Tuesday, March 24, 2026
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छोटा कद नहीं बनेगा फैशन का प्रॉब्लम

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छोटी कद वाले पुरुष हमेशा ही अपने कद को लेकर परेशान रहते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि ड्रेसिंग सेंस में थोड़ा बदलाव करने पर आप लंबे दिख सकते हैं। जी हां, आज हम आपको कुछ ऐसे ही टिप्स दे रहे हैं जिनसे आप लंबे दिख सकते हैं।

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इस बात का ख्याल रखें कि आपकी शर्ट या टी-शर्ट ज्यादा लंबी ना हो। शर्ट को हमेशा टक-इन करके पहनें।
छोटी स्लीव्स की शर्टें ना पहनें क्योंकि ऐसे में आपकी बाजू और छोटी लगती है।
लो वेस्ट जींस ना पहनें क्योंकि इससे आपकी टांगे छोटी लगती हैं।

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आप ब्लेजर पहन सकते हैं। इससे आपके कंधे चौड़े लगते हैं और अगर आप बटन बंद कर इसे पहनते हैं तो आप की कमर पतली लगती है जिस कारण आप लंबे दिखेंगे।

कपड़ों के लिए सही रंगों का चुनाव करें। डार्क रंग के ट्राउजर के साथ हल्के रंग की शर्ट पहनें।

स्नीकर या फ्लैट जूतों की जगह बूट्स पहनें। इसमें आप लंबे लगते हैं।

स्लिम फिट कपड़े पहना करें। बड़े बक्कल वाली बेल्ट ना पहनें।

 

हेयर रिमूविंग के लिए वैक्सिंग से बेहतर होती है शेविंग: सर्वे

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शेविंग बाल हटाने के तरीकों में से सबसे सुरक्षित, आसान और साफ तरीका है. त्वचा विशेषज्ञों ने एक सर्वे में यह बात कही है। महिला रेजर ब्रांड ‘जिलेट वीनस’ द्वारा कराए गए रिसर्च में अगस्त 2016 में पूरे देश के 300 त्वचा विशेषज्ञों की राय ली गई थी।

उनसे मौजूदा समय में महिलाओं के लिए बाल हटाने की सबसे अच्छी विधि बताने को कहा गया था। सर्वे में खुलासा किया गया कि 70 फीसदी त्वचा विशेषज्ञ शेविंग को बाल हटाने का सबसे अच्छा तरीका मानते हैं।

त्वचा विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि बाल हटाने के तरीके को चुनते समय त्वचा विशेषज्ञ और महिलाएं सुरक्षा, सुविधा और स्वच्छता के पहलू पर सबसे ज्यादा ध्यान देती हैं। इसमें शेविंग और वैक्स, क्रीम का तुलनात्मक विश्लेषण भी किया गया। इसमें यह सामने आया कि शेविंग को सबसे ज्यादा बेहतर माना जाता है।

करीब 62 फीसदी त्वचा विशेषज्ञों ने सुरक्षा के मामले में शेविंग को सबसे बेहतर बताया। सर्वे में आगे मिथकों और भ्रांतियों पर भी स्पष्टीकरण दिया गया है। सर्वे में शामिल 225 त्वचा विशेषज्ञों में से 90 फीसदी दिल्ली से, 70 फीसदी बेंगलुरू से और 60 फीसदी से ज्यादा मुंबई से थीं। उन्होंने कहा कि आम भ्रांति के विपरीत शेविंग से बालों की मोटाई नहीं बढ़ती।

इसमें एक अन्य आम धारणा यानी त्वचा के कालेपन की भी बात की गई। सर्वे में शामिल करीब 60 फीसदी से ज्यादा त्वचा विशेषज्ञों ने कहा कि शेविंग से त्वचा काली नहीं होती। त्वचा विशेषज्ञ रश्मि शेट्टी ने कहा कि आज के दौर में बालों को हटाने के तरीकों में वृद्धि के साथ, भारतीय महिलाएं इसके लिए सबसे बेहतर विकल्प चुनने के मामले में ज्यादा सतर्क हो गई हैं। भारतीय महिलाएं खास तौर से त्वचा की देखभाल के मामले में ज्यादा सतर्क रहती हैं।

