Tuesday, March 24, 2026
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शादी से एक दिन पहले तक अभ्यास करेगी गीता फोगाट

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नयी दिल्ली,क्या आपने कभी हाथों में मेहंदी लगाए किसी महिला को शादी से एक दिन पहले या शादी के तीन दिन बाद अखाड़े में दांव पेंच लगाते या कुश्ती मैट पर लोटते देखा है। देश की पहली महिला ओलंपियन पहलवान गीता फोगाट को अगले महीने होने वाले पेशेवर कुश्ती लीग : पीडब्ल्यूएल : में इस रूप में देखा जा सकता है। गीता पीडब्ल्यूएल को लेकर इतनी गम्भीर हैं कि 20 नवम्बर को होने वाली अपनी शादी से एक दिन पहले तक वह अ5यास करती रहेंगी और हनीमून पर जाने के बजाय तीन दिन बाद अखाड़े में लौट आएंगी। यह पहलवान अभी अपने घर के परिसर में बने अखाड़े में अपने पिता और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता महावीर की देखरेख में अ5यास कर रही है। गीता के एक भाई दुष्यंत अ5यास में उनकी मदद कर रहे हैं। पूरे परिवार का एक ही मकसद है कि गीता एक बार फिर से अपने वजन में शीर्ष स्थान हासिल करें। हाथों में मेहंदी लगाए अ5यास करने की यह मिसाल आपको शायद ही कहीं मिले। गीता ने कहा, ‘‘मेरे मंगेतर पवन भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान हैं। उनसे उनकी कुश्ती पर भी खूब बात होती है। हम पीडब्ल्यूएल में खेलना चाहते हैं। किसी एक टीम में खेलने की बात कहकर हम किसी फ्रेंचाइज़ी मालिक पर दबाव नहीं बनाना चाहते। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम दोनों का यही मानना है कि हम चाहे किसी भी टीम में रहें, हमारी शुभकामनाएं एक दूसरे के प्रति हमेशा रहेंगी। हमने फिलहाल शादी के बाद कहीं घूमने का कार्यक्रम पीडब्ल्यूएल तक टाल दिया है। इस लीग में एक मुकाम हासिल करने के बाद घूमने के बारे में सोचूंगी।

 

नोट बंदी के बाद अपनी दरियादिली से लोगो का दिल जीत रहे ये लोग!

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पुराने पांच सौ और हज़ार के नोट बंद हो जाने से जहाँ आम जनता को कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है वहीँ आम भारतियों के बीच संयम और सोहार्द की कहानियां भी सामने आ रही है। देश में काले धन के खिलाफ इस जंग में अपना पूरा योगदान करते ऐसे ही तीन कहानियां आज हम आपके सामने ला रहे है।

मोदी की नोटबंदी को चायवाले ने किया हिट, ऑनलाइन पेमेंट पर दे रहा चाय

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान ये बात कही थी कि वो बचपन में चाय की दुकान चलाते थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद नोटबंदी को मोदी की सबसे बड़ी घोषणा के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इस घोषणा से हुई परेशानी को देखते हुए दिल्ली के एक चाय वाले ने अनोखी पहल की है।

दिल्ली के आरके पुरम इलाके में चाय की दुकान चलाने वाला शख्स अपने सभी ग्राहकों से चाय के लिए खुले पैसे मांगने की बजाए उनसे ऑनलाइन पैसे ले रहा है।चाय की दुकान चलाने वाले मोनू का कहना है कि वो सात रुपये से कम का भी पेमेंट ऑनलाइन ही ले रहा है क्योंकि वो सरकार की नोटबंदी का समर्थन करता है। मोनू के यहां चाय पीने वाले एक कस्टमर का कहना है कि एक चायवाले की ये पहल काबिलेतारीफ है, क्योंकि फिलहाल कैश और छुट्टे पैसों की लोगों के पास बेहद कमी है। बता दें कि पिछले कई दिनों से देशभर में बैंकों से लेकर एटीएम के बाहर लंबी कतारें लगी हुई हैं क्योंकि सरकार द्वार 1000 और 500 के पुराने नोटों की बंदी के बाद से लोगों के पास कैश की बेहद कमी पैदा हो गई है।

रांची के इस अस्पताल में मिल रहा है मुफ्त इलाज

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जहाँ मिडिया में ऐसे अस्पतालों के बारे में बताया गया जो पुराने नोट होने की वजह से मरीजों का इलाज करने से इनकार कर रहे है, वहीँ रांची के विनायक अस्पताल के मुख्य, डॉ. चंदन कुमार ने इंसानियत की एक नयी मिसाल खड़ी कर दी है

डॉ. चंदन कुमार ने नोटबंदी होने के बाद 10 से 13 अक्टूबर तक अपने अस्पताल में ऐसे सभी मरीजों का इलाज निःशुल्क किया, जिनके पास सिर्फ 500 या हज़ार के ही नोट बच गए थे।

डॉ. चंदन कुमार ने कहा, ‘मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद अच्छा निर्णय लिया है। फिलहाल नोटों की कमी को देखते हुए 10 से 13 नवंबर तक यहां इलाज मुफ्त किया गया है, ताकि लोगों को परेशानी न हो।”

मुसाफिरों को मुफ्त में खाना खिलाता होटल मालिक

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अकोला के नॅशनल हायवे क्रमांक 6 पर बालापुर में स्थित मराठा हॉटेल के आगे आपको आजकल एक बोर्ड नज़र आएगा, जिसपर लिखा है,

