मुम्बई : दिग्गज विज्ञापन निर्माता एवं रंगमंच की दुनिया की मशहूर शख्सियत एलिक पदमसी का यहां शनिवार को एक बीमारी के बाद निधन हो गया। यह जानकारी पदमसी के परिवार ने दी। वह 90 वर्ष के थे। पदमसी विज्ञापन कंपनी लिंटास के भारत में पूर्व मुख्य कार्यकारी रह चुके हैं और उन्होंने कंपनी को देश में शीर्ष रचनात्मक एजेंसियों में से एक बनने में मदद की। वह बाद में दक्षिण एशिया में लिंटास के क्षेत्रीय समन्वयक बने।
उन्होंने एजेंसी में मशहूर विज्ञापन बनाये जिसमें सर्फ के लिए ‘ललिताजी’, आटो कंपनी बजाज के लिए ‘हमारा बजाज’ ‘चेरी ब्लॉसम’ शू पॉलिश के लिए ‘चेरी चार्ली’, एमआरएफ के लिए ‘मसल मैन’ और ‘लिरिल’ के लिए झरने के नीचे मॉडल वाला विज्ञापन शामिल है। एक कलाकार के तौर पर पदमसी को रिचर्ड एडिनबरो की पुरस्कृत फिल्म ‘गांधी’ में जिन्ना के किरदार के लिए याद किया जाएगा। पदमसी का जन्म 1928 में पारंपरिक रूप से धनी कच्छी खोजा मुस्लिम परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने बड़े भाई बॉबी द्वारा निर्देशित नाटक ‘मर्चेंट आफ वेनिस’ से सात वर्ष की आयु में रंगमंच की दुनिया में कदम रखा। साठ वर्ष से अधिक समय के अपने करियर में उन्होंने 70 से अधिक नाटकों का निर्देशन किया और उन्हें अपने थिएटर प्रोडक्शन एविटा, जीसस क्राइस्ट सुपरस्टार और तुगलक के लिए जाना जाता है। पदमसी ने कई सामाजिक मुद्दों का समर्थन किया जिसमें वित्तीय राजधानी का महानगरीय चरित्र का संरक्षण शामिल है। उन्हें 2000 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनके निधन पर कई गणमान्य व्यक्तियों ने संवेदना व्यक्त की। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनको विज्ञापन उद्योग के ‘रचनात्मक गुरू’ और ‘दिग्गज’ थे जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ‘गजब का संप्रेषक’ बताया। कोविंद ने ट्वीट किया, ‘‘रचनात्मक गुरू, रंगमंच व्यक्तित्व और विज्ञापन उद्योग के दिग्गज एलिक पदमसी के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ। उनके परिवार, मित्रों और सहयोगियों के प्रति मेरी संवेदना।’ मोदी ने कहा, ‘‘एलिक पदमसी के निधन से दुखी हूं। वे एक गजब के संप्रेषक थे, विज्ञान के क्षेत्र में उनके व्यापक कार्य को हमेशा याद रखा जाएगा। रंगमंच के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। उनके परिवार, मित्रों और सहयोगियों के प्रति मेरी संवेदना।’’
दिग्गज विज्ञापन निर्माता एलिक पदमसी का निधन
इटली में शादी कर भारत लौटे दीपिका-रणवीर
मुम्बई : इटली में शादी करने के बाद अभिनेता रणवीर सिंह और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण रविवार की सुबह भारत लौटे। इस दौरान हाथों में हाथ लिए नवविवाहित जोड़े ने हवाईअड्डे पर मौजूद अपने प्रशंसकों का अभिवादन किया।
दोनों सितारे पारंपरिक परिधानों में नजर आए। रणवीर जहां लाल और सुनहरे रंगे के रेशमी कुर्ते-पायजामे में दिखे तो वहीं दीपिका सुनहरे रंग के सूट और बनारसी दुपट्टे में नजर आईं। इसके बाद गृह प्रवेश के लिए घर पहुंचा जोड़ा मीडिया से रूबरू हुआ और हाथ जोड़कर पत्रकारों की बधाई स्वीकार की।

