Thursday, July 9, 2026
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इक्वाडोर की विदेश मंत्री बनेंगी संयुक्त राष्ट्र महासभा की अगली अध्यक्ष

संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनी अगली अध्यक्ष के तौर पर इक्वाडोर की विदेश मंत्री मारिया फर्नांडा इस्पिनोसा को आज चुना। वह 73 वर्षों के इतिहास में 193 सदस्यीय इस विश्व निकाय की अगुवाई करने वाली चौथी महिला हैं। इस्पिनोसा अपनी महिला प्रतिद्वंद्वी संयुक्त राष्ट्र में होंडुरास की दूत मैरी एलिजाबेथ फ्लोर्स फ्लैक को हराकर इस पद निर्वाचित हुईं। फ्लैक को मिले 62 मतों के मुकाबले उन्हें 128 वोट मिले।
परिषद के अध्यक्ष स्लोवाकिया के मिरोस्लाव लजकाक ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच नतीजों की घोषणा की।संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा , ‘‘ हम कर सकते हैं और हमें बेहतर करना चाहिए। ’’ इस मौके पर इस्पिनोसा ने उम्मीद जताई कि लैंगिक समानता की दिशा में सकारात्मक प्रगति होती रहेगी और उन्होंने अपने निर्वाचन को ‘‘ दुनिया की उन सभी महिलाओं को समर्पित किया जो मौजूदा राजनीति में भाग लेती हैं और जिन्होंने पुरुषवादी तथा भेदभावपूर्ण राजनीतिक तथा मीडिया हमलों का सामना किया है। ’’ इस्पिनोसा ने अपनी जीत के बाद कहा कि वह इस पद पर निर्वाचित होने वाली लातिन अमेरिका और कैरिबिया की पहली महिला हैं। उन्होंने बाद में संवाददातओं से कहा कि उनकी प्राथमिकताएं प्रवास पर वैश्विक असर के लिए वार्ता को अंतिम रूप देना , जलवायु परिवर्तन पर कदमों को बढ़ावा देना , संयुक्त राष्ट्र में सुधारों को लागू करना और वित्तीय आर्थिक विकास के नए रास्ते तलाशना होंगी।

नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार राजकिशोर

नयी दिल्ली : जाने-माने चिंतक, पत्रकार और लेखक राजकिशोर का आज यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वह 72 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनके परिवार में पत्नी, बेटी, बहू और एक पौत्र तथा एक पौत्री हैं। उनके पुत्र विवेक का गत 22 अप्रैल को ही मस्तिष्काघात से आकस्मिक निधन हो गया था। राजकिशोर ने अपने पत्रकारीय जीवन की शुरुआत सत्तर के दशक में कोलकाता से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका ‘रविवार’ से की थी। वहां लंबे समय तक काम करने के बाद वह दिल्ली आ गए, जहां उन्होंने राजेंद्र माथुर और सुरेंद्र प्रताप सिंह के साथ नवभारत टाइम्स में लंबे समय तक काम किया।
कुछ समय पहले तक वह इंदौर से प्रकाशित पत्रिका ‘रविवार डाइजेस्ट’ का भी संपादन कर रहे थे। उनके द्वारा संपादित पुस्तक श्रृंखला ‘आज के प्रश्न’ हिंदी जगत में काफी चर्चित रही और सराही गई। इस श्रृंखला के तहत 22 पुस्तकें प्रकाशित हुईं। इसके अलावा भी उनके दो उपन्यास और एक व्यंग्य संग्रह सहित कई पुस्तकें प्रकाशित हुईं।