‘गाँव के बाहर से आये मुसाफिरों, यदि आपके पास सिर्फ 500 या हज़ार का ही नोट है तो बिलकुल चिंता न करे। आप यहाँ खाना खाकर जाएँ और अगली बार आकर बिल का भुगतान करे।’

इस होटल के मालिक, मुरलीधर राउत ने 8 नवम्बर को नोटबंदी होने के बाद इस बात पे गौर किया कि इस बात से सबसे ज्यादा परेशानी उन मुसाफिरों को हो रही है जिनके पास हाईवे या अन्य छोटी जगहों पर खाना खाने तक के लिए खुल्ले पैसे नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपने होटल के आगे ये बोर्ड लगाकर काफी लोगों की परेशानी दूर कर दी।

हम सभी देश में बदलाव की आशा रखते है। पर उसमे योगदान देने की बारी आती है, तो थोडा डगमगा जाते है। पर इस तरह की कहानियां ये साबित करती है कि यदि सभी भारतीय एक-जुट हो जाएँ तो  हर मुसीबत का हंस कर सामना कर सकते है।

(साभार – द बेटर इंडिया)

500 और 1000 के नोटों की लुग्दी से बनेगी ईंटे, पूरी दुनिया में अलग-अलग इस्तेमाल

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इस बात को लेकर माथापच्ची में लगा है कि हजारों टन पुराने नोटों को कैसे ठिकाने लगाया जाए। इस काम को लेकर कई तरह के प्रस्ताव आ रहे हैं और इस काम को अंजाम देने के लिए ठेकेदारों की तलाश भी शुरू हो गई है। जानकारों का कहना है कि आरबीआई को इस बारे में कई रोचक विकल्प मिले हैं। इनमें बारीक टुकड़े कर नोटों की सड़कें बनाना, उनसे ईंटें बनाना और नोटों से गड्ढे भरना, पुराने नोटों से स्मारक बनाना और उनकी मदद से कपड़ा बनाकर उसे स्मारक के तौर पर बेचने के विकल्प शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि इन नोटों के अलावा आरबीआई के पास पहले से पड़े करोड़ों लोगों द्वारा लौटाए जाने वाले पुराने नोटों को नष्ट करने का जिम्मा है।

कई ट्रक नोट 

आरबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि भारत के केंद्रीय बैंक के पास कई ट्रक ऐसे नोट हैं। इन नोटों के ऐसे टुकड़े किए जाएंगे कि इन्हें दोबारा जोड़ा न जा सके। उसके बाद इन्हें तपा कर ईंट की शक्ल में बदल दिया जाएगा। उसके बाद इन्हें गड्ढे भरने  वाले ठेकेदारों को दे दिया जाएगा। मार्च 2016 तक 500 के करीब 1570 करोड़ नोट प्रचलन में थे। वहीं 1000 के करीब 632 करोड़ नोटों का इस्तेमाल हो रहा था।

कुछ जगहों पर जलाया भी जाता है

दुनिया में प्रचलन से बाहर कर दिए गए नोटों को नष्ट करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं। कुछ जगहों पर जलाया भी जाता है। बैंक ऑफ इंग्लैंड 1990 तक ऐसे नोटों को जलाकर बैंक की इमारत को गर्म रखने का काम लेता था। 2000 के दशक की शुरुआत में बैंक ने पुराने नोटों को रिसाइकिल करना शुरू कर दिया। रिसाइकलिंग में नोटों को जमीन के नीचे दबाकर सड़ाया जाता है और बाद में इसका इस्तेमाल खाद के तौर पर किया जाता है।

नोटबंदी का असर – 80% गिरा हवाला कारोबार, कश्मीर में पत्थरबाजी हुई कम

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नोटबंदी के फैसले के बाद हवाला कारोबार में 80% तक गिरावट आ गई है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के मुताबिक 3 दिनों के भीतर खाड़ी देशों और कश्मीर घाटी के बीच एक भी हवाला ट्रांजैक्शन सामने नहीं आया है। रिपोर्ट बताती है कि ब्लैक मनी बाहर लाने के लिए नोटबंदी का फैसला असर दिखा रहा है। इधर कश्मीर में भी सुरक्षा बलों पर होने वाला पथराव अचानक बंद हो गया है। खुद रक्षामंत्री तथा गृहमंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है।  8 नवंबर को लिए गए नोटबंदी के फैसले चलते दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद और मुंबई में हवाला ऑपरेटर्स अंडरग्राउंड हो गए हैं।

– IB ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “नोटबंदी के बाद ऑपरेटर्स के अंडरग्राउंड होेने के चलते मनी लॉन्ड्रिंग थम-सी गई है।” IB ने अपनी रिपोर्ट होम मिनिस्ट्री को सौंपी है। मिनिस्ट्री ने IB और नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी (NIA) को नोट बंदी के असर की मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा है।  बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद हो रहे प्रदर्शनों के चलते IB और NIA कश्मीर घाटी में हवाला फंडिंग की डिटेल इन्वेस्टिगेशन कर रही है।