दीपिका-रणवीर ने 14 और 15 नवंबर को इटली के लेक कोमो में शादी की थी। 14 नवंबर को उनका विवाह कोंकणी रस्मो-रिवाज से और 15 नवंबर को उत्तर भारतीय रस्मो-रिवाज से हुआ। दोनों करीब 6 साल से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। दीपिका और रणवीर ने 21 नवंबर को बेंगलुरु और 28 नवंबर को मुंबई में रिसेप्शन रखा है।
कैफ़ी और फै़ज़ की थी समान विचारधारा : शबाना आजमी
लाहौर : पाकिस्तान के लाहौर में आयोजित चौथे इंटरनेशनल फ़ैज़ फेस्टिवल में शामिल होने आईं वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आज़मी ने कहा कि उनके पिता और मशहूर शायर कैफ़ी आज़मी और चर्चित शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की विचारधारा समान थी और वे बहुत गहरे दोस्त थे। वह तीन दिवसीय समारोह में भाग लेने के लिए अपने पति और नामचीन शायर जावेद अख्तर के साथ यहां पहुंची थीं।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र ‘‘ कैफी़ और फ़ैज़’’ में शबाना ने कहा, ‘‘हमारा घर थोड़ा छोटा था, लेकिन वहां फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, जोश मलीहाबादी और फ़िराक़ गोरखपुरी जैसे साहित्य जगत के दिग्गज जुटा करते थे। मुझे तब शायरी की समझ नहीं थी लेकिन उन बैठकों का जो माहौल था वह बहुत उम्दा हुआ करता था।’’ प्रसिद्ध अभिनेत्री ने कहा कि उनके बचपन के समय उनका परिवार ऐसी जगह रहता था जो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के सदस्यों के मिलने की जगह भी थी।
शबाना आज़मी ने पुराने दिन याद करते हुए कहा, ‘‘ हम लोग एक छोटे कमरे में रहते थे और कम्युनिस्ट पार्टी का लाल झंडा उस इमारत का अहम हिस्सा था।’ उन्होंने कैफ़ी आज़मी के फिल्मी गीत लिखने के तरीके की चर्चा करते हुये कहा कि उनकी फिल्म ‘अर्थ’ का यह गाना, ‘‘कोई ये कैसे बताए वो तन्हा क्यों हैं…’’ बहुत आसान शब्दों में लिखा गया है लेकिन उनके मायने बहुत गहरे हैं।
उन्होंने कहा कि फै़ज़ और कैफ़ी दोनों की विचारधारा एक ही थी। दोनों मानवतावादी थे, इंसानों से प्यार करते थे और उनमें सहिष्णुता का स्तर गहरा था। इस दौरान अभिनेत्री ने मां शौकत आज़मी और पिता कैफ़ी आज़मी को याद करते हुए बताया कि कैसे 1947 में एक मुशायरे में दोनों की मुलाकात हुई और उनकी मुहब्बत परवान चढ़ी। शबाना ने फ़ैज़ की मशहूर नज़्म ‘‘ बोल के लब आज़ाद हैं तेरे’’ भी गुनगुनाई।
वहां मौजूद फ़ैज़ की पुत्री सलीमा हाशमी ने कहा, ‘‘ फ़ैज़ की बड़ी तमन्ना थी कि वह टेस्ट क्रिकेटर बनें और फिल्में बनाएं। उन्होंने ‘‘जागो हुआ सवेरा’’ और ‘‘ दूर है सुख का गांव’’ नाम से फिल्में बनायीं पर उनकी क्रिकेटर बनने की ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी। जावेद अख्तर ने भी अपनी रचनाएं वक्त, नया हुक्मनामा और आंसू भी श्रोताओं को सुनाईं।
लोंगेवाला की लड़ाई के शूरवीर महावीर चक्र से सम्मानित चांदपुरी का निधन
चंडीगढ़ : भारत पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध के समय लोंगेवाला की लड़ाई के नायक रहे ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) कुलदीप सिंह चांदपुरी का मोहाली के एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके परिवार ने यह जानकारी दी। 78 साल के ब्रिगेडियर चांदपुरी कैंसर से पीडि़त थे। उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटे हैं।
