Friday, April 24, 2026
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भारत में हर साल क्लेफ्ट के साथ पैदा होते हैं लगभग ३५,००० से अधिक बच्चे

स्माइल ट्रेन इंडिया मनमोहिनी हेल्थकेयर अस्पताल के साथ मुर्शिदाबाद में खोलेगा नए क्लेफ्ट केयर सेंटर 
फटे होंठ और तालू का नि: शुल्क उपचार रोगियों के लिए नए क्लेफ्ट केंद्र में पूरे वर्ष उपलब्ध है

मुर्शिदाबाद : भारत में लगभग ३५,००० से अधिक बच्चे हर साल क्लेफ्ट के साथ पैदा होते हैं।अनुपचारित क्लेफ्ट वाले सैकड़ों हजारों बच्चे उपेक्षित हैं लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें खाने, सांस लेने और बोलने में कठिनाई होती है, क्योंकि उनके परिवार जीवन-परिवर्तन करने वाली क्लेफ्ट सर्जरी और व्यापक क्लेफ्ट देखभाल नहीं कर पाते।  दुनिया की सबसे बड़ी बच्चों की क्लेफ्ट चैरिटी वाली स्माइल ट्रेन इंडिया ने मनमोहिनी हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के साथ अपनी साझेदारी की घोषणा की और मुर्शिदाबाद में मुफ्त क्लेफ्ट लिप और तालु सर्जरी परिसेवा की घोषणा की । मनमोहिनी हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के नए क्लेफ्ट सेंटर में पूरे साल मरीजों को मुफ्त क्लेफ्ट ट्रीटमेंट उपलब्ध होगा। डॉ. शंकरसन चौधरी, ओरल मैक्सिलोफेशियल सर्जन द्वारा क्लेफ्ट सर्जरी की जाएगी। वर्ष २००० से, स्माइल ट्रेन इंडिया सक्रिय रूप से कमजोर बच्चों के लिए क्लेफ्ट उपचार का समर्थन करने में सक्रिय रूप से शामिल है, जो गरीबी और अज्ञानता के कारण अनुपचारित क्लेफ्ट के साथ रहने के लिए मजबूर हैं। स्माइल ट्रेन इंडिया ने कोलकाता, बर्दवान, दुर्गापुर और सिलीगुड़ी से पश्चिम बंगाल के विभिन्न भागीदार अस्पतालों में १५,००० से अधिक सर्जरी का समर्थन किया है।

स्माइल ट्रेन इंडिया के प्रोग्राम मैनेजर इशानी बिस्वास ने साझेदारी के बारे में बात करते हुए कहा, “हम मनमोहिनी हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के साथ साझेदारी करके बहुत खुश हैं, जो कि कटे होंठ और तालु के साथ पैदा हुए अधिक बच्चों तक पहुंच सकती है। बहुत से लोग क्लेफ्ट को मिथकों और बुरे कर्मों से जोड़ते हैं, और नहीं जानते हैं कि क्लेफ्ट का इलाज सर्जरी और सम्बंधित देखभाल से किया जा सकता है। इसके अलावा, क्लेफ्ट के साथ जन्मे बहुत से बच्चे इलाज से इसलिए वंचित रह जाते हैं क्योंकि उनके माता-पिता उपचार का खर्च वहन करने में अक्षम होते हैं । शुरुआत में ही पता लगाने और उपचार से बच्चे को आगे की ज़िंदगी जीने में मदद मिलती है। हम मनमोहिनी हेल्थकेयर के साथ एक लंबे और फलदायक साझेदारी का स्वागत करते हैं ताकि नि: शुल्क क्लेफ्ट उपचार का समर्थन किया जा सके और क्लेफ्ट के साथ पैदा हुए बच्चों के जीवन को बदल सकें ”डॉ मनमोहिनी हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के चिकित्सा निदेशक बिजय कुमार गुलगुलिया ने कहा, “हम स्माइल ट्रेन से जुड़े होने पर गर्व महसूस करते हैं और कटे होंठ और तालु के साथ पैदा होने वाले बच्चों को विश्व स्तर का उपचार मुफ्त प्रदान करने की इसकी प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं । अज्ञानता और गरीबी के कारण सैकड़ों हज़ारों बच्चे अनुपचारित क्लेफ्ट के साथ रहना जारी रखते हैं। यह सराहनीय है कि स्माइल ट्रेन सक्रिय रूप से बातचीत, ऑर्थोडॉन्टिक्स, पोषण और भावनात्मक समर्थन के द्वारा व्यापक क्लेफ्ट देखभाल पर ध्यान केंद्रित करती है। स्माइल ट्रेन इंडिया का टिकाऊ मॉडल अपने स्वयं के समुदायों में क्लीफ्ट उपचार प्रदान करने के लिए स्थानीय चिकित्सा पेशेवरों को प्रशिक्षित और सशक्त बनाने पर केंद्रित है। इस मॉडल के माध्यम से, स्माइल ट्रेन इंडिया ने १५० से भी ज्यादा साझेदार अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से, पूरे भारत में ६००,००० से अधिक मुक्त क्लेफ्ट सर्जरी का समर्थन किया है।