उन्होंने कहा कि वे अब किसी उत्पाद को खरीदने से पहले उसके पीछे छपे विज्ञान को समझने में दिलचस्पी लेती हैं इसलिए उचित यही है कि उन्हें सही जानकारी दी जाए। इस तरह वे एक सही फैसला लेकर अपनी जरूरत के मुताबिक बाल हटाने के सबसे बेहतर तरीके का चुनाव कर सकती हैं।

 

बूढ़ी सेक्सवर्करों के लिए मसीहा बनने वाली कार्मेन मुनोज़

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मेक्सिको सिटी की सड़कों पर सालों काम करने के बाद कार्मेन मुनोज़ ने सोचा कि उनके जैसी महिलाएं जब बूढ़ी हो जाती हैं तो उनके साथ क्या बीतती है। तब उन्होंने एक रिटायरमेंट होम खोलने के लिए अभियान की शुरूआत की।

कार्मेन ने मेक्सिको सिटी में 16 शताब्दी के ऐतिहासिक प्लाज़ा लोरेटो के पास यौनकर्मी के रूप में अपने काम की शुरुआत की थी। वो रोज़गार की तलाथ में यहां आई थीं और उन्हें बताया गया था कि सैंटा टेरीज़ा ले नुवा गिरिजाघर के पादरी कभी-कभी घरेलू काम ढ़ूढ़ने में लोगों की मदद करते हैं.

22 साल की कार्मेन अनपढ़ थीं और उनके 7 बच्चे थे- एक तो उनकी गोद में था। चार दिन के इंतज़ार के बाद वो पादरी से मिली पाईं, लेकिन उन्हें कोई काम नहीं मिला।

ऐसे में एक महिला कार्मेन के पास आई और उसने बताया कि अगर तुम थोड़ी दूर खड़े उस आदमी के साथ जाओगी तो वो तुम्हें 1000 पेसो देगा। हालांकि आज के एक्सचेंज मूल्य के हिसाब से देखें को तो वो कोई बड़ी रकम नहीं थी, लेकिन उस वक्त कार्मेन के लिए यह ख़ज़ाने से कम न था।

कार्मेन के पूछने पर महिला ने कहा करि उन्हें उस आदमी के साथ एक कमरे में जाना है और काम करना है. कार्मेन यह सुन कर डर गई और उन्होंने इससे इंकार किया। महिला ने कार्मेन को समझाया, “जब आप अपने पति को यौन सुख दे सकती हैं और आपको उसके बदले साबुन का एक टुकड़ा तक नहीं मिलता तो उस आदमी को यौन सुख क्यों नहीं दे सकतीं जिससे आपके बचों को खाना मिलेगा?”

कार्मेन ख़ुद को असहाय महसूस कर रही थीं, लेकिन वो उस आदमी के पास गईं। उस आदमी ने शायद कार्मेक की मजबूरी समझ ली थी। उसने 1000 पेसो उनके हाथ में रख दिए और कहा कि वो उनका फ़ायदा नहीं उठाना चाहते और उन्हें पैसे के बदले कुछ नहीं चाहिए।

अगले दिन कार्मेन प्लाज़ा लौरॉटो में उसी जगह पर पहुंची, लेकिन इस बार वो सोच रही थीं कि अब उनके बच्चे भूखे नहीं सोएंगे। प्लाज़ा लोरेटो और पास की गलियों में कार्मेन ने 40 सालों तक काम किया।

इस इलाके को मेरसेड कहा जाता है और यह देश के सात बड़े रेड लाइट इलाकों में से एक है। कार्मेन के अनुसार जब उन्होंने इस काम में क़दम रखा था उन्हें पैसा चाहिए था। उन्हें पता था कि जहां उनके बच्चों के पिता ने उन्हें बदसूरत और किसी काम का नहीं कहते हुए ठुकरा दिया था, वहीं उन्हें किसी के साथ रहने के लिए पैसे मिल रहे थे।

