बागपत : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे को आज जनता को समर्पित किया। इस एक्सप्रेसवे का मुख्य मकसद दिल्ली में जाम और प्रदूषण की समस्या से निपटना है। इससे अब भारी वाहन दिल्ली में प्रवेश के बिना बाहर – बाहर से अपने गंतव्य को जा सकेंगे। इस मौके पर बुनियादी ढांचा विकास को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताते हुए मोदी ने कहा कि देश में 28,000 किलोमीटर राजमार्गों का जाल फैलाने पर तीन लाख करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि राजमार्ग , रेलवे , हवाई यातायात और आई – वे (सूचना हाईवे) उनकी सरकार की प्राथमिकता है। मोदी ने कहा कि देश में राजमार्ग निर्माण की गति अब 27 किलोमीटर प्रतिदिन पर पहुंच गई है जो पिछली कांग्रेस सरकार में 12 किलोमीटर थी। जबकि पिछले साल करीब 10 करोड़ लोगों ने हवाई यात्रा की। ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे की लंबाई 135 किलोमीटर है और इसे 500 दिन के भीतर तैयार किया गया है।
बच्चों से मिलने की अधूरी चाह लिए अभिनेत्री गीता कपूर ने कहा अलविदा
मुम्बई : फिल्म पाकीजा में राजकुमार की दूसरी पत्नी का किरदार निभाने वाली गीता कपूर ने गत शनिवार की सुबह दुनिया को अलविदा कह दिया। बताया जा रहा है कि उन्होंने सुबह 9 बजे वृद्धाश्रम में आखिरी सांस ली। उनकी मौती की खबर की पुष्टि प्रोड्यूसर अशोक पंडित ने अपने ट्वीटर हैंडल पर की है। उन्होंने गीता कपूर का एक वीडियो अपलोड किया है, जिसमें उनका शव नजर आ रहा है। इतना ही नहीं अशोक पंडित ने गीता की मौत की खबर देते हुए ट्वीट भी किया है। उन्होंने लिखा, ’57 साल की गीता कपूर के पार्थिव शव के पास खड़ा हूं, जिन्हें एक साल पहले उनके बच्चे एसआरवी असपताल में छोड़ कर चले गए थे। ओल्ड एज होम में उन्होंने आज अपनी आखिरी सांस ली। हमने उनका काफी ख्याल रखने की कोशिश की, लेकिन बेटे और बेटी का इंतजार उन्हें दिन प्रतिदन कमजोर बना रहा था।’
इतना ही नहीं अशोक ने कहा- पिछले एक साल से वह अपने बच्चों का इंतजार कर रही थीं, लेकिन कोई उनसे मिलने नहीं आया। पिछले शनिवार हमने उन्हें खुश करने के लिए एक ब्रेकफास्ट अरेंज किया था। वह ठीक थीं, लेकिन खुश नहीं थीं। वह बस अपने बच्चों को देखना चाहती थीं। और इसी आखिरी ख्वाहिश के साथ उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
बुकिंग से 24 घंटे के भीतर फ्लाइट टिकट कैंसिल करने पर कोई चार्ज नहीं
नई दिल्ली : हवाई सफर करने वाले अब बिना किसी शुल्क के 24 घंटे के भीतर टिकट कैंसिल कर सकते हैं। हालांकि शर्त यह है कि फ्लाइट की उड़ान के निर्धारित समय में 4 घंटे का समय बाकी होना चाहिए।
हवाई सफर करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। विमानन मंत्रालय द्वारा दिए गए प्रस्ताव के मुताबिक यदि कोई यात्री टिकट बुकिंग करने के 24 घंटे के भीतर ही टिकट कैंसिल करता है, तो उसे कोई शुल्क नहीं देना होगा। हालांकि शर्त यह हैं कि फ्लाइट की उड़ान के निर्धारित समय में 4 दिन बाकी होने चाहिए। विमानन मंत्री जयंत सिन्हा ने ये जानकारी दी। साथ ही पैसेंजर चार्टर का ड्राफ्ट जारी करते समय सरकार ने ये भी कहा कि कैंसिलेशन फीस किसी भी हालत में बेस फेयर से ज्यादा नहीं होना चाहिए। डीजीसीए के डीजी बीएस भुल्लर ने कहा कि पहले ट्रेवल एजेंट की कैंसिलेशन फीस बेस फेयर से ज्यादा होती थी। नए चार्टर के मुताबिक ये फीस एजेंट की कैंसिलेशन फीस मिलाकर भी बेस फेयर से ज्यादा नहीं होगी।
