Thursday, April 16, 2026
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सर्दियों में एड़ियों को रखें सलामत

सर्दियों में अक्सर कई लोगों की एड़ियां फटने लगती हैं. एक ओर जहां फटी एड़ियां देखने में बुरी लगती हैं, वहीं तकलीफ बढ़ जाने पर इनमें से खून आना भी शुरू हो जाता है, जिससे पैरों में काफी दर्द होता है। आइए जानें, फटी एड़ियों से राहत पाने के तरीकों के बारे में…

1.  रोज लगाएं ग्लि‍सरीन– फटी एड़ियों के लिए ग्लि‍सरीन किसी वरदान से कम नहीं। आप इसे हर रात सोने से पहले एड़ियों पर लगाएं। ऐसा नियमित करते रहने से एड़ी जल्दी ठीक हो जाएंगी.

 2. नारियल तेल- फटी और बेजान एड़ियों के लिए नारियल तेल एक अच्छा घरेलू उपाय है। ये एड़ी में नमी को बनाए रखता है. इसके अलावा ये फंगस जैसे बैक्टीरिया संक्रमण से भी एड़ी को सुरक्षित रखता है।

3. स्क्रबिंग- फटी एड़ियों को स्क्रबिंग की मदद से मुलायम बनाया जा सकता हैं. ऐसा करने से मृत त्वचा हट जाती है और एड़ियां मुलायम हो जाती है। स्क्रबिंग करने से पहले अपने पैर को थोड़ी देर के लिए गुनगुने पानी में डुबोकर रखें।

सर्दियों में फैशन रहे मस्त

सर्दियों में खुद को ठंड से बचाना और उसके साथ स्टाइल बनाये रखना करना आसान नहीं होता। लेकिन अगर आप कुछ आसान से फैशन हैक्स अपनाएं तो आप ठंड से भी बची रहेंगी और स्टाइलिश भी दिखेंगी। तो आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ विटर फैशन हैक्स के बारे में-
भारी-भरकम जैकेट्स पहनने से भले ही आपकी ठंड बच जाए, लेकिन देखने में ये बहुत अनकूल नजर आते हैं। ऐसे में खुद को ठंड से सुरक्षित रखते हुए फैशनेबल दिखना चाहती हैं तो लेयरिंग का सहारा लें। हल्के और पतले स्वेटर के साथ फैशनेबल टॉप काफी अच्छे दिखेंगे। इसके अलावा आप फुल स्लीव वाली टीशर्ट्स के ऊपर एक स्वेट-शर्ट पहन सकती हैं और इसके ऊपर लंबे स्वेटर्स पहनकर एक अलग लुक में नजर आ सकती हैं।


अगर डेनिम जैकेट की बात करें तो ये लॉन्‍ग, शॉर्ट, हॉफ स्‍लीव्‍स, लॉन्‍ग स्‍लीव्‍स, कोल्‍ड शोल्‍डर और कई तरह की आती हैं। आप इन्हें अपनी ड्रेस के हिसाब से अलग-अलग तरह से पेयर कर सकती हैं।
विंटर फैशन के लिहाज से स्टोल काफी महत्वपूर्ण है। फ्लॉवर प्रिंट, डॉटेड प्रिंट और अलग-अलग तरह के कलर कॉम्बिनेशन वाले स्टोल्स आप पर काफी फबेंगे। इन्हें आप एथनिक और कंटेंपरेरी तरह की ड्रेसेस के साथ कंबाइन कर सकती हैं। स्टोल्स को आप जीन्स के साथ पहनते हुए गले में अलग-अलग तरीके से रैप कर सकती हैं। आप चाहें तो न्यूज पेपर प्रिंट वाले स्टोल्स कैरी कर सकती हैं, ये काफी डिफरेंट लुक देते हैं।


