Tuesday, March 31, 2026
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अपराजिता बेस्ट फ्रेंड्ज जर्नलिस्ट

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अगर आप बनना चाहते हैं पत्रकार और चाहिए आपको एक मंच तो अपराजिता और बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी आपको दे रहे हैं एक मौका। हमें तलाश है युवा पत्रकारों की और आप बन सकते हैं फ्यूचर जर्नलिस्ट। अगर आप कुछ सकारात्मक लिखना चाहते हैं, कोई समस्या आपकी नजर में है या कोई है जिसे देखकर आपको लगता है कि उसकी कहानी आप सामने ला सकते हैं, आप किसी घटना पर लिखना चाहते हैं या इंटर्नशिप करना चाहते हैं तो आप हमसे सम्पर्क कर सकते हैं। आपकी स्टोरी अपराजिता में आपकी तस्वीर के साथ प्रकाशित होगी। चयन साक्षात्कार और लेखन क्षमता के आधार पर होगा। आप हमारे फेसबुक पेज पर भी अपने प्रश्न और सुझाव दे सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें –

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नोट – कृपया पत्रकारिता के प्रति गम्भीर युवा ही सम्पर्क करें। 

पत्रकारिता आज भी एक बड़ी जिम्मेदारी लेकर खड़ी है

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भारतीय भाषा परिषद  के जन संचार माध्यम के स्नातकोत्तर अध्ययन केंद्र में पत्रकार, देश और सोशल मीडिया पर संगोष्ठी आयोजित की गयी। संगोष्ठी में आज के दौर में पत्रकारिता और सोशल मीडिया के बारे में चर्चा की गयी। संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार विश्‍वंभर नेवर ने कहा कि देश में हिंदी पत्रों के पाठकों में पहले से वृद्धि हुई है और पत्रकारिता भारत में आज भी एक बड़ी जिम्मेदारी लेकर खड़ी है। उसका काम देशहित और अभिव्यक्ति की आजादी का प्रहरी होना है। वरिष्ठ पत्रकार हरिराम पांडेय ने कहा कि पत्रकार को सबसे पहले अपने भीतर देशभाव लाना होगा और पत्रकारिता के लिए बौद्धिक स्वतंत्रता जरूरी है। हालांकि पत्रकारों की आर्थिक सुरक्षा का प्रश्‍न भी महत्वपूर्ण है। संपादक जयकृष्ण वाजपेयी ने कहा कि टी. वी. के प्रसार के बावजूद हिंदी पत्रकारिता ने एक बड़ी भूमिका निभाई है और सोशल मीडिया में भी नागरिकों को अभिव्यक्ति का अवसर मिला है। हालांकि नकारात्मक चीजें सोशल मीडिया में ज्यादा स्थान घेर रही हैं। प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि सोशल मीडिया एक वैकल्पिक जगह है जिसे विपक्ष की भूमिका निभाना है और गलत प्रचारों से अपने को सुरक्षित रखना है। इस संबंध में सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं में जागरण की जरूरत है। जनसंचार विभाग (एम.ए.) के विद्यार्थियों ने कुछ सवाल रखे जिनका जवाब अतिथि वक्ताओं ने दिया।

अध्यक्षीय भाषण देते हुए डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि पहले पत्रकार समाज सुधारक, चिंतक और देश के नेता भी होते थे और सोशल मीडिया में स्थिति ये है कि पत्रकार का विलोप हो गया है। सोशल मीडिया वस्तुतः आभासी सामाजिक मीडिया है जहाँ यथार्थ से अधिक उत्तेजनात्मकता की प्रधानता है। इसका दुरुपयोग सूचना के राजनैतिक कारखाने कर रहे हैं। जनसंचार विभाग के शैक्षिक समन्वयक विनय बिहारी सिंह ने संचालन किया जबकि परिषद की मंत्री बिमला पोद्दार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

 

