Wednesday, April 8, 2026
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साहित्य में श्रेष्ठ सृजनात्मकता के लिए अमर उजाला शब्द सम्मान

अमर उजाला इस साल से साहित्य अलंकरण अमर उजाला शब्द सम्मान की शुरुआत कर रहा है। इसके तहत, अमर उजाला फाउंडेशन सतत रचनात्मकता के लिए एक हिन्दी और एक अन्य भारतीय भाषा में पांच-पांच लाख रुपये के दो सर्वोच्च अलंकरण और वर्ष की श्रेष्ठ कृतियों के साथ भारतीय भाषाओं में परस्पर अनुवाद के लिए एक-एक लाख रुपये के सम्मान प्रदान करेगा। इस तरह, अमर उजाला फाउंडेशन ने कुल 15 लाख रुपये के सात शब्द साधना सम्मान स्थापित किए हैं।
अमर उजाला फाउंडेशन के प्रवक्ता ने बताया कि सतत रचनात्मकता के दो सर्वोच्च अलंकरण आकाशदीप हिन्दी और भारतीय भाषाओं में विशिष्ट अवदान के लिए पांच-पांच लाख नकद सम्मान राशि के साथ दिए जाएंगे। हिन्दी में किसी भी लेखक की पहली कृति के थाप पुरस्कार दिया जाएगा, जिसकी सम्मान राशि एक लाख रुपये है। छाप केअंतर्गत तीन विधाओं कविता, कथा और गैर-कथा के लिए एक-एक लाख रुपये के तीन सम्मान दिए जाएंगे। भारतीय भाषाओं में परस्पर अनुवाद के लिए एक विशिष्ट सम्मान भाषा बंधु भी प्रदान किया जाएगा। इसकी सम्मान राशि भी एक लाख रुपये है।
अमर उजाला शब्द सम्मान के लिए प्रस्ताव एवं अनुशंसा भेजने की अंतिम तिथि 10 मई है। प्रस्ताव पत्र नियम व शर्तों के साथ आधिकारिक साइट पर उपलब्ध है। प्रस्ताव-पत्र की फोटो प्रति भी उपयोग में ली जा सकती है। गौरतलब है कि अमर उजाला ने बीते साल से साहित्यकारों की जुगलबंदी की अनूठी शृंखला बैठक की शुरुआत की थी। बैठक में नामवर सिंह, विश्वनाथ त्रिपाठी, अशोक वाजपेयी, सुधीश पचौरी, मैत्रेयी पुष्पा, चित्रा मुद्गल, तस्लीमा नसरीन व नासिरा शर्मा जैसी शख्सियतें शिरकत कर चुकी हैं। शब्द सम्मान इसी की अगली कड़ी हैं।

चौथी बार बढ़ी, अब 30 जून हुई पैन-आधार जोड़ने की समय सीमा

नयी दिल्ली : सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (सीबीडीटी) ने मंगलवार को पैन से आधार लिंक कराने की समय सीमा 30 जून तक बढ़ा दी। टैक्स विभाग के इस नीति नियामक निकाय ने पहले इसकी समय सीमा 31 मार्च तक की थी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में हालिया आदेश में कहा था कि विभिन्न सेवाओं को आधार से लिंक करने की 31 मार्च तक की समय सीमा बढ़ाई जाए।
सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली संवैधानिक पीठ ने बायोमेट्रिक योजना को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया था। सरकार ने आधार और पैन लिंक करने की यह सीमा चौथी बार बढ़ाई है।

इससे पहले इन दोनों डाटा बेस को जोड़ने की सीमा 31 जुलाई, 31 अगस्त, 31 दिसंबर 2017 और 31 मार्च 2018 थी।

विद्यासगर विश्वविद्यालय में कवि त्रिलोचन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