सर्दियों में किसी स्पेशल फंक्शन में अगर कोट या शरीर को पूरी तरह से ढंक लेने वाले जैकेट्स पहन लें, तो ड्रेसेस पूरी तरह से छिप जाती है। इसकी जगह आप वुलन पार्टी वियर कुर्ती पहनें तो स्टाइलिश दिखने के साथ-साथ ठंड से भी आप पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगी।
वेलवेट ड्रेसेस अब सिर्फ रोमांटिक और शाम को गोथिक शैली की पार्टी में पहने जाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा काफी ज्यादा बढ़ गया है। इस तरह के ड्रेसेस पहनने पर आप काफी जीवंत दिखती हैं। इन ड्रेसेस को दिन में भी पहना जा सकता है। वेल्वेट ट्राउजर, बूट, ब्लेजर में शाम की पार्टी में आप अलग दिखेंगी।हाई वेस्ट पैंट्स पहन रही हैं तो उसके साथ सही तरह के टॉप का चयन करें। हाई-वेस्ट पैंट्स के साथ क्रॉप टॉप, ब्लेजर और श्रग्स खूब जंचते हैं। क्रॉप टॉप के साथ हाई हील्स पहनें का लुक काफी अच्छा लगता है।
हाई वेस्ट बॉटम पहनते हुए आप फुटवियर के कई अंदाज आजमा सकती हैं। इसके साथ स्टीलेटोज और न्यूड पम्प्स सबसे अच्छे अट्रैक्टिव लगते हैं।

सर्दियों में खाएं कुछ सेहतमन्द

गुड़ व सोंठ के लड्डू


सामग्री : 250 ग्राम गुड़ काला, 100 ग्राम मेथी दाना, 25 ग्राम गोंद, 25 ग्राम मखाने, 200 ग्राम बारीक कटे मेवे (काजू, बादाम, पिस्ता और पिस्ता), 500 मिली लीटर घी, 3 बड़ा चम्मच खसखस के दाने, 200 ग्राम नारियल पाउडर, 1 छोटी कटोरी किशमिश, 1 छोटी कटोरी सोंठ पाउडर
विधि : एक कड़ाही में आधा घी डालकर हल्का गर्म करें। फिर इसमें गोंद डालकर सुनहरा होने तक तल लें. धीमी आंच पर गोंद तलेंगे तो यह अच्छी तरह पक जाएगा। गोंद जब पक जाएगा तो यह फूल जाएगा। गोंद को एक बर्तन में निकाल लें. घी में मखाने डालकर हल्का सुनहरा होने तक तल लें. इसे भी एक बर्तन में निकाल लें। मखाने के बाद घी में कटे हुए मेवे डालकर सुनहरा होने तक भून लें। तलने के बाद मेवों को निकालकर गुड़ के साथ मिला लें। इसके बाद कड़ाही में नारियल पाउडर हल्का भूरा होने तक भून लें. इसे भी कड़ाही से निकाल लें। फिर कड़ाही में खसखस के दाने डालकर सुनहरा होने तक भूनकर निकाल लें। कड़ाही में एक चम्मच और घी डालकर किशमिश डालें, हल्का तलकर निकाल लें. आंच बंद कर दें। गोंद और मखाने को दरदरा कूट लें। सभी चीजों को एक बड़े बर्तन में डालकर अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद बचा हुआ घी हल्का गर्म करके डालकर मिला लें। मिश्रण से मनचाहे आकार के लड्डू बना लें। तैयार लड्डुओं को एयरटाइट डिब्बे में भरकर रख लें।

 

कॉफी स्मूदी


सामग्री : 2 1/2 कप टोंड मिल्क, 2 टेबल स्पून वनीला प्रोटीन पाउडर, 1 टीस्पून इंस्टैंट कॉफी पाउडर, 1/4 टीस्पून दालचीनी पाउडर, 3 आइस क्यूब्स (ऐच्छिक)
विधि : मिक्सर ग्राइंडर जार में दूध , प्रोटीन पाउडर, कॉफी पाउडर और आइसक्यूब डालकर एक मिनट तक ब्लेंड कर लें। तैयार स्मूदी को दो गिलासों में निकाल लें। इन पर एक-एक चुटकी दालचीनी पाउडर छिड़कर पीएं या सर्व करें।