उन्हें राजस्थान के थार रेगिस्तान की लोंगेवाला चौकी में निभाई भूमिका के लिए देश का दूसरा सर्वोच्च सैन्य सम्मान महावीर चक्र प्रदान किया गया था। उन्होंने 1971 युद्ध की एक रात भारतीय सैनिकों की एक छोटी टुकड़ी का नेतृत्व करते हुये पाकिस्तानी हमले को नाकाम कर दिया था। वर्ष 1997 में आयी हिंदी फिल्म ‘बॉर्डर’ राजस्थान में हुई इसी भारत-पाकिस्तान लड़ाई पर बनी थी। उसमें सन्नी देओल ने ब्रिगेडियर चांदपुरी की भूमिका निभायी थी। ये फिल्म क्लासिक का दर्जा पा चुकी है। 1963 में ऑफीसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें पंजाब रेजीमेंट की 23वीं बटालियन में कमीशन दिया गया।
उन्होंने 1965 में हुये युद्ध में भी हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्होंने एक साल संयुक्त राष्ट्र आपात बल (यूएनईएफ) में भी सेवाएं दीं। उन्होंने महू में इन्फैंट्री स्कूल में दो बार बतौर प्रशिक्षक भी काम किया। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने ब्रिगेडियर चांदपुरी के निधन पर शोक प्रकट करते हुये कहा कि लोंगेवाला की लड़ाई में उनका अनुकरणीय एवं नायकों वाला नेतृत्व रक्षा सेवााओं के युवा सैनिकों और अधिकारियों को अपने कर्तव्यों को समर्पण, प्रतिबद्धता और निष्कपट भाव से निभाने के लिए प्रेरित करता है।
महावीर चक्र सम्मान के उद्धरण में लिखा गया है: “मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी राजस्थान क्षेत्र में पंजाब रेजिमेंट की एक कंपनी बटालियन का नेतृत्व कर रहे थे जो एक इलाके में तैनात थी।” लोंगेवाला की लड़ाई में, ब्रिगेडियर चांदपुरी ने अपना गतिशील नेतृत्व, असाधारण साहस और दृढ़ संकल्प प्रदर्शित किया। इसमें कहा गया है कि जब तक और सैनिक वहां नहीं पहुंचे, तब तक उन्होंने एक बंकर से दूसरे बंकर तक जाकर जवानों को प्रेरणा देने का काम किया।
नफीसा अली तीसरे चरण के कैंसर से पीड़ित
नयी दिल्ली : दिग्गज फिल्म एवं थियेटर अभिनेत्री नफीसा अली ने बताया कि वह तीसरे चरण के कैंसर से पीड़ित हैं और उसका इलाज करा रही हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर इसका खुलासा किया, जिसमें उन्होंने अपनी अच्छी दोस्त और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की है। तस्वीर के साथ 61 वर्षीय अली ने लिखा, ‘‘बस अभी-अभी मैं अपनी अत्यंत प्रिय दोस्त से मिली जिन्होंने मुझे हाल में पता चले स्टेज 3 कैंसर से जल्दी ठीक होने की शुभकामनाएं दीं।’ पश्चिम बंगाल में जन्मी नफीसा ने 1979 में शशि कपूर की फिल्म ‘‘जुनून’’ के साथ फिल्मी दुनिया का अपना सफर शुरू किया था। उन्होंने ‘‘मेजर साब’’, ‘‘लाइफ इन ए मेट्रो’’, ‘‘यमला पगला दीवाना’’ और ‘‘साहब बीवी और गैंगस्टर 3‘‘ जैसी फिल्मों में काम किया है। वर्तमान में अली कांग्रेस पार्टी की सदस्य हैं। उन्होंने 2009 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। अली ने अर्जुन अवॉर्ड विजेता खिलाड़ी कर्नल आर एस सोढ़ी से शादी की है और उनके तीन बच्चे हैं।
