Wednesday, October 14, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 581

वेतन में देरी और कारोबार में सुस्ती के कारण देश में बढ़ रहे लोन डिफॉल्टर

पेटीएम फंडेड फाइनेंस टेक फर्म क्रेडिटमेट ने यह सर्वे किया है
40 बैंकों के दो लाख से अधिक कर्जों का विश्लेषण हुआ
एक सर्वे के मुताबिक यदि व्यक्तिगत कर्जदार समय पर अपने लोन की किस्त नहीं चुका पा रहे हैं तो उसकी सबसे बड़ी वजह वेतन मिलने में होनी वाली देरी है। इसके अलावा कारोबार में संकट की वजह से भी वे लोन नहीं चुका पा रहे हैं। एक सर्वे में यह निष्कर्ष सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार 36 फीसदी लोग देर से वेतन मिलने के चलते बैंक का भुगतान समय पर नहीं कर सके। वहीं, 29 फीसदी मामले ऐसे हैं, जिनमें कारोबारी सुस्ती बैंक रिपेमेंट में देरी की वजह बनीं। यह सर्वेक्षण ऐसे समय आया है जबकि कुछ माह पहले जारी आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार देश में बेरोजगारी की दर चार दशक के उच्चस्तर पर पहुंच गयी है। कॉरपोरेट लोन की मांग कम होने की वजह से बैंक अपने बही खाते को आगे बढ़ाने के लिए काफी हद तक रिटेल लोन पर निर्भर हैं। पेटीएम फंडेड फाइनेंस टेक फर्म क्रेडिटमेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा सुस्ती की वजह से देशभर में ऋण वसूली प्रभावित हो रही है। यह रिपोर्ट पिछले छह माह के दौरान 30 राज्यों में एनबीएफसी सहित 40 बैंकों के दो लाख से अधिक ऋणों के विश्लेषण पर आधारित है। लोन के भुगतान में देरी की सबसे प्रमुख वजह वेतन मिलने में होने वाली देरी को माना गया है।

82% कर्ज चूक के मामले पुरुषों से जुड़े हैं
सर्वे में एक रोचक तथ्य सामने आया है। महिलाओं की तुलना में लोन नहीं चुकाने के मामले पुरुषों के अधिक हैं। 82 प्रतिशत लोन चूक के मामले पुरुषों से जुड़े हैं। लोन भुगतान करने में तो महिलाएं आगे हैं साथ ही बकाए का भुगतान करने में भी महिलाएं आगे हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाएं 11 प्रतिशत अधिक तेजी से बकाया का भुगतान करती हैं। शहरों की बात की जाए तो मुंबई, अहमदाबाद और सूरत में लोन भुगतान की दर सबसे बेहतर है। इस मामले में दिल्ली, बेंगलुरु और पुणे की स्थिति काफी खराब है। राज्यों में ऋण प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में ओड़िशा, छत्तीसगढ़, बिहार और गुजरात का प्रदर्शन सबसे अच्छा है। वहीं मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और तमिलनाडु का प्रदर्शन सबसे खराब है।

सर्दियों में जब गर्माहट चाहिए खास

सर्दियों में अपने लुक को स्टाइलिश और ग्लैमरस दिखाना आसान नहीं होता। आप सर्दियों में अपने एक ही तरीके के पहनावे या विंटर फैशन से थक चुके हैं तो आपको कुछ नया करने की जरूरत है। स्वेटर पहनने के कुछ अलग तरीके आजमाएँ। ये स्टाइल आपको देगी एक अलग अन्दाज –
स्वेटर

सर्दियों में ऑफिस में क्या पहनें, अगर ये सोचकर परेशान हैं तो स्वेटर आपके लिए उपयुक्त विकल्प है। इसमें आपका लुक सोबर नजर आएगा। इसके साथ लेदर शूज या स्नीकर्स की पेयरिंग अच्छी लगती है। ज्यादा ठंड होने पर आप गले में मफलर डालकर भी अपने लुक को स्टाइलिश बना सकते हैं।