प्रतिभा सिंह फिर चुनी गयीं वीरांगना की प्रदेश अध्यक्ष

प्रतिमा सिंह महासचिव

आजीवन सदस्यता प्रमाणपत्र वितरित

कोलकाता :  अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउंडेशन पश्चिम बंगाल की नयी कार्यकारिणी जल्द घोषित की जायेगी। लिलुआ में आयोजित एक बैठक में अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउंडेशन के मुख्य संरक्षक डॉ.एमएस सिंह मानस और अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री भारती सिंह ने विख्यात गायिका प्रतिभा सिंह को फिर वीरांगना की पश्चिम बंगाल इकाई का अध्यक्ष घोषित किया। समाजसेवी प्रतिमा सिंह पुनः संगठन की महासचिव बनायी गयीं। बैठक में ममता सिंह, पूजा सिंह, रीता राजेश सिंह, मीनू सिंह, सुमन सिंह, सुनीता सिंह, आशा सिंह, रीना सिंह, पूनम सिंह, किरण सिंह, रीता सिंह-सोदपुर, मीरा सिंह, सुलेखा सिंह, दीपमाला सिंह, संगीता सिंह, रेखा सिंह, ज्योति सिंह, इंदु सिंह, रीता सिंह-बालीगंज, विद्या सिंह, गिरिजा दारोगा सिंह, गिरिजा दुर्गादत्त सिंह, सुनीता विजय सिंह को संगठन का आजीवन सदस्यता प्रमाणपत्र वितरित किया गया।

असफल होने वाले ही आगे बढ़ते हैं क्योंकि वे सफल होना चाहते हैं : बोमेन ईरानी

भवानीपुर कॉलेज के दीक्षान्त समारोह में पहुँचे थे
कोलकाता : भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज द्वारा आयोजित दीक्षान्त समारोह 2019 में उच्चतम अंक प्राप्त विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। उद्घाटन समारोह में प्रतीकात्मक दीप प्रज्वलित किया कॉलेज के अध्यक्ष श्री चंपक लाल दोशी ने। इसके साथ में उपाध्यक्ष मिराज डी शाह ने साथ में डायरेक्टर डॉ सुमन मुखर्जी, डॉ संदीप दान, टीआईसी डॉ सुचंद्रा चक्रवर्ती, फिल्म इंडस्ट्रीज की प्रसिद्ध हस्ती अभिनेता बोमेन ईरानी उपस्थित रहे । कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज डी शाह ने ईरानी को पुष्प स्तवक और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। स्वागत भाषण देते हुए डॉ. सुमन मुखर्जी ने दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि स्नातक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब कॅरियर के साथ अपने व्यक्तित्व को भी रूप देने का समय आ गया है। वर्तमान समय चुनौतियों का समय है। विद्यार्थियों को पारंपरिक सोच से इतर सोचने की आवश्यकता है। प्रमुख अतिथि प्रसिद्ध अभिनेता बोमेन ईरानी ने अपनी जीवन यात्रा के कटु और मधुर अनुभवों को विद्यार्थियों से साझा करते हुए कहा कि असफल होने वाले ही आगे बढ़ते हैं क्योंकि वे सफल होना चाहते हैं। हमें कभी भी स्वयं को दोषी नहीं समझना चाहिए। प्रथम आना ही आखिरी सफलता नहीं है। हर असफलता से हमें कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। कोई भी काम छोटा नहीं है।बोमेन ईरानी ने अपने काम की शुरुआत वेटर, फोटोग्राफर जैसे कार्यों से की बोमेन का मानना है कि आज अच्छा हुआ तो कल भी अच्छा होगा ऐसा नहीं है, कल के लिए फिर चुनौती है। कुछ अलग करना चाहिए। सम्मानित होने के बाद भी ऊर्जावान बने रहना चाहिए तभी सफलता मिलती है। कॉलेज के दस उच्चतम अंक प्राप्त विद्यार्थियों को बोमेन ईरानी ने सम्मानित किया। इस अवसर पर कॉलेज की प्रथम आई छात्रा मुस्कान केडिया ने सभी शिक्षकगणों को हार्दिक धन्यवाद दिया। डॉ सुचंद्रा चक्रवर्ती ने सभी विद्यार्थियों को शपथ दिलाई। प्रो दिलीप शाह ने अपने वक्तव्य में छात्रों को कॉलेज से जुड़ने के लिए एलुमनी एसोसिएशन और अकादमिक कॅरियर पर ध्यान देने को कहा। इससे कॉलेज और विद्यार्थी दोनों समृद्ध होगें। दीक्षान्त समारोह में कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर (अकादमिक) आशीष चट्टोपाध्याय ने विद्यार्थियों को कहा कि उन्हें अपने निर्णय स्वयं लेने चाहिए। उन्होंने बहुत से उच्चतम अंक प्राप्त विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। कॉलेज के पूर्व छात्र संजीव सींघी ने कॉलेज में एकांउट्स डिजिटल कोर्स लांच किया। कला मंदिर में हुए दीक्षांत समारोह में उच्चतम अंक प्राप्त विद्यार्थियों के अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। शिक्षक और शिक्षिकाओं, मैनेजमेंट के प्रमुख सदस्यों की उपस्थिति रही ।रेक्टर डॉ संदीप दान ने विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट प्रदान किया। अंत में, प्रो दिलीप शाह ने खचाखच भरे सभागार के विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ. वसुंधरा मिश्र ने।

