Wednesday, July 15, 2026
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अरुण यह मधुमय देश हमारा

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जयशंकर प्रसाद

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अरुण यह मधुमय देश हमारा।
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।।
सरल तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरुशिखा मनोहर।
छिटका जीवन हरियाली पर, मंगल कुंकुम सारा।।
लघु सुरधनु से पंख पसारे, शीतल मलय समीर सहारे।
उड़ते खग जिस ओर मुँह किए, समझ नीड़ निज प्यारा।।
बरसाती आँखों के बादल, बनते जहाँ भरे करुणा जल।
लहरें टकरातीं अनन्त की, पाकर जहाँ किनारा।।
हेम कुम्भ ले उषा सवेरे, भरती ढुलकाती सुख मेरे।
मंदिर ऊँघते रहते जब, जगकर रजनी भर तारा।।

गणतन्त्र दिवस पर बिखरे तीन रंग का स्वाद

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तिरंगा पनीर पकौड़ा

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सामग्री – 250 ग्राम पनीर, 1 छोटा कप बेसन, 1 छोटा चम्मच अचार का मसाला, 1 बड़ा चम्मच पुदीना की चटनी, 1 छोटा चम्मच टोमैटो सॉस, 1 छोटा चम्मच चिली सॉस, नमक स्वादानुसार, 1 छोटा कप कटा हुआ हरा धनिया, तलने के लिए तेल।

विधि – सबसे पहले पनीर को समान रूप से तीन भाग में काट लें और हर परत पर पुदीने की चटनी, आचार का मसाला, चिली और टोमैटो सॉस लगाकर एक के ऊपर परत रख दें। अब एक बर्तन में बेसन, 1 छोटा चम्मच तेल, लाल मिर्च, गरम मसाला , नमक, हरा धनिया और थोड़ा-सा पानी डालकर गाढ़ा घोल बना लें। अब इसमें पनीर को डिप करके डीप फ्राई कर लें। सभी टुकड़ों को ऐसे ही फ्राई करके काट लें। तिरंगा पनीर पकौड़े को चटनी और सॉस के साथ सर्व करें।

 

 

 तिरंगी बर्फी

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सामग्री -500 ग्राम मावा (खोया), 250 ग्राम शक्कर, 100 ग्राम घी, कटे हुए बादाम, कटे हुए पिस्ता, कटे हुए काजू, दो चम्मच नारियल बूरा, 2 से 3 बूंद खाने वाला हरा रंग, 2 से 3 बूंद खाने वाला केसरिया रंग, दो चुटकी केसर, 2 से 3 चाँदी वर्क की पत्ती (सजावट के लिए)

 विधि – एक कढ़ाई में घी गर्म करें, गर्म घी में बादाम, पिस्ता और काजू को भून लें। फिर दुसरी कढ़ाई में मावा भूनें हल्का गुलाबी होने पर, मावे में शक्कर डालकर चलाएं, जब शक्कर पूरी तरह घुल जाए तो गैस बंद कर दें।  फिर मावे को तीन हिस्सों में बांट लें, मावे के एक हिस्से में हरा रंग, एक हिस्सा बिना रंग का सफेद रखें, एक हिस्से में केसरिया रंग और थोड़ा केसर मिलाएं। अब एक थाली में घी लगाएं और थाली में सबसे पहले हरे रंग के मावे की परत बिछाएं, फिर सफेद मावा और सबसे ऊपर केसरिया रंग के मावे की परत बिछाएं।  बाद में मावे पर ऊपर से बादाम और पिस्ता डालकर ठंडा होने के लिए रख दें, फिर चाँदी का वर्क लगाकर मनचाहे आकार में तिरंगी बर्फी काटकर मुंह मीठा करें।

 