इस बारे में बात करते हुए एविएशन सेक्रेटरी आर एन चौबे ने कहा कि ये ड्राफ्ट 1 महीने में तैयार हो जाएगा। इसके अलावा फ्लाइट में वाईफाई के सवाल पर चौबे ने कहा कि टेलीकॉम मंत्रालय एक हफ्ते के भीतर लाइसेंस की शर्तों पर फैसला करेगा। यात्री 2 महीने के भीतर फ्लाइट में वाईफाई की सुविधा का उपयोग कर सकेंगे।
नए नियमों के मुताबिक अगर मूल शेड्यूल से 24 घंटे पहले फ्लाइट की देरी की जानकारी दी जाती है और फ्लाइट 4 घंटे से ज्यादा लेट है, तो एयरलाइंस को यात्री को टिकट का पूरा रिफंड देने का विकल्प देना होगा। अगर फ्लाइट देरी के कारण अगले दिन उड़ती है, तो यात्रियों को फ्री में होटल की सुविधा देनी होगी। अगर फ्लाइट लेट होने के कारण यात्री की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट जाती है तो एयरलाइंस को पेनल्टी देनी होगी। ये पेनल्टी 20 हजार रुपए तक हो सकती है।
पहली बार सरकार ने टारमेक (tarmac) का नियम लागू किया है। अगर किसी कारण से फ्लाइट 2 घंटे से ज्यादा खड़ी रहती है यात्रियों को फ्लाइट से उतारना होगा। अगर फ्लाइट 1 घंटे से ज्यादा खड़ी रहती है तो एयरलाइंस को यात्रियों को खाने-पीने का सामान देना होगा। इसके अलावा ड्राफ्ट में प्रस्ताव है कि दिव्यांग के लिए फ्लाइट में पर्याप्त लेग स्पेस के साथ ही फ्री रिजर्व सीट भी होना चाहिए। वहीं दूसरी ओर एयरलाइंस इस तरह के बदलाव का विरोध कर रही थी। आपको बता दें कि अभी ये विमानन मंत्रालय का प्रस्ताव हैं, इस प्रस्ताव पर जनता के सुझावों के लिए 30 दिन तक का समय दिया गया है। इस प्रस्ताव पर फैसला 15 जुलाई तक लिया जा सकता है।
दीपिका पादुकोण बनेंगी बॉलीवुड की पहली ‘सुपरवुमन’
नई दिल्ली : बॉलीवुड की पद्मावती दीपिका पादुकोण ने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ में अभिनय से यह साबित कर दिया था कि वह बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्री हैं और उन्हें टक्कर देना मुश्किल है। जिसके बाद दीपिका के फैंस बेसब्री से उनकी अगली फिल्म का इंतजार कर रहे हैं।
वही सूत्रों के मुताबिक दीपिका जल्द ही महिला सुपरहीरो फ्रैंचाइजी में काम करने वाली हैं। बताया जा रहा है कि यह बॉलीवुड की पहली फिल्म होगी जिसमें किसी महिला को सुपरवुमन के किरदार में देखा जायेगा। अगर ऐसा होता है कि यह बॉलीवुड की पहली फीमेल सुपरहीरो फिल्म होगी और इसका बजट बॉलीवुड की अब तक की फिल्मों में सबसे ज्यादा होगा।
अंग्रेजी अखबार ने इस बात का खुलासा किया है कि दीपिका ने जो फिल्म साइन की है उसकी तैयारी वो अभी से करने लगी हैं। दीपिका मार्शलआर्ट्स का प्रशिक्षण लेने की योजना बना रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म में दीपिका पादुकोण का करेक्टर हॉलीवुड फिल्म ‘वंडर वुमन’ से प्रेरित है। फिलहाल फिल्म का बजट 300 करोड़ बताया जा रहा है और फिल्म में कई निवेशक निवेश कर रहे हैं।