बगैर आयरन किये निकालें कपड़ों की सिलवटें

कपड़े आयरन करना एक अच्छी आदत है। इस्तरी किये हुए कपड़ों की चमक ही अलग होती है मगर तब क्या हो जब आयरन खराब हो जाए या बत्ती गुल हो जाए..तब आप इन तरीकों से अपने कपड़ों की सिलवटें निकाल सकती हैं और वह भी बगैर किसी खर्च के –
ब्लो ड्रायर – अगर आपके पास प्रेस नहीं है और कपड़ों की सिलवटें निकालना चाहती हैं तो ब्लो ड्रायर का इस्तेमाल कर सकती हैं। सबसे पहले कपड़ों को एक जगह पर बिछा दें। फिर इन कपड़ों पर थोड़ी दूरी से ब्लो ड्रायर करें। ऐसा करने से कपड़ों की सिलवटें निकल जाएंगी।
सिरका – सिरके से भी आप कपड़ों की सिलवटें निकाल सकती हैं। पानी में सिरका डालकर अच्छे से मिला लें। फिर पानी में कपड़ा गीला करें और सूखने के लिए रख दें।
तौलिया – तौलिए से कपड़ों की सिकुड़न को आसानी से निकाला जा सकता है। सबसे पहले कपड़े को साफ टेबल पर बिछा दें। फिर उसपर गीला तौलिया रखकर धीरे-धीरे दवाएं। ऐसा करने से कपड़े की सिलवटें दूर हो जाएंगी।
मैट्रेस के नीचे रख दे – अगर आपको सुबह ऑफिस जाना है और आपके कपड़े आयरन नहीं है तो एक काम करें। रात को बेड पर रखें भारी मैट्रेस के नीचे अच्‍छे से कपड़ों को फैलाकर रख दें। ध्‍यान रखें कि कहीं से भी आपके कपड़ों के कोने मुड़े ना हों। इसके बाद सुबह देखें आपको सिलवटे गायब मिलेंगी।
वॉशिंग मशीन ड्रायर – ड्रायर से भी आप कपड़ों की सिकुड़न को गायब कर सकते हैं। बस अपने ड्रायर में 2-3 आइस क्यूब डालने होंगे और कुछ मिनट के लिए गर्म होने दें। मगर ध्यान रहें कि इस ट्रिक का इस्तेमाल करने के बाद कपड़ों को इक्ट्ठा करके नहीं बल्कि उनको हैंगर में टांग दें।

वीरांगना की सोदपुर इकाई की कार्यकारिणी गठित

कोलकाताः अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउंडेशन की पश्चिम बंगाल प्रदेश इकाई की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के नेतृत्व में शुक्रवार को सोदपुर अंचल इकाई का विस्तार पर कार्यकारिणी का गठन किया गया। वीरांगना की सोदपुर अंचल इकाई की अध्यक्ष ज्योति सिंह, महामंत्री सुनीता सिंह, उपाध्यक्ष ललिता सिंह, सचिव माला सिंह तथा सुलेखा सिंह, रीता सिंह, मंजू सिंह, बबिता सिंह, कलावती सिंह, रेखा सिंह, कविता सिंह, संगीता सिंह, गीता सिंह, सुशीला सिंह सदस्य बनायी गयीं। प्रतिभा सिंह ने इस अवसर पर बताया कि जल्द ही ज़रूरतमंद महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण का आयोजन किया जायेगा, जिसमें सभी समुदाय व धर्म की महिलाएं लाभान्वित होंगी।