बनारस की बेटियों के पोस्टरों को गिनीज बुक में जगह मिली

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बनारस की बेटियों के हाथों से बनाए गए 302 पोस्टरों की सिरीज़ को गिनीज़ बुक में जगह मिली है। बनारस की बेटियों के बनाए 302 पोस्टरों की सिरीज़ को गिनीज़ बुक में जगह मिली है। यह रिकॉर्ड बनारस के डॉक्टर जगदीश पिल्लई ने फोटो जागरूकता अभियान के तहत इन पोस्टरों का इस्तेमाल कर बनाया। आइए मिलते हैं उन स्कूली बच्चियों से, जिन्होंने अपनी-अपनी सोच और नज़रिए को लेकर बेटियों पर पेंटिंग्स बनाई हैं। मैने अपनी मर्ज़ी के कपड़े पहने हुए डांस करते हुए एक लड़की की तस्वीर इसलिए बनाई है कि लड़कियों को भी अपनी इच्छा के मुताबिक़ कपड़े पहनने की छूट मिलनी चाहिए और ज़िंदगी जीने की आज़ादी होनी चाहिए.

बेटी पढ़ी लिखी होती है तो पूरे घर को साक्षर करती है. लड़कों के साथ ऐसा नहीं होता। इसके बावजूद लड़कियों को पर घर-गृहस्थी का काम यह बोलकर थोप दिया जाता है कि तुम्हें एक दिन ससुराल जाना है।

मैने पेंटिंग में खुद को घर से किताब लेकर स्कूल के लिए निकलते दिखाया है।

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पूनम – मैंने अपनी पेंटिंग में बाधा दौड़ में हिस्सा लेने वाले धावक दिखाया है. मुझे खेल-कूद पसंद हैं और मैं खेलों की दुनिया में नाम कमाना चाहती हूँ। लड़कों की ही तरह लड़कियों को भी खेल-कूद की आज़ादी मिलनी चाहिए। मैं पहले स्कूल में कबड्डी खेलती थी, लेकिन घर देर से आने पर डांट पड़ती थी. मुझे कबड्डी छोड़नी पड़ी।

नेहा –मेरी पेंटिंग में एक लड़की, दीपक और किताब नज़र आएगी। कुल का चिराग बेटे को माना जाता है, लेकिन लड़कियां भी लिख-पढकर ज्ञान का प्रकाश फैला सकती है। मुझे अक्सर तब डाँट पड़ती है, जब मैं पढ़कर देर से घर पहुंचती हूं।

नेहा पटेल -मैंने अपनी पेंटिंग में मैं ख़ुद को गांव की एक लड़की की तरह दिखाया है, जो आगे चल कर स्कूल टीचर बनती है। गांव में लड़कियों के पहनावे और बाहर आने-जाने पर कई तरह के रोकटोक हैं।

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निकिता -मैंने किताब और कलम इसलिए बनाई कि इसकी ताक़त से लड़कियां ख़ुद को साबित कर सकती हैं।

मेरा इलाका लड़कियों के लिए सुरक्षित नहीं है. शाम-रात के वक़्त अक्सर अपनी मम्मी के साथ ही घर पहुचती हूँ। डॉक्टर पिल्लई ने बताया कि इससे पहले 232 पोस्टरों के साथ यह रिकार्ड महाराष्ट्र की सागर अंजनादेवी सूर्यकांत माणे के नाम था। वे कहते हैं, “मैंने 302 पोस्टरों के ज़रिए यह रिकार्ड अपने नाम कर लिया. मोदी सरकार ने बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ अभियान छेड़ा हुआ है.”

आठ सितम्बर को बनारस के छह अलग-अलग शिक्षण संस्थानों में हुई पेंटिंग प्रतियोगिता में 516 बच्चियों ने हिस्सा लिया था. इसमें से 302 चित्रों को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने चुना। इन चुने हुए 302 चित्रों को गिनीज़ बुक के नियमानुसार पोस्टर में तब्दील कर शहर भर में लगाया गया.

(साभार – बीबीसी हिन्दी)

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शादी में दहेज़ न लेकर, पहलवान योगेश्वर दत्त ने कायम की युवाओं के लिए एक मिसाल!

 

भले ही भारत के पहलवान, योगेश्वर दत्त ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए हो पर अपनी शादी में दहेज़ न लेने का ऐलान कर के उन्होंने ये साबित कर दिया कि उनका दिल सोने का है।

बीते शनिवार को योगेश्वर की सोनीपथ के मुरथल में हरयाणा के कांग्रेस नेता जयभगवान शर्मा की बेटी शीतल से सगाई थी और 16 जनवरी को शादी। उनकी शादी वैसे अपने आप में चर्चा का विषय है लेकिन योगेश्वर की यह शादी दहेज को लेकर भी चर्चा मे रही।

योगेश्वर ने फैसला किया था कि वह दहेज के रूप में दुल्हन के परिवार से केवल एक रुपया लेंगे।

योगेश्वर ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए कहा, “मैंने देखा है कि मेरे परिवार के लोगों ने अपनी लड़कियों के लिए कितनी मुश्किल से दहेज का पैसा जुटाया था। उनको कितनी परेशानी उठानी पड़ी मैं जानता हूं। 34 साल के योगेश्वर ने आगे कहा, ‘उसके बाद मैंने बड़े होते हुए सिर्फ दो ही चीजें सोची थीं। पहली बात तो यह है कि मैं कुश्ती में बड़ा मुकाम हासिल करूंगा और दूसरा कि दहेज नहीं लूंगा।”

उन्होंने कहा कि ‘मेरा पहला सपना पूरा हो गया है। अब दूसरे सपने और वादे को पूरा करने का वक्त है।’ योगेश्वर ने आगे कहा कि काश उनकी शादी को देखने के लिए उनके पिता रामेश्वर दत्त और मास्टर सतबीर सिंह जिंदा होते। योगेश्वर ने कहा कि उनकी इच्छा थी कि उनका दूसरा सपना पूरा होते हुए देखने के लिए उनके पिता और कोच जिंदा होते। योगेश्वर की मां सुशीला देवी ने कहा कि योगेश्वर की शादी उनके लिए खास मौका है। उन्होंने यह भी कहा कि वह दुल्हन के परिवार से शगुन के तौर पर बस एक रुपए के अलावा कुछ और नहीं लेंगी।

हालांकि हमारे देश में अब दहेज़ की प्रथा को अवैध करार कर दिया गया है, फिर भी इस कुप्रथा का पूरी तरह विनाश नहीं हुआ है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 2015 में लोक सभा को लिखे अपने पत्र में सूचित किया था कि भारत में महज़ 3 साल में करीब 24,771 दहेज़ के लिए हत्या के मामले सामने आये है।

ऐसे में युवा वर्ग के लिए मिसाल माने जाने वाले योगेश्वर दत्त के इस नेक कदम से देश भर के युवाओं को एक अच्छी सीख मिलेगी।

 

बीएसएफ बना रहा है महिला बाइकर्स की स्टंट टीम

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इस साल मार्च में बीएसएफ को बाइक पर स्टंट करने वाली महिलाओं की पहली टीम मिल जाएगी। इसे नाम दिया गया है, ‘महिला जांबाज’. इस टीम को पुरुष जांबाज टीम के एक्सपर्ट सब-इंस्पेक्टर के एम कल्याण ट्रेनिंग दे रहे हैं।

देशभर की 5 हजार महिला सैनिकों में से सिर्फ 46 को इस टीम के लिए चुना गया है। ग्वालियर की बीएसएफ अकादमी टेकनपुर में पिछले साल 22 अक्टूबर से इन्हें ट्रेनिंग दी जा रही है. ताकि टीम मार्च में अपनी पहली परफॉर्मेंस दे सके। दैनिक भास्कर की एक खबर के मुताबिक रोजाना इन्हें छह घंटे ट्रेनिंग दी जाती है। ये टीम अब तक 13 प्रकार के फॉर्मेशन बनाना सीख चुकी है। सीआरपीएफ भी इससे पहले महिलाओं की ऐसी टीम बना चुकी है लेकिन वह कभी 8 फॉर्मेशन से आगे नहीं जा पाईं।

