Sunday, March 22, 2026
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दीवाली पर बच्‍चों का रखिये खास ख्‍याल

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दीपावली जितनी खुशियां ले कर आती है वहीं माता-पिता के लिये जोखिम भी लाती है। कारण होता है तेज रौशनी और आग उगलते हुए पटाखे, जिसे बच्‍चे जिद कर के अपने परिवारजनों से खरीदवा लेते हैं। धमाकेदार बंब, फुलझड़ी, आनार और अन्‍य नुकसान तथा धुंआ फैलाने वाले पठाखों से बच्‍चों को सावधानी बरतने की विशेष जरुरत होती है। लेकिन बच्‍चे तो बच्‍चे होते हैं, उनका तो काम ही है जिद करना। मगर इस दीवाली वाले दिन बच्‍चों के मां बाप को उनकी विशेष निगरानी करने की जरुरत है –

बच्‍चों को पटाखों के नुकसान बताएं – बच्‍चों को पास बैठा कर बताएं कि पाटाखे से उसे शारीरिक तौर पर कितना नुकसान पहुंच सकता है। वैसे तो बच्‍चे के अंदर किसी भी प्रकार का डर नहीं भरना चाहिये लेकिन पटाखों के प्रति सजग होने का भाव उसके अदंर जरुर डालें।

बच्‍चों को रात में ज्‍यादा देर बाहर न रहने दें – रात में हर किसी के यहां पटाखे छोडे़ जा रहे होंगे इसलिये यदि आपने अपने बच्‍चे को किसी दोस्‍त के यहां दीवाली मनाने के लिये भेजा है तो, उसे सही समय पर घर पर वापस ले आएं।

हमेशा अपने बच्‍चे के साथ रहें – अगर आपका बच्‍चा काफी छोटा है या फिर वह बहुत शैतान है तो, उसके साथ हमेशा खडे़ रहें। अपने बच्‍चे के साथ ही पटाखे जलाएं। आंखों का विशेष ख्‍याल – आंखें काफी नाजुक होती हैं इसलिये हो सके तो बच्‍चों को पटाखे छुड़ाते वक्‍त चश्‍मा पहनने को दे दें। इससे पटाखों से निकलने वाले धुएं और तेज रौशनी का असर आंखों पर नहीं पडे़गा।

दिवाली पर पूजा में रखें इन बातों का ध्यान

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ऐसा कहा जाता है कि कार्तिक अमावस्या को ही समुद्र मंथन से लक्ष्मी का जन्म हुआ था| इस दिन ऐसा क्या करें कि लक्ष्मी जो कि चंचला है आपके घर एवं प्रतिष्ठान में वास करे। आइये जानते हैं कुछ उपाय –

परिसर में दक्षिणावर्ती शंख से गंगाजल का छिड़काव करें।

घर के बाहर गाय के गोबर से लिपाई करें।

मुख्य द्वार को आम के पत्तों की बन्दनवार से सजाएं

घर के बाहर एवं पूजन स्थल पर रंगोली और अल्पना सजाएं।

घर में मिट्टी के गणेश-लक्ष्मी की मिटटी की मूर्ति की स्थापना करें।

मूर्ति अन्दर से खोखली न होकर ठोस हो।

गणेश जी के दायें लक्ष्मी जी की स्थापना करें।

घर को फूलों से सजाएं।

विषम संख्या में दिए जलाएं, जैसे 11, 21 या 51।

माता लक्ष्मी को बेलपत्र व कमल का फूल अवश्य चढ़ाएं।

दीपावली पूजन के पश्चात्‌संपूर्ण परिसर में गुग्गुल का धुआं दें।

श्री विष्णुसहस्रनाम अथवा श्री गोपाल सहस्रनाम तथा श्री लक्ष्मी सहस्रनाम का पाठ करें।

