इस स्टार्टअप ने पश्चिम बंगाल में 14 सेंटर्स की शुरुआत कर दी है, जहां पर लगभग 600 ग्रामीण बच्चों को स्पोकन इंग्लिश सिखाई जा रही है। इतना ही नहीं, पूरे प्रदेश के 8 ग्रामीण स्कूलों ने कृषवर्क्स का पाठ्यक्रम अपनाया है। टीम ने कोलकाता के एक कैफ़े के बाहर अपने प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया। यहीं पर उनकी मुलाक़ात आईआईएम इनोवेशन पार्क के इनवेंट प्रोग्राम के हेड गौरव कपूर से हुई।
कोलकाता स्थित स्टार्टअप कृषवर्क्स ग्रामीण इलाकों के व्यवसाइयों के सहयोग से इंग्लिश लर्निंग सेंटर का संचालन करवाता है, जिनमें ग्रामीण इलाकों के बच्चे स्कूल के बाद लैंग्वेज स्किल्स को बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं। इन सेंटर्स में टैबलेट पर सॉफ़्टवेयर के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जाता है। इन टैबलेट्स को चलाने के लिए इंटरनेट की आवश्यकता नहीं होती। 32 वर्षीय शुभजीत रॉय और 26 वर्षीय गार्गी मज़ुमदार ने 2015 में कृषवर्क्स की शुरुआत की थी।
मास्टर डिग्री होने के बावजूद सुमन मण्डल ने ट्रेनों में किताबें बेचने का काम किया। उनका हमेशा से ही उद्यमी बनने का सपना था, लेकिन उन्हें इस बात की समझ नहीं थी कि शुरुआत कहां से की जाए। इत्तेफ़ाक़ से उनकी मुलाक़ात कृषवर्क्स के को-फ़ाउंडर शुभजीत रॉय से हुई, जिन्होंने सपना पूरा करने में सुमॉन की मदद की।
शुभजीत बताते हैं कि उनके स्टार्टअप का उद्देश्य न सिर्फ़ ग्रामीण इलाकों के बच्चों को शिक्षित करना है, बल्कि वह इसके माध्यम से युवाओं को रोज़गार भी दिलाना चाहते थे। उन्होंने कहा, “हम माइक्रो-ऑन्त्रप्रन्योर्स तैयार करना चाहते थे, जो हमारी तकनीक की मदद से गांवों के बच्चों को इंग्लिश पढ़ाएं। हमारे देश में पढ़े-लिखे युवाओं की कोई कमी नहीं है। कमी है तो उनके अंदर सही कौशल और आत्मविश्वास की। हमारी मुहिम की मदद से न सिर्फ़ ग्रामीण बच्चों को लाभ मिलेगा बल्कि इन युवाओं के कौशल भी बेहतर हो सकेंगे।”
स्टार्टअप का कहना है कि महज़ एक साल के वक़्त में उन्होंने पूरे पश्चिम बंगाल में 14 केन्द्रों की शुरुआत कर दी है, जहां पर लगभग 600 ग्रामीण बच्चों को स्पोकन इंग्लिश सिखाई जा रही है। इतना ही नहीं, पूरे प्रदेश के 8 ग्रामीण स्कूलों ने कृषवर्क्स का पाठ्यक्रम अपनाया है। स्टार्टअप को आईआईएम कोलकाता, सिग्मा आईकेपी ईडेन और इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस डीलैब्स (हैदराबाद) से सहयोग मिल चुका है। हाल में, आईआईएम अहमदाबाद और टाटा ट्रस्ट सोशल अल्फ़ा के माध्यम से इसे वित्तीय सहायता मिल रही है।
2014 में शुभजीत और गार्गी ने तय किया कि वे ग्लोबल लर्निंग एक्स प्राइज़ प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे और इसके माध्यम से तकनीकी स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए लोगों को प्रेरित करेंगे। उन्होंने अपनी 25 सदस्यों वाली टीम का ‘कृष्णा’ तय किया और इस टीम ने बिना किसी फ़ीस के प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया। इस दौरान वे अलग-अलग कम्पनियों में नौकरियां भी करते रहे।
टीम को एक गेम तैयार करना था, जो ओपन-सोर्स सॉफ़्टवेयर पर आधारित हो और टैबलेट पर बिना इंटरनेट के भी चल सकता हो। इन गेम्स के मारफ़त तंज़ानिया के स्थानीय स्कूलों के बच्चों को बिना शिक्षक के पढ़ाया जाना था। टीम कृष्णा ने गुरुकुल नाम से एक टैबलेट आधारित सॉफ़्टवेयर विकसित किया। इस टीम का चयन पूरी दुनिया की 30 सबसे सर्वश्रेष्ठ टीमों में हुआ।