बोतल क्रशर मशीन में बेकार बोतल डालकर कमायें 5 रुपये प्रति बोतल

बंगलुरू : बंगलुरु रेलवे डिवीजन ने पर्यावरण और स्वच्छता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेलवे विभाग ने अपनी इस पर्यावरण अनुकूल पहल के चलते अपने मुख्य रेलवे स्टेशनों पर बोतल क्रशर लगवाए हैं। यह बोतल क्रशर केएसआर सिटी, यशवंतपुर, कंटोनमेंट और कृष्णराजपुरम स्टेशनों पर लगाए गये हैं। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी बोतल क्रशरों को लगवाने का खर्च पारले एग्रो नमक निजी कंपनी ने अपने सीएसआर प्रोजेक्ट के तहत उठाया है। यह मशीनें बिजली द्वारा चलेंगीं, जिसका खर्च रेलवे उठाएगी। रेलवे ने घोषणा की है कि जो भी व्यक्ति इन मशीनों में बेकार बोतल डालेगा, उसे 5 रुपये प्रति बोतल दिए जाएंगे। जी हाँ, आपको बस बोतल मशीन में डालने के बाद मशीन में अपना मोबाइल नंबर डालना होगा और आपको आपके पेटीएम पर 5 रुपये क्रेडिट कर दिए जाएंगे। डिविजनल रेलवे मैनेजर, आर. एस सक्सेना ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि इस पहल पर यात्रियों की प्रतिक्रिया के आधार पर बाकी स्टेशनों पर भी मशीनें लगायीं जाएँगी। उन्होंने कहा कि “इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि प्लास्टिक की बोतलों को रेलवे ट्रैक या स्टेशन परिसर में नहीं डाला जाये। यह प्लास्टिक की बोतलों का निपटान करने के लिए एक पर्यावरण अनुकूल विकल्प भी है।”
स्टेशनों पर लगाई गयी प्रत्येक मशीन की लागत 4.5 लाख रुपये है। एक बार मशीन में बोतल गिरा दी जाती है, तो मशीन इन बोतलों को प्लास्टिक के टुकड़ों के रूप में बदल देती है, जिसे फिर से उपयोग में लाया जा सकता है। इससे पहले बोतल क्रशर मैसूर, पुने, अहमदाबाद और मुंबई स्टेशनों पर भी लगाए गए हैं।

क्या आप पिता बनने जा रहे हैं?

माता-पिता बनने की खुशी के एहसास को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। गर्भ में पल रहे बच्चे को गोद में खिलाने के लिए माता पिता दोनों बेसब्री से इंतजार करते हैं। ये तो हम सभी जानते हैं कि गर्भावस्था के समय महिलाओं के दिमाग में अलग-अलग विचार आने लगते हैं। उन्हें बहुत चीजों का तनाव रहने लगता है, पर आप यह नहीं जानते होंगे कि पिता बनने के ख्याल से पुरुष के दिमाग में भी तरह-तरह के ख्याल आने लगते हैं व उन्हें भी कई बातें डराती हैं मगर हर समस्या के साथ समाधान भी होता है…कुछ इस तरह –
पिता बनने की खबर एक तरफ आपको खुशी देती है तो दूसरी तरफ अच्छा पिता बन सकने की चुनौती भी आपके सामने होती है।
आप अपनी बढ़ती जिम्मेदारियों को लेकर परेशान हो जाते हैं। अगर आपके मन में भी ऐसे ख्याल आ रहे हैं तो आप चाइल्ड केयरिंग क्लास ले सकते हैं और इन पर भरोसा नहीं हैं तो आप अपने पिता, चाचा, भाई या किसी दोस्त से बात करें। इससे आपके मन में पैदा हो रहे नकारात्मक विचार दूर हो जाएंगे।
बच्चे के आने के बाद यह सही है कि जिन्दगी एक जैसी नहीं रहती। अब आप हो सकता है कि दोस्तों को पहले की तरह वक्त न दे सकें मगर इसका एक बेहतर तरीका यह है कि अपनी पत्नी और बच्चों को दोस्तों से मिलवायें। आप दोनों के दोस्त एक होंगे तो आपका तनाव कम होगा और आप अकेलापन भी महसूस नहीं करेंगे। वह दफ्तर के बाद पार्टी कम होगी मगर बिलकुल नहीं हो सकती, ऐसा नहीं है।
अधिकतर भारतीय पुरुषों को शिकायत रहती है कि बच्चे आने के बाद उनकी पत्नी उन पर ध्यान नहीं देती। बच्चा जगता है तो आपको भी उसके साथ जागना पड़ता है। इसका एकमात्र कारण यह है कि आपने खुद को घर से और घर की जिम्मेदारियों से काट रखा है। जाहिर कि आपकी पत्नी पर सारा बोझ पड़ेगा तो उसके लिए वक्त निकालना मुश्किल होगा। इसका एक समाधान यह है कि बच्चे की परवरिश और घर के कामों में आप उसका साथ दें। उसे अच्छा लगेगा और काम के साथ रोमांस के पल भी आपको मिल सकेंगे। बच्चे की छोटी – छोटी शरारतें आपका बचपन लौटा देंगी और पत्नी का साथ देकर आप अपना रिश्ता और मजबूत कर सकेंगे। वैसे भी 5-6 महीने में आपका बच्चा आपको परेशान करना कम कर देगा और आपनी पत्नी के साथ पहले जैसा समय बिता सकते हैं।
सच है कि महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को डिलवरी के प्रोसेस से डर लगता हैं। पत्नी को लेबर पेन को देखकर उनकी हालत खराब हो जाती है। डिलवरी के प्रोसेस के बारे में सोचकर वह पहले ही तनाव में रहने लगते हैं। अपने दोस्तों, मम्मी, परिवार और पड़ोसियों से रिश्ते अच्छे रखें। आपका डर और खुशी दोनों, बाँटना आसान होगा।

