Thursday, July 9, 2026
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गौरी ने सजाया जैकलीन का घर

मुम्बई : शाहरुख खान की पत्नी गौरी खान एक अच्छी इंटीरियर डिजाइनर हैं। हाल ही में उन्होंने एक बार फिर अपना ये हुनर साबित किया। जैकलीन फर्नांडीज ने अपने अपार्टमेंट का इंटीरियर गौरी से डिजाइन करवाया है। गौरी ने जैकलीन के अपार्टमेंट की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर की हैं. उन्होंने लिखा जैकलीन आपके साथ काम करने का अनुभव काफी शानदार रहा । उन्होंने लिखा, “एक तरह का बेहतरीन माहौल और पॉजिटिव एनर्जी. जिस तरह कोई आउटफिट्स, बैग्स, शूज, बेल्ट आदि से लुक आपका लुक बदल देता है, उसी तरह हमारा घर भी कुशन्स, वॉल पेपर्स और फंकी आर्टवर्क से बदल सकता है।”गौरी इससे पहले रणबीर कपूर और करण जौहर का घर भी डिजाइनर कर चुकी हैं। गौरी की अपनी इंटीरियर डिजाइनिंग कंपनी है. गौरी खान डिजाइन्स के नाम से। गौरी ने करण जौहर के बच्चों के लिए खास तौर पर किड्स जोन डेवलप और डिजाइन किया था।

रक्तदान करें तो रखें इन बातों का ख्याल

रक्तदान को महादान कहा गया है। किसी की जान बचाना अच्छी बात है मगर आप जान तो बार – बार तभी बचा सकते हैं, जब खुद आपकी जान सलामत रहे इसलिए रक्तदान करने जा रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें –
सबसे पहली बात जो आपको रक्त दान करते समय ध्यान में रखना चाहिए वह यह कि आप रक्त दान करने के योग्य हैं भी या नहीं।
-अगर आप रक्तदान करने का सोच रहे हैं तो एक दिन पहले से धूम्रपान करना बंद कर दें। इसके अलावा रक्तदान करने के तीन घंटे बाद ही धूम्रपान करें।
-रक्तदान करने के बाद हर तीन घंटे में हैवी डाइट लें। इसमें आप ज्यादा से ज्यादा हैल्दी खाना ही लें। आप चाहि तो फल खा सकते हैं।
ज्यादातर रक्तदान करने के बाद रक्तदाता को खाने के लिए जूस, चिप्स, फल आदि दिए जाते हैं, इन्हें लेने से परहेज नहीं करना चाहिए।
-रक्तदान करने के 12 घंटे बाद तक आप अधिक भारी व्यायाम न करें। खून देने के तुरंत बाद गर्मजोशी अच्छी नहीं होती। पहले अपने शरीर में खून के संचार तो सामान्य होने दें।
-रक्तदान करने से 48 घंटे पहले से शराब का सेवन बंद कर दें। अगर आपने 48 घंटों के बीच शराब का सेवन किया है तो आप रक्त दान नहीं कर सकते हैं।
रक्तदान करने के बाद अगर आप सेहतमंद खुराक न लेकर तरल पदार्थ लेते रहेंगे, तो इससे आपको कमजोरी महसूस होगी।
-एक बार में किसी के शरीर से भी 471एमल से ज्यादा रक्त नहीं लिया जा सकता।
लोगों को गलतफहमी होती है कि रक्तदान करने से हीमोग्लोबिन में कमी आती है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है।
-कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। बात करें पुरुष की तो वह 3 माह में एक बार रक्तदान कर सकते हैं वहीं महिलाएं 4 माह में एक बार रक्तदान कर सकती हैं।