बता दें कि दीपिका ने हॉलीवुड में अपना डेब्यू विन डीजल के साथ फिल्म ट्रिपल एक्स: द रिटर्न ऑफ जेंडर कैग से किया था। कहा जा रहा है कि दीपिका जल्द ही एक और हॉलीवुड फिल्म साइन करने वाली हैं। दीपिका और इरफान डायरेक्टर विशाल भारद्वाज की अगली फिल्म की शूटिंग शुरू करने वाले थे, लेकिन इरफान की तबीयत खराब होने के बाद इस फिल्म की शूटिंग कैंसल हो गई इसके बाद अब दीपिका हॉलीवुड फिल्मों पर ध्यान दे रही हैं।
‘कैंसर को लाइलाज बीमारी समझना गलत : मनीषा कोइराला
नई दिल्ली : एम्स में पहली बार पर्यावरणीय, व्यावसायिक कारणों पर दो दिवसीय सम्मेलन शुरू हुआ। इंडियन सोसायटी ऑफ क्लीनिकल आंकोलॉजी की ओर से आयोजित इस सम्मेलन के पहले दिन फिल्म अभिनेत्री मनीषा कोइराला भी शामिल हुई। वह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से उबर चुकी हैं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने अपने अनुभव बताए। उन्होंने कहा कि कैंसर को लाइलाज न समझें। कैंसर से बचाव के लिए जीवन में पांच चीजें अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कैंसर को लेकर लोगों के मन में गलत धारणा है। लोग सोचते हैं कि कैंसर मतलब लाइलाज बीमारी, जबकि यह ठीक हो सकती है। दिक्कत यह है कि इस बीमारी से उबरकर दोबारा जीवन शुरू करने वाले बहुत कम लोग सामने आकर बोलने को तैयार होते हैं। मुझे हुई परेशानी के बारे में लोग जानते हैं, पर मेरा मानना है कि इससे कुछ अच्छा भी हुआ, जिसे कोई नहीं जानता। पहले मैं हर छोटी परेशानी से अवसाद में चली जाती थी, पर अब लगता है कि किसी भी समस्या से निपट सकती हूं। इस बीमारी के बाद महसूस हुआ कि जीवन शैली ठीक नहीं थी।
12 बच्चों की मां ने 89 साल की उम्र में ली स्नातक की डिग्री
लिंचबर्ग : उत्तरी कैरोलिना के ग्रामीण क्षेत्र में पैदा हुईं 12 बच्चों की मां एला वॉशिंगटन ने 89 वर्ष की उम्र में स्नातक की डिग्री हासिल की है। कुछ साल पहले एला ने वर्जीनिया के लिंचबर्ग में लिबर्टी विश्वविद्यालय में दाखिला लेने का फैसला किया। लिबर्टी विश्वविद्यालय ने कहा कि अंततः एला स्नातक स्तर पर चली गईं, उन्होंने पिछले शनिवार को अपनी स्नातक की डिग्री ग्रहण की। लिबर्टी विश्वविद्यालय के 2018 बैच की सबसे उम्रदराज स्नातक एला ने कहा कि शिक्षा आपको अपने लिए और आपके आने वाले लोगों के जीवन को सर्वश्रेष्ठ बनाने में मदद करती है।
छठी कक्षा में छोड़नी पड़ी थी पढ़ाई
परिवार के खेतों में काम करने के लिए एला को छठी कक्षा में स्कूल छोड़ना पड़ा था। जब उसने परिवार शुरू किया तो वह वॉशिंगटन डीसी चलीं गईं। वहां परिवार पालने के लिए उन्होंने विभिन्न प्रकार की नौकरियां कीं। पेंटागन में एक संरक्षक से लेकर एक वयस्क डेकयर में नर्सिंग सहायक तक। एला ने किसी न किसी तौर पर अपने अधिकांश जीवन में काम किया। एला ने पूर्णकालिक नौकरी के दौरान 12 बच्चों को पालन-पोषण किया। परंतु पढ़ाई के प्रति उनका लगाव कभी कम नहीं हुआ।
पढ़ाई के प्रति कभी कम नहीं हुआ लगाव
एला की बेटी एलेन मिशेल ने लिबर्टी विश्वविद्यालय को बताया कि एक बहुत की कम पढ़ी लिखी अश्वेत महिला के लिए वॉशिंगटन डीसी आने के बाद अधिक अवसर नहीं थे। लेकिन उन्होंने बहुत अधिक मेहनत की, उन्होंने वो सबकुछ किया जो भी वो हमारा पालन-पोषण करने के लिए कर सकतीं थीं। इस दौरान उन्होंने सभी बच्चों की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया। मिशेल ने कहा, वह हमेशा एक आजीवन शिक्षार्थी रहीं हैं। सीखने और शिक्षा के लिए उनकी इच्छा एक पारिवारिक परंपरा बन गई।
