नयी दिल्ली : देश की पहली निजी ट्रेन तेजस एक्सप्रेस (Tejas Express) ने अपने संचालन के बाद से अक्टूबर तक 70 लाख रुपये का मुनाफा कमाया है। इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आइआरसीटीसी) के मालिकाना हक वाली इस ट्रेन की शुरुआत पिछले महीने की पांच तरीख को हुई थी। यह आंकड़े पांच से 28 अक्टूबर तक के हैं। ट्रेन ने इसी अवधि में टिकट बिक्री के जरिये करीब 3.70 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है। देश में किसी ट्रेन द्वारा मुनाफा कमाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रेलवे लगातार घाटा दर्ज करता रहा है।लखनऊ और दिल्ली के बीच चलने वाली यह ट्रेन भारतीय रेलवे की उस योजना का हिस्सा है, जिसके तहत 50 विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन विकसित किए जाने हैं। इन पर निजी संचालकों द्वारा 150 निजी ट्रेन चलाए जाने की योजना है।
आइआरसीटीसी ने बताया कि इस अवधि में तेजस के परिचालन में करीब तीन करोड़ रुपये का खर्च आया है। यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलती है। इस तरह से तेजस के संचालन में आइआरसीटीसी रोजाना करीब 14 लाख रुपये खर्च करती है, जबकि उसे यात्री किराए से 17.50 लाख रुपये की राजस्व मिलता है।गौरतलब है कि तेजस एक्सप्रेस देश में अपनी तरह की पहली निजी ट्रेन है। हालांकि इसकी संचालक आइआरसीटीसी भारतीय रेलवे की सहायक कंपनी है। तेजस के यात्रियों को कुछ विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं। इनमें विशेष खाना, 25 लाख रुपये तक का मुफ्त बीमा और लेट होने पर क्षतिपूर्ति शामिल है।
पहली निजी ट्रेन तेजस एक्सप्रेस ने एक महीने में कमाए 3.70 करोड़ रुपये
वायु प्रदूषण से सेहत को कैसे रखा जाए सुरक्षित
धुंध रूपी इस वायु प्रदूषण को स्मॉग कहते हैं। वस्तुत स्मॉग शब्द का प्रयोग पहली बार सन् 1905 में इंगलैंड के एक वैज्ञानिक डॉ हेनरी ने किया था। इस समय दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई क्षेत्र अतीत की तुलना में कहीं ज्यादा वायु प्रदूषण से ग्रस्त हैं। हवा इतनी विषाक्त हो चुकी है कि अब उसने सेहत पर हमला करना शुरू कर दिया है। यह समस्या आज इतनी बढ़ गई है कि अनेक लोग सड़कों पर मास्क पहनकर निकल रहे है। स्मॉग रूपी इस वायु प्रदूषण से सेहत को कैसे सुरक्षित रखा जाए और किन उपायों से इस समस्या को नियंत्रित किया जाए? इस संदर्भ में कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों से बातचीत…
धुंध रूपी इस वायु प्रदूषण को स्मॉग कहते हैं। स्मॉग रासायनिक पदार्थों व कोहरे के मिश्रण से बनता है, जो फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य अंगों पर ख्रराब असर डालता है वस्तुत: स्मॉग शब्द का प्रयोग पहली बार सन् 1905 में इंगलैंड के एक वैज्ञानिक डॉ हेनरी ने किया था। यह शब्द स्मोक (धुआं) और फॉग (कोहरा), इन दो शब्दों से मिलकर बना है।