रक्षाबंधन पर बहनों को शौचालय दे रहे हैैं भाई

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रक्षाबंधन का त्यौहार भाई और बहनों के बीच प्रेम का त्यौहार माना जाता है और इस मौके पर बहनें अपने भाइयों से किसी न किसी तोहफे की उम्मीद में रहती हैं। मगर उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के भाई इस बार अपनी बहनों को एक अनोखे उपहार के रूप में टॉयलट गिफ्ट करेंगे ताकि उनकी बहनों को शौच के लिए घर से बाहर न जाना पड़े। दरअसल खुले में शौच से मुक्त अभियान को सफल बनाने और स्वच्छता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए अमेठी जिले की स्वच्छता समिति ने ‘अनोखी अमेठी का अनोखा भाई’ कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम के जरिए गांव के लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

इस सकारात्मक और महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत जिले की चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर (CDO) ने किया है। अमेठी में मुख्य विकास अधिकारी के तौर पर तैनात अपूर्वा दुबे ने बताया कि कई ब्लॉकों के 854 सदस्यों ने जिला समिति में अपने को भाई के रूप में पंजीकृत कराया है जो रक्षा बंधन के मौके पर अपनी बहनों को तोहफे में शौचालय देंगे।

मुख्य विकास अधिकारी अपूर्वा दुबे ने कहा कि पंजीकृत भाई अपने पैसे से शौचालय बनवाएंगे। इस अभियान की खास बात यह है कि अधिकारी की ओर से एक लकी ड्रॉ भी निकाला जाएगा। इस ड्रॉ में तीन प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। जिन लोगों को पुरस्कार मिलेगा उन्हें 50 हजार रुपये और मोबाइल फोन दिया जाएगा।

इस कार्यक्रम के तहत अप्लाई करने की लास्ट डेट 27 जुलाई थी और इस दिन तक कुल 854 भाइयों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया। शौचालय बनने के बाद 13 अगस्त को डिस्ट्रिक्ट लेवल के अफसरों की एक टीम पंजीकरण कराने वाले लोगों के घर जाकर जांच करेगी कि टॉयलट बनवाए गए हैं या नहीं। जिन लोगों के टॉयलट सबसे अच्छी हालत में होंगे उन्हें पुरस्कार दिया जाएगा। सत्यापन के बाद लिस्ट में शामिल भाइयों के बीच जिला मुख्यालय पर लकी ड्रॉ कराया जाएगा। ड्रॉ में जीतने वाले पहले प्रतिभागी को 50 हजार, दूसरे को 15 हजार व 6 हजार रुपये कीमत का एक मोबाइल फोन और तीसरे को 12 हजार रुपये व एक हजार रुपये कीमत का गिफ्ट प्रोत्साहन के रूप में दिया जाएगा।

शौचालय बनवाने की इस अनोखी पहल का आइडिया सोचने वाली युवा महिला आईएएस अपूर्वा दुबे अपने क्षेत्र में अक्सर ऐसे कार्यक्रम करवाती रहती हैं। इससे पहले वह बरेली और कानपुर देहात जिले की जॉइंट मजिस्ट्रेट रह चुकी हैं।

इस पहल की देखरेख करने वाली टीम में डीएम और सीडीओ के साथ ही डीपीआरओ को भी शामिल किया गया है। ये सभी अधिकारी अभियान की जांच करेंगे। शौचालय बनवाने की इस अनोखी पहल का आइडिया सोचने वाली युवा महिला आईएएस अपूर्वा दुबे अपने क्षेत्र में अक्सर ऐसे कार्यक्रम करवाती रहती हैं। अपूर्वा दुबे के इस कदम की तारीफ इलाके के अफसर भी कर रहे हैं।

इससे पहले अपूर्वा बरेली और कानपुर देहात जिले की जॉइंट मजिस्ट्रेट रह चुकी हैं। अपूर्वा दुबे ने कानपुर देहात के बच्चों को पौष्टिकऔर ताजा खाना उपलब्ध कराने की एक अनोखी पहल शुरू की थी। उन्होंने एक सरकारी स्कूल में किचन गार्डन बनवाया था। इस किचन गार्डन में कई तरह की सब्ज़ियां उगाई जाती है। फिर इन्हीं सब्ज़ियों से मिड डे मील का खाना तैयार कर बच्चों को परोसा जाता है।

(साभार – योर स्टोरी)

झंकार कर दो

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माखनलाल चतुर्वेदी

वह मरा कश्मीर के हिम-शिखर पर जाकर सिपाही,

बिस्तरे की लाश तेरा और उसका साम्य क्या?

