Saturday, April 11, 2026
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15 अगस्त से नए जियो फोन पर व्हाट्सएप और फेसबुक भी चलेगा

मुम्बई : मुकेश अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्री की 41वीं एजीएम को संबोधित किया। इस मौके पर नीता, अनंत के अलावा बेटी ईशा अंबानी भी मौजूद रहीं। मुकेश अंबानी ने इस मौके पर शेयरधारकों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि ‘हमारा नेट प्रॉफिट 20.6 फीसद के हिसाब से बढ़कर 36,075 करोड़ हो गया है।’ वहीं मुकेश अंबानी ने खुलासा किया कि,” जीएसटी के लागू होने के बाद रिलायंस इंडस्ट्री ने 42,553 करोड़ का कर जमा किया है। वहीं एक साल के भीतर जियो के ग्राहक भी दोगुने हो गए हैं। उन्होंने बताया कि रिलायंस जियो के पास आज 22 करोड़ ग्राहक हैं और हर महीने 240 करोड़ जीबी से ज्यादा डेटा का इस्तेमाल हो रहा है।’
जियो और रिटेल से कंपनी का लाभ 2 फीसदी से बढ़कर 13 फीसदी हुआ। एजीएम में ईशा अंबानी और आकाश अंबानी ने जियो 2 फोन लॉन्च किया। यह फोन 15 अगस्त से उपलब्ध होगा। जियो 2 फोन के अलावा गीगा टीवी, सेटअप बॉक्स और गीगा राउटर भी लॉन्च किया गया।
वहीं जियो के पुराने ग्राहकों के पास अपना पुराना फीचर फोन बदलने का मौका होगा। मॉनसून एक्सचेंज ऑफर के तहत ग्राहक पुराना फोन देकर 501 रुपए में नया फीचर फोन ले सकेंगे। वहीं 15 अगस्त से जियो फोन-2 बाजार में मिलने लगेगा। इस फोन पर फेसबुक, व्हाट्सएप और यू-ट्यूब भी बड़ी आसानी से चलेंगे। इसके अलावा जियो फोन पर वायस कमांड के जरिए ऐप भी खोले जा सकेंगे।15 अगस्त से गीगा टीवी सेट टॉप बॉक्स मिलने लगेंगे। एक बॉक्स से ही लोगों को तीन सेवाएं- टीवी, ब्रॉडबैंड और फोन मिलेंगी। इसका किराया प्रति महीना 1 हजार रुपये से भी कम होगा।

अपनों का सहारा नहीं, हर चौथा बुजुर्ग है अकेला

आपाधापी की इस दौड़ में देश के बुजुर्ग अकेले पड़ते जा रहे हैं। उन्हें न तो अपनों का सहारा मिल पा रहा है और न ही पर्याप्त देखभाल। समय पर डॉक्टर नहीं मिलता तो दूसरी ओर बुढ़ापे में उन्हें अपने खर्च के लिए बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता है। यही बात उन्हें मानसिक और शारीरिक तौर पर तोड़ देती है। एजवेल फाउंडेशन द्वारा किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है। सर्वे में कहा गया है कि देश में हर चौथा बुजुर्ग अकेला है।
फाउंडेशन के अध्यक्ष हिमांशु रथ का कहना है कि मई जून में तीन सौ कार्यकर्ताओं ने देश के बीस राज्यों में यह सर्वे किया है। इसमें दस हजार बुजुर्गों से बात की गई है। सर्वे में सामने आया है कि हर चौथा बुजुर्ग आज अकेला है। इनका प्रतिशत 23 है। हर दूसरा बुजुर्ग, जिनका प्रतिशत करीब 48 है, वह अपनी पति या पत्नी के साथ रहता है। 26 फीसदी बुजुर्ग ऐसे हैं जो अपने परिवार के साथ रहते हैं। शहर में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की संख्या 25 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह प्रतिशत 21 है।