नोटबंदी के बाद 73,000 कंपनियों के बैंक खाते में जमा हुए 24,000 करोड़ रुपये

नयी दिल्ली : नोटबंदी के बाद देश में ऐसी 73,000 कंपनियों के बैंक खातों में 24,000 करोड़ रुपये की रकम जमा कराई जिनका पंजीकरण अब रद्द किया जा चुका है। सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। काले धन और अवैध संपत्तियों पर शिकंजा कसने के लिए कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने करीब 2.26 लाख कंपनियों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। ये कंपनियां लंबे समय से कारोबार नहीं कर रही थी। इनमें से कई कंपनियों का इस्तेमाल धन की हेराफेरी के लिए किए जाने का संदेह है।
मंत्रालय द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, 2.26 लाख कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया था, जिनमें से 1.68 कंपनियों के बैंक खातों से पता चलता है कि नोटबंदी के बाद उनके खातों में रकम जमा कराई गई थी।
मंत्रालय ने बयान में कहा, “इनमें से 73,000 कंपनियों के खातों में 24,000 करोड़ रुपये जमा हुए थे। विभिन्न बैंकों से कंपनियों की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया चल रही है।”  दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि 68 कंपनियों के खिलाफ जांच चल रही है। इनमें 19 कंपनियों की जांच गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) जबकि 49 कंपनियों की जांच रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज कर रहा है।

इन चीजों के इस्तेमाल से बढ़ता है थायरॉइड रोग का खतरा

थायरॉइड की समस्या इस समय बहुत तेजी से बढ़ रही है। पुरुषों से ज्यादा महिलाएं इस रोग का शिकार हो सकती हैं। वैसे तो थायरॉइड रोग अनुवांशिक होता है और माता-पिता द्वारा बच्चों में आता है या शरीर में आयोडिन की कमी से भी ऐसा हो जाता है। मगर कई बार आपके आस-पास मौजूद चीजें थायरॉइड के रोग को बढ़ाने में मदद करती हैं। जी हां! आपके आस-पास मौजूद बहुत सी चीजों में कुछ ऐसे हानिकारक टॉक्सिन्स होते हैं जो थायरॉइड की समस्या को बढ़ाते हैं। आइये आपको बताते हैं उन टॉक्सिन्स के बारे में और वो जहां मौजूद होते हैं उस जगह के बारे में।

परकोलोरेट्स
सीडीसी के अनुसार हम में से लगभग सभी लोगों के शरीर में परकोलोरेट्स पाया जाता है। परकलोरेट्स वह है जो रॉकेट, जेट फ्यूल और कार एयर बैग्स को बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। यह टॉक्सिन हमारे पीने के पानी और खाने में भी पाया जाता है। सीडीसी के अध्ययन के मुताबिक यह टॉक्सिन थायराइड ग्रंथि को प्रभावित कर लो थायराइड के लक्षणों को पैदा करता है।