डर रहे हैं हवाला ऑपरेटर्स
– IB की रिपोर्ट के मुताबिक, “कश्मीर घाटी में सिक्युरिटी फोर्सेज की कार्रवाई के चलते हवाला कारोबारी डर रहे हैं। “हवाला ऑपरेटर्स ब्लैक मनी लेने में घबरा रहे हैं, वो ऐसा खतरा मोल लेने को तैयार नहीं हैं।”इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सर्वे में भी इसी तरह के फैक्ट्स सामने आए हैं।हवाला के जरिए टेररिज्म, ड्रग कारोबार को फंडिंग की जाती है। हवाला कारोबार में किसी तरह के बिल या पेपर्स का यूज नहीं होता है। ये कारोबार केवल ‘जुबान’ पर चलता है, जिसकी फीस ली जाती है।बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किए बगैर एक जगह पर डिलिवर किया गया कैश दूसरी किसी भी जगह पर उपलब्ध करा दिया जाता है।

 

महानगर में शुरू हुआ 22वाँ कोलकाता फिल्म फेस्टिवल

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स्त्री सशक्तिकरण के आह्वान के साथ महानगर में कोलकाता फिल्म फेस्टिवल का आगाज हो चुका है। 22वें कोलकाता फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन  महानायक अमिताभ बच्चन ने किया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंंने फिल्मों में महिला सशक्तिकरण का उल्लेख किया और इसे विकास के लिए अनिवार्य बताया। इस अवसर पर उनके साथ जया बच्चन, शाहरुख खान, संजय दत्त, अभिनेत्री काजोल तथा परिणति चोपड़ा भी उपस्थित थीं।

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बंगाल के ब्रांड अम्बास्डर शाहरुख ने कहा कि वे बंगाल के ब्रांड अम्बास्डर हैं इसलिए फिल्म समारोह में हिस्सा लेना उनकी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने बांग्ला में अपनी बात रखी और सभी पर अपना जादू चला दिया। जया बच्चन ने भी बांग्ला में भाषण दिया। गौरतलब है कि इस बार फिल्म फेस्टिवल की फोकस थीम सभी के लिए सिनेमा और सब सिनेमा के लिए है। प्रचार पर खासा ध्यान देते हुए आयोजकों ने इस बार बेहतरीन वीडियो बनाया है जो महानगर में 100 से अधिक जगहों पर दिखाया जाएगा। फोकस कंट्री इस बार चीन हैै मगर कोई भी पाकिस्तानी फिल्म दिखाने में आयोजक सक्षम नहीं हो सके। 18 नवम्बर तक चलने वाले इस फिल्म समारोह में 65 देशों की 156 फिल्में दिखायी जाएंगी।

महानगर में नाटकों की छटा बिखेरने आ गया जश्न — ए – रंग

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नाट्य संस्था लिटिल थेस्पियन से छठा राष्ट्रीय नाट्य उत्सव ‘जश्न-ए-रंग का आयोजन आज से 17 नवंबर 2016 तक ज्ञान मंच, कोलकाता में किया जा रहा है। लिटिल थेस्पियन की ओर से आयोजित किए जाने वाले इस आयोजन का मकसद नाटकों को आम जनता तक पहुँचाना है। इस बार के आयोजन की खास बात यह है कि इसमें कहानियों का अभिनयात्मक पाठ पेश किया जा रहा है। लिटिल थेस्पियन की अध्यक्ष उमा झुनझुनवाला तथा डायरेक्टर एस एम अजहर आलम की कड़ी मेहनत के कारण आज इस नाट्योत्सव को अलग पहचान मिली है। कोलकाता में आयोजित होने वाला यह एकमात्र हिन्दी नाट्योत्सव है। अगर आपको नाटकों से प्रेम है और नाटक देखना और उस पर बात करना पसंद हैं तो आप इस आयोजन में जरूर शामिल होना चाहिए। डालते हैं कि इस नाट्योत्सव के आगामी कार्यक्रमों पर एक नजर –

12 नवंबर 2016, शनिवार
शाम 6:00 बजे
उद्घाटन समारोह

शाम 6:30
कहाँ गए मोरे उगना (हिंदी)
प्रस्तुति : निर्माण कला मंच, पटना
नाटक : उषा किरण खान
निर्देशन : संजय उपाध्याय

13 नवंबर 2016, रविवार, सुबह 11:00 बजे
दुलारी बाई (राजस्थानी)
प्रस्तुति : अनुराग कला केंद्र, बीकानेर
नाटक : मणि मधुकर
निर्देशन : सुदेश व्यास

शाम 6:30
पद्मश्री राम गोपाल बजाज तथा अन्य हस्तियों के साथ एक थिएटर अड्डा
स्थान: ताज़ा टीवी सम्मेलन कक्ष, 37 शेक्सपियर सरणी, कोलकाता

14 नवंबर 2016, सोमवार, शाम 6:30
पद्मश्री राम गोपाल बजाज और अजहर आलम द्वारा कविताओं और कुछ साहित्यिक अंशों की प्रस्तुति

शाम 7:30 बजे
प्रेम अप्रेम (हिंदी)
प्रस्तुति : लिटिल थेस्पियन, कलकत्ता
कहानी : कुसुम खेमानी
निर्देशन : उमा झुनझुनवाला

15 नवंबर 2016, मंगलवार, शाम 6:00 बजे
May Be This Summer (हिन्दी)
प्रस्तुति : यूनिकॉर्न एक्टर्स स्टूडियो, दिल्ली
नाटक व निर्देशन : त्रिपुरारी शर्मा

शाम के 7:30
क़िस्सा ख्वानी (कहानी का अभिनयात्मक पाठ)
दिनेश वडेरा और दिलीप दवे द्वारा अवधेश प्रीत की कहानी ‘हमज़मीं’
और दिनकर शर्मा द्वारा कार्ल चैपल की कहानी ‘टिकटों का संग्रह’