लिटिल थेस्पियन का 9वां राष्ट्रीय नाट्य उत्सव जश्न-ए-रंग 17 नवम्बर से

कोलकाता  : लिटिल थेस्पियन का प्रख्यात नाट्योत्सव जश्ने -ए – रंग आगामी 17 नवम्बर से आरम्भ होगा।  नाटक हमें एक अलग दुनिया में स्थानांतरित कर देता है | वस्तुतः हर स्थान की अपनी एक अलग संस्कृति, शैली और विचारों की एक विस्तृत श्रृंखला होती है जो वहाँ के साहित्य में कारक प्रतिनिधित्व के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | लिटिल थेस्पियन का 9वां राष्ट्रीय नाट्य उत्सव जश्न-ए-रंग उन्हीं भावों और संवेदनाओं का रोचक प्रदर्शन है। खुला मंच के अंतर्गत हिन्दी उर्दू के कई नुक्कड़ नाटक तथा कविताओं की प्रस्तुति प्रतिदिन शाम 5:30 बजे से ज्ञानमंच परिसर में होगी| नाटकों का मंचन शाम 6.30 बजे से होगा। उत्सव का विवरण इस प्रकार है –

नाटक अलका का एक दृश्य

17 नवम्बर 2019 – उद्घाटन समारोह तथा नाटक अलका का मंचन
लेखक – मनोज मित्र, अनुवाद व निर्देशक – उमा झुनझुनवाला, नाट्यदल – लिटिल थेस्पियन, कलकत्ता, अवधि – 1 घंटा 30 मिनट
18 नवम्बर 2019 – नाटक : नट सम्राट, लेखक : वी. वी. शिरवाडकर, निर्देशक : जयंत देशमुख, नाट्य दल : एकरंग, भोपाल, अवधि – 1 घंटा 30 मिनट
19 नवम्बर 2019 – नाटक – फाउस्ट, लेखक – गेटे, निर्देशक – निलॉय रॉय, नाट्यदल – पीपल’स थिएटर, दिल्ली, अवधि – 1 घंटा 30 मिनट
20 नवम्बर 2019 – नाटक – लोहार, लेखक – बलवंत गार्गी, निर्देशक – अज़हर आलम, नाट्यदल – लिटिल थेस्पियन, कलकत्ता, अवधि – 1 घंटा 40 मिनट
21 नवम्बर 2019, नाटक – पटकथा, लेखक – धूमिल, निर्देशक – पुंज प्रकाश, नाट्यदल – पटना, अवधि – 1 घंटा
और शाम 7:30 बजे, नाटक : प्रेम अप्रेम, [कहानी ‘एक माँ धरती सी’ और ‘रश्मिरथी माँ’ का मंचन], लेखिका : कुसुम खेमानी, निर्देशक : उमा झुनझुनवाला, नाट्य दल : लिटिल थेस्पियन, कलकत्ता, अवधि – 40 मिनट

