Tuesday, October 6, 2026
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मछली बेचने पर ट्रोल होने वाली छात्रा ने केरल बाढ़ राहत के लिए दिए 1.5 लाख रुपये

तिरुवनंतपुरम : अपनी पढ़ाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए मछली बेचने के लिए सोशल मीडिया पर ट्रोल हुई 21 वर्षीय कॉलेज छात्रा ने बाढ़ से प्रभावित केरल राज्य के मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में 1.5 लाख रुपये का योगदान किया है।
कोच्ची की रहने वाली छात्रा हनान ने कहा कि यह पैसा उसके पढ़ाई के लिए किए जा रहे संघर्ष के सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने के बाद लोगों ने उसकी और उसके परिवार की मदद के लिए दिया गया था। हनान ने कहा यह पैसा मुझे लोगों से मिला था और जरुरतमंदों की मदद के लिए इसे वापस देकर मैं बहुत खुश हूं।
अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका निभाने वाली हनान ने लोगों से राहत कार्य के लिए अधिक से अधिक दान करने की गुजारिश की है। इडुक्की जिले के थोडुपुझा में एक निजी कॉलेज में बीएससी की छात्रा हनान के संघर्ष की कहानी मलयालम दैनिक में प्रकाशित होने के बाद वायरल हो गई थी। लेकिन, सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के एक धड़े ने उसकी कहानी पर संदेह जताया था और उसे फर्जी करार दिया था।
हनान के अलावा, जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के लोग उदारता से मदद करने के लिए धन और विभिन्न आवश्यक योगदान दे रहे हैं। एक सरकारी कर्मचारी और नर्स लिनी पुथुसरी जिसकी एक मरीज की सेवा के दौरान निपा वायरस से संक्रमित होने के बाद मौत हो गई थी के पति सजीश ने अपना पहला वेतन (25,000 रुपये) राहत कोष में दिया है। केरल सरकार ने लिनी की नि:स्वार्थ सेवा को देखते हुए सजीश को स्वास्थ्य क्षेत्र में नौकरी दी है।
600 रुपये की मासिक पेंशन पाने वाली कन्नूर जिले के थलसेसरी की साठ वर्षीय रोहिणी ने राहत कोष में 1000 रुपये का योगदान किया है। रोहणी का आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है। राहत कोष में योगदान देने वालों में सोशल मीडिया ग्रुप्र, विद्यार्थी, अभिनेता और एनजीओ भी शामिल हैं।