हुडीज

ये विंटर वियर का एक ऐसा विकल्प हैजिसे कुर्ता-पजामा या जींस के साथ आसानी से पहनकर आप अपनी स्मार्टनेस बढ़ा सकते हैं। आप चाहें तो एक ब्लैक या मैरून कलर की हुडीज खरीद लें। इसे ऑफिस या पार्टी वियर के साथ कैरी करें।

लॉन्ग कोट

कूल, स्पेशल और डिफरेंट लुक को डिफाइन करने के लिए लॉन्ग कोट परफेक्ट है। अपने वॉर्डरोब में इसे शामिल कर आप यकीनन सबसे अलग नजर आ सकती हैं। इसके साथ चिनोज या स्ट्राइप्ड पेंट आपको यूनिक लुक देने में मदद करेंगे। साथ में सिंपल ऐसेसरीज से अपने लुक को बढ़ाएं।

जैकेट

ब्लू या ब्लैक लेदर जैकेट हर अवसर के लिए अनुकूल होगा। इसके साथ जींस या क्रॉप पैंट की टीमिंग भी अच्छी लगती है। स्मार्ट और एफर्टलेस विंटर लुक का ये पैटर्न कॉलेज गोइंग के बीच डिमांडिंग है। इसकी मोनोटोन स्टाइल आपको गॉर्जियस लुक देने में मदद करेगी। इसे हैट के साथ पहनना भी फैशन में इन है।

कार्डिगन

बटन डाउन कॉलर्ड या बिना कालर वाले कार्डिगन आप पर सूट करेंगे। आप प्लेन या प्रिंटेड शर्ट के साथ कार्डिगन पहन सकती हैं। इसके ग्रे या ब्लैक कलर हर अवसर के अनुकूल हैं जो आपको डिफरेंट लुक देने में पूरी तरह मदद करेंगे।

बहुओं पर हुए पहले सर्वे में खुलासा – बहुएँ नहीं तोड़ती संयुक्त परिवार

75 प्रतिशत बहुओं ने माना- झगड़े से परिवार का प्रेम नहीं घटता
आईआईटी गांधीनगर ने सभी धर्मों के 453 संयुक्त परिवार में बहुओं की भूमिका पर सर्वे किया
अहमदाबाद : देश में संयुक्त परिवार टूट रहे हैं और उसकी मुख्य वजह बहुएं हैं, ऐसी मान्यता पूरी तरह गलत है। आईआईटी गांधीनगर ने अहमदाबाद के 453 संयुक्त परिवारों पर किए गए सर्वे के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। सर्वे में 75% बहुओं ने माना कि संयुक्त परिवार में झगड़े होते हैं, लेकिन इस कारण परिवार के सदस्यों का आपसी प्रेम कम नहीं होता। शोधकर्ता और आईआईटी गांधीनगर की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तनिष्ठा सामंत ने कहा कि देश में वृद्धाश्रम की बढ़ती संख्या के कारण सर्वेक्षण की यह थीम चुनी गई। इसके लिए इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल रिसर्च का भी सहयोग लिया गया। देश में इसके पहले बहुओं की भूमिका पर कोई आधिकारिक सर्वे नहीं हुआ है। इसमें 50% लोगों ने यह भी माना कि परिवार तो संयुक्त ही होना चाहिए।

50 प्रतिशत  ने माना- परिवार संयुक्त ही होना चाहिए

डॉ. सामंत ने कहा कि देश में 86% परिवार संयुक्त रूप से रहते हैं। इसके बावजूद वृद्धाश्रमों का प्रमाण अधिक है। मौजूदा समय के बच्चे भी मानते हैं कि आर्थिक संकट के समय परिवार के बड़े-बुजुर्ग ही मददगार साबित होते हैं। सर्वे में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और जैन धर्म के संयुक्त परिवार शामिल थे। इसमें तीन पीढ़ियों के संयुक्त परिवार में रह रहे 86% और 2 पीढ़ी के साथ रहने वाले 14% परिवार शामिल किए गए। सर्वे में बातचीत के लिए 40 साल से अधिक उम्र के लोगों को ही जवाब के लिए चुना गया था।