सर्वेक्षण के दौरान एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई है कि बड़ी संख्या में बुजुर्ग अकेले या फिर अपने जीवन साथी के साथ रहना पसंद करते हैं। करीब 36 फीसदी बुजुर्ग मानते हैं कि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं। इसके अलावा 68 प्रतिशत बुजुर्गों का कहना है कि वे वैचारिक तौर पर आजाद हैं। इनमें 60 फीसदी ने मनोवैज्ञानिक आजादी, 69 प्रतिशत ने सामाजिक आजादी और 61 फीसदी बुजुर्गों ने शारीरिक तौर पर आत्मनिर्भर होने की बात कबूली है।

अधिकांश बुजुर्गों को चिकित्सा देखभाल से वंचित रहना पड़ता है
सर्वेक्षण में पता चला है कि 61 प्रतिशत बुजुर्गों को दीर्घकालिक चिकित्सा नहीं मिल पा रही है। बिस्तर पर पड़े 68 फीसदी बुजुर्गों ने कहा है कि उनके लिए घर में मनोरंजन का साधन होना चाहिए। हिंमाशु रथ का कहना है कि बुजुर्गों को आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए परिजनों, समुदाय एवं सरकार के स्तर पर पहल करने की जरूरत है। देश में बुजुर्गों की आबादी करीब 13 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है।

मप्र के दुबड़ी गाँव ने दी गरीबी को मात, लौटाएंगे बीपीएल कार्ड

श्योपुर : कुपोषण का गढ़ कहे जाने वाले मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले का यह गांव छह साल पहले तक गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले बीपीएल कार्डधारियों का गांव था। 74 आदिवासी परिवारों के पास रोजगार का कोई साधन नहीं था। जिस दिन मजदूरी न मिलती, चूल्हा न जलता। जो भी थोड़ी बहुत जमीन और जेवर थे, गिरवी रखे हुए थे। गांव की सूरत अब बदल चुकी है। अब हर परिवार लखपति है और सरकार को बीपीएल कार्ड लौटाने जा रहा है। श्योपुर जिले के आदिवासी विकासखंड कराहल का दुबड़ी गांव इस बदलाव का श्रेय गांव की महिलाओं के स्वावलंबन को देता है। आदिवासियों ने गिरवी रखी जमीन और जेवर मुक्त करा लिए हैं। यह करिश्मा गांव की महिलाओं ने स्वसहायता समूहों से जुड़कर दिखाया। पूरे जिले में सिर्फ दुबड़ी गांव ही ऐसा है, जहां शतप्रतिशत महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा गठित स्वसहायता समूहों की सदस्य हैं। समूहों से लोन लेकर महिलाओं ने खेती-बाड़ी, पशुपालन से लेकर लघु उद्योग शुरू किए।
अब स्थिति यह है कि पूरा गांव विकास की राह पकड़ चुका है। जिन घरों में खाने के लिए अनाज जुटाना मुश्किल था, वहां जीवन स्तर सुधर चुका है। घरों में बाइक, टीवी, फ्रिज जैसे संसाधन मौजूद हैं। इस कहानी की सबसे अहम और प्रेरणाप्रद बात, जो ग्रामीण भारत के बदलाव का संकेत देती है, जो ग्राम्य विकास की राह प्रशस्त करती है, वह यह कि दुबड़ी गांव के सभी परिवार अब सरकार को अपना बीपीएल कार्ड लौटाने जा रहे हैं। सरकार का यह कार्ड खाद्य सुरक्षा योजना, स्वास्थ्य सुविधाओं सहित अन्य जीवनोपयोगी सरकारी सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित करता है।
गरीबी को मात देने वाली तीन कहानियां
1. बिजली को बनाया आय का जरिया : सुकनी आदिवासी ने बजरंग स्वसहायता समूह की सदस्यता ली और 15 हजार रुपये का कर्ज लेकर सोलर सिस्टम लगाया। पूरा गांव बिजली विहीन था, इसलिए उसने 100 रुपये महीने में 40 घरों को एक-एक सीएफएल का कनेक्शन दिया।
2. गिरवी रखी जमीन छुड़ाई : कालीबाई आदिवासी के पास 12 बीघा जमीन थी, जो 10 रुपये सैकड़ा के ब्याज पर गिरवी रखी थी। 11 साल से जो भी कमाते, साहूकार को दे देते। केवल ब्याज चुकता होता, मूल राशि जस की तस रहती। इसके बाद कालीबाई बैरागी स्वसहायता समूह से जुड़ी। समूह से 20 हजार का कर्ज लेकर साहूकार से जमीन मुक्त कराई।
3. गांव की सबसे उन्नत किसान बनीं : बेस्सी बाई की 15 बीघा जमीन खाद-बीज के लिए भी पैसे न होने के कारण सालों से बंजर पड़ी थी। कई बार गांव से आटा मांगकर रोटियां बनाती थी। बेस्सी भी समूह से जुड़ी। 15 हजार रुपये का लोन लिया। कृषि विभाग ने खेत में बोर कराया। आज बेस्सी गांव की सबसे उन्नत किसान है। खेती में नए प्रयोग करती है।

