‘साहित्य ही जगह है जहाँ मानवता के स्वप्न बचे होते हैं’
खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज में बसंत उत्सव का आयोजन
कोलकाता : कोलकाता के खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से बसंत उत्सव का आयोजन किया गया। इस मौके पर विद्यार्थियों ने काव्य आवृत्ति, फागुन गीत और नृत्य प्रस्तुत किया। मौके पर विभाग की विभागाध्यक्ष शुभ्रा उपाध्याय ने कहा कि यह बसंत उत्सव हमें नई ऊर्जा और सृजनात्मकता से भर देता है। डॉ रूद्राक्षा पांडेय ने कहा कि जीवन में रंगों का बहुत महत्व होता है और होली के रंगों की बात ही अलग है। यह त्योहार लोगों के जीवन को खुशियों के रंग से भरने आता है। प्रो. मधु सिंह ने कहा कि होली का त्योहार सौहार्द का त्योहार है। लोग आपसी बैर को भूल होली मनाते हैं और खुशियां बांटते हैं। प्रो. राहुल गौड़ ने कहा कि काव्य और बसंत का बड़ा गहरा संबंध है। यह उत्सव हमें सभी से जोड़ता है। इस अवसर पर प्रीति साव, साक्षी झा, निशा सिंह, बिंदी चौधरी, सीमा प्रजापति, पिंकू, अभिनव प्रसाद, शिखा सिंह, जितेंद्र सिंह और अतुल उपाध्याय ने काव्य आवृत्ति, नेहा ठाकुर ने नृत्य और प्रीति साव, सीमा, रुनी गुप्ता, लक्ष्मी पाठक, साक्षी ने संगीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रीति साव ने किया।
जब खेली होली नंद ललन

जब खेली होली नंद ललन हँस हँस नंदगाँव बसैयन में।
नर नारी को आनन्द हुए ख़ुशवक्ती छोरी छैयन में।।
कुछ भीड़ हुई उन गलियों में कुछ लोग ठठ्ठ अटैयन में ।
खुशहाली झमकी चार तरफ कुछ घर-घर कुछ चौप्ययन में।।
डफ बाजे, राग और रंग हुए, होली खेलन की झमकन में।
गुलशोर गुलाल और रंग पड़े हुई धूम कदम की छैयन में।
जब ठहरी लपधप होरी की और चलने लगी पिचकारी भी।
कुछ सुर्खी रंग गुलालों की, कुछ केसर की जरकारी भी।।
होरी खेलें हँस हँस मनमोहन और उनसे राधा प्यारी भी।
यह भीगी सर से पाँव तलक और भीगे किशन मुरारी भी।।
डफ बाजे, राग और रंग हुए, होली खेलन की झमकन में।
गुलशोर गुलाल और रंग पड़े हुई धूम कदम की छैयन में।।
अनोखी हैं इन जगहों पर होली के रंग
मथुरा-वृंदावन की होली

होली की बात हो तो सबसे पहला नाम मथुरा-वृंदावन का आता है। यहां फूलों की होली और लट्ठमार होली खेली जाती है। मथुरा-वृंदावन की यह होली दुनियाभर में काफी प्रसिद्ध है। इस दौरान यहां विदेशी सैलानी भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। एक हफ्ते तक मनाए जाने वाले इस उत्सव के दौरान यहां एक अगल उत्साह देखने को मिलता है। लट्ठमार होली की शुरुआत मुख्य पर्व से लगभग एक सप्ताह पहले होती है।
उदयपुर की शाही होली

अगर इस बार आप शाही होली का आनंद लेना चाहती हैं, तो उदयपुर जा सकती हैं। उदयपुर की शाही होली काफी प्रसिद्ध है। यहां खास तरह से होली मनाई जाती है। इसे शाही होली कहते हैं। होलिका जलाकर शाही तरीके से होली का जश्न मनाया जाता है। इस दौरान सिटी पैलेस में शाही निवास से मानेक चौक तक शाही जुलूस निकाला जाता है। जुलूस में सजे-धजे घोड़े, हाथी शामिल होते हैं। जुलूस के साथ शाही बैंड धुन बजाता चलता है। राजस्थानी गीत-संगीत के साथ यहां काफी भव्य तरीके से होली मनाई जाती है।
आनंदपुर साहिब की होली

पंजाबी तरीके से होली का लुत्फ उठाने के लिए आनंदपुर साहिब जरूर पहुंचें। होली में पंजाब का रंग एकदम अलग होता है। आनंदपुर साहिब में खेली जाने वाली होली की शुरुआत सन 1701 में होला-मोहल्ला त्योहार के रूप में हुई थी। इस त्योहार में सिख समुदाय के लोग कुश्ती, मार्शल आर्ट्स और तलवारों के साथ कई करतब दिखाते हैं। इस साल यह त्योहार 24 मार्च तक चलेगा।
शांति निकेतन का वसन्त उत्सव

होली के एक अलग रंग को देखने के लिए पश्चिम बंगाल में शांति निकेतन की होली में जरूर जाएं। शांति निकेतन में सांस्कृतिक व पारंपरिक अंदाज में गुलाल और अबीर की होली खेली जाती है। इस साल कार्यक्रम की शुरुआत 20 मार्च से होगी। पश्चिम बंगाल में होली को वसंत उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत प्रसिद्ध बंगाली कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी। शांति निकेतन में खेली जाने वाली होली में यहां के छात्र आने वाले सैलानियों के लिए कई अनोखे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। इस दौरान लोगों पर रंग और गुलाल भी डाला जाता है। इस त्योहार का बंगाल की संस्कृति में एक खास महत्व है।
देवताओं ने की थी रंगों की वर्षा तब से मनाई जा रही है होली
होली आनंद और उल्लास का पर्व है। यह उत्सव खुशियों को मिल-बांटने का अवसर होता है। होलिका दहन से सारे अनिष्ट दूर हो जाते हैं। होली ऐसा त्योहार है जिसमें सारे भेदभाव दूर हो जाते हैं। होली ऋतु परिवर्तन का भी द्योतक है। होली पर घर में शांति बनाए रखने से मां लक्ष्मी का आगमन होता है। घर में कलह के चलते होली पर की गई पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है।
सदियों से होली का त्योहार मनाने की परंपरा चली आ रही है। कहा जाता है कि फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि को भगवान शिव ने तपस्या भंग करने का प्रयास करने पर कामदेव को भस्म कर दिया था। कामदेव की पत्नी रति ने भगवान शिव से क्षमा याचना की, तब भगवान शिव ने कामदेव को पुनर्जीवित कर दिया, जिससे प्रसन्न होकर देवताओं ने रंगों की वर्षा की तभी से होली का त्योहार मनाया जाने लगा।
दैत्यराज हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। स्वयं को ईश्वर घोषित कर चुके हिरण्यकश्यप को प्रह्लाद की ईश्वर के प्रति भक्ति पसंद नहीं थी। उसने अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर प्रह्लाद को जलाने का प्रयास किया। होलिका जल गई लेकिन प्रह्लाद बच गया, तभी से होलिका दहन की परंपरा का आरंभ हुआ। होली से आठ दिन पहले से प्रह्लाद को बंदी बनाकर प्रताड़ित किया जाने लगा था, इसलिए होली से आठ दिन पहले के समय को होलाष्टक कहा जाता है।
होली पर रहे सेहत का ख्याल
होली रंगों के साथ-साथ खाने-पीने का भी त्योहार है मगर सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी हो जाता है. सेहत को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे टिप्स जिनके अपनाकर आप अपनी सेहत का सही ढंग से भरपूर ख्याल रख सकते हैं –
तला भुना और मसालेदार खाना कम खाएं
होली के इस पर्व पर खासतौर पर मसालेदार, तले हुए स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं। चाहते हैं फिट रहना तो इनका सेवन कम मात्रा में करें। अगर खाना ही पड़े तो कम खाएं। ज्यादा तला भुना और मसालेदार खाना आपकी सेहत के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। इससे एसिडिटी, पेट में जलन, जैसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
खूब पानी पिएं
दिनभर कुछ न कुछ खाना पीना चलता ही रहता है। ऐसे में पानी पीना कम हो जाता है। कोशिश करें कि कम से कम दिनभर में 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं।
मिठाइयों के सेवन में बरतें सावधानी
मिठाइयों के बिना हर त्योहार फीका होता है। गुझिया भी ज्यादा खाने से बचें क्योंकि यह मैदे से बनी होती है और इसमें मावे की स्टफिंग रहती है।
भांग व शराब से दूर रहें
कहते हैं कि भांग के बिना भी होली अधूरी रहती है मगर यह भ्रामक धारणा है। इनके बगैर भी आपकी होली रंगीन हो सकती है। हमारी सलाह है कि इससे दूर ही रहें वरना इसके हैंगओवर से आपको काफी परेशानी का भी सामना करना पड़ सकता है।
होली बनाएं जायकेदार
दही गुझिया

सामग्रीः बिना छिलके वाली उड़द की दाल 1 कप, नमक स्वादानुसार, बेकिंग सोडा, आधा छोटा चम्मच तेल तलने के लिए, गाढ़ा दही 2 कप, शुगर 2 बड़ा चम्मच।
दही-वड़ा मसाला के लिए : लाल मिर्च पाउडर आवश्यकतानुसार, साबुत भूना जीरा 2 बड़ा चम्मच, साबुत भूना धनिया 2 बड़ा चम्मच, काला नमक 1/4 छोटा चम्मच, चाट मसाला 1 बड़ा चम्मच।
भरावन के लिए : अदरक 2 इंच का टुकड़ा, हरी मिर्च 2-3, धनिया पत्ता कटा हुआ 1 बड़ा चम्मच, किशमिश 2 बड़ा चम्मच, चिरौंजी 1 बड़ा चम्मच कद्दूकस किया, सूखा नारियल 2 बड़ा चम्मच।
विधिः उड़द दाल को धोकर 3-4 घंटे के लिए भिगोएं। फिर इसे बारीक पीस लें। पीसी हुई दाल में थोड़ा सोडा डालकर स्पंजी होने तक फेंटें। अब कटी हुई हरी मिर्च, धनिया पत्ता और किशमिश को भरावन वाली सामग्री के साथ अच्छे से मिला लें। एक प्लास्टिक शीट लें और उसे पानी से गीला करें। उस पर दाल वाले मिश्रण को एक बड़ा चम्मच लेकर गोल शेप में फैलाएं। गीले हाथों से इसे प्लेन करें और बीचो-बीच थोड़ी-सी भरावन वाली सामग्री रखें। फिर इसे गुझिया की तरह कवर करें और गर्म तेल में गोल्डेन ब्राउन होने तक तलें। तले हुए गुझिये को गुनगुने पानी में 15-20 मिनट के लिए रखें। इसके बाद गुझिये को पानी से निकालकर हल्के हाथ से दबाते हुए सारा पानी निकालें। एक अलग बर्तन में दही लें। इसमें चीनी और आधा चम्मच नमक मिलाकर फेंटें। दही वड़ा मसाला के लिए बताई सामग्री को बारीक पीसें। गुझिए को परोसने से पहले एक प्लेट में रखें और ऊपर से फेंटे हुए दही को डालें। फिर दही वड़ा मसाला ऊपर से बुरकें। अगर आप खट्टा पसंद करती हैं, तो ऊपर से इमली की मीठी चटनी भी चम्मच से फैला सकती हैं।
बादाम फिरनी
सामग्री : 1 कप थोड़ा मोटा पिसा हुआ चावल का आटा, 4 कप दूध, 2 कप पानी, 3 बड़े चम्मच शक्कर, 1 बड़ा चम्मच घी, 2 छोटे चम्मच कटे हुए बादाम, 2 छोटे चम्मच काजू, 1 छोटा चम्मच पिस्ता, 4 नग इलायची
विधि : बादाम फिरनी के लिये सबसे पहले पैन में घी गर्म करें। घी गरम होने पर उसमें पिसे हुए चावल डालें और चलाते हुए 7-8 मिनट तक भून लें। आटा भुन जाने पर उसमें इचायची के दाने निकाल कर डालें और चलाएं। आटा इसके बाद उसमें पानी और दूध मिलाएं और इस तरीके से चलाएं जिससे आटा पूरी तरीके से घुल जाए। अब पैन में शक्कर और बादाम मिला दें और मीडियम आंच पर चलाते हुए पकाएं। आटे का घोल जब गाढ़ा हो जाए और तली में बैठने लगे, तो आंच बंद कर दें और कटे हुए काजू और पिश्ता से गार्निश कर दें। स्वादिष्ट बादाम / चावल की फिरनी तैयार है। चाहें तो इसे गरमा-गर्म खाएं और चाहें तो इसे सामान्य तापमान पर आने के बाद फ्रिज में ठंडी करके खाएं।
78722 करोड़ रुपये की ब्रांड वैल्यू के साथ टाटा देश का सर्वश्रेष्ठ ब्रांड, रिलायंस का दूसरा नम्बर
मुम्बई. टाटा देश का सर्वश्रेष्ठ ब्रांड है। दूसरे नंबर पर रिलायंस और तीसरे पर एयरटेल है। दुनिया की प्रमुख ब्रांड कंसल्टेंसी फर्म इंटरब्रांड ने 2019 के लिए बेस्ट इंडियन ब्रांड्स लिस्ट जारी की है। 2018 में तीन फैक्टर- ब्रांड का वित्तीय प्रदर्शन, इसकी खूबियां और ग्राहकों की पसंद को प्रभावित करने में भूमिका के आधार पर रैंकिंग की गयी है। लिस्ट में 40 ब्रांड शामिल हैं।
भारती एयरटेल की ब्रांड वैल्यू 32235 करोड़ रुपये
टाटा की ब्रांड वैल्यू में 2018 में 6% इजाफा हुआ है। इसमें ग्रुप की आईटी कंपनी टीसीएस का अहम योगदान रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज की ब्रांड वैल्यू 12% बढ़ी है। इसे जियो की वजह से बड़ा फायदा हुआ। दूसरी ओर एयरटेल की ब्रांड वैल्यू में 13% कमी आई है। सूची में शामिल सभी 40 ब्रांड की कुल वैल्यू 5.2% बढ़कर 50.03 अरब रुपये रही है। इसमें फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर की कंपनियों का सबसे ज्यादा 27% और ऑटोमोबाइल सेक्टर की कंपनियों का 10% योगदान रहा। इंटरब्रांड 6 साल से सर्वश्रेष्ठ भारतीय ब्रांड्स की सूची जारी कर रहा है। इसमें बिग बाजार और डी-मार्ट पहली बार शामिल हुए हैं। बिग बाजार का 33वां नंबर है। इसकी ब्रांड वैल्यू 2,686 करोड़ रुपये है। 2,015 करोड़ रुपये की ब्रांड वैल्यू के साथ डी-मार्ट 37वें नंबर पर है।
देश के टॉप-10 ब्रांड
ब्रांड वैल्यू (रुपये करोड़)
टाटा 78,722
रिलायंस इंडस्ट्रीज 42,826
भारती एयरटेल 32,235
एचडीएफसी बैंक 29,963
एलआईसी 28,095
एसबीआई 25,620
इन्फोसिस 24,367
महिंद्रा ग्रुप 18,389
आईसीआईसीआई बैंक 16,993
गोदरेज 16,897
नहीं रहे गोवा के सीएम व पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर
पणजी : गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का रविवार को उनके निजी आवास में निधन हो गया। वह 63 वर्ष के थे। पर्रिकर के परिवार में दो पुत्र और उनका परिवार है। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई..भाषा को बताया कि मुख्यमंत्री का निधन रविवार शाम छह बजकर चालीस मिनट पर हुआ। पिछले एक साल से बीमार चल रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता का स्वास्थ्य दो दिन पहले बहुत बिगड़ गया था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट किया है, ‘‘गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन की सूचना पाकर शोकाकुल हूं।’’ उन्होंने कहा कि पर्रिकर बेहद साहस और सम्मान के साथ अपनी बीमारी से लड़े। उन्होंने लिखा है कि सार्वजनिक जीवन में वह ईमानदारी और समर्पण के मिसाल हैं और गोवा और भारत की जनता के लिए उनके काम को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। सूत्रों ने बताया कि पूर्व रक्षा मंत्री पर्रिकर शनिवार देर रात से ही जीवनरक्षक प्रणाली पर थे। पर्रिकर फरवरी 2018 से ही बीमार चल रहे थे।
प्रमोद सावंत बने गोवा के सीएम, बहुमत भी साबित किया
पणजी : मनोहर पर्रिकर के अंतिम संस्कार के 8 घंटे बाद गोवा को नया मुख्यमंत्री मिल गया। विधानसभा के स्पीकर प्रमोद सावंत ने सोमवार रात करीब 1.50 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बुधवार को बहुमत साबित भी कर दिया। सावंत के अलावा महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के विधायक सुदिन धवलिकर और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) के अध्यक्ष और विधायक विजय सरदेसाई समेत 11 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। माना जा रहा है कि सुदिन धवलिकर और विजय सरदेसाई उप-मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। प्रमोद सांवत ने शपथ लेने से पहले कहा, “पार्टी ने मुझे अहम जिम्मेदारी दी है, मैं बेहतर करने की कोशिश कर करूंगा। मैं मनोहर पर्रिकर की वजह से यहां तक पहुंचा हूं, उन्होंने मुझे राजनीति सिखाई। उन्हीं की वजह से विधानसभा का स्पीकर और मुख्यमंत्री बना।” नई सरकार के पास 20 विधायकों का समर्थन है। गोवा कांग्रेस ने भाजपा के सरकार बनाने का विरोध किया। कांग्रेस नेता सुनील कौथंकर ने कहा कि हम राज्यपाल मृदुला सिन्हा की इस अलोकतांत्रिक कार्यवाही की निंदा करते हैं। उन्होंने राज्य की सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका नहीं दिया। भाजपा के पास सरकार बनाने के लिए बहुमत नहीं है।
पर्रिकर के करीबी रहे हैं सावंत – सावंत उत्तरी गोवा स्थित संखालिम विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह पेशे से एक आयुर्वेद चिकित्सक हैं। सावंत की गिनती पर्रिकर के करीबियों में होती थी। प्रमोद सावंत करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। उनके पास 3.66 करोड़ रुपए की संपत्ति है। हालांकि, सादगी के मामले में सावंत पार्रिकर से अलग हैं। पर्रिकर के पास एक इनोवा कार थी और स्कूटर था। वहीं सावंत के पास 5 कारें हैं।
विधानसभा की स्थिति – 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा में इस वक्त 36 विधायक हैं। भाजपा विधायक फ्रांसिस डिसूजा का पिछले महीने निधन हो गया था, जबकि कांग्रेस के 2 विधायकों ने पिछले साल इस्तीफा दे दिया था।