इस प्रतियोगिता के बाद शुभजीत और गार्गी ने अपनी फ़ुल-टाइम नौकरीी छोड़ने और भारत के ग्रामीण बच्चों के लिए ऐसा सॉफ़्टवेयर तैयार करने का फ़ैसला लिया। उनके दो अन्य साथियों कौशिक मज़ुमदार और बालगोपाल केवी ने भी इस मुहिम में उनका साथ दिया। सबसे पहले कृषवर्क्स ने सुंदरबन इलाके में एनजीओ के अंतर्गत चल रहे स्कूलों में पायलट रन शुरू किया। इन स्कूलों में शिक्षकों को सिर्फ़ 1,200 रुपए महीने का वेतन मिलता था। शुभजीत ने पाया कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक उन्हें मुफ़्त में स्कूल भेजना चाहते थे, लेकिन ट्यूशन के नाम पर वह कितना भी पैसा खर्च करने के लिए तैयार थे और इसलिए एक बच्चे को स्कूल के सभी शिक्षक ट्यूशन पढ़ाने जाते थे।
टीम ने कोलकाता के एक कैफ़े के बाहर अपने प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया। यहीं पर उनकी मुलाक़ात आईआईएम इनोवेशन पार्क के इनवेंट प्रोग्राम के हेड गौरव कपूर से हुई। गौरव ने उन्हें सलाह दी कि वे ग्रामीण इलाकों के बच्चों के लिए कुछ काम करें और अपनी मुहिम के माध्यम से माइक्रो-ऑन्त्रप्रन्योर्स तैयार करने पर ज़ोर दें।
शुरुआती दिनों में टीम को फ़ंडिंग की काफ़ी समस्या आई। गांव के लोग उनके प्रोडक्ट को पसंद तो कर रहे थे, लेकिन कोई भी टैबलेट को इस्तेमाल करने की फ़ीस नहीं देना चाहता था। शुभजीत बताते हैं कि उनकी टीम को पता था कि सरकार द्वारा पहले ही आकाश टैबलेट्स बांटे जा चुके हैं, लेकिन स्कूलों में उन टैबलेट्स का कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा था। शुभजीत बताते हैं कि उनके पास जानकारी थी कि इन टैबलेट्स के साथ कई तरह की समस्याएं आ रही थीं, जिनकी वजह से लोग इनके इस्तेमाल से कतरा रहे थे। शुरुआत में कृषवर्क्स बच्चों को गणित पढ़ाता था, लेकिन अभिभावकों की ख़ास रुचि न होने की वजह से उन्होंने स्पोकेन इंग्लिश पढ़ाना शुरू किया।
कृषवर्क्स ने कई माइक्रो-ऑन्त्रप्रन्योर्स तैयार किए, जिन्हें टैबलेट ख़रीदने के लिए 20 हज़ार रुपए खर्च करने होते हैं। इस टैबलेट में कॉन्टेन्ट और गेम्स पहले से मौजूद होते हैं। बच्चे मात्र 200 रुपए की मासिक फ़ी पर कोर्स में हिस्सा ले सकते हैं और हर सेंटर पर अधिकतम 192 बच्चों को पढ़ाया जा सकता है।
कृषवर्क्स की योजना है कि पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों में 50 सेंटर्स खोले जाएं। शुभजीत चाहते हैं कि इस मुहिम के ज़रिए आने वाले 7 सालों में 1 करोड़ बच्चों तक पहुंचा जाए। फ़िलहाल कृषवर्क्स क्राउडफ़ंडिंग के माध्यम से फ़ंडिंग जुटा रहा है।
(साभार – योर स्टोरी हिन्दी)
ग्रामीण बच्चों को अंग्रेज़ी सिखाने के साथ-साथ युवाओं को रोज़गार भी दे रहा यह स्टार्टअप
जम्मू के घराना में पहुंचे 5000 प्रवासी पक्षी
जम्मू : जम्मू के बाहरी इलाके में अंतरराष्ट्रीय सरहद से सटे घराना ‘वेटलैंड कर्न्जवेशन रिजर्व’ में करीब पांच हजार प्रवासी पक्षी पहुंच गए हैं। जम्मू से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित घराना मकवाल, कुकदियां, अब्दुल्लियां और परगवाल की आर्द्र भूमि से घिरा हुआ है जहां 170 से ज्यादा निवासी और प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां हैं जिनमें खोयाहांस,गेडवॉल, यूरेशियन टील,वेस्टर्न स्वाम्पहेन समेत कई प्रजातियां शामिल हैं।
जम्मू के वन्यजीव वार्डन, शहजाद चौधरी ने कहा कि आरएस पुरा सेक्टर के घराना में खोयाहांस समेत कई अन्य प्रजातियों के करीब पांच हजार पक्षी पहुंच गए हैं। आने वाले हफ्तों में संख्या में कई गुणा इजाफा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि पक्षियों की हिफाजत सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं।
वह राज्य वन विभाग के आयुक्त सचिव मनोज कुमार द्विवेदी की ओर से घराना वेटलेंड कर्न्जवेशन की स्थिति की समीक्षा करने के लिए बुलाई गई बैठक में बोल रहे थे।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि बैठक के दौरान, द्विवेदी ने सीवेज शोधन संयंत्र लगाकर सीवेज निपटान जैसे मुद्दे के संरक्षण और प्रबंधन पर जोर दिया। साथ में आर्द्र भूमि में अनुकूल पानी सुनिश्चित करने के लिए निगरानी करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने समुदाय और पक्षकारों के लिए रोजगार सृजन पर भी जोर दिया।