अपने कर्मियों को क्रेडिट कार्ड की तरह हेल्थ कार्ड जारी करेगी रेलवे

नयी दिल्ली : रेलवे ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को क्रेडिट कार्ड के जैसा हेल्थ कार्ड जारी करने का फैसला किया है। इन कार्डों पर विशिष्ट नंबर अंकित होगा जो पूरे देश में मान्य होगा। फिलहाल रेल कर्मचारियों को जोनल रेलवे से जो मेडिकल कार्ड जारी किया जाता है वह बुकलेट के आकार में होता है और राशन कार्ड की तरह दिखता है।
रेलवे बोर्ड ने जारी किया आदेश
रेलवे बोर्ड द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है कि भारतीय रेल के कर्मचारियों और उनके आश्रितों को आखिल भारतीय मेडिकल आइडेंटिटी कार्ड जारी किए जाएंगे। इस आदेश के अनुसार मेडिकल आइडेंटिटी कार्ड में एकरूपता लाने के लिए उसे बैंकों द्वारा मुहैया कराए जाने वाले क्रेडिट/डेबिट कार्ड के आकार में जारी किया जाएगा और वह प्लास्टिक का होगा। प्रत्येक कार्ड के सबसे ऊपर एक रंगीन पट्टी होगी, जिसकी मदद से लाभार्थी की श्रेणी (कार्यरत, सेवानिवृत्त या आश्रित) का पता लगाया जा सकेगा।

पांच साल की होगी वैधता
बोर्ड के आदेश में कहा गया है कि 15 वर्ष तक के लाभार्थियों को जारी किए जाने वाले मेडिकल कार्ड की वैधता पांच साल की होगी। यह अवधि खत्म होने के बाद उसका नवीनीकरण करना होगा। पंद्रह वर्ष से अधिक उम्र वाले लाभार्थियों को जारी कार्ड उसके 40 वर्ष तक का होने तक वैध रहेगा। इसके बाद उसे रिन्यू कराना होगा। इस मामले में सेवानिवृत्ति के बाद कार्ड को फिर रिन्यू करना होगा। बता दें कि इस समय रेलवे में 13 लाख कर्मचारी हैं, जबकि पेंशनभोगियों की संख्या भी लगभग इतनी ही है।

रेलवे के किचन में कैसे बन रहा है खाना, ट्रेन में बैठे-बैठे देखिए लाइव वीडियो

नयी दिल्ली : भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्री अब देख पाएंगे कि रेलवे में खाना कितनी साफ सफाई से बनाया जा रहा है। रेल मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि अब बेस किचन में बनने वाले खाने और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं की लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग की जाएगी ताकि लोग देख सकें कि खाना कितनी साफ सफाई से बनाया जा रहा है। यह कदम रेलवे के खाने की लगातार बढ़ रही शिकायतों के बाद उठाया गया है।
पीयूष गोयल ने कहा, ‘यात्री आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर जाकर लाइव स्ट्रीमिंग देख पाएंगे। हम एक ऐप बना रहे हैं जिससे यात्री सफर करते वक्त रेलवे में बन रहे खाने पर नजर रख पाएंगे।’ रेलवे द्वारा यात्रियों के सफर को सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए ये कदम उठाया गया है। बता दें कि विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए बिजली मंत्री रहने के दौरान भी गोयल ने कई नए विचार लागू किए थे। वहीं इस पहल के तहत अब तक आईआरसीटीसी के 200 बेस किचन में से 16 में कैमरे लगाने का काम पूरा किया जा चुका है। इनमें दिल्ली, मुंबई और भुवनेश्वर के किचन शामिल हैं।
गोयल का यह विचार एआई (आर्टिफिशल इंटेलिजेंस) विजन डिटेक्शन सिस्टम और आईआरसीटीसी की तरफ से एक नया मॉड्यूल विकसित करने के तहत लागू किया गया है। एआई का यह मॉड्यूल एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रॉसिजर) के जरिए कैमरा फुटेज में कैद हुई किसी भी चीज को बारीकी से पकड़ सकता है। यह कार्य विजन कम्प्यूटिंग मशीन की मदद से किया जाएगा। इसमें फोटो और वीडियो फुटेज की तुलना की जाती है। इस प्रक्रिया के जरिए आईआरसीटीसी की किचन में होने वाली किसी भी गलती को तुरंत पकड़ा जा सकेगा। मान लीजिये अगर कोई शेफ या रसोई पर्यवेक्षक बिना वर्दी के काम कर रहा है तो यह एआई सिस्टम उस पर भी नजर रखेगा और तुरंत इस बात की रिपोर्ट कॉनट्रेक्टर तक पहुंचा देगा। यदि यह मामला निश्चित समय के भीतर नहीं उठाया जाता तो इस बारे में आईआरसीटीसी के अधिकारियों को सूचित किया जाएगा।