पंत ने देखा था लोकायतन में विश्‍व मानवता का स्वप्न

कोलकाता : हिंदी के प्रसिद्ध छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत की पुण्यतिथि के अवसर पर भारतीय भाषा परिषद के ‘कालजयी कृति विमर्श’ के कार्यक्रम में बोलते हुए इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष और आलोचक प्रो.राजेंद्र कुमार ने कहा कि पंत प्रकृति के सुकुमार कवि ही नहीं थे बल्कि वे मनुष्यता के विराट स्वप्न और विश्‍व चेतना से जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि पंत का महात्वकांक्षी काव्य है ‘लोकायतन’ जिसमें उन्होंने गांधी में ‘जन के राम’ की खोज की और गांव को विषय बनाया। उन्होंने छायावाद के सौ साल पूरे होने पर पंत की काव्य यात्रा पर फिर से विचार करने की जरूरत बताई क्योंकि आलोचकों ने उनकी काफी उपेक्षा की थी। आरंभ में विषय प्रस्तुति करते हुए कलकत्ता विश्‍वविद्यालय के प्रोफेसर राजश्री शुक्ला ने ‘लोकायतन’ को भौतिक प्रगति और आध्यात्मिकता के समन्वय का काव्य कहा और इस पर अरविंद दर्शन के प्रभाव का रेखांकन किया। उन्होंने कहा कि पंत दुख और सुख के बीच सामंजस्य चाहते थे। अध्यक्षीय भाषण देते हुए डॉ.शंभुनाथ ने कहा कि छायावाद हर तरह के कट्टरवाद और भोगवाद को चुनौती देने वाला विश्‍व मानवता का काव्य है। पंत का लोकायतन राष्ट्रीयता, धर्म और जाति से ऊपर उठकर पृथ्वी के सभी लोगों के लिए एक घर का स्वप्न है। वे परिवर्तन के कवि हैं। उनका काव्य मानव हृदय का विस्तार करता है। आरंभ में परिषद की मंत्री श्रीमती बिमला पोद्दार ने सभी का स्वागत करते हुए हुए कहा कि यह कार्यक्रम युवाओं और विद्यार्थियों के बीच साहित्यिक ज्ञान बढ़ाने के लिए है। धन्यवाद देते हुए पीयूषकांत राय ने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि हिंदी के पुराने शहर कोलकाता में फिर से एक साहित्यिक माहौल पैदा हो रहा है और सौहार्द का वातावरण बन रहा है। इस सभा का संचालन मधुमिता ओझा ने किया।

भारतीय भाषा परिषद में हिन्दी और उड़िया के कवियों संग हुई काव्य लहरी

कोलकाता : भारतीय भाषा परिषद के तत्वावधान में ‘काव्य-लहरी’-2 की आठवीं गोष्ठी भारतीय भाषा परिषद सभाकक्ष में आयोजित की गयी। इस बार हिंदी के साथ ओड़िया भाषा के कवियों ने भी अपनी कविताएँ सुनाईं। कवियों के पुष्प स्तवक से स्वागत के बाद सरस्वती वंदना अनुराधा सिंह ‘अनु’ ने प्रस्तुत किया। सभाकक्ष में उपस्थित श्रोताओं को ओड़िया भाषा एवं साहित्य पर संक्षिप्त वक्तव्य से ॠषिकेश राय ने परिचित कराया।
हिंदी में रीमा पांडेय, अनुराधा सिंह ‘अनु’ और ओड़िया में रेणुका रथ, बीनापानी देबता और प्रीतिलेखा दाश ने अपनी कविताएँ सुनाईं। गोष्ठी की अध्यक्षता की साहित्य अकादमी कोलकाता के प्रभारी अधिकारी डॉ.मिहिर कुमार साहू ने। श्री साहू ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में एक ओड़िया कवि का बहुत ही भावपूर्ण संस्मरण सुनाया।
सांगोष्ठी में आमंत्रित कवियों एवं श्रोताओं के लिए स्वागत भाषण दिया परिषद के उपाध्यक्ष श्री ईश्‍वरी प्रसाद टांटिया ने तथा धन्यवाद ज्ञापन किया संजय त्रिपाठी ने। कार्यक्रम का संचालन किया कवि गिरिधर राय ने।

एड्स : बंगाल के अस्पतालों में ही चतुर्थ श्रेणी कर्मी व नर्सों की उपेक्षा सह रहे हैं मरीज

दीपक राम

हर साल की तरह इस साल भी गत 1 दिसम्बर को सारी दुनिया में एड्स दिवस मनाया गया।  एड्स पीड़ितों के प्रति संवेदनशील वातावरण बनाने की तमाम कोशिशें जारी हैं। यह सही है कि आम आदमी को जागरुक बनाना बहुत जरूरी है मगर आप उन अस्पतालों को संवेदनशीलता का पाठ कैसे पढ़ाएंगे जहाँ एड्स पीड़ित मरीज मंदिर समझकर जाते हैं और इन मंदिरों में ही बीमार होने की सजा दी जा रही है। हालत यह है कि मरीजों को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और नर्सों से भी उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है।

राज्य में एचआईवी संक्रमण पीड़ितों के लिए काम करने वाली संस्था ‘बंगाल नेटवर्क ऑफ पिपल लीविंग विद एचआईवी एड्स’ के अध्यक्ष (एचआईवी पॉजीटिव) अध्यक्ष किशोर कुमार साव का दावा है कि बाहरी लोगों के साथ-साथ एचआईवी पॉजीटिव मरीजों को अस्पतालों में भेदभाव का शिकार होना पड़ता है। इनके साथ-साथ हजारों एचआईवी पॉजीटिव मरीजों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। किशोर साव ने बताया कि वह पिछले करीब 19 वर्षों से एचआईवी संक्रमण से पीड़ित हैं।

