजाज इलेक्ट्रिकल्स ने अब किचेन अपलाएंसेज के बाजार में कदम रख दिया है। हाल ही में कम्पनी ने प्लाटिनी ब्रांड नाम के तहत प्लाटिनी स्टैंड मिक्सर, प्लाटिनी विटामिन जूसर और प्लाटिनी ब्रेड मेकर उतारा। ये सभी उत्पाद फिलहाल अमेजन पर उपलब्ध हैं।

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कम्पनी का दावा है कि ये तोनों रसोई के उपकरण काम आसान करेंगे क्योंकि उनको इस तरह तैयार किया गया है कि महिला हो या पुरुष, दोनों आसानी से काम कर सकेंगे। विटामिन जूसर फलो और सब्जियों के पोषक तत्वों को बचाकर रखता है तो स्टैंड मिक्सर केक से लेकर स्मूदी तक बनाने में सुविधा प्रदान करेगा। ब्रेड मेकर 12 तरह के ब्रेड और जैम एक बटन में तैयार कर सकता है।

नहीं रहा दुनिया का ‘सबसे अमीर ग़रीब आदमी’

पाकिस्तान के जाने माने समाजसेवी अब्दुल सत्तार ईधी का गत शुक्रवार रात निधन हो गया. उन्हें शुक्रवार सुबह डायलिसिस के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अब्दुल सत्तार की तबियत बिगड़ने की रिपोर्ट के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर उनके लिए दुआएं मांगी, जो उनकी मौत की ख़बर के बाद श्रद्धांजलि में बदल गईं. अब्दुल सत्तार ईधी के नाम से संचालित अकाउंट से बताया गया कि उनके आख़िरी शब्द थे, “मेरे मुल्क के ग़रीबों का ख़्याल रखना.” एक और ट्वीट में कहा गया, “उन्होंने अपने एकमात्र सक्रिय अंग आँखों को दान कर दिया. अपना सबकुछ वो पहले ही दान कर चुके थे.” पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक ने लिखा, “एक चमकता हुआ सितारा अपने शुरू किए गए काम को हमारे लिए पूरा करने के लिए छोड़ गया है. मेरी दुआएँ ईधी साहब और उनके परिवार के साथ हैं.”पाकिस्तान के चर्चित धर्मगुरू ताहिर-अल-क़ादरी ने लिखा, “मैं अब्दुल सत्तार ईधी साहब के निधन से दुखी हूं।”

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मुहम्मद लीला ने लिखा, “जिन लोगों के बारे में आपने सुना है, वो उनमें सबसे सबसे महान थे.”

माहिरा ख़ान ने ट्वीट किया, “अल्लाह खुली बांहों से उनका स्वागत करेंगे. उन जैसा दूसरा नहीं होगा.” माइकल कूगलमैन ने ट्वीट किया, “ईधी पाकिस्तान और दुनिया के महानतम हीरो में से एक हैं. हमें इस दुनिया में ईधी जैसों की ज़रूरत है.”

क्रिकेटर अहमद शहज़ाद ने लिखा, “मैं बहुत दुखी हूँ. दुनिया के महानतम मानवतावादियों में से एक के लिए दुआ कीजिए. आइए हम उनके विचारों और कामों का अनुरसण करके उन्हें ज़िंदा रखें.”

मोईद पीरज़ादा ने लिखा, “ईधी जैसे पवित्र मन और आत्मा वाले व्यक्ति इस देश में हमारे बीच थे. ये बताता है कि उम्मीद अभी बाक़ी है.”

वहीं भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लिखा, “शोक संतप्त परिवार और ईधी फ़ाउंडेशन के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना है.”

 

ईद और उपहार —  भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज के विद्यार्थियों की अनोखी पहल

ईद के पवित्र त्योहार पर भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज के विद्यार्थियों की एन एस एस यूनिट ने एक नई पहल की है जो सभी के लिए प्रेरणादायक है। यह उन गरीब बच्चों के चेहरों पर आई खुशी और प्रसन्नता की लहर है जो उन्होंने कभी नहीं सोचा था। वे भी अपनी मर्जी से कुछ खरीदारी कर सकेंगे यह तो बिल्कुल ही नहीं सोचा था  जिन बच्चों के रहने के लिए खुला आकाश हो,खाने के लिए अपने हाथों से परिश्रम करना पड़ता है  तब कहीं खाने के लिए कुछ मिलता है या फिर खाली पेट ही रेल की पटरियों के किनारे किसी कोने में नींद में पड़े सुबह का इंतजार करते, शायद कुछ अच्छा मिले। ऐसे बच्चों को ईदी मिल जाए तो ऊपर वाले भगवान,ईसा, अल्लाह की मेहरबानी है।