पीसीबी एस
पोलीक्लोरीनेटेड बाइफिनायल एक औद्योगिक रसायन है जो कि 1970 से बैन है लेकिन फिर भी आज उसके नमूने हमारे वातावरण मिलते हैं। ऐसा देखा गया है कि पीसीबी थायराइड उत्तेजक हार्मोन के स्तर को बढ़ाता है जिससे थायराइड ग्रंथि की क्रियाशीलता कम हो जाती है। इस टॉक्सिन के कारण हमारे लिवर के एंजाइम भी प्रभावित होते हैं।

डॉयक्सिन
पीसीबीएस और डॉयक्सिन को हार्मोन ग्रंथि के लिए रुकावट पैदा करने वाला माना जाता है। इसके अलावा डॉयक्सिन, एजेंट ऑरेंज का प्राइमरी टॉक्सिन घटक है। एजेंट ऑरेंज की के कारण थायराइड संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं।

सोया
सोया के सेवन से थायराइड ग्रंथि की सामान्य क्रियाओं पर खास असर पड़ता है। सोया उत्पादों का जरूरत से ज्यादा प्रयोग भी थायराइड का कारण हो सकता है। यह उस प्रक्रिया को रोक देता है जिससे आयोडीन थायराइड हार्मोन में बदलता है। शोधों में भी पाया गया है कि जिन नवजात शिशुओ को सोया से बना दूध दिया जाता है उनमें आगे चलकर थायराइड की समस्या हो सकती है।

पेस्टीसाइड्स
पेस्टीसाइड्स के कारण थायराइड की समस्या होने का खतरा बना रहता है। जो लोग अपने रोजमर्रा के कामों में पेस्टीसाइड्स का प्रयोग करते हैं वे अन्य लोगों के मुकाबले थायराइड की समस्या से जल्दी ग्रस्त होते हैं क्योंकि यह थायराइड ग्रंथियों से निकलने वाले हार्मोन के निर्माण पर असर डालता है।

फ्लेम रीटारडैंटस
फ्लेम रिटारडैंटस व पॉलीब्रोमानिटेड डाइ फिनायल ईथर (पीबीडीई एस) यह टॉक्सिन थायराइड ग्रंथि की क्रियाओं में बाधा पहुंचाता है। यह रसायन आपके फर्नीचर के गद्देदार हथ्थों , कंप्यूटर स्क्रीन और टीवी स्क्रीन पर पाए जाते हैं।

प्लास्टिक
यूनिवर्सिटी ऑफ कोपहेगन में किए गए अध्ययन के मुताबिक प्लास्टिक हमारे शरीर के लिए बहुत नुकसानदेह है। प्लास्टिक की बोतल से किसी भी प्रकार का पेय पीने से हमारे शरीर में जहरीले रसायन का प्रवेश हो जाता है। नल के पानी को सुरक्षित बनाने के लिए एक ऐन्टमोनी लेवल सेट किया जाता है जिसके बाद ही पानी को पीने योग्य माना जाता है। शोध के मुताबिक प्लास्टिक की बोतल में जूस या फ्रूट ड्रिंक का ऐन्टमोनी लेवल नल के पानी के मुकाबले 2.5 गुना ज्यादा था जो कि थायराइड ग्रंथि के रोगों को बढ़ा सकता है।

पीएफओए
पीएफओए एक प्रकार का रसायन है जो कि खाना पकाने वाले बर्तनों पर लगाया जाता है, खाना पैक करने वाले कागजों और अन्य चीजों में पाया जाता है। यह थायराइड ग्रंथि की क्रियाओं को प्रभावित करता है जिसकी वजह से थायराइड के लक्षण दिखाई देते हैं।

हैलोजेन
फ्लूयोराइड और क्लोराइड के कारण शरीर में आयोडीन की मात्रा नहीं पहुंच पाती है और थायराइड हार्मोन को सक्रिय रखने वाले टी4 और टी3 से से संपंर्क खत्म हो जाता है। ये हैलोजेन आपके खाने, पानी, दवाओं या वातावरण में मौजूद होते हैं क्योंकि यह दिखने में आयोडीन की तरह होते हैं तो यह आयोडीन के घटको की जगह लेकर शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

