पुरुष भी अपने लुक को लेकर काफी सजग हो गए हैं। वे जवां दिखाई देने के लिए हर सम्भव कोशिश करने को तैयार हैं। हालांकि, उम्र के असर की निशानियां जैसे लकीरें और झुर्रियां आजकल के पुरुषों को परेशान करती रहती हैं। लेकिन, कुछ पुरुष सर्जरी करवाकर इन्हें हटाना नहीं चाहते। ऐसे लोगों के लिए ही कुछ उपाय हैं जो बेहद असरदार हैं। जानिए ऐसे ही कुछ तरीके –
धूम्रपान से आपके शरीर पर उम्र का असर जल्द दिखायी देने लगता है। धूम्रपान का आपके शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ता है। और यही लक्षण आपकी त्वचा पर भी परिलक्षित होने लगते हैं। जब आपकी त्वचा सिगरेट से निकलने वाले धुएं के संपर्क में आती है,तो उसे काफी नुकसान होता है। यह प्राकृतिक रूप से स्वस्थ त्वचा को नुकसान पहुंचाकर उसकी ऊपरी परत को नष्ट कर देती है। इससे त्वचा को जवां बनाए रखने वाला एलस्टिन प्रोटीन भी खत्म हो जाता है।
धूम्रपान करने से आपके चेहरे पर झुर्रियों का असर जल्द नजर आने लगता है। सिगरेट में मौजूद निकोटिन रक्त कोशिकाओं को सिकोड़ देता है। इससे शरीर में ऑक्सीजन और जरूरी पोषण सही मात्रा में नहीं पहुंच पाते। अगर आप एक स्वस्थ और जवां त्वचा चाहते हैं तो सबसे पहले आपको धूम्रपान से तौबा करनी चाहिए।
नियमित व्यायाम करना आपके शरीर की शक्ति और कार्यक्षमता बढ़ाता है। इससे आपकी त्वचा भी अधिक कसी हुई रहती है। नियमित व्यायाम न करने और असंतुलित जीवनशैली अपनाने से आपके शरीर की कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है और इसका असर उम्र अधिक दिखने के तौर पर सामने आने लगता है। व्यायाम से आपके शरीर में रक्त-संचार सुचारू रूप से होता है। और शरीर के हर अंग को पर्याप्त मात्रा में रक्त मिलता है। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है तो कई बार टांगों और हाथों को पूरी पोषण नहीं मिल पाता।
व्यायाम के दौरान आपके शरीर से पर्याप्त मात्रा में पसीना निकलता है। इस पसीने के जरिये आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इससे शरीर का प्राकृतिक माश्चराइजर सीबम ऑयल भी बाहर निकलता है।
अगर आप भरपूर नींद लेते हैं तो आपको उम्र के असर को दूर रखने में काफी मदद मिल सकती है। अगर आप अच्छी नींद सोते हैं तो आपकी सेहत भी अच्छी रहती है। कोशिश करें कि आपके सोने और उठने का समय एक जैसा हो।
योग और ध्यान के जरिये भी आप उम्र के असर को दूर रख सकते हैं। योग और ध्यान आपको केवल मानसिक रूप से ही शांत नहीं रखते बल्कि आपको शारीरिक रूप से भी मजबूत बनाते हैं। इनसे आपको तनावमुक्त रहने में मदद मिलती है। इससे आपके शरीर में रक्त संचार सुचारू रूप से होता है। इसके साथ ही दिल की बीमारियां, मोटापा और त्वचा की जलन से भी राहत मिलती है। इससे हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती और आप बीमारियों से दूर रहते हैं।
रहिए युवा और दीजिए उम्र को मात
जियोफोन यूजर्स को मिलेंगे गूगल के शानदार ऐप्स
मुम्बई : जियो फीचर फोन करने वाले यूजर्स को जल्द ही गूगल के कई बेहतरीन फीचर्स मिल सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जियो फोन में जल्द ही गूगल असिस्टेंट, गूगल मैप्स, यूट्यूब और गूगल सर्च की ऐप्स आ सकती हैं। दरअसल, जियो फोन में KaiOS का इस्तेमाल किया है और ये ओएस आमतौर पर फीचर फोन में इस्तेमाल किया जाता है। गूगल ने KaiOS बनाने वाली फर्म में 22 मिलियन डॉलर का निवेश किया है और इसी के तहत जियो फोन यूजर्स को गूगल की सर्विस मिल सकती है। KaiOS टेक्नोलॉजी के सीईओ सैबेस्टियन कोडविल ने कहा कि ‘गूगल की फंडिंग की मदद से हमें तेजी फास्ट-ट्रैक डेवलपमेंट करने में मदद मिलेगी और KaiOS वाले फीचर फोन में भी स्मार्ट फीचर दिए जा सकेंगे। अभी भी बहुत बड़ी आबादी इंटरनेट से नहीं जुड़ी है और ये हमारे लिए एक तेजी से उभरता हुआ मार्केट है।’ उन्होंने बताया कि ‘गूगल और KaiOS साथ में काम करने के लिए भी राजी हुए हैं और हम KaiOS यूजर्स के लिए गूगल असिस्टेंट, गूगल मैप्स, यूट्यूब और गूगल सर्च जैसी ऐप्स बनाएंगे।’ पिछले साल लॉन्च हुए रिलायंस जियो फोन की वजह से पिछले एक साल के अंदर KaiOS वाले फीचर फोन की बिक्री में 11,400% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं 2018 की पहली तिमाही में ही करीब 23 मिलियन KaiOS फोन बेचे गए।
जापान की राजकुमारी सामान्य नागरिक से शादी करेंगी, शाही दर्जा छिनेगा
टोक्यो: जापान की राजकुमारी अयाको (27) एक सामान्य नागरिक केई मोरिया (32) से इस साल शादी कर रही हैं। केई एक शिपिंग फर्म में काम करते हैं। जापान के कानून के मुताबिक, अगर राजकुमारी सामान्य आदमी से शादी करे तो उनका शाही दर्जा छिन जाता है। वहीं, राजकुमारों के सामान्य लड़की से शादी करने पर उनके शाही दर्जे पर कोई फर्क नहीं पड़ता। जापान में ये दूसरा मौका है जब किसी राजकुमारी का शाही दर्जा छीना जाने वाला है। पिछले साल सितंबर में अयाको की चचेरी बहन राजकुमारी माको ने एक सामान्य शख्स और अपने कॉलेज के दोस्त केई कोमुरो से सगाई की थी। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, राजकुमारी अयाको टोक्यो के मेइजी जिंगु मंदिर में 29 अक्टूबर को शादी करेंगी। इसके साथ ही वे राजपरिवार छोड़ देंगी। हालांकि, राजपरिवार उन्हें 10 लाख डॉलर (करीब 6 करोड़ 85 लाख रुपए) का बोनस देगा। अयाको ने सामाजिक कल्याण में मास्टर की डिग्री ली है। शाही परिवार के एक कर्मचारी के मुताबिक, केई मोरिया से अयाको को उनकी मां राजकुमारी ताकामोदो ने पिछले साल दिसंबर में मिलवाया था। ताकामोदो, केई के माता-पिता को जानती थीं। केई और अयाको दोनों को ही ग्लोबल वेलफेयर, स्कीइंग, किताबों और ट्रेवल का शौक है। राजपरिवार में 40 साल बाद पहला पुरुष उत्तराधिकारी: जापान के कानून के मुताबिक, शाही परिवार की महिलाओं को राजगद्दी पर बैठने का अधिकार नहीं है। राजपरिवार में पुरुष उत्तराधिकारी की कमी के चलते महिलाओं को राजगद्दी सौंपने की चर्चा शुरू हुई। 2006 में राजपरिवार में प्रिंस हिसाहितो पैदा हुए। इसके साथ ही महिलाओं को राजगद्दी दिए जाने पर बहस भी खत्म हो गई। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों के चलते जापान के राजा अकीहितो (84) अगले साल सेवानिवृत होने की योजना बना रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो मई 2019 में राजकुमार नारुहितो जापान के अगले राजा होंगे। जापान में भगवान के बाद दूसरे क्रम पर राजा का दर्जा माना जाता है, लेकिन अकीहितो ने राजा के पद को आधुनिक रूप दे दिया। राजकुमारी माको और उनके मंगेतर केई कोमुरो की इसी साल नवंबर में शादी करने की योजना थी, लेकिन अब वे राजा अकीहितो के राजगद्दी छोड़ने के बाद 2020 में शादी करेंगी।
विरासत ए फैशन : रंगाई की खास तकनीक इक्कत
आप अपने आस-पास कहीं भी देखें, इक्कत आपको नज़र आ ही जाएगा. ये फैब्रिक उन कपड़ों में से है जो भारत में बहुत लोकप्रिय रहा है और आज भी है. ये फैब्रिक भारतीय परिधानों में ही नहीं, बल्कि पश्चिम के डिजाइनरों की भी पसन्द है।