पीढ़ियों पर पीढ़ियाँ उठ आज उसका गान करतीं,

घाटियों पगडंडियों से निज नई पहचान करतीं,

खाइयाँ हैं, खंदकें हैं, जोर है, बल है भुजा में,

पाँव हैं मेरे, नई राहें बनाते जा रहे हैं।

यह पताका है,

उलझती है, सुलझती जा रही है,

जिन्दगी है यह,

कि अपना मार्ग आप बना रही है।

मौत लेकर मुट्ठियों में, राक्षसों पर टूटता हूँ,

मैं, स्वयं मैं, आज यमुना की सलोनी बाँसुरी हूँ,

पीढ़ियाँ मेरी भुजाओं कर रहीं विश्राम साथी,

कृषक मेरे भुज-बलों पर कर रहे हैं काम साथी,

कारखाने चल रहे हैं रक्षिणी मेरी भुजा है,

कला-संस्कृति-रक्षिता, लड़ती हुई मेरी भुजा है।

उठो बहिना,

आज राखी बाँध दो श्रृंगार कर दो,

उठो तलवारों,

कि राखी बँध गई झंकार कर दो।

राखी बांधत जसोदा मैया

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                                                                  सूरदास

राखी बांधत जसोदा मैया ।
विविध सिंगार किये पटभूषण, पुनि पुनि लेत बलैया ॥
हाथन लीये थार मुदित मन, कुमकुम अक्षत मांझ धरैया।
तिलक करत आरती उतारत अति हरख हरख मन भैया ॥
बदन चूमि चुचकारत अतिहि भरि भरि धरे पकवान मिठैया ।
नाना भांत भोग आगे धर, कहत लेहु दोउ मैया॥
नरनारी सब आय मिली तहां निरखत नंद ललैया ।
सूरदास गिरिधर चिर जीयो गोकुल बजत बधैया ॥

 

वैज्ञानिक, शिक्षाविद यश पाल का निधन

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नयी दिल्ली : कॉस्मिक किरणों के अध्ययन एवं शिक्षा संस्थानों के निर्माण में अपने योगदान के लिए पहचाने जाने वाले मशहूर भारतीय वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद प्रोफेसर यश पाल का निधन हो गया। उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘प्रोफेसर यश पाल के निधन से दुखी हूं। हमने एक वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद खो दिया जिन्होंने भारतीय शिक्षा में अपना बहमूल्य योगदान दिया है।’’ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष यशपाल ने अपना करियर टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च से शुरू किया था और उन्हें उनके योगदान के लिए देश के दूसरे सर्वोच्च सम्मान पद्म् विभूषण से सम्मानित किया गया था ।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनके निधन पर शोक जाहिर करते हुए कहा कि कॉस्मिक किरणों केअध्ययन , शिक्षा संस्था निर्माण और उल्लेखनीय प्रशासक के तौर पर उनके विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें याद किया जाएगा।
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने शिक्षाविद के निधन को एक बड़ी क्षति बताया। राहुल ने ट्वीट किया, ‘‘एक वैज्ञानिक एवं उत्साही शिक्षक, जो सीखने और सिखाने का महत्व समझते थे, प्रोफेसर यश पाल का निधन हमारे लिए एक बड़ी क्षति है।’’ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री हर्षवर्धन ने ट्वीट किया, ‘‘पूर्ण विज्ञान के लिए प्रोफेसर यश पाल आपका शुक्रिया। आपको जाता देखना काफी दुखद है, यह बेहद बड़ी क्षति है लेकिन आप हमेशा हमारे साथ रहेंगे। ओम शांति।’’

 

एडविना और नेहरू में प्रेम था, एक दूसरे का सम्मान करते थे

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भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड लूईस माउंटबेटन की पुत्री के मुताबिक जवाहरलाल नेहरू और एडविना माउंटबेटन आपस में प्रेम करते थे और एक-दूसरे का काफी सम्मान करते थे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके बीच के रिश्ते कभी भी जिस्मानी नहीं रहे क्योंकि वे कभी अकेले नहीं मिले थे।