प्राकृतिक घटनाओं या मानवीय गतिविधियों के कारण वातावरण में घुल गए हानिकारक रसायन वायु को प्रदूषित करते हैं। ये वायु प्रदूषक यदि वातावरण में उत्सर्जित होते हैं तो प्राथमिक प्रदूषक कहलाते हैं और यदि अन्य प्रदूषकों के साथ प्रतिक्रिया करके हानि पहुंचाते है तो सेकंडरी प्रदूषक कहलाते हैं। इनके मुख्य निशाने पर बच्चे, वृद्ध, दिल व फेफड़े के मरीज, डायबिटीज वाले और बाहरी वातावरण में काम करने वाले लोग आते हैं। इन प्रदूषकों के विषैले प्रभाव के कारण जमीन की उर्वरक क्षमता कम हो जाती है। जन्म से होने वाले विकार, दमा, फेफड़े का कैंसर और सिर दर्द आदि होने का खतरा बढ़ जाता है।
प्रमुख वायु प्रदूषक – हाइड्रो कार्बन, सल्फर ऑक्साइड, पार्टिक्यूलेट सामग्री, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड, पार्टिक्यूलेट सामग्री
हजारों ठोस या तरल कण जो हवा में तैरते रहते हैं, जैसे धूल, मिट्टी और एसिड के कण। ये कण सेहत के लिए नुकसानदेह होते हैं।
कणों के विषैले अथवा कैंसर उत्पन्न करने वाले प्रभाव हो सकते हैं।
सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों तक पहुंच सकते है। नाइट्रोजन ऑक्साइड: इस प्रदूषक से सांस नली का मार्ग अवरुद्ध हो सकता है।
सल्फर ऑक्साइड: यह प्रदूषक तत्व गैसों के आदान-प्रदान के लिए फेफड़ों की क्षमता में कमी लाता है।
कार्बन ऑक्साइड: रक्त में मौजूद आयरन को कमकर सिरदर्द, थकान का कारण बन सकती है।
ओजोन परत का क्षीण होना: मानव निर्मित प्रदूषक वायुमंडल में ओजोन की परत को खराब करते हैं। सेकेंडरी प्रदूषकों से ओजोन परत क्षीण होती है। रासायनिक धुंध के कारक बाहरी प्रदूषण के अतिरिक्त घरेलू बॉयोमास र्ईंधन, सिगरेट, बीड़ी का धुआं आदि फेफड़े को नुकसान पहुचाते हैं। विश्व के 20 प्रदूषित शहरों में भारत के 10 शहर शामिल है। इनमें से चार उत्तर प्रदेश में है।
सरकार ये कदम उठाए – सरकार को वनीकरण की व्यापक योजना बनानी चाहिए। जिन वाहनों से धुआं ज्यादा निकलता है, उन पर प्रतिबंध लगना चाहिए। पराली (फसलों के अवशेष) जलाने पर प्रभावी नियंत्रण लगाना चाहिए। ऐसे हानिकारक पदार्थों पर रोक लगनी चाहिए, जो वातावरण को प्रदूषित करते हैं।
बॉयोमास ईंधन के प्रयोग में कमी लाने को बढ़ावा देना चाहिए। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई उज्ज्वला योजना एक सराहनीय कदम माना जा सकता है, जिससे घरेलू वायु प्रदूषण में कमी आने की संभावना है।
(साभार – दैनिक जागरण)
सामने आया नासा का पहला इलेक्ट्रिक विमान
लीथियम आयन बैटरी वाली 14 मोटरें लगी होंगी
एडवर्ड एयरफोर्स बेस कैलिफोर्निया : नासा का पहला ऑल इलेक्ट्रिक एयरप्लेन एक्स-57 मैक्सवेल शुक्रवार को सामने आया। इसे कैलिफोर्निया की एयरोनॉटिक्स लैब में बनाया गया है। इसमें इटली में निर्मित टेकनेम पी2006टी डबल इंजन प्रोपेलर लगे हैं। विमान का निर्माण 2015 से किया जा रहा था। विमान का फ्लाइंग टेस्ट अगले साल होगा। विमान में लीथियम आयन बैटरी वाली 14 मोटरें लगने के बाद इसे लोगों के लिए सार्वजनिक करने की मंजूरी मिल गई। शुक्रवार को