भारी धातु
मरकरी, लेड और एल्मुनियिम शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए खतरनाक हो सकते हैं साथ ही यह थायराइड के स्थिति को पैदा करता है। यह पूरी तरह से जहरीला नहीं होता है लेकिन शरीर में इसकी मात्रा का पता ब्लड टेस्ट या यूरीन टेस्ट के जरिए लगाया जा सकता है।

एंटीबैक्टेरियल उत्पाद
ट्राइक्लोजन एक एंटीबैक्टेरियल तत्व है जो साबुन, लोशन और टूथपेस्ट में पाया जाता है। शोधों के मुताबिक इनकी थोड़ी मात्रा शरीर के लिए सुरक्षित है लेकिन ज्यादा मात्रा थायराइड ग्रंथि की क्रियाओं को नुकसान पहुंचाती हैं। यह हार्मोन को डिस्टर्ब करने का काम करते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदेह होता है।
(साभार – ओनली माई हेल्थ)

विश्व कप जीतने का सपना पूरा करके क्या महानतम बन सकेंगे मेस्सी ?

ब्यूनस आयर्स : बचपन में बौनेपन से जूझने के बावजूद फुटबाल के मैदान पर उपलब्धियों के नये शिखरों को छूने वाले लियोनेल मेस्सी ने डेढ़ दशक के सुनहरे कॅरियर में क्लब के लिये कामयाबियों के नये कीर्तिमान बनाये लेकिन अर्जेंटीना के लिये विश्व कप नहीं जीत पाने की कसक उन्हें कचोटती रही है। रूस में उनके पास यह संभवत: आखिरी मौका होगा । रिकार्ड पाँच बार फीफा के सर्वश्रेष्ठ फुटबालर, रिकार्ड पांच बार यूरोपीय गोल्डन शू, बार्सीलोना के साथ नौ ला लिगा खिताब, चार युएफा चैम्पियंस लीग और छह कोपा डेल रे खिताब जीत चुके इस करिश्माई प्लेमेकर के नाम देश और क्लब के लिये कुल 600 गोल दर्ज है। उपलब्धियों से भरे अपने सफर की इतिश्री वह निस्संदेह फीफा विश्व कप के साथ करना चाहेंगे और दुनिया भर में उनके प्रशंसक भी यही दुआ कर रहे होंगे । फुटबाल के इस शहंशाह का जन्म अर्जेंटीना के रोसारियो में 1987 में एक निर्धन परिवार में हुआ था । उनके पिता कारखाने में काम करते थे और मां क्लीनर थी लेकिन फुटबाल में अपनी प्रतिभा की बानगी मेस्सी ने बचपन में ही दे दी थी । बचपन में मेस्सी बौनेपन के शिकार थे और हालत इतनी गंभीर थी कि चिकित्सा की जरूरत थी । इलाज महंगा था तो उनके स्थानीय क्लब ने हाथ खींच लिये लेकिन बार्सीलोना मदद के लिये आगे आया । सितंबर 2000 में 13 बरस का मेस्सी अपने पिता के साथ ट्रायल देने आया तो उसके नाटे कद का मजाक सभी खिलाड़ियों ने उड़ाया । ट्रायल के दौरान दस मिनट का खेल देखने के बाद ही बार्सीलोना ने मेस्सी के साथ करार का फैसला कर लिया । उसके बाद से मेस्सी इसी क्लब के साथ है । यदा कदा उनके दूसरे क्लबों के साथ जुड़ने की अटकलें लगी लेकिन मेस्सी ने बार्सीलोना का दामन नहीं छोड़ा और सफलता की सुनहरी दास्तान लिख डाली ।
करार से मिले पैसों से मेस्सी का इलाज हुआ और कामयाब रहा । मेस्सी , आंद्रियास इनिएस्ता, जावी, सैमुअल इतो और थियरे हेनरी ने बार्सीलोना को अभूतपूर्व सफलतायें दिलाई । क्लब के लिये मिलती सफलताओं के साथ मेस्सी की लोकप्रियता दुनिया भर में बढी और लोग उन्हें माराडोना के समकक्ष या कुछ तो उनसे बेहतर मानने लगे । माराडोना के पास हालांकि विश्व कप था जो आखिरी बार 1986 में अर्जेंटीना ने माराडोना के दम पर ही जीता था । मेस्सी ने 2006, 2010 और 2014 विश्व कप में खराब प्रदर्शन नहीं किया लेकिन उनके अपने बनाये मानदंड इतने ऊंचे थे कि तुलना लाजमी थी । 2006 में 18 बरस का मेस्सी ज्यादातर बेंच पर ही रहा जबकि चार साल बाद वह कोई गोल नहीं कर सका ।दोनों बार जर्मनी ने क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना को हराया । सबसे ज्यादा दर्दनाक हार चार साल पहले ब्राजील में मिली जब खिताब से एक जीत की दूरी पर आकर मेस्सी का सपना जर्मनी ने तोड़ दिया ।
इस बार उनके पास हर उस आलोचक को करारा जवाब देने का मौका है जो यह कहते हैं कि मेस्सी सिर्फ बार्सीलोना का महानायक है, अर्जेंटीना का नहीं । फुटबालप्रेमियों को बखूबी पता है कि किस तरह अकेले दम पर मेस्सी क्वालीफायर दौर में शानदार प्रदर्शन करके अर्जेंटीना को विश्व कप में जगह दिला सका है । क्वालीफिकेशन दौर में आठ मैचों से वह बाहर रहा जिसमें अर्जेंटीना को सात अंक मिले और जो दस मैच वह खेला , उसमें टीम ने 21 अंक बनाये । अर्जेंटीना अगर विश्व कप नहीं जीतता है तो भी इससे मेस्सी की काबिलियत पर ऊंगली नहीं उठाई जा सकेगी लेकिन अगर 1978 और 1986 के बाद टीम फुटबाल का यह सर्वोपरि खिताब जीतने में कामयाब रहती है तो एक चैम्पियन को वैसी विदाई मिलेगी जिसका वह हकदार है ।

(साभार : नया इंडिया )

दुर्गा पूजा समिति चीनी हुलू से सजाएगी पंडाल

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े उत्सव से कुछ महीने पहले एक दुर्गा पूजा समिति के सदस्यों ने यहां चीनी महावाणिज्य दूतावास के साथ मिलकर हुलु (शलजम जैसी कोई चीनी सब्जी) और उसके इर्द – गिर्द की कलाकृति को अपने पंडाल का विषय बनाने का फैसला किया है। कोलकाता के महावाणिज्य दूत मा झानवू ने कहा , ‘‘ हुलु , जिसके बारे में माना जाता है कि वह अच्छा शगुन और समृद्धि लाता है , यून्नान प्रांत में बहुत लोकप्रिय है जहां उसकी बड़े पैमाने पर खेती होती है। हमारे यहां उससे एक वाद्ययंत्र भी बनता है जिसे हुलुसी कहा जाता है , यह तुरही जैसा होता है। उन्होंने कहा कि हुलु लोकप्रिय सार्वजनिक स्थलों पर भी लगाया जाता है और साल्ट लेक के बी जे ब्लॉक में हुलु विषय वाले पंडाल में चीनी नक्काशी हो सकती है जिसके बारे में आयोजकों से चर्चा होगी। मा ने कहा कि साल्ट लेक की बी जे ब्लॉक दुर्गा पूजा का वाणिज्य दूतावास आर्थिक खर्च नहीं उठा रहा है लेकिन दूतावास इस पंडाल के मुख्य शिल्पी को मदद करने और आयोजकों को यूनान प्रांत भेजने के लिए मदद करने के लिए प्रायोजक ढूंढने की कोशिश कर रहा है।