पामेला कहती हैं, मैंने अपनी मां एडविना एश्ले और नेहरू के बीच गहरे संबंध विकसित होते हुए देखा था। उन्हें पंडितजी में वह साथी, आत्मिक समानता और बुद्धिमतता मिली, जिसे वह हमेशा से चाहती थीं। उन्होंने बताया कि मां को लिखे नेहरू के एक पत्र को पढ़ने के बाद मुझे इस बात का एहसास हुआ कि पंडितजी और मेरी मां किस कदर आपस में प्रेम करते थे और एक-दूसरे का सम्मान करते थे।

‘डॉटर ऑफ एंपायर : लाइफ एज ए माउंटबेटन’ नामक अपनी पुस्तक में पामेला ने लिखा है कि मेरी मां या पंडितजी के पास जिस्मानी संबंधों के लिए समय नहीं था, दोनों अकेले में कम ही होते थे। दोनों हमेशा कर्मचारियों, पुलिस और दूसरे लोगों से घिरे होते थे।

पामेला की यह पुस्तक ब्रिटेन में पहली बार 2012 में प्रकाशित हुई थी। अब यह पुस्तक पेपरबैक की शक्ल में भारत आई है। माउंटबेटन के एडीसी फ्रेडी बर्नबाई एत्किन्स ने पामेला को बताया था कि नेहरू और उनकी मां का जीवन इतना सार्वजनिक था कि दोनों के बीच जिस्मानी रिश्ते संभव ही नहीं थे।

पामेला ने किताब में लिखा है कि माउंटबेटन परिवार के विदाई समारोह में नेहरू ने सीधे एडविना को संबोधित किया था। उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि आप (एडविना) जहां भी गई हैं, आपने उम्मीद और उत्साह जगाया है। कहते हैं कि माउंटबेटन जब भारत के अंतिम वायसराय नियुक्त होकर आए थे, उस समय पामेला हिक्स नी माउंटबेटन करीब 17 साल की थीं।

नेहरू को पन्ने की अंगूठी भेंट करना चाहती थीं एडविना
पामेला ने किताब में लिखा है कि भारत से जाते हुए एडविना अपनी पन्ने की अंगूठी पंडितजी को भेंट करना चाहती थीं। हालांकि वह यह भी जानती थीं कि नेहरू इसे स्वीकार नहीं करेंगे। इसी वजह से उन्होंने वह अंगूठी उन्होंने इंदिराजी को दे दी थी। उन्होंने इंदिराजी से कहा था कि यदि पंडितजी कभी भी वित्तीय संकट में पड़ते हैं, तो उनके लिए इसे बेच दें क्योंकि वे अपना सारा धन बांटने के लिए चर्चित हैं।

 

देश के 13वें उपराष्ट्रपति होंगे वेंकैया नायडू

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वेंकेया नायडू देश के 13वें उपराष्ट्रपति बन गए हैं। नायडू ने एनडीए उम्मीदवार के तौर पर उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी को हराया। वैंकेया नायडू को 516 वोट मिले, तो गोपालकृष्ण गांधी को 244 मिले। वैंकेया नायडू ने गोपालकृष्ण गांधी को 272 वोटों से हराया। प्रधानमंत्री मोदी ने वैंकेया नायडू को बधाई दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी में वैंकेया नायडू के साथ काम करने वाले दिनों को याद करते हुए कहा कि वैंकेया नायडू देश को आगे ले जाएंगे। हमें सहयोग मिलता रहेगा। इससे पहले, देश का 13वां उपराष्ट्रपति तय करने के लिए शनिवार को संसद के दोनों सदनों के सदस्यों ने वोटिंग की। उपराष्ट्रपति पद के लिए शनिवार को संसद भवन में मतदान हुआ, जिसमें 771 सांसदों ने वोट डाले। कुल 785 सांसदों को वोट करना था। इस तरह से 98.21 प्रतिशत सांसदों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतगणना की शुरुआत से ही वैंकेया नायडू ने बढ़त बना ली। और आखिर तक उन्होंने बढ़त बनाए रखी।

उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में बीजेपी की जीत के साथ ही नया रिकॉर्ड भी बना है, जिसमें बीजेपी ने पिछली बार की तुलना में कहीं जोरदार जीत दर्ज की है। देश के उप राष्ट्रपति पद के चुनाव में मुख्य मुकाबला राजग उम्मीदवार वैंकेया नायडू और विपक्ष की तरफ से खड़े किए गए महात्मा गांधी के प्रपौत्र गोपाल कृष्ण गांधी के बीच था, जिसमें वैंकेया नायडू ने बाजी मारी।
उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में शुरूआत से ही आंकड़े राजग उम्मीदवार वैंकेया नायडू के ही पक्ष में थे। ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव की तरह ही उपराष्ट्रपति चुनाव को भी महज औपचारिकता माना जा रहा था। इस चुनाव में राजग में अपने बूते अपने उम्मीदवार को जीत हासिल कराने माद्दा था। इस बीच राजग के इतर 5 दलों के समर्थन में आ जाने के बाद मुकाबला एकतरफा हो गया। हालांकि विपक्ष की तरफ से घोषित उम्मीदवार और महात्मा गांधी के प्रपौत्र गोपालकृष्ण गांधी ने कहा कि इस चुनाव को एकतरफा नहीं माना जा सकता है, क्योंकि दो लोग लड़ रहे हैं। जीतेगा कोई एक ही व्यक्ति ही।
इस चुनाव में पीएम मोदी ने सबसे पहले वोट डाला। इसके बाद वैंकेया नायडू, गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई सांसदों ने वोट डाला। इस चुनाव में राज्यसभा सांसद रेखा, डिंपल यादव और बीजेपी एमपी हेमामालिनी ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वोटिंग के दौरान ही हेमामालिनी ने दावा कर दिया था कि जीत नायडू की ही होगी।
उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में वोटिंग के बाद सचिन तेंदुलकर ने कहा कि देश में जिन जगहों पर वोटिगं हो रही है, सभी को अपना वोट डालना चाहिए।

गोपाल कृष्ण गाँधी

इससे पहले, उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में अपना वोट डालने से ठीक पहले नायडू ने कहा था कि ‘यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं हैं अधिकतर दल मेरे समर्थन में हैं। मुझे उम्मीद है मतदाता मेरे समर्थन में करेंगे वोट।’ इस चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, गुलाम नबी आजाद और गोपाल कृष्ण गांधी ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया। तो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी अपना वोट डाला।
वोट डालने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी पहुंचे थे।
ऐसे होती है उपराष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग
सीक्रेट बैलेट के माध्यम से उपराष्ट्रपति का चुनाव होता है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य ही केवल वोट डाल सकते हैं। अपनी पसंद को मार्क करने के लिए सांसद एक खास पेन का इस्तेमाल करते हैं। अगर कोई सदस्य किसी दूसरे पेन का उपयोग करता है तो फिर वो वोट खारिज हो जाता है। बैलेट पेपर में चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार का नाम होता है लेकिन इस पर किसी तरह का चुनाव चिह्न नहीं होता। गौरतलब है कि मौजूदा समय में लोकसभा में राजग के 340 तो राज्यसभा में 85 सांसद हैं। इसके अलावा एआईएडीएमके के दोनों धड़ों, इनेलो, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस ने भी राजग उम्मीदवार वेंकैया नायडू को समर्थन देने की घोषणा की है। इन दलों के सांसदों की संख्या 26 है।

 

जिस रक्षा सूत्र से राजा बलि बंधे, उसी से बंधे भाई

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हमारे यहां हिंदू धर्म में प्रत्येक पूजा कार्य में हाथ में कलावा बांधने का विधान है। यह धागा व्यक्ति के उपनयन संस्कार से लेकर उसके अंतिम संस्कार तक सभी संस्कारों में बांधा जाता है। राखी का धागा भावनात्मक एकता का प्रतीक है। स्नेह और विश्वास की डोर है।