(साभार – नयी दुनिया में प्रकाशित हरिओम गौड़ की खबर)

60 की उम्र में बाइक से भारत भ्रमण पर निकल पड़े शरत 

रायपुर : अधिकांश लोग बचपन और जवानी बड़ी शान से जीते हैं, लेकिन बुढ़ापा आने से पहले ही जिंदगी से निराश और हताश हो जाते हैं। ऐसे लोगों को लगता है कि अब जिंदगी में कुछ नहीं बचा। यह निराशा उन्हें तमाम रोगों से घेर लेती है और वे परिवार पर भी बोझ बनने लगते हैं। यदि लोग बचपन और जवानी की तरह बुढ़ापे को भी शान से जिएं तो वे समाज को एक नई दिशा दे सकते हैं । यह महत्वपूर्ण संदेश देने के लिए दिल्ली निवाशी शरत शर्मा आजकल मोटरसाइकिल से भारत भ्रमण पर निकले हैं। उनका मानना है कि यदि वे मुट्ठीभर लोगों को भी आनंदमयी जीवन जीने और कुछ नियमों का पालन करना सिखा दें तो उनका जीवन सफल हो जाएगा। जज्बे वाले इंसान के लिए उम्र की सीमा कोई मायने नहीं रखती, इस बात को 60 वर्ष के शरत बखूबी चरितार्थ कर रहे हैं। दिल्ली से 18 मार्च 2018 को मोटरसाइकिल से उनकी यात्रा शुरू हुई थी और इसके अगले पड़ाव में अब वह रायपुर पहुंचे हैं। भारत भ्रमण करने के पिछे इनका मकसद उन लोगों को जागरूक करना है जो सड़क पर वाहन चलाते हुए ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते। इसके साथ ही लोगों को समझाना चाहते हैं कि जिंदगी बेहद खूबसूरत है, ये दुनिया बहुत हसीन है और निराशा कभी हावी न होने दें। देश-दुनिया को देखें और अंदर से खुश रहें। शरत का मानना है कि अगर सही तरीक से सड़क पर ट्रैफिक नियमों का पालन किया जाय तो दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। इसके साथ ही जो लोग बुढ़ापा आते ही अपने आप को असहाय मानने लगते हैं, वे अगर अपनी दिनचर्या को थोड़ा परिवर्तन ले आएं तो बुढ़ापे को भी तंदुरुस्ती और खुशी के साथ जिया जा कसता है।
शरत अभी तक कुल 16 राज्य जिसमें हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, सिक्किम, भूटान, अरुणाचल प्रदेश, नागालैण्ड, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, मेघालया, असम, पश्चिम बंगाल का भ्रमण कर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। इसके बाद उनका अगला पड़ाव तेलंगाना और आंध्र प्रदेश होगा। वे अभी तक 16 हजार 3 सौ किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं। हर दिन 12 से 13 घंटे मोटरसाइकिल चला हे हैं । इस बीच नियमित रुप से नींद लेते हैं। अपने खानपान का विशेष ध्यान रखते हैं।