वरिष्ठ साहित्यकार चारुचन्द्र चंदोला का निधन

देहरादून : वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार व कवि चारुचन्द्र चंदोला का निधन हो गया था। उन्हें मस्तिष्काघात के कारण दून अस्पताल के आईसीयू में एक हफ्ते पहले भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान कल देर रात उनका निधन हो गया। चंदोला जी अपने पीछे पत्नी राजेश्वरी, बड़ी बेटी शेफाली, छोटी बेटी साहित्या को शोकाकुल छोड़ गए। अपनी पत्रकारिता व कविताओं के माध्यम से व्यवस्था की कमियों पर हमला करने वाले चंदोला जी का जन्म 22 सितम्बर 1938 को म्यॉमार (बर्मा ) में हुआ। मूल रुप से पौड़ी के कपोलस्यूँ पट्टी के थापली गॉव के थे और पिछले लगभग 5 दशकों से देहरादून के पटेल मार्ग में अपने पैत्रिक आवास गढ़वालायन में रह रहे थे।
चारु चंद्र ने अपनी पत्रकारिता का सफर “टाइम्स ऑफ इंडिया ” मुम्बई से प्रशिक्षु के रूप में शुरु किया। उसके बाद मुम्बई के फ्री प्रेस जर्नल , पूना हेरल्ड , पायनियर, स्वतंत्र भारत, नेशनल हेरल्ड, अमर उजाला ( मेरठ ) , युगवाणी आदि विभिन्न पत्र पत्रिकाओं से जुड़े। वे पिछले 5 दशकों से ” युगवाणी ” अखबार व पत्रिका के समन्वय सम्पादक थे।
उनकी हिन्दी में लिखी गई कविताओं का पहला प्रकाशन हिन्दी पत्रिका धर्मयुग में हुआ। उनकी कविताएं साप्ताहिक हिन्दुस्तान, जनसत्ता में भी प्रकाशित हुई। कुछ समय पौड़ी से हिमवन्त साप्ताहिक का सम्पादन, प्रकाशन किया। एक स्तम्भकार के रूप में मन्जुल, मयंक, मनभावन, यात्री मित्र, कालारक्त, अग्निबाण, त्रिच और सर्गदिदा उपनामों से तीखे राजनैतिक व सामाजिक व्यंग्य भी लिखे। युगवाणी में सर्गदिदा उनका स्तम्भ बहुत ही चर्चित रहा था। हेमवती नन्दन बहुगुणा विश्वविद्यालय , श्रीनगर ( गढ़वाल ) के बीए के पाठ्यक्रम में उनकी कविताएं शामिल हैं। उनकी प्रकाशित कविता की पुस्तकों में कुछ नहीं होगा, अच्छी सांस , पौ, पहाड़ में कविता, उगने दो दूब हैं। उन्हें पत्रकारिता व कविता में उल्लेखनीय योगदान के लिए उमेश डोभाल स्मृति सम्मान व आदि शंकाराचार्य पत्रकारिता सम्मान भी मिले। पत्रकारिता सम्मान से उन्हें द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानन्द सरस्वती जी ने सम्मानित किया था। चंदोला जी की कविताएं जनसरोकारों से जुड़ी होती थी। जिनमें वे सीधे व्यवस्था पर चोट करते। युगवाणी के माध्यम से गढ़वाल में अनेक नवोदित पत्रकारों व कवि को संवारने और दिशा देने का काम किया। आधुनिक नई कविताओं को प्रारम्भिक दौर में उन्होंने युगवाणी के माध्यम से ही पाठकों के सामने रखा, उनकी आलोचना भी हुई। उन पर परम्परागत कविता लेखन के स्वरुप को बिगाड़ने के आरोप लगे। पर वे आलोचनाओं से विचलित नहीं हुए। हिन्दी की आधुनिक कविताओं के अनेक कवियों को तराशने का काम उन्होंने किया।

करीब 2,000 गैर पंजीकृत बालगृहों के बंद होने के आसार

नयी दिल्ली : महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की बार-बार अपील के बावजूद सरकार के साथ पंजीकरण नहीं कराने वाले देश भर के करीब 2,000 शिशु देखभाल संस्‍थानों (सीसीआई) पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगर गैर-अनुपालन ऐसे ही जारी रहा तो ऐसे संस्थान बंद हो सकते हैं। झारखंड में हाल में मिशनरियों के कथित रूप से अवैध तरीके से बच्चों को गोद दिये जाने के मामलों पर संज्ञान लेते हुए केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी ने पिछले महीने सभी राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि सभी बालगृहों का पंजीकरण किया जाये और उन्हें एक महीने के अंदर देश की शीर्ष संस्था केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के साथ जोड़ा जाये।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं सुरक्षा) कानून, 2015 में सभी सीसीआई के पंजीकरण एवं कारा के साथ उन्हें जोड़ने का प्रावधान दिया गया है। दो साल पहले यह प्रभाव में आया लेकिन कुछ अनाथालयों ने इस अनुच्छेद की वैधता को चुनौती दी थी।
उत्तर प्रदेश के देवरिया में एक गैर पंजीकृत बालगृह में 24 लड़कियों के कथित यौन उत्पीड़न की घटना सामने आने के बाद मंत्रालय ने एक बार फिर सभी संस्थानों से पंजीकरण की अपील की।
सीसीआई में बाल गृह, अवलोकन गृह, विशेष गृह, सुरक्षा स्थान, विशेषीकृत दत्तक एजेंसी और खुले आश्रय गृह शामिल हैं।
देवरिया में नाबालिग लड़कियों के कथित यौन उत्पीड़न की घटना के बाद मेनका ने ऐसे बच्चों को रखने के लिये एक मात्र बड़े केन्द्रीय संस्थान के निर्माण का प्रस्ताव दिया था ताकि गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के माध्यम से इनके ‘‘उत्पीड़न एवं दुर्व्यवहार’’ को रोका जा सके।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मशहूर भाषणों के अंश

