नयी दिल्ली : जापान की बड़ी कार कंपनी सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन ने अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स प्लान का खुलासा किया है। सुजुकी मोटर कॉर्प. के चेयरमैन ओसामू सुजुकी ने कहा कि कंपनी अगले माह से भारत में 50 इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की टेस्टिंग शुरू कर देगी। उन्होंने यह बात ग्लोबल मोबिलिटी समिट ‘MOVE’ में कही। इस मौके पर सुजुकी ने अपनी इलेक्ट्रिक कार को शोकेस भी किया। सुजुकी ने कहा कि कंपनी ने टोयोटा मोटर कॉर्प. के साथ मिलकर साल 2020 तक भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल लॉन्च करने का फैसला लिया है। कंपनी अपने गुजरात प्लांट में 2020 से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में यूज होने वाली lithium-ion बैटरी का प्रोडक्शन शुरू कर देगी। ओसामू सुजुकी ने कहा कि मुझे आज यह ऐलान करते हुए खुशी हो रही है कि हम भारत में अगले माह से 50 इलेक्ट्रिक व्हीकल प्रोटोटाइप के रोड रनिंग टेस्ट को शुरू कर देंगे, ताकि इंडियन क्लाइमेट और ट्रैफिक कंडीशन के हिसाब से भारतीय कस्टमर्स के लिए सुरक्षित और आसानी से यूज होने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स डेवलप किए जा सके। सुजुकी ने यह भी कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किए बिना नहीं हो सकता है। इस संबंध में हम भारत सरकार के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। भारत में इलेक्ट्रिक कार के लिए मारुति सुजुकी 2018 वैगनआर को टेस्ट के तौर पर यूज कर सकती है और भारत में लॉन्च होने वाली पहली इलेक्ट्रिक कार भी ऐसी हो सकती है। वैगनआर लंबे समय से भारत में है और इसे नए वर्जन के साथ रिप्लेस किया जाएगा। इसमें कोई शक नहीं है कि पहला वर्जन पेट्रोल इंजन के साथ आएगा।
महिलाओं को दशकों तक सताती है यौन उत्पीड़न की याद
वाशिंगटन : किसी महिला के लिए यौन उत्पीड़न की घटना को भुला पाना आसान नहीं होता है और इस घटना की शिकार महिलाओं के जहन में इसकी यादें दशकों तक बनी रहती हैं।
एक अध्ययन के अनुसार अन्य दुखद घटनाओं और जीवन में उतार-चढ़ाव से संबंधित घटनाओं का सामना करने वाली महिलाओं के विपरीत यौन हिंसा की पीड़ितों के जहन में घटना की अधिक गहन यादें देखी गयीं, जिसे उनके लिए भुला पाना मुश्किल था।
अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय में प्रोफेसर ट्रेसी शोर्स ने कहा कि कुछ हद तक यह आश्चर्य की बात नहीं है कि ये यादें अवसाद और चिंता से संबंधित हैं क्योंकि इन महिलाओं को याद है कि क्या हुआ और वे इसके बारे में बहुत कुछ सोचती हैं।
पत्रिका फ्रंटियर्स इन न्यूरोसाइंस में प्रकाशित अध्ययन में शोर्स ने कहा कि लेकिन इन भावनाओं और विचारों को आमतौर पर पोस्ट ट्रॉमाटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) के साथ जोड़ा जाता है जबकि हमारे अध्ययन में ज्यादातर महिलायें जिन्होंने इन ज्वलंत यादों का अनुभव किया वे पीटीएसडी से पीड़ित नहीं थी, जो आमतौर पर अधिक तीव्र मानसिक और शारीरिक प्रतिक्रियाओं से जुड़े होते हैं।
इस अध्ययन में 18-39 आयु वर्ग की 183 महिलायें शामिल थीं। 64 महिलाओं ने बताया कि वे यौन हिंसा की पीड़िता हैं जबकि 119 ने बताया कि उनका यौन हिंसा का कोई इतिहास नहीं रहा है।