विमान को एडवर्ड एयरफोर्स बेस कैलिफोर्निया में इसे सामने लाया गया। विमान में भी दूसरी फ्लाइट की तरह पैंतरेबाजी करने की क्षमता होगी। बीते दो दशकों में एजेंसी के लिए काम करते हुए मैक्सवेल का यह पहला विमान होगा, जिसमें इंसान उड़ सकेगा। हालांकि निजी कंपनियां पहले से ही इलेक्ट्रिक विमान और हवाई टैक्सियां बना चुकी हैं। नासा के एक्स-57 विमान को विकसित करने का मकसद बेहतर टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराना और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए सरकार से प्रमाणपत्र हासिल करना है।
तय मानकों पर हवाई जहाज को उड़ाना है
लॉस एंजिल्स से 160 किमी दूर एडवर्ड्स में नासा के आर्मस्ट्रॉन्ग फ्लाइट रिसर्च सेंटर के प्रोजेक्ट मैनेजर ब्रेंट कोबलिग ने कहा, ‘‘हम उन चीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो पूरे उद्योग की मदद कर सकते हैं, न कि केवल एक कंपनी की। अभी हमारा लक्ष्य 2020 के अंत में इस हवाई जहाज को उड़ाना है। विमान में उड़ने की क्षमता के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षिण और ध्वनि के लिए भी मानक तय किए हैं।’’
दुनिया का इकलौता ऐसा पेंटर, जो सिलाई मशीन से बनाता है खूबसूरत तस्वीरें
पटियाला : आपने कई पेंटरों की तस्वीरें देखी होंगी, जो खूबसूरती के साथ-साथ अनोखी भी होती हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही पेंटर से रू-ब-रू करवाने जा रहे हैं, जो दुनिया में सबसे अनोखे हैं। इस पेंटर को दुनिया का इकलौता ‘नीडल मैन’ कहा जाता है, जो सिलाई मशीन से ऐसी खूबसूरत तस्वीरें बनाते हैं, जिसे देखने के बाद आप भी उनके मुरीद हो जाएंगे। इनका नाम है अरुण बजाज, जो पंजाब के पटियाला के रहने वाले हैं। 35 वर्षीय अरुण ने गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व से पहले सिलाई मशीन से उनकी एक खास तस्वीर बनाई है। वह दुनिया के इकलौते ऐसे कलाकार हैं, जो सिलाई मशीन से अनोखी पेंटिंग बनाते हैं। अरुण सिलाई मशीन के जरिए कई प्रसिद्ध हस्तियों की तस्वीरें बना चुके हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं। उन्होंने साल 2017 में पीएम मोदी से मुलाकात की थी और उन्हें सिलाई मशीन से बनाई गई उनकी तस्वीर भेंट की थी। अरुण ने भगवान कृष्ण की एक खूबसूरत तस्वीर बनाई थी, जिसके लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। इस तस्वीर को बनाने में उन्हें तीन साल का समय और 28 लाख 36 हजार मीटर धागा मिला था। यह दुनिया की पहली ऐसी तस्वीर थी, जिसे सिलाई मशीन से बनाया गया था और वो भी लाखों धागे से। जिंदगी की कहानी भी बड़ी ही कठिनाईयों से भरी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरुण जब 12 साल के थे, तभी से सिलाई कर रहे हैं। उन्हें यह काम करते 23 साल बीत चुके हैं। उन्होंने बताया था कि उनके पिता एक दर्जी थे, लेकिन जब अरुण 16 साल के थे, तभी उनका देहांत हो गया था। इसके बाद से ही वो अपने पिता की दुकान संभाल रहे हैं। इसके लिए उन्हें अपने स्कूल की पढ़ाई तक छोड़नी पड़ी थी।अरुण के मुताबिक, वह एक प्रसिद्ध पेंटर बनना चाहते थे, लेकिन उनके पिता की अचानक मौत से उनका यह सपना टूट गया। हालांकि फिर भी उन्होंने अपने अंदर के हुनर को मरने नहीं दिया और आज वो अपने अनोखे हुनर से दुनिया को अपना दीवाना बना रहे हैं।
9 साल के बच्चे को डूडल बनाने से रोका, आर्ट टीचर की मदद से रेस्त्रां सजाने का काम मिला
आर्ट क्लास की ड्रॉइंग टीचर कैरी ने इंस्टाग्राम पर जो के डूडल शेयर किए
लंदन : ब्रिटेन के श्रेयसबरी में 9 साल का जो व्हेल स्कूल समय में वहां की मेज-दीवारों पर डूडल बनाता था। मना किए जाने पर वह चिड़चिड़ा जाता। इस पर उसके माता-पिता जो को आर्ट क्लासेस ले गए। यहां 6 हफ्तों के दौरान जो की ड्रॉइंग के सभी कायल हो गए। बच्चे की ड्रॉइंग टीचर कैरी ने इंस्टाग्राम पर उसके डूडल शेयर किए। इससे प्रभावित होकर श्रेयसबरी के रेस्त्रां मालिक ने जो को दीवारें सजाने की पेशकश की। अब जो के पिता ग्रेग उसे रोज स्कूल के बाद रेस्त्रां ले जाते हैं। यहां जो दीवारों पर ड्रॉइंग बनाता है। इन्हें पिता ने लिंकडिन पर अपलोड किया। जल्द ही जो की ड्रॉइंग को 15 लाख से अधिक लाइक्स और ढेरों कमेंट मिले। पिता का कहना है, ‘‘वह अपनी ड्रॉइंग के प्रति समर्पित है। डूडल बनाने से मना करने पर वह स्कूल में चिड़चिड़ा जाता था। इसके बाद उसकी मां और मैंने उसे आर्ट क्लास भेजने का फैसला किया था। अब देख कर अच्छा लगता है कि 9 साल की उम्र में जो का अपना खुद का बिजनेस शुरू हो गया।’’
घरेलू सहायिका का विजिटिंग कार्ड वायरल
पुणे : शहर के बावधान इलाके में रहने वाली एक हाउस मेड (घर में काम करने वाली महिला) का विजिटिंग कार्ड इन दिनों सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। जिससे उन्हें देश भर से लोग नौकरी का ऑफर दे रहे हैं। दरअसल, घरेलू सहायिका गीता काले की कुछ दिन पहले नौकरी छूट गई थी। वह काफी परेशान थी। परेशान देख उसकी परिचित और पेशे से एक निजी कंपनी में ब्रांडिंग और मॉर्केटिंग सीनियर मैनेजर धनश्री शिंदे ने उसका विजिटिंग कार्ड डिजाइन किया। कार्ड में गीता की पूरी प्रोफाइल है और लिखा है- ‘घर काम मौसी इन बावधान।’ इसमें उनके हर काम का जिक्र है। साथ में मेहनताना भी लिखा है। यह भी बताया गया है कि गीता का प्रोफाइल आधार कार्ड से वेरिफाइड है। गीता धनश्री के घर पर भी काम करती है। गीता और धनश्री की कहानी को दो दिन पहले अस्मिता जावड़ेकर ने फेसबुक पर शेयर किया, जो वायरल हो गई। उसने बताया कि 24 घंटे में स्मार्ट बिजनेस कार्ड डिजाइन किया गया और 100 कार्ड प्रिंट करवाए गए।
माइक्रोसॉफ्ट का फोर डे वीक कॉन्सेप्ट, 3 दिन छुट्टी से कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता 40% बढ़ी