नयी दिल्ली : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक प्रखर वक्ता थे और अपनी वाकपटुता के लिए जाने जाते थे। यहां परमाणु परीक्षण से लेकर कश्मीर और शिक्षा से लेकर प्रेस की आजादी तक कई तरह के विषयों पर उनके भाषण के अंश दिए जा रहे हैं:-
* 28 दिसंबर 2002 – विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के स्वर्ण जयंती समारोह के उद्घाटन अवसर पर – ‘‘शिक्षा अपने सही अर्थों में स्वयं की खोज की प्रक्रिया है। यह अपनी प्रतिमा गढ़ने की कला है। यह व्यक्ति को विशिष्ट कौशलों या ज्ञान की किसी विशिष्ट शाखा में ज्यादा प्रशिक्षित नहीं करती, बल्कि उनके छुपे हुए बौद्धिक, कलात्मक और मानवीय क्षमताओं को निखारने में मदद करती है। शिक्षा की परीक्षा इससे है कि यह सीखने या सीखने की योग्यता विकसित करती है कि नहीं, इसका किसी विशेष सूचना को ग्रहण करने से लेना-देना नहीं है।’’
* 1998 में परमाणु परीक्षण पर संसद में संबोधन – ‘‘पोखरण-2 कोई आत्मश्लाघा के लिए नहीं था, कोई पुरुषार्थ के प्रकटीकरण के लिए नहीं था। लेकिन हमारी नीति है, और मैं समझता हूं कि देश की नीति है यह कि न्यूनतम अवरोध (डेटरेंट) होना चाहिए। वो विश्वसनीय भी होना चाहिए। इसलिए परीक्षण का फैसला किया गया।’’

पोकरण परमाणु परीक्षण के बाद पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम के साथ वाजपेयी जी

* मई 2003 – संसद में – ‘‘आप मित्र तो बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं।’’
* 23 जून 2003 –

पेकिंग यूनिवर्सिटी में – ‘‘कोई इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकता कि अच्छे पड़ोसियों के बीच सही मायने में भाईचारा कायम करने से पहले उन्हें अपनी बाड़ ठीक करने चाहिए।’’
* 1996 में लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए – यदि मैं पार्टी तोड़ू और सत्ता में आने के लिए नए गठबंधन बनाऊं तो मैं उस सत्ता को छूना भी पसंद नहीं करूंगा।’’
* जनवरी 2004 –

इस्लामाबाद स्थित दक्षेस शिखर सम्मेलन में दक्षिण एशिया पर बातचीत करते हुए – ‘‘परस्पर संदेह और तुच्छ प्रतिद्वंद्विताएं हमें भयभीत करती रही हैं। नतीजतन, हमारे क्षेत्र को शांति का लाभ नहीं मिल सका है। इतिहास हमें याद दिला सकता है, हमारा मार्गदर्शन कर सकता है, हमें शिक्षित कर सकता है या चेतावनी दे सकता है….इसे हमें बेड़ियों में नहीं जकड़ना चाहिए। हमें अब समग्र दृष्टि से आगे देखना होगा।’’

* 31 जनवरी 2004 –

शांति एवं अहिंसा पर वैश्विक सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री का संबोधन – ‘‘हमें भारत में विरासत के तौर पर एक महान सभ्यता मिली है, जिसका जीवन मंत्र ‘शांति‘ और ‘भाईचारा’ रहा है। भारत अपने लंबे इतिहास में कभी आक्रांता राष्ट्र, औपनिवेशिक या वर्चस्ववादी नहीं रहा है। आधुनिक समय में हम अपने क्षेत्र एवं दुनिया भर

 

* 13 सितंबर 2003 –

‘दि हिंदू’ अखबार की 125वीं वर्षगांठ पर – ‘‘किसी के विश्वास को लेकर उसे उत्पीड़ित करना या इस बात पर जोर देना कि सभी को एक खास नजरिया स्वीकार करना ही चाहिए, यह हमारे मूल्यों के लिए अज्ञात है।’’

* 23 अप्रैल 2003 ‘

जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर संसद में -‘बंदूक किसी समस्या का समाधान नहीं कर सकती, पर भाईचारा कर सकता है। यदि हम इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत के तीन सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होकर आगे बढ़ें तो मुद्दे सुलझाए जा सकते हैं।’’

कैदियों को प्रेरित करने के लिए सुनाई जाएंगी वाजपेयी की कविताएं!