अब विश्वविद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए पीएचडी अनिवार्य: प्रकाश जावडेकर

नई दिल्ली : अब विश्वविद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए पीएचडी की डिग्री अनिवार्य होगी। क्योंकि सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध को बढ़ावा और गुणवत्ता में सुधार के लिए पहली बार कॉलेज और यूनिवर्सिटी शिक्षकों की भर्ती में अलग नियम व मापदंड बनाए हैं। खास बात यह है कि एपीआई में बदलाव किया है, जिसमें अब कॉलेज शिक्षकों को प्रमोशन के लिए रिसर्च नहीं करनी पड़ेगी, बल्कि उनका काम छात्रों को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाना है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर के मुताबिक, वर्ष 2021-22 सत्र से यूनिवर्सिटी में अस्सिटेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए पीएचडी अनिवार्य होगी। जबकि कॉलेजों में पहले की भांति नेट और मॉस्टर डिग्री के आधार पर शिक्षक बन सकते हैं। लेकिन यदि कॉलेज में अस्सिटेंट प्रोफेसर पद पर तैनात शिक्षक को प्रमोशन (एसोसिएट प्रोफेसर बनना) चाहिए होगी तो पीएचडी जरूरी होगी। इसके अलावा यदि कोई कॉलेज शिक्षक यूनिवर्सिटी में जाकर सेवा देना चाहता होगा तो भी पीएचडी की डिग्री अनिवार्य रहेगी।ओलंपिक, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स के मेडल विजेताओं के लिए विशेष वर्ग बनाया गया है, जिसमें अस्सिटेंट डायरेक्टर / कॉलेज डायरेक्टर, फिजिक्ल एजुकेशन, स्पोट्र्स और डिप्टी डायरेक्टर, फिजिकल एजुकेशन के तहत भर्ती होंगी।

खास बातें – 

. देशभर के विश्वविद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए एक जुलाई 2021 से पीएचडी अनिवार्य होगी।
. कॉलेजों में पहले की तरह मास्टर डिग्री के साथ नेट या पीएचडी के तहत शिक्षक बन सकते हैं।
. यूनिवर्सिटी शिक्षक की प्रमोशन के दौरान रिसर्च और कॉलेज शिक्षक को बेहतरीन पढ़ाई को आधार बनाया जाएगा।
. एपीआई में बदलाव किया गया है, अब शिक्षकों का मूल्यांकन ग्रेडिंग सिस्टम से होगा जबकि यूनिवर्सिटी शिक्षक को रिसर्च के आधार पर स्कोर मिलेगा।
.दुनिया की टॉप पांच सौ सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से पीएचडी धारक सीधे यूनिवर्सिटी या कॉलेज स्तर पर अस्सिटेंट प्रोफेसर पद पर भर्ती हो सकते हैं।
– यूनिवर्सिटी या कॉलेज स्तर पर अस्सिटेंट प्रोफेसर पर नए भर्ती होने वाले शिक्षकों को एक महीने का इंडेक्शन प्रोग्राम के तहत ट्रेङ्क्षनग लेनी अनिवार्य होगी।
– यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को सिर्फ शोधकार्यो पर फोकस करना है, जिसमें एमफिल और पीएचडी छात्रों को बेहतरीन शोध करवाने में मदद करनी है। जबकि कॉलेज स्तर के शिक्षकों अपने पसंद से शोध में भाग ले सकते हैं, लेकिन अनिवार्य नहीं होगा। उनका काम पढ़ायी, छात्रों को अधिक से अधिक विषयों समेत कोर्स से जोडना रहेगा। इसके अलावा छात्र की ओवरऑल पर्सानालिटी डेवलेपमेंट में बढ़ावा देना शामिल है।