जिन महिलाओं का यौन हिंसा का इतिहास रहा है, उनके जहन में इन घटनाओं की यादें पूरी तरह से थीं और घटना की यादों को स्पष्ट रूप से उनके दिमाग में देखा गया। उन्होंने बताया कि घटना को भूल पाना उनके लिए कठिन रहा है और वे इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं। हाल के इस अध्ययन से संकेत मिलते हैं कि अपने कॉलेज के दिनों में प्रत्येक पांच कॉलेज छात्राओं में से एक यौन हिंसा का सामना करती है।
नक्सलियों से मोर्चा लेंगी महिला कमांडो, सीखेंगी इजरायली मार्शलआर्ट
नयी दिल्ली : आतंकियों और नक्सलियों के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियानों में शामिल विशेष दस्तों में पुरुषों का एकाधिकार नहीं रहेगा। सरकार दुरूह अभियानों में विशेष प्रशिक्षित महिला बलों की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ाएगी। फिलहाल नक्सल प्रभावित इलाकों में विशेष हथियारों से लैस महिला कमांडो टीम स्वात की तैनाती करने का प्रस्ताव है। छत्तीसगढ़ और झारखंड में इस टीम का गठन किया जाएगा। विशेष रूप से आतंकरोधी अभियान के लिए प्रशिक्षित टीम में 36 महिला कमांडो को रखने का प्रस्ताव है। विशेष दस्ते को इजरायली मार्शलआर्ट क्रवमागा की ट्रेनिंग दी जाएगी। इन्हें एके-47 सहित अन्य उपकरण, रायफल, शॉटगन या स्निपर राइफल दी जाती है। यह टीम नक्सल अभियानों का नेतृत्व भी करेगी। गौरतलब है कि दिल्ली में पहली महिलाओं की स्वात टीम अगस्त में बनाई गई थी।
परस्पर सहमति से समलैंगिक यौन संबंध अपराध नहीं : न्यायालय
नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने गुरूवार को एकमत से 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के उस हिस्से को निरस्त कर दिया जिसके तहत परस्पर सहमति से अप्राकृतिक यौन संबंध बनाना अपराध था। न्यायालय ने कहा कि यह प्रावधान संविधान में प्रदत्त समता के अधिकार का उल्लंघन करता है।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने परस्पर सहमति से स्थापित अप्राकृतिक यौन संबंधों को अपराध के दायरे में रखने वाले, धारा 377 के हिस्से को तर्कहीन, सरासर मनमाना और बचाव नहीं करने योग्य करार दिया।
संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा शामिल हैं।
संविधान पीठ ने धारा 377 को आंशिक रूप से निरस्त करते हुये कहा कि इससे संविधान में प्रदत्त समता के अधिकार और गरिमा के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन होता है। न्यायालय ने कहा कि जहां तक एकांत में परस्पर सहमति से अप्राकृतिक यौन कृत्य का संबंध है तो यह न तो नुकसानदेह है और न ही समाज के लिये संक्रामक है।
पीठ ने चार अलग अलग परंतु परस्पर सहमति के फैसले सुनाये। इस व्यवस्था में शीर्ष अदालत ने 2013 में सुरेश कौशल प्रकरण में दी गयी अपनी ही व्यवस्था निरस्त कर दी। सुरेश कौशल के मामले में शीर्ष अदालत ने समलैंगिक यौन संबंधों को पुन: अपराध की श्रेणी में शामिल कर दिया था।
शीर्ष अदालत ने हालांकि अपनी व्यवस्था में कहा कि धारा 377 में प्रदत्त, पशुओं और बच्चों से संबंधित अप्राकृतिक यौन संबंध स्थापित करने को अपराध की श्रेणी में रखने वाले प्रावधान यथावत रहेंगे।
न्यायालय ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 एलजीबीटी के सदस्यों को परेशान करने का हथियार था, जिसके कारण इससे भेदभाव होता है। धारा 377 ‘अप्राकृतिक अपराधों’ से संबंधित है और इसमें कहा गया है कि जो कोई भी स्वेच्छा से प्राकृतिक व्यवस्था के विपरीत किसी पुरूष, महिला या पशु के साथ गुदा मैथुन करता है तो उसे उम्र कैद या फिर एक निश्चित अवधि के लिये कैद जो दस साल तक बढ़ाई जा सकती है, की सजा होगी और उसे जुर्माना भी देना होगा।