अब इक्कत से सिर्फ साड़ी या सलवार कमीज़ नहीं बनती. उसे बैग, जम्पसूट, ड्रेस मटेरियल और ट्राउजर्स के साथ चादरों, लैम्प शेड्स और क्रॉकरी में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इक्कत डाइ यानि कपड़ों को रंगने का तरीका है जिससे अनोखे पैटर्न के साथ मोड़कर विशेष धागों की सहायता से एक फैब्रिक का रूप दिया जाता है।

इक्कत की शुरूआत दक्षिण – पूर्व एशिया में हुई। इंडोनेशिया के लोग इसे भारतीय सूती धागों पर बनाया करते थे। फैब्रिक का नाम भी इसी देश से आया है। इसके बाद इक्कत की बाँधनी यानि टाई एंड डाई हमारे देश भारत और मलेशिया जैसे देशों में आई, लेकिन अब यह फैब्रिक कई देशों जैसे दक्षिण – पूर्व एशिया, दक्षिण अमेरिका, स्पेन, उजबेकिस्तान में भी मिलता है। भारत में आँध्र प्रदेश, गुजरात में इक्कत बनता है मगर आज ओडिशा की पहचान इस फैब्रिक के लिए की जाने लगी है।

इक्कत की बुनाई का तरीका बाकियों से अलग होता है, इसमें धागे बुनने से पहले रंगे जाते हैं। इक्कत को रंगने का तरीका बाँधनी जैसा ही है। ऐसा माना जाता है कि इसे रंगने की तकनीक पाँचवीं या छठीं शताब्दी में खोजी गयी। इक्कत को बनाने के लिए धागे डाइ करने के बाद सुखा कर अच्छे डिजाइन के लिए धागे सही स्थिति में लूम पर रखा जाता है। इसी तकनीक से इक्कत को बनाने में कोई गलती नहीं होती। इसमें ज्य़ामीतिय पैटर्न सबसे अधिक मिलते है, लेकिन फूल, जानवरों और पक्षियों के मोटिफ में भी मिलता है।
नौकरी जाने के 30 दिन बाद निकाल सकेंगे पीएफ का 75 फीसदी पैसा
नयी दिल्ली : इम्प्लॉयज प्रोविडेंड फंड ऑर्गनाइजेशन (ईपीएफओ) निर्णय लिया है कि पीएफ सदस्य नौकरी जाने के एक माह बाद अपने अकाउंट में कुल जमा राशि का 75 फीसदी हिस्सा निकाल सकता है, जबकि उसका अकाउंट भी चलता रहेगा। अब तक यह व्यवस्था थी कि बेरोजगार होने के दो माह बाद पीएफ मेंबर को केवल पूरा पैसा निकालने की ही इजाजत थी, जिस कारण उसका अकाउंट बंद हो जाता था। इसके अलावा सदस्यों को अपने बचे हुए 25 फीसदी पैसे को अगले दो माह के भीतर अंतिम सेटलमेंट के बाद निकालने का भी विकल्प दिया गया है।
ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की बैठक के बाद लेबर मिनिस्टर संतोष कुमार गंगवार ने बताया कि हमने योजना में संशोधन करते हुए पीएफ सदस्यों को बेरोजगार होने के एक माह के बाद अपने अकाउंट से 75 फीसदी पैसा निकालने की छूट देने का निर्णय लिया है। मंत्री ने कहा कि 75 फीसदी पैसा निकालने के बाद ईपीएफओ में अकाउंट रहना एक बड़ी सुविधा है, जिसे रोजगार मिलने के बाद फिर से चालू किया जा सकता है। हालांकि पहले यह प्रस्ताव रखा गया था कि बेरोजगार होने पर एक माह बाद 60 फीसदी राशि निकालने की इजाजत दी जाए, लेकिन सीबीटी ने यह सीमा बढ़ा कर 75 फीसदी कर दी। मंत्री ने आगे कहा कि ‘हमने आज सीबीटी मीटिंग में रखे गए पूरे एजेंडे को पास कर दिया। हमने फंड मैनेजरों का कार्यकाल 31 दिसंबर 2018 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को पास कर दिया। 5 फंड मैनेजरों की नियुक्ति एक अप्रैल 2015 को तीन साल के लिए हुई थी, जिसे पहले 30 जून 2018 तक विस्तार दिया गया था। इसे अगले छह माह के लिए और बढ़ा दिया गया।’ साथ ही, ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेट फंड) मैन्युफैक्चरर्स एसबीआई और यूटीआई म्यचुअल फंड को एक साल का विस्तार देने का प्रस्ताव भी मंजूर लिया गया। मंत्री ने कहा कि ईपीएफओ का ईटीएफ निवेश जल्द 1 लाख करोड़ पार कर जाएगा। मई तक इसमें 47,431.24 करोड़ रुपये निवेश हो चुके हैं। जिस पर 16.07 फीसदी का रिटर्न मिला है।
दीपिका को 6 साल बाद स्वर्ण, विश्वकप फाइनल के लिए क्वालिफाई किया
