खुद प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण बनाने में जुटे वृद्ध दंपति

सूरत के गौरांग और स्मिता देसाई, वीर सावरकर पार्क में जगह-जगह फैले प्लास्टिक के कचरे को उठाकर कूड़ेदान में फेंकते हैं। इनके इस योगदान के कारण बाग में सैर के लिए आने वाले लोगों को एक स्वच्छ वातावरण मिल पाता है।

गौरंग और स्मिता मुम्बई के टाटा पावर लिमिटेड से रिटायर्ड इंजीनियर हैं। प्लास्टिक के कचरे के प्रति लोगों के उदासीन रवैये और सार्वजनिक जगहों पर फैले गुटखा-तंबाकु के पैकेट से परेशान होकर इन्होंने खुद ही कचरा बटोर कर कुड़ेदान में डालने का निर्णय लिया। प्लास्टिक के कचरे को हटाने की इस मुहीम की शुरुआत इन्होने 2005 से कर दी थी ।

कुछ दिन पहले जब वे कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए थे तो वहाँ भी उनका ध्यान प्लास्टिक के कचरे पर था।

2005 में दांडी मार्च की 75वीं वर्षगाँठ मनाने के लिए साबरमति से दांडी तक पदयात्रा की गई थी।  गौरंग ने भी इसमें हिस्सा लिय़ा था। इसमें हिस्सा लेने वालों से मिलने आने वाले लोग इधर-उधर कचरा फेंक रहे थे। गौरंग ने उसे बटोरना शुरू कर दिया। इसके बाद 2014 में ये दोनों सूरत आ गए।

हमने ये काम गाँधी जी से प्रेरित होकर शुरू किया। शुरूआत में तो लगभग 12 बैग कचरा मिलता था। हालाँकि, अब स्थिति कुछ सुधरी है।गौरंग ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा।

इन्होंने करीब 200 कपड़े के थैले लोगों में बाँटें हैं। 1000 कपडे के थैलो का ऑर्डर और दिया है जिसे वो सब्जी मंडी में बाँटेंगे।

स्मिता का कहना है, “हमारा एकमात्र मकसद पर्यावरण को प्लास्टिक के खतरे से बचाना है।

 हमें यकीन है कि स्वच्छ भारत का जो सपना बापू ने देखा था वो देसाई दंपत्ति जैसे नेक लोगो की कोशिशो से एक दिन ज़रूर पूरा होगा!

(साभार – द बेटर इंडिया)

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