2012 में लिबर्टी विश्वविद्यालय में दाखिला लिया
49 साल की उम्र में जब एला अपनी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम हुईं तो 1978 में उन्होंने जीईडी डिप्लोमा प्राप्त करने के लिए एक वयस्क शिक्षा कार्यक्रम में दाखिला लिया। चौबीस साल बाद, वह फिर से अपनी पढ़ाई कर रहीं थीं। 83 वर्ष की उम्र में एला की बेटी मिशेल ने उन्हें सुझाव दिया कि वह कॉलेज में दाखिला लेकर अपने पढ़ाई के लक्ष्य को पूरा करें। उन्होंने 2012 में लिबर्टी विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और अपनी एसोसिएट की डिग्री पूरी की। वह यहीं नहीं रुकीं, वह पहले से ही स्कूल से स्नातक की डिग्री लेने के लिए काम कर रहीं हैं।
अजय की जान बचाने के लिए आरिफ ने रोजा तोड़कर दिया खून
देहरादून : धर्म की आड़ लेकर मानवता को कलंकित करने वालों को देहरादून के आरिफ ने करारा जवाब दिया है। मैक्स अस्पताल में जीवन की जंग लड़ रहे एक युवक को खून देने में जब रोजा आड़े आया तो आरिफ ने खुशी खुशी रोजा तोड़ा और युवक की जान बचा ली। आरिफ खान देहरादून के नालापानी चौक सहस्रधारा रोड में रहते हैं। वे नेशनल एसोसिएशन फॉर पेरेंट्स एंड स्टूडेंट्स (एनएपीएसआर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। आरिफ ने बताया कि हर रोज की तरह शनिवार सुबह, उन्होंने व्हाट्सएप चेक किया। इस दौरान ग्रुप में एक मैसेज आया, जिसमें लिखा था कि उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ निवासी अजय बिजल्वाण पुत्र खीमानंद मैक्स अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। वायरल फीवर के कारण उनकी प्लेटलेट्स पांच हजार से नीचे पहुंच गई। दस दिन पहले भी खून चढ़ाया गया था। बाद में दिक्कत बढ़ने के कारण मैक्स में भर्ती करा दिया गया। अजय का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है। उसे तत्काल खून नहीं मिला तो जान को खतरा हो सकता है। बकौल आरिफ, मैसेज पढ़कर उन्होंने अस्पताल से संपर्क कर खून देने की इच्छा जताई। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि खून देने के बाद उन्हें रोजा तोड़कर नाश्ता करना होगा। इसके बाद आरिफ खान रोजे की परवाह किए बिना अस्पताल पहुंचे और खून देकर अजय बिजल्वाण की जान बचा ली। आरिफ खान का मानव सेवा का यह भाव उन लोगों के सबसे बड़ा सबक है जो धर्म के नाम पर मानवता को पीछे धकेल देना चाहते हैं। सभी वर्गों के लोग आरिफ की सराहना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि रक्तदान सबसे बड़ा दान होता है। आरिफ से और लोगों को भी सीख लेनी चाहिए। आरिफ खान ने बताया कि सबसे बड़ा मानव धर्म होता है। यदि मेरे एक रोजा तोड़ने से एक व्यक्ति की जान बच सकती है तो यह मेरा सौभाग्य है। यही मेरे लिए सबसे बड़ा पुण्य होगा।
गुरसोच कौर बनीं न्यूयॉर्क पुलिस की पहली पगड़ीधारी सिख महिला अफसर