नाटक गाँधी का एक दृश्य

22 नवम्बर 2019 – नाटक – गाँधी, लेखक – असगर वज़ाहत, निर्देशक – अरूण पाण्डेय, नाट्यदल – विवेचना रंगमंडल, जबलपुर, अवधि – 1 घंटा 30 मिनट
23 नवम्बर 2019, शनिवार, दोपहर 3:00 बजे से, भारतीय भाषा परिषद, कलकत्ता, रंगमंच पर विमर्श
वक्ता : गीतेश शर्मा, कुसुम खेमानी, अरुण पाण्डेय, आफ़रीन हक़, अंशुमान भौमिक, अभिजित करगुप्ता
तथा
लघु नाटक- पांचाली – [श्री उपेन्द्र नाथ, नीलाक्षी शुक्ला, संतोष कुमार, पुष्यमित्र उपाध्याय एवं विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की कविताओं पर आधारित]
निर्देशन- पूजा केवट, नाट्यदल – वामा, जबलपुर, अवधि –45 मिनट
सहयोग – संस्कृति मंत्रालय

प्रकृति प्रेम का प्रतीक है सामाजिक सांस्कृतिक त्योहार : छठ पर्व

– सुषमा राय पटेल

हम अपने अस्तित्व के लिए सूर्य देवता के ऋणी हैं जाति,पंथ और धन की सीमाओं को पार कर लोग इस त्योहार को मनाने के लिए एक साथ एकत्रित होते है।मैं भी अपने परिवार के साथ छठ पर्व मनाने के लिए तैयार हो रही थी उसी समय एक फोन आया ‘दीदी आप तो छठ करती हैं ,क्या आप बतला सकती हैं कि नहाय -खाय ,खरना,सझकी अर्ध्य और सुबह का अर्ध्यदान कब करना हैं? अनमनस्कता की वजह से मैं पुनःउस व्यक्ति से पूछती हूँ… आप कौन बोल रहे है? उन्होंने कहा “दीदी मैं गोकुल मुरारका बोल रहा हूँ।” आप तो व्रत करती हैं इसीलिए मुझे धआपसे व्रत के दिन के बारे मे जानना था क्योंकि मैं कई वर्षों से यह व्रत करता आ रहा हूँ और इस बार भी करूँगा।उन्होंने यह भी कहा की मैं माड़वारी हूँ बचपन से मेरे मन में यह था कि मैं बड़ा होकर प्रकृति पूजन के इस श्रेष्ठ व्रत को करूँगा और मैं कर रहा हूँ। सुनकर मै छठ पूजा जो कि सूर्य और उनकी बहन छठी मइया के प्रति समर्पित व्रत का रहस्य समझने में लग गई ।
ऋग्वेद की सूर्य सूक्ति “येना पावक चक्षसा भुरण्यन्तं जहां अनु।त्वं वरूण पश्यसि।।” के महत्ता के बारे में सोचने लगी।
लोक आस्था का महापर्व चार दिवसीय छठ कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाता है।यह लोकपर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड पूर्वी उत्तरप्रदेश,मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत देश के विभिन्न क महानगरों में हम छठ मनाते हैं ।भारत के अलावा नेपाल सूरीनाम तथा विश्वभर में प्रवासी भारतीयों द्वारा यह व्रत धूमधाम से मनाया जाता है।हिंदुओं की इस पूजा की यही विशेषता है कि इसमें किसी मूर्ति विशेष की पूजा नहीं की जाती बल्कि प्रकृति के अनंत सत्ता की आराधना की जाती है।
जगत की आत्मा सूर्य देव को कहा जाता है क्योंकि वे पृध्वी पर जीवनशका आधार है। उनके आलोक को अपनी चेतना में धारण करने से जीवन प्रकाशित हो उठता है। के प्रति श्रद्धा का यह पर्व परवातिन नामक उपासक जो कि आम तौर पर महिलाओं होती है।सादगी और पवित्रता के साथ कठोर तपस्या वाला त्योहार लिंग-विशिष्ट त्योहार नहीं है। पृथ्वी पर जीवन की आवश्यक तत्वों को बहाल करने लिए तथा जीवन निर्वाहन सूर्य को सच्चे मन से आभार की अभिव्यक्ति ही छठ पूजा है।

