Friday, March 27, 2026
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बाहुबली 2′ ने रचा इतिहास, 1000 करोड़ कमाने वाली बनी पहली भारतीय फिल्म

एसएस राजामौली की फिल्म ‘बाहुबली 2’ ने इतिहास रच दिया है। ये पहली भारतीय फिल्म बन गई है जिसने दुनिया भर में 1000 करोड़ की कमाई की है। ‘बाहुबली 2’ ने मात्र नौ दिनों में ये आंकड़ा पार कर लिया है।

रमेश बाला ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। ‘बाहुबली 2’ ने भारत में 800 करोड़ से ज्यादा की कमाई की वहीं विदेश की बात की जाए तो फिल्म ने 200 करोड़ की कमाए हैं। फिल्म के शो अभी भी हाउसफुल जा रहे हैं जिसके बाद लग रहा है कि फिल्म 1500 करोड़ का आंकड़ा भी पार कर सकती है।
हिंदी में ‘बाहुबली 2’ ने सभी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। एक हफ्ते में ‘दंगल’ ने 197.54 करोड़ रुपये और ‘सुल्तान’ ने 229.16 करोड़ की कमाए थे। वहीं ‘बाहुबली 2’ ने अपने पहले दस दिनों में हिंदी भाषा में 300 करोड़ की कमाई की है।
अमेरिका में भी फिल्म की धुंआधार कमाई जारी है। अभी तक ‘दंगल’ अमेरिका में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म थी लेकिन एसएस राजामौली की ‘बाहुबली 2’ ने उसे भी पीछे छोड़ दिया है। अमेरिका में ‘बाहुबली 2’ 100 करोड़ कमाने वाली पहली भारतीय फिल्म बन गई है।
 

 

 

 प्लेन में बदतमीजी की तो सालों तक नहीं कर पाएंगे सफर

शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ द्वारा एयर इंडिया में की गई बदसलूकी और अभद्र व्यवहार के बाद भारत सरकार ‘नो-फ्लाइ लिस्ट’ के लिए नए नियम जारी किए। ​नागरिक उड्डयन सचिव आर एन चौबे ने इन नियमों काड्राफ्ट पेश किया। इसके साथ ही लोगों को उनके खराब आचरण और अभद्र व्यवहार के लिए फ्लाइट में बोर्ड करने से रोका जाएगा।

नए नियमों के अनुसार बदमिजाज लोगों के रवैये को 3 कैटेगरी में बांटा गया है। पहले लेवल में शारीरिक हाव-भाव से रोक पैदान करने पर सजा दी जाएगी। लेवल-2 में शारीरिक स्तर पर हिंसा, धक्का-मुक्की, हाथ-पांव चलाना और यौन शोषण जैसे अपराध शामिल होंगे।

तीसरे और अंतिम लेवल पर जानलेवा हिंसा, जान से मारने की धमकी जैसा बर्ताव शामिल किया जाएगा। पहले लेवल के दोषी होने पर 3 महीने, दूसरे लेवल पर 6 महीने से 2 साल और तीसरे लेवल में 2 से ज्यादा की सजा का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा बुरे बर्ताव के लिए फ्लाइट में उड़ने पर रोक भी लगाई जा सकती है।

हालांकि, डोमेस्टिक फ्लाइट में लगी पाबंदी को अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स के लिए मानना अनिवार्य नहीं हैं। वो इस मामले में फैसला लेने पर स्वतंत्र हैं। इंडियन एयरलांइस के मांग पर उड्डयन मंत्रालय द्वारा सिविल एवियेशन रिक्वायरमेंट (सीएआर) ड्राफ्ट तैयार किया गया है। भारत में पहली बार इस तरह का ड्राफट लाया गया है।

विमान में सफर करने के लिए बनाए गए नियमों की घोषणा नागरिक उड्डयन मंत्री गजपति और जयंत सिन्हा करेंगे। इस ड्राफ्ट के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने वालों की हवाई यात्रा पर रोक भी लगाई जा सकती है।