सॉल्टलेक सिटी : भारतीय तीरंदाज और रांची की बेटी दीपिका कुमारी ने वर्ल्ड कप स्टेज-थ्री इवेंट में महिलाओं की रिकर्व स्पर्द्धा में स्वर्ण जीता। दीपिका ने करीब छह वर्ष के बाद स्वर्ण पदक जीता है। दीपिका ने जर्मनी की मिशेल क्रोपेन को 7-3 से हराकर सर्किट फाइनल के लिए भी क्वालीफाई कर लिया जो इस वर्ष के आखिरी में होगा। इसी के साथ दीपिका ने तुर्की के सैमसन में होने वाले विश्वकप तीरंदाजी फाइनल के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। दीपिका इससे पहले 2011, 2012, 2013 और 2015 में चार बार विश्वकप फाइनल में रजत जीत चुकी हैं। अभिषेक वर्मा ने व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत जीता। मिश्रित टीम स्पर्धा में उन्होंने वी ज्योति सुरेखा के साथ कांस्य हासिल किया। भारत पदक तालिका में चौथे नंबर पर रहा जबकि उससे आगे अमेरिका, कोलंबिया और चीनी ताइपे रहे हैं।भारतीय खिलाड़ी ने अच्छी शुरूआत करते हुए 30 में से 29 अंक हासिल किए। 2-0 की बढ़त बनाई, लेकिन दूसरे सेट में उन्हें क्रोपेन के साथ अंक साझा करने पड़े। जर्मन खिलाड़ी ने तीसरा सेट जीतकर 3-3 से बराबरी कर ली लेकिन दीपिका ने चौथे में 29 और पांचवें सेट में 27 अंक लेकर 7-3 से स्वर्ण जीत लिया
अवसाद का पैसे और सफलता से कोई रिश्ता नहीं है : दीपिका
मुम्बई : दीपिका पादुकोण ने एक वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में अवसाद पर बात की है। दीपिका ने कहा, मानसिक स्वास्थ्य का इस बात से कोई मतलब नहीं है कि आप कितने सक्सेसफुल हो। दीपिका 2014 में इसकी शिकार हो चुकी हैं। दीपिका ने आगे कहा,’2014 में मेरी जिन्दगी में बहुत कुछ हो रहा था,लोगों को लगता था कि प्रोफेशनली वो मेरे कॅरियर का सर्वश्रेष्ठ दौर था। मैं सफलता के चरम पर थी लेकिन अवसाद में भी थी। इसके कोई वार्निंग साइन मुझे कभी महसूस नहीं हुए थे। ये किसी को भी घेर सकता है और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके पास कितना पैसा है और आप कितने कामयाब हो।’ दीपिका ने अवसाद से निकलने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव किए और मेडिकेशन का सहारा लिया। इस दौरान कई लोग मेरे पास आए और कहा कि उन्हें देखकर कई उन लोगों के मन से आत्महत्या के ख्याल निकल गए। उन्होंने देखा कि मैं इससे कैसे उबर पाई और फिर उन्होंने इसे अपनी जिन्दगी में आजमा कर अवसाद से मुक्ति पा ली और यही मैं चाहती थी इसलिए मुझे ख़ुशी है कि मैंने अवसाद के बारे में खुलकर बात की जो सब करने से बचते हैं। अपना दर्द समझते हुए दीपिका ने उन लोगों की मदद का जिम्मा उठाया जो अवसाद के शिकार हैं। उन्होंने ऐसे लोगों के लिए 2014 में लिव लव लाफ फाउंडेशन खोला। उन्होंने यहां आए लोगों के साथ अपने अनुभव साझा किये ताकि वह भी उससे उबर सकें। दीपिका ने इस साक्षात्कार में 2015 के आंकड़े भी गिनाए। उन्होंने बताया भारत में सिर्फ 2015 में ही अवसाद से जूझ कर आत्महत्या करने वाले युवक-युवतियों की संख्या 50000 थी।
हिन्दी-बांग्ला की काव्य धारा में झलके कबीर
कोलकाता : भारतीय भाषा परिषद के तत्वावधान में कबीर जयंती के मौके पर आयोजित काव्य लहरी – 2 की छठी गोष्ठी में महान कवि संत कबीर को याद किया गया । काव्य लहरी की विशिष्टता है कि इस आयोजन में प्रत्येक बार हिंदी भाषा के साथ अन्य किसी एक क्षेत्रीय भारतीय भाषा का समागम होता है । इस बार यह आयोजन हिंदी की व्यापकता के साथ अपने साथ समेट लाई थी बांग्ला भाषा की मिठास। कवयित्री कामायनी संजय ने निराला जी लिखित सरस्वती वंदना “वर दे वीणा वादनी” का सस्वर पाठ किया। तत्पश्चात सुशील कान्ति ने कबीर के गीतों का सुरीला पाठ किया। सुकान्त कर्माकर ने बांग्ला भाषा और साहित्य पर अपना विचार रखे ।