ठेला चलाने वाले की प्रोफेसर बिटिया बनी लखपति
नयी दिल्ली : कौन बनेगा करोड़पति में लोग अपने सपने साकार करने आते हैं। शो के तीसरे दिन भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला, जब सीट पर पहुंची पंजाब के अमृतसर की किरन, जो कि पेशे से प्रोफेसर है।
केबीसी के तीसरे एपिसोड में सोमेश सिंह के बाद हॉट सीट पर पहुंची पंजाब की किरन ने बताया कि उनके पिता हाथ का ठेला चलाकर पेड़-पौधे बेचने का काम करते हैं। इससे पहले वो हैंडबैंग बनाने का काम करते थे।
दरअसल, हॉट सीट पर बैठने के बाद किरन ने बताया कि उनके पिता रेडीमेड हैंडबैग बनाने का काम करते थे। लेकिन उनकी नौकरी चली गई। एक महीने तर उन्हें काम नहीं मिला। उस समय किरन काफी छोटी थीं। उनके तीन बहनें और एक भाई है। इस दौरान एक समय ऐसा भी आया जब हमारे पास खाने को भी नहीं था।
ये सब बताते हुए किरन की आंखों में पानी था। अपने पिता के संघर्ष की कहानी बताते हुए उन्होंने बताया कि सर्दी, गर्मी और बरसात में भी राम अपना काम नहीं छोड़ते थे। एक बार तेज बुखार होने के बावजूद वो ठेला चलाकार पेड़-पौधे बेचने गए।
किरन के पिता राज अजोर का कहना था कि मुझे पता था कि अगर मैं काम पर नहीं जाऊंगा तो मेरे परिवार को खाना नहीं मिलेगा। आज उनके चारों बच्चे अच्छी जॉब कर रहे हैं। राम अजोर चाहते थे कि उनका एक बच्चा टीचर बने, जिसे किरन ने पूरा किया है।
फिलहाल किरन पीएचडी कर रही हैं और साथ ही कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नियुक्त हैं। साथ ही वो नेशनल लेवल की जिमनास्ट भी रह चुकी हैं। इसका फायदा उन्हें पढ़ाई के समय मिला है। किरन को इस स्थान पर पहुंचने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा है। उनकी ये कहानी सुनकर आपकी आंखें भी नम हो जाएंगी। बता दें कि किरन शो से 1.25 लाख रुपये लेकर गई हैं। उन्होंने अपनी सभी लाइफलाइन का इस्तेमाल कर लिया था।
2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम को मिला नया रूप
साल 2013 में भयानक प्राकृतिक आपदा झेलने वाला केदारनाथ धाम जल्द ही नए स्वरूप में लोगों के सामने होगा। मंदिर और आसपास के परिसर की मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है और माना जा रहा है कि अक्टूबर तक यह नई सेवाओं के साथ पूरी तरह तैयार हो जाएगा। माना जा रहा है कि अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ के दौरे पर आ सकते हैं। ऐसे में उनके आने से पहले सभी काम पूरे करने के लिए जोर-शोर से कवायद जारी है।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार केदारनाथ की मरम्मत का काम जांचने पहुंचे हैं। धाम में निर्माणाधीन रेप्लिका, रास्तों, पुलों, उद्धव कुंड, भैरव मंदिर और रास्तों आदि का निरीक्षण कर उन्होंने जरूरी निर्देश भी जारी किए हैं।

उन्होंने बताया है कि आने वाले दिनों में यात्रियों की संख्या बढ़ेगी। इसलिए, यात्रियों की सुविधा के लिए सभी काम जल्दी पूरे किए जाएं। यात्रियों की संख्या बढ़ने से राज्य की अर्थव्यवस्था को होने वाले फायदे पर सभी की नजर है।