अभिनेत्री नेहा धूपिया ने दिया बेटी को जन्म
मुम्बई : बॉलीवुड अभिनेत्री नेहा धूपिया ने रविवार को एक बेटी को जन्म दिया है। नेहा के प्रचार अधिकारी के मुताबिक, उन्हें खार उपनगर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां सुबह 11 बजे उन्होंने अपनी पहली संतान को जन्म दिया। अधिकारी ने कहा कि नेहा और उनकी बेटी दोनों स्वस्थ हैं। नेहा धूपिया ने इसी साल 10 मई को बॉलीवुड अभिनेता अंगद बेदी से शादी की थी। 24 अगस्त को नेहा ने सोशल मीडिया पर अपने गर्भवती होने का खुलासा किया था।
स्थायी नहीं है स्टारडम, वर्तमान में जीता हूँ : पंकज त्रिपाठी
मुम्बई : ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के मशहूर अभिनेता पंकज त्रिपाठी का कहना है कि वह वर्तमान में जीते हैं तथा उन्हें मिला स्टारडम स्थायी नहीं है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के छात्र रहे त्रिपाठी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए पीटीआई-भाषा से कहा, ‘मैं पहले ज्यादा चिंतित नहीं रहता था। अब सफल होने के बावजूद मैं अंहकारी नहीं हूं, न ही आसमान में उड़ रहा हूं, क्योंकि मैं जानता हूं कि मुझे जो स्टारडम मिला है, वह स्थायी नहीं है।’ त्रिपाठी ने कहा, ‘मैं जानता हूं कि कुछ समय बाद कोई और पंकज आएगा, जिसके बाद मेरी कामयाबी फीकी पड़ सकती है। हालांकि मैं पहले भी चिंतित नहीं था, न ही अब हूं।” अभिनेता ने कहा कि वह हमेशा खुश रहने और वर्तमान में जीने में विश्वास करते हैं। पंकज 2012 में आई फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से मशहूर हुए थे। इसके बाद उन्होंने न्यूटन, बरेली की बर्फी, रुद्र भैया और स्त्री में भी बेहतरीन अभिनय किया। फिलहाल वह सतीश कौशिक की आगामी फिल्म ‘कागज’ को लेकर उत्साहित हैं। इस फिल्म में वह आजमगढ़ के लाल बिहारी का किरदार निभाते नजर आएंगे, जिन्होंने खुद को जीवित साबित करने के लिए 18 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी।
पत्नियों को छोड़ा, रद हुए 25 प्रवासी भारतीयों के पासपोर्ट
नयी दिल्ली : भारत सरकार ने अपनी-अपनी पत्नियों को छोड़ने के चलते 25 प्रवासी भारतीयों के पासपोर्ट रद कर दिए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इनमे आठ लोगों का पासपोर्ट मंत्रालय की सिफारिश पर रद किया गया है। अन्य मामलों में राज्य पुलिस ने कार्रवाई की मांग की थी।
अधिकारी ने बताया कि प्रवासी भारतीयों द्वारा पत्नियों को छोड़ने की शिकायतें हमें लगातार मिलती रहती हैं। उन शिकायतों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाती है। पासपोर्ट रद करने के अलावा कुछ मामलों में पुलिस के पास लुकआउट सर्कुलर जारी करने का भी अधिकार है। संज्ञेय अपराध के मामलों में जब जांच एजेंसी को लगता है कि कोई पति गैरजमानती वारंट जारी होने के बावजूद कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहा है या जान-बूझकर गिरफ्तारी से भाग रहा है, तो उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया जा सकता है।
भारत की पहली मिस वर्ल्ड रीता फारिया..