लेकिन सड़कों पर इस तरह के काम की भी अपनी मुसीबतें थीं- अधिकारी और दलाल पैसा मांगते थे। मारपीट, यौन उत्पीड़न आम बात थी. उन्हें ड्रग्स और शराब की लत भी लग गई लेकिन इस सबके बावजूद वो ईश्वर का धन्यवाद करती हैं।

वो कहती हैं, “यौनकर्मी बन कर मैं अपने बच्चों को पाल पाई, उन्हें सर ढकने के लिए, सम्मान से रहने के लिए एक छत दे सकी. “कई सालों बाद कार्मेन दूसरों के लिए भी घर बनाने में कामयाब हुईं।

एक रात जब वो सड़क से गुज़र रही थीं उन्होंने एक तारपोलीन देखी, उन्हें लगा इसमें बच्चे होंगे. उन्होंने तारपोलीन उठाई तो देखा उसके साथ काम करने वाली यौनकर्मियां जो अब बूढ़ी हो चुकी हैं एक दूसरे को पकड़ कर बैठी हुई हैं।

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कार्मेन उनके लिए कॉफी लाई और उनके रहने के लिए एक सस्ता होटल ढूंढा।

कार्मेन को अहसास हुआ कि जब एक यौनकर्मी बूढ़ी हो जाती है और उसका यौवन ढल जाता है, सड़कों पर गुज़ारा करना बेहद मुश्किल हो जाता है। वो अपने परिवारों में वापस नहीं जा सकतीं और सड़कों पर रहने के लिए मजबूर होती हैं। कार्मेन उनके लिए कुछ करना चाहती थीं.

अगले 13 सालों तक वो बूढ़ी, लाचार महिलाओं और यौनकर्मियों के लिए रिटायरमेंट होम के लिए शहर के अधिकारियों से बात करती रहीं। कई कलाकारों, साथ में काम करने वाली यौनकर्मियों और मेरसेड में रहने वालों की मदद से वो सफल हुईं।

शहर के अधिकारियों ने पाल्ज़ा लोरेटो के पास 18 शताब्दी में बनी एक इमारत उन्हें दे दी. अब उनके और उनके जैसी कई महिलाओं के पास अपना एक घर था। उन्होंने मिल कर इसकी सफाई की और महिला की सुंदरता और यौन शक्ति की देवी के नाम पर इसका नाम दिया कासा जोशेक्वेत्ज़ल।

यहां अभी 25 महिलाएं रह रही हैं जिनकी उम्र 55 से 80 साल की बीच है। इनमें से कई अभी भी यौनकर्मी के रूप में काम कर रही हैं। बीते 11 सालों में यहां पर 250 से भी अधिक महिलाओं ने आसरा पाया है.

कासा जोशेक्वेत्ज़ल सरकारी मदद के आसरे चल रहा है जो कि काफी कम है। कुछ लोगों के दान से भी रिटायरमेंट होम का खर्चा चलाने में मदद मिलती है.

इसे चलाने की अपनी समस्याएं भी हैं। सबसे बड़ी समस्या है कि सभी महिलाएं साथ मिल कर नहीं रह पातीं। वो आज एक साथ हैं, लेकिन कभी सड़कों पर वो एक दूसरे की प्रतिद्वंदी थीं।

कार्मेन बताती हैं कि हमने मारपीट सहा है, उत्पीड़न सहा है, हमें अलग किया गया है, हम हमेशा आक्रामक हो जाती हैं और ज़रूरत पड़ने पर हमला करने को तैयार रहती हैं।

यहां रहने वाली मार्बेला एगुइलर कहती हैं, “लेकिन अलग विचार तो परिवार में भी होते हैं, हम यहां एक-दूसरे की इज़्ज़त करना सीखते हैं. हम अपने घर में खुशी लाने की कोशिश करते हैं।”

क्रेमेन कहती हैं, “हमें हक है कि हम अपनी ज़िंदगी के आख़िरी दिन शांति से गुज़ारें और इस भरोसे के साथ गुज़रें कि हमें मरने के लिए सड़क पर नहीं छोड़ दिया जाएगा।”