मुख्य सचिव ने वीआईपी हैलीपेड से मंदिर के रास्ते तक स्थानीय पत्थर बिछाने, मंदिर के बगल में बनाए जा रहे रेप्लिका के मुख्य द्वार पर पारदर्शी शीट लगाने के निर्देश दिए हैं, जिससे लोग आसानी से रेप्लिका को देख सकें।

वहीं, केदारनाथ के लिए दूसरे चरण की हेलिकॉप्टर सेवाएं शुरू हो गई हैं। फिलहाल तीन कंपनियों ने सेवाएं देनी शुरू की हैं। हालांकि, अभी भी केदारनाथ धाम का मौसम पूरी तरह से इसके लिए अनुकूल नहीं हुआ है। पहले चरण में केदारनाथ धाम के लिए 13 कंपनियों ने अपनी सेवाएं दी थी। साल 2013 में बादल फटने और कई दिन की भारी बारिश से आई बाढ़ का असर केदारनाथ धाम और केदार घाटी पर बुरी तरह से पड़ा। हालांकि, मंदिर को खास नुकसान नहीं हुआ लेकिन परिसर में भूस्खलन का मलबा पानी के साथ आ पहुंचा। मंदिर में पानी बुरी तरह से भर गया और आसपास का इलाका बड़े-बड़े पत्थरों से पट गया। कई लोगों की जान मंदिर में फंसे होने के कारण चली गई थी।
(साभार – नवभारत टाइम्स)
फिर से चाय बेच रहे हैं देश को कांस्य पदक दिलाने वाले हरीश कुमार
नयी दिल्ली : एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले हरीश कुमार एक बार फिर अपनी चाय की दुकान पर पहुंचे गए हैं। उनके घर की आजीविका इस चाय की दुनाक पर ही टिकी है।
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में हरीश कुमार ने खुलकर बताया कि उनका परिवार बड़ा है और आय का श्रोत कम है। हरीश ने कहा कि मैं चाय की दुकान पर पिता की मदद करता हूं। इसके साथ ही 2 बजे से 6 बजे तक चार घंटे खेल का अभ्यास करता हूं।उन्होंने कहा कि परिवार के बेहतर भविष्य के लिए अच्छी नौकरी करना चाहता हूं।
याद दिला दें कि हाल ही में देश की तरफ से एशियन गेम्स में खेलते हुए हरीश ने कांस्य पदक जीता था। मेडल जीतने के बाद वे जमीन से जुड़े हुए हैं। या यूं कह लीजिए परिवार के लिए सबकुछ करने के लिए तैयार हैं। खेल से खाली होने के बाद एक बार फिर वे अपने पिता के साथ चाय की दुकान पर हाथ बंटा रहे हैं।
राजनीतिक विज्ञापनों में अधिक पारदर्शिता लाने पर चल रहा है काम: गूगल
नयी दिल्ली : इंटरनेट सर्च इंजन कंपनी गूगल ने गुरुवार को कहा कि वह राजनीतिक विज्ञापनों में “अधिक पारदर्शिता” लाने के उपायों पर काम कर रही है। उसका यह बयान भारत में पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों और अगले वर्ष लोकसभा चुनाव से पहले आया है। प्रौद्योगिकी कंपनियों को उनके सोसल नेटवर्किंग ऐप पर झूठी और फर्जी खबरों को लेकर दुनिया भर में तीखी आलोचानाओं को सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों के लिये राजनीतिक विज्ञापनों के प्रायोजकों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर साझा करने को अनिवार्य बनाने का कानून लाने विचार कर रहा है। कंपनियों को विज्ञापनों पर किये गये खर्च और लक्षित समूह के बारे में भी जानकारी देनी होगी।
गूगल के प्रवक्ता ने पीटीआई-भाषा को बताया, “हम उन उपायों को अतिंम रूप देने में लगे हुये है, जो हमारे प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक विज्ञापनों को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद करेंगे। प्रवक्ता ने कहा कि उपायों पर अभी काम चल रहा है। काम पूरा होने के बाद कंपनी राजनीतिक विज्ञापनों से जुड़ी अधिक जानकारियां साझा कर सकेगी। कंपनी चुनावों को साफ सुथरा बनाये रखने के चुनाव आयोग के प्रयासों का समर्थन करेगी।