 

30/10/2019

किसी को अपना दिल न तोड़ने दें

जब कोई इच्छा आपके अन्दर रहती है और प्रतिभा सोयी रहती है तो वह मरती नहीं, बस सामने आने का मौका तलाशती है। बस आपको अपनी इस प्रतिभा की कद्र करने की जरूरत है और सुप्रीता सिंह ने यही किया। सुप्रीता जानती थीं कि उनको लिखना अच्छा लगता है और उनको लिखना है मगर उनको यह भी पता था कि उनको शौक के साथ काम को लेकर चलना है। पत्रकारिता और हॉस्पिटैलिटी से होकर बतौर जनसम्पर्क विशेषज्ञ उन्होंने लम्बा समय गुजारा, अभी भी सक्रिय हैं मगर अब उन्होंने वह किया जो वह हमेशा से करना चाहती थीं, सुप्रीता की पहली किताब ग्रेस प्रकाशित हो चुकी है। इस खूबसूरत यात्रा के किस्से उन्होंने शुभजिता से साझा किये, पेश हैं प्रमुख अंश –
बचपन से जानती थी कि मुझे लिखना है
मुझे बचपन से ही पढ़ना अच्छा लगता था। लिखने का भी शौक बचपन से ही था। अंग्रेजी में एम.ए किया जिसके बाद मुझे दृक में काम मिला और यहाँ मेरा काम था लिखना। प्रोजेक्ट प्रोपोजल लिखती थी और मेरा काम काम कम्यूनिकेशन यानी सम्पर्क से जुड़ा था। वह करते -करते मैं भारत एक साल थी और फिर मैंने बांग्लादेश में भी काम किया। इसके बाद टाइम्स ऑफ इंडिया में मुझे काम मिल गया। यहाँ मैं ढाई साल तक रही। पत्रकारिता की और अंग्रेजी के दो बड़े अखबारों के साथ काम किया और इसके बाद मेरा कार्यक्षेत्र बदला और मैं हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में आ गयी। एस्टर, पार्क होटल और ऐस्टर होटल के बाद पी आर और जनसम्पर्क के क्षेत्र में आ गयी और अब मेरी अपनी कम्पनी है। इन सब के बावजूद लिखने की चाह बची रही।
लोगों से मिलना मुझे प्रेरणा देता है
लोगों से मिलना और नये विचार साझा करना मुझे हमेशा से अच्छा लगता था मगर मुझे रचनात्मक लेखन करना था। मेरा बचपन से यही सपना था कि मैं कोई किताब लिखूँ समय लगा क्योंकि लिखने में समय लगता है क्योंकि मुझे काम भी करना है क्योंकि यही मेरी रोजी -रोटी है मगर इसके बीच में से ही मैं समय निकालकर या यूँ कहूँ कि चुराकर लिखती रही और अब इसका परिणाम मेरी पहली किताब ग्रेस के रूप में सामने है।
अनुभवों से कहानी कहने में मदद मिली
यह मेरा पहला उपन्यास है जो एक रोमांटिक फिक्शन है। पूरा उपन्यास एक रात की कहानी है और संवाद शैली में लिखा गया है। इसे लिखने में मेरे जनसम्पर्क और पत्रकारिता के अनुभवों से भी काफी मदद मिली है। अच्छी बात है कि लोग इसे पसन्द भी कर रहे हैं। हर उम्र के लोग इसे पसन्द कर रहे हैं। यह एक लड़की की कहानी है जो अलग -अलग लोगों से मिलती है और वे उसे काफी प्रभावित करते हैं और यह किताब झटपट खत्म हो जाती हैं। इसमें थोड़ा सा मेरा अनुभव है मगर इससे पाठक एक तारतम्य स्थापित कर सकते हैं और यह दिल से निकला है।
पहला प्यार तो पत्रकारिता ही है
मुझे हर वह काम पसन्द है जिसमें मुझे लिखने का मौका मिले। पत्रकारिता मुझे सबसे अधिक प्रिय है और वही मेरा पहला प्यार है। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली महसूस करती हूँ। पत्रकार और जनसम्पर्क विशेषज्ञ के नाते कई कहानियाँ सुनी हैं। कई लोगों से मिलती रही तो लोगों से मिलना मुझे लिखने की प्रेरणा देता है। पत्रकारिता मेरा पहला प्यार है।
अपनी आय पर महिलाओं का नियंत्रण होना चाहिए
महिलाओं को हर क्षेत्र में मौका मिलना चाहिए और उसे निर्णायक पदों पर आना जरूरी है। मेरा मानना है कि महिलाओं को आर्थिक तौर पर स्वतन्त्र जरूर होना चाहिए। अपनी आय पर जब आपका नियन्त्रण होता है तो आप आजादी से अपने फैसले ले सकती हैं। यह मैं अपने अनुभवों से कह सकती हूँ। मुझे समर्थन मिलता है और न भी मिले तो मुझे जो करना है तो वह करना है और यही सोच हम महिलाओं में होनी चाहिए तभी बदलाव होगा। अपनी आय पर जब आपका नियन्त्रण होता है तो चीजें आसान हो जाती हैं।
हर साल नयी किताब लाना चाहती हूँ
अभी मुझे और भी लिखना है। इच्छा तो है कि हर साल नयी किताब लिखूँ और प्रकाशित करूँ मगर मेरा काम मेरी रोजी – रोटी है, उसे छोड़कर रहना न तो मेरे लिए सम्भव है तो मुझे समय प्रबन्धन करना होगा।
किसाी को अपना दिल न तोड़ने दें
खुद में विश्वास रखिए क्योंकि प्यार और उम्मीद हमेशा रहते हैं। किसी को अपना दिल न तोड़ने दें और न किसी चीज का पश्चाताप करें।