16 नवंबर 2016, बुधवार, शाम 6:00 बजे
वेलकम ज़िन्दगी (हिंदी)
प्रस्तुति : आकार कला संगम, दिल्ली
नाटक : सौम्या जोशी
निर्देशन : सुरेश भारद्वाज

शाम के 7:30
क़िस्सा ख्वानी (कहानी का अभिनयात्मक पाठ)
ज्योतिष जोशी और उमा झुनझुनवाला द्वारा जैनेन्द्र कुमार की कहानी ‘गदर के बाद’
और जीतेंद्र सिंह तथा ममता पांडे द्वारा शफी जावेद की कहानी ‘मेरी रोटियाँ कहाँ हैं’

17 नवंबर 2016, वृहस्पतिवार, शाम 6:30
बलकान की औरतें (उर्दू / हिंदी)
प्रस्तुति : लिटिल थेस्पियन, कलकत्ता
नाटक : जुलेस तास्का
निर्देशन: मुश्ताक काक

 

ऐसे होंगे 2 हजार और 500 रुपए के नोट

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नए नोट बाजार में आ चुके हैं। आइए जानते हैं इनसे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें जो जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। डालते हैं मुख्य फीचर्स पर एक नजर –

– दो हजार रुपए का नया करेंसी नोट मैजेंटा (गहरा गुलाबी) रंग का होगा। इसमें महात्मा गांधी की नई सीरीज वाली फोटो होगी

– नए नोट में किसी तरह का कोई लेटर नहीं होगा। इसके अलावा, इसमें आरबीआई के नए गवर्नर उर्जित पटेल के सिग्नेचर होंगे।

– नोट के पीछे की तरफ इसका प्रिंटिंग ईयर ‘2016’ पब्लिश होगा। वहीं, पीछे की ओर मंगलयान की फोटो होगी। नोट के आगे और पीछे का डिजाइन जियोमेट्रिक पैटर्न कलर के हिसाब से होगा।

फीचर्स में जानें नए 2000 के नोट की खासियत

#1. नोट के आगे की तरफ सी थ्रू रजिस्टर में दो हजार रुपए लिखा होगा। आइडेंटिफिकेशन मार्क के ऊपर दिखाई देने वाली फूल-सी आकृति सी थ्रू रजिस्टर के नाम से जानी जाती है। दो हजार के नोट में फूल की जगह इसका मूल्य होगा, जो रोशनी में दिखेगा।

#2. नोट पर दो हजार की लेटेंट इमेज भी होगी। गांधीजी की फोटो के साइड में लेटेंट इमेज होती है। इसमें जितने का नोट है, उसकी संख्या लिखी होती है।
#3. नोट में देवनागरी में भी नोट की वैल्यू यानी 2000 लिखा होगा।
#4. इसके बीच में महात्मा गांधी की पोर्ट्रेट होगी।
#5. लेफ्ट साइड में छोटे अक्षरों में आरबीआई और दो हजार लिखा होगा।
#6. सिक्युरिटी थ्रेड में ‘भारत’, आरबीआई और 2000 लिखा होगा। नोट को झुकाने पर इसका कलर ‘थ्रेड ग्रीन’ से ‘ब्लू’ में बदलेगा।
#7. नोट के दाएं तरफ गारंटी क्लॉज, प्रॉमिस क्लॉज और गवर्नर के सिग्नेचर होंगे। वहीं, इसी तरफ आरबीआई का चिह्न भी होगा।
#8. नीचे से दाएं तरफ रुपए के सिंबल के साथ 2000 लिखा होगा। ये कलर चेंज इंक में लिखा है, जो ग्रीन से ब्लू रंग में बदलेगा।
#9.नोट के ऊपर से लेफ्ट साइड और नीचे से राइट साइड नंबर पैनल होगा। पैनल में नंबर छोटे से बड़े होंगे। कमजोर आंखों वालों के लिए महात्मा गांधी की पोर्ट्रेट, अशोक स्तम्भ और ब्लीड लाइन और आइडेंटिटी मार्क उभरा हुआ होगा।

#10.दाएं तरफ 2000 का इलेक्ट्रोटाइप वाटरमार्क होगा

#11.नोट के दाएं तरफ ही अशोक स्तम्भ होगा।

#12.राइट साइड में रेकट्राएंगल का साइन उभरा हुआ होगा, जिसमें 2000 लिखा होगा।

#13.लेफ्ट और राइट साइड सात एंगुलर ब्लीड लाइन उभरी हुई होगी।

नोट के पीछे की तरफ होंगे ये चार फीचर्स 

#14.  नोट की पीछे की तरफ लेफ्ट साइड प्रिंटिंग ईयर छपा होगा।
#15. लेफ्ट साइड पर ही स्वच्छ भारत का लोगो और स्लोगन होगा।  #16. पीछे की तरफ लैंग्वेज पैनल बीच में होगा।
#17. मंगलयान की फोटो होगी। नोट में देवनागरी में नोट की वैल्यू यानी २००० लिखा होगा।  पीछे की तरफ इसका डायमेंशन 66mm*16mm भी होगा।