लद्दाख से आईं सब इंस्पेक्टर स्टेजिंग नॉरयांग इस महिला बाइकर टीम की कैप्टन हैं। वह कहती हैं कि हमारे साथ ट्रेनिंग ले रहीं 46 में 43 लड़कियों ने कभी साइकिल भी नहीं चलाई थी लेकिन इस टीम के लिए हम बाइक चलाना सीख रही हैं।

अभी तक ये टीम 13 फॉर्मेशन पूरे कर चुकी है और इसका लक्ष्य 22 फॉर्मेशन बनाने तक पहुंचने का है। अगर टीम सभी 22 फॉर्मेशन में कुशल हो जाती है तो 2018 में राजपथ पर बीएसएफ की तरफ से पुरुषों की जगह यह टीम अपना प्रदर्शन दिखा सकेगी। अगर ऐसा हुआ तो राजपथ पर बाइक स्टंट करने वाली महिलाओं की यह देश में पहली टीम होगी।

 

प्रियंका ने दूसरी बार अपने नाम किया पीपल चॉइस पुरस्कार

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भारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने ‘ग्रे’ज एनाटॉमी’ की अभिनेत्री एलेन पोम्पिओ और वियोला डेविज को पीछे छोड़ते हुए ‘2017 पीपल चॉइस अवार्ड’ में पसंदीदा ड्रामेटिक टीवी अभिनेत्री का पुरस्कार अपने नाम कर लिया है।

प्रियंका को यह पुरस्कार उनके अमेरिकी टीवी शो ‘क्वांटिको’ के लिए मिला। उनका यह दूसरा पीपल चॉइस अवार्ड है । पसंदीदा ड्रामेटिक श्रेणी में विजेता घोषित किए जाने के बाद प्रियंका ने अपनी मां मधु चोपड़ा को गले लगाया और फिर वह पुरस्कार लेने मंच पर गई।

इस श्रेणी में कैरी वाशिंगटन और ताराजी पी हेनसन भी नामित थीं। पुरस्कार मिलने से ‘अभिभूत’ प्रियंका ने कहा कि वह पॉम्पेओ, डेविस और अन्य के साथ नामित होकर सम्मानित महसूस कर रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ आप लोगों का शुक्रिया। यह सफर अद्भुत रहा। मेरे साथ आज इस श्रेणी में नामित हर एक महिला, ये सभी बेहतरीन अभिनेत्रियां ही मेरे टेलीविजन शो करने का कारण हैं । ’’ इस दौरान प्रियंका के ‘बेवॉच’ के सह-कलाकार ड्वेन जॉनसन लगातार दर्शक दीर्घा से उनकी हौसला अफ़ज़ाई करते दिखे।

प्रियंका के अलावा ‘2017 पीपल चॉइस अवार्ड’ में भारतीय मूल की लिली सिंह को भी पसंदीदा यूट्यूब स्टार की श्रेणी में नामित किया गया था।

 

उर्दू शायर, गीतकार नक्श लायलपुरी का निधन

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जानेमाने उर्दू शायर और गीतकार नक्श लायलपुरी का आज सुबह अपने घर में निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। उनकी पुत्र-वधू टीना घई ने बताया कि लायलपुरी ने कल शाम सात बजे के बाद अपनी आंखें नहीं खोलीं। वह अपनी बेटी के अलावा किसी अन्य को पहचान नहीं पा रहे थे।

टीना ने कहा, ‘‘वह बहुत तकलीफ में थे। मार्च और अक्तूबर में उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गयी थी, और वह अस्पताल में भर्ती थे। वह बहुत कमजोर हो गए थे।’’ उनका अंतिम संस्कार आज शाम ओशिवारा शवदाहगृह में होगा।

टीना ने कहा, ‘‘वह अब भी उर्दू शायरी पढ़ना चाहते थे और काफी कुछ पढ़ने को बचा हुआ था। उनकी एक आंख की रोशनी खत्म हो गयी थी, लेकिन वह फिर भी पढ़ना चाहते थे, पढ़ने की उनकी प्रबल इच्छा थी।’’ उनका जन्म मौजूदा पाकिस्तान स्थित पंजाब प्रांत के लायलपुर में हुआ था। उनका नाम जसवंत राय था। फिल्मों में उन्हें पहला ब्रेक 1952 में फिल्म ‘जग्गू’ में मिला जिसमें उन्होंने ‘‘अगर तेरी आंखों से आंखें मिला दूं’’ गीत लिखा था।

उनकी चर्चित फिल्मों में ‘‘चेतना’’, ‘‘आहिस्ता आहिस्ता’’, ‘‘तुम्हारे लिए’’, ‘‘घरौंदा’’ भी शामिल हैं।

76 साल बाद सड़क पर दौड़ी नेताजी की कार

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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को उस जर्मन कार को रवाना किया, जिससे अंग्रेजों को चकमा देकर नेताजी नेताजी सुभाष चंद्र बोस नजरबंदी से 1941 में निकलने में सफल रहे थे. नेताजी ने इस कार का इस्तेमाल गोमो स्टेशन तक दिल्ली की ट्रेन पकड़ने के लिए किया था।हाल ही में मरम्मत के बाद कार को रवाना करने से पहले राष्ट्रपति ने कुछ दूरी तक कार की सवारी भी की। रवाना करने से पहले राष्ट्रपति ने कार पर तिरंगा झंडा भी लगाया। कार का नंबर ‘ऑडी वांडरर डब्ल्यू 24’ है।

नेताजी के महानिष्क्रमण की 76वीं वर्षगांठ और नेताजी रिसर्च ब्यूरो का 60वां स्थापना वर्ष मनाया गया। इस दौरान पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी और नेताजी के पोते एवं तृणमूल कांग्रेस सांसद सुगत बोस भी मौजूद थे।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘कार को नया रूप देने के लिए मैं कृष्णा बोस और अन्य सदस्यों को बधाई देता हूं.’ बता दें कि नेताजी के नजरबंदी से भागने की घटना को ‘महानिष्क्रमण’ का नाम दिया गया है।

 

14 साल के लड़के के ड्रोन प्रोजेक्ट में पांच करोड़ का निवेश

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लड़ाई के मैदान में बारूदी सुरंग का पता लगाने वाले ड्रोन को तैयार करने के लिए गुजरात सरकार की ओर से पांच करोड़ रुपए की मदद दी जाएगी। इस ड्रोन को विकसित करने वाले 14 साल के हर्षवर्धन जाला के साथ गुजरात काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने यह डील साइन की है।

अहमदाबाद में हुए वाइब्रेंट गुजरात समिट में इस प्रस्ताव को लेकर मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर साइन किया गया है गुजरात के रहने वाले हर्षवर्धन जाला दसवीं क्लास के छात्र हैं। उन्हें इस ड्रोन को बनाने का आइडिया टीवी में आने वाली ख़बर को देखकर आया।

उन्होंने बीबीसी को बताया, “मैंने जब टीवी पर फ़ौज के लोगों को बारूदी सुरंग के कारण मरते हुए देखा तो पहली बार मेरे दिमाग़ में इस तरह के ड्रोन का आइडिया आया।”

उन्होंने कहा, ”मैंने इसके बाद इस पर रिसर्च किया। अभी जो माइन डिटेक्टर बारूदी सुरंग को जांचने के लिए इस्तेमाल किया जाता था वो सुरक्षित नहीं है और न ही वह सही तरीके से काम करता है।.”

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हर्षवर्धन का दावा है कि उन्होंने ड्रोन बनाने में जिस तकनीक का इस्तेमाल किया है वो उनकी ख़ुद की बनाई हुई है।

हर्षवर्धन बताते हैं, “मेरी छह कोशिशें नाकाम रही हैं और सातवीं बार में कामयाबी मिली। पिछले साल फ़रवरी-मार्च में इसे बनाने में मुझे कामयाबी मिली है, लेकिन इस साल अप्रैल-मई तक पूरी तरह से विकसित किया जाएगा. इसमें अभी हम और भी ख़ूबियां डालने वाले हैं।”