जम्मू -कश्मीर के साथ लद्दाख पर भी ध्यान देने की जरूरत है

इस महीने से देश को दो और केन्द्रशासित राज्य मिल गये हैं…मानचित्र बदल रहा है। धारा 370 हटने के बाद कश्मीर को लेकर सरकार और सियासत, दोनों तेज हो गये हैं। सच तो यह है कि बदलाव हम सभी चाहते हैं मगर जल्दबाजी में कोई काम नहीं हो सकता। जाहिर है कि इसके बाद जम्मू – कश्मीर में बहुत कुछ बदलेगा।
31 अक्टूबर 2019 को देश की जन्नत कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश बन गए। सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयन्ती पर गुरुवार को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून लागू हो गया। इसके साथ ही दोनों प्रदेशों में कई बड़े बदलाव भी हो गए। ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी राज्य को बांटकर सीधे दो केंद्र शासित प्रदेश का गठन किया गया है। अब तक जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल पद था, लेकिन अब दोनों केंद्रशासित प्रदेशों में उपराज्यपाल हो गए।
106 केंद्रीय कानून लागू हो गए दोनों राज्यों में। आधार, आरटीआई, आरटीई कानून लागू हो गए। 153 ऐसे कानून जम्मू-कश्मीर के खत्म हो गए, जिन्हें राज्य के स्तर पर बनाया गया था। 166 पुराने राज्य कानून और राज्यपाल कानून लागू रहेंगे
जम्मू कश्मीर में पाँच साल के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में निर्वाचित विधानसभा और मंत्रिपरिषद होगी। लद्दाख का शासन उपराज्यपाल के जरिए सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा चलाया जाएगा।
दोनों के पास साझा उच्च न्यायालय होगा। दोनों राज्यों के एडवोकेट जनरल अलग होंगे। लद्दाख अधिकारियों की नियुक्ति के लिए यूपीएससी के दायरे में आएगा।
जम्मू कश्मीर में राजपत्रित सेवाओं के लिए भर्ती एजेंसी के तौर पर लोक सेवा आयोग बना रहेगा। दोनों प्रदेशों के सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार ही वेतन मिलेंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों के सरकारी भवनों और वाहनों में अब तक तिरंगा और जम्मू-कश्मीर का झंडा होगा। अब से केवल राष्ट्रीय ध्वज का उपयोग किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर में पहले के मुकाबले विधानसभा का कार्यकाल 6 साल की जगह देश के बाकी हिस्सों की तरह 5 साल का ही होगा।
विधानसभा में अनुसूचित जाति के साथ साथ अब अनुसूचित जनजाति के लिए भी सीटें आरक्षित होंगी। पहले कैबिनेट में 24 मंत्री बनाए जा सकते थे, अब दूसरे राज्यों की तरह कुल सदस्य संख्या के 10% से ज्यादा मंत्री नहीं बनाए जा सकते हैं।
जम्मू कश्मीर विधानसभा में पहले विधान परिषद भी होती थी, वो अब नहीं होगी। हालांकि राज्य से आने वाली लोकसभा और राज्यसभा की सीटों की संख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जम्मू-कश्मीर से पांच और लद्दाख से एक लोकसभा सांसद ही चुन कर आएगा। जम्मू-कश्मीर से पहले की तरह ही राज्यसभा के 4 सांसद ही चुने जाएंगे।
अभी सबका ध्यान कश्मीर पर है और यह एक संवेदनशील मामला है..इतना संवेदनशील कि पूरी दुनिया की नजरें कश्मीर पर हैं…लेकिन यह एक बड़ा कदम है..खासकर सुरक्षा के लिहाज से बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। पूरे देश ने कश्मीर को अपना लिया है, अब समय है कि कश्मीर पूरे देश को अपना माने…लोग सामने आयें और पूरे देश के साथ शांति की राह पर चलें मगर इस बीच लद्दाख पर भी पूरा ध्यान देने की जरूरत है।