कोलकाता: विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रायोजित, ‘त्रिलोचन का साहित्य: सृजन और चिंतन’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के पहले दिन कार्यक्रम का उद्घाटन कला एवं वाणिज्य विभाग के संकायाध्यक्ष प्रो. दामोदर मिश्र ने किया। बीज भाषण रखते हुए प्रो. अरुण कुमार (रांची विश्वविद्यालय) ने कहा कि त्रिलोचन श्रव्य काव्य परंपरा के कवि हैं और सहजता एवं जनपक्षधरता उनकी कविता का केंद्रीय विषय है। बतौर विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. जयंत किशोर नंदी ने कहा कि इस संगोष्ठी के द्वारा त्रिलोचन के साहित्य पर कई नए बिंदु उभरकर आयेंगे। स्वागत भाषण रखते हुए प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि बहुआयामी व्यक्तित्व वाले त्रिलोचन अपने ढंग से निराले थे और आधुनिकता के प्रचलित सांचे को अस्वीकार करके हुए वे आधुनिक थे। डॉ. सुभाष गुप्ता(करीम सिटी कॉलेज) ने त्रिलोचन के साहित्य पर विस्तार से चर्चा करते हुए उन्हें जनपदीय कवि कहा। डॉ राजीव रावत ने कहा कि त्रिलोचन भारतीय काव्य परंपरा के प्रतिनिधि कवि हैं। इस अवसर पर डॉ. मंजुला शर्मा, डॉ. ऋषि कुमार, प्रो. मंटू कुमार, श्रावणी दास, पूजा पाठक, गुलनाज बेगम, प्रियंका मिश्रा, पुष्पा मल्ल, रूपल साव, पंकज सिंह, कीर्ति कुमारी, प्रभाती मुंगराज, मौसमी गोप, राहुल शर्मा, मिथिलेश, सुषमा सिंह, रीता जायसवाल आदि ने आलेख पाठ किया। इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थियों ने त्रिलोचन की कविता पर कोलाज प्रस्तुत किया। सोनाली कुमारी, सोमा दे, बीना पाल, श्रद्धा कुमारी, रेशमी वर्मा, सोनाली सेठ, एम मेघा, सारदा महतो, श्रावणी आदि ने काव्य नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन संजय जायसवाल, डॉ. स्वाती वर्मा और मधु सिंह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पकंज साहा ने दिया।

बनारस की रामलीला का कोलकाता में अभिभूत करने वाला प्रदर्शन

कोलकाता : भारतीय भाषा परिषद में बनारस की संस्था ‘रूपवाणी’ ने बनारस की रामलीला को तुलसी के रामचरितमानस के संगीतात्मक गायन के साथ मूर्त कर दिया और दर्शक अभिभूत हो गए। पश्‍चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. केशरीनाथ त्रिपाठी ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में पहले भी रामलीला देखी है लेकिन यह प्रदर्शन अद्वितीय है। रामलीला के अलावा संस्कृत नाटककार भास के नाटक ‘पंचरात्रम्’ की भी नृत्य नाट्य के रूप में प्रस्तुति हुई। दोनों के निर्देशक प्रसिद्ध कलाकार व्योमेश शुक्ल ने कहा कि यह रामलीला लोक परंपरा और आधुनिकता का सामंजस्य है। उन्होंने महाभारत पर आधारित ‘पंचरात्रम्’ के संदर्भ में कहा कि यह नाटक महाभारत युद्ध न हो और किसी भी युग में कोई युद्ध न हो इसके कारण की खोज है। नाटकों पर चर्चा सत्र में भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ.शंभुनाथ के अलावा कवि प्रियंकर पालीवाल और मृत्युंजय ने भाग लिया।
परिषद की अध्यक्ष डॉ.कुसुम खेमानी ने रूपवाणी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परिषद का उद्देश्य भारतीय साहित्य की महान परंपरा को सामने लाना है। रूपवाणी के कलाकारों का अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि इन्होंने बिना किसी मानदेय के प्रस्तुति की है और उनके अभिनय ने कोलकाता वासियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। परिषद की मंत्री बिमला पोद्दार ने धन्यवाद दिया।