500 रु. के नोट में आगे की तरफ होंगे ये फीचर्स

#1. नोट के आगे की तरफ सी थ्रू रजिस्टर में पांच सौ रुपए लिखा होगा। आइडेंटिफिकेशन मार्क के ऊपर दिखाई देने वाली फूल-सी आकृति सी थ्रू रजिस्टर के नाम से जानी जाती है। दो हजार के नोट में फूल की जगह इसका मूल्य होगा, जो रोशनी में दिखेगा।

#2. वहीं, पांच सौ रुपए की लेटेंट इमेज होगी। गांधी जी की फोटो के साइड में लेटेंट इमेज होती है। इसमें जितने का नोट है, उसकी संख्या लिखी होती है।
#3. देवनागरी में नोट पर वैल्यू यानी ५०० लिखा होगा।
#4. इसके बीच में महात्मा गांधी की पोर्ट्रेट होगी। पहले ये नोट पर दाएं तरफ थी।
#5. इसमें सिक्युरिटी थ्रेड होगा। नोट को झुकाने पर इसका कलर थ्रेड ग्रीन से ब्लू में बदलेगा।
#6. नोट के दाएं तरफ गारंटी क्लॉज, प्रॉमिस क्लॉज और गवर्नर के सिग्नेचर होंगे। वहीं आरबीआई का चिह्न होगा।
#7. पोर्ट्रेट और इलेक्ट्रोटाइप वाटरमार्क।
#8.  नोट के ऊपर से लेफ्ट साइड और नीचे से राइट साइड नंबर पैनल होगा। पैनल में नंबर छोटे से बड़े होंगे।
#9. नीचे से दाएं तरफ रुपए के सिंबल के साथ नोट की नंबर वाली वैल्यू होगी। ये ग्रीन से ब्लू में बदल जाएगी।
#10. नोट के दाएं तरफ ही अशोक स्तम्भ होगा। कमजोर आंख वालों के लिए महात्मा गांधी की पोर्ट्रेट, अशोक स्तम्भ, ब्लीड लाइन और आइडेंटिटी मार्क उभरा हुआ होगा।

#11. राइट साइड में रेकट्राएंगल का साइन उभरा हुआ होगा, जिसमें 500 लिखा होगा।
#12. लेफ्ट और राइट साइड सात एंगुलर ब्लीड लाइन उभरी हुई होगी।

500 के नोट में पीछे की तरफ होंगे ये पांच फीचर्स 

#13.  नोट की पीछे की तरफ लेफ्ट साइड प्रिंटिंग ईयर छपा होगा।

#14. लेफ्ट साइड पर ही स्वच्छ भारत का लोगो और स्लोगन होगा।
#15. पीछे की तरफ लैंग्वेज पैनल बीच में होगा।
#16. इसके पीछे की तिरंगा फहरे हुए लाल किले की फोटो होगी। ये भारत के हेरिटेज को दर्शाता है।
#17. नोट के पीछे देवनागरी में नोट की वैल्यू यानी ५०० लिखा होगा।

 

 

अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को मजबूती देने का तरीका है बड़े नोटों पर लगी पाबंदी

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सरकार ने आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सशक्त कदम उठाया है। जाहिर है कि हर निर्णय की तरह इस निर्णय के भी इफेक्ट और साइड इफेक्ट हैं। फिलहाल साइड इफेक्ट तो आम आदमी पर पड़ रहा है और रोजमर्रा की जिंदगी थोड़ी मुश्किल हो रही है मगर इसका इफेक्ट या यूँ कहें कि इम्पैक्ट अच्छा ही होगा। बहुत बार विरोध सिर्फ विरोध के लिए होता है क्योंकि आप उस व्यक्ति को पसंद नहीं करते। इस मामले में भी काँग्रेस समेत अन्य दलों का विरोध भी कुछ ऐसा है। जब हम घर को नए सिरे से सजाते हैं तो तकलीफ होती है और यह तो पूरी अर्थव्यवस्था को फिर से सजाने जैसा है और इस फैसले के पीछे एक सटीक रणनीति है। परिवर्तन का परिणाम सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है मगर इस डर से बदलाव लाने की कोशिश ही न की जाए तो यह तो और भी गलत है। आप कतार में लगकर थक जाते हैं और अपनों की तकलीफ नहीं देखी जाती मगर आपको यह याद रखना चाहिए कि आपकी यह चिंता कुछ दिनों की है मगर यही बड़े नोट जब आतंकियों को ताकत देते हैं और सीमा पर हमारे जवान मारे जाते हैं तो उनके परिवारों के लिए यह जिंदगी भर का मातम होता है। सोशल मीडिया पर शहीदों को श्रद्धांजलि देना एक और बात है मगर बदलाव की प्रक्रिया में सक्रिय होकर हाथ बढ़ाना एक और बात है। आप फेसबुक पर सैनिकों का साथ देते हैं, बड़ी – बड़ी बातें करते हैं, आपको बदलाव चाहिए मगर बगैर किसी परेशानी के चाहिए, ये कैसे सम्भव है? लोग 15 लाख लाने की बातें करते हैं मगर ये काम सरकार को क्यों करना चाहिए? बगैर परिश्रम के आपके खाते में 15 लाख आते हैं तो यह क्या श्रम का अवमूल्यन नहीं है।