दिवाली पूजन के समय श्री नारायण सूक्त व श्री सूक्त का पाठ अवश्य करें।

कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।

सबसे महत्वपूर्ण बात अमावस्या के अंधेरे को जिस प्रकार दीपमालाएं नष्ट कर देती हैं, उसी प्रकार दीपावली के दिन अपने मन के सभी विकारों को ज्ञान के प्रकाश से नष्ट करने की प्रार्थना गणेश जी से करें। धन तभी सुख देता है जब आपका तन और मन स्वस्थ हो।

 

दीपावली पर दीजिए आशियाने को नया रूप

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आज दिवाली है और आप इस कोशिश में हैं कि आपका घर सबसे अलग दिखे। कम खर्च और थोड़ी सी कलात्मकता से यह काम सम्भव है। दिवाली में घर को किस तरह सजाएं, आइए जानते हैं –

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होममेड कैंडल्स: दिवाली रोशनी का त्योहार है। यदि आप अपने घर को कैंडल्स से सजाना चाहते हैं तो इन्हें खरीदने के बजाय होममेड (घर में बनी हुई) कैंडल्स का उपयोग करें।

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एरोमेटिक कैंडल्स: इन्हें आप गिफ्ट स्टोर से खरीद सकती हैं। जब आप इन कैंडल्स को जलाएँगी तब आपका कमरा मीठी सुगंध से भर जाएगा। आप में से कई लोग इस दिन अपने घर पर लक्ष्मी जी पूजा करते हैं, हैं ना? इस प्रकार की मोमबत्तियों के उपयोग से आपके घर का वातावरण सात्विक हो जाएगा।

फ्लोटिंग कैंडल्स: सेंटर टेबल पर एक बड़े कटोरे में तैरती हुई कैंडल्स आपके घर की सजावट को बढ़ाती हैं। कैंडल्स को पानी में तैरने दें और कटोरे में गुलाब और कमल की पंखुड़ियां डालें। यह देखने में बहुत सुन्दर लगता है।

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चॉकलेट ट्री: दिवाली पर आपके यहाँ मेहमान आते होंगे तथा उनके साथ निश्चित रूप से बच्चे भी आते होंगे। इस प्रकार के डेकोरेशन से उन्हें आपका घर और अधिक अच्छा लगने लगेगा। एक सीधी शाखा लें तथा इसे मिट्टी से भरे एक गमले में लगा दें। अब रंगबिरंगे पेपर में कैण्डीज़ को लपेटे और उन्हें शाखाओं में लटका दें। इसे ड्राइंग रूम के बीच में रख दें।

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कांच के कंदील: दिवाली में प्रत्येक घर में कंदील अवश्य लगाया जाता है। आप कुछ नया करना चाहते हैं? आप कांच के कंदील लगा सकती हैं। कांच की बोतलों को विभिन्न रंगों से कलर करें और इनके अंदर कैंडल्स या एलईडी लाइट्स लगायें। इन्हें घर में लटका दें। यह वाकई में बहुत सुन्दर दिखता है।

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रंगोली: दिवाली की सजावट के बारे में बात हो और रंगोली का ज़िक्र न हो तो ये बहुत बड़ी गलती होगी। रंगोली को रंगों के अलावा फूलों की पंखुड़ियों, पत्तियों और दियों की सहायता से भी सजाया जा सकता है। अपने घर के प्रवेश द्वार पर या लिविंग रूम में बड़ी सी रंगोली बनायें ताकि आपका घर मेहमानों के स्वागत लिए तैयार दिखे।

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दिवाली तोरण: दिवाली पर आप मां लक्ष्मी और गणेश जी को अपने घर आमंत्रित करते हैं, हैं न? घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर और पूजा के कमरे में रंगबिरंगे तोरण लगायें। इससे आपका घर आकर्षक दिखेगा।

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पॉटपौर्री: अपने घर में पॉटपोर्री के छोटे छोटे कटोरे रखें और इनकी सुगंध आपको मूड को निश्चित ही अच्छा बना देगी ताकि आप त्योहार का पूरा आनंद उठा सकें। आप इन्हें बाज़ार से खरीद सकते हैं या आप इसे घर पर भी बना सकती हैं। यह आपकी इच्छा पर निर्भर है!
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दिवाली पर खूबसूरत दिखना है तो कुछ अलग करें