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लिखी कविताएं और उनकी जीवनी सुनाई जा सकती हैं ताकि वे अटल जी के जीवन से प्रेरणा लेकर मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित हों।
प्रदेश के जेल राज्य मंत्री जय कुमार सिंह जैकी ने कहा कि, ‘मैं मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) से कहूंगा कि उत्तर प्रदेश की जेलों में कैदियों के बीच में अटल जी की जीवनी और उनकी कविताएं सुनाई जाएं। मुझे पूरा भरोसा है कि प्रदेश के बंदी अगर उनकी कविताओं और जीवनी से प्रेरणा लेंगे तो वे अपराध को छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ जाएंगे।’
पिछले साल दिसंबर में वाजपेयी की 93 वीं वर्षगांठ के मौके पर योगी सरकार ने प्रदेश की विभिन्न जेलों से 93 कैदियों को रिहा किया था। ये वो कैदी थे जिन्होंने अपनी सजा तो पूरी कर ली थी लेकिन अर्थदंड न चुका पाने के कारण जेलों में बंद थे। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश की 71 जेलों में करीब 98 हजार कैदी और बंदी हैं। इनमें सजायाफ्ता और जिन पर मुकदमे चल रहे हैं दोनो शामिल हैं।

ट्रेंडी और इको फ्रेंडली एक्ससरीज का पता यह रहा

 

अब जब फेस्टिव सीजन शुरू हो रहा है तो इंडियन लुक आप चाहती हैं मगर ऐक्सेसरीज ऐसी चाहिए जो जीन्स से लेकर साड़ी या लहँगे के साथ चल सके। शादी से लेकर मेहन्दी और फिलहाल तो रक्षा बन्धन और इसके बाद दुर्गा पूजा की तैयारी। अगर आप इको फ्रेंडली, ट्रेडी और ट्रेडिशनल पाइच, मोबाइल पाउच और पर्स खोज रही हैं तो जरा इन पर निगाह डालिए। वैसे राखी पर अपनी बहन के लिए भी ये आइडिया बुरा नहीं है। ये इको फ्रेंडली ही नहीं, पॉकेट फ्रेंडली भी हैं। इस कलेक्शन में पर्स, बैग्स, पोटली के साथ मोबाइल पाउच भी शामिल हैं।

फोल्डेबल पर्स – मटेरियल – कॉटन। जिपर और मैग्नेटिक लॉक के साथ कीमत -100 रुपए प्रति पीस

शगुन पोटली –  नेट और लेस की सजावट के साथ, कीमत – 20 रुपये प्रति पीस

मोबाइल पाउच – फोम्ड मोबाइल पाउच, लेस के साथ, कीमत 26 रुपये प्रति पीस

मोबाइल पाउच – अतिरिक्त पॉकेट के साथ, मटेरियल – जूट और डेकोरेटेड लेस, बटन लॉक, कीमत -60 रुपये प्रति पीस

पोटली –  मटेरियल – जूट, ब्रोकेड और नेट, टेजेल और मोती लेस की सजावट, कीमत – 50 से 100 रुपये से शुरू

छोटी पोटली – मोती की सजावट, कीमत -50 रुपये प्रति पीस

ट्रेन्डी पर्स – मटेरियल – जूट और नेट, गोल्डेन बॉर्डर के साथ, कीमत -100 रुपये प्रति पीस

जूट पाउच – मटेरियल -जूट और रंगीन लेस, कीमत – 80 रुपये प्रति पीस

जूट बैग –  मैचिंग कॉटन फैब्रिक के साथ, कीमत -100 रुपये प्रति पीस

आदि हैंडमेड क्रिएशन सिग्नेचर द्वारा पेश किये गये ये पर्स और बैग्स खरीदने के लिए आप इस नम्बर पर कॉल या मैसेज कर सकती हैं –

आदि हैंडमेड क्रियेशन्स – 9831022689

 

 

