Saturday, April 11, 2026
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मेनका गांधी की चिठ्ठी, पैन कार्ड फॉर्म में पिता का नाम हटाने का मिले विकल्प

नयी दिल्ली : केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय चाहता है कि, तलाकशुदा महिलाओं के अलावा सिंगल मदर जो बच्चों को गोद लेती है, उन्हें पैन कार्ड पर पिता का नाम न लिखने की छूट मिले। फिलहाल, परमानेंट अकाउंट नंबर(PAN) के लिए पिता का नाम दर्ज कराना जरूरी है। आयकर विभाग हर करदाता को दस अंकों का अल्फान्यूमेरिक नंबर जारी करता है। इस मामले में महिला विकास मंत्री मेनका गांधी ने वित्त मंत्री पीयूष गोयल को एक चिठ्ठी लिखी है, जिसमें ये मांग की है कि सरकार पैन कार्ड के एप्लीकेशन फॉर्म की समीक्षा करे और सिंगल मदर के लिए ऐसी व्यवस्था करे कि उसे बच्चे का पैन कार्ड बनवाने में पिता का नाम देना जरूरी न हो।
मेनका गांधी ने इसे लेकर कहा है कि, जो महिलाएं अपने पति से अलग हो गईं और बच्चों के साथ रहती हैं। वो निजी कारणों से ये नहीं चाहती हैं कि उनके पूर्व पति का नाम बच्चों से जुड़े किसी दस्तावेज में आए। मेनका गांधी ने चिठ्ठी में लिखा कि, “सिंगल मंदर की भावनाओं का ध्यान रखते हुए, ये अहम हो जाता है कि हम उन्हें ये विकल्प दें कि जरूरी दस्तावेजों में उन्हें अपने पूर्व पतियों के नाम का जिक्र न करना पड़े।”वहीं महिला बाल विकास मंत्री ने कहा कि, “आज सिंगल मदर भी बच्चों को गोद ले रही है। ऐसे में हमारा मंत्रालय ऐसी महिलाओं को तरजीह देता है। ऐसे मामलों में किसी भी बच्चे के पैन कार्ड के फॉर्म में पिता का जिक्र नहीं होता है।”अगर वित्त मंत्रालय मेनका गांधी की इस गुजारिश को मान लेता है तो ये दूसरी बार होगा, जब सरकार सिंगल मदर को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में परिवर्तन करेगा।

2016 में पासपोर्ट नियमों में हुआ था बदलाव
2016 में विदेश मंत्रालय ने सिंगल मदर के लिए पासपोर्ट के नियमों में बड़ा बदलाव किया था। इसके तहत तलाकशुदा और सिंगल मदर को अपने बच्चों के पासपोर्ट के आवेदन में पति के हस्ताक्षर के अलावा एनओसी की जरूरत को खत्म कर दिया गया था। अब ऑनलाइन पासपोर्ट आवेदन के फॉर्म में आवेदक को कानूनी अभिभावक के रूप में केवल मां या पिता में से किसी एक ही नाम देना होता है। इस नियम के बाद सिंगल परेंट्स को अपने बच्चों के पासपोर्ट के लिए आवेदन करने में काफी आसानी हो गई है।

सिंगल मदर का मुद्दा मेनका ने उठाया था
ये मेनका गांधी ही थी, जो विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पास इस मसले को लेकर गई थीं। इस मामले में दिल्ली की सिंगल मदर प्रियंका गुप्ता ने अथॉरिटी के उस नियम के खिलाफ ऑनलाइन कैंपेन चलाया था कि वो अपनी बेटी के पासपोर्ट आवेदन के लिए अपने पूर्व पति का नाम बताएं।

पेंट और वार्निश के संपर्क से बढ़ सकता है मल्टीपल स्कलोरोसिस का खतरा : अध्ययन

लंदन : पेंट और वार्निश में मौजूद रसायन लोगों में नसों से जुड़ी विकृति मल्टीपल स्कलेरोसिस का खतरा बढ़ा सकती है। एक नए अध्ययन में ऐसा कहा गया है। इस अनुसंधान में पाया गया कि जो लोग पेंट या अन्य विलायकों (सॉल्वेंट) के संपर्क में आने वाले लोगों में ऐसे लोगों के मुकाबले मल्टीपल स्कलेरोसिस होने का खतरा 50 प्रतिशत ज्यादा बढ़ जाता है जो इसके संपर्क में बिलकुल नहीं आते।
मल्टीपल स्कलेरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें दिमाग और रीढ़ के नसों का सुरक्षा कवच नष्ट हो जाता है। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों में मल्टीपल स्कलेरोसिस का खतरा पैदा करने वाले वंशाणु होते हैं और जो विलायकों के संपर्क में रहते हैं उनमें यह बीमारी होने का खतरा सात गुणा ज्यादा बढ़ जाता है।
साथ ही उन्होंने बताया कि जो लोग धूम्रपान करते हैं उनमें यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि धूम्रपान करने वाले जो लोग विलायकों के संपर्क में रहते हैं और जिनमें इस बीमारी से संबंधित वंशाणु होते हैं उनमें यह जोखिम उन लोगों के मुकाबले 30 प्रतिशत तक ज्यादा बढ़ जाता है जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया या जो कभी विलायकों के संपर्क में नहीं रहे और जिनमें ऐसे वंशाणु नहीं थे। यह अध्ययन ‘ न्यूरोलॉजी ’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

एनएचआरसी के 25 वर्षों की कहानी वृत्तचित्र में

नयी दिल्ली : घटना प्रधान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के 25 वर्षों की कहानी पहली बार एक वृत्तचित्र में बतायी जाएगी। यह वृत्तचित्र लोगों को एक ऐसे संस्थान के बारे में जानकारी देगा जिसने ” लोकतंत्र की निगरानी करने वाली ” संस्था की भूमिका निभायी है। आयोग की रजत जयंती के मौके पर फिल्म डिविजन ने ” एनएचआरसी : 25 ईयर्स , बिलियन होप्स ” शीर्षक से वृत्तचित्र बनाया है और इसे जल्दी प्रदर्शित किया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिल्म में आयोग की 1993 में शुरुआत से लेकर अब तक का विवरण है। इसमें कुछ ऐतिहासिक मामलों का भी जिक्र किया गया है
यह आयोग अभी दक्षिणी दिल्ली में स्थित एक आधुनिक और ऊंची इमारत ‘‘ मानव अधिकार भवन ’’ में काम कर रहा है। आयोग की शुरूआत के बाद से अब तक इसे देश भर से 17.5 लाख से ज्यादा शिकायतें मिली हैं। इनमें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश से हैं। अधिकारी ने पीटीआई से कहा कि एनएचआरसी के इस वृत्तचित्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित और बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी , रेमन मैगसेसे पुरस्कार विजेता बेजवाड़ा विल्सन और आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एचएल दत्तू के साक्षात्कार भी हैं। विल्सन कई दशकों से हाथ से सफाई करने वालों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सूत्रों ने कहा कि फिल्म पर काम पिछले अक्तूबर से शुरू हुआ था। वृत्तचित्र में ‘ लाइव ’ मामलों का भी जिक्र किया गया है कि जब कोई व्यक्ति या श्रमिकों का समूह या कोई एनजीओ शिकायत दर्ज करने के लिए पहली बार आयेाग से संपर्क करता है , और आयोग द्वारा मामले कैसे पंजीकृत होते हैं। फिल्म में पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम हिंसा , छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम से संबंधित घटनाएं का भी जिक्र किया गया है , जब आयोग ने हस्तक्षेप किया था। आयोग मीडिया रिपोर्टों के आधार पर मामलों में स्वत : संज्ञान लेता है या पीड़ित या उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दायर शिकायत या पुलिस विभाग से प्राप्त रिपोर्ट पर संज्ञान लेता है।

अब साल में दो बार होंगी नीट और जेईई मेंस की परीक्षाएं

नयी दिल्ली : छात्रों को अब नीट (नेशनल एलिजबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट) और ज्वाइंट इंट्रेंस एग्जामिनेशन-मेंस (जेईई मेंस) की परीक्षाओं में शामिल होने के लिए साल में दो बार मौका मिलेगा। सरकार ने इन परीक्षाओं को कराने का जिम्मा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को दे दिया है जो अब आगे से इन सभी परीक्षाओं का आयोजन करेगी।
इसके तहत नीट की परीक्षा हर साल फरवरी और मई में जबकि जेईई मेंस की परीक्षा जनवरी और अप्रैल में होगी। एनटीए इनके अलावा यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन- नेशनल एलिजबिलिटी टेस्ट (यूजीसी नेट), कॉमन मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट (सीमैट) और ग्रेजुएट फार्मेसी एप्टीट्यूट टेस्ट (जीपैट) की परीक्षाओं का आयोजन भी करेगी। यूजीसी नेट की अगली परीक्षा दिसंबर में होगी। इसकी तारीखों की घोषणा जल्द की जाएगी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि ये सभी परीक्षाएं कंप्यूटर बेस्ड (ऑनलाइन नहीं) होंगी।
ये लोकल नेटवर्किंग से जुड़ी होंगी। इससे इन परीक्षाओं की यह व्यवस्था दुनिया के दूसरे देशों की तरह फुलप्रूफ होगी। इससे लीकेज जैसी संभावनाएं पूरी तरह से खत्म हो जाएंगी। उन्होंने साफ किया कि इन परीक्षाओं की जिम्मेदारी एनटीए के पास आने के बाद परीक्षा के पाठ्यक्रम और फीस में कोई बदलाव नहीं होगा। प्रश्नपत्रों का स्वरूप भी पहले की तरह ही रहेगा।
एक सवाल के जबाव में जावड़ेकर ने बताया कि नीट और जेईई मेंस की साल में दो बार होने वाली परीक्षाओं में छात्र दोनों में या किसी एक परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। उनके चयन का आधार दोनों परीक्षाओं में से जिसमें अच्छा स्कोर होगा, उसके आधार पर ही होगा।
मालूम हो कि सरकार ने नीट परीक्षाओं को लेकर उठे सवाल के बाद पिछले साल ही ऐसी सभी शैक्षणिक परीक्षाओं के लिए एनटीए गठन की घोषणा की थी। माना जा रहा है कि एजेंसी ने अपना काम शुरू कर दिया है। कंप्यूटर बेस्ड होने वाली इन परीक्षाओं को लेकर छात्रों को कोई दिक्कत न आए, इसलिए छात्रों को परीक्षाओं से पहले कंप्यूटर पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह प्रशिक्षण परीक्षाओं के लिए देशभर में चिह्नित होने वाले कंप्यूटर केंद्रों पर दिया जाएगा। छात्रों से इसका कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। एनटीए जल्द ही देशभर के ऐसे सभी कंप्यूटर केंद्रों की सूची जारी करेगी। नीट और जेईई मेंस की परीक्षाएं साल में दो बार कराने से छात्रों को जो सबसे बड़ा फायदा मिलेगा, वह यह कि यदि किन्हीं कारणों से उनकी कोई परीक्षा गड़बड़ हो जाए या छूट जाए, तो उन्हें इसे सुधारने का एक और मौका मिलेगा। अभी ऐसी स्थिति में छात्रों को पूरे साल का इंतजार करना होता था। अभिभावक लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। मौजूदा समय में हर साल लगभग 13 लाख छात्र नीट और 12 लाख छात्र जेईई मेंस की परीक्षाओं में हिस्सा लेते हैं।

गोपनीय रूप से आपके मोबाइल के स्क्रीन शॉट ले रहे ऐप

वाशिंगटन : कई चर्चित स्मार्ट फोन ऐप बिना आपकी अनुमति के मोबाइल पर आपके क्रियाकलापों का स्क्रीन शॉट और वीडियो बनाकर अन्य कंपनियों को भेज सकते हैं। अमेरिका की नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी (एनईयू) ने अपने अध्ययन के आधार पर इसका दावा किया है। इन स्क्रीन शॉट और वीडियो में आपका यूजर नेम, पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर समेत कई महत्वपूर्ण जानकारियां हो सकती हैं। बिना अनुमति के ये जानकारियां हासिल करना निजता का हनन तो है ही, यह अन्य समस्याओं को भी जन्म दे सकता है।
लंबे समय से यह आशंका जताई जा रही थी कि फोन गुप्त रूप से यूजर के चैट रिकार्ड करते हैं। इससे निकली जानकारियों को उन कंपनियों को बेच दिया जाता है जो इसका इस्तेमाल लोगों तक अपना विज्ञापन पहुंचाने के लिए करते हैं। इसी की जांच के लिए एनईयू के शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया था। शोध में चैट रिकार्ड करने का कोई सुबूत तो नहीं मिला। लेकिन ऐप द्वारा फोन पर होने वाले कार्यों का गुप्त रूप से वीडियो बनाने और स्क्रीन शॉट लेने की जानकारी सामने आई।
इस अध्ययन में 17 हजार एंड्रॉयड फोन ऐप का विश्लेषण किया गया। इनमें नौ हजार ऐप में स्क्रीन शॉट लेने की क्षमता पाई गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि एंड्रॉयड के साथ अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम ऐप में भी यह क्षमता हो सकती है। इस अध्ययन से जुड़े प्रोफेसर डेविड चोफंस ने कहा, “हम एक सुराग की तलाश में थे और हमें कई सुराग मिले। कुछ ऐप तो पासवर्ड का भी स्क्रीन शॉट ले सकते हैं। कई लोगों को यह बहुत साधारण बात लग सकती है लेकिन कई मायनों में यह बहुत खतरनाक है।”
अध्ययन में शामिल किए गए गोपफ नामक फॉस्ट फूड डिलेवरी ऐप ने मोबाइल फोन पर हो रहे कार्य का वीडियो बनाकर ऐपसी नामक एनालिटिक फर्म को भेज दिया। स्क्रीन शॉट लेने से पहले यूजर को इसकी कोई जानकारी भी नहीं दी गई। दोनों कंपनियों का हालांकि दावा है कि इसके पीछे कोई गलत मंशा नहीं थी। वेब डेवलपर्स इन जानकारियों का इस्तेमाल बग आदि दूर करने के लिए करते हैं। चोफंस का कहना है कि कई कंपनियां इसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए भी कर सकती हैं।

रथयात्रा विशेष : धरती का बैकुण्ठ है ‘जगन्नाथ पुरी’

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ का पवित्र धाम है, जिसे पुराणों में धरती का बैकुण्ठ कहा गया है। यह धाम हिंदू धर्म के चार धाम में से एक है। इसे नीलांचल धाम भी कहा जाता है। यहां विराजमान भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। मंदिर 1200 साल पुराना है।
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा का शुभारंभ होता है। कहते है भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को जिसने हाथ लगा दिया, उसे जीवन- मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।

ब्रह्म और स्कंद पुराण के अनुसार, पुरी में भगवान विष्णु ने पुरुषोत्तम नीलमाधव के रूप में अवतार लिया था। वह यहां सबर जनजाति के परम पूज्य देवता बन गए। सबर जनजाति के देवता होने की वजह से यहां भगवान जगन्नाथ का रूप कबीलाई देवताओं की तरह है।

जगन्नाथ मंदिर की महिमा देश में ही नहीं विश्र्व में भी प्रसिद्ध हैं। भगवान जगन्नाथ को साल में एक बार उनके गर्भ गृह से निकालकर यात्रा कराई जाती है। यात्रा के पीछे यह मान्यता है कि भगवान अपने गर्भ गृह से निकलकर प्रजा के सुख-दुख को खुद देखते हैं।

द्वापर में श्रीकृष्ण की लीला के बाद कलियुग में मुख्य देवता के रूप में श्री जगन्नाथ यानी श्री हरि विष्णु ही मान्य है। मान्यता है कि महाभारत के बाद कौरवों की गांधरी ने श्रीकृष्ण को श्राप दिया था कि कौरव वंश की तरह यदुवंश का नाश होगा।

श्राप के चलते ही यदुवंश के लोग भी लड़-लड़ कर नष्ट हो गए। श्रीकृष्ण अकेले बच गए और श्रापवश ही बहेलिए का तीर लगने पर उनकी मृत्यु हुई। ‘पुनरपि जनमं पुनरपि मरणं, पुनरपि जननी जठरे शयनं” शास्त्रों में वर्णन है कि आषाढ़ माह में जरा के आघात से श्रीकृष्ण ने देह त्यागी थी।

श्रीकृष्ण के इहलीला संवरण के बाद सखा अर्जुन ने उनकी अंत्येष्टि क्रिया के लिए शरीर में अग्नि संयोग किया पर श्रीकृष्ण पूरी तरह भस्मीभूत नहीं हुए। आकाशवाणी के निर्देशानुसार अदग्ध नाभिमंडल को अर्जुन ने सागर में प्रवाहित कर दिया।

 

यह अदग्ध नाभिमंडल पश्चिमी सागर से तैरते-तैरते पूर्वी उपकूल में लगा। पुरी के तत्कालीन राजा को स्वप्नादेश हुआ कि इस पवित्र दारु को सम्मान सहित स्वीकार कर विष्णु की मूर्ति की पूजा-अर्चना करो। महाराज ने तैर कर आएं दारु से विग्रहों का निर्माण किया और मंदिर में जगन्नाथ के रुप में स्थापित किया, जहां आज भव्य मंदिर है।

जगन्नाथ मंदिर की खासियत यह है कि शिखर पर स्थित झंडा हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। इसी तरह मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी है। इस चक्र को किसी भी दिशा से खड़े होकर देखने पर ऐसा लगता है कि चक्र का मुंह आपकी तरफ है।

मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए 7 बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं। यह प्रसाद मिट्टी के बर्तनों में लकड़ी पर ही पकाया जाता है। इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान पहले पकता है फिर नीचे की तरफ से एक के बाद एक प्रसाद पकता जाता है।

मंदिर के द्वार से पहला कदम अंदर रखने पर ही आप समुद्र की लहरों से आने वाली आवाज को नहीं सुन सकते है। आश्चर्य में डाल देने वाली बात यह है कि जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर रखेंगे, वैसे ही समुद्र की आवाज सुनाई देने लगती है।

यह अनुभव शाम के समय और भी अलौकिक लगता है। हमने ज्यादातर मंदिरों के शिखर पर पक्षी बैठे और उड़ते देखे हैं। जगन्नाथ मंदिर की यह बात आपको चौंका देगी कि इसके ऊपर से कोई पक्षी नहीं गुजरता। यहां तक कि हवाई जहाज भी मंदिर के ऊपर से नहीं निकलता।

मंदिर में हर दिन बनने वाला प्रसाद भक्तों के लिए कभी कम नहीं पड़ता साथ ही मंदिर के पट बंद होते ही प्रसाद भी खत्म हो जाता है। दिन के किसी भी समय जगन्नाथ मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई नहीं बनती। एक पुजारी मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित झंडे को रोज बदलता है।

 

ऐसी मान्यता है कि अगर एक दिन भी झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर 18 वर्षों के लिए बंद हो जाएगा। आमतौर पर दिन में चलने वाली हवा समुद्र से धरती की तरफ चलती और शाम को धरती से समुद्र की तरफ। चकित कर देने वाली बात यह है कि पुरी में यह प्रक्रिया उल्टी है।

मंदिर में योगेश्वर श्रीकृष्ण जगन्नाथ के रूप में विराजते हैं। साथ ही यहां बलभद्र एवं सुभद्रा भी हैं। श्रीकृष्ण साक्षात भगवान विष्णु के अवतार हैं। अपने भक्तों को सन्देश देते हुए उन्होंने स्वयं कहा है-जहां सभी लोग मेरे नाम से प्रेरित हो एकत्रित होते हैं, मैं वहां पर विद्यमान होता हूं। यह भारत के ओडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है। इनकी नगरी ही जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाती है। पुरी में कुल 168 मठ है। यहां भारतीय संस्कृति का मूलमंत्र सिखाया जाता है। ये हजारों सालों से विश्व मैत्री के प्रतीक है, जो गुरुग्रंथ साहिब में वर्णित है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष के द्वितीया को यहां भव्य रथयात्रा मेले का आयोजन होता है। मेले में भारत ही नहीं बल्कि सात समुंदर पार से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते है। इस दिन रथ पर आरुढ़ होकर भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र के साथ गुंडिचा मंदिर जाते है। वहां वे दस दिन तक रहते है। इन दस दिनों में उनका रूप दशावतार के भिन्न्-भिन्न् रूप प्रतिदिन बदलकर आते है।

 

दस दिन वहां रहने के पश्चात 11वें दिन एकादशी को पुन: रथ पर आरुढ़ होकर मंदिर वापस आते है। इन दस दिनों में पुरी दुधिया रोशनी में नहाएं दुल्हन की तरह सजी होती है। चारों तरफ शंख, घंटे-घड़ियाल व तरह-तरह के वाद्य यंत्रों के बीच पूजन-अर्चन होता रहता है। दशावतार दर्शन के लिए लोग पहुंचकर इस महापर्व को मनाते है।

भगवान जगन्नाथ जी की मूर्ति को उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की छोटी मूर्तियों को रथ में ले जाया जाता है और धूम-धाम से इस रथ यात्रा का आरंभ होता है। सागर तट पर बसे पूरी शहर में आयोजित होने वाली यह रथयात्रा उत्सव पूरे भारत में विख्यात है।

उत्सव के समय आस्था का जो विराट वैभव देखने को मिलता है, वह बहुत दुर्लभ है। भगवान जगन्नाथ मंदिर से तीनों देवताओं के सजाये गये रथ खिंचते हुए दो किमी की दूरी पर स्थित गुंडिचा मंदिर तक ले जाते हैं और नवें दिन इन्हें वापस लाया जाता है।

इस अवसर पर सुभद्रा, बलराम और भगवान श्रीकृष्ण का पूजन नौ दिनों तक किया जाता है। इन नौ दिनों में भगवान जगन्नाथ का गुणगान किया जाता है। भगवान कृष्ण के अवतार जगन्नाथ की रथयात्रा का पुण्य सौ यज्ञों के बराबर माना जाता है।

इस तीर्थ स्थान की यात्रा से कैलाश यात्रा का पुण्य मिलता है। मान्यता यह भी है कि कृष्ण के भक्तिपूर्ण दर्शन से मोक्ष का विधान करता है। मूर्तियों की स्थापना के बाद विष्णु ने राजा को वरदान दिया कि अश्वमेघ के समाप्त होने पर जहां इन्द्रद्युम्न ने स्नान किया है वह बांध उसी के नाम से विख्यात होगा। जो व्यक्ति उसमें स्नान करेगा वह इंद्रलोक को जायेगा और जो उस सेतु के तट पर पिण्डदान करेगा उसके 21 पीढ़ियों तक के पूर्वज मुक्त हो जायेंगे।

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए रथों का निर्माण लकड़ियों से होता है। इसमें कोई भी कील या काँटा, किसी भी धातु को नहीं लगाया जाता। रथों का निर्माण अक्षय तृतीया से प्रारम्भ होता है तथा लकड़ियां चुनने का कार्य इसके पूर्व बसन्त पंचमी से शुरू हो जाता है।

पुराने रथों की लकड़ियां भक्तजन श्रद्धापूर्वक खरीद लेते हैं और अपने-अपने घरों की खिड़कियां, दरवाजे आदि बनवाने में इनका उपयोग करते हैं। परंपरा है कि हर 14-15 सालों में भगवान की मूर्तियों को बदलकल नई मूर्तियां स्थापित की जाती हैं।

यह मूर्तियां जिन पेड़ों की बनी होती हैं वह कोई आम पेड़ नहीं होता। उन्हीं पेड़ों को इन मूर्तियों के लिए चयन किया जाता है जिसमे भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन के चिन्ह बने होते हैं। भगवान जगन्नाथ व अन्य देव प्रतिमाओं का निर्माण नीम की लकड़ी से ही किया जाता है। भगवान जगन्नाथ का रंग सांवला होता है। इसलिए नीम का वृक्ष उसी रंग का होना चाहिए। भगवान जगन्नाथ के भाई-बहन का रंग गोरा है। इसलिए उनकी मूर्तियों के लिए हल्के रंग का नीम का वृक्ष ढूंढा जाता है।

भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के लिए पेड़ चुनने के लिए कुछ खास चीजों पर भी ध्यान दिया जाता है जैसे-पेड़ में चार प्रमुख शाखाएं होनी चाहिए। पेड़ के नजदीक जलाशय (तालाब), श्मशान और चीटियों की बांबी होना जरूरी है। पेड़ की जड़ में सांप का बिल भी होना चाहिए। वह किसी तिराहे के पास हो या फिर तीन पहाड़ों से घिरा हुआ हो। पेड़ के पास वरूण, सहौदा और बेल का वृक्ष होना चाहिए।

मन्दिर की रसोई में एक विशेष कक्ष रखा जाता है, जहां पर महाप्रसाद तैयार किया जाता है। इस महाप्रसाद में अरहर की दाल, चावल, साग, दही व खीर जैसे व्यंजन होते हैं। इसका एक भाग प्रभु का समर्पित करने के लिए रखा जाता है तथा इसे कदली पत्रों पर रखकर भक्त गणों को बहुत कम दाम में बेच दिया जाता है।

जगन्नाथ मन्दिर को प्रेम से संसार का सबसे बड़ा होटल कहा जाता है। मन्दिर की रसोई में प्रतिदिन 72 क्विंटल चावल पकाने का स्थान है। इतने चावल एक लाख लोगों के लिए पर्याप्त हैं। 400 रसोइए इस कार्य के लिए रखे जाते हैं। पुरी के जगन्नाथ मंदिर की एक विशेषता यह है कि मंदिर के बाहर स्थित रसोई में 25000 भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं। भगवान को नित्य पकाए हुए भोजन का भोग लगाया जाता है। परंतु रथयात्रा के दिन एक लाख चौदह हजार लोग रसोई कार्यक्रम में तथा अन्य व्यवस्था में लगे होते हैं। जबकि 6000 पुजारी पूजा-विधि में कार्यरत होते हैं।

ऐसी मान्यता है कि इस रसोई में जो भी भोग बनाया जाता है, उसका निर्माण माता लक्ष्मी की देखरेख में ही होता है। मंदिर प्रांगण में ही विमला देवी शक्ति पीठ है। यह शक्ति पीठ बहुत प्राचीन मानी जाती है। शक्ति स्वरूपिणी मां विमला देवी भगवान श्री जगन्नाथ जी के लिए बनाए गए नैवेद्य को पहले चखती हैं फिर वह भोग के लिए चढ़ाया जाता है।
ऐसे ही इस मंदिर का सबसे बड़ा आश्चर्य है 56 भोग (पकवान)। जिसके बारे में कहा जाता है कि 56 अलग अलग तरह के भोग एक दुसरे के ऊपर रखके, जहां देवी सुभद्रा निवास करती हैं उस कमरे मे बंद कर दिया जाता है तो खाना अपने आप पक जाता है।
इसमें सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि सबसे ऊपर का खाना सबसे पहले पकता है। कहा जाता है कि देवी सुभद्रा इसे पका देती हैं। जिसे प्रसाद के रूप में लोगों में बांटा जाता है।

(साभार – नयी दुनिया केे लिए सुरेश गाँधी का आलेख)

प्रियंका चोपड़ा को अपने किरदार में देखना चाहती हैं मिताली

नयी दिल्ली : भारतीय महिला क्रिकेट टीम की दिग्गज खिलाड़ी मिताली राज की जिंदगी पर बायोपिक बनने जा रही है। पिछले साल वायकॉम 18 ने मिताली से उनकी बायोपिक बनाने की इच्छा जाहिर की थी। उस वक्त मिताली ने इस बात को हरी झंडी तो दिखाई थी तभी से बायोपिक की कास्टिंग पर काम शुरू हो गया था।
अब मिताली ने अपनी बायोपिक के लिए एक बड़ी इच्छा जाहिर की है। वह चाहती हैं कि उनका रोल एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा निभाए। मिताली ने कहा कि, ‘मैं चाहती हूं कि प्रियंका इस रोल को निभाएं। क्योंकि मुझे लगता है कि हमारी पर्सनैलिटी लगभग मिलती जुलती है।’ मिताली ने यह भी जोड़ा कि आखिरी फैसला तो मेकर्स का होगा।फिलहाल, मिताली मेकर्स को प्री प्रोडक्शन में पूरी मदद कर रही हैं। अपनी जिंदगी की कहानी सुनाने के साथ-साथ अपने नाम पर किताबों को भी खंगालने कहेंगी। मिताली से पहले क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी, बॉक्सर मैरीकॉम, धावक मिल्खा सिंह जैसे खिलाड़ियों पर भी बायोपिक आ चुकी हैं। कपिल देव की बायोपिक का काम भी जारी है। जिसमें रणवीर सिंह नजर  आएंगे।बता दें कि प्रियंका के पास इन दिनों पहले से ही एक फिल्म है ‘भारत’ जिसमें वह सलमान खान के साथ नजर आएंगी। इस फिल्म की शूटिंग भी शुरू होने वाली है।

मेडिकल टूरिज्म हब बन रहा भारत, पाँच लाख विदेशी मरीज आ रहे हर साल

बेंगलुरु ; भारत की चिकित्सा सुविधा दुनिया के देशों से सस्ती और बेहतर है। यहां के उपकरण आधुनिक हैं और डॉक्टर अनुभवी हैं। भारत में तकनीकी रूप से उन्नत अस्पताल, विशेषज्ञ डॉक्टर, कम लागत वाले उपचार और ई-मेडिकल वीजा जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन सब खासियतों की वजह से एशिया में भारत सबसे तेजी से मेडिकल हब बनने की दिशा में बढ़ रहा है। पर्यटन के बाद अब बाहर से आने-वाले मरीजों की बढ़ती संख्या इसकी तस्दीक करती है। यह कहना सही होगा कि आने वाले समय में भारत मेडिकल टूरिज्म का हब बन सकता है। भारत सरकार इस दिशा में काफी कदम उठा रही है। कैमरून का 58 वर्षीय नागरिक नगुफैक जिसके शरीर के आधे हिस्से को लकवा मार गया था। अपने दोस्त के कहने पर वह इलाज के लिए भारत आया। नगुफैक की पत्नी का कहना है कि पहली बार हम इलाज के लिए अपने देश से बाहर आए हैं। यहाँ इलाज के लिए बेहतर सुविधाएं हैं। यहाँ के उपकरण आधुनिक हैं और डॉक्टर अनुभवी हैं।
फिक्की-आईएमएस की रिपोर्ट के अनुसार, पांच लाख से अधिक विदेशी मरीज हर साल भारत में इलाज के लिए आते हैं। मरीज ज्यादातर दिल की सर्जरी, घुटनों का प्रत्यारोपण, कॉस्मेटिक सर्जरी और दंत चिकित्सा के लिए यहां आते हैं क्योंकि एशिया में उपचार की लागत सबसे कम भारत में आती है।
शंकरा वर्ल्ड हॉस्पिटल के सेल्स एंड मार्केटिंग विभाग के जनरल मैनेजर संदीप केएम का कहना है कि पश्चिमी देश से आने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा है। ब्रिटेन जैसे देशों में एनएचए प्रकार का मॉडल है, जहां इलाज के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। जो लोग वहां लंबा इंतजार कर चुके हैं या जिनके पास कम समय है, वह भारत का रुख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका दूसरा कारण यह भी है कि दूसरे देशों में ऐसी सेवाएं नहीं हैं, जिन्हें हम प्रदान कर सकते हैं क्योंकि उनके पास बुनियादी ढांचा नहीं है। वर्तमान में वैश्विक चिकित्सा पर्यटन बाजार में भारत का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा है। एक अनुमान के अनुसार, 2020 तक यह हिस्सेदारी 20 प्रतिशत यानी 9 अरब डॉलर तक हो सकती है। भारत में बड़ी संख्या में मरीज दक्षिण एशिया, अफ्रीकी देशों से आते हैं।
वेबसाइट पर उपलब्ध सभी जानकारियाँ
भारत सरकार के पर्यटन विभाग की सचिव रश्मि वर्मा का कहना है कि सभी एनएबीएच ने अस्पतालों को मंजूरी दे दी है। अब अस्पताल अपनी वेबसाइट पर इलाज से संबंधित सभी जानकारी उपलब्ध कराते हैं। भारत में आने वाले मरीज अस्पताल की वेबसाइट पर जाकर जानकारी हासिल कर सकते हैं कि कितने खर्च पर किस तरह की सुविधा मिल सकती है। रश्मि वर्मा ने आगे कहा कि हमारे पास मुंबई, दिल्ली और चेन्नई जैसे हवाई अड्डे पर स्थापित काउंटर जैसे कुछ सुविधाएं भी हैं।
मेडिकल क्षेत्र में हो रही है प्रगति
डॉक्टर नरेश त्रेहन एक विश्व प्रसिद्ध कार्डियोवैस्कुलर और कार्डियोथोरेसिक सर्जन हैं। वह अभी तक 48,000 से ज्यादा दिल की सर्जरी कर चुके हैं। न्यूयॉर्क में 20 वर्षों तक अभ्यास करने के बाद वह वापस भारत लौट आए। डॉक्टर का कहना है कि प्रगतिशील भारत ने मेडिकल के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। कुछ संस्थानों में तो वह पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय बन गया है।

मुस्लिम बहुल देश में पहली बार कोई हिन्दू महिला चुनाव लड़कर रचेगी इतिहास

कराची : पाकिस्तान में पहली बार एक हिन्दू महिला 25 जुलाई को होने वाले प्रांतीय असेंबली चुनाव में किस्मत आजमाएंगी। मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में पहली बार अल्पसंख्यक समुदाय की कोई महिला चुनाव लड़कर इतिहास रचेगी। 31 वर्षीय सुनीता परमार ने थारपरकर जिले में सिंध असेंबली निर्वाचन क्षेत्र पीएस -56 के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन भरा है। पाकिस्तान में सबसे ज्यादा हिंदू इसी जिले में रहते हैं। परमार मेघवार समुदाय की हैं। पाक की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आत्मविश्वास से भरी परमार का कहना है कि उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला इसलिए किया क्योंकि पूर्व की सरकारें उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से किए गए वायदों को पूरा करने और उनका जीवन स्तर सुधारने में असफल रहीं हैं। परमार ने कहा, पिछली सरकारों ने इस इलाके के लिए कुछ भी नहीं किया। 21वीं शताब्दी में रहने के बावजूद महिलाओं के लिए मूल स्वास्थ्य सुविधाएं और शैक्षणिक संस्थान नहीं हैं।

कुमाउंनी गायिका कबूतरी देवी का निधन

पिथौरागढ़ : मशहूर कुमाउंनी लोक गायिका कबूतरी देवी का दिल का दौरा पड़ने से आज यहां एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि वह 70 वर्ष की थीं। अपने पति दीवानी राम के निधन के बाद वह अपनी बेटियों के साथ रह रही थीं। लखनऊ में 1980 के दशक में ऑल इंडिया रेडियो में अपनी पहली प्रस्तुति के बाद ही वह लोकप्रिय हो गईं। उनके गीतों में पहाड़ी महिलाओं के जीवन में संघर्षों को अक्स मिलता है। देवी की मृत्यु के समय उनके साथ मौजूद उनकी बेटी हेमांती देवी ने कहा कि ‘ हालांकि मेरी मां को संगीत की शिक्षा उनके पिता से मिली थी , यह मेरे पिता थे जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें रेडियो स्टेशनों पर प्रस्तुति के लिए ले गये। ’लोक गायिका को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए कई सम्मानों से नवाजा गया। लोक इतिहासकार उन्हें पहाड़ की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाली मूल आवाज के रूप में याद करते हैं। लोक इतिहासकार पीडी पंत ने कहा कि ‘ उनकी मृत्यु से , हमने विशेष रूप से कुमाऊं के पूर्वी हिस्से में स्थापित समाजों की पहाड़ी संस्कृति की एक प्रतिनिधि को खो दिया है। ’