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दिवाली उत्सव के मौके पर आप सबसे बेहतरीन दिखना चाहती हैं। इस दिवाली ज्यादा भारी पहनावे के बिना और बोल्ड स्टेटमेंट पीस पहनकर आप उत्सव वाला लुक पा सकती हैं। कुछ फ्यूजन चाहें तो आजमा सकती हैं मगर परम्परागत परिधान दिवाली की रौनक में चार चाँद लगा सकते हैं। खूबसूरत दिखना चाहती हैं तो कुछ ऐसा करें –

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  हल्के रंग की साड़ी के साथ हीरे या सेमी प्रेशियस स्टोन के जेवर पहनें। अगर आप इंडो-वेस्टर्न परिधान पहन रही हैं तो इसके साथ फ्यूजन ज्वेलरी पहनें। हीरे, पोल्की और चटख रंगों के रत्नजड़ित जड़ाऊ आभूषणों को मिला-जुला कर पहनें। यह आपके परिधान की खूबसूरती में चार चांद लगा देगा।

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  हैवी ईयररिंग्स सिल्क लहंगे और नेट दुप्ट्टे के साथ आपके लुक को कम्प्लीट करेंगे। फूलों के मोटिफ्स वाले आभूषण खासे चलन में हैं। ध्यान रखें कि अपने परिधान के साथ सब कुछ मैच करना जरूरी नहीं है, इसलिए कुछ अलग पहनने की कोशिश करें। रोज गोल्ड ज्यादातर सभी परिधानों के साथ खूबसूरत लगता है। हालांकि आप चाहें तो किसी दोहरे रंग का भी चुनाव कर सकती हैं।

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फ्लोर लेंथ फ्रंट ओपन डिज़ाइनर जैकेट को स्ट्रेट पेंट के साथ ऐसे करें पेयर. इसके साथ जूलरी कैरी न करें। सादे परिधान के साथ डिजिटल प्रिंट का दुपट्टा या डिजिटल प्रिंट की कुर्ती के साथ चूड़ियां आधुनिक और ट्रेंडी लुक देंगी।

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 सिल्क लहंगे और नेट दुप्ट्टे के साथ पहनें। टॉप के साथ पलाजो पैंट पहनें। इसे दिवाली के लिए खास उत्सवी अंदाज देने के लिए इसके साथ एक ईयररिंग या रिस्ट कफ पहनें।

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लाइट कलर लहंगा इस फेस्टिव सीज़न फैशनेबल बनाने के साथ-साथ देगा ट्रैंडी लुक। हल्की एक्सेसरी की मदद से या फिर केवल एक स्टेटमेंट पीस पहनकर आप आधुनिक लुक पा सकती हैं। हीरे के ईयररिंग्स या पेंडेंट्स शानदार विकल्प हैं।

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साड़ी पहनना है तो हैंडलूम साड़ी पहनें जिसमें लिनेन, जूट और जामदानी या बालूचरी से लेकर बंधेज जैसे भारतीय हस्तशिप की झलक दिखे। दुप्पटा बंधेज, चंदेरी या मधुबनी प्रिंट वाला हो सकता है जिसे आप एकदम सिंपल सूट के साथ ले सकती हैं।

 

दीये बनाकर अपनी कलात्मकता से रोशन करें दिवाली

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दीवाली और दीयों का गहरा रिश्ता है। बगैर दीयों के दिवाली की कल्पना नहीं की जा सकती। यह अपने हुनर को निखारने का मौका भी है।

घर में ही अपनी कल्पना को साकार रूप देते हुए आप बहुरंगी दीए बना सकती हैं।आप दीए कई तरीकों से बना सकती हैं, यह आप पर निर्भर करता हैं।