राज्य सरकार द्वारा इलाज के लिए कई सुविधाएँ मिल तो रही है लेकिन जो भेदभाव की प्रक्रिया है वह अभी भी जारी है। साव का दावा है कि जब भी वे राज्य के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पहुँचते हैं उन्हें सबसे अधिक वहाँ के ग्रुप डी कर्मचारियों और नर्सों के भेदभाव का शिकार होना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि नियम के मुताबिक किसी भी अस्पताल में यदि एचआईवी पीड़ित मरीज पहुँचता है तो उसकी बीमारी की जानकारी किसी अन्य मरीज व अन्य को नहीं दी जा सकती है।

नर्सें अन्य मरीजों को दूर रहने की देती हैं सलाह
एचआईवी संक्रमण का नाम सुनते ही लोगों में एचआईवी संक्रमण पीड़ित मरीज के प्रति एक हीन भावना आ जाती है। इसी के प्रति लोगों को जागरूक करने की पहल विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संगठनों द्वारा की जाती है। लेकिन यहाँ तो दावे के मुताबिक लोगों को जागरूक करने के बजाय एचआईवी पीड़ित मरीजों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। किशोर साव का दावा है कि अस्पतालों की नर्सें एचआईवी पीड़ित मरीजों से अन्य मरीजों को दूर रहने की सलाह देती हैं।

एचआईवी मतलब एड्स नहीं होता है 
ज्यादातर लोग एचआईवी और एड्स को एक ही बीमारी मानते हैं, पर ऐसा होता नहीं है। ये दोनों बीमारियाँ अलग-अलग हैं। इनमें सम्बन्ध है पर इसका ये मतलब नहीं कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को एड्स हो।
क्या है एचआईवी?
आमरी अस्पताल (ठाकुरिया) में क्रिटिकल केयर के संयुक्त सलाहकार चिकित्सक सोहम मजुमदार ने कहा कि एचआईवी का मतलब होता है ह्यूमन इम्यून डेफिसिएंसी वायरस किसी एचआईवी संग्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाने पर फैलता है। यौन सम्बन्धों के अलावा ये शरीर से निकलने वाले फ्लूइड जैसे कि वजाइना से निकलने वाला फ्लूइड या सिमेन, लार या रक्त के सम्पर्क से भी हो सकता है। एचआईवी वायरस का टेस्ट करने पर जब रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो उसे एचआईवी पॉजीटिव कहा जाता है।


एड्स क्या है?
चिकित्सक मजूमदार के मुताबिक एड्स यानी की एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम। किसी एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति को एड्स होने में 10 साल तक का समय लग जाता है। इस स्टेज में व्यक्ति के शरीर की इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम हो जाती है। उसे कई संक्रमण एक साथ होने का खतरा रहता है।


एड्स मरीजों को नहीं मिलतीं ये सुविधाएं 
‘बंगाल नेटवर्क ऑफ पिपल लीविंग वीद एचआईवी एड्स’ के अध्यक्ष किशोर कुमार साव का दावा है कि राज्य सरकार और केन्द्र सरकार से एड्स पीड़ित मरीजों को बहुत सी सुविधाएँ मिलती हैं लेकिन कुछ आवश्यक सुविधाएं इनको अब भी नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि एड्स पीड़ित मरीजों को किसी रोग के ऑपरेशन के लिए काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सामान्य लोगों के तरह हमारे लिए उचित व्यवस्था नहीं है।
बंगाल में हैं 1 लाख एड्स पीड़ित
‘बंगाल नेटवर्क ऑफ पिपल लीविंग वीद एचआईवी एड्स’ संस्था से 42 हजार एचआईवी पॉजीटिव मरीज जुड़े हुए हैं। किशोर शाव ने बताया कि सरकारी आँकड़ों के मुताबिक बंगाल में कुल करीब 1 लाख लोग एड्स से पीड़ित हैं जबकि भारत की कुल जनसंख्या में से करीब 25 लाख लोग एड्स के मरीज हैं।