वीरांगना का अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह 9 नवम्बर को

कोलकाता :  अंतर्राष्ट्रीय वीरांगना सम्मान समारोह-2019 में देश- विदेश की तमाम क्षत्रिय वीरांगनाओं व समाज के दिग्गजों का जमावड़ा होने जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउण्डेशन की पश्चिम बंगाल इकाई इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेगी। वीरांगना की प्रदेश इकाई की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, महासचिव प्रतिमा सिंह, उपाध्यक्ष रीता सिंह व कोषाध्यक्ष पूजा सिंह व पूनम सिंह ने बताया कि समारोह में विशिष्ट हस्तियों को महारानी दुर्गावती शौर्य सम्मान, महारानी पद्मिनी शौर्य सम्मान, महर्षि विश्वामित्र सम्मान, महाराणा प्रताप शौर्य सम्मान दिये जायेंगे। समारोह में नारी गौरव सम्मान भी दिया जायेगा जिसमें न सिर्फ क्षत्रिय समाज बल्कि अन्य समाज की नारी विभूतियां भी सम्मानित होंगी, जिसमें साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान लिए डॉ.कुसुम खेमानी, फ़िल्म निर्माण के लिए रीता झंवर, शिक्षा के लिए डॉ.राजश्री शुक्ला, सिनेमा में अभिनय के लिए मृणालिनी ठाकुर, समाज सेवा के लिए काकोली सरकार रायचौधुरी भी शामिल हैं। समारोह का आयोजन का 9 नवम्बर 2019 को शरत सदन, हॉल-2, हावड़ा में होगा, जिसमें ‘नारी सशक्तीकरण’ विषय पर भी विचार मंथन होगा। सांस्कृतिक कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण मुंबई के युवा गायक सौरभ गिरी होंगे। समारोह के उद्घाटनकर्ता अखिल भारतीय क्षत्रिय समाज के मुख्य संरक्षक जयप्रकाश सिंह, मुख्य अतिथि श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना, मुख्य वक्ता पूर्व सांसद व अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ठा. वीरेन्द्र सिंह राठौर, विशिष्ट अतिथि श्री राजपूत करणी सेना के प्रभारी प्रहलाद सिंह खींची, विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ.एम एस सिंह ‘मानस’, विशिष्ट अतिथि राजपूत एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका की प्रमुख रम्भा सिंह होंगे। अध्यक्षता वीरांगना की अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.हिना सिंह जूदेव व संचालन वीरांगना की अंतरराष्ट्रीय महासचिव भारती सिंह करेंगी।

कोलकाता पहुँची भारत की पहली बहुस्थलीय विज्ञान प्रदर्शनी ‘विज्ञान समागम’