हम यहाँ जो दीए दे रहे हैं, वह चौथी कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची संदलीश्री ने बनाए हैं जो मुम्बई के राएन इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा है। इन दीयों की कलात्मकता ऐसी है कि बड़े भी तारीफ किए बगैर नहीं रहेंगे। कई प्रकार के दीए और संदलीश्री के कलात्मक दीयों की एक झलक –

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सिरेमिक दीपक – सिरेमिक एक प्रकार की मिट्टी होती है, जिसे फेविकॉल या गोंद के साथ गूंथकर आप मनचाहे आकार में दीपक बना सकते हैं। दीये बनाने के बाद इन्हें छाया में ही सुखाएं और अपने अनुसार कलर और डेकोरेशन कर लें।

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क्ले पाउडर – क्ले पाउडर भी सिरेमिक की तरह ही होता है, बाजार में यह आटे की तरह गूथा हुआ भी आपको मिल सकता है। पुराने दीपक और छोटी कटोरियों की सहायता से आकार देकर आप इसके दीपक बना सकते हैं।

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मोम के दीपक – दीपक या अलग-अलग आकर वाली छोटी कटोरियों में कलरफुल मोमबत्त‍ियों को पिघलाकर आप उन्हें दीयों का आकार दे सकते हैं। इसके बाद इन्हें अपने अनुसार सजा सकते हैं। ये फ्लोटिंग दीपक का काम भी… ये फ्लोटिंग दीपक का काम भी करेंगे।

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 आटे के दीपक – आटे के दीपक कई बार पूजा में बनाए जाते हैं, इस बार मैदे या आटे में कलर मिलाकर डो बनाएं और इनसे मनचाहे आकार में दीपक तैयार करें। इन्हें सुखाकर या बेक करें ।

स्टाइलिश बनाइए इस बार अपनी दिवाली

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रोशनी का त्योहार बस अब आ चुका है. बाज़ारों की रौनक बढ़ गई है, लोग एक-दूसरे के लिए तोहफे ढूंढ रहे हैं. ये दिवाली का त्योहार ही ऐसा है, हर जगह रौशनी से भर गई है. अब इनते अच्छे टाइम में खुद के स्टाइल को आप फीका न कर लें, इसीलिए आपको दिखा रहा है कुछ शानदार विकल्प, जिन्हें देखिए और अपनी दिवाली खुशियों वाली ही नहीं बल्कि स्टाइलिश भी बनाइए –

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कुर्ता – जब बात इंडियन फेस्टिवल सेलिब्रेट करने की हो तो कुर्ते से बेहतर और कुछ नही है. लेकिन प्लीज़, इस बार भी बोरिंग कुर्ता लेने की गलती न करें। इस बार अपने लुक में प्रिंट्स लाएं। ऐसिमिट्रिकल ट्रेंड्स भी आजकल मेन्सवेयर में आ चुका है, आप इसे भी ट्राय कर सकते हैं. वहीं, जब बात इसे पेयर करने की हो तो आप चूड़ीदार या सलवार में से कुछ चुनें। जहां, चूड़ीदार आपके लुक को और भी स्मार्ट बना देगी वहीं, सलवार आपको कैज़ुअल टच देगी।

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 बंदगला – दिवाली पार्टी में रॉक करना है तो एक अच्छा बंदगला खरीदें लेकिन ध्यान रखें कि ये बंदगला जैकेट सिंथेटिक और वेलवेट में न हो। इसके बजाय कॉटन और लाइटवेट वुलन खरीदें तो एम्ब्रॉयडरी वाला भी खरीद सकते हैं और इसे अच्छे फिट वाले फिटेड ट्राउज़र के साथ पेयर करें।

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 जोधपुरी पैंट्स – कैज़ुअल ड्रेसिंग को स्टाइलिश जोधपुरी पैंट से आप और भी स्टाइलिश बना सकते हैं। इसे पेयर करें मोनोक्रोम शर्ट के साथ और हां कॉलर कोई भी ट्राय कर सकते हैं। वैसे, मैंडरीन-कॉलर शर्ट जोधपुरी के साथ बहुत स्मार्ट लुक देगी. फॉर्मल टच के लिए, बंदी जैकेट या ट्रेडिशनल नेहरू जैकेट कैरी करें।

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धोती – ये नया ट्रेंड दिवाली के लिए परफेक्ट है क्योंकि अगर सच में कुछ ट्रेडिशनल पहनना चाह रहे हैं तो ये धोती स्टाइल बेस्ट है. यहां धोती का मतलब धोती पैंट नहीं है, हम यहां ट्रेडिशनल धोती की बात कर रहे हैं. इसे शॉर्ट अचकन के साथ पेयर करें।

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ऐ दिल…विवाद: आर्मी अफसर बोले-नहीं चाहिए 5 करोड़ की मदद, राजनीति में न घसीटें

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नई दिल्ली. फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ पर उठे विवाद को लेकर एमएनएस की शर्तों पर आर्मी ने नाराजगी जताई है। कहा जा रहा है कि एमएनएस चीफ राज ठाकरे ने बॉलीवुड के फिल्म प्रोड्यूसर्स से कहा है कि अगर वह पाक कलाकारों को किसी फिल्म में लेते हैं तो उन्हें आर्मी वेलफेयर फंड में 5 करोड़ रुपए जमा करवाने होंगे। अब आर्मी अफसरों ने कहा है- ‘सेना को राजनीति में न घसीटा जाए, हम स्वेच्छा से दिया गया फंड ही लेते हैं, न कि इस तरह की जबरदस्ती से।’ आर्मी अफसरों ने और क्या कहा…

– मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आर्मी अफसरों का कहना है- ‘सेना गैर राजनीतिक और धर्मनिरपेक्ष है, इसे राजनीतिक फायदे के लिए नहीं घसीटा जाना चाहिए।’

– पूर्व नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जायसवाल ने कहा- ‘आर्मी भीख में दिया गया फंड नहीं लेती है, अगर फिल्म प्रोड्यूसर कुछ दान देना ही चाहते हैं तो उन्हें बाकी भारतीयों की तरह ही इसे देना चाहिए, न कि इस तरीके से।’

– जायसवाल ने यह भी कहा कि अगर यह मामला इतना ही सेंसिटिव है तो सरकार को ही इस बारे में कोई आखिरी फैसला करना चाहिए।
– कारगिल वॉर हीरो ब्रिगेडियर कौशल ठाकुर (रिटायर्ड) ने कहा- ‘नेशनल सेंटिमेंट्स का शोषण नहीं किया जाना चाहिए, अगर कुछ गलत है, तो वह गलत है, दबाव बनाकर 5 करोड़ रुपए के डोनेशन को आखिर सही कैसे ठहराया जा सकता है? राजनीतिक फायदे के लिए आर्मी का मिसयूज नहीं किया जाना चाहिए।’

आर्मी की मदद के लिए किसी पर दबाव न बनाएं
– आर्मी हेडक्वार्टर्स के एक सीनियर अफसर ने कहा- ‘कोई भी रिलीफ फंड में अपना योगदान दे सकता है, लेकिन यह स्वैच्छिक होना चाहिए। आप किसी पर इसके लिए दबाव नहीं डाल सकते, आर्मी ऐसी मदद को एक्सेप्ट करना पसंद नहीं करेगी।’

– एक दूसरे आर्मी अफसर ने कहा- ‘फिल्में हर शुक्रवार को रिलीज होती हैं। सेना का सपोर्ट करने के बहाने इनका विरोध करना सबसे अच्छा राजनीतिक हथकंडा है। फंड देने के लिए अगर प्रोड्यूसर्स पर दबाव बनाया जा रहा है तो आर्मी इस तरह की मदद नहीं लेगी।’

क्या हैं राज ठाकरे की शर्तें?
– महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़णवीस के घर बीते शनिवार को एक अहम मीटिंग हुई। इसमें मूवी के प्रोड्यूसर करन जौहर, प्रोड्यूसर्स गिल्ड के प्रेसिडेंट मुकेश भट्ट और फिल्म में पाक एक्टर्स का विरोध कर रही मनसे के चीफ राज ठाकरे मौजूद थे।
– माना जा रहा है कि राज ठाकरे ने विरोध वापस लेने के एवज में 3 शर्तें रखीं जो मान ली गईं।
– पहली शर्त थी- ‘ऐ दिल…’ की शुरुआत में शहीदों के सम्मान में एक मैसेज दिखाया जाए। दूसरी- प्रोड्यूसर्स अब पाक आर्टिस्ट्स के साथ काम न करें और तीसरी- जिन प्रोड्यूसर्स की फिल्मों में पहले से पाक एक्टर्स हैं, उन्हें 5 करोड़ आर्मी वेलफेयर फंड में देने होंगे।
– तीसरी शर्त में यह भी शामिल है कि प्रोड्यूसर्स को यह लिखकर देना होगा कि वे फिल्मों में आगे से पाक कलाकारों से काम नहीं कराएंगे। जो भी प्रोड्यूसर पाक आर्टिस्ट्स को कास्ट करेगा, उसे आर्मी वेलफेयर फंड में 5 करोड़ रुपए देने होंगे।
– बता दें कि ‘ऐ दिल…’ 28 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है। इसमें दो पाक एक्टर्स फवाद खान और इमरान अब्बास नकवी ने काम किया है। उड़ी हमले के बाद भारत-पाक के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए फिल्म में पाक कलाकारों के काम करने को लेकर विवाद हो गया।
– एमएनएस फिल्म का विरोध कर रही थी। सिनेमा ओनर्स एग्जीबिटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COEAI) ने भी कहा था कि 4 राज्यों की सिंगल स्क्रीन में यह मूवी नहीं दिखाई जाएगी। हालांकि एसोसिएशन अब भी अपने रुख पर अड़ी है। इसके प्रेसिडेंट नितिन दातार ने कहा कि उनके विरोध का एमएनएस से कोई लेना-देना नहीं है।

नहीं हुई 5 करोड़ जमा कराने की बात : मुकेश भट्ट

– इस बीच, प्रोड्यूसर्स गिल्ड के प्रेसिडेंट मुकेश भट्ट ने कहा है- ‘सीएम फड़णवीस के घर हुई मीटिंग में किसी भी फिगर (पैसे) पर कोई बात नहीं हुई। करन जौहर ने सीएम बताया कि मेरी पिक्चर चले या न चले। मैं पैसे पहले ही दे चुका हूं।’
– ‘हमारी ओर से भी फिल्म की पहले या दूसरे दिन का कलेक्शन देने की भी कोई बात नहीं हुई।’
– भट्ट ने कहा- ‘सीएम ने सिर्फ एक ही बात कही कि अगर आप की बिरादरी (फिल्म इंडस्ट्री) का कोई आदमी आर्मी वेलफेयर फंड में कुछ देना चाहे, तो वह दे सकता है।’

किसने मांगे 5 करोड़, मुझे नहीं पता: सीएम
– उधर, सीएम फड़णवीस ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा- ‘किसने मांगे 5 करोड़ मुझे नहीं पता? सोशल मीडिया पर कुछ भी चलता है। उसकी बात न करें।’
– ‘यह कोई सेटेलमेंट का विषय नहीं है। प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने खुद कहा कि हम लोग योगदान देना चाहते हैं, इस पर मैंने कहा कि अपनी श्रद्धा से आप लोग जो करना चाहते हो, वह करो।’

 