52 वर्ष पहले एशिया समेत भारत को मिस वर्ल्ड का पहला खिताब दिलाने वाली रीता फारिया ने एक साल बाद ही मॉडलिंग को अलविदा कह दिया था। उन्हें चकाचौंध भरी ये दुनिया खोखली लगने लगी थी। आपने हॉलिवुड-बॉलिवुड फिल्मों में बहुत सी विश्व सुंदरियों को काम करते देखा होगा और उनके बारे में जानते भी होंगे। इनकी पूरी जिंदगी चकाचौंध में गुजर जाती है, लेकिन हम यहां एक ऐसी विश्व सुंदरी की बात कर रहे, जो इस ग्लैमरस दुनिया को छोड़कर लंबे अर्से से गुमनामी में जीवन जी रही हैं। हम बात कर रहे हैं 52 साल पहले भारत को विश्व सुंदरी का पहला खिताब दिलाने वाली रीता फारिया की। भारत के साथ ही वह एशिया में भी विश्व सुंदरी का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला थीं। वह पहली ऐसी मिस वर्ल्ड रहीं जो पेशे से एक डॉक्टर (फिजीशियन) भी हैं। उन्होंने आज ही के दिन 17 नवंबर 1966 को भारत को दुनिया में ये सम्मान दिलाया था। उनके नक्शे कदम पर चलते हुए भारत को अब तक छह विश्व सुंदरी और दो ब्रह्मांड सुंदरी (MISS UNIVERSE) मिल चुकी हैं।

21 वर्ष की उम्र में जीता था खिताब
1945 में मुंबई में जन्मी रीता फारिया पॉवेल ने 17 नवंबर 1966 को जब मिस वर्ल्ड का खिताब जीता, वह महज 21 वर्ष की थीं। इससे पहले वह मिस मुंबई भी रह चुकी थीं। उनकी परवरिश गोवा के एक परिवार में हुई थी। उस वक्त वह डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहीं थीं। मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने के बाद उन्होंने करीब एक साल तक मॉडलिंग की। इसके बाद उन्होंने मॉडलिंग को अलविदा कह दिया। वर्ष 1998 में उन्होंने फैशन की दुनिया में दोबारा कदम रखा और फेमिना मिस इंडिया की जज भी बनीं। मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में भी वह बतौर जज शामिल हो चुकी हैं।
दो बेटे और पांच पोते-पोतियां हैं अब
मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने के एक वर्ष बाद मॉडलिंग को अलविदा कह चुकी रीता ने इसके बाद मुंबई स्थित ग्रांट मेडिकल कॉलेज व सर जमशेदजी जीजाबाई ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल से एमबीबीएस की अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए लंदन के किंग्स कॉलेज एवं हॉस्पिटल चलीं गईं। वर्ष 1971 में उन्होंने डेविड पॉवेल नाम के युवक से शादी कर ली। 1998 में उन्होंने ग्लैमरस लाइफ में एक बार वापसी की, लेकिन ज्यादा दिन वह इस चकाचौंध में नहीं रह सकीं। फिलहाल वह अपने पति एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डेविड पॉवेल के साथ आयरलैंड के डबलिन में रहती हैं। यहीं दोनों डॉक्टरी की प्रैक्टिस कर रहे हैं। इनके दो बेटे (डेडर्रे व एन मैरी) और पांच पोते-पोतियां (पैट्रिक, कॉमैक, डेविड, मारिया व जॉनी) हैं।
नहीं रहे स्पाइडरमैन-हल्क के रचयिता स्टैन ली