बता दें कि 23 मार्च को रवींद्र गायकवाड़ ने एयर इंडिया के विमान में एक कर्मचारी से मारपीट की। इसके बाद एयर इंडिया ने उनपर बैन लगा दिया था। हालांकि मंत्रालय में माफीनामा देने के बाद एयरलाइन्स ने उनपर से बैन हटा लिया। नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए घरेलू विमान की बुकिंग में भी आधार या पासपोर्ट नंबर अनिवार्य किया जा सकता है।

इस ड्राफ्ट पर आम जनता से भी राय ली जाएगी। आम जनता को अपने सुझाव एक महीने के भीतर देने होंगे। इसके बाद मंत्रालय सुझावों पर विचार करेगा और फिर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस काम में लगभग 3 महीने का वक्त लगेगा।

इस ड्राफ्ट को पेश किए जाने के बाद सांसद रविंद्र गायकवाड़ ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इससे भी ज्यादा सख्त नियम बनाए जाने चाहिए।

 

महिलाओं को मिलेगी टैक्स में छूट, फ्री हेल्थ चेकअप और कैशलेस मेडिकल सर्विस

देश में करीब आधी आबादी होने के बावजूद महिलाओं को लैंगिंग असमानता का आज भी सामना करना पड़ता है। इस समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा प्लान ला आ रही है। इस प्लान के मुताबिक महिलाओं को टैक्स में छूट और उनको हेल्थ चेकअप दिया जाएगा। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, अकेली रहने वाली महिलाओं के लिए मोदी सरकार एक टैक्स पॉलिसी लेकर के आ रही है। इस पॉलिसी के तहत महिलाओं को टैक्स में छूट मिलेगी। इतना ही नहीं आधार से जुड़े हेल्थ कार्ड्स बनाए जाएंगे, जिनकी मदद से महिलाएं चेकअप करा सकेंगी और प्रेग्नेंट महिलाएं कैशलेस मेडिकल सर्विस पा सकेंगी।   बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की अध्यक्षता में मंत्रियों की टीम इस पर काम कर रही है और इसकी जल्द ही घोषणा की जाएगी।  इसमें महिलाओं के लिए स्वच्छ खाने की चीजों और उनके लिए पब्लिक टॉयलेट्स की संख्या बढ़ाने का भी ध्यान रखा जा रहा है। लिंग-आधारित हिंसा के चलते उन्हें मुफ्त चिकित्सा और कानूनी समर्थन, परामर्श और आश्रय प्रदान किया जाएगा।

 

 

अक्षय को रुस्तम और सोनम को नीरजा के लिए मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को इस साल के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता अक्षय कुमार सहित विभिन्न राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं को 64वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने सर्वश्रेष्ठ निर्देशक राजेश मापुस्कर और के विश्वनाथ को प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया।
अन्य राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता : 

सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले और सर्वश्रेष्ठ मराठी फिल्म – दशाक्रिया
सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता – मनोज जोशी (दशाक्रिया)
सर्वश्रेष्ठ ओरिजिनल स्क्रीनप्ले – महेशिंते प्रथिकूरम (मलयालम फिल्म)
सर्वश्रेष्ठ डायलॉग – पेली चुप्लु (तेलुगु फिल्म)
सर्वश्रेष्ठ प्लेबैक गायक – सुंधराय्यर (तमिल फिल्म जोकर)
सर्वश्रेष्ठ फिमेल प्लेबैक गायिका – इमान चक्रवर्ती (प्रकटन)
नरगिस दत्त पुरस्कार – दिक्चो बनात पलाक्स
सर्वश्रेष्ठ पॉपुलर फिल्म – सतमनाम भावती
सर्वश्रेष्ठ डेब्यूट फिल्म के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार – अलिफा (बंगाली फिल्म)
सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन डिजाइन – 24 (तमिल फिल्म)
सर्वश्रेष्ठ म्यूजिक डायरेक्शन पुरस्कार – बाबू पद्मनाभा ( कन्नड़ फिल्म अल्लामा)
सर्वश्रेष्ठ लिरिक्स – वैरामुथु (धर्म दुराई) और अनुपम रॉय (प्रकटन)
सर्वश्रेष्ठ मेकअप – अल्लामा
सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार – अधीश प्रवीण, नूर इस्लाम, सैमुल आलम और मनोहर के.
सर्वश्रेष्ठ स्टंट कोरियाग्राफर – पीटर हेन (पुलीमुरुगन)
सर्वश्रेष्ठ साउंड डिजाइनर – जयदेवन (मलयालम फिल्म, काडु पूकुन्न नेरम)
सर्वश्रेेष्ठ कोरियोग्राफी – राजू सुंदरम (जनता गैराज)
सर्वश्रेष्ठ कॉस्ट्यूम डिजाइनर – साइकल (मराठी फिल्म)
सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म अवार्ड – महायोद्धा रामा
सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण संरक्षण – लोकताक लैरेंबी
विशेष पुरस्कार – कड़वी हवा (हिंदी फिल्म) और मुक्ति भवन (हिंदी फिल्म)