काव्य गोष्ठी की शुरूआत हिंदी के कवि विजय शर्मा विद्रोही ने अपने धधकती शब्दों से ओत-प्रोत देश भक्ति कविता से की। कल्याण गंगोपाध्याय एवं सुकान्त कर्माकर ने बांग्ला कविताओं का पाठ किया । वागर्थ के सह संपादक सुशील कान्ति ने अपनी बूढ़े शीर्षक रचना तथा गजल का पाठ किया। शिव प्रकाश दास ने अपनी सारगर्भित कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दामोदर वैली कॉर्पोरेशन के चेयर मैन प्रबीर मुखोपाध्याय ने की तथा मंच का कुशल संचालन कवि तथा काव्य लहरी के संयोजक व संचालक गिरिधर राय ने किया। अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रबीर मुख्योपाध्याय ने अध्यक्षीय वक्तव्य के साथ ही अपनी बांग्ला कविताओं का पाठ किया। भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ.कुसुम खेमानी ने आमंत्रित सभी कवियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया । वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती प्रेम शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
सम्मानित की गयीं राजकुमारी सहारिया
कोलकाता : स्वास्थ्य होलिस्टिक हेल्थिंग सेंटर की संस्थापक राजकुमारी सहारिया को मास्टर ट्रेनर इन ऑरा एंड रेडिकल हीलिंग का पुरस्कार मिला है। उन्हें यह पुरस्कार इन्स्पायर -स्पिरिचुअल हॉलिस्टिक वेलनेस विजनरी पुरस्कार 2018 में प्रदान किया गया। पुरस्कार अभिनेत्री रिमी सेन और दिव्या दत्ता ने प्रदान किया। वे पिछले 10 साल से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उनके लिए प्रेरणा है और उनको यह बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करेगा।
महानगर में मनायी गयी वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र प्रताप सिंह की जयंती
कोलकाता : महानगर के राष्ट्रीय पुस्तकालय के एनएलकेए सभागार में वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र प्रताप सिंह की जयंती पूरे उत्साह के साथ मनाई गयी। एसपी के नाम से मशहूर सुरेंद्र प्रताप सिंह धर्मयुग, रविवार और नवभारत टाइम्स के अलावा आज तक और इंडिया टुडे जैसे संस्थानों में उन्होंने बतौर फीचर सम्पादक, संपादक और स्तंभकार के रुप में अपनी सेवा दी थी। उनके नेतृत्व में कोलकाता से प्रकाशित रविवार ने हिंदी पत्रकारिता में एक नयी धारा को जन्म दिया था। इस अवसर पर वक्ताओं ने एसपी के बारे में लोगों को अधिक से अधिक जानकारी प्रदान करने की जरुरत पर बल दिया। कोलकाता की धरती से एसपी ने एक इतिहास रचा था। जो बाद में आज तक जैसे इलेक्ट्रानिक मीडिया के रुप में उभरा। आंनद बाजार पत्रिका समूह ने भी उस समय एसपी के नेतृत्व में हिंदी की ताकत को पहचाना था और इस पत्रिका ने केवल दस सालों से भी कम समय में पूरे देश में राजनीतिक पत्रिका के रुप में अपनी पहचान स्थापित की थी।

एसपी का नहीं होना हिंदी ही नहीं भारतीय पत्रकारिता के लिए अपूरणीय क्षति है। दिल्ली के उपहार सिनेमा कांड के बाद उनको खबर पढते समय हृदयाघात हुआ और उन्हें दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहीं उनका 27 जून, 1997 को निधन हुआ था। इस समारोह का आयोजन एनएलकेए और महानायक स्मृति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। कार्यक्रम को सफल बनाने में अजय कुमार झा, रमेश द्विवेदी, राजीव चक्रवर्ती, अंशुमान भारती, पल्लव घोष, कुणाल रायचौधरी, राकेश हेला, नम्रता पांडे, रमाकांत पांडा, श्यामल साहा,शीर्षेंदू सिन्हा, रामवृक्ष राम आदि की मुख्य भूमिका थी।