आईपीएल नीलामी: 70 स्थानों के लिए दावेदारी पेश करेंगे 1003 खिलाड़ी
नयी दिल्ली : इंडियन प्रीमियर लीग के 12वें सत्र की 18 दिसंबर को जयपुर में होने वाली खिलाड़ियों की नीलामी में आठ फ्रेंचाइजी टीमों में 70 उपलब्ध स्थानों के लिए 1003 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है।
पूर्वोत्तर के राज्यों, उत्तराखंड और बिहार के क्रिकेटरों के अलावा 232 विदेशी खिलाड़ियों ने भी नीलामी के लिए पंजीकरण कराया है। पंजीकृत खिलाड़ियों में से 800 ने कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है जिसमें 746 भारतीय खिलाड़ी शामिल हैं।
विदेशियों में आस्ट्रेलिया के 35 जबकि अफगानिस्तान के 27 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है। सबसे ज्यादा दक्षिण अफ्रीका के 59 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है। अमेरिका, हांगकांग और आयरलैंड का एक-एक खिलाड़ी इस शुरुआती सूची में शामिल है।
नीलामी के लिए इस सूची में छंटनी की जाएगी और फ्रेंचाइजियों को अपनी पसंद के खिलाड़ियों की सूची सौंपने के लिए 10 दिसंबर तक का समय दिया गया है।
आईपीएल की नीलामी का नियमित रूप से संचालन करने वाले रिचर्ड मेडले इस बार नीलामी का हिस्सा नहीं होंगे और नीलामी के संचालन की जिम्मेदारी इस बार ह्यू एडमिडेस को सौंपी गई है।
एडमिडेस को नीलामी कंपनी क्रिस्टी में 30 साल से अधिक का अनुभव है। वह मेडले की जगह लेंगे जिनकी अनुपस्थिति के बारे में बीसीसीआई की विज्ञप्ति में कोई जानकारी नहीं दी गई।
मेसी के नन्हें फैन को तालिबान ने दी धमकी, दोबारा घर छोड़ने पर मजबूर
गजनी : अर्जेंटीना और बार्सिलोना के स्टार फुटबॉलर लियोनल मेसी के एक नन्हें फैन मुर्तजा अहमदी को अफगानिस्तान में तालिबान ने जान से मारने की धमकी दी है। इस वजह से मुर्तजा दो साल में दूसरी बार घर छोड़ने पर मजबूर है। 2016 में भी उसके परिवार को देश छोड़ना पड़ा था। दरअसल, मुर्तजा ने दो साल पहले प्लास्टिक की थैली से बनी अर्जेंटीना की फुटबॉल टीम की जर्सी को पहना था। इससे तालिबान नाराज हो गया।
गजनी का रहने वाला है मुर्तजा
मुर्तजा पूर्वी अफगानिस्तान के गजनी प्रांत का रहने वाला है। 2016 में उसने अपने घरवालों से मेसी की टी-शर्ट दिलाने को कहा था, लेकिन उसके घरवाले खरीद पाने में असमर्थ थे। मुर्तजा के पिता मोहम्मद आरिफ अहमदी ने उसे नीले और सफेद प्लास्टिक के थैले से बनी अर्जेंटीना की जर्सी दी। उसका फोटो इंटरनेट पर वायरल हो गया। इसके बाद तालिबान ने उसके घर पर बम गिराए। जान से मारने की धमकी दी। इससे मुर्तजा के परिवार को पाकिस्तान जाना पड़ा था।

फुटबॉल प्रेमियों का मिल रहा समर्थन
दूसरी ओर, मुर्तजा का समर्थन पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रेमियों ने किया। दिसंबर 2016 में जब यह बात मेसी को पता चली, तो उन्होंने उसे मिलने के लिए कतर बुलाया। वे अल-अहली सऊदी एफसी के खिलाफ एक मैच खेलने पहुंचे थे। मैच से पहले मेसी ने उससे मुलाकात की और पूरी टीम के साथ फोटो सेशन कराया। उन्होंने मुर्तजा को अपने दस्तखत वाली दो टी-शर्ट भी गिफ्ट में दी।
हमारे लिए जीना मुश्किल हो गया था
उसके पिता आरिफ अहमदी ने कहा, “बेटे के अपहरण की धमकी मिलने के बाद मैंने पाकिस्तान जाने का फैसला किया था। वहां हमारे लिए जीना मुश्किल हो गया था। मैंने अपनी सारी संपत्ति बेच दी। बेटे को बचाने के लिए अफगानिस्तान छोड़ दिया।” हालांकि, बाद में पैसे खत्म होने के बाद आरिफ परिवार के साथ अफगानिस्तान वापस लौटे, लेकिन अब फिर से धमकियां मिल रही हैं।