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में अभिनेता अक्षय कुमार को फिल्म रुस्तम में एक देशभक्त नौसैनिक अधिकारी की भूमिका निभाने के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के खिताब से सम्मानित किया गया। यह फिल्म 1959 के नानावती हत्याकांड पर आधारित थी। उन्हें रजत कमल पुरस्कार के साथ 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। वहीं मलयालम फिल्म ‘मिन्नामिनुंगी-दि फायरफ्लाई’ में मुख्य भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री सीएम सुरभी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के खिताब से नवाजा गया। उन्हें भी रजत कमल पुरस्कार और 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि मिली। उन्होंने अपने कैरियर के शुरूआती दौर में मिले इस पुरस्कार के लिए सभी का शुक्रिया अदा किया।

बॉलीवुड फिल्म ‘नीरजा’ के निर्देशक राम माधवानी को सर्वश्रेष्ठ हिंदी भाषी फिल्म के सम्मानित किया गया। वहीं महिलाओं पर आधारित अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘पिंक’ को सामाजिक मुद्दे पर आधारित सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार दिया गया। इस मौके पर पिंक बनाने वाले बंगाली फिल्मों के निर्देशक अनिरुद्ध रॉय चौधरी ने कहा कि वह अब और अधिक हिंदी फिल्में बनाना चाहते हैं।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में मराठी फिल्म ‘कसाव’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के खिताब से नवाजा गया। इस फिल्म को स्वर्ण कमल और निर्माता व निर्देशक दोनों को ढाई-ढाई लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। इस फिल्म का निर्देशन सुनील सुख्तांकर और सुमित्रा भावे ने किया था। यह फिल्म अवसाद और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित थी। वहीं कश्मीरी अभिनेत्री जायरा वसीम को आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘दंगल’ में भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जबकि नागेश कुकुनुर कि फिल्म ‘धनक’ को सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का पुरस्कार मिला।

अभिनेता अजय देवगन की फिल्म ‘शिवाय’ ने स्पेशल इफेक्ट की श्रेणी की में पुरस्कार हासिल किया। वहीं मापुस्कर को फिल्म ‘वेंटीलेटर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार दिया गया। उन्हें स्वर्म कमल और ढाई लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और उनकी मां मधु चोपड़ा द्वारा निर्मिंत इस फिल्म ने तीन पुरस्कार प्राप्त किए। वेंटीलेटर ने सर्वश्रेष्ठ संपादन और सर्वश्रेष्ठ फाइनल मिक्स्ड ट्रैक का पुरस्कार भी अपने नाम किया। अभिनेता मोहनलाल को पुलीमुरुगन, जनता गैराज और मुंथीरिवल्लीकल थलीरक्कुंबोल जैसी फिल्मों के लिए स्पेशल ज्यूरी पुरस्कार दिया गया।

 