कार्मेन कहती हैं कि वो भी एक दिन इस रिटायरमेंट होम में रहने के लिए आएंगी।

(साभार – बीबीसी हिन्दी)

रिएलिटी टीवी शो करना चाहती हैं बिपाशा

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बिपाशा बसु अब छोटे पर्दे पर आने की योजना बना रही हैं। उनका कहना है कि वह किसी काल्पनिक कहानी पर काम करने के बजाय रिएलिटी टीवी शो में आना पसंद करेंगी।

बिपाशा की पिछली फिल्म ‘अलोन’ थी, जो वर्ष 2015 में आई थी। टीवी अभिनेता करण सिंह ग्रोवर के साथ पिछले साथ शादी करने के बाद उन्होंने फिल्मों से ब्रेक ले लिया था।
लैक्मे फैशन वीक में डिजाइनर फाल्गुनी और शेन पीकॉक के लिए रैंप वॉक करने वाली बिपाशा ने कहा, ‘‘फिक्शन में सुधार आ रहा है लेकिन धीरे-धीरे। हम अब भी एक अलग किस्म के दर्शकों को आकषिर्त कर रहे हैं। सोच बदल रही है। हां, मैं टीवी करने के लिए तैयार हूं लेकिन इस समय मैं रिएलिटी टीवी करना चाहूंगी। इस समय मैं काल्पनिक कहानियों पर काम नहीं करना चाहती।’’ अभिनेत्री ने कहा कि वह फिल्मों में वापसी की भी योजना बना रही हैं और वह कॉमेडी फिल्में करना चाहेंगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं जल्दी ही बड़े पर्दे पर वापसी करूंगी। शादी हो गई है, हनीमून भी हो गया है। अब मैं कॉमेडी फिल्म करना चाहूंगी।’’ बिपाशा ने रैंप वॉक के दौरान चमकदार सिल्वर गाउन पहना था। उन्होंने कहा कि उनके पति करण ने उनके लिए यह परिधान चुना है।

 

इंजीनियर, फैशन डिजाइनर की नौकरी छोड़ वह बनी पुलिस ऑफिसर 

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पुलिस वालों की नौकरी बहुत कठिन होती है। लोग इस नौकरी को खासकर महिलाएं इस पेशे में नहीं जाना चाहती, लेकिन जब आप मंजीरा के बारे में सुनेंगे तो हैरान रह जाएंगे। गुजरात की वंजीता इन दनों सोशल मीडिया पर छाई हुई है। वजह भी नेक है। गुजरात के पूर्व आईपीएस डीजी वंजारा की भतीजी अपने इरादों की वजह से आज सैकड़ों लड़कियों की आदर्श बन  गई है। मंजीता वंजारा ने आरामदायक नौकरियों को छोड़कर सिविल सर्विस को चुना। ऐसा करने के पीछे उसके नेक इरादों को जानकर आप भी उन्हें सलाम करेंगे। मंजीता ने खुद अपने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर अपनी मन की बात बताई। जिसके बाद उनका ये पोस्ट वायरल हो गया। मंजीता ने बताया क वो ऐसे परिवार में जन्मीं जहां कई आईएएस और आईपीएस हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं भी इसी दिशा में चली जाऊंगी। पहले इंजीनियरिंग की, लेकिन मेरी दिलचस्पी फैशन डिजाइनिंग में थी, इसलिए मैंने एनआईएएफटी से फैशन डिडाइनिंग का कोर्स किया और बड़े फैशन ब्रांड के साथ जुड़ गई। उन्होंने आगे बताया कि उन्हें एजुकेशन सब्‍जेक्‍ट से पीजी किया और गोल्‍ड मेडलिस्‍ट भी रही।  मंजीता ने कहा कि मैं अच्छे और सुखी संपन्न परिवार से हूं, लेकिन मेरे माता-पिता चाहते थे कि मैं जिंदगी का असली मतलब सीखूं, इसलिए उन्होंने मुझे कभी कार नहीं दी। संपन्न परिवार से होने के बावजूद मैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करती थी। इसी सफर के दौरान मैंने गरीबी और समाज को करीब से देखा और जाना कि समाज हमें बहुत कुछ देता है। हमें भी समाज को कुछ देना चाहिए। समाज को अपना योगदान देने के लिए मैंने भी सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू और साल 2013 में सफलता ासिल कर पुलिस की नौकरी ज्वाइंन कर ली। बेहतरीन क्लासिकल डांसर मंजीता ने खुद अपने पोस्ट में लिखा है कि वो एक बेहतरीन क्लासिकल डांसर है और वो भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी नृत्‍य जानती है। उन्होंने कहा कि मैं चाहती तो इंजीनियरिंग या फैशन डिजाइनिंग या फिर डांस को अपना करियर चुनकर लाखों के पैकेज में आराम की नौकरी कर सकती थी, लेकिन मुझे समाज की सेवा करनी थी।