भगवद्गीता के श्लोकों से सीखिए मैनेजमेंट , वैज्ञानिक ने बनाया ऑडियो एलबम

भोपाल : श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध से पहले अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया है। इस ‘भगवद्गीता” में हर एक समस्या का समाधान छिपा है, जरूरत है तो बस से समझ कर आत्मसात करने की। गीता के इसी ज्ञान को युवाओं के लिए सरल भाषा में ऑडियो एलबम में उपलब्ध कराया है डॉ. मुरली कृष्ण ने। उन्होंने ‘संभवामि युगे-युगे” शीर्षक से ऑडियो एलबम और पुस्तक लिखी है। श्रीमद्भगवद्गीता के चुनिंदा श्लोकों के जरिए युवाओं को मैनेजमेंट के टिप्स दिए है। डॉ. मुरली मंडीदीप स्थित ल्युपिन लिमिटेड में वैज्ञानिक है।
99 मिनट का है ऑडियो
एलबम शास्त्रीय कर्नाटक रागों के आधार पर तैयार किया है। हिन्दी में वर्णन के साथ 108 श्लोक गायन के साथ बनाया है। उन्होंने बताया कि यूट्यूब पर हिन्दी और तेलुगू संस्करणों के दोनों ऑडियो अपलोड किए गए है। ऑडियो लगभग 99 मिनट है। वोकल रिकॉर्डिंग भोपाल के केबी स्टूडियो में हुई। संगीत हैदराबाद में फिल्म उद्योग के संगीत निर्देशकों में से एक ‘बांसुरी वादक नागाराजू” ने दिया है। इसके अलावा यशराज फिल्म्स स्टूडियो, मुंबई द्वारा संगीत मिश्रण और मास्टरिंग का काम हुआ।

एक करोड़ की राशि खर्च
डॉ. मुरली कृष्ण ने बताया कि तीन साल की मेहनत और एक करोड़ से अधिक की धनराशि से तैयार किया गया यह प्रयास किसी भी व्यावसायिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका यह प्रयास गीता के सार को आमजन तक निशुल्क पहुंचाने के लिए है। माता-पिता को समर्पित यह कृति सभी के लिए निशुल्क उपलब्ध है। यह ऑडियो व्यवहार और व्यक्तित्व विकास की दृष्टि से युवा पीढ़ी के लिए बेहद उपयोगी है। दिल्ली विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, भारतीय प्रबंधन संस्थान, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, एमएचआरडी सहित विभिन्न् विश्वविद्यालयों के कई प्रोफेसरों और प्रमुखों ने इस परियोजना की सराहना की, क्योंकि यह छात्रों के लिए उपयोगी है।
ऑडियो में शामिल है प्रबन्धन के टिप्स
हिन्दी में इस प्रकार का ऑडियो एलबम पहली बार आया है। विषाद, तनाव व अवसाद को दूर करके जीवन में शांति और खुशी प्राप्त करने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं को वर्गीकृत और संकल्पित किया गया है। इस एलबम में प्रेरणा, आत्म-नियंत्रण, व्यवहार, नेतृत्व, चरित्र निर्माण, आध्यात्मिकता, कर्तव्यों और कार्यों आदि को परिभाषित करने जैसे विभिन्न् प्रबंधन विषयों को शामिल किया गया है।

शीर्ष दस में से आठ कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 66,626 करोड़ रुपये बढ़ा

नयी दिल्ली : सेंसेक्स की शीर्ष दस में से आठ कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में बीते सप्ताह 66,625.60 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। सबसे अधिक लाभ में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) रही। सप्ताह के दौरान जहां इन्फोसिस और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बाजार पूंजीकरण में गिरावट आई वहीं टीसीएस , रिलायंस इंडस्ट्रीज , एचडीएफसी बैंक , हिंदुस्तान यूनिलीवर , आईटीसी , एचडीएफसी , मारुति सुजुकी इंडिया और कोटक महिंद्रा बैंक की बाजार हैसियत में इजाफा हुआ।
सप्ताह के दौरान टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 25,306.88 करोड़ रुपये बढ़कर 7,32,521.29 करोड़ रुपये पर पहुँच गया। इसी तरह मारुति की बाजार हैसियत में 14,608.59 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ और यह 2,81,079.45 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। हिंदुस्तान यूनिलीवर का बाजार पूंजीकरण 8,030.79 करोड़ रुपये बढ़कर 3,63,431.19 करोड़ रुपये हो गया। समीक्षाधीन सप्ताह में आईटीसी का बाजार पूंजीकरण 7,627.68 करोड़ रुपये की वृद्धि के साथ 3,32,322.95 करोड़ रुपये और कोटक महिंद्रा बैंक का 5,510.83 करोड़ रुपये बढ़कर 2,61,263.97 करोड़ रुपये हो गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार मूल्यांकन 2,249.42 करोड़ रुपये की वृद्धि के साथ 6,18,749.36 करोड़ रुपये और एचडीएफसी का 1,728.92 करोड़ रुपये बढ़कर 3,22,542.15 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण 1,562.49 करोड़ रुपये की वृद्धि के साथ 5,50,531.99 करोड़ रुपये रहा। वहीं दूसरी सप्ताह के दौरान इन्फोसिस का बाजार पूंजीकरण्सा 4,859.69 करोड़ रुपये घटकर 2,80,551.12 करोड़ रुपये पर आ गया। एसबीआई को सप्ताह के दौरान 1,651.04 करोड़ रुपये का ऩुकसान हुआ और उसका बाजार पूंजीकरण 2,29,763.51 करोड़ रुपये रह गया। सप्ताह के दौरान टीसीएस शीर्ष पर बनी रही। उसके बाद क्रमश : रिलायंस इंडस्ट्रीज , एचडीएफसी बैंक , हिंदुस्तान यूनिलीवर , आईटीसी , एचडीएफसी , मारुति , इन्फोसिस , कोटक महिंद्रा बैंक और एसबीआई का स्थान रहा। गत सप्ताह बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 234.38 अंक या 0.66 प्रतिशत बढ़कर 35,657.86 अंक पर पहुंच गया।

विदेशी निवेशकों ने 5 कारोबारी सत्रों में किया 3,000 करोड़ रुपये का निवेश

नयी दिल्ली : विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने पिछले पांच कारोबारी सत्रों में भारतीय पूंजी बाजारों में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया । इससे पहले अप्रैल – जून के दौरान उन्होंने पूंजी बाजारों से भारी निकासी की थी। ताजा निवेश से पहले पिछले तीन माह के दौरान एफपीआई ने पूंजी बाजारों से 61,000 करोड़ रुपये से अधिक निकाले हैं । मार्च माह में उन्होंने 2,662 करोड़ रुपये डाले थे। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार दो से छह जुलाई के दौरान एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजारों में 2,235 करोड़ रुपये डाले हैं। वहीं उन्होंने ऋण या बांड बाजार में 892 करोड़ रुपये लगाए हैं। इस तरह उनका कुल निवेश 3,127 करोड़ रुपये रहा। रिलायंस सिक्युरिटीज के रिटेल ब्रोकिंग प्रमुख राजीव श्रीवास्तव ने कहा , ‘‘ शेयर बाजारों में कुछ मूल्यवर्धन वाली खरीदारी देखने को मिल रही है। इससे पहले लघु और मध्यम कैप में बाजार की चाल में गिरावट देखने को मिला था। वर्ष 2018 में इसमें श्रेणी में बाजार ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अब कुल 20 प्रतिशत नीचे आया है। ’हालांकि , कुल मिलाकर इस साल एफपीआई ने पूंजी बाजारों से 44,737 करोड़ रुपये निकाले हैं। इसमें से 40,541 करोड़ रुपये ऋण बाजार से और 4,196 करोड़ रुपये शेयरों से निकाले हैं। जनवरी में एफपीआई ने पूंजी बाजारों में शुद्ध रूप से 22,272 करोड़ रुपये का निवेश किया था। वहीं फरवरी में उन्होंने 11,674 करोड़ रुपये की निकासी की थी।