शिव कपूर ने 12 साल बाद जीता एशियाई टूर खिताब

मियोली : भारतीय गोल्फर शिव कपूर ने अंतिम दौर में आठ अंडर 64 का बेहतरीन स्कोर बनाकर आज यहां पहला यींगडर हैरिटेज गोल्फ टूर्नामेंट जीतकर एशियाई टूर खिताब के लिये पिछले 12 वषरें से चला आ रहा इंतजार खत्म किया। कपूर ने पहले नौ होल में तीन अंडर का स्कोर बनाया। उन्होंने अंतिम सात होल में से पांच में स्कोर किया और आखिर में कुल 16 अंडर 272 के स्कोर के साथ शीर्ष पर रहे। उन्होंने खिताब जीतने के बाद कहा, ‘‘मैं आखिरकार फिर से खिताब जीतने में सफल रहा और यह बहुत अच्छा अहसास है। 2015 में अपना यूरोपियन टूर कार्ड गंवाने और 2016 में यकृत की बीमारी से जूझने के बाद यह बड़ी राहत है। ’’ गेविन ग्रीन : 67 : और यिकुएन चांग : 68 : दोनों 14 अंडर के साथ संयुक्त दूसरे स्थान पर रहे। कपूर ने कहा, ‘‘यह इंतजार बहुत लंबा खिंच गया था और इससे मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ेगा। मैं जानता था कि अंतिम दौर में स्कोर कम होगा। ’’ पैंतीस वर्षीय कपूर ने 2005 में वोल्वो मास्टर्स के रूप में अपना पहला एशियाई टूर खिताब जीता था। इसके बाद वह चार अवसरों पर दूसरे और तीन बार तीसरे स्थान पर रहे। इसके अलावा वह अन्य 21 अवसरों पर चौथे और दसवें स्थान के बीच रहे थे। अन्य भारतीयों में सुजान सिंह : 67 : ने लगातार तीसरे दौर में 70 से कम का स्कोर बनाया। उन्होंने अंतिम पांच होल में से चार में बर्डी बनायी। वह और हिम्मत राय : 71 : दोनों पांच अंडर के स्कोर के साथ संयुक्त 22वें स्थान पर रहे। पहले दौर के बाद दूसरे स्थान पर रहे एस चिक्कारंगप्पा इसके बाद दूसरे और तीसरे दौर में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाये और संयुक्त 27वें स्थान पर रहे। खालिन जोशी : 70 : संयुक्त 37वें, राहिल गंगजी : 70 : संयुक्त 52वें और चिराग कुमार : 77 : संयुक्त 60वें स्थान पर रहे।

 

न्यायमूर्ति लीला सेठ का निधन

नयी दिल्ली : देश के किसी उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश और प्रसिद्ध लेखक विक्रम सेठ की मां न्यायमूर्ति :सेवानिवृत्त: लीला सेठ का निधन हो गया।

वह 86 साल थीं और कल रात दिल का दौरा पड़ने से नोएडा स्थित निवास पर उनका निधन हो गया।
उनके बेटे शांतुम सेठ ने कहा कि दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। मेरे भाई विक्रम, बहन और हमारे परिवार के दूसरे सदस्य यहां हैं।’’ शांतुम ने कहा, ‘‘करीब तीन हफ्ते पहले वह गिर गयी थीं और उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गयी थी। अपोलो अस्पताल में उनका ऑपरेशन किया गया था और एक हफ्ते पहले ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। हमने पीसीआर को फोन किया, एंबुलेंस आयी लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।’’ लीला सेठ ने कानून के क्षेत्र में कई इतिहास रचे थे। वह लंदन बार परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल करने वाली पहली महिला थीं, दिल्ली उच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश थीं और साथ ही किसी उच्च न्यायालय :हिमाचल प्रदेश: की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश थीं।

वह 16 दिसंबर के सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद 2012 में गठित की गयी न्यायमूर्ति वर्मा समिति के तीन सदस्यों में भी शामिल थीं।