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इस पाबंदी के बहाने कई गरीबों ने खाते खोले हैं। काला धन रखने वालों की मुश्किल यही है कि अब तक जिन नौकरों और कर्मचारियों को पैर की जूती समझते थे, अब उनसे ही जबरन मुस्कराकर अदब से बात करनी पड़ रही है। अमीरों को झुकना रास नहीं आ रहा है। कतार में लगना उनकी शान के खिलाफ है। ममता दीदी को अगर उधार लेकर मिठाई खरीदनी पड़ी तो उनको खीझ नहीं होनी चाहिए क्योंकि वो तो माँ, माटी और मानुष की बात करती हैं तो उनकी खीझ से यह मान लें कि उनकी कथनी और करनी में अंतर है या फिर ये मान लें कि उनको ये चिंता सता रही है कि उनकी पेंटिंग कौन खरीदेगा और पार्टी फंड में पैसा कहाँ से आएगा? विरोधियों की चिंता का कारण भी यही है। इस पाबंदी का सामाजिक रूप से सकारात्मक पक्ष तो यही है कि ऊँच  – नीच का फर्क कुछ दिन के लिए ही सही कम होगा। आयकर की नजर होगी तो काले को सफेद बनाने के लिए जो भव्य धार्मिक प्रवचन होते हैं, उन पर लगाम लगेगी और इन पर लगाम लगने का मतलब बहुत हद तक अंधविश्वास और आसाराम बापुओं जैसों की कमाई पर लगाम लगना है। बैंक घाटे में चल रहे हैं और अब जिस तरह उन पर नोटों की बरसात हो रही है, उससे उम्मीद की जानी चाहिए कि बैंकों की स्थिति सुधरेगी और सरकार पर निर्भर होना कम होगा। अचानक सोने की माँग बढ़ रही है और साल में दूसरा धनतेरस मनाया जा रहा है। मंदिरों में बेकार नोट चढ़ाए जा रहे हैं। जिन्होंने रेलवे स्टेशन का चेहरा अरसे से नहीं देखा, अब वे रेलवे में टिकट आरक्षित करवा रहे हैं कि एक दिन में टिकटों की बिक्री 25 प्रतिशत बढ़ जाती है। एयरलाइंसों के अग्रिम टिकट खरीदे जा रहे हैं तो इसके सहारे सरकार भी ऐसे लोगों तक पहुँच रही है। पहली बात यह अचानक लिया गया निर्णय नहीं है क्योंकि इसकी तैयारी लगभग साल भर पहले  से हो रही थी। जो लोग निजी अस्पतालों में प्रतिबंधित नोटों को स्वीकारने की बात कर रहे हैं, उनको ये नहीं भूलना चाहिए कि ये अस्पताल वही कॉरपोरेट सेक्टर चलाता है जिनकी काली कमाई भरपूर है और टेबल के नीचे लेन – देन होते हैं। जानकारी देने का मतलब उनको सजग कर देना औऱ ऐसा होता तो इस मुहिम का ही कोई मतलब नहीं रह जाता। यही बात बैंकों पर भी लागू होती है क्योंकि बहुत से बैंक अपने ग्राहकों का काला धन सफेद करने में मददगार साबित हो सकते थे और अधिकतर निजी क्षेत्र के बैंकों में भी काली कमाई होने का अंदेशा है। विजय माल्या जैसे अरबपतियों की काली कमाई बेकार होगी। ऐसे लोग अगर बैंक जाते हैं तो भी कर चोरी के आरोप में जो 200 प्रतिशत राजस्व कर लगेगा, उससे सरकार की भी कमाई होगी। रिश्वत और भ्रष्टाचार, अनुदान या डोनेशन या फिर आतंकी कारर्वाई का साधन बड़े नोट ही हैं, इन पर भी प्रहार होगा। कॉरपोरेट कम्पनियों के कर्मचारी बैंकिंग प्रक्रिया से जोड़े जाएंगे क्योंकि कम्पनियाँ अब नोटों के झमेले में नहीं पड़ना चाहेंगी। यह दल से ऊपर उठकर लिया गया फैसला है तो भाजपा के फंड पर भी असर पड़ना तय है तो यकीन मानिए कि छुपे तौर पर पीएम साहेब को तो उनकी पार्टी से ही गालियाँ पड़ रही होंगी। जरा सोचिए, कि कितने साल बाद आपने गुल्लक की शक्ल देखी और बचपन की आदत आपके काम आ रही है। अभिभावकों को यही सीख बच्चों को देने की जरूरत है। हाथ खोलकर बेकार के खर्चों से आप दूर हैं तो यह आपकी आदत सुधारेगा। न चाहते हुए भी अब आप प्लास्टिक मनी युग में प्रवेश कर रहे हैं। जो नए नोट आ रहे हैं, उनमें चिप भले न हो मगर आप पर नजर रखने का उसमें पूरा इंतजाम है। यह निर्णय उच्च मध्यवर्ग के अहं पर चोट करने वाला निर्णय है और यह पाबंदी अर्थव्यवस्था के साथ ही हमारी आदतों को सुधारने जा रही है तो जरा सब्र रखिए और परिर्वतन की प्रक्रिया से जुड़कर देखिए।

 500, 1000 के नोट बंद होने के बाद अब क्या होगा? जानिए ऐसे 25‍ सवालों के जवाब

केंद्र सरकार ने 500 और 1000 के मौजूदा नोटों का चलन बंद करने का ऐलान कर दिया है।  इनकी जगह पर अब 500 और 2000 के नए नोट आएंगे. 500 और 1000 के पुराने नोट आधी रात से अवैध हो जाएंगे। इन्हें बैंकों या डाकघरों में जमा किया जा सकता है. इसके लिए 50 दिनों की समयसीमा तय की गई है। सरकार के इस फैसले को लेकर लोगों के मन में तमाम सवाल उठ रहे हैं. ऐसे सवालों के जवाब हाजिर हैं।

प्र.    इस योजना की जरूरत क्यों पड़ी?

उ. जाली नोटों की खेप में अधि‍कतर बड़े नोट हैं. एक आम आदमी के लिए जाली नोटों की पहचान कर पाना मुश्किल होता है क्योंकि ये असली नोट की तरह ही दिखते हैं जबकि सिक्योरिटी फीचर भी कॉपी नहीं किए होते हैं। जाली नोटों का इस्तेमाल राष्ट्रविरोधी और गैरकानूनी गतिविधियों में होता है। बड़े नोट आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं और ब्लैक मनी छुपाकर रखने के काम आते हैं। भारत की इकोनॉमी कैश आधारित है, ऐसे में जाली नोटों का चलन एक बड़ी समस्या बना हुआ है। जाली नोटों के चलन और ब्लैक मनी की जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए यह योजना शुरू की गई ह

प्र.   क्या है यह योजना?

उ. 500 और 1000 रुपये के मौजूदा नोटों का चलन बंद कर दिया गया है।  इन नोटों का इस्तेमाल किसी बिजनेस ट्रांजैक्शन और/या किसी दुकान पर नहीं हो पाएगा। इन नोटों को रिजर्व बैंक के 19 दफ्तरों में से किसी में या किसी बैंक की शाखा, किसी पोस्ट ऑफिस में नए नोटों से बदला जा सकता है

प्र. नोटों को बदलने परकीमत क्या मिलेगी?

आपको बैंक की शाखाओं या आरबीआई दफ्तरों में इन नोटों की पूरी कीमत मिलेगी।

 प्र. क्या यह मुझे कैश में मिलेगा?

उ. नहीं, आपको प्रति व्यक्ति 4000 रुपये तक कैश मिलेगा. चाहे आपके पास कितना भी पैसा क्यों न हो।

प्र.  मैं सारा कैश लेकर आया हूं तो पूरी रकम क्यों नहीं मिल सकती?

उ. बड़े नोट वापस लिए जाने की योजना में इसकी सुविधा नहीं है

प्र. 4000 रुपये से मेरा काम चल जाएगा. मैं क्या करूं?

उ. आप अपनी दूसरी जरूरतों के लिए चेक या इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट जैसे इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल वॉलेट, आईएमपीएस, क्रेडिट/डेबिट कार्ड्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

प्र.  मेरे पास कोई बैंक खाता नहीं है तो क्या करूं?

उ. आप जरूरी कागजातों के साथ बैंक की शाखा में संपर्क कर कभी भी खाता खुलवा सकते हैं।

प्र.  मेरे पास केवल जनधन योजना अकाउंट है तो क्या करूं?

उ.जनधन अकाउंट खाताधारक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए पैसे बदलने की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

प्र. मैं अपने नोट कहां बदल सकता हूं?

नोट बदलने की सुविधा रिजर्व बैंक के सभी दफ्तरों, बैंकों की शाखाओं या किसी पोस्ट ऑफिस में उपलब्ध है।

  प्र.     क्या मुझे   बैंक जाने की जरूरत है?

उ. 4000 तक का कैश बदलने के लिए आप पहचान पत्र के साथ किसी बैंक की शाखा में जा सकते हैं। 4000 से ज्यादा के एक्सचेंज के लिए जो केवल बैंक खाते में जमा होंगे, आप उस ब्रांच में जा सकते हैं जहां आपका खाता है या उस बैंक की किसी ब्रांच में जा सकते हैं।अगर आप किसी दूसरे बैंक की ब्रांच में जाना चाहते हैं जहां आपका खाता नहीं है, तो आपको अपने साथ एक वैध पहचान पत्र रखना होगा और आपके अकाउंट में इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर के लिए बैंक अकाउंट के डिटेल देने होंगे

प्र. क्या  मैं अपने बैंक की किसी शाखा में जा सकता हूं?

उ. हां

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अचानक नहीं लिया गया 500-1000 के नोट को बंद करने का फैसला

केंद्र सरकार ने कहा है कि काले धन पर शिकंजा कसने के लिए यह फैसला अचानक नहीं लिया गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा कि इस मुहिम के लिए पिछले छह माह से तैयारी चल रही थी, लेकिन इसको पूरी तरह गोपनीय रखा गया।

पिछले दो माह में दो हजार रुपये के बड़ी संख्या में नोट बैंकों में पहुंचाए गए थे, लेकिन ये किस प्रकार के नोट हैं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई। प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि हमने 500 और हजार के पुराने नोट के बदले में 500 और 2000 रुपये के नए नोट जारी करने के लिए पर्याप्त संख्या में नए नोटों की छपाई की है। मैसूर में कई माह से इसकी छपाई हो रही थी।

आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि काले धन के खिलाफ पहले भी तमाम कदम उठाए गए हैं। लेकिन जाली नोट के कारण मुद्रास्फीति और देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा था। लिहाजा यह बड़ा फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास में बढ़ोतरी और बड़े नोटों की संख्या के बीच अंतर बताता है कि बड़ी रकम काला धन छिपाने में इसका इस्तेमाल किया जा रहा था। उन्होंने साफ किया कि बड़े नोटों के आंकड़ों के साथ बताया कि काले धन का आकार तेजी से बढ़ रहा था, ऐसे में कड़े कदम की जरूरत थी।

काले धन के जमाखोरों का साथ न दें
दास ने आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी काले धन के जमाखोरों के हाथों में न खेलें। उन्होंने कहा कि कोई भी नागरिक काले धन के जमाखोरों से ऐसा धन लेकर अपने खातों में जमा न करें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रानिक लेनदेन में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। बैंकों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिससे पता चल सके कि कौन किसके लिए रकम बैंक में जमा कर रहा है।

रिजर्व बैंक ने कंट्रोल रूम बनाया
दो दिन सरकारी संस्थान, बैंक-डाकघर, अस्पताल, पेट्रोल पंप आदि, 500 से 100 नोट स्वीकार करेंगे, ताकि आम आदमी को कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि लोगों को 500-1000 रुपये के नोट बदलने के लिए 50 दिन का समय दिया है, लिहाजा घबड़ाने की कोई जरूरत न हो। रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय में इसके लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। राज्य सरकारों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशकों को इस बदलाव के लिए जरूरी कदम उठाने को कहागया है।

एसआईटी ने सरकार के कदम का स्वागत किया
एसआईटी चेयरमैन जस्टिस एमबी शाह ने सरकार के कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने काला धन घोषित करने की सरकार को योजना का लाभ नहीं उठाया, अब उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। गैर कानूनी धन की बढ़ती समस्या को देखते हुए ऐसा कदम उठाना जरूरी था।

दो हजार के नोट में मंगलयान की तस्वीर 
दो हजार रुपये का नया नोट गुलाबी और सफेद रंग का है। इसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर के साथ मंगलयान की फोटो भी है, जो विज्ञान की प्रगति का प्रतीक है। जबकि 500 रुपये का नोट हरे मटमैले रंग का है, इसमें महात्मा गांधी के साथ लालकिले की तस्वीर है।

पांच साल में बड़े नोट बेतहाशा बढ़े 
40 प्रतिशत छोटे से बड़े नोट बढ़े
76 प्रतिशत 500 के नोट
109 प्रतिशत 1000 के नोट
30 प्रतिशत बड़ी अर्थव्यवस्था
(सरकार ने दिए आंकड़े)

  दो हजार रुपए का नया करेंसी नोट

दो हजार रुपए का नया करेंसी नोट मैजेंटा (गहरा गुलाबी) रंग का होगा। इसमें महात्मा गांधी की नई सीरीज वाली फोटो होगी।

– नए नोट में किसी तरह का कोई लेटर नहीं होगा। इसके अलावा, इसमें आरबीआई के नए गवर्नर उर्जित पटेल के सिग्नेचर होंगे।

– नोट के पीछे की तरफ इसका प्रिंटिंग ईयर ‘2016’ पब्लिश होगा। वहीं, पीछे की ओर मंगलयान की फोटो होगी। नोट के आगे और पीछे का डिजाइन जियोमेट्रिक पैटर्न कलर के हिसाब से होगा।

(इनपुट साभार – दैनिक भास्कर व आज तक)

 

महिला हॉकी : एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब भारत के नाम

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भारतीय महिला हॉकी टीम ने शनिवार को चीन को 2-1 से हराकर एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब पहली बार अपने नाम किया. भारत ने अंतिम मिनट में पेनाल्टी कॉर्नर के जरिए विजयी गोल दागा. मैच का पहला गोल भारत ने किया. लगातार आक्रामण कर रही भारतीय टीम को 13वें मिनट में पेनाल्टी कॉर्नर मिला. दीप ग्रेस इक्का ने इसे गोल में बदलने में कोई गलती नहीं की और टीम को बढ़त दिलाई.

भारत ने चीन को हराया
44वें मिनट में चीन के लिए झोंक मेंगलिंग ने बराबरी का गोल दागा. लेकिन दीपिका ने अंतिम मिनट में पेनाल्टी कार्नर पर गोल कर भारत को जीत दिलाई. भारत ने यह खिताब पहली बार जीता है. खास बात यह है कि एक हफ्ते पहले भारत की पुरुष टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को हराकर यह खिताब जीता था.

 

प्रेगनेंसी में संबंध बनाने से इंकार करना नहीं है तलाक का आधार-हाईकोर्ट

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नई दिल्ली,यदि पत्नी प्रेगनेंट है और उस दौरान पति से शारीरिक संबंध बनाने से इन्कार कर देती है तो इसे तलाक का आधार नहीं माना जा सकता। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में यह बात कही है।

दरअसल, एक दिलचस्प मामले में पति ने पत्नी के ऐसे बर्ताव को क्रूरता बताते हुए तलाक मांगा था। पति ने फैमिली कोर्ट में यह शिकायत भी दर्ज कराई थी कि पत्नी सुबह देर से उठती है और बिस्तर में ही बैठे-बैठे चाय मांगती है।

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि बेड में ही चाय मांगने वाली पत्नी आलसी जरूर है, लेकिन आलसीपन क्रूरता नहीं है। इसलिए तलाक नहीं मांगा जा सकता। फैमिली कोर्ट ने भी तलाक की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था।

जस्टिस प्रदीप नंद्रजोग और जस्टिस प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने कहा, सही है कि अगस्त 2012 के बाद पत्नी ने पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से मना कर दिया, लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि उसके पेट में भ्रूण था। इससे पहले फैमिली कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि पति के लगाए आरोप आधारहीन हैं।