हाथ में बांधे जाने वाले धागे से संपन्ना होने वाले संस्कारों में उपनयन संस्कार, विवाह और रक्षाबंधन प्रमुख हैं। रक्षाबंधन से जुड़ी कई कथाएं ऐसी भी हैं जिनमें राखी बांधने वाली बहन नहीं हो तो पत्नी या ब्राह्मण भी रक्षासूत्र बांधता है। यह सूत्र रक्षा का सूत्र है।

पुरातन काल में वृक्षों को भी रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा रही है। बरगद के वृक्ष को स्त्रियां धागा लपेटकर रोली, अक्षत, चंदन, धूप और दीप दिखाकर पूजा कर अपने पति के दीर्घायु होने की कामना करती हैं। आंवले के पेड़ पर धागा लपेटने के पीछे मान्यता है कि इससे परिवार में धन-धान्य की प्रचुरता बनी रहती है।

श्रावण मास की पूर्णिमा का महत्व इससे और बढ़ जाता है कि इस दिन कष्टों पर पुण्यों की विजय का आरंभ हो जाता है। जो व्यक्ति अपने शत्रुओं या प्रतिद्वंद्वियों को परास्त करना चाहता है उसे इस दिन वरुण देव की पूजा करनी चाहिए। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार देवों और असुरों में युद्ध छिड़ा।

लगातार 12 वर्ष तक युद्ध चलता रहा। असुरों ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर देवराज इंद्र के सिंहासन सहित तीनों लोकों को जीत लिया। इसके बाद इंद्र देवताओं के गुरु बृहस्पति के पास पहुंचे और सलाह मांगी। बृहस्पति ने इन्हें मंत्रोच्चारण के साथ रक्षा विधान करने को कहा।

तब श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन गुरु बृहस्पति ने रक्षा विधान संस्कार आरंभ किया। मंत्रोच्चार से रक्षा सूत्र को मजबूत किया गया और देवराज इंद्र की पत्नी शचि जिन्हें इंद्राणी भी कहते हैं उन्होंने इस सूत्र को देवराज इंद्र के दाहिने हाथ पर बांधा।

इसकी ताकत से ही देवराज इंद्र असुरों को हराने में और अपना खोया राज्य वापस पाने में कामयाब हुए। जिस दिन यह रक्षासूत्र बांधा गया उस दिन श्रावण पूर्णिमा थी और तभी से इस दिन रक्षासूत्र बांधने की परंपरा की शुरुआत हुई।

इसके अलावा एक अन्य कथा है कि जब राजा बलि ने भगवान विष्णु के वामन अवतार से वचन में पाताल लोक में निवास करने का आग्रह किया था तो विष्णु भगवान रात-दिन उनके सामने रहने लगे। जब भगवान विष्णुलोक नहीं पहुंचे तो लक्ष्मीजी चिंतित हुईं।

नारदजी ने लक्ष्मीजी को सलाह दी कि राजा बली को रक्षासूत्र बांधकर उपहार में विष्णुजी को अपने साथ ले आइए। जिस दिन मां लक्ष्मी जी ने राजा बलि से विष्णुजी को मांगा उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी और इसलिए यह प्रसंग भी रक्षाबंधन के साथ जुड़ा है।

महाभारत में भी रक्षाबंधन पर्व का उल्लेख है। जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूं तब कृष्ण ने उन्हें तथा उनकी सेना को राखी का त्योहार बनाने की सलाह दी थी।

शिशुपाल का वध करते समय कृष्ण की की तर्जनी में चोट आ गई थी तो द्रौपदी ने लहू को बहने से रोकने के लिए अपनी साड़ी फाड़कर उनकी अंगुली पर बांध दी थी। कृष्ण ने चीरहरण के समय द्रौपदी की लाज बचाकर इस रक्षासूत्र का कर्ज चुकाया था।

कब बांधें राखी 

इस वर्ष राखी पर चंद्रग्रहण है। पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 6 अगस्त को 10.28 मिनट पर होगा परंतु भद्रा काल व्याप्त रहेगा। रक्षाबंधन का पर्व भद्रा रहित काल में ही मनाना चाहिए। अत: उदयातिथि के अनुसार रक्षाबंधन 7 अगस्त को भद्रारहित काल में मनाया जाएगा। किसी कारणवश भद्राकाल में रक्षाबंधन मनाना भी हो तो भद्रामुख को छोड़कर भद्रा पुच्छ काल में रक्षा बंधन का त्योहार मनाना श्रेष्ठ होगा।

जयपुर रग्स’ वेबसाइट के माध्यम से देता है कारीगरों को उनका वाज़िब हक़

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वास्तव में व्यवसाय के साथ-साथ अनेकों लोगों की भलाई सम्भव है। इसका एक बेहतरीन उदहारण जयपुर स्थितसामाजिक उद्यम ‘जयपुर रग्स’ है। अपने संस्थापक के मजबूत मूल्यों पर आधारित, पूरे परिवार के आशीर्वाद से पल्लवित ‘जयपुर रग्स’ की शुरुआत नंद किशोर चौधरी द्वारा 1978 में की गयी थी और तब से ‘जयपुर रग्स’ ने एक लंबा सफर तय किया है।

अपने सिद्धान्तों और मूल्यों के धनी नन्द किशोर चौधरी कहते हैं- मैंने अपनी खुद की कंपनी ‘जयपुर रग्स’ बिलकुल शून्य से शुरू की थी और आज पाँच करोड़ से शुरू की गयी यह कंपनी, एक सौ पच्चासी करोड़ के व्यवसाय तक पहुंच गयी है।” यह व्यापार जो सिर्फ 09 कारीगरों के साथ शुरू किया गया था, आज काफी बड़ा हो गया है और आज इसका भारत में 4000 कारीगरों और 40 देशों के ग्राहकों का नेटवर्क है।

यह सामाजिक उद्यम, यहां दूरस्थ गांवों के कारीगरों के साथ भी काम करता है और सतत आजीविका उपलब्ध कराने में उनकी सहायता करता है। वो बताते हैं, “दो करघे अपने घर पर लगाकर हमने 9 बुनकरों के साथ काम शुरू किया था। शुरुआत में जो सबसे बड़ी चुनौती हमारे सामने आयी वो ये कि हमारे साथ उस वक़्त जो काम करने वाले सारे बुनकर थे वो हरिजन, चमार और बेगर जाति से थे, जिनको अछूत कहा जाता है। मैं जानता था कि हमारे समाज में, परिवार में भी, बहुत अधिक आडम्बर है, वास्तव में लोग अंदर से कुछ और हैं और बाहर से कुछ और हैं और इन सब से ऊपर मुझे इन लोगों में ज्यादा सरलता दिखाई दी तो एक तरह से मेरा प्रेम उन लोगों के प्रति इतना बढ़ता चला गया कि एक दिन ये परिवार 40000 लोगों के परिवार में परिवर्तित हो गया।” ‘जयपुर रग्स’ अनिवार्य रूप से एक ई-कॉमर्स मंच है। इसकी वेबसाइट अपने ग्राहकों के लिए एक प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करती है और सभी के लिए ब्रांड जिन चीजों के लिए जाना जाता है, उसका प्रतिनिधित्व करती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय अपील के साथ एक उपयुक्त डोमेन नाम का चुनाव करना उनकी सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक और महत्वपूर्ण था।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए नन्द किशोर चौधरी कहते हैं, “क़ालीनों की इस मूल्य श्रृंखला में ग्राहकों का बहुत शोषण हुआ है, साथ ही बुनकरों का भी शोषण हुआ है। तो हमने सोचा कि क्यों न हम हमारे सम्बंधित सारे हितधारकों को शिक्षित करें जिस से हमारी इस कोशिश की कहानी उन तक पहुँच सके और उन सभी लोगों से हमारा एक भावनात्मक रिश्ता बन सके और इसी उद्देश्य के साथ हमने अपनी इस वेबसाइट की शुरुआत की। हमने डॉट कॉम को चुना, क्योंकि डॉट कॉम एक तो ग्लोबल है, दूसरे याद रखने में, बोलने में, बहुत सहज है।”

 

(साभार – योर स्टोरी)