 

ये हैं आम बजट की कुछ खास बातें

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लोकसभा में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज आम बजट 2017 पेश किया. पढ़िए बजट में अहम मुद्दों को लेकर की गई कुछ प्रमुख घोषणाएं –

रक्षा
रक्षा के लिए 2 लाख 74 हजार 114 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा। ये राशि पेंशन के अतिरिक्त। इसमें 86,488 करोड़ रुपये की रक्षा पूंजी। रक्षा पेंशनरों की शिकायतों को कम करने के लिए वेब आधारित इंटरेक्टिव पेंशन वितरण प्रणाली शुरू करने की घोषणा। यह प्रणाली पेंशन प्रस्तावों को प्राप्त करेंगी और भुगतान को केंद्रीकृत करेगी। रक्षा कर्मियों की रेलवे टिकट बुकिंग की परेशानी को समाप्त करने के लिए एक ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणाली की घोषणा।

टैक्स
तीन लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं। साढ़े तीन लाख रुपये तक की आय पर महज ढाई हजार रुपये टैक्स। पांच लाख तक की आय पर 10 फीसदी की बजाय 5 फीसदी टैक्स। 5 लाख से अधिक की आय पर टैक्स स्लैब पहले की तरह। करदाताओं को होगा प्रतिवर्ष साढ़े 12 हजार रुपये तक का फायदा।

रेलवे
रेल संरक्षा के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का फंड। 2020 तक मानव रहित क्रासिंग पूरी तरह खत्म। रेल सेफ्टी के लिए 1 लाख 31 हजार करोड़। स्टेशनों के विकास के लिए 25 स्टेशन का चयन। रेलवे में स्वच्छता, सुरक्षा पर जोर। 3500 किमी नई रेल लाइन बनेंगी। 7000 हजार स्टेशनों पर सोलर लाइनें। IRCTC से ई-टिकट पर सर्विस टैक्स नहीं लगेगा। रेलवे स्टेशनों को दिव्यांगों के लिए आसान बनाया जाएगा। 2019 तक बॉयो टॉयलेट.शेयर बाजार में IRCTC बतौर कंपनी लिस्ट होगी. मेट्रो रेल के लिए नई नीति की घोषणा की जाएगी। टूरिज्म और धार्मिक यात्राओं के लिए अलग से ट्रेनें चलाई जाएंगी. कोच की शिकायतों के लिए कोच मित्र योजना लाई जा रही है।

बुनियादी ढांचा
-पीएम आवास योजना में 23 हजार करोड़ का आवंटन। पीएम सड़क योजना में 2019 तक 4 लाख करोड़ खर्च करेंगे। प्रधानमंत्री अवास योजना के तहत 2019 तक एक करोड़ घर दिए जाएंगे। अगले साल 1 मई तक देश के सभी गांवों तक बिजली पहुंचा दी जाएगी। बुनियादी ढांचे के लिए 3.96 लाख करोड़ का आवंटन होगा। पीपीपी मॉडल से छोटे शहरों में भी एयरपोर्ट बनाए जाएंगे।

किसान
किसानों को 10 लाख करोड़ का कर्ज दिया जाएगा। किसानों को कर्ज देने वाली संस्था का कम्प्यूटरीकरण किया जाएगा। 2017-18 में कृषि विकास दर 4.1 रहने का अनुमान। फसल बीमा अब 30 की बजाय 40 फीसदी होगा। फसल बीमा के लिए 9 हजार करोड़ का प्रावधान। किसानों की आय 5 साल में दोगुनी करने की कोशिश। मनरेगा के तहत इस साल अब तक का सबसे अधिक आवंटन। गांव की तरक्की और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया जाएगा। 10 लाख तलाबों का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। 8 हजार करोड़ का डेयरी विकास कोष। 5 हजार करोड़ सिंचाई फंड के लिए।

नोटबंदी
नोटबंदी ऐतिहासिक कदम है। इससे अर्थव्यवस्था पर असर हुआ है लेकिन इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार कम होगा। नोटबंदी के चलते बैंकों के पास ज्यादा पैसा आया है और इससे बैंक कर्ज सस्ते कर सकते हैं। नोटबंदी के घरेलू विकास में तेजी आएगी।

स्वास्थ्य

2018 तक चेचक और 2022 तक टीबी खत्म करेंगे। झारखंड और गुजरात में 2 नए एम्स बनेंगे। 2017 तक कालाबाजर समाप्त करने का ब्लूप्रिंट। झारखंड और गुजरात में दो एम्स बनेंगे।

शिक्षा
350 ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की शुरुआत होगी। स्किल इंडिया के लिए 1000 कौशल केंद्र खोले जाएंगे। IIT और मेडिकल परीक्षाओं के लिए अलग से बॉडी बनेगी। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी बनाने का प्रस्ताव। उच्च शिक्षा में सुधार के लिए UGC में सुधार होगा।

बजट में रेलवे से जुड़ी अहम घोषणाएं

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चौथा आम बजट पेश करते हुए रेलवे से जुड़ी भी कई अहम घोषणाएं कीं. इस वित्तीय वर्ष से रेल बजट को आम बजट में ही शामिल कर दिया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि वह स्वतंत्र भारत में दोनों बजट एक साथ पेश करते हुए सम्मानित महसूस कर रहे हैं। जेटली ने रेल से जुड़ी ये अहम घोषणाएं कीं-

यात्रियों की सुरक्षा पर सरकार एक लाख करोड़ खर्च करेगी।आईआरसीटीसी के ज़रिए ई-टिकट बुकिंग्स के दौरान अब अलग से सर्विस चार्ज नहीं लगेगा।

रेलवे की तीन बड़ी कंपनियां- आईआरसीटीसी, आईआरएफ़सी और इरकॉन शेयर बाज़ार में उतरेंगी।

500 रेलवे स्टेशनों को शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए सुविधाजनक बनाया जाएगा।

31 लाख करोड़ रेलवे के विकास पर खर्च किया जाएगा।

रेलवे का मुख्य फोकस- यात्री सुरक्षा, सफ़ाई और विकास है।

2019 तक भारतीय रेलवे के सभी कोच बायो-टॉइलेट से लैस हो जाएंगे।

मानवरहित क्रॉसिंग को 2020 तक ख़त्म कर दिया जाएगा।

यात्रा के दौरान कोच से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने के लिए कोच मित्रों की नियुक्ति होगी।

एक नई मेट्रो रेल नीति की घोषणा होगी जिससे नई नौकरी पैदा करने में मदद मिलेगी।

 

कोलकाता में पारसी समुदाय की आबादी कम हुई

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कोलकाता : एक जमाने में कोलकाता की काफी फलता-फूलता रहा समुदाय पारसी की संख्या अब घट रही है और अब यह केवल 500 रह गयी है। इस समुदाय को अपनी आबादी में और गिरावट का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि सुनहरे भविष्य की आस में युवा शहर छोड़ रहे हैं।

समुदाय के वरिष्ठ ट्रस्टी और सदस्य बहादुर पोस्तवाला ने बताया, ‘‘1930 के दशक में जब हमारी संख्या बढ़ रही थी उसके मुकाबले इसमें काफी गिरावट आयी है। 1960 और 70 के दशकों के दौरान हमारे लोगों ने कोलकाता छोड़ना शुरू कर दिया और अब केवल 500 लोगों की संख्या रह गयी जो जिसमें से युवाओं की संख्या 50 प्रतिशत से कम है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘शहर में नौकरी का वर्तमान परिदृश्य आशान्वित करने वाला नहीं है। काफी युवा कनाडा, आस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड और भारत के कई अन्य शहरों में जाकर बस गये। यह 1960 के दशक में शुरू हुआ था और इसमें लगातार बढ़ोतरी ही हुयी। हालांकि, हम लोग लगातार संपर्क में रहते हैं।’’ उन्होंने बताया कि शहर से युवाओं की यादें जुड़ी हुयी हैं और वे त्यौहारों के दौरान यहां आते रहते हैं।
पोस्तवाला ने बताया, ‘‘यह आपसी सौहार्द से ओत-पोत समुदाय है। हम एक साल में करीब 50 बार मिलते हैं। साथ ही इस मुश्किल घड़ी में हमारा समुदाय एक जीवंत है लेकिन दुखद बात यह है कि हमारी संख्या में गिरावट आ रही है।’’ मुंबई के मुकाबले कम जाने जाने वाले इस शहर में 18 वीं शताब्दी के अंत में सूरत से पारसी समुदायों का आगमन हुआ था। पूर्वी भारत और ब्रिटिश भारत की राजधानी के दौरान शहर में ब्रिटिश शासनकाल में इनकी संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गयी थी।

 

भारत ने बच्चा लौटाया, पाकिस्तान बोला-शुक्रिया

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भारत की मदद से एक मां को उसका बच्चा मिल गया है. पांच साल का इफ़्तिखार अहमद 11 महीने पहले अपनी अम्मी से बिछड़ गया था।

दरअसल, भारत प्रशासित कश्मीर में रहने वाले इफ्तिख़ार के पिता गुलज़ार अहमद तांतरे इफ्तिख़ार को पाकिस्तान से अपने साथ ले आए थे। भारत ने इफ्तिखार को भारत-पाक सीमा पर पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंप दिया गया है। पाकिस्तान ने बच्चे को लौटाने के लिए भारत का आभार जताया है।

इफ्तिख़ार की मां रोहिना कयानी ने इसे ‘चमत्कार’ बताया है. उन्होंने कहा, “मैं तो अपने बच्चे से मिलने की उम्मीद ही खो चुकी थी।” वे कहती हैं, “मैं पाकिस्तान सरकार की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मेरी मदद की। “कयानी पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में रहती हैं. जबकि उनके पति गुलज़ार अहमद तांतरे अब भारत प्रशासित कश्मीर में रह रहे हैं।

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मार्च 2016 में तांतरे को भारत की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. तब इफ्तिखार पर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद छिड़ गया। दरअसल गुलज़ार अहमद तांतरे गांदरबल के एक गांव में जन्मे और पले-बढ़े. गांदरबल भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर राज्य का एक ज़िला है।

तांतरे कथित तौर पर 1990 में हथियार प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर गए. उस समय भारत प्रशासित कश्मीर में चरमपंथ ज़ोरों पर था। भारत प्रशासित कश्मीर लौटने पर तांतरे अपने साथ बेटे को ले आए. वहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। रोहिना कयानी ने पति पर बच्चे को अगवा करने और भारत भाग जाने का आरोप लगाया. लेकिन तांतरे और उनका परिवार बच्चे के अपहरण से इनकार करता है।

 

जिस देश में बजता है महिलाओं का डंका

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हिलेरी क्लिंटन भले ही राष्रपति पद का चुनाव हार गईं हों और दुनिया में टॉप सरकारी नौकरियों में भले ही महिलाओं का प्रतिशत कम हो मगर टर्क्स एंड केकॉस नामक ब्रिटेन के इस उपनिवेश में हाल ही में हुए चुनावों में पहली बार एक महिला प्रीमियर चुनी गईं।

शार्लिन कार्टराइट-रॉबिंसन ने ये चुनाव जीता है और इस छोटे से देश में उनकी तरह कई और महिलाएं बड़े ओहदों पर मौजूद हैं। देश के डिप्टी गवर्नर, अटॉर्नी जनरल, चीफ़ जस्टिस, चीफ़ मजिस्ट्रेट, प्रमुख सरकारी वकील और सात में से पांच प्रमुख सचिव पदों पर महिलाएं हैं।

महिलाओं के इस बेहतरीन प्रदर्शन के चलते अब देश में युवा पुरुषों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है जिससे वे महिलाओं की सफलता की बराबरी कर सकें। आम तौर पर महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए काम करने वाला टर्क्स एंड केकॉस देश का ‘जेंडर अफ़ेयर्स डिपार्टमेंट’ इन दिनों हाई स्कूल के युवाओं को ‘ज़्यादा एकाग्रता से समाज में शीर्ष पदों के लिए मेहनत करने का’ प्रोत्साहन दे रहा है।

देश की डिप्टी गवर्नर आन्या विलियम्स ने बताया कि इसमें अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाए जाने से लेकर ‘लीडरों वाले समर कैंप’ आयोजित करना शामिल है। सवाल ये है इस देश में महिलाओं ने ये मुकाम कैसे हासिल किया?

ऐतिहासिक चुनाव जीतने वाली देश की प्रीमियर कार्टराइट-रॉबिंसन के अनुसार “इस नौकरी के लिए मैं बेस्ट मैन थी। “पारदर्शिता और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को अपने चुनावी मैनिफेस्टो में रखने वाली कार्टराइट-रॉबिंसन ने 52 दूसरे प्रत्याशियों को हराया है.

उन्होंने बीबीसी से ये भी बताया कि उन्हें महिला के बजाय एक ऐसी इंसान के तौर पर देखा गया जो काम पूरे करने में सक्षम हैं और यही जीत की वजह रही। कुछ ऐसा ही मानना टर्क्स एंड केकॉस की पहली एटॉर्नी जनरल रोह्न्डली ब्रैथवेट-नॉवेल्स का भी है।

उन्होंने बताया, “मेरे साथ कभी भी किसी तरह का भेदभाव नहीं हुआ. हमारे देश के नागरिक समाज में बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जिनकी अपनी पहचान है, चाहे वो कॉरपोरेट जगत हो या राजनीति. कभी-कभार जब वरिष्ठ पदों पर पुरुष रहते हैं तो उनका ध्यान बंट सकता है लेकिन कुछ समय बाद ये सब ख़त्म हो जाता है।”

उनके मुताबिक़ इससे ज़्यादा मुश्किल ये रहता है कि वरिष्ठ पदों पर आसीन महिलाओं को अपने परिवार या उनके अपने संदर्भ में सात वर्ष के एक बेटे की परवरिश पर भी बराबर ध्यान देने की ज़रुरत होती है। एटॉर्नी जनरल रोह्न्डली ब्रैथवेट-नॉवेल्स के मुताबिक़, “क्योंकि महिलाएं बहुमुखी होती हैं इसलिए वे इसे पूरा कर लेतीं हैं.”

देश की डिप्टी गवर्नर विलियम्स भी इस बात से सहमत हैं। उन्होंने कहा, “35,000 लोगों की जनसंख्या वाले इस देश में महिलाएं हमेशा से शिक्षा, मेडिसिन, राजनीति और सरकारी क्षेत्र में अग्रसर रही है.”

“महिलाएं यहाँ पर इतने बड़े पदों पर हैं ये एक बड़ी बात है. लेकिन एक जवान बेटे की माँ होने के नाते मेरा फ़र्ज़ है कि उसे आगे आने वाले मौकों और बड़े ओहदों के लिए मेहनत करने का भरपूर प्रोत्साहन देती रहूँ।.

(साभार – बीबीसी हिन्दी)