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भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज के विद्यार्थी ऐसे 250 बच्चों को साथ लेकर क्वेस्ट मॉल गए जहां उन्हें अपनी मर्जी से खरीदारी करने का पहला सुनहरा अवसर मिला। इसकेआयोजन के पीछे कॉलेज के प्रथम वर्ष के स्वागत समारोह के दौरान डीन प्रोफेसर दिलीप शाह के दिमाग की उपज थी जिसे वोलेंटियर छात्रा  यामिनी गंभीर ने सकारात्मक रूप दिया।
इस कार्यक्रम का आयोजन तिलजला शेड एनजीओ के संयोजन में हुआ। मुदरा पथुरिया और कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज डी. शाह  का विशेष सहयोग रहा।इसके अतिरिक्त कॉलेज के पवन अग्रवाल(चेयरमेन, एन के रियेल्टर) और व्यक्तिगत रूप से  सहयोग धनराशि प्रदान की।
प्रत्येक बच्चे को ईदी के रूप में 500 रूपये की खरीदारी का अवसर देना एक सुअवसर ही है।भवानीपुर कॉलेज के प्रोफेसर दिव्येश शाह के निर्देशन में कॉलेज की एन एस एस युनिट ने गरीब परिवार के 250 बच्चों को क्वेस्ट मॉल के स्पेंसर में शॉपिंग करवाई जो उन गरीब बच्चों के लिए एक अनोखा अनुभव था,असंभव घटना थी।
“बच्चे तो बच्चे ही होते हैं “वहां किसी मजहब की दिवार नहीं होती,उनके चेहरे की मुस्कान एक ही होती है जो ईश्वरीय देन है। ईद के पूर्व उन बच्चों ने अपनी ईदी स्वयं खरीदी, उस समय उनकी खुशी को देखकर लग रहा था कि उनसे उनका गम और उदासी कोसों दूर चली गई है।बोर्नविटा, हॉर्लिक्स, टूथब्रश, टूथपेस्ट, टिफ़िन बॉक्स, कैडबरी आदि विभिन्न वस्तुएं उनहोंने स्वयं खरीदी।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद नदिमुल हक एवं उनकी बेगम फरहा, नेता तौसीफ़ रहमान एवं सहसचिव आदि उपस्थित थे। कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज शाह ने ईद पूर्व सभी को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं प्रदान की।
(रिपोर्ट -डॉ. वसुंधरा मिश्र)

 

अमृतसर के सुलेमान के नाम इंडियाज गॉट टैलेंट का खिताब

मुंबई। अमृतसर के 13 वर्षीय बांसुरी वादक सुलेमान ने शनिवार को इंडियाज गॉट टैलेंट के सातवें संस्करण का खिताब अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि के लिए उन्हें 50 लाख रुपये नकद, मारुति सुजूकी सेलेरियो और विशेष आकृति में तैयार ट्राफी प्रदान की गई है।

ट्राफी पर ज्यूरी मेंबर्स किरण खेर, मलाइका अरोड़ा खान और करण जौहर के हस्ताक्षर भी हैं। अमृतसर के कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूल के छात्र सुलेमान प्रसिद्ध बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया के शिष्य हैं।

जीत के बाद सुलेमान ने कहा, “इंडियाज गॉट टैलेंट का विजेता बनना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। आज मेरे पिता का सपना सच हो गया है। इस शो ने मुझे मेरे हुनर को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिए प्लेटफार्म उपलब्ध कराया।

साथ ही मेरी प्रतिभा को और निखारने का भी अवसर दिया।” सुलेमान ने अपनी उपलब्धि के लिए पिता और सभी गुरुजनों विशेषकर पंडित हरिप्रसाद चौरसिया का आभार प्रकट किया। कहा कि इन लोगों के बिना मैं यह मुकाम हासिल नहीं कर सकता था।

शो के बारे में कलर्स चैनल की प्रोग्राम हेड मनीषा शर्मा ने कहा, “इस बार हमने लीक से हटकर कार्यक्रम का आयोजन किया।”