नहीं रहीं एवरेस्ट फतह करने वाली पहली महिला पर्वतारोही

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दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर पहुंचने वाली पहली महिला जुन्को ताबेई का निधन हो गया है। जुन्को ताबेई के परिवार ने इसकी जानकारी दी है. वो 77 साल की थीं। उन्हें चार साल पहले कैंसर से पीड़ित होने की जानकारी मिली थी. उन्होंने सैटामा के अस्पताल में आखिरी सांस ली। वो साल 1975 में एवरेस्ट पर पहुंची थीं. तब उनकी उम्र 35 साल थी. उसके बाद साल 1992 तक वो दुनिया की सात सबसे ऊंची चोटियों पर पहुंचने में कामयाब रहीं। माउंट एवरेस्ट पर पहुंचने के 12 दिन पहले वो बर्फीले तूफान की चपेट में आ गई थीं. उनके एक गाइड ने उन्हें बर्फ से बाहर निकाला। इसके बाद भी उन्होंने चढ़ाई जारी रखी। साल 2012 में जुन्को ताबेई ने ‘जापान टाइम्स’ से कहा था कि उनकी उपलब्धियों को जिस तरह देखा जाता है, उन्हें उस पर गर्व है। उन्होंने कहा था, “1970 के दौर में जापान में आम तौर पर माना जाता था कि पुरुष बाहर काम करेंगे और महिलाएं घर पर रहेंगी. जो महिलाएं काम करती भी थीं, उन्हें भी सिर्फ चाय परोसने को कहा जाता था. इसलिए उन्हें बढ़ावा देने की बात सोचना भी मुश्किल था।”

 

इस महिला ने तोड़े रिवाज, बेटी की शादी में निभाई पिता वाली हर रस्म…

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कहने को तो महिला सशक्तिकरण की बात हमारे देश में सभी करते हैं लेकिन आज भी भारतीय संस्कृति में कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें करने का हक सिर्फ मर्दों को ही है। शादियों में कुछ रस्म ऐसे होते हैं, जिन्हें सिर्फ लड़की के पिता ही पूरा करते हैं लेकिन इस प्रथा को तोड़ते हुए लंदन की एक मां ने अपनी बेटी की शादी में पिता के रस्मों को भी निभाया।

यह कहानी है लंदन में रहने वाली हरनूर गरेवाल की. हरनूर ने ‘पिंक लड्डू’ वेबसाइट पर अपनी शादी का अनुभव शेयर करते हुए लिखा, ‘हम पांच बहनें हैं। हमारा कोई भाई नहीं है। कुछ साल पहने हमारे पिता हमें छोड़ के चले गए, तब से मेरी मां ने हमें अकेले पाला है। उन्हें जिंदगी में बहुत कठिनाइयां झेलनी पड़ीं। उन्होंने हमें ऐसे पाला जिससे हमें जिंदगी में कभी भी किसी मर्द पर निर्भर ना रहना पड़े। उन्होंने हमें अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया। इसलिए हमने उनसे कहा कि पापा की गैरमौजूदगी में रस्में आप ही निभाएंगी ना कि परिवार का कोई दूसरा मर्द.’

हरनूर ने ये भी लिखा है कि अकेली औरत का रहना आज भी मुश्किल है। उसे परिवार वाले चैन से रहने नहीं देते। मेरे पिता के जाने का जिम्मेदार भी सब मेरी मां को ही मानते थे लेकिन मां ने कभी हार नहीं मानी और चुनौतियों का सामना करते हुए हमें पाला।

आज सबको हरनूर की मां से सबक लेने की जरूरत है। पुरुष के ना रहने से महिलाएं कमजोर नहीं होती बल्कि और मजबूत हो जाती हैं और दुनिया में कोई भी ऐसा काम नहीं है, जिसे करने का हक सिर्फ पुरुषों को है।

आक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी प्रेस ने हिन्दी ऑनलाइन शब्दकोश शुरू किया

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बेंगलुरू  : आक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी प्रेस :ओयूपी: ने आज हिन्दी आनलाइन शब्दकोश शुरू करने की घोषणा की। ओयूपी ने कहा कि आक्सफोर्ड वैश्विक भाषा कार्यक्रम में शामिल होने वाली हिन्दी नौवीं भाषा है । रांची विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डाक्टर पूनम निगम सहाय ने कहा कि हिन्दी साइट को एक ‘लैंगएज चैंपियन’ से मदद मिलेगी जो इस पहल को रणनीतिक परामर्श देगा और जागरूकता बढाने में मदद देगा।