चिता की राख से खाद बनाएगा बाल वैज्ञानिकों का मोक्षा प्रोजेक्ट

बिलासपुर: मल्टीपरपज स्कूल दयालबंद के छात्रों व बाल वैज्ञानिकों के बनाए मॉडल मोक्षा को दुबई में हुई प्रतियोगिता में इनोवेशन ट्रैक कैटेगरी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। मोक्षा एक प्रोजेक्ट है, जिससे चिता की राख से खाद बनाया जा सकता है। इससे पहले इसे नीति आयोग ने भी सराहा था।
कलेक्टर पी.दयानंद ने बच्चों को शाबासी दी और उन्हें प्रमाण पत्र भी प्रदान किए। शिक्षा विभाग के सहायक संचालक डॉ.संदीप चोपड़े ने बताया कि दुबई में इनोवेशन ट्रैक कैटेगेरी में 22 से 26 जून तक यह प्रतियोगिता हुई। इसमें इन बच्चों ने अपने मोक्षा मॉडल के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया।
पूरे देश में प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने के बाद छात्रों को यह अवसर मिला था। प्रतियोगिता में अलग-अलग देशों से आए प्रोजेक्ट के बीच बाल वैज्ञानिकों ने पुरस्कार प्राप्त किया। वापस लौटने पर कलेक्टर दयानंद बाल वैज्ञानिक अतुल अग्रवाल, यमन कुमार, स्वास्तिक प्रजापति व गौरव महतो से मिले। कलेक्टर ने उन्हें बधाई देकर उनसे बात की। बाल वैज्ञानिकों ने कलेक्टर को प्रतियोगिता के अनुभव सुनाए। इस प्रतियोगिता में छह देशों के बाल वैज्ञानिकों ने अपना प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। उनके बीच भारत के प्रोजेक्ट को बेस्ट जज प्रोजेक्ट का पुरस्कार मिला है। इस प्रतियोगिता को बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने आयोजित किया था। इसके माध्यम से बाल वैज्ञानिकों के अविष्कार को दुनिया के सामने रखा गया। इस प्रतियोगिता में भारत के अलावा दूसरे देशों के बाल वैज्ञानिकों के अविष्कार व प्रोजेक्ट को भी प्रस्तु किया गया था।

 वर्ष 2016 में देश भर से अगवा हुए 55,000 बच्चे 

नयी दिल्ली : देश के विभिन्न हिस्सों में बच्चों के चोरी हो जाने का जो डर है उसे पूरी तरह बेबुनियाद नहीं कहा जा सकता । खासतौर पर गृह मंत्रालय की ओर से जारी वर्ष 2016 के आँकड़ों को देखते हुए जिनके मुताबिक उस वर्ष भारत से करीब 55,000 बच्चों को अगवा किया गया है और यह आंकड़ा एक वर्ष पहले के आंकड़ों के मुकाबले 30 फीसदी अधिक है। गृह मंत्रालय की 2017-18 की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016 में 54,723 बच्चे अगवा हुए लेकिन केवल 40.4 फीसदी मामलों में ही आरोप पत्र दाखिल किए गए।
वर्ष 2016 में बच्चों के अपहरण के मामलों में दोषसिद्धि की दर महज 22.7 फीसदी रही। वर्ष 2015 में ऐसे 41,893 मामले दर्ज किए गए जबकि वर्ष 2014 में यह संख्या 37,854 थी। वर्ष 2017 के आंकड़े अभी प्रस्तुत नहीं किए गए हैं । मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि ‘ हाल में हुए पीट – पीटकर हत्या के ज्यादातर मामलों के पीछे सोशल मीडिया पर बच्चा उठाने की अफवाहें थी। आंकड़े बताते हैं कि बच्चों के अपहरण का डर , खासकर ग्रामीण इलाकों में , पूरी तरह से बेबुनियाद नहीं है। ’ को गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उन घटनाओं का पता लगाने को कहा था जिनमें सोशल मीडिया पर बच्चा उठाने की अफवाहों के बाद भीड़ ने पीट – पीटकर हत्या की घटना को अंजाम दिया। विगत दो महीने में बच्चा चोरी के संदेह में 20 से ज्यादा लोगों की पीट – पीटकर हत्या की गई। हाल की घटना एक जुलाई को महाराष्ट्र के धुले में हुई जिसमें बच्चा चोर होने के शक में पांच लोगों की हत्या कर दी गई।

अब बच्चा गोद लेना होगा आसान, संशोधित होगा कानून

नयी दिल्ली : सरकार जल्द ही बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया आसान बनाने जा रही है। सरकार की तरफ से संसद के मानसून सत्र में जूवेनाइल जस्टिस (जेजे) एक्ट में संशोधन संबंधी बिल पेश किया जाएगा। बिल के पास होने के बाद से बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया केवल दो महीने में ही पूरी हो सकेगी। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के सेक्शन दो (उपधारा 23 के तहत बच्चा गोद लेने संबंधी कानूनी प्रक्रिया ) के नियमों में बदलाव की मंजूरी मिलनी है।
इसके बाद न्यायालयों का चक्कर लगाने से भावी अभिभावकों को मुक्ति मिल जाएगी। वह पूरी प्रक्रिया पर निचले यानी जिलाधिकारी स्तर से अंतिम मुहर लगवा सकेंगे। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने साल 2017 में गोद लेने के नियमों में बदलाव कर जुवेनाइल जस्टिस केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन एक्ट 2017 को लागू किया था। इसे फिर से संशोधित कर और सरल बनाया जा रहा है।
नए नियम गोद लेने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करके देश में गोद लेने के कार्यक्रम को और मजबूत करेंगे। अभी जिलाधिकारी कार्यालय के मातहत आने वाली बाल संरक्षण कमेटी की संभावित या भावी अभिभावकों का भौतिक सत्यापन करती है। सारी व्यवस्था ऑनलाइन होने के कारण संभावित अभिभावक सीधे ऑनलाइन रजिस्टर होते हैं। सत्यापन के बाद वे गोद लेने वाली एजेंसियों के पास जाते हैं।
अभी नियम यह है कि बच्चा गोद लेने के लिए सारी प्रक्रिया पूरी करने और गोदनामा पर वैधानिकता की अंतिम मुहर के लिए कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है। इस प्रक्रिया में कई बार दो-दो साल का समय भी लग जाता है। एक अनुमान के मुताबिक इस समय 850 से 900 मामले कोर्ट से अनुमति की बाट जोह रहे हैं। गोद लिए गए बच्चों के आँकड़ों पर नजर डाले तो मार्च 2018 तक 3,276 बच्चे गोद दिए गए थे। विदेशियों को 651 बच्चे गोद दिए गए। इस समय लगभग 15 हजार संभावित अभिभावक अपनी बारी के इंतजार में हैं। लिहाजा इस प्रक्रिया से शीघ्र निस्तारण में मदद मिलेगी। एक अनुमान के मुताबिक देश में 50 हजार अनाथ बच्चे हैं। ऐसे में नियमों को सरल बनाकर और बच्चों को छत दी जा सकेगी।