महज 32 प्रतिशत है बलात्कार दोषसिद्धि दर : एनसीआरबी

नयी दिल्ली : पूरे देश को हिलाकर रखने वाले निर्भया सामूहिक बलात्कार के सात साल बाद देश में बलात्कार के मामलों में दोषसिद्धि दर 32.2 प्रतिशत है। इस घटना के बाद यौन उत्पीड़न से निपटने के लिए कानूनों को सख्त बनाये जाने के बावजूद बलात्कार के मामलों में दोषसिद्धि दर कम है।

वर्ष 2017 के लिए उपलब्ध राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार उस वर्ष बलात्कार के मामलों की कुल संख्या 1,46,201 थी, लेकिन उनमें से केवल 5,822 लोगों की दोषसिद्धि हुई। एनसीआरबी के आँकड़े बताते हैं कि 2017 में बलात्कार के मामलों में आरोप पत्र की दर घटकर 86.4 प्रतिशत रह गई जो 2013 में 95.4 प्रतिशत थी।

अलवर बलात्कार मामले में बचाव पक्ष की वकील शिल्पी जैन ने कहा कि बलात्कार मामलों की जांच करने वाले पुलिस के क्षेत्र-स्तरीय कर्मचारियों को अधिक कुशल बनाने की आवश्यकता है।

इस मामले में ओडिशा के पूर्व पुलिस महानिदेशक बी बी मोहंती के बेटे बिट्टी मोहंती ने एक विदेशी पर्यटक से बलात्कार किया था।

जैन ने कहा, ‘‘वे ज्यादातर अनुभवहीन हैं और ताकत उनके सिर पर चढ़ जाती है और ज्यादातर मामलों में वे बेहद भ्रष्ट हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एक उप-निरीक्षक उच्चतम स्तर का अधिकारी होता है जो आरोप पत्र दायर करता है, इसलिए कोई भी तथ्यों की गुणवत्ता की कल्पना कर सकता है।’’

गौरतलब है कि दक्षिण दिल्ली में 23 वर्षीय एक छात्रा से वर्ष 2012 में 16 और 17 दिसम्बर की दरम्यानी रात में एक चलती बस में सामूहिक बलात्कार किया गया। सड़क पर फेंके जाने से पहले उस पर गंभीर रूप से हमला किया गया और 29 दिसम्बर को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।

निर्भया पर इस भयानक हमले के एक सप्ताह बाद यौन उत्पीड़न के मामलों से निपटने के लिए आपराधिक कानूनों की समीक्षा के लिए न्यायमूर्ति जेएस वर्मा समिति गठित की गई थी।

दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं में शामिल हैं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण : फोर्ब्स

न्यूयॉर्क : फोर्ब्स ने केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, एचसीएल कॉरपोरेशन की सीईओ और कार्यकारी निदेशक रोशनी नादर मल्होत्रा और बायोकॉन की संस्थापक किरन मजूमदार शॉ को दुनिया की सबसे ताकतवर 100 महिलाओं में रखा है। ‘दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं’ की 2019 की फोर्ब्स सूची में जर्मन चांस्लर एंजेला मर्केल पहले स्थान पर हैं। दूसरे स्थान पर हैं यूरोपीय सेन्ट्रल बैंक की प्रेसिडेंट क्रिस्टीन लेगार्द और तीसरे स्थान पर अमेरिकी संसद में निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी। इस सूची में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना 29वें स्थान पर हैं।

फोर्ब्स का कहना है कि 2019 में दुनिया भर में महिलाओं से सक्रियता से आगे बढ़कर सरकार, उद्योगों, मीडिया और परमार्थ कार्यों में नेतृत्वकारी भूमिका संभाली।

सीतारमण फोर्ब्स की सूची में पहली बार शामिल हुई हैं और वह 34वें स्थान पर हैं। भारत की पहली वित्त मंत्री सीतारमण पहले रक्षा मंत्री भी चुकी हैं।

सीतारमण पहली महिला मंत्री हैं जो स्वतंत्र रूप से वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाल रही हैं। इससे पहले वित्त मंत्रालय का प्रभार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पास रह चुका है। मल्होत्रा सूची में 54वें स्थान पर हैं। एचसीएल कॉरपोरेशन की सीईओ होने के नाते वह 8.9 अरब डॉलर की कंपनी में सभी रणनीतिक फैसले लेने के लिए जिम्मेदार हैं। मल्होत्रा कंपनी की सीएसआर समिति की अध्यक्ष और शिव नादर फाउंडेशन की ट्रस्टी भी हैं। वहीं सूची में 65वें स्थान पर शामिल शॉ भारत की ऐसी सबसे अमीर महिला हैं जिन्होंने अपनी पूरी संपति स्वयं कमाई है।

भारत में 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करेगी एमजी मोटर

कोलकाता : वाहन वि निर्माता कंपनी मोरिस गैरेज (एमजी) भारत में 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करने की योजना बना रही है।मूल रूप से ब्रिटेन की इस कंपनी का स्वामित्व अब चीन की एसएआईसी के पास है। कम्पनी के एक अधिकारी ने कहा कि वे भारतमें 2,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुके हैं और कम्पनी का हलोल (गुजरात) कारखाना चालू हो गया है। एमजी मोटर इंडिया के मुख्य वाणिज्य अधिकारी गौरव गुप्ता ने बताया , ” हम भारतीय बाजार को लेकर प्रतिबद्ध हैं और इस साल जनवरी में हमने अपनी यात्रा शुरू की। देश के लिए हमारी योजना दीर्घकालिक है तथा हम 3,000 करोड़ रुपये का निवेश और करेंगे। “उन्होंने कहा कि कम्पनी अब तक करीब 13,000 एमजी हेक्टर की बिक्री कर चुकी है। गुप्ता ने कहा कि कम्पनी एक इलेक्ट्रिक स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल पेश करेगी और जुलाई 2021 तक उसके पास कुल चार मॉडल होंगे। सभी वाहन एसयूवी श्रेणी के होंगे।

जमैका की टोनी एन सिंह बनीं विश्व सुंदरी, भारत की सुमन राव रहीं तीसरे स्थान पर

लंदन : इस साल विश्व सुंदरी (मिस वर्ल्ड) का ताज जमैका की टोनी एन सिंह के सिर सजा और भारत की सुमन राव यहां आयोजित सौंदर्य प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रहीं। इस प्रतियोगिता में 23 वर्षीय सिंह को विजेता घोषित किया गया। चिकित्सक बनने की चाहत रखने वाली सिंह के पिता ब्रैडशॉ सिंह भारतीय कैरेबियाई हैं और उनकी मां जहरीन बैले अफ्रीकी-कैरेबियाई हैं।

प्रतियोगिता में फ्रांस की ओपेली मेजीनो दूसरे और भारत की राव तीसरे स्थान पर रहीं। राजस्थान की रहने वाली 20 वर्षीय राव सीए की छात्रा हैं। उन्हें इस साल जून में मिस इंडिया वर्ल्ड 2019 चुना गया था। एक्सेल लंदन में शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम की मेजबानी ब्रितानी टेलीविजन हस्ती पियर्स मोर्गन ने की।

सिंह ने खिताब जीतने के बाद इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘‘मेरे मन में प्रेम और आभार है। मुझ पर भरोसा करने के लिए शुक्रिया। आपने मुझे स्वयं पर भरोसा करना सिखाया। मैं 69वीं विश्व सुंदरी का खिताब जीतकर सम्मानित महसूस कर रही हूं और मैं आपकी आभारी हूं।’’

मैट्रिमोनियल साइट शुरू करने वाला पहला अर्द्धसैनिक बल बना आईटीबीपी

नयी दिल्ली :  भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने अपने अविवाहित, विधवा/विधुर और तलाकशुदा जवान और कर्मियों के लिए जीवनसाथी खोजने में मदद पहुंचाने के लिए एक मैट्रोमोनियल पोर्टल शुरू किया है। किसी भी अर्द्धसैनिक बल में पहली बार ऐसा कदम उठाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि पहाड़ी इलाकों में लड़ाई के लिए प्रशिक्षित इस बल पर मुख्य रूप से चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा की रक्षा करने की जिम्मेदारी है। एक अफसर ने बताया कि आईटीबीपी में विभिन्न रैंकों में करीब 25000 अविवाहित पुरुष और 1000 महिलाएं हैं। बहुत सारे कर्मी सुदूर क्षेत्रों में तैनात रहते हैं। ऐसे में उनके और उनके परिवार के लिए उपयुक्त जीवनसाथी खोजना बड़ा मुश्किल काम हो जाता है। हम बस मदद करना चाहते हैं।

महानिदेशक के आदेश पर बना पोर्टल
अधिकारी ने बताया, बहुत सारे कर्मी इस संगठन के अंदर ही जीवनसाथी चाहते हैं, क्योंकि सरकारी नियम उस दंपती को एक ही स्थान पर तैनाती की सुविधा प्रदान करते हैं। फिर अगर दोनों आईटीबीपी से होंगे तो वे एक दूसरे के काम और उनकी जरूरतों को अच्छे से समझ पाएंगे। महानिदेशक एसएस देसवाल ने हाल ही में बल के आईटी डिपार्टमेंट को मैट्रिमोनियल पोर्टल विकसित करने के लिए कहा।

अब तक 150 कर्मियों ने पंजीकरण कराया

आईटीबीपी प्रवक्ता विवेक कुमार पांडेय ने बताया कि पोर्टल पर अब तक 150 जवान और कर्मचारी पंजीकरण दर्ज करा चुके हैं। धीरे-धीरे यह इनकी तादाद बढ़ेगी। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, 24 अक्टूबर 1962 को बल की स्थापना हुई। आईटीबीपी पर मुख्य रूप से चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) और इंडो-तिब्बत सीमा की रक्षा करने की जिम्मेदारी है। इसमें 56 बटालियन सेवारत हैं। 4 स्पेशल बटालियन हैं। इसके 17 प्रशिक्षण केंद्र और 7 लॉजिस्टिक इस्टैब्लिशमेंट हैं। एक आंकड़े के मुताबिक, आईटीबीपी में करीब 90 हजार कर्मी हैं। उधर, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी, आईटीबीपी, सीआईएसएफ,और एनएसजी और एनडीआरएफ आते हैं, जिनमें करीब 10 लाख कर्मी हैं।