एक नहीं, अनेक तरीकों से किसी भी मौके पर पहनें साड़ी

त्योहार या मौका  कोई भी हो, कोशिश हमारी रहती है कि साड़ी पहनें। साड़ी एक ऐसा परिधान है जो इस देश को एक सूत्र में बाँधती है। भारत के हर राज्य में अलग – अलग तरीके से साड़ी पहनी जाती है और इसकी वैरायटी का तो कुछ कहना ही नहीं है। साड़ी की विविधता को देखकर राज्य की विविधता के बारे में जानना आसान हो जाता है। साड़ी के साथ सही ब्लाउज का चयन आपके लुक को पूरा करता है। साड़ी आपको पारम्परिक भी बना सकती है और अल्ट्रा मॉडर्न भी। यही वजह है कि हर बड़ा डिजाइनर या फिर छोटे से छोटा व्यवसायी साड़ी अपनाता है। इलाके की दुकान से लेकर शॉपिंग मॉल और रैम्प पर, हर जगह साडी का राज है मगर साड़ी पहनने के तरीके आपका लुक सुन्दर बनाते हैं। आम तौर पर हम उल्टे पल्ले की साड़ी पहनते हैं मगर साड़ी पहनने के और भी कई तरीके हैं जो आपको न सिर्फ खूबसूरत बनायेंगे बल्कि आप अलग भी दिखेंगे। ऐसे ही कुछ आसान और सदाबहार तरीकों को आइए, जानते हैं –

बंगाली स्टाइल

बंगाली स्‍टाइल की साड़ी ट्रेडिशनल लुक देने के मामले में सबसे आगे है। यह न केवल आपको अभिजात्यतापूर्ण बनाती है बल्कि इसे पहनना और सम्भालना भी खास मुश्किल नहीं है। इस लुक के लिए हैंडलूम या हल्की कॉटन की बॉर्डर वाली साड़ियां अच्‍छी रहती हैं। दुर्गापूजा और पोएला बैशाख पर इस तरह साड़ी पहनकर देखें। इसके साथ फ्रिल वाला या पूरी बाँह वाला ब्लाउज जबरदस्त लगता है।

लहंगा स्टाइल

इस स्‍टाइल में आप किसी भी तरह की साड़ी को लहंगे जैसा लुक दे सकती हैं। प्‍लेट्स की मददसे साड़ी को कुछ इस तरह बांधते हैं कि यह लहंगे जैसा लुक देती है। यह आजकल काफी चलन में भी है। इस तरह से आम तौर पर राजस्थान और गुजरात में साड़ी पहनी जाती है। आप किसी पार्टी या शादी में इसे पहन सकती हैं।
जलपरी स्टाइल


दुबली हैं और आपका फिगर परफेक्ट है तो यह तरीका आपके लिए बेस्ट है। यह साड़ी लो वेस्ट से पहनी जाती हैऔर स्कर्ट जैसा लुक देती है। इसे पहनने के बाद फिगर स्लिम लगता है। आमतौर पर यह स्टाइल उनसाड़ियों पर अच्छा लगता है जिनमें पल्लू पर अधिक काम होता है।

तितली स्टाइल

दीपिका या प्रियंका की तरह दिखना चाहती हैं, तो इस स्‍टाइल में साड़ी में पहन सकती हैं।इसमें पल्लू काफी पतला रखा जाता है, जिससे फिगर और निखरकर आती है। यह स्‍टाइलशिफॉन, नेट जैसी साड़ियों पर खूब अच्‍छी लगत है। किसी कॉकटेल पार्टी में दोस्तों के बीच पहनिए, अच्छी लगेंगी। इसे नीवी स्टाइल साड़ी भी कहते हैं।
राजरानी स्टाइल


हेवी सिल्क या भारी नेट की साड़ियों के लिए राजरानी स्टाइल बेहतरीन विकल्प है। यह गुजराती स्टाइल का ही एक रूप है। इस पैटर्न से साड़ी पहनते वक्त पल्लू दाईं ओर से लिया जाता है और सामने से वी आकार में ले जाकर पिनअप कर दें। अपनी साड़ी का खूबसूरत आँचल दिखाना चाहती हैं, तो यह तरीका सही है।

मुमताज स्टाइल


तीज की पार्टी में जाते वक्त रेट्रो लुक के लिए मुमताज स्टाइल से बेहतर विकल्प क्या हो सकता है।आपका खूबसूरत फिगर है तो आपके लिए इस स्टाइल से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। कॉकटेल, रिसेप्शन या कॉलेज में ऐसे साड़ी पहनें।
सीधा पल्ला


इस तरह से गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार और कभी – कभी राजस्थान में साड़ी पहनी जाती है। किसी धार्मिक अनुष्ठान में इस तरह से साड़ी पहनें, पारम्परिक लुक दिखेगा। अगर साड़ी का भारी आँचल दिखाना चाहती हैं तो उसके लिए भी यह तरीका परफेक्ट है।
उल्टा पल्ला


यह आम तरीका है और इस तरीके से आप कहीं भी, कभी भी साड़ी पहन सकती हैं। पल्लू और आँचल पिनअप करें तो यह आपको प्रोफेशनल व क़ॉरपोरेट लुक देगा। आम तौर पर महिला नेत्रियाँ भी इसे अपनाती हैं और आप भी हैंडलूम और जवाहर जैकेट या पूरा कवर ब्लाउज पहनकर कॉटन या हैंडलूम के साथ सिल्क से ये यह लुक पा सकती हैं। दक्षिण भारत में काँजीवरम इसी तरीके से पहनी जाती है और असम की मेखला चादर या उत्तर – पूर्वी राज्यों में यह लुक आपको दिखेगा। यह सदाबहार तरीका है।

मराठी स्टाइल

इसे नौआरी स्टाइल साड़ी भी कहते हैं। यह महाराष्ट्र में पहनी जाती है और नीचे से धोती की तरह बाँधी जाती है जिससे आपके पैरोंं की गतिविधि बाधित नहीं होती। आम साड़ियों के पैटर्न के मुकाबले यह स्टाइल काफी अलग है। इसके लिए 6 हाथ के बजाय 9 हाथ की लंबाई वाली साड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है और नीचे पेटीकोट नहीं पहनते हैं।

बेल्ट खरीद और लगा रहे हैं तो इन बातों को न भूलें

बेल्ट एक ऐसी एक्सेसरीज है जो आप इस्तेमाल करते ही होंगे। आम तौर पर कोई भी लेदर बेल्ट आपने खरीद ली मगर इसे खरीदते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है क्योंकि बेल्ट और उसको पहनने का तरीका आपके लुक को बदल सकता है। ऐसे में इसे पहनते और खरीदते वक्त कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें –


बेल्ट का रंग आपके व्यक्तित्व पर काफी प्रभाव डालता है। पोशाक से बिल्कुल कंट्रास्ट रंग की बेल्ट आपको अधिक स्लिम व लंबा लुक देगी जबकि मैचिंग शेड की बेल्ट अधिक लंबे व दुबले लोगों के लिए अच्छा विकल्प है।
अमूमन बेल्ट को हम वेस्टलाइन पर बांधते हैं लेकिन थोड़ा ऊपर या नीचे पहनने से भी आपका लुक पूरी तरह बदल जाता है। लंबे और पतले लोग वेस्टलाइन से नीचे बेल्ट लगा सकते हैं जबकि छोटे कद के मोटे लोग इसे वेस्टलाइन पर ही पहनें तो अच्छा लगेगा।


गलत बकल का चुनाव आपके लुक को आधा कर सकता है इसलिए बकल खरीदते वक्त सावधानी बरतना जरूरी है। बहुत अधिक तड़क-भड़क वाले बकल्स आपके लुक का ग्रेस खत्म कर देते हैं। लेदर बेल्ट के लिए मीडियम साइज के सिंपल बकल ही स्टाइलिश लगते हैं।
बेल्ट हमेशा अपनी कमर के साइज से दो इंच लम्बी खरीदें। यानी अगर आपकी कमर 32 इंच की है तो आप बेल्ट कम से कम 34 इंच की लें। इससे लुक भी अच्छा लगता है और पहनने में भी सुविधा होती है।

नहीं रहे पूर्व लोकसभाध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी

कोलकाता : लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। चटर्जी 89 वर्ष के थे और उनके परिवार में पत्नी एवं दो बेटियां हैं।

अधिकारी ने बताया कि चटर्जी को कल ‘‘दिल का हल्का दौरा’’ पड़ा था जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई और आज सुबह करीब सवा आठ बजे उनका निधन हो गया। चटर्जी को किडनी से संबंधित बीमारी थी और उन्हें गत मंगलवार को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और बीती रात से उनपर इलाज का कोई असर नहीं हो रहा था। आज सुबह करीब सवा आठ बजे उनका निधन हो गया।’’ चटर्जी को कल सुबह दिल का दौरा पड़ा था। उनका आईसीयू में इलाज चल रहा था।

लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष को पिछले महीने मस्तिष्क में रक्तस्राव हुआ था।उनका पिछले 40 दिन से इलाज चल रहा था और स्वास्थ्य में सुधार होने के चलते उन्हें तीन दिन के लिए अस्पताल से छुट्टी दी गई थी। अधिकारी ने बताया कि पिछले मंगलवार को उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।  दस बार लोकसभा के सांसद रहे चटर्जी माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य थे। वह 1968 में माकपा में शामिल हुए थे।वह वर्ष 2004 से 2009 तक लोकसभा के अध्यक्ष रहे।