मुर्तजा स्कूल तक नहीं जा पा रहा
मुर्तजा की मां शफीका अहमदी ने कहा, “मुझे नहीं पता कि तालिबान उससे क्या चाहता है? उन्होंने कहा है कि अगर मुर्तजा उनके कब्जे में आ गया तो वे उसे काट देंगे। पिछले दो साल से हम उसे उसे स्कूल भी नहीं भेज पा रहे हैं।
महारानी कैकयी का देश केकय
केकय (जिसे कैकेय, कैकस या कैकेयस नाम से भी जाना जाता है) एक प्राचीन राज्य था, जो अविभाजित पंजाब से उत्तर पश्चिम दिशा में गांधा और व्यास नदी के बसा था। यहां के अधिकांश निवासी केकय जनपद के क्षत्रीय थे। अतः कैकेयस कहलाते थे। कैकेय लोग प्रायः मद्र देश, उशीनर देश या शिवि प्रदेश के लोगों के संबंध में रहते थे और सभी संयुक्त रूप से वाहिका देश में आते थे। ये वर्णन पाणिनि के अनुसार है। केकय देश का उल्लेख रामायण में भी आता है। राजा दशरथ की सबसे रानी कैकेयी और उसकी दासी मंथरा केकय देश की ही थी।
भौगोलिक स्थिति
बहुत से पुराणों में कैकेय वासियों को गंधर्व, यवन, शक, परद, बाह्लीक, कंबोज, दरदास, बर्बर, चीनी, तुषार, पहलव आदि की गिनती में जोड़ा गया है। इन्हें इदीच्य के लोग कहा गया है। उदीच्य यानि उत्तरपथ की उत्तरी मंडल। केकैय ने वर्तमान झेलम, शाहपुर और गुजरात (पाकिस्तान) के क्षेत्रों में निवास किया था।
पुराण उल्लेख
राजा दशरथ की रानी कैकेयी, केकयराज की पुत्री थी और राम के राज्याभिषेक के पहले भरत और शत्रुघ्न राजगृह या गिरिव्रज में ही थे-
‘उभयौभरतशत्रुघ्नौ केकयेषु परंतपौ, पुरे राजगृहे रम्येमातामहनिवेशने तथा ‘गिरिव्रजपुरवरं शोघ्रमासेदुरंजसा’
अयोध्या के दूतों की केकय देश की यात्रा के वर्णन में उनके द्वारा विपाशा नदी को पार करके पश्चिम की ओर जाने का उल्लेख है-
‘विष्णो: पदं प्रेक्षमाणा विपाशां चापि शाल्मलीम्…
अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य
कनिंघम ने गिरिव्रज का अभिज्ञान झेलम नदी (पाकिस्तान) के तट पर बसे ‘गिरिजाक’ नामक स्थान (वर्तमान जलालाबाद, प्राचीन ‘नगरहार’) से किया है। अलक्षेंद्र के भारत पर आक्रमण के समय ‘पुरु’ या ‘पौरस’ केकय देश का ही राजा था। उस समय उसकी पूर्वी सीमा रामायण काल के केकय जनपद की अपेक्षा संकुचित थी और इसका विस्तार झेलम और गुजरात के ज़िलों तक ही था। जैन लेखकों के अनुसार केकय देश का आधा भाग आर्य था। परवर्ती काल में केकय के लोग शायद बिहार में जाकर बसे होंगे और वहाँ के प्रसिद्ध बौद्ध कालीन नगर गिरिव्रज या राजगृह का नामकरण उन्होंने अपने देश की राजधानी के नाम पर ही किया होगा।
केकय राजवंश की एक शाखा मैसूर में जाकर बस गई थी। पुराणों में केकय लोगों को अनु का वंशज बताया है। ऋग्वेद में अनु के वंश का निवास परुष्णी नदी (रावी) के निकट या मध्य पंजाब में बताया गया है। जैन ग्रंथों में केकय के ‘सेयविया’ नामक नगर का उल्लेख है। रामायण से ज्ञात होता है कि कैकयी के पिता का नाम ‘अश्वपति’ और भाई का नाम ‘युधाजित्’ था।
सिकंदर और पोरस युद्ध (326 ईसा पूर्व) : भारत पर यूं तो छोटे-बड़े आक्रमण होते रहे लेकिन पहला बड़ा आक्रमण सिकंदर ने किया था। सिकंदर और पोरस के बीच हुए युद्ध में पोरस की जीत हुई थी। सिकंदर ने भारत के पश्चिमी छोर पर बसे पोरस के राज्य पर आक्रमण किया था। पोरस के राज्य के आसपास दो छोटे-छोटे राज्य थे- तक्षशिला और अम्भिसार। तक्षशिला, जहां का राजा अम्भी था और अम्भिसार का राज्य कश्मीर के चारों ओर फैला हुआ था। अम्भी का पुरु से पुराना बैर था इसलिए उसने सिकंदर से हाथ मिला लिया। अम्भिसार ने तटस्थ रहकर सिकंदर की राह आसान कर दी। दूसरी ओर घनानंद का राज्य था वह भी तटस्थ था। ऐसे में पोरस को अकेले ही लड़ना पड़ा। इस युद्ध के बाद भारत का पश्चिमी छोर कमजोर होने लगा। यवन आक्रांताओं के आक्रमण बढ़ने लगे। संपूर्ण अफगानिस्तान उक्त काल में भारत का पश्चिमी छोर था जहां उपगणस्थान, गांधार और केकय प्रदेश थे और ये सभी बौद्ध राष्ट्र बन चुके थे।