बच्चों को सशक्त बनाना हमारी जिम्मेदारी है

यूनिसेफ बदलाव के लिए कई सालों से काम कर रहा है। भारत में भी यह संस्था काफी सक्रिय है और जमीनी स्तर पर काम कर रही है मगर कोई भी बदलाव तब ही लाया जा सकता है, जब उसके लिए जमीन पर जाकर काम किया जाए। सामाजिक कार्यकर्ता बन जाना शायद आसान है मगर बने रहना उससे भी ज्यादा मुश्किल है क्योंकि बदलाव के लिए धीरज और कभी हार न मानने वाली जिद जरूरी है। यह बहुत कम लोगों में होता है। मोमिता दस्तीदार ऐसे ही लोगों में शामिल हैं जिन्होंने बदलाव का रास्ता चुना, जोखिम उठाए, चुनौतियों का सामना किया मगर इस तरह कि वो सबको साथ लेकर चलीं। दरअसल वास्तविक परिवर्तन होता भी यही है क्योंकि परिवर्तन का वास्तविक अर्थ सिर्फ तोड़ना नहीं बल्कि उसे सकारात्मक तरीके से रूपांतरित करना है। सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए उनको 15 साल हो गये और पिछले कई सालों से वे यूनिसेफ से जुड़ी हैं और इस समय बंगाल में काम कर रही हैं। यूनिसेफ (पश्‍चिम बंगाल) की सम्पर्क विशेषज्ञ मोमिता दस्तीदार से हमने खुलकर बातचीत की, पेश हैं प्रमुख अंश –

मेरा परिवार मुझे लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहा

पिछले 15 साल से काम कर रही हूँ मगर इसकी शुरुआत तब ही हो गयी थी जब मैं स्कूल में थी। मैं स्कूली दिनों में हेल्पेज इंडिया से बतौर को ऑर्डिनेटर जुड़ी थी। यह अनुभव मेरे लिए नजरिया बदलने वाला रहा क्योंकि मैं जिस परिवार से थी, वह मुझे लेकर बहुत ज्यादा प्रोटेक्टिव थे तो मेरे अनुभव भी तब तक सीमित थे मगर हेल्पेज इंडिया के लिए काम करते हुए मैंने बहुत समस्यायें देखीं और करीब से देखा। स्वेच्छा से सेवा कार्य यानि कुछ संस्थाओं के लिए वॉलेंटियर भी बनी और विशेष जरूरतमंद बच्चों और फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों के लिए काम किया और सोशियोलॉजी लेकर पढ़ने का कारण भी यही था कि मैं दूसरों के लिए कुछ करना चाहती थी।

कई बार लगता है, कुछ नहीं किया, बहुत कुछ करना बाकी है

मैंने बहुत से संगठनों और संस्थाओं के साथ काम किया है और कई जगहों पर काम किया है। मीडिया और गैरसरकारी संगठनों से लेकर वर्ल्ड बैंक तक के लिए काम किया है। ओडिशा, राजस्थान, मेघालय, जम्मू कश्मीर में रहकर काम किया है और इससे मैं जमीनी समस्याओं को समझ सकती हूँ। चुनौती यह रही कि हर क्षेत्र की समस्या और स्थिति अलग – अलग रहती है। यूनिसेफ के लिए गुजरात, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों में रहकर काम कर चुकी हूँ। यूनिसेफ में काम करते हुए हम कभी किसी चीज को अचानक नहीं तोड़ते बल्कि सीमित फ्रेमवर्क में रहकर बच्चों और लड़कियों को इतना जागरूक कर देते हैं कि वे खुद अपने लिए और दूसरों के लिए बात कर सके। हर सामाजिक परिवर्तन समय लेता है और इसके लिए धीरज की जरूरत पड़ती है। कई बार तो ऐसा लगता है कि अब तक कुछ नहीं कर सके। हमारा काम खत्म नही होता क्योंकि एक समस्या को खत्म करते हैं तो दूसरी समस्या पर ध्यान जाता है और फिर हम उसके लिए काम करने लगते हैं।

दादी माँ ने बहुत मदद की

दरअसल, जब तक मैं शौकिया करती थी तब तक कोई समस्या नहीं थी। मुश्किल तब हुई जब मैंने इसे अपना कार्यक्षेत्र बनाया। तब समझाना बहुत कठिन था मगर मेरी गम्भीरता देखकर मम्मी – पापा भी समझे और बाद में प्रोत्साहित भी करने लगे। हमारा सँयुक्त परिवार है और जब भी मैं किसी खतरनाक जगह पर जाती तो उनकी चिन्ता बढ़ जाती थी। मैं उनको साथ लेकर भी गयी और जब ट्राँसजेंडरों को लेकर काम किया तो उनको लेकर घर भी आ गयी। शुरू में थोड़ी हिचक थी घर में मगर बाद में सब ठीक हो गया और यह मानसिकता बदलने और समझाने में मेरी दादी माँ का बहुत सहयोग मुझे मिला। वैसे भी मैं सकारात्मक रहती हूँ और कई बार अपनी खूबियों और छोटी – छोटी उपलब्धियों के लिए भी खुद को शाबाशी देती हैं…इतना तो किया, अब आगे भी कर लेंगे।