गूगल, ट्विटर और फेसबुक के प्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान आगामी चुनावों में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा हुयी। प्रवक्ता ने चुनाव आयोग के साथ वार्ता से जुड़ी जानकारी नहीं दी है। हालांकि, कहा जा रहा है कि गूगल के साथ-साथ फेसबुक और ट्विटर आगामी चुनावों के दौरान राजनीतिक विज्ञापनों और प्रचार सामग्री की निगरानी करने तथा फर्जी खबरों एवं आपत्तिजनक सामग्री को प्रतिबंधित (ब्लॉक) करने पर सहमत हुयी हैं। साथ ही ये कंपनियां मतदान से 48 घंटे यानी दो दिन पहले इस बात को सुनिश्चित करेंगी कि किसी भी तरह के राजनीतिक विज्ञापन पोस्ट न किए जा सकें। मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलगांना में इस वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं जबकि अगले वर्ष लोकसभा चुनाव होंगे।
संयुक्त राष्ट्र की पोस्टल एजेंसी दिवाली पर जारी करेगी विशेष डाक टिकटें
संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र की पोस्टल एजेंसी दिवाली के उत्सव पर अगले महीने विशेष डाक टिकटें जारी करेगी। संयुक्त राष्ट्र पोस्टल एडमिनिस्ट्रेशन भारतीय उत्सव मनाने के लिए 19 अक्तूबर को न्यूयॉर्क विशेष कार्यक्रम शीट जारी करेगा।
एजेंसी ने कहा, ‘‘दीपावली आनंदमय और प्रकाश का लोकप्रिय उत्सव है जिसे कई धर्मों के लोग भारत तथा दुनियाभर में मनाते हैं।’ 1.15 डॉलर मूल्य की शीट में दस डाक टिकटें है जिसमें प्रकाश उत्सव की झलक है और सांकेतिक तौर पर ‘दीये’ भी हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए ट्वीट किया, ‘‘अगले महीने आ रही संयुक्त राष्ट्र की डाक टिकटों के रूप में दिवाली का अच्छा तोहफा।’ अमेरिका की डाक सेवा ने अक्तूबर 2016 में दिवाली उत्सव के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया था ।
अमेजन इंडिया ने नये खरीदार आकर्षित करने के लिए हिन्दी में सेवा शुरू की
नयी दिल्ली : अमेजन इंडिया का ऑनलाइन मार्केटप्लेस अब हिन्दी में भी उपलब्ध होगा। कंपनी का लक्ष्य 10 करोड़ खरीदारों को ऑनलाइन लाना है। अभी प्रतिस्पर्धी कंपनियों फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, पेटीएम मॉल और शॉपक्लूज की वेबसाइट और एप सिर्फ अंग्रेजी में उपलब्ध है। अमेजन को इस देसी संस्करण से हिन्दीभाषी उपभोक्ताओं को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। अमेजन इंडिया के उपाध्यक्ष (श्रेणी प्रबंधन) मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से यहां कहा कि इससे देश में खरीदार अमेजन की खरीदारी का हिन्दी में भी लाभ ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता उत्पाद की जानकारी हिंदी में पढ़ने के साथ ही सौदे एवं छूट खोजना, ऑर्डर करना आदि भी हिन्दी में कर सकेंगे। तिवारी ने कहा, ‘‘हिन्दी में खरीदारी की शुरुआत 10 करोड़ नये उपभोक्ताओं को ऑनलाइन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। किसी भारतीय भाषा में इस तरह की पहली शुरुआत से करोड़ों हिंदीभाषी अपनी पसंदीदा भाषा में खरीदारी कर सकेंगे।’ उल्लेखनीय है कि 2021 तक देश में हिन्दीभाषी इंटरनेट उपयोक्ताओं की संख्या अंग्रेजी उपयोक्ताओं से बढ़ जाने का अनुमान है। इसके अलावा मराठी एवं बंगाली आदि क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोक्ता भी बढ़ेंगे। यह भारतीय ई-कॉमर्स क्षेत्र की वृद्धि के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।