न्यूयॉर्क : भारतवंशी गुरसोच कौर न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (एनवाईपीडी) में सहायक पुलिस अफसर के पद पर नियुक्त होने वाली पहली पगड़ीधारी सिख महिला बन गई हैं। न्यूयॉर्क पुलिस अकादमी से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कौर को यह नियुक्ति मिली है। उम्मीद जताई जा रही है कि गुरसोच की नियुक्ति से अन्य महिलाओं को भी एनवाईपीडी में शामिल होने की प्रेरणा मिलेगी और देश में सिख धर्म के बारे में जागरूकता बढ़ेगी।
फिलहाल न्यूयॉर्क पुलिस में करीब 160 सिख अफसर हैं। एनवाईपीडी ने 2016 में सिख पुलिस कर्मियों को दाढ़ी रखने और पगड़ी पहनने की छूट दे दी थी ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में सिख पुलिस बल की ओर आकर्षित हों। इस कामयाबी के लिए सिख ऑफिसर एसोसिएशन और भारत के शहरी विकास राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कौर को बधाई दी है।
पाकिस्तान में सरकार ने कृष्ण मंदिर के लिए दिए दो करोड़ रुपये
रावलपिंडी : पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने रावलपिंडी में स्थित कृष्ण मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं इसके विस्तार के लिए दो करोड़ रुपये की राशि जारी की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रावलपिंडी और इस्लामाबाद शहरों में केवल कृष्ण मंदिर ही ऐसा है जो श्रद्धालुओं के लिए खुला है। मंदिर में हर दिन सुबह और शाम दो बार आरती की जाती है जिसमें बहुत कम लोग उपस्थित रहते हैं। डॉन ने इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) उप प्रशासक मोहम्मद आसिफ के हवाले से बताया है कि प्रांतीय एसेंबली के एक सदस्य के आग्रह पर सरकार ने दो करोड़ रुपये जारी किए हैं।

अखबार के अनुसार, आसिफ ने बताया कि मंदिर का सौंदर्यीकरण कार्य शीघ्र शुरू होगा। एक टीम ने स्थल का दौरा किया है और कार्य शुरू करने की योजना बताई. जहां पर प्रतिमाएं रखी गयी हैं उस मुख्य कक्ष को सौंदर्यीकरण की समाप्ति तक बंद रखा जाएगा।
आसिफ के हवाले से बताया गया है कि एक बार सौंदर्यीकरण का काम पूरा हो जाएगा तो यहां और लोगों के एकत्र होने के लिए जगह हो जाएगी। अधिकारी ने बताया कि मंदिर में जगह होने से आसपास के दोनों शहरों और नजदीकी इलाकों के श्रद्धालुओं को सुविधा हो जाएगी। कांजी मल और उजागर मल राचपाल ने 1897 में इस मंदिर का निर्माण करवाया था।
सोनम वांगचुक सैनिकों के लिए बना रहे मिट्टी के टेंट, ठंड में खुद से होंगे गर्म
इंजीनियर, खोजी और शिक्षा व्यवस्था में कई सारे काम करने वाले सोनम भारतीय सेना के जवानों को सर्दी से बचाने के लिए काम कर रहे हैं। कश्मीर के लेह और लद्दाख इलाके में काफी ठंड रहती है। सैनिकों को सीमा के पास बंकर बनाने और उन्हें सर्दी से बचाने पर काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। सोनम ने मिट्टी की सहायता से कुछ ऐसे प्री-फैब्रिकेटिड सोलर हीटेड टेंट बनाने के बारे में सोचा जिसमें सैनिकों को ठंड न लगे। सोनम ने अपने प्रॉजेक्ट का प्रोटोटाइप भी तैयार कर लिया है।
सोनम वांगचुक को तो आप जानते ही होंगे। वही, जिनसे प्रेरणा लेकर 3 इडियट फिल्म बनाई गई थी और आमिर खान का किरदार उनसे काफी हद तक प्रभावित था। इंजीनियर, खोजी और शिक्षा व्यवस्था में कई सारे काम करने वाले सोनम ने भारतीय सेना के जवानों को सर्दी से बचाने के लिए काम कर रहे हैं। कश्मीर के लेह और लद्दाख इलाके में काफी ठंड रहती है। सैनिकों को सीमा के पास बंकर बनाने और उन्हें सर्दी से बचाने पर काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। फिर भी सैनिकों को पूरी तरह से सर्दी से राहत नहीं मिलती। सोनम वांगचुक ने एक प्रॉजेक्ट पर काम करना शुरू किया था, जिसे अब भारतीय सेना की फंडिंग मिल रही है।
इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक सोनम ने मिट्टी की सहायता से कुछ ऐसे प्री-फैब्रिकेटिड सोलर हीटेड टेंट बनाने के बारे में सोचा जिसमें सैनिकों को ठंडी न लगे। सोनम ने अपने प्रॉजेक्ट का प्रोटोटाइप भी तैयार कर लिया है। अगर उनका यह मिशन सफल हुआ तो इस क्षेत्र में लगभग 10,000 टेंट बनाने होंगे। इन्हें बनाने के लिए लद्दाख में फैक्ट्री स्थापित की जाएगी और इससे वहां के लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
लेह-लद्दाख क्षेत्र समुद्र तल से 12,000 फीट की ऊंचाई पर पड़ता है। जहां अत्यधिक ठंड पड़ती है। सर्दियों में यहां का तापमान माइनस बीस डिग्री तक पहुंच जाता है। मार्च अप्रैल में भी यहां माइनस पांच तापमान रहता है। लद्दाख क्षेत्र नेशनल पावर ग्रिड से भी नहीं जुड़ा है इसलिए बिजली की सप्लाई छोटे हाइड्रो पावर प्रॉजेक्ट से होती है। इतनी बिजली यहां के लिए नाकाफी होती है। गर्मी पाने के लिए यहां के लोग मिट्टी का तेल या लकड़ियां जलाते हैं। जो कि खर्चीला होने के साथ ही पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है।
जम्मू कश्मीर सरकार के स्टेट स्किल डिपार्टमेंट मिशन के एक समारोह के दौरान वांगचुक ने बताया कि ये सोलर पैसिव स्ट्रक्चर होंगे। यह कोई नई बात नहीं है। नई बात यह है कि इन्हें एक से दूसरी जगह ले जाया जा सकेगा और ये प्री-फैब्रिकेटिड होंगे। इन्हें जरूरत की जगह पर तेजी से असेंबल किया जा सकेगा। इससे आर्मी की शेल्टर से जुड़ी समस्या का हल निकलेगा।
इनकी हीटिंग में कोई खर्च नहीं होगा। माइनस 20 डिग्री तापमान में भी बिना किसी हीट सोर्स के इनके भीतर तापमान 20 डिग्री पर चला जाएगा। वांगचुक ने कहा कि ठंडी जगहों पर बिल्डिंग कॉस्ट 15 साल की हीटिंग के बराबर होती है। उन्होंने कहा कि सेना जवानों को गर्म रखने के लिए कितना तेल जलाती है और इससे कितना प्रदूषण होता है। यह स्थिति बदलने जा रही है। उन्होंने बताया, ‘हम कई प्रोटोटाइप्स पर काम कर रहे हैं। मुझे नहीं पता कि सेना की क्या नीति है, लेकिन उन्होंने इसमें रुचि दिखाई है और उन्होंने प्रोटोटाइप के लिए भुगतान भई किया है।’ सेना वांगचुक के हर प्रोटोटाइप का खर्च उठा रही है।
सोनम ने लद्दाख में माउंटेन विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा भी की है। अगर उनका प्रोटोटाइप को हरी झंडी मिलेगी तो वे अपनी यूनिवर्सिटी में ही टेंट बनाने की फैक्ट्री लगाएंगे और बच्चों को लाइव उदाहरण देकर सिखाएंगे। उनका कहना है कि बच्चों को वास्तविक जिंदगी के अनुभवों से सिखाना चाहिए। उनकी यूनिवर्सिटी में बच्चों को ऐसे ही पढ़ाया जाएगा। वांगचुक ने अपनी यूनिवर्सिटी बनाने के लिए पैसे जुटाने का अभियान भी शुरू कर दिया है। उन्हें उनके आईस-स्तूप के लिए रोलैक्स अवॉर्ड मिला। इस अवॉर्ड के तहत उन्हें एक करोड़ रुपये भी मिले। उन्होंने बताया कि कई कॉर्पोरेट फर्म से संपर्क करने पर उन्होंने 1.5 करोड़ रुपये इकट्ठा कर लिए हैं।