मेरा काम लोगों को साथ लाना है

यूनिसेफ बंगाल में मुख्य रूप से स्वास्थ्य, पोषण, पेयजल, निकासी और बाल संरक्षण को लेकर विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के साथ काम कर रहा है। मेरा काम लोगों को साथ लाना है। इस समय हम दक्षिण 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया में काम कर रहे हैं। कोलकाता में भी काफी योजनायें चल रही हैं और उत्तर बंगाल में उत्तर बंग विश्‍वविद्यालय के साथ चाय बागान में काम कर रहे हैं। हम यूथ रिपोर्टर तैयार करना चाहते हैं जो अपनी समस्यायें हमें बतायें और हम उनको सरकार तक पहुँचायेंगे। कोलकाता में जेयू के साथ इस तरह का प्रयोग काफी सफल भी रहा है। शीघ्र ही रेडलाइट इलाकों के बच्चों के साथ और काम करेंगे।

एक बच्चे की भी जिम्मेदारी हम उठा लें, तो बड़ी सफलता होगी

इन बच्चों को प्यार की जरूरत है। हममें से अगर सब एक – एक बच्चे की जिम्मेदारी भी उठा ले तो यह एक बड़ी सफलता होगी। बच्चों को सशक्त बनाना हमारी जिम्मेदारी है। मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मैं दूसरों के लिए काम कर पा रही हूँ और यह मौका मुझे मिला है।

वायरल और फेक न्यूज के जाल से बचें, खुद को इस्तेमाल न होने दें

यह आँकड़ों का दौर है और चर्चा का भी…चर्चा भी ऐसी कि सस्ती लोकप्रियता मिले या हिंसा और नफरत फैलायी जाए। ऐसा करना आज बहुत आसान हो गया है। सच तो यह है कि एक आम आदमी आज इस्तेमाल होने की चीज बनकर रह गया है और चाहे – अनचाहे फँतासियों में फँसकर अपनी आदतों का खुलासा और अपनी जानकारियों को उन कम्पनियों को सौंप रहा है जो इन जानकारियों को बेचकर पैसे बनायेंगी। यह बहुत खतरनाक है। परीक्षाओं को देख लीजिए, आज प्रश्नपत्र वायरल होने के जितने मामले आ रहे हैं…पहले नहीं थे या लीक होना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। यह सच है कि एक – दूसरे से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया एक सकारात्मक माध्यम है मगर सवाल यह है कि क्या हमने खुद को इस योग्य बनाया कि हम इस माध्यम का उपयोग सही बातों और वजहों के लिए है। अगर घटनाओं की तह में जाया जाए तो पता चलेगा कि हमारे रिश्ते सोशल मीडिया पर जितने बनते नहीं हैं, उससे कहीं ज्यादा टूट रहे हैं और घृणा के साथ दहशत फैलाने के लिए भी फेसबुक और उससे भी ज्यादा व्हाट्सऐप का उपयोग हो रहा है। एक – दूसरे को नीचा दिखाना हमारी फितरत हो गयी है और ट्रोल करना हमारी आदत। सवाल यह है कि क्या हमारी खबरों का स्वाद इतना वाहियात है कि किसी भी अखबार को अपनी प्रमुख खबरों में गर्लफ्रेंड को किराये पर देने जैसी खबरें लगानी पड़े। व्हाट्सऐप और फेसबुक पर जो भी अधकचरा ज्ञान हमें मिलता है, उसकी पड़ताल करना हम जरूरी नहीं समझते और सीधे उसे शेयर करते हैं। शेयर होने वाली चीजों में बीबियों और बिहारियों पर बने चुटकुले होते हैं तो कभी धर्मान्धता को बढ़ावा देने वाले गर्व से कहो हिन्दू हैं टाइप जुमले। उम्मीद थी कि जिस प्रकार प्रगति होगी, हमारा दिमाग उतना विस्तार पायेगा…मगर हमारी पसन्द किसी के सेक्स संबंधों और राम – रहीम से आगे कभी नहीं बढ़ पायी। कहने को आप बाथटब दिखाने के लिए मीडिया को गालियाँ दे सकते हैं मगर उसे देखने वाले भी आप हैं तो आप खबरों से नैतिकता की उम्मीद कैसे करेंगे। सोशल मीडिया खबरों का एक बड़ा माध्यम बनता जा रहा है मगर खबरों की तह मे जाने के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग की जगह कोई नहीं ले सकता। जरूरी है कि किसी भी माध्यम अथवा समूह को हम इतनी छूट न दें कि वह हमारा इस्तेमाल करे। कई बार पुरानी चीजों को देखती हूँ तो लगता है कि वे लोग हमसे कहीं ज्यादा समझदार थे…जो विभाजन की विभिषका और दंगों के बीच भी कहीं न कहीं इंसानियत का कतरा बचा ले गये…क्या हम इतने गये – गुजरे हैं कि अपना विवेक खोकर धर्म और ऊँच – नीच की खाई में गिरकर अपनी इंसानियत खो दें, इतने नादान हैं कि हम खुद को इस्तेमाल होने दें। क्रैम्ब्रिज एनालिटिका का सहारा लेकर लगभग हर पार्टी ने यही किया है…और इसका सीधा असर हमारे लोकतंत्र पर पड़ा है…ये बहुत खतरनाक स्थिति है जिसका समाधान खोजना बहुत जरूरी है। सजग रहें और सोशल मीडिया की बुराईयों को छोड़ दें,वायरल और फेक न्यूज के जाल से बचें, ट्विटर पर ट्रोल करना छोड़ें, कम से कम खुद को इस्तेमाल न होने दें।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा / भारतीय आर्थिक सेवा परीक्षा जून में

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा / भारतीय आर्थिक सेवा परीक्षा 2018 (Indian Economic Service Examination 2018 / Indian Statistical Service Examination 2018) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। उम्मीदवार परीक्षा का नोटिफिकेशन UPSC की ऑफिशियल वेबसाइट upsconline.nic.in पर पढ़ सकते हैं। यह परीक्षा 29 जून 2018 से शुरू होगी।

इंडियन इकोनॉमिक सर्विस के तहत 14 पदों पर भर्ती होनी है। वहीं इंडियन स्टेटिस्टिकल सर्विस के तहत 32 पदों पर भर्तियां होंगी। आपको बता दें कि इस परीक्षा में बैठने के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 16 अप्रैल 2018 है। सिर्फ 21 से 30 वर्ष के लोग ही इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। आयु सीमा में SC/ST उम्मीदवारों को 5 साल की रियायत मिलेगी।

वहीं OBC उम्मीदवारों को 3 वर्ष और जम्मू-कश्मीर के निवासियों को 5 वर्ष की रियायत मिलेगी। शैक्षणिक योग्यताओं के बारे में बताएं तो इंडियन इकोनॉमिक सर्विस के लिए आवेदक का इकोनॉमिक्स/ एप्लाइड इकोनॉमिक्स / बिजनेस इकोनॉमिक्स / इक्नोमेट्रिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री धारक होना अनिवार्य है।

वहीं इंडियन स्टेटिस्टिकल सर्विस के लिए आवेदक का स्टेटिस्टिक्स (सांख्यिकी) / गणित सांख्यिकी / एप्लाइड स्टेटिस्टिक्स में बैचलर्स या मास्टर्स डिग्री धारक होना अनिवार्य है। आवेदन करने के लिए आपको 200 रुपये की एग्जामिनेशन फीस भी देनी होगी।

फीस आप एसबीआई की किसी भी ब्रांच में कैश के जरिए या नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड के जरिए भर सकते हैं। महिला, SC/ST और दिव्यांग उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क से छूट मिलेगी। ऐसे करें आवेदन-
UPSC की आधिकारिक वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाकर लॉगइन करें।
होम पेज पर ONLINE APPLICATION FOR VARIOUS EXAMINATIONS OF UPSC लिंक पर क्लिक करें।
अब Indian Economic Service Examination, 2018 या Indian Statistical Service Examination 2018 जिसके लिए भी आपको आवेदन करना है उस पर क्लिक करें।
आवेदन करने के लिए भाग 1 और 2 ऑप्शन को सिलेक्ट करें।
सभी दिशा-निर्देश ध्यान से पढ़ें और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरी करें।

धर्म इजाजत नहीं देता, तो आयकर भी देने से इनकार कर देंगे ? : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली  : सुप्रीम कोर्ट ने आधार योजना के तहत निजी जानकारी नहीं देने की दलील पर संज्ञान लेते हुए कहा कि क्या धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कोई व्यक्ति कानून का पालन करने से भी इनकार कर सकता है।
विशेष पहचान पत्र आधार की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने सवाल उठाया कि धार्मिक आजादी के अधिकार के नाम पर क्या कोई आयकर रिटर्न भरने जैसी वैधानिक अनिवार्यता से भी इनकार कर सकता है।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ में आधार की संवैधानिक वैधता और इससे जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है।

सुनवाई के दौरान एक मामला आया कि स्कूल में एक छात्र को दाखिला देने से इनकार कर दिया गया क्योंकि उसके पिता ने कहा कि उनका धर्म उन्हें बायोमेट्रिक विवरण देने की इजाजत नहीं देता। इस पर पीठ ने कहा, ‘धर्मनिरपेक्ष मामलों में क्या आप कह सकते हैं कि आप कोई कानून नहीं मानते। मसलन, क्या कोई व्यक्ति यह कह सकता है कि चूंकि उसकी अंतरात्मा इजाजत नहीं देता इसलिए वह आयकर नहीं दे सकता।’

 आधार कार्ड के बारे में सबसे ज्यादा सर्च करते हैं भारतीय : सर्वे

नई दिल्ली  : एनालिटिक्स कंपनी एलेक्सा के एक सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस खुलासे में सामने आया है कि भारतीय पॉर्न वीडियो से ज्यादा आधार कार्ड के बारे में सर्च कर रहे हैं। आधार को बैंक और सिम से लिंक कराने के लिए भारतीय इंटरनेट पर सबसे ज्यादा UIDAI सर्च कर रहे हैं।
भारतीय इंटरनेट पर ज्यादा से ज्यादा आधार से जुड़े सवाल पूछते हैं जिस वजह से दुनिया भर में प्रसिद्ध पॉर्न वीडियो इंडस्ट्री भी पीछे छूटती जा रही है। सर्वे में सामने आया कि हालही के कुछ महीनों में भारतीयों ने पॉर्न से ज्यादा आधार को सर्च किया है।

एलेक्सा की रिपोर्ट से पता लगा है कि भारत की  शीर्ष  वेबसाइट्स में 14वें नंबर पर UIDAI है जबकि पॉर्न साइट XVIDEOS 15 वें नंबर पर है। लिस्ट में 13वें नंबर पर इंस्टाग्राम है। वहीं गूगल को टॉप 3 में जगह मिली है।

उपेक्षा का शिकार है शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्ला खान का सामान

वाराणसी : देश और दुनिया भर में शहनाई को मकबूलियत दिलाने वाले उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ां का पद्मभूषण अवार्ड और उनसे जुड़े अन्य सामान यहां हड़हा सराय स्थित उनके घर में उपेक्षित पड़े हैं।

बिस्मिल्ला ख़ां के पोते नासिर ने बताया कि दादा को मिले पद्मभूषण अवार्ड की आज कोई कीमत नहीं है। देख-रेख के अभाव में उसका कुछ हिस्सा दीमक खा रही है। इसके अलावा उनके कमरे में आज भी उनका छाता, कुर्सी, टेलीफ़ोन, जूता, बर्तन और चारपाई है लेकिन वह सब भी उपेक्षा का शिकार है।

नासिर का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि सबका पेट भरना तक मुश्किल हो रहा है। ऐसे में उनके सामान को सहेजकर रखना परिवार के लिए मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने बताया कि उनके दादा के गुजर जाने के बाद वहां एक संगीत अकादमी खोले जाने की बात हुई थी जिसमें दादा से जुड़ी यादों को सहेजने की बात थी लेकिन वह सिर्फ वादा ही रह गया है।