धोखेबाज एनआरआई पतियों की संपत्ति और पासपोर्ट जब्त करेगी सरकार

नयी दिल्ली : भारत सरकार देश की लड़कियों से शादी करके विदेश भाग जाने वाले अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) पुरुष पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार कानून में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार जानबूझकर कोर्ट की कार्यवाही को नजरअंदाज करने वाले एनआरआई पतियों की संपत्ति को जब्त करने के लिए कानून में बदलाव करेगी। जिसकी वजह से ऐसा करने वाले पतियों पर कोर्ट के समन का जवाब देने के लिए दबाव बनाया जा सकेगा।
बहुत से मामले सामने आने के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है। खासतौर से पंजाब में एनआरआई लड़के -लड़कियों से एक बेहतरीन जीवन देने का वादा करते हुए शादी करते हैं लेकिन बहुत जल्द महिला को छोड़कर विदेश भाग जाते हैं। मंत्रियों के एक समूह ने ऐसे पतियों पर कानूनी कार्रवाई करने और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए कुछ संभावित उपाय सुझाए हैं। इन उपायों में विदेश मंत्रालय द्वारा एक वेबसाइट का निर्माण करना शामिल है जिसके जरिए एनआरआई पतियों को कोर्ट का समन दिया जाएगा।

इस वेबसाइट पर पति के खिलाफ समन डाला जाएगा और यह माना जाएगा कि आरोपी ने उसे स्वीकार कर लिया है। इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए कानून में कुछ जरूरी संशोधन भी किए जाएंगे। यदि कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहा पति समन जारी होने के बाद भी कोर्ट में पेशी के लिए नहीं आया तो उसे भगोड़ा घोषित कर दिया जाएगा। ऐसे अपराधियों से निपटने के लिए जो दूसरे देश चले जाते हैं या फिर कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अपनी पहचान बदल लेते हैं उनके पासपोर्ट को रद्द कर दिया जाएगा।

आरोपी एनआरआई की पैतृक संपत्ति को तब तक के लिए जब्त कर लिया जाएगा जब तक कि वह अदालत में पेश नहीं हो जाता। इसके अलावा एनआरआई को शादी के 48 घंटे के अंदर पंजीकृत करवाना होगा। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें विदेश में रहने वाले लड़के शादी के बाद अपनी पत्नी को भारत में ही छोड़कर जाते हैं।

सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों से निपटेगी बंगाल सरकार , बनेगा नया कानून

कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों और पोस्ट की समस्या से निपटने के लिए एक नए कानून पर काम कर रही है। देश के कई हिस्सों में ऐसे पोस्टों से हो रही परेशानियों और अशांति की पृष्ठभूमि में यह कदम सामने आया है। गृह विभाग के एक अधिकारी ने पीटीआई – भाषा को बताया कि राज्य सरकार की मंशा है कि समाज में शांति एवं सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या घृणा पैदा करने के उद्देश्य से फर्जी खबरें फैलाने वालों और तस्वीरों को छेड़छाड़ कर उन्हें पोस्ट करने के जिम्मेदार लोगों के अपराध और सजा की प्रकृति पर अधिक स्पष्टता लाई जाए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार नया कानून बनाते हुए अपराधियों के रिकॉर्ड रखने के अलावा पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल तथा देश के अन्य हिस्सों में सोशल मीडिया पर फैली फर्जी खबरों पर एक डेटा बैंक तैयार कर रही है। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में फर्जी खबरें फैलने की कई रिपोर्टों के बाद नया कानून तैयार किया जा रहा है। शिलॉन्ग , झारखंड में गोड्डा और असम के कार्बी आंगलोंग जिले में हाल में हुई घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। अधिकारी ने कहा कि सोशल नेटवर्किंग साइटों पर फर्जी खबरों और तस्वीरों को तोड़ – मरोड़ कर पोस्ट करने के बड़े असर हो सकते हैं। इससे लोगों के बीच अशांति पैदा हो सकती है तथा इससे निपटने के लिए सख्त कानून की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल में जनता के बीच डर या चिंता पैदा करने या अपराध करने की मंशा से ऐसे पोस्ट डालने वाले लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 505 (1)(बी) के तहत मामला दर्ज किया जाता है। नया कानून बनाने की प्रक्रिया में सरकार पश्चिम बंगाल पुलिस की सहायता भी ले रही है। अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने कई पेड टि्वटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट की पहचान की है जिनका ऐसे पोस्टों के लिए अलग – अलग तरीके से लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा , ‘‘ उन्होंने इसकी भी पहचान की है कि फर्जी टि्वटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट चलाने वालों और फर्जी खबरें , तस्वीरें तथा लेख साझा करने वाले लोगों का कैसे विभिन्न माध्यमों से वित्त पोषण किया जाता है। ’’