(लेखक पत्रकार हैं और स्वास्थ्य सम्बन्धित विषयों पर लगातार लिखते हैं)

उम्र कम है मगर हुनर बहुत है इन दो बहनों में

प्रतिभा हो तो वह निखर ही जाती है। विपरीत परिवेश भी प्रतिभा को कुंद नही कर सकता,इसका प्रत्यक्ष प्रमाण दिया है उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमानियां क्षेत्र स्थित बघरी गाँव की इन बच्चियों निष्ठा एवं प्रतिष्ठा तिवारी ने।इन बच्चियों ने अपनी रचनात्मक कला के द्वारा लोगों को चमत्कृत किया है।


अपनी पढ़ाई के साथ साथ चित्रकला,मेहँदी लगाने की कला,पारम्परिक नृत्य, गायन जैसी विधाओं में पारंगत है।सबसे बड़ी बात बिना किसी प्रशिक्षण के यह इनमें बेहतर प्रदर्शन कर रही है।बस जरूरत है इनकी रचनात्मक प्रतिबद्धता को निखारने की और उनको बेहतर अवसर प्रदान करने की।यह हमारे भविष्य की पूँजी है।


इन बच्चियों से बातचीत के दौरान आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली प्रतिष्ठा तिवारी ने बताया कि इन सभी कलाओं को बस अभ्यास से सीखा, पिता जी ने हमें प्रोत्साहित करने के साथ ही जरूरत की सामग्री को कोलकाता से सहजता के साथ उपलब्ध कराया क्योकि गाँव मे सब चीजें मिल नही पाती है।

 

बातचीत के क्रम में निष्ठा ने बताया कि हमें गांव में धार्मिक,मांगलिक अनुष्ठान में लोकगीत गाने और नृत्य के लिए लोग बुलाते है।वैवाहिक गीत,सोहर और अन्य आयोजनों पर भी हमें बुलाया जाता है।इसके अलावा मिट्टी से तरह तरह के मूर्ति और अन्य सजावटी वस्तुओं को भी बनाते है।