अभिनेत्री गीता सिद्धार्थ का निधन

मुम्बई : जानीमानी अभिनेत्री गीता सिद्धार्थ का निधन हो गया है। गीता सिद्धार्थ ने ‘गर्म हवा’, ‘परिचय’, ‘शोले’ और ‘त्रिशूल’ जैसी फिल्मों में काम किया था। अभिनेत्री गीता सिद्धार्थ के निधन की पुष्टि सिने ऐंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सीआईएनटीएए) ने ट्विटर पर की. शनिवार सुबह उनका निधन हुआ। उनका निधन किस वजह से हुआ, उस बारे में फिलहाल जानकारी नहीं मिल पाई है। गीता सिद्धार्थ ने 1973 में आयी एम एस सतायू की फिल्म ‘गर्म हवा’ में भी अभिनय किया था। इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। उन्होंने फिल्म में सलीम (बलराज साहनी) की पुत्री अमीना का किरदार निभाया था। गीता सिद्धार्थ ने गुलजार की फिल्म ‘परिचय’ में भी अभिनय किया था जिसमें जितेंद्र, जया भादुरी, प्राण और संजीव कुमार भी थे। उन्होंने ‘शोले’, ‘त्रिशूल’, ‘नूरी’, ‘अर्थ’ और ‘मंडी’ जैसी फिल्मों में भी काम किया. गीता का विवाह वृत्तचित्र निर्माता, टेलीविजन कार्यक्रम निर्माता एवं प्रस्तोता सिद्धार्थ काक से हुआ था जिन्हें 1990 के दशक में आये उनके टेलीविजन कार्यक्रम ‘सुरभि’ के लिए जाना जाता है। उनकी एक पुत्री है जिसका नाम अंतरा है, जो फिल्म निर्देशक एवं निर्माता हैं।

8 साल तक मां नहीं बन सकीं गीतांजलि, अब हैं फर्टीलिटी दोस्त

अब तक की है 50 हजार जोड़ों की मदद 
नयी दिल्ली : ओवेरियन कैंसर, मिसकैरेज और आईवीएफ फेल होने से दिल्ली की गीतांजलि बनर्जी ने आठ साल तक इनफर्टीलिटी का दर्द झेला। डॉक्टरोें ने यहां तक कह दिया था कि वह मां नहीं बन सकती हैं। पर उन्होंने हार नहीं मानी। फिर से आईवीएफ की कोशिश की, जो सफल रही। इसके बाद तय किया कि इनफर्टीलिटी से परेशान जोड़ों के लिए कुछ करेंगी। इसमें उनके कर्नल पति और परिवार ने हिम्मत दी। गीतांजलि ने दो साल तक रिसर्च कर 2015 में फर्टीलिटी दोस्त साइट बनाकर काउंसिलिंग शुरू की। अब तक वह देशभर के करीब 50 हजार जोड़ाें की काउंसिलिंग कर चुकी हैं। गीतांजलि बताती हैं कि लखनऊ के एक जोड़े ने उन्हें इनफर्टीलिटी की समस्या बताई थी। हमने उन्हें आईवीएफ सेंटर जाने को कहा। इस पर जोड़े ने कहा कि अगर मोहल्ले का कोई व्यक्ति सेंटर के आसपास देख लेगा तो परेशानी हो जाएगी। गीतांजलि कहती हैं कि आज भी इनफर्टीलिटी सामाजिक वर्जना है। कहीं लोग इसे छिपाते हैं तो कहीं ताने मिलते हैं।

काउंसलिंग ऑनलाइन

वह साइट, फेसबुक, ब्लॉग, वाॅट्सएप से जोड़ों की काउंसिलिंग करती हैं। आज दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, बैंगलुरू समेत अन्य शहरों में काउंसिलिंग सेंटर चल रहे हैं। इनमें इनफर्टीलिटी सपोर्ट, हैपीनेस, एडॉप्शन और प्री आईवीएफ प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। वेबसाइट बनाने से पहले फेसबुक में सीक्रेट ग्रुप बनाया। जल्द ही इससे 250 महिलाएं जुड़ गईं। इस काम में क्लीनिक से सहयोग मिलता है। कंपनियों के सीएसआर फंड से भी मदद मिलती है।

देशभर में 3.3 करोड़ जोड़े इनफर्टीलिटी से परेशान
मौजूदा समय में देशभर में 3.3 करोड़ जोड़े इनफर्टीलिटी का दर्द झेल रहे हैं। हर चार में से एक को किसी न किसी वजह से यह समस्या है। इनमें से तमाम जोड़े इनफर्टीलिटी की समस्या बताने से भी डरते हैं। दुनिया में इसका 29 हजार करोड़ रुपए का बाजार है।