शतरंज चैंपियन सौम्या स्वामीनाथन ने हिजाब के विरोध में छोड़ी एशियन चैंपियनशिप

पुणे : भारत की महिला शतरंज खिलाड़ी सौम्या स्वामीनाथन (29) ईरान के हमदान में 26 जुलाई से 4 अगस्त तक चलने वाले एशियन टीम शतरंज चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं लेंगी। सौम्या भारत की नंबर 5 महिला शतरंज खिलाड़ी हैं। सौम्या ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा है कि वह इस चैंपियनशिप में इसलिए हिस्सा नहीं लेंगी क्योंकि उन्हें इस्लामिक देश ईरान में हिजाब पहनने को कहा जाएगा। बता दें ईरान में हिजाब और स्कार्फ पहनने का नियम महिलाओं के लिए अनिवार्य है। सौम्या का मानना है कि उन्होंने यह फैसला अपने निजी अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए लिया है।
सौम्या ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘मैं जबरदस्ती स्कार्फ या बुरखा नहीं पहनना चाहती। मुझे लगता है कि ईरान के स्कार्फ पहनने के कानून से मेरे मूलभूत मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है। साथ ही इस कानून से मेरी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विचार, विवेक और धर्म की सुरक्षा का भी उल्लंघन होता है। ऐसी परिस्थिति में मेरे पास एक ही रास्ता है कि मैं ईरान ना जाऊं।’
पहले भी कई खिलाड़ी ले चुके हैं ऐसा फैसला
इससे पहले साल 2016 में इसी वजह से टॉप भारतीय शूटर हिना सिद्धु ने भी ईरान में आयोजित एशियाई एयरगन बैठक में जाने से मना कर दिया था। सौम्या ने आगे लिखा कि ‘मैं यह देखकर बहुत निराश महसूस कर रही हूं कि इस तरह की चैंपियनशिप आयोजित करते वक्त खिलाड़ियों के अधिकारों और कल्याण को बहुत कम महत्वपूर्ण माना जाता है।’ सौम्या का कहना है कि जब भी वह राष्ट्रीय टीम में चुनी जाती हैं और भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं तो वह बेहद गौरवान्वित महसूस करती हैं। सौम्या ने कहा कि उन्हें इस बात का बहुत अफसोस है कि वह इस तरह के एक महत्वपूर्ण चैंपियनशिप में भाग नहीं ले पाएंगी। सौम्या का मानना है कि एक खिलाड़ी खेल को अपनी जिंदगी में सबसे सबसे पहले रखता है लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं जिनसे समझौता नहीं किया जा सकता।’

ऐसा ही एक फैसला शतरंज खिलाड़ियों में यूक्रेन की बहने अन्ना और मारिया ने भी किया था। उन्होंने मानवाधिकार और लिंग समानता का उल्लंघन मानते हुए सऊदी अरब में टूर्नामेंट खेलने से इंकार कर दिया था। फिलहाल पांच सदस्यीय महिला टीम में शेष सदस्यों की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है।