हर्षवर्धन के पिता एक अकाउटेंट हैं और उन्होंने अपनी कंपनी एयरोबैटिक्स-7 शुरू की है। ऐसे ही और गैजेट्स बनाने की उनकी कंपनी की योजना है।

गुजरात काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रमुख नरोत्तम साहू ने बताया, “डेमो देखने के बाद हमें हर्षवर्धन के प्रस्ताव में संभावनाएं नज़र आई हैं इसलिए हमने उनकी योजना पर काम करने का फ़ैसला लिया है। उनका यह ड्रोन 100 मीटर के दायरे में 50 फ़ुट की ऊंचाई से बारूदी सुरंग का पता लगाने में सक्षम होगा। ”

हर्षवर्धन ने बताया कि सरकार ने फ़ाइनल प्रारूप को बनाने में भी उन्हें तीन लाख की मदद दी थी।

 

#IamBrandBihar – बिहार और बिहारियों के बारे में हमारी सोच को बदलने की एक मुहिम !

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फिल्म “ उड़ता पंजाब” में बिहार की जो छवि दिखाई गयी है, वो छवि पूरे बिहार का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती है। भारत के हर हिस्से में विविधता है और आप किसी एक व्यक्ति को उस हिस्से की छवि नहीं मान सकते। इसी बात को कहने के लिए और बिहार की छवि को एक नयी परिभाषा देने के लिए बंगलुरु के रहने वाले २५ वर्षीय छात्र, बशर हबीबुल्लाह ने एक ऑनलाइन मुहिम छेडी है।

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इस मुहिम की शुरुआत २२ तस्वीरों से हुई थी जिनमे अलग अलग पेशे के लोगों ने अपने हाथ में #IamBrandBihar की तख्ती ले रखी थी। धीरे धीरे ये कारवां बड़ा होता गया और अधिक लोग इसमें जुड़ते गये जिसमे ‘सुपर 30’ के संचालक आनंद, कार्टूनिस्ट पवन टून, आई पी एस अफसर विकास वैभव भी शामिल हैं।

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ये मुहिम अपने शुरू होने के १० दिनों के अन्दर ही वायरल हो गयी है। इसे सोशल मीडिया पर दिल खोल के स्वीकारा गया है और हज़ारों शेयर्स और लाखों लाइक्स मिले हैं। इन सब की शुरुआत तब हुई थी जब उड़ता पंजाब का ट्रेलर देखने के बाद एक लेखिका स्वाति कुमारी जो की पटना बीट्स के लिए लिखती हैं ने आलिया भट्ट के नाम खुला ख़त लिखा था। पटना बीट्स एक वेबसाइट है जो बिहार की सही छवि को सामने लाने में प्रयासरत है। इसके बाद उन्होंने अपने मित्र हबीबुल्लाह के साथ मिल कर इस मुहिम को अंजाम दिया।

बिहार के युवा वर्ग का एक बड़ा हिस्सा देश के विभिन्न हिस्सों में बेहतर शिक्षा और नौकरी में अवसरों की तलाश में निकल पड़ता है और अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा दुसरे राज्यों में बिता देता है।

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दुसरे राज्यों में रहने के दौरान उन्हें बिहार के बारे में जो कुछ सुनने को मिलता है उसके बाद वो अपनी पहचान छुपाने में ही भलाई समझते हैं। वो जहाँ रहते है वहां की वेशभूषा और बोलचाल में ढल जातें है। इसी तरह भोजपुरी को बिहारी भाषा समझा जाता है जबकि बिहार में और भी कई भाषाएँ बोली जाती हैं जैसे मैथिली, अवधी और मगही ।

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इस मुहिम की सफलता इस बात को साफ़ जाहिर करती है कि प्रवासी बिहारी अब बिहार की देश भर में व्याप्त छवि को बदल देना चाहते हैं और अब खुल कर सामने आना चाहते हैं। इन तस्वीरों में ये बिहारी ऐसा ही कुछ कह रहे हैं –

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हम उम्मीद करते हैं इसके बाद बिहार को लेकर पूरे देश की सोच जरुर बदलेगी।

(साभार – द बेटर इंडिया)