नोट – यह लेख भारतकोश, विकिपीडिया और वेबदुनिया से प्राप्त जानकारी पर आधारित है और किसी भी रूप में यह वेबपत्रिका इसका श्रेय नहीं लेती और न ही लेना चाहिए मगर जो आवश्यक है,उसका प्रसार करने का प्रयास हम जरूर करते हैं। आज स्थिति यह है कि आपको केकय देश का नक्शा भी शायद कठिनाई से मिले। केकय देश के नाम पर कैकयी की तस्वीर मिलती है। हमने अपने इतिहास को मिथक में तब्दील कर दिया है और यही आत्महीनता का कारण है। हम मानते हैं कि बदलते कालखंड में परिवर्तन को स्वीकार करना जरूरी है। हम सौहार्द के भी पक्षधर हैं मगर इस भावना के साथ भी अपनी धरोहरों को बचाये रखना भी हमारा यह दायित्व है। अबकी कभी इस क्षेत्र में निकलें तो केकय को जरूर तलाशिएगा।
हो सकता है दो आदमी दो कुर्सियां” की समीक्षा

रंगारंग रहा लिटरेरिया 2018, प्रेम मोदी को निनाद सम्मान और विनय वर्मा को रवि दवे सम्मान
कोलकाता : नीलाम्बर कोलकाता द्वारा आयोजित लिटरेरिया का समापन साहित्य, संस्कृति और कला के तमाम रंगों को बिखेरते हुए हुआ। बी.सी.राय ऑडिटोरियम, प्रेम मोदी को निनाद सम्मान और विनय वर्मा को रवि दवे सम्मान प्रदान किया गया।
इसके पूर्व तीसरे और अन्तिम दिन की शुरुआत कोलकाता में संवाद के द्वितीय सत्र से हुई । संवाद का विषय था , “आज के साहित्य में स्त्री और आज का स्त्री साहित्य । ” सत्र के प्रमुख वक्ता थे संतोष चतुर्वेदी , लवली गोस्वामी , अनुराधा सिंह और श्रद्धांजलि सिंह । विषय पर अनुराधा सिंह कहती हैं कि आज भी स्त्री के प्रति समाज का बरताव दोयम दर्जे़ का है , लेकिन साहित्य में उसे अतिशय करुणा या महात्म्य के साथ लिखा जा रहा है । यह स्त्री के मौजूदा संघर्ष का दस्तावेजीकरण है । संतोष चतुर्वेदी अपनी बात रखते हुए कहते हैं कि उनका जीवन प्रवासी का जीवन होता है ।श्रद्धांजलि सिंह के शब्दों में वर्तमान स्त्री ने मनुष्यता के विमर्श के रुप में अपनी पहचान बनाई है । लवली गोस्वामी ने साहित्य में स्त्री की भूमिका को बहुत बेवाकी के साथ रेखांकित किया।सत्र का संचालन निशांत ने किया।

तृतीय संवाद सत्र सुप्रसिद्ध आलोचक डॉ. शंभुनाथ की अध्यक्षता में ‘आज की आलोचना के प्रतिमान ‘ विषय पर आयोजित थी। शंभुनाथ ने आलोचना के तमाम प्रतिमानों पर अपनी बात रखी और यह भी कहा कि आलोचना सिर्फ़ रचना से प्रतिमान ग्रहण नहीं कर सकती । आलोचक राजेंद्र कुमार के शब्दों में आलोचना रचना का समानांतर रुप है । जबकि कवि नरेन्द्र जैन ने अपने वक्तव्य में बड़ी प्रखरता से कहा कि एक आलोचक का पहले एक साहित्यकार होना आवश्यक है । आलोचक वेदरमण ने कहा कि आलोचना सिद्धांत निर्माण का कार्य करती है।इस सत्र का संचालन पीयूष कांत राय ने किया।

संवाद सत्र के तत्पश्चात प्रतिमा सिंह , आस्था मांदले और ममता शर्मा के गीतों से सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं समापन समारोह की शुरुआत हुई ।थीम कोलाज़ के अंतर्गत वरिष्ठ कवि राजेश जोशी की कविता पर हावड़ा नवज्योति के बच्चों ने खास प्रस्तुति की । एक दूसरे कविता कोलाज़ में नीलांबर की टीम द्वारा तैयार वरिष्ठ कवि अष्टभुजा शुक्ल की कविता ‘मैं स्त्री ‘ पर कोलाज़ प्रस्तुत किया गया । प्रसिद्ध अभिनेत्री एवं नृत्यांगना रश्मि बन्दोपाध्याय और मौसुमी दे ने कविताओं पर बेहद सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया । शाम के समापन सत्र में सुप्रसिद्ध नाट्यकर्मी एवं अभिनेता विनय वर्मा द्वारा निर्देशित नाटक ‘मैं राही मासूम ‘ का शानदार मंचन किया गया । इस अवसर पर फिल्म पंचलैट के निर्देशक प्रेम मोदी को निनाद सम्मान एवं विनय वर्मा को रवि दवे सम्मान से सम्मानित किया गया । धन्यवाद ज्ञापन विमलेश त्रिपाठी ने किया।तीन दिवसीय इस साहित्य उत्सव को साहित्यप्रेमियों ने खूब सराहा।

नीलांबर द्वारा आयोजित लिटरेरिया 2018 के दूसरे दिन गत 1 दिसंबर के कार्यक्रम की शुरुआत संवाद सत्र के साथ किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि ऋतुराज ने की। कविता में राजनीतिक मुहावरे और अनुभव का सवाल विषय पर अष्टभुजा शुक्ल , गीत चतुर्वेदी और ऋतुराज ने बड़ी बेबाकी से अपने विचार रखे। गीत चतुर्वेदी ने कविताओं में राजनीतिक मुहावरों को निजी व्यक्तित्व से प्रभावित होने की बात कही।
चर्चा के दौरान कवि ऋतुराज ने आज के राजनीतिक परिदृश्य में कवियों के सहभागिता की कमी पर प्रकाश डाला। अष्टभुजा शुक्ल ने कविताओं में विदेशी कवियों और कविताओं के दखल पर भी बातें की और कवियों को अपने देश में कविता की संभावनाओं को तलाशने की बात कही । दर्शक दीर्घा से कई प्रश्न आए जिसका उत्तर इन कवियों ने बड़े धैर्य के साथ दिया। ममता पांडेय ने इस कार्यक्रम का सफलतापूर्वक सचालन किया ।
संवाद सत्र के बाद इस दिन का मुख्य आकर्षण कविता पर्व का आरम्भ हुआ जिसमें देश भर के बीस कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया ।कविता पर्व के प्रथम सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि ऋतुराज ने की । इस सत्र में राजेंद्र कुमार, कात्यायनी , एकांत श्रीवास्तव , प्रेमशंकर शुक्ल , अनुराधा सिंह , स्मिता सिन्हा , ज्योति शोभा , द्वारिका प्रसाद उनियाल , कुमार मंगलम और अंचित ने अपनी कुछ बेहतरीन कविताओं के साथ शिरकत की ।आनंद गुप्ता ने मंच संचालन किया ।

कविता पर्व के द्वितीय सत्र में वरिष्ठ कवि अष्टभुजा शुक्ल की अध्यक्षता में सुबोध सरकार , अष्टभुजा शुक्ल , संतोष चतुर्वेदी , गीत चतुर्वेदी , लवली गोस्वामी , यतीश कुमार , नताशा और पराग पावन ने अपनी रचनाओं का शानदार पाठ किया । अष्टभुजा शुक्ल की कविताओं पर कोलाज की एक शानदार प्रस्तुति की गई जिसमें ममता पांडेय, नीलू पांडेय, ऋतेश पांडेय, विशाल पांडेय, विजय शर्मा, पूनम सिंह स्मिता गोयल एवं दीपक ठाकुर ने शानदार प्रस्तुति दी.
इसके बाद कहानी पर्व में कार्यक्रम ‘एक सांझ कहानी की ‘ के अंतर्गत शाम 6 बजे मन्नू भंडारी की कहानी ‘ अनथाही गहराईयाँ ‘ पर तैयार की गयी फिल्म की स्क्रीनिंग दर्शकों के लिये की गयी , जबकि मन्नू भंडारी की सुपुत्री रचना यादव ने अपनी मनमोहक शैली में इसी कथा का पाठ सबके समक्ष किया । दर्शकों को इस नये प्रयोग ने बहुत प्रभावित किया।
‘लिटरेरिया 2018’ का तीन दिवसीय कार्यक्रम संस्था ‘नीलाम्बर कोलकाता’ के तत्वाधान में आरम्भ हुआ। गत 30 नवम्बर से 2 दिसम्बर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में क कविता , कहानी , समालोचना , नृत्य , गीत, आवृत्ति, नाटक , फिल्म , यंत्र वादन और बतकही जैसी तमाम विधाओं के रंगों को एक मंच पर समेटने की कोशिश की गयी।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि अब्दुल बिस्मिल्लाह के साथ विशिष्ट अतिथि पीसी सेन, अष्टभुजा शुक्ल, डॉ शंभुनाथ, जे के साहा और गणमान्य अतिथियों ने साथ दीप प्रज्वलन के साथ किया। इसके बाद एक वीडियो के द्वारा इस वर्ष के दिवंगत साहित्यकारों को श्रद्धांजलि दी गयी। उसके बाद बाल बांसुरी वादक कुमार अनिर्बन रॉय ने मनमोहक बांसुरी वादन और मैत्रेयी रॉय ने शास्त्रीय गीत प्रस्तुत किया।
सेमिनार का पहला सत्र शुरु हुआ , जिसका विषय था ,”स्त्री विमर्श -उपलब्धियां और भटकाव “।इस सत्र की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह ने की। प्रमुख वक्ता रहीं कात्यायनी , प्रियंकर पालीवाल , राजश्री शुक्ला और दीबा नियाज़ी।संचालन अल्पना नायक ने किया । कात्यायनी ने जहां कविताओं में स्त्री विमर्श को तलाशा शोधकर्ता दीबा नियाज़ी धर्म को इसके खिलाफ साजिश करते हुए देखती है और राजनीति में महिलाओं की कम भागीदारी को भी इससे जोड़ती हैं। वहीं प्रोफेसर राजश्री शुक्ला जी महिलाओं और लड़कियों के आगे बढ़ने के छोटे-छोटे संघर्षों को भी स्त्री विमर्श की सफलता के रूप में देख रही हैं। कुल मिलाकर स्त्री विमर्श का यह सत्र बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक रहा। । प्रियंकर पालीवाल ने भी स्त्री विमर्श को आगे बढ़ाते हुए उनके आत्मविश्वास पर चर्चा की।

इस सत्र की संचालिका अल्पना नायक ने भी महिलाओं के द्वारा छोटी-छोटी परंपराओं को निभाते जाने को भी स्त्री विमर्श से जोड़ा।
सत्र के बाद दस मिनट के एक मोनो एक्ट ‘ रज्जो ‘ का मंचन किया गया जिसमें कलाकार दीपक ठाकुर के भावपूर्ण अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। सेमिनार का दूसरा सत्र शुरु हुआ , जिसका विषय था , “ स्त्री विमर्श की संभावनाएं “। सुप्रसिद्ध आलोचक डॉ शंभुनाथ ने इस सत्र की अध्यक्षता की । ममता कालिया , गरिमा श्रीवास्तव , अलका सरावगी और रजनी पांडेय ने इस विषय पर खुल कर अपने वक्तव्य रखे।
इसके बाद सेमिनार के दूसरे सत्र की चर्चा का प्रारंभ वागर्थ के संपादक एवं प्रसिद्ध आलोचक डॉ शंभुनाथ की अध्यक्षता में हुई। सबसे पहले शोधकर्ता रजनी पांडेय ने इतिहास में स्त्रियों की जगह को तलाशा वहीं गरिमा चौधरी ने वैश्विक स्तर पर स्त्रियों के साथ हो रहे यौन अत्याचारों पर प्रकाश डालते हुए स्त्री विमर्श के दायरे को बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि स्त्री विमर्श से पहले स्त्री का मनुष्य के रूप में स्थापित होना जरूरी है। यह समाज स्त्री को मनुष्य समझे इसके लिए प्रयासरत होना होगा। लेखिका अलका सरावगी ने अपने वैश्विक स्तर पर स्त्री विमर्श पर चर्चा की। जहां उन्होंने बेल्जियम जैसे प्रगतिशील देश का जिक्र करते हुए कहा कि वहाँ की 8 प्रतिशत महिलाएं आज भी घरेलू हिंसा का शिकार हैं। वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया ने बच्चियों पर यौन हिंसा पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की। डॉ शंभुनाथ ने स्त्री स्वतंत्रता पर बेबाकी से विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं को तय करना होगा कि स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है या सुरक्षा?उन्होंने स्त्रियों के शोषण के लिए पूंजीवाद की तीव्र भर्त्सना की।
संचालिका इतु सिंह ने सफलतापूर्वक सत्र का संचालन किया। लेखिका गरिमा श्रीवास्तव जी की किताब ‘ देह ही देश’ का लोकार्पण किया गया और उसके बाद अलका सरावगी , वेद रमण पांडेय और इतु सिंह ने इस किताब पर विस्तृत चर्चा की। काफी रचनात्मक और गंभीर विमर्शों के बाद की यह शाम दिलकश ग़ज़लों के नाम रही जिसमें मुश्ताक अंजुम, शमीम अंजुम वारसी, शहनाज रहमत, शैलेश गुप्ता, विनोद कुमार गुप्ता, अहमद मेराज, फिरोज मिर्जा, विजय शर्मा ने ग़ज़ल पाठ के द्वारा शमां बाँध दिया। गजल सत्र का संचालन युवा शायरा रौनक अफरोज ने किया। इस दिन कुंवर रवींद्र के कविता पोस्टर की प्रदर्शनी में भी लोगों ने जमकर शिरकत की एवं इसे खूब सराहा।
(रपट :आनन्द गुप्ता )
फेसबुक वीडियो से होने वाली विज्ञापन आय का 55% हिस्सा भारतीय यूजर्स को देगा
नयी दिल्ली : फेसबुक अपने भारतीय यूजर को विज्ञापन से मिलने वाले रेवेन्यू का 55% हिस्सा देगा। यूजर जो वीडियो पोस्ट करेंगे, फेसबुक उनमें ऐड ब्रेक इंसर्ट करेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फेसबुक ने हाल ही में इंडियन क्रिएटर डे ईवेंट के मौके पर इसका ऐलान किया।
वीडियो की ड्यूरेशन कम से कम 3 मिनट होना जरूरी
हिंदी और अंग्रेजी के साथ ही बंगाली, तमिल और मलयालम भाषाओं के कन्टेंट क्रिएटर्स को इसका फायदा मिलेगा। यूट्यूब से मुकाबला करने और ऑरिजनल वीडियो को बढ़ावा देने के लिए फेसबुक ने यह फैसला लिया है। तीन मिनट या इससे ज्यादा ड्यूरेशन के वीडियो में ऐड ब्रेक लगाया जाएगा। यूजर चाहें तो व्यक्तिगत वीडियो में खुद भी ऐड ब्रेक इंसर्ट कर सकते हैं या फिर इस ऑप्शन को बंद कर सकते हैं।
वीडियो सिर्फ फेसबुक पेज के जरिए ही पब्लिश किए जा सकेंगे प्रोफाइल के जरिए नहीं। साथ ही उस पेज के कम से कम 10 हजार फॉलोअर भी होने चाहिए। वीडियो कन्टेंट पब्लिश करने वालों को ऐड रेवेन्यू प्रोग्राम का फायदा तभी मिलेगा जब 60 दिन में वीडियो को 30,000 व्यू मिलेंगे। सभी व्यू एक मिनट से कम के नहीं होने चाहिए।
गैजेट्स की बजाय पुराने खेलों से बच्चों में आती है ज्यादा समझदारी: रिसर्च
बच्चों के सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ाना है तो उनके साथ ब्लॉक और पजल जैसे गेम्स खेलें। उन्हें गैजेट्स से दूर रखें। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स जर्नल में प्रकाशित रिसर्च में यह कहा गया है। इसमें शिशु रोग विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि बच्चों के लिए पुराने परंपरागत खेल ही बेहतर हैं। इस दौरान बच्चे माता-पिता के साथ ज्यादा खुशी महसूस करते हैं।
महंगे खिलौने और गैजेट्स विकास में अहम भूमिका नहीं निभाते
शोध से जुड़े डॉ. एलन मेंडलसन कहते हैं कि पांच साल तक के बच्चों के लिए कार्ड बोर्ड को एक खेल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे आसानी से घर पर भी बनाया जा सकता है। कई माता-पिता गैजेट और खिलौने के विज्ञापन देखकर उनके प्रभाव में आ जाते हैं। उन्हें लगता है ये प्रोडक्ट्स बच्चों का ज्ञान और दिमागी स्तर बढ़ाने का काम करते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। अभिभावकों का यह सबसे बड़ा भ्रम है कि महंगे खिलौने बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाने में अहम हैं। डॉ. एलन के मुताबिक, जब बच्चे और अभिभावक, दोनों साथ में खिलौने खेलते हैं तो उनके विकास में सकारात्मक बदलाव आता है।
बुलेट ट्रेन के लिए जर्मनी में रहने वाली अप्रवासी महिला ने दी पैतृक जमीन
नयी दिल्ली : जर्मनी में रहने वाली भारतीय मूल की एक महिला ने गुजरात में मौजूद अपनी पैतृक जमीन मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए दे दी है। यह जानकारी नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के एक अधिकारी ने शुक्रवार को दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए रेलवे ने गुजरात में पहली बार भूमि अधिग्रहण किया है।
30234.3 रुपए की दर से बेची जमीन
जर्मनी में भारतीय रेस्त्रां चलाने वाली सविता बेन मूल रूप से गुजरात के चनसाड गांव की हैं। वे करीब 33 साल पहले शादी के बाद जर्मनी चली गई थीं। उन्होंने पास चनसाड में करीब 71 एकड़ जमीन है। इसमें से उन्होंने 11.94 एकड़ जमीन 30234.3 रुपए की दर से एनएचएसआरसीएल को दे दी। एनएचएसआरसीएल के प्रवक्ता धनंजय कुमार ने बताया, ‘‘सविता बेन परियोजना के लिए जमीन देने भारत आई थीं। इसके बाद वे जर्मनी लौट गईं।’’
धनंजय के मुताबिक, अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 508 किलोमीटर लंबा गलियारा बनाया जाएगा। इसके लिए करीब 1400 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है, जिसमें 1120 हेक्टेयर जमीन निजी स्वामित्व वाली है। जमीन अधिग्रहण करने पर करीब 6000 लोगों को मुआवजा देना होगा। एनएचएसआरसीएल इस प्रोजेक्ट के लिए मुंबई में महज 0.09% जमीन अधिग्रहीत कर पाया है। उसे जमीन अधिग्रहण मुद्दों को लेकर दोनों राज्यों में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को मनाने के लिए रेलवे उन जिलों में सहमति शिविर का आयोजन कर रहा है, जहां उसे जमीन की जरूरत है।