लॉस एंजिल्स : अअमेरिका के मशहूर कॉमिक लेखक स्टैन ली का 95 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने स्पाइडर मैन और द हल्क जैसे सुपरहीरो कैरेक्टर रचे थे। साथ ही, अमेरिका में कॉमिक कल्चर लाए थे। इसके अलावा स्टैन ली ने भारतीय सुपरहीरो ‘चक्र’ भी रचा था। इस भारतीय सुपरहीरो पर 2013 में फिल्म भी बनी। बीते कुछ सालों से स्टैन ली कई बीमारियों से पीड़ित थे।
ली की बेटी ने हॉलीवुड की एक मैगजीन टीएमजेड को बताया, “मेरे पिता अपने सभी प्रशंसकों से प्यार करते थे। वह एक महान और शानदार व्यक्ति थे।” न्यूयॉर्क में रहने वाले ली अपने चश्मे के चलते जाने जाते थे और वह अकसर समारोहों में दिखाई देते थे।
भारतीय युवा की कहानी थी ‘चक्र’ में
स्टेन ली ने 2013 में भारतीय सुपरहीरो को लेकर एक फिल्म बनाई। इसका नाम ‘चक्र’ था। कार्टून नेटवर्क, ग्राफिक इंडिया और पॉ इंटरनेशनल की साझेदारी में बनी फिल्म ‘चक्र : द इंविंसिबल’ कार्टून नेटवर्क पर रिलीज हुई थी। उस वक्त ली ने कहा था कि वे इस फिल्म को लेकर काफी उत्साहित हैं। यह फिल्म एक युवा भारतीय राजू राय पर आधारित थी, जो जो मुंबई में रहता है। फिल्म में राजू अपने मार्गदर्शक डॉ. सिंह के साथ मिलकर एक ऐसी पोशाक बनाता है, जिसे पहनने से शरीर के रहस्यमयी चक्र सक्रिय हो जाते हैं।
अंकल ने दिलाई पहली नौकरी
स्टैन ली को उनके अंकल ने किशोरावस्था में पहली नौकरी दिलाई। इसमें ली को बतौर फिलिंग आर्टिस्ट कार्टून कैरेक्टर में स्याही भरनी होती थी। एक बार ली ने कहा था, “मुझे एक दिन लगा था कि मैंने एक महान अमेरिकी नॉवेल लिखा और उसमें अपने सही नाम का इस्तेमाल नहीं किया।” उनका सही नाम स्टैनली लीबर था। ली ने जो कैरेक्टर बनाए उनमें असाधारण शक्ति थी। लोगों को उनमें पूरे ब्रह्मांड में राज करने की ताकत नजर आती थी। ली के बनाए सुपरहीरो दशकों तक छाए रहे।
ब्रांड बन चुके हैं ली के कैरेक्टर
स्पाइडरमैन हो या ब्लैक पेंथर, एक्समैन, फेंटास्टिक फोर, आयरन मैन, थोर, डॉक्टर स्ट्रेंज, ये सारे एक ब्रांड बन चुके हैं। स्पाइडर मैन, थोर, आयरन मैन की हॉलीवुड में कई फिल्मों की सीरीज आ चुकी हैं। ये फिल्में पिछले एक दशक में 1.3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा कमा चुकी हैं। इस लिहाज से उनकी एक फिल्म की औसत कमाई 6500 करोड़ रुपए रही।
फिल्मों में छोटा सा रोल भी करते थे
अपने कैरेक्टर पर बनने वाली फिल्म में ली एक छोटा सा रोल भी करते थे। ‘एवेंजर्स: इनफिनिटी वॉर’ में ली एक बस ड्राइवर के रोल में दिखाई दिए थे। सॉ और इनसाइडस जैसी फिल्मों के निर्देशक और ऑस्ट्रेलियाई फिल्मकार ने जेम्स वॉन ने ट्वीट किया, “ली सही मायने में लेजेंड थे। मेरे दर्शक उनके बिना अच्छा महसूस नहीं करेंगे। मैं उनके काम के लिए किस तरह शुक्रिया अदा करूं, यह समझ नहीं आता।”