‘ए सूटेबल ब्यॉय’ उपन्यास के रचनाकार की मां लीला खुद एक लेखिका थीं और उनकी आत्मकथा ‘ऑन बैलेंस’ एक बेस्टसेलर रही है। उन्होंने 2014 में प्रकाशित हुई किताब ‘टॉकिंग ऑफ जस्टिस: पीपुल्स राइट्स इन मॉडर्न इंडिया’ भी लिखी है जिसमें उन्होंने 50 साल से ज्यादा लंबे अपने कानूनी करियर में अपने सामने आए महत्वपूर्ण मुद्दों की बात की है।

 

सूट पहनें या शर्ट, टाई हो परफेक्ट

बात जब सूट पर टाई पहनने की हो या फिर नॉर्मल शर्ट पर, मैचिंग और अच्छा दिखने का प्रेशर बहुत बढ़ जाता है। आप शादीशुदा हैं तो आपकी पत्नी हैं और किसी से इश्क फरमा रहे हैं तो गर्लफ्रेंड हैं या बहन की बातों की कद्र करते हैं तो बहन भी है मगर इन सबके होते हुए भी अगर आप कहीं और नौकरी कर रहे हैं तो आपकी नैया आपको खुद पार लगानी होगी, आपके कपड़ों पर भी यही बात लागू होती हैं। भले ही आपने शर्ट से लेकर पैंट और सूट तक सारी ही चीज़ें ब्रांडेड पहन रखी हो लेकिन मैचिंग टाई की कमी आपका पूरा लुक बिगाड़ सकती है।

टाई में भी मार्केट में कई सारी वैराइटी देखने को मिल जाती है लेकिन कौन सा जरूरी है और किस कलर की टाई नहीं है आपके पास, इन सबके बारे में सोचने के बाद ही इन्हें खरीदें। प्रिंटेड, वूलन और प्लेन टाई को कैसे शर्ट के साथ पेयर करके आप हैंडसम और स्टाइलिश नज़र आ सकते हैं, ये भी जानना जरूरी है।

पैटर्न्ड शर्ट के साथ आपकी टाई बिल्कुल मैचिंग होनी चाहिए। बुनी हुई टाई के साथ टेक्सचर और गहराई का ध्यान रखते हुए आप इसमें आकर्षक नजर आ सकते हैं। चेक शर्ट के साथ उसके कलर का भी ध्यान रखना जरूरी है। चेक्ड शर्ट के साथ वूलन टाई अच्छी लगेगी।

ज्यादातर कलर्स और प्रिंट्स सॉलिड शर्ट्स के साथ मैच करते हैं। फॉर्मल मौकों के लिए कॉन्ट्रास्टिंग कलर्स चुनें. जैसे लाइट ब्लू शर्ट के साथ डॉर्क ब्लू या रेड टाई, गुलाबी शर्ट के साथ नेवी ब्लू टाई. हल्के रंग की शर्ट के साथ गहरे रंग की टाई पहनें।

अपनी शर्ट के पैटर्न से अलग टाई सिलेक्ट करें। अगर आप स्ट्राइप्स के साथ स्ट्राइप्स पहन रहे हैं, तो उन्हें कॉन्ट्रास्ट करें, बड़ी स्ट्राइप्स शर्ट के साथ छोटी स्ट्राइप्स टाई या इसका उलटा भी कर सकते हैं। स्ट्राइप्स शर्ट के साथ कॉन्ट्रास्ट रंग की टाई पहनें।

व्हाइट कलर की शर्टनें के साथ ब्लैक टाई हमेशा से ही एवरग्रीन मैचिंग रहा है। इसमें पर्सनैलिटी उभर कर आती है साथ ही ये कॉम्बिनेशन ज़्यादातर पुरूषों के वॉडरोब में मौजूद होता है।

(साभार – फैशन 101)

गर्मियों में फैशन को न होने दें पस्त

गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है। इसके लिए आपको अपने वॉर्डरोब में भी कुछ गर्मियों के लिए कुछ चीज़ें शामिल करनी होगी। अब हल्के और ईज़ी-ब्रिज़ी कपड़े, फुटवेयर और एक्सेसरीज़ आपको समर डीवा बना देंगे. फ्रेंड्स के साथ हैंगआउट हो या कॉलेज और डे-आउटिंग, ये समर एसेंशियल्स आपको गर्मी से बचाने के साथ-साथ परफेक्ट लुक देंगे।

कंफी फ्लैट्स – हील्स को हटाकर अब आप आराम से अपने कंफर्टेबल फ्लैट्स कैरी कर सकती हैं।. ये शॉर्ट्स, जींस सबके साथ अच्छी लगेगी।

मैक्सी ड्रेस – अगर आपको शॉर्ट कपड़े पहनना पसंद नहीं है तो गर्मियों में मैक्सी ड्रेसेज़ कैरी करें। ये लॉन्ग होने के साथ ही गर्मियों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं।

सनग्लासेज़ – सनग्लासेज़ ना सिर्फ आपको धूप से बचाएंगे, बल्कि आपको स्टाइलिश लुक भी देंगे।

कॉटन कुर्ता – अब आप आराम से अपने वॉर्डरोब में रखें कुर्ते को पहन सकती हैं। गर्मियों में कॉटन फैब्रिक आपकी त्वचा के लिए अच्छा होता है। तो आप भी समर में कॉटन कुर्ता कैरी करें।

हैट या स्कार्फ – धूप से बचने के लिए एक ट्रेंडी हैट अच्छा ऑप्शन है। अगर आपको हैट कैरी करना नहीं पसंद तो आप स्कार्फ भी कैरी कर सकती हैं।

गमिर्यों को बनाएं सुपर कूल

ऑरेंज मिंट ड्रिंक

सामग्री – 1 लीटर गरम पानी, 4 बैग्‍स मिंट ग्रीन टी बैग, 10- 12 ऑरेंज स्‍लाइस, 3 से 4 इंच अदरक, – 25 एमएल ऑरेंज जूस,पुदीने की पत्‍ती आवश्यकतानुसार 2 चम्‍मच शक्‍कर, आइस क्‍यूब्‍स आवश्यकतानुसार

गार्निशिंग के लिये – ऑरेंज स्‍लाइस, पुदीना

 विधि –4 कप उबला पानी लें और उसमें टी बैग्‍स और संतरे के स्‍लाइस डाल कर 7 मिनट तक ढंक दें। फिर इसमें घिसा अदरक और शक्‍कर डालें। अब इस ड्रिंक को ठंडा होने दें। इसे छान कर इसमें ऑरेंज जूस डाल कर चलाएं। इस ड्रिंक से टी बैग निकाल लें और इसमें आइस क्‍यूब्‍स डाल दें। इसे पुदीना और ऑरेंज स्‍लाइस से गार्निश करें। आपका ऑरेंज मिंट ड्रिंक सर्व करने के लिये तैयार है।

 

 

पाइनएपल बनाना स्मूदी

सामग्री – टुकड़ों में कटी हुई 1 कप पाइनएपल, स्लाइस में कटा हुआ 1 केला
टुकड़ों में कटा हुआ 1 सेब,2 कप पालक, 1 कप पानी।

विधि  ब्लेंडर में पाइनएपल, केला, सेब, पालक और पानी डालें।  इसे तब तक ब्लेंड करें तक एक गाढ़ा पेस्ट नहीं बन जाता।  तैयार स्मूदी को गिलास में डालकर पीएं और सर्व करें।

 

समाज को बदलना हैतो बड़ोंको सोच बदलकर नयी पीढ़ी को समझना होगा

अपराजिता फीचर डेस्क

इस देश में संस्कृति, परिवार, परम्परा, इज्जत और समाज पर बहुत जोर दिया जाता है। माता – पिता, भाई, बहन…ये सब राजश्री फिल्म्स की फिल्मों में अच्छे लगते हैं मगर भारत में परिवार बच्चों की परवरिश नहीं करता बल्कि उसे नियंत्रित करता है। इसका सीधा सम्बन्ध हमारे देश के विकास से इसलिए है क्योंकि दमन के शिकार युवा कभी मानसिक तौर पर स्वस्थ समाज नहीं खड़ा कर सकते। आपकी मुश्किल यह है कि आपके बच्चों की जिन्दगी के निजी फैसले भी आपकी नाक का सवाल बन जाते हैं। अगर बच्चे दहेज न लेना चाहें तो आप बेटी की शादी का हवाला देते हैं, बेटी अगर विरोध करे तो समाज और नाक का हवाला देकर उसे चुप करवा देते हैं।

प्रेम करे तो बाकायदा इमोशनल ब्लैकमेल करते हैं, पढ़ाई छुड़वाते हैं, घर में कैद करते हैं और अनचाही शादी के बंधन में बाँधते हैं और इस पर भी बात न बने तो उसे मार डालते हैं। बहू को मिलने वाला प्यार उसके मायके से आने वाले दहेज की मात्रा पर निर्भर करता है, बेटी को दी जाने वाली आजादी और प्रोत्साहन उसकी ससुराल की मर्जी पर निर्भर करता है और आप कहते हैं कि आप जो भी करते हैं, अपने बच्चों के लिए करते हैं, मान लीजिए, यह सबसे बड़ा झूठ है। अपनी जिद और अकड़ नहीं छोड़ने वाले आप अपने बच्चों से उम्मीद करते हैं कि वह उनके लिए अपना सब कुछ छोड़ दे तो यह कुछ और नहीं बल्कि उस परवरिश की कीमत है क्योंकि आपने बच्चों के व्यक्तित्व को स्वीकार नहीं किया, वे आपके लिए निवेश थे। जानकर रख लीजिए, ऐसे में बच्चे आपका लिहाज करें भी तो आप उनकी नजर में अपना सम्मान खो चुके होते हैं। आपकी जिम्मेदारी समझाने तक है, जबरदस्ती करने का अधिकार नहीं है मगर बच्चों को आपका किया हुआ याद रहता है, इसलिए वे झुकते हैं और आप इसे अपनी जीत समझते हैं, दरअसल यह आपकी हार है।

ऐसे बहुत से युवाओं को जानती हूँ, जिनकी जिन्दगी उनके अभिभावकों की एक हाँ बदल सकती थी और वे बहुत सृजनात्मक हो सकते थे मगर वे नहीं है। हमारे भविष्य का एक बड़ा हिस्सा अगर घुटन में जी रहा हो तो देश का विकास कैसे होगा, ये सोचने वाली बात है। ऐसे युवाओं को दुनिया में हो रही किसी अच्छी बात पर विश्वास नहीं होता, उनको लगता ही नहीं कि उनकी दुनिया में कुछ सकारात्मक हो सकता है। वे जिन्दगी को जीते नहीं, ढोते हैं और आपको लगता है कि आपका घर खुशहाल है, खुशफहमी है ये और कुछ नहीं। एक आपकी जिद के कारण वह धोखा देता है, जिन्दगी से भागता है, कई बार नशे में चूर होता है, टूटता है और हिंसा करता है, अभिभावकों, यह सब आपका तोहफा है इन युवाओं को, जो कुछ करना चाहते थे मगर अब टूटे खिलौनों की तरह हैं।

 

प्रेम की बातें कहीं जाती हैं किताबों में, कविताओं में और हमारी परम्परा में भी ढेरों प्रेम कहानियाँ हैं मगर जब उनको जीवन में उतारने की बारी आती है तो उपरोक्त सारे फलसफे दीवार बनकर संवेदनाओं को चूर कर जाते हैं और इनमें सबसे बड़ी भूमिका उसी परिवार और अभिभावकों की होती है जो समाज, रिश्तेदारों और अपनी या अपने घर की इज्जत का हवाला देकर अपने बच्चों के सपनों की बलि दे देते हैं। उस पर भी उम्मीद ये की जाती है कि वह युवा जिन्दगी से प्रेम करे, उनका सम्मान करे, उनसे प्रेम करे और उनकी नाक को ऊँचा करता रहे। इस देश में युवाओं की जिम्मेदारी की बातें बहुत की जाती हैं मगर उनके अधिकार अक्सर दबा दिए जाते हैं, विद्रोह करें तो गोली मार दी जाती है या सूली पर लटका दिया जाता है।

मजे की बात यह है कि प्रेम को दबाने और कुचलने वाले ही प्रेम गीत और रोमांटिक फिल्में भी देखते हैं। खलनायक को गालियाँ देते हैं मगर अपनी जिन्दगी में कभी कुछ भी नहीं सीखते। इस दोहरे संस्कारों और दोहरे मापदंडों वाले समाज का भविष्य भी कुंठा भरा ही होगा और आपको उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि आपका बच्चा आपसे प्यार करेगा या आपका सम्मान करेगा। ऐसे वातावरण में, ऐसे परिवार में सिर्फ घुटन होती है और आप अपनी घृणा का जहर आने वाली पीढ़ी को यह समझकर दे रहे हैं कि वह इसे अमृत समझे, वह नहीं समझेगी, उसे समझना भी नहीं चाहिए। आप तय कीजिए कि आपने बच्चों को बड़ा किया है या एटीएम मशीन खरीदी है। ये कैसा स्टेटस और अहंकार है जो जिन्दगी पर भी भारी पड़ता है। आप किसी को घुटते देख सकते हैं मगर अपने अहंकार से समझौता नहीं कर सकते बल्कि साजिश रचकर उसे झुकाने की कोशिश करते हैं, अगर ये परिवार और, ममता और प्यार है तो इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता।

कई अभिभावक तो यह भी तय करते हैं कि उनकी बहू, बेटी या बेटे को उनके दोस्तों, कार्यालय के सहकर्मियों और ससुराल से कैसे पेश आना चाहिए और यहाँ तक कि उनके कितने बच्चे और कब होने चाहिए….यह बात कड़वी है मगर एक समय के बाद आपके बच्चों की जिन्दगी में आपका दखल खत्म होना जरूरी है वरना वे कभी आगे नहीं बढ़ेंगे। आप अपनी जिन्दगी अपने हिसाब से जीए या अभिभावकों के दबाव में, वह आपका फैसला था मगर आप अपने बच्चों की जिन्दगी का रिमोट अपने हाथ में रखना चाहते हैं, तो यह आपकी जबरदस्ती भले हो सकती है मगर आपका अधिकार नहीं है।

 

बच्चों को आपने मोल्डिंग मशीन समझ रखा है, वह पहने आपके हिसाब से, जीए आपके हिसाब से, पढ़े हिसाब से, कार्यक्षेत्र भी आपकी मर्जी से चुने और जीवनसाथी भी आपके स्टेटस के हिसाब से और यही इस देश की अधिकतर समस्याओं की जड़ है। बाल विवाह बच्चे खुद नहीं करते, दहेज भी आप ही बच्चों के जरिए अपनी नाक के लिए लेते और देते हैं, उनके प्रेम में दीवार बनकर ऑनर किलिंग भी आप ही करते हैं।

अगर अनचाही शादी या गलत शादी के होने के कारण आपका बेटा या बेटी कहीं बाहर प्यार तलाशता है, नशा करता है, अपने जीवनसाथी के साथ हिंसा करता है तो भले ही वह गुनहगार वह है और यह भले ही आपकी नजर में अवैध हो मगर इस गुनाह के तार भी आपसे ही जुड़े हैं। कई बार कन्याभ्रूण की हत्या और बेटियों से होने वाला पक्षपात, लड़कों को अपराधी बनने की हद तक शह देना कि वह निर्भया सा कांड कर डाले, यह आप ही की देन है इसलिए समाज को बदलना चाहते हैं तो सबसे पहले खुद को बदलिए। दोहरेपन से मुक्त होकर अपने बच्चों को खुली हवा में साँस लेने दीजिए वरना आप बच्चों की नजर में ही नहीं आने वाली पीढ़ी के भविष्य में जहर घोलने वाले गुनहगार से अधिक कुछ नहीं होंगे।

सुषमा त्रिपाठी