4 नवम्बर से 31 दिसम्बर तक चलेगी प्रदर्शनी

कोलकाता : भारत की पहली बहुस्थलीय विज्ञान प्रदर्शनी ‘विज्ञान समागम’ कोलकाता में आरम्भ होने जा रही है। अगले सप्ताह 4 नवम्बर को केन्द्रीय विज्ञान एवं तकनीक तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन इस विराट प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। परमाणु उर्जा आयोग (एईसी) के सचिव तथा इन्स्टीट्यूशनल कोलैबरेशन एंड प्रोग्राम डिविजन के प्रमुख अरुण श्रीवास्तव ने इस आयोजन की घोषणा करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परमाणु उर्जा विभाग, विज्ञान एवं तकनीक विभाग, नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम्स तथा संस्कृति मंत्रालय इस प्रदर्शनी के सह आयोजक हैं।
विज्ञान समागम में विश्व की प्रमुख विज्ञान परियोजनाओं में भारत की भागेदारी को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी में ब्रम्हाण्ड से लेकर हिज पार्टिकल के आविष्कार समेत कई विविध परियोजनाओं व आविष्कार दिखेंगे। भारत जिन विज्ञान परियोजनाओं में शामिल है, उनमें यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर स्थित लार्ज हैड्रन कॉलिडर, फैसिलिटी फॉर एंटी प्रोटोन एंड आयन रिसर्च समेत कई अन्य विज्ञान योजनाएँ शामिल हैं। श्रीवास्तव के मुताबिक इसके पहले मुम्बई और बंगलुरू में यह प्रदर्शनी आयोजित हो चुकी है। सीआरटीएल तथा एनसीएसएम के निदेशक श्रीकान्त पाठक ने कोलकाता में आयोजित होने वाले विज्ञान समागम की सफलता को लेकर उम्मीद जतायी। इस अवसर पर साइंस सिटी के निदेशक सुब्रत चौधरी भी उपस्थित थे। प्रदर्शनी 31 दिसम्बर तक चलेगी।

दिवाली की शानदार दावत इन व्यंजनों के साथ

खजूर बर्फी

सामग्री : खजूर- 200 ग्राम (बीज निकाले हुए), पिस्ता- 1/2 कप, किशमिश- 1/2 कप, बादाम- 1/2 कप, काजू- 1/2 कप, खसखस- 1 टीस्पून, मुनक्का- 1/2 कप, घी आवश्यकतानुसार

विधि : खजूर को छोटे-छोटे पीस में काटकर उन्हें मिक्सी में तब तक पीसें जब तक कि वह नर्म हो जाएं। फिर एक पैन में घी गरम करें। घी गरम होने पर उसमें खसखस डालकर 30 सेकेंड तक भून लें।फिर उसमें बाकी के सभी मेवे डालकर मिला लेंऔर लगभग 3 से 4 मिनट तक भून लें। इसके बाद इसमें खजूर डालकर लगातार चलाते हुए उसे सूखा होने तक मिला लें। ध्यान रखें कि मिश्रण पैन में ना चिपके। जब मिश्रण सूख जाए तब गैस बंद कर दें। इसके बाद एक प्लेट में चारों ओर से अच्छी तरह घी लगाकर चिकना कर लें और खजूर के मिश्रण को उस प्लेट पर अच्छे से फैला दें। जब वह रूम टेम्प्रेचर पर ठंडा हो जाए तब इसे फ्रिज में सेट होने के लिए रख दें। जब मिक्सचर सेट हो जाए तब मन चाहे शेप में काट लें और सर्व करें।

 

चकली
सामग्री : 1 किलो चावल, 500 ग्राम चना दाल, 250 ग्राम उड़द दाल, 250 ग्राम मूंग दाल, 250 साबुदाना, 1 चम्मच सफेद तिल, अजवायन, लाल मिर्च पावडर, हींग व नमक स्वादानुसार, तलने के लिए तेल।
विधि : चावल और सभी दालों को साफ धोकर सुखा लें। फिर बिना तेल डाले सूखा ही भूनें। गुलाबी रंग आने पर आंच से उतार लें। ठंडा होने पर आटा पिसवा लें। बनाते समय जितने कटोरी आटा लेना हो उतने ही कटोरी पानी को गरम कर उसमें थोडा-सा तेल का मोयन, अजवायन व तिल मिला लें। अब आटे में नमक, लाल मिर्च पावडर और हींग डालकर इस गरम पानी से आटा गूंथ लें। फिर चकली बनाने के सांचे में हल्का-सा तेल लगाकर आटा भरें और प्लेट या किचन पेपर पर चकली तैयार कर लें। हल्के हाथों से उठाकर इन्हें गर्म तेल में कुरकुरी होने तक तलें। तैयार कुरकुरी नमकीन चकली को एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें।