Thursday, October 8, 2026
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होली के रंग तो अपने भी हैं

बात जब होली की हो तो रंगों से परहेज करना अच्छी बात नहीं है। रंग खेलिए मगर प्रकृति के अनुकूल रंगों का इस्तेमाल करके खेलिए। होली पर शरारत के बहाने जबरन रंग लगाना अच्छी बात नहीं है बल्कि इसमें तो स्नेह का रंग मिले तो रंग पक्के होंगे। आप तैयारी कर रहे हैं होली की तो कुछ बातों का ध्यान तो जरूर रखें –
कपड़े सफेद पहनें और पुरानी टीशर्ट या कमीज हो तो पहन सकते हैं।
जींस की जगह ऐसे फैब्रिक पहनें जो जल्दी से सूख जाए तो कॉटन की ट्राउजर, पजामा या रंगीन मैचिंग पैंट भी बुरा आइडिया नहीं है।
फुल शर्ट या हाफ शर्ट पहनी जा सकती है मगर हाफ शर्ट पहन रहे हैं मगर दोनों ही सूरतों में अच्छी तरह तेल लगाना न भूलें।
बालों में रंग डालने से बचें तो बेहतर नहीं बच सकते तो कैप पहनें या बाँधनी की पगड़ी भी पहन सकते हैं। वैसे होली का मूड बढ़ाने के लिए कई तरह के विग बाजार में उपलब्ध हैं।
आपको कलर मैच करना आना चाहिए। ब्राइट शेड (येलो, ऑरेंज, पर्पल, रेड) में लूज फिट टी-शर्ट के साथ ब्लैक या ब्लू कलर की लाइट डेनिम पहन सकते हैं।
बाल और दाढ़ी अच्छी तरह ट्रिम करना न भूलें। धूपी चश्मा पहनें, दाँतों और आँखों में रंग न जाने दें और अगर अगर चला जाए तो पानी से खूब अच्छी तरह धोना न भूलें।


कोल्हापुरी चप्पल सही रहेगी। पहनने से पहले जरूर देखें कि वह पानी में फिसलने वाली चप्पल न हो।
अगर किसी महिला मित्र के साथ होली खेल रहे हैं तो ध्यान रखें कि उसे असुविधा न हो या उसे जबरन रंग न लगाएं। यही बात आपके सीरियस मोड वाले दोस्तों पर भी लागू होती है।
लोकगीत सुनें, बॉलीवुड गीत भी सुनें मगर अश्लील गाने आपकी महिला मित्रों को असहज ही नहीं करते बल्कि उनकी नजर में आपकी छवि डैमेज भी कर सकते हैं।
रंग छुड़ाने के बाद कोई अच्छा मॉइश्चराइजर लगाना न भूलें।
हर्बल होली खेलें..और खूब खेलें…।

होली के रंगों में दिखें रंगीली और सजीली

होली रंगों वाला त्योहार है तो इस त्योहार में सजीला दिखना भी जरूरी है। यह सही है कि हम नये कपड़े तो पहनने से रहे मगर इतने पुराने कपड़े भी न पहनें कि वह हाथ लगाते ही खराब हो जाए..जाहिर है कि संतुलन जरूरी है। बस यही बात आपको होली में पहने जाने वाले कपड़ों के चयन के समय ध्यान में रखने की जरूरत है। तो होली पर दिखें रंगीली और सजीली –
अगर आप साड़ी पहनने का सोच रही हैं तो बेशक यह बहुत ही अच्छा परिधान है। होली जैसे त्योहार में साड़ी पहनने का अलग ही मजा है, लेकिन होली के दिन साड़ी पहनने के लिए आपको आत्मविश्वास के साथ इसे कैरी करना होगा। जब यह भींग जाती है तो शरीर से चिपकने लगती है। कॉटन या मलमल साड़ी पहनें।
सफेद चिकनकारी कुर्ती के साथ मल्टी कलर दुपट्टा या स्कार्फ, ब्लू जींस के साथ व्हाइट कुर्ता। इन सब तरह के कपड़ों में आपका लुक खूब फबेगा।


होली के रंगों से सफेद कपड़े गंदे करना अच्छा नहीं लगता तो इस दिन आप चटख रंगों के कपड़े भी पहन सकती हैं। इनमें रंग जल्दी दिखाई नहीं देता और साफ करना भी आसान होता है।
कपड़ों के चुनाव के साथ इस बात का ध्यान रखें कि कौन सा ​फैब्रिक मौसम और आपकी स्किन के हिसाब से सही हैं। वैसे तो कॉटन फैब्रिक होली खेलने के लिए बढ़िया है। सर्दी, गर्मी और बरसात हर मौसम में इस फैब्रिक को पहना जा सकता है। यह फैब्रिक शरीर में चुभता नहीं है।
ध्यान रहे होली पर आप जो भी ड्रेस पहनने वाली हैं। वह ज्यादा टाइट और बॉडी फिट न हो। इससे आपका लुक खराब होगा और असहज भी रहेंगी। साथ ही आप गहरे यानी डीप गले के कपड़े पहनने से बचें, स्कर्ट न पहनें, हाफ स्लीव्स और छोटे कपड़े न पहनें।
इस समय फैशन में धोती पैंट, शॉर्ट्स, प्लाजों हैं। इसे आप कुर्ते और टॉप के साथ और अपने हिसाब से हिसाब से पहन सकती हैं।

होली पर खूबसूरती को न लगे केमिकल रंगों की नजर

होली का त्योहार ही कुछ ऐसा होता है कि इसकी मौज-मस्ती से खुद को बहुत ज्यादा देर तक बचाए रख पाना मुश्किल होता है मगर होली में सूखा हो या गीला, रंग न लगे तो भला कैसी होली…तो अमा…घर में क्या छुपे बैठे हैं..निकलिए…रंग लगाइए…लगवाइए मगर इन बातों पर ध्यान दीजिए तो खूबसूरती को नहीं लगेगी….रंगों की नजर
होली खेलने से पहले चेहरे और हाथ-पैरों पर अच्छे से तेल की मालिश कर लें। इसके लिए आप नारियल या बादाम तेल का इस्तेमाल करें जो हर तरीके से है फायदेमंद।
चेहरे पर सनस्क्रीन जरूर लगाएं जो धूप की हानिकारक किरणों से होने वाले दुष्प्रभावों को रोकता है और त्वचा क्षतिग्रस्त होने से बचाता है।
नाखूनों पर लगने वाले होली के रंग देखने में तो खराब लगते ही हैं साथ ही ये जल्दी उतरते भी नहीं। तो इसके लिए होली खेलने से पहले नेलपॉलिश लगाना न भूलें। इससे कोई दूसरा रंग आसानी से नहीं चढ़ता।
आँखों में किसी भी प्रकार का केमिकल बहुत ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है और होली के दौरान इसकी संभावना बहुत ज्यादा रहती है। इससे बचाव के लिए धूपी चश्मा पहन सकती हैं।
बालों की देखभाल भी चेहरे जितनी ही जरूरी है। होली से एक रात पहले बालों में अच्छे से तेल लगा लें। नारियल तेल का इस्तेमाल करें। अगर सरसों तेल लगा सकती हैं तो वह भी लगा सकती हैं।
होली में बालों को खोलकर बिल्कुल न रखें। पोनीटेल या चोटी बना लें। वैसे स्कॉर्फ से बालों को कवर करके भी होली खेला जा सकता है।
अगर सेंसिटिव स्कैल्प है तो होली खेलने से पहले नींबू का रस से हल्का मसाज कर लें जिससे उस पर हानिकारक रंगों का असर कम होगा।

त्वचा से आसानी से रंग हटाने के लिए आप कुछ घरेलू चीजों की मदद से सकते हैं। इससे रंग भी आसानी से उतर जाता है और आपकी त्वचा को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचता है। जानिए ऐसे ही आसान तरीके –

दही और बेसन: अगर आपकी त्वचा से कलर नहीं हट रहा है तो दही और बेसन का पेस्ट बनाकर त्वचा पर लगाएं। इस पेस्ट को बनाने के लिए 3 चम्मच दही में 1 चम्मच बेसन मिलाकर 15 मिनट तक चेहरे पर लगा लें। 15 मिनट बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। इससे आसानी से कलर चला जाएगा।

गुलाबजल: गुलाबजल आपकी त्वाच को साफ रखने में तो मदद करता ही है साथ ही रंग हटाने में भी मददगार होता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए मुल्तानी मिट्टी और गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को लगाकर सूखने दें। यह पेस्ट केमिकल की वजह से होने वाली जलन को भी कम करता है।

एलोवेरा: त्वचा को नुकसान ने बचाने के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए कलर लगी त्वचा पर एलोवेरा लगाएं। यह त्वचा से गंदगी हटाने के साथ कलर साफ करने में मदद करता है।

अमचूर: कलर हटाते समय त्वचा को बार-बार ना धोएं इससे आपकी त्वचा शुष्क हो सकती है। कलर हटाने के लिए भीगे हुए अमचूर पाउडर का इस्तेमाल करें।

 

 

हो जाए हुड़दंग भरी होली पार्टी

होली हुड़दंग और मस्ती का त्योहार है और दोनों ही दोस्तों या परिवार के बगैर नहीं होते। यह एक मौका है जब आप इन दोनों को एक साथ ला सकते हैं और इस काम को आसान बनाने के लिए कर डालिए एक होली पार्टी..ये बातें आपकी मदद कर सकती हैं।
पार्टी कोई भी हो सबसे पहले लोगों को उस पार्टी का न्योता भेजा जाता है। खर्च बचाना हो तो पिक एडिटर ऐप की मदद से ऑनलाइन कार्ड बनाइए या फिर बच्चों के साथ हाथ से कार्ड बनाकर उसके कलर जेरॉक्स निकलवा लें य घर में प्रिंटर हो तो प्रिंट निकाल लें।
स्वादिष्ट खाना तो किसी भी पार्टी की जान होती है, पार्टी में खाने के साथ स्नैक्स का इंतजाम भी अच्छा होना चाहिए। आप मेन्यू में गुजिया, मालपुआ, छोले भटूरे, पाव भाजी आदि का इंतजाम कर सकते हैं। स्नैक्स के अलावा होली के मौके पर ठंडाई, लस्सी, कॉफी, चाय का इंतजाम रखना ना भूलें। जरूरी हो तो आपस में जिम्मेदारी बाँटी भी जा सकती है।
होली के गानों की प्लेलिस्ट पहले से ही तैयार रखें, ताकि पार्टी के वक्त गाने ढूंढने में समय न बर्बाद हो। अगर नांच गाने के साथ कुछ और कार्यक्रम आयोजित करने का मन है, तो वो भी कर सकते हैं। होली पार्टी को यादगार बनाने के लिए संगीत जरूरी है। लोक संगीत सबसे बेहतर है। आप अपने दोस्तों के साथ महफिल जमाइए और जरूरी नहीं कि सब किशोर कुमार या मोहम्मद रफी बनें…जिसको जो आता है, गाने दें। जी भरकर नाचें और उसमें परफेक्शन से ज्यादा मस्ती का ध्यान रखिए। अन्ताक्षरी से लेकर लुका छिपी तक खेलिए…मजा आएगा। होली पर ज्यादातर सफेद रंग के कपड़े पहनें जाते हैं क्योंकि उस पर सभी रंग उभरकर सामने आते हैं। महिलाओं के लिए स्कार्फ और पुरुषों के लिए टोपी भी ड्रेस कोड में शामिल कर सकते हैं। ये आपके बालों को सलामत रखेगा।

शख्स, जिसने स्पर्श से धीरूभाई अम्बानी को भी स्वस्थ कर दिया

मुम्बई :  आध्यात्मिक स्पर्श उपचार एक अकथनीय घटना है जो किसी भी वैज्ञानिक प्रणाली और प्रक्रियाओं से आगे की बात करती है। हैरत इस बात की है कि यह उपचार कोई डॉक्टर नहीं आम इन्सान कर रहा है और बहुत से लोगों को पीड़ामुक्त कर चुका है। स्पर्श से प्रभावित भाग में गर्मी पैदा होती है। दावा है कि इसके परिणामस्वरूप मरीज को उम्र भर दर्द और कठोरता से राहत मिलती है। यह शख्स हैं मोहन जोशी, जो डॉक्टर नहीं है और न ही भगवान का कोई अवतार। जोशी का कहना है कि वर्षों पहले उनको एक आध्यात्मिक गुरु से यह पता चला था कि वास्तव में उन्हें विशेष शक्तियां प्रदान की गई थीं, जो सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, रुमेटीइड आर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस जैसे मामलों में राहत दिला सकती थीं। शुरुआत उन्होंने एक दोस्त के कहने पर उसके उपचार से की और निःशुल्क चिकित्सा प्रदान करने लगे।
उनका कहना है कि यह चिकित्सा प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत सस्ती और सुलभ है। इस आध्यात्मिक उपचार चिकित्सा से लाभान्वित होने वााले लोगों की सूची लम्बी है। इनमें प्रमुख उद्योगपति, लेखक, अभिनेता, सीए, अधिवक्ता शामिल हैं और सूची जारी होती है। आध्यात्मिक उपचार गठिया, लूम्बेगो, वैरिकाज़ नसों की सूजन, ब्रोंकोस्पज़म, ऑस्टियोपोरोसिस, स्पॉन्डिलाइटिस, पक्षाघात, पेट में ऐंठन, जमे हुए कंधे, सिर का चक्कर, तनाव, अनिद्रा जैसी कई अन्य बीमारियो में कारगर है। भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त हो चुके जोशी स्पर्श चिकित्सा की शक्ति को एक निस्वार्थ कार्य मानते हैं। जोशी 1982 से मुम्बई में आध्यात्मिक उपचार का अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने तब से अब तक सौ से अधिक रोगियों का इलाज किया है। लगभग 40 प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं ने उनके उपचार कार्य को गति दी है। उनका कहना है कि अपनी चिकित्सा से उन्होंने धीरूभाई अम्बानी, दिवंगत नेता बलराम जाखड़ तक का इलाज किया है। अम्बानी के शरीर के दाहिने हिस्से में लकवा मार गया था, जोशी के उपचार से ठीक हुए। हालाँकि वे यह भी स्वीकार करते हैं कि यह उपचार प्रणाली राहत देती है, पूर्णतया समाधान नहीं है। कोलंबो में प्रसिद्ध विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें “डॉक्टर ऑफ साइंस” की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने भारत के कई शहरों जैसे मुंबई, बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद, सूरत, नवसारी, भोपाल, इंदौर, मदुरै, कोयम्बटूर, पोलाची आदि में चिकित्सा शिविरों में भी भाग लिया है। फिलहाल उनको इस काम में उनकी बेटी से मदद मिल रही है।

20 लाख तक की ग्रेच्युटी पर नहीं लगेगा आयकर

नयी दिल्ली : कर्मचारियों को अब 20 लाख तक की ग्रेच्युटी पर कोई आयकर नहीं देना होगा। कैबिनेट की बैठक में वित्त मंत्रालय के ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार ने बजट में ही कर मुक्त ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ाने का ऐलान किया था। श्रम मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि कर मुक्त ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दी गई है। इस प्रस्ताव से उन कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा जो ग्रेच्युटी भुगतान कानून, 1972 के दायरे में नहीं आते।
मंत्रालय ने बताया, “वित्त मंत्रालय ने आयकर कानून, 1961 की धारा 10 (10) (तीन) के तहत ग्रेच्युटी के लिए आयकर छूट सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दी है।’ कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(10)(iii) में संशोधन किया जाएगा और इस एक्ट के तहत ग्रेच्युटी की रकम पर मिलने वाली इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जाएगी।

फ्रांस्वा बेटनकोर्ट : दुनिया की सबसे अमीर महिला

नयी दिल्ली : खूबसूरत दिखने के लिए दुनियाभर में महिलाएं ही नहीं पुरूष भी तरह तरह के सौंदर्य प्रसाधन इस्तेमाल करते हैं। क्रीम, फाउंडेशन, शैंपू और हेयर कलर जैसे उत्पादों से उनकी खूबसूरती कितनी बढ़ती है, यह तो कोई नहीं जानता, लेकिन इन तमाम लोगों की जेब से निकलने वाले पैसे ने फ्रांस की सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली कंपनी लॉरियल की मालकिन को दुनिया की सबसे अमीर महिला जरूर बना दिया है। आज आलम यह है कि इस कंपनी की मालकिन की संपति 51 अरब डालर पर पहुंच चुकी है।
भारतीय टेलीविजन के विज्ञापनों में कभी ऐश्वर्या राय तो कभी सोनम कपूर लड़कियों को लॉरियल के विभिन्न सौंदर्य प्रसाधन, शैंपू, कंडीशनर या हेयर कलर लगाने की सलाह देती हैं। शहरों में ही नहीं बल्कि गांव देहात की लड़कियों में भी इन सुंदरियों की तरह दिखने की चाहत इतनी ज्यादा है कि देश में भी ऐसे तमाम उत्पादों पर दिल खोलकर पैसा खर्च किया जाता है। फोर्ब्स द्वारा हाल ही में जारी दुनिया के रईस लोगों की सूची में फ्रांस की कॉस्मेटिक कंपनी लॉरियल की वारिस फ्रांस्वा बेटनकोर्ट को 15वां स्थान मिला है। चूंकि इस सूची में उनसे ऊपर सभी पुरूष हैं इसलिए उन्हें दुनिया की सबसे अमीर महिला माना गया है। यह सच है कि फ्रांस्वा को यह दौलत उनकी मेहनत से नही बल्कि किस्मत से मिली है, लेकिन पिछले दो साल में उन्होंने कंपनी और अपनी संपति में इजाफा किया है। वह लिलियन बेटनकोर्ट की पुत्री हैं, जिनकी 2017 में मौत होने के बाद तमाम संपति इकलौती बेटी फ्रांस्वा को मिली।
इस परिवार का फोर्ब्स की सूची में आना कोई नई बात नहीं है। फ्रांस्वा से पहले उनकी मां लिलियन दुनिया की सबसे अमीर महिला और दुनिया की 14वीं सबसे अमीर शख्स थीं और 2017 में उनकी संपत्ति 44.3 अरब डॉलर थी। 2005 में फोर्ब्स ने लिलियन को दुनिया की 39वीं सबसे ताकतवर महिला बताया था। लिलियन बेटनकोर्ट का जन्म पेरिस में हुआ था और वह अपने माता पिता की इकलौती संतान थीं। उनके पिता यूगेन शूलर ने साल 1909 में लॉरियल की शुरुआत की थी। लिलियन मात्र 5 साल की थीं जब उनकी मां का देहांत हो गया। वह अपने पिता के बहुत नजदीक रहीं और बहुत कम उम्र में कंपनी के कामों में उनका हाथ बंटाने लगीं।
समय के साथ कंपनी बढ़ती रही और साल 1950 में लिलियन ने राजनीतिज्ञ आंद्रे बेटनकोर्ट से शादी कर ली। उनके यहां 10 जुलाई 1953 को फ्रांस्वा बेटनकोर्ट का जन्म हुआ। फ्रांस्वा को इस कंपनी की सर्वेसर्वा होने के अलावा बाइबल पर टिप्पणियों और यहूदी-ईसाई संबंधों पर उनकी सशक्त लेखनी के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने ज्यां पियरे मीयर्स से विवाह किया और दोनों के दो बच्चे हैं, जिनकी उन्होंने यहूदी परंपरा के अनुसार परवरिश की है।
2017 में कंपनी की कमान संभालने वाली फ्रांस्वा की उपलब्धियों की बात करें तो बेटनकोर्ट के नेतृत्व में लॉरियल कंपनी ने वर्ष 2018 में बिक्री का रिकार्ड बनाते हुए पिछले एक दशक में बिक्री में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की। वह 1997 से लॉरियल के बोर्ड में शामिल रही हैं और कंपनी की चेयरपर्सन हैं। वह अपने परिवार के समाज सुधार के कार्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं और उनके द्वारा चलाये जा रहे फाउंडेशन ने देश में विज्ञान और कला की प्रगति में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
देश में सौंदर्य प्रसाधनों का कारोबार जिस तेजी से बढ़ रहा है और अब तो पुरूषों ने भी इस क्षेत्र में महिलाओं को टक्कर देना शुरू कर दिया है। ऐसे में कोई आश्चर्य नहीं अगर यह कंपनी आने वाले दशकों में भी बिक्री में वृद्धि के नये रिकार्ड कायम करे और फ्रांस्वा की कमाई इसी तरह बढ़ती रहे।

पुणे, कोलकाता व पटना के लिए सीधी फ्लाइट के प्रयास तेज

भोपाल :  भोपाल से वर्तमान में आठ शहरों के लिए सीधी हवाई यात्रा की जा सकती है। पुणे, कोलकाता, पटना और लखनऊ के लिए सीधी फ्लाइट शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए एयरलाइंस कंपनियों से चर्चा चल रही है। भोपाल से दुबई के लिए इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू करने की मांग भी यात्री कर रहे हैं।इस दिशा में जल्द ही अच्छे परिणाम सामने होंगे। यह जानकारी गुरुवार को राजाभोज एयरपोर्ट के डायरेक्टर अनिल विक्रम ने संभागायुक्त दफ्तर में एयर कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए आयोजित बैठक में दी। इस दौरान टैक्स का मुद्दा भी उठा। अधिकारियों ने बताया कि संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव काे बताया कि एयर टर्बाइन फ्यूल पर लगने वाला वैट 24 प्रतिशत है। वैट कम किया जाता है तो एयरलाइंस कंपनियां तेजी से फ्लाइट मूवमेंट बढ़ा सकती हैं। इसमें एअर इंडिया, इंडिगो, जेट एयरवेज के अफसर मौजूद थे।

116 साल की जापानी महिला को सबसे बुजुर्ग व्यक्ति का खिताब

तोक्यो : ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ ने 116 साल की जापानी महिला को शनिवार को विश्व के सबसे बुजुर्ग जीवित व्यक्ति के खिताब से नवाजा है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने शनिवार को एक समारोह में काने तनाका के नाम इस रिकॉर्ड को आधिकारिक रूप से मान्यता दी। समारोह का आयोजन दक्षिण पश्चिम जापान के फुकुओका में एक नर्सिंग होम में किया गया।
जश्न मनाने के लिए उनके परिवार के सदस्य एवं मेयर भी मौजूद थे। तनाका का जन्म दो जनवरी, 1903 में हुआ था। वह आठ भाई-बहनों में सातवें नंबर पर हैं। उन्होंने 1922 में हिदेओ तनाका से शादी की थी और उनके चार बच्चे हैं। उन्होंने एक बच्चे को गोद भी लिया था।
इससे पहले सबसे बुजुर्ग जीवित व्यक्ति का खिताब जापान की ही एक अन्य महिला चियो मियाको के नाम था जिनका 117 की उम्र में पिछले साल जुलाई में निधन हो गया था।जापान के लोगों की उम्र अमूमन लंबी होती है और सबसे बुजुर्ग व्यक्तियों की सूची में उनका वर्चस्व रहता है।
भले ही खान-पान में बदलाव या मोटापा बढ़ रहा है लेकिन यहां यह अब भी दुर्लभ है। जापानियों की पाक परंपरा में मछलियों, चावल, सब्जियों एवं कम वसा वाले खाने को ज्यादा तरजीह दी गई है। तनाका को अब तक का सबसे बुजुर्ग व्यक्ति बनने के लिए अभी कई और बरस गुजारने होंगे। गिनीज विश्व रिकॉर्ड के मुताबिक यह रिकॉर्ड फ्रांस की महिला जियाने लुई कालमें के नाम है जो 122 साल की थी।

गूगल ने बच्चों को हिंदी-अंग्रेजी सिखाने के लिये पेश किया ‘बोलो’ एप

नयी दिल्ली : सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल ने बुधवार को एक नये एप ‘बोलो’ की पेशकश की। यह एप प्राथमिक कक्षा के बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी सीखने में मदद करेगा। कम्पनी ने कहा कि यह एप उसकी आवाज पहचानने की तकनीक तथा टेक्स्ट-टू-स्पीच तकनीक पर आधारित है। इसे सबसे पहले भारत में पेश किया गया है।
कम्पनी ने बताया कि इसमें एक एनिमेटेड पात्र दीया है जो बच्चों को कहानियां पढ़ने के लिये प्रोत्साहित करती है और किसी शब्द का उच्चारण करने में दिक्कत आने पर बच्चों की मदद करती है। यह कहानी पूरा करने पर बच्चों का मनोबल भी बढ़ाती है। गूगल इंडिया के उत्पाद प्रबंधक नितिन कश्यप ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘हमने इस एप को इस तरह डिजायन किया है कि यह ऑफलाइन भी काम कर सके। इसके लिये बस 50 एमबी के इस एप को इंस्टॉल करना होगा। इसमें हिंदी और अंग्रेजी की करीब 100 कहानियां हैं।’’ उन्होंने कहा कि एप गूगल प्ले स्टोर पर नि:शुल्क उपलब्ध है। यह एंड्रायड 4.4 (किटकैट) तथा इसके बाद के संस्करण वाले सारे डिवाइस पर चल सकता है। कश्यप ने कहा कि गूगल ने इस एप का उत्तर प्रदेश के करीब 200 गांवों में परीक्षण किया है। उन्होंने कहा कि परिणाम उत्साहजनक रहने के बाद इसे पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि एप में बंगाली जैसी अन्य भारतीय भाषाओं को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।