भावना कंठ के बाद एक और बेटी ‘अद्विका झा’ उड़ाएगी फाइटर प्लेन

मधुबनी : देश में बेटियां परचम लहरा रही हैं। अपनी लगन और मेहनत से बिहार का नाम लगातार रौशन हो रहा है। अब एक और बेटी ने अपने बिहार का नाम रौशन किया है। बिहार के मधुबनी जिले के लखनौर प्रखंड स्थित उमरी गांव की बेटी अद्विका झा ने कुछ ऐसा काम किया है कि पढ़कर आपको भी फक्र होगा। अद्विका की लगन और मेहनत रंग लायी है और अब वह एक पायलट बनेगी।
भावना कंठ के बाद अद्विका बिहार की दूसरी महिला है जो फाइटर प्लेन उड़ाएगी। आर्मी और बीएसएफ की तरह इंडियन एयरफोर्स भी अब बेटियों को दुश्मन के विरुद्ध और खतरनाक बनाना चाहता है। ताकि दुश्मन भी भारतीय बेटियों की ताकत को जान ले। इसके लिए एयरफोर्स ने महिला फ्लाइंग अफसरों के हाथ लड़ाकू विमानों की कमान सौंपने का काम शुरू कर दिया है।

शुरुआत तो फ्लाइंग अफसर अवनी चतुर्वेदी से हो चुकी है, लेकिन इसी कड़ी में इंडियन एयरफोर्स में भावना कंठ के बाद अद्विका ने भी इतिहास रच दिया है। अभी फ्लाइंग अफसर भावना अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में तैनात है और उसने अंबाला एयरबेस से ही मिग-21 बिसन एयरक्राफ्ट में उड़ान भरी थी। ये जांबाज बेटी इस लड़ाकू विमान में 30 मिनट तक आसमान में रही तो अद्विका डेढ़ साल के प्रशिक्षण के बाद भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट और मालवाहक प्लेन को उड़ाते दिखेगी। अद्विका का चयन भारतीय वायुसेना के शॉर्ट सर्विस कमीशंड फॉर वीमेन कोर्स में पायलट के लिए हुआ है।

जुलाई से हैदराबाद स्थित वायुसेना अकादमी में अद्विका का प्रशिक्षण शुरू होगा। प्रशिक्षण के डेढ़ साल बाद वह फाइटर प्लेन उड़ाकर दुश्मनों होश ठिकाने ला देगी। अद्विका डॉ अजय कुमार की बेटी हैं। वह दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय में प्रवक्ता पद पर हैं। जबकि उनकी मां एक गृहिणी हैं।

अद्विका ने बीटेक की पढ़ाई पूरी की है। उसने दिल्ली के केंद्रीय विद्यालय से 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा पास की। भारतीय वायुसेना में पायलट के लिए चुने जाने के बाद अद्विका काफी खुश है। अब अद्विका को उस दिन का इंतजार है जब देश के दुश्मनों को वह धुल चटाएगी। अद्विका को खुशी है कि उसे वायुसेना के जरिए देश की सेवा करने का मौका मिला है।

बढ़ी 23 लाख सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन

नयी दिल्ली : केंद्र सरकार ने 23 लाख से अधिक विश्वविद्यालयों व कॉलेजों से सेवानिवृत्त शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे दिया है। सरकार ने इनकी पेंशन में 18 हजार रुपये तक का इजाफा कर दिया है। इन शिक्षक-गैर शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग का लाभ दिया गया है। सरकार के इस फैसले से केंद्रीय विश्वविद्यालयों व यूजीसी के आधीन डीम्ड विश्वविद्यालयों के 25 हजार पेंशनरों को फायदा पहुंचेगा। इसके अलावा राज्यों के उन विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को भी इसका लाभ मिलेगा, जिनके यहां पर सातवां वेतन आयोग लागू हो चुका है। इसमें आठ लाख शिक्षक व 15 लाख गैर-शिक्षक कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने खुद सरकार के इस फैसले की जानकारी ट्विटर के माध्यम से दी।