हम लिखते, पढ़ते व बोलते तो रहें, कभी तो फिजां बदलेगी

बेहद विन्रम और स्नेहिल स्वभाव की अनामिका जी का लेखन बेहद मजबूत है। वे स्त्रियों की हर पीड़ा न सिर्फ समझती हैं बल्कि उन्हें पूरी मजबूती के साथ सामने रखती भी हैं। अँग्रेजी उनके कार्यक्षेत्र की भाषा है मगर उन्होंने हिन्दी साहित्य की हर विधा को समृद्ध किया हैं। अनामिका जी को राजभाषा परिषद पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, गिरिजा कुमार माथुर सम्मान, साहित्यकार सम्मान, केदार सम्मान, परंपरा सम्मान, साहित्य सेतु सम्मान मिल चुके हैं। कवियित्री अनामिका से सुषमा कनुप्रिया ने बातचीत की, पेश हैं प्रमुख अंश –
पिता बहुत ज्यादा प्यार करने वाले व्यक्ति थे
मेरे पिता श्यामनन्दन किशोर जी वरिष्ठ गीतकार और कवि थे। वे हमारी माँ जैसे ही थे। सबके साथ समस्यापूर्ति का खेल खेला करते थे। उनके मन में ऐसा रहता होगा कि सबके मन में कवित्व जगे। किसी के भीतर कोई कवि छुपा हो तो बाहर आ जाए। बहुत ज्यादा प्यार करने वाले व्यक्ति थे वे तो लोग उनको घेरे रहते थे। मोहल्लों में सबको कहानियाँ, कवितायें सुनाते थे। इसी खेल में किसी की अच्छी पँक्ति आ गयी तो उसे एक छोटी सी डायरी दे दिया करते थे। वह बांग्लादेश युद्ध का समय था। ब्लैक आउट हो जाया करता था और बिजली उड़ जाया करती थी। हमको छुपने को कह दिया जाता था तो हम छुप जाते थे। मैं मुजफ्फरपुर में रहती थी जो बांग्लादेश सीमा के पास था। ऐसे में यही प्रिय खेल था। पिता जी कवित्व उद्घाटित करते थे। वे कहते थे कि खुद मन से कविता बनाकर खेलो। किसी ने अच्छी पँक्ति कह दी तो उसका प्रशिक्षण शुरू हो जाया करता था। वे उसे सींचने लगते थे, मुझे तो पूरा ही सींचा।
सच्चे कवि को अपराध करते नहीं देखा
पिता जी का विश्‍वाास था कि जो अच्छी कविता लिखता है, वह जानबूझकर गलत काम नहीं करेगा। ऐसा आदमी दूसरे की आँख में गिर जाये मगर अपनी नजर में वह गिरना नहीं चाहता। लोग कविता समझते नहीं हैं मगर जो कविता लिखता है, गरीब आदमी भी उसे अपना कवि समझता है। वह उसे अपना समझता है। इसी संवेदनशीलता के चलते कवि चाहकर भी अपनी उस छवि से मुक्त नहीं हो सकता। कविता में विश्वास कवि को उसकी छवि में गिरफ्तार करता है। आज तक मैंने किसी सच्चे कवि को अपराध करते नहीं देखा। कविता अगर हृदय से नहीं फूटती तो उसको बतबनौवल होती है।
कविता का शिल्प कौंध वाला है
जीवन में हर कदम पर दुविधा है। दुविधा के क्षण में मन भीतर और बाहर रास्ता तलाशता है। समाधान तलाशते, सोचते अनायास समाधान और सच उद्घाटित होते हैं। कविता का शिल्प कौंध वाला है। सच की समझ कौंध में पैदा होती है, अचानक फ्लैश हो जाता है। जैसे दही मथते -मथते जैसे अचानक मक्खन बाहर आ जाता है। जो फ्लैश में कौंधा, उसे व्यक्ति एक नरेटिव बनाना चाहता है, उसी बहाने कुछ कहना चाहता है। कविता सामने वाले को बुद्धिमान समझती है तो उसे इशारे में समझाती है।
मुखर स्त्री को वे या तो रणचंडी कहते हैं या उसके चरित्र पर सवाल उठा देते हैं।
लोग भी समझकर चलते हैं कि स्त्री को मौन रहना चाहिए। वृहत्तर समस्याओं की अभिव्यक्ति जब स्त्री द्वारा की जाती है तो उन लोगों को भय हो जाता है जो उन पर लगातार कहर ढा रहे होते हैं। कोई उन्हें ध्यान और सम्मान से नहीं पढ़ता और निरुत्साहित किया जाता है। मुखर स्त्री को वे या तो रणचंडी कहते हैं या उसके चरित्र पर सवाल उठा देते हैं। ऐसा स्त्री को निरुत्साहित करने की मंशा से होता है।
सभी स्त्रियों के दुःख -सुख एक जैसे ही होते हैं
हम स्त्रियाँ छोटी -छोटी बातों में खुश हो जाती हैं। पहले हम एक दूसरे का मनोबल बढ़ायें। हमें बड़ों वाला सुख नहीं चाहिए, दुलार चाहिए। यह बचपन वाला भाव बड़े होकर पुरुषों में नहीं रह जाता। स्त्रियों में सहन शक्ति होती है और उनके सुख – दुःख भी एक जैसे होते हैं। उनमें बहनापा और विश्‍वास इसी कारण जल्दी पनपता है। हम स्त्रियों को आपस में जुड़कर रहना चाहिए। अपनी तमाम विशेषताएँ बरकरार रखते हुए हम एक साथ जुड़ें। अगर हम आपस में जुड़कर रहें तो कुछ भी कर सकते हैं।
हम अपने हिस्से का पौधा लगा तो दें
बीज बोते और फेंकते चलना है। कई बार पत्थर पर बीज पड़ जाता है, नहीं उगता मगर फिर भी बीज फेंकते चलना है। कभी तो मिट्टी उर्वर मिलेगी कि वहाँ वह उग जाये। हम लिखते, पढ़ते व बोलते तो रहें। कभी तो फिजां बदलेगी, हम अपने हिस्से का पौधा लगा तो दें।  हर व्यक्ति अनूठा है। सबमें कुछ न कुछ प्यार करने लायक है ही। बुद्धत्व के बीज सबमें हैं, वह फूले – फले, इस चेतना के साथ जो कर रही हैं, वह पूरे मन, पूरे प्यार से करें।