‘सुपर 30’ से 26 विद्यार्थियों ने आई आई टी – जी की परीक्षा में बाजी मारी

पटना : आईआईटी-जेईई मुख्य परीक्षा में पटना के ‘सुपर 30’ के 26 विद्यार्थियों ने इस साल भी परीक्षा में सफलता हासिल की है। आनंद कुमार ने 2002 में इस संस्थान की शुरुआत की थी। इसमें जेईई परीक्षा के लिए गरीब और कमजोर तबके के 30 प्रतिभाशाली छात्रों को शिक्षा दी जाती है।
आनंद ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया, “यह देख कर अच्छा लगा कि दूरदराज के छात्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, जहाँ अब तक विकास की हवा भी नहीं पहुंची है और जीवन अभी भी संघर्षमय है।
बहुत साधारण परिवार से आने वाले ओनिरजीत गोस्वामी, सूरज कुमार, यश कुमार और सूर्यकांत दास समेत अन्य ने इस साल संस्थान से जेईई परीक्षा पास की है। ओनिरजीत के पिता कानपुर में एक छोटी सी कंपनी में काम करते हैं। ओनिरजीत ने बताया कि वह हमेशा से ज़िन्दगी में कुछ अच्छा करना चाहता था पर जेईई पास करना सपने से कम नहीं।
झारखंड में गिरिडीह के निवासी सूरज कुमार के अभिभावक कभी स्कूल नहीं गए। उनके पिता भूमिहीन किसान और बेटे के परीक्षा में उतीर्ण होने से वह बहुत खुश हैं। ये सभी विद्यार्थी अपनी इस सफलता का श्रेय अपने गुरु आनंद कुमार को देते हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, पिछले 16 साल में संस्थान के करीब 500 छात्रों ने आईआईटी के लिए परीक्षा में सफलता हासिल की है। प्रशिक्षण प्रक्रिया के दौरान, आनद साल भर, सभी 30 छात्रों को भोजन और आवास प्रदान करते हैं। उनके परिवार के सदस्य भी हर तरह से उनका समर्थन करते हैं। आनंद कुमार अपने अभियान को देश भर में छात्रों तक ले जाना चाहते हैं। आनंद कुमार ने कहा, ‘मैं ‘सुपर 30’ का विस्तार करना चाहता हूं, लेकिन कुछ समस्याएं हैं। देश में इसी तरह की पहल की मांग बढी है और अधिक से अधिक छात्रों तक पहुंचने के लिए कोई तो रास्ता तलाशना होगा। ‘सुपर 30’ एकेडमी जल्द ही स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित करेगी और संस्थान की वेबसाइट पर सूचनाएं डाली जाएँगी।

साहित्य में संवाद से ही नई प्रवृतियों का उदय संभव

कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के साहित्य संवाद – 2 कार्यक्रम में विश्वभारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन की श्रावणी दास ने त्रिलोचन की भाषा पर चर्चा करते हुए कहा कि कवि ने एक-एक शब्द का सतर्क प्रयोग किया है। कलकत्ता विश्वविद्यालय की श्रद्धांजलि सिंह ने शोध-पत्र पढ़ते हुए कहा कि आज के युग में भी स्त्रियों द्वारा अपने व्यक्तित्व निर्माण को सांस्कृतिक अपराध की तरह देखा जाता है। इसलिए जरूरी है कि स्त्रियाँ परिवार की महत्ता को समझते हुए अपने भीतर छिपे व्यक्ति को पहचाने। विद्यासागर विश्वविद्यालय के राहुल शर्मा ने कथाकार दूधनाथ सिंह को केंद्र में रखकर बताया कि 21वीं सदी का मध्यवर्ग विभाजित है और लोग अपने पड़ोसी से भी संबंध नहीं रखते। उनका संकट गहरा होता जा रहा है। कविसप्तक के अंतर्गत शिवप्रकाश दास, सुषमा त्रिपाठी, संजय राय, गीता दुबे, निर्मला तोदी, अभिज्ञात और काली प्रसाद जायसवाल ने कविता पाठ किया। आरंभ में वरिष्ठ पत्रकार राजकिशोर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा गया कि राजकिशोर ने लगातार 50 सालों तक निरंतर सार्थक और विचारोत्तेजक लेखन किया। उन्होंने राजेंद्र माथुर और प्रभाष जोशी की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए जीवन-भर मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता की। वे दिल्ली में बस गए थे, पर मूलतः हावड़ा के थे। उनको महेश जायसवाल, अवधेश प्रसाद सिंह, शंभुनाथ, रामनिवास द्विवेदी, दिनेश साव, सुरेश शा आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रो संजय जायसवाल ने साहित्य संवाद का संचालन करते हुए कहा कि हम ऐसे आयोजनों से हिंदी की नई बौद्धिक संवाद जारी रखेंगे। इससे ही नई प्रवृतियों का उदय होगा। धन्यवाद ज्ञापन विमलेश त्रिपाठी ने दिया।