माकपा के संप्रग-1 सरकार से समर्थन वापस ले लेने के बावजूद चटर्जी ने लोकसभा के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। इस वजह से वरिष्ठ नेता को वर्ष 2008 में माकपा से निष्कासित कर दिया गया था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चटर्जी के निधन पर शोक जताया और कहा कि सभी दलों के सांसद उनका सम्मान करते थे।गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘10 बार सांसद रहे पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्री सोमनाथ चटर्जी के निधन पर मैं शोक प्रकट करता हूं।’’

छात्रा ने किया शराबियों पर नकेल कसने वाला आविष्कार

भोपाल /पटना : भोपाल  के लक्ष्मी नारायण कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस से बीटेक कर रही पूर्णियां (बिहार) के गांव भवानीपुर की छात्रा ऐश्वर्य प्रिया ने ‘अल्कोहल डिटेक्टर एंड ऑटोमेटिक इंजन लॉकिंग सिस्टम’ का आविष्कार किया है। यह सिस्टम किसी भी फोर ह्विलर के इंजन में फिट कर देने पर वह शराबी सवारी को सूंघ लेता है और इंजन अपनेआप तत्काल बंद हो जाता है। जब तक शराबी वाहन सवार नीचे नहीं उतरेगा यानी वाहन से बाहर नहीं होगा, इंजन ऑटोमेटिकली चालू नहीं हो सकेगा। इस सिस्टम को लगाने में मात्र नौ सौ रुपए खर्च होते हैं।

हमारे देश में सड़क दुर्घटनाएँ इतनी बड़ी और खतरनाक समस्या बन गई हैं कि हर वर्ष लगभग एक छोटे शहर के बराबर की जनसंख्या मौत का शिकार हो जाती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष देश में सड़क हादसों में लगभग डेढ़ लाख लोग मर जाते हैं और उनसे कई गुना ज्यादा लोग घायल और अपंग हो जाते हैं। इस तरह हादसों से देश को हर वर्ष भारी आर्थिक और सामाजिक कीमत चुकानी पड़ती है। आकलन में ये पाया गया है कि नशे की हालत में गाड़ी चलाना इन दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है।

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि सड़क हादसों में रोजाना करीब 400 लोगों की जान चली जाती है। उनमें ज्यादातर लोगों की मौत शराब पीकर वाहन चलाने से होती है। ऐसे में ऐश्वर्य प्रिया का आविष्कार देश के लिए किसी वरदान से कम नहीं। बिहार में शराबबंदी के बावजूद ऐसे हादसों में कोई कमी नहीं आई है। इसी को ध्यान में रखते हुए ऐश्वर्य प्रिया इस प्रोजेक्ट पर लगातार काम करती रहीं। कड़ी मेहनत के बाद उन्हें यह आश्चर्यजनक सफलता मिली है। सरकार यदि वाहनों में इस यंत्र का इस्तेमाल कराना सुनिश्चित कर दे तो शराब पीकर कोई गाड़ी नहीं चला पाएगा।

कॉलेज के प्रोफेसर भी इस काम में उनकी मदद कर रहे थे। ऐश्वर्य का आविष्कार सड़क हादसे रोकने में ऐतिहासिक भूमिका निभा सकता है। ऐश्वर्य ने अपना आविष्कार पिता रवि गुप्ता एवं मां इंदू देवी को समर्पित किया है। ऐश्वर्य बताती हैं कि वाहन के इंजन में लगने वाला यह सिस्टम बहुत कम स्पेस लेता है। इसलिए इसे कार या किसी भी बड़े वाहन के डैश बोर्ड पर रखा जा सकता है। इस सिस्टम का एक तार वाहन की बैटरी से और दूसरा तार इंजन से जोड़ दिया जाता है। इसके बाद यह शराबी चालकों या सवारियों की जासूसी शुरू कर देता है। यह सिस्टम जिस भी वाहन में फिट होगा, कोई शराबी उसे स्टार्ट नहीं कर पाएगा। सिस्टम उसकी सांस से अल्कोहल को डिटेक्ट कर लेता है। दोबारा वाहन तभी स्टार्ट होगा, शराबी वाहन से बाहर निकल जाए।

(साभार – योर स्टोरी)