टोक्यो : भारत में सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों से अधिक काम लेने के लिए उनका ऑफिस टाइम बढ़ाकर 9 घंटे किए जाने की तैयारी है। दूसरी तरफ कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपने कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए इससे उलट काम किया। माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी जापान यूनिट में अगस्त में कर्मचारियों से एक महीने तक हफ्ते में महज 4 दिन काम करवाया। इससे कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता में आश्चर्यजनक रूप से उछाल आया और यह पिछले साल के मुकाबले 40% बढ़ गई। कंपनी ने 2300 कर्मचारियों को सप्ताह में शुक्रवार का अतिरिक्त अवकाश देते हुए तीन दिन की छुट्टी दी। इस तरह कर्मचारियों ने हफ्ते में 4 दिन ही काम किया। कंपनी के मुताबिक, इस प्रयोग के दौरान कर्मचारियों को अपनी बाकी छुट्टियों के साथ कोई समझौता नहीं करना पड़ा। यही नहीं, इतनी छुट्टियां मिलने से कर्मचारियों ने छुट्टियां भी कम लीं। माइक्रोसॉफ्ट ने नतीजों के बारे में बताया कि उत्पादकता में यह वृद्धि बैठकों के समय में कमी के चलते हुई।
कोई बैठक 30 मिनट से अधिक नहीं चली। कई बैठकें वर्चुअल हो गईं। ईमेल्स के जवाब जल्दी दिए गए। अन्य फैसलों को भी टालने के बजाय तत्काल लिया गया। इस दौरान बिजली की खपत 23.1% कम हुई और 58.7% कागज का कम इस्तेमाल हुआ। इससे कंपनी का खर्च कम हुआ।
विशेषज्ञ बोले- अतिरिक्त कर्मी भर्ती करने पड़ेंगे
एक महीने के अंत में जब कंपनी ने अपने कर्मचारियों से उनकी राय जानी तो 92.1% ने इसे बेहतरीन विचार बताया। कम्पनी के इस कदम पर विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपाय हर कम्पनी पर लागू नहीं हो सकता। जिन कंपनियों में सातों दिन काम होता है, उन्हें अतिरिक्त कर्मचारी भर्ती करने पड़ेंगे।
माइक्रोसॉफ्ट फिर प्रयोग आजमाने की तैयारी में
उधर, माइक्रोसॉफ्ट इस प्रयोग को एक बार फिर आजमाने की तैयारी कर रही है। उसने कर्मचारियों से कहा है कि वह वर्क-लाइफ के बैलेंस को बनाए रखने के लिए नए मानक अपनाएं। बढ़िया विचार लेकर आएं। माइक्रोसॉफ्ट ने अन्य कंपनियों से भी इस पहल में शामिल होने की अपील की है।
छोटी कम्पनियों में सफल फॉर्मूला बड़ी कम्पनी में भी कारगर
अब तक हफ्ते में 4 दिन काम का उपाय छोटी कम्पनियां ही आजमाती रही हैं, लेकिन माइक्रोसॉफ्ट के प्रयोग ने साबित किया है कि यह फॉर्मूला बड़ी कंपनियों में भी लागू हो सकता है। न्यूजीलैंड की एक फर्म भी दो महीने आजमाकर इसे सफल बता चुकी है। वर्जिन एटलांटिक के संस्थापक रिचर्ड ब्रानसन ने इसे खुशी बढ़ाने वाला बताया है।
यमुना की 30 फीट गहराई में मिलीं कुषाण काल की ईंटें और मूर्तियां
घरौंडा (करनाल) : फरीदपुर गांव में खनन के दौरान 30 फीट की गहराई में मिली पौराणिक मूर्तियां आठवीं-नौवीं शताब्दी और 11वीं व 12वीं शताब्दी के मध्य रहे राजपूत काल के समय की हैं। वहीं खुदाई में मिली ईंटों को कुषाण काल का माना जा रहा है। पुरातत्वविदों का कहना है कि राजपूत काल में इस तरह की मूर्तियां बनाई जाती थी। अध्ययन में सामने आया है कि इस काल में बनी ईंटों के पीछे उंगलियों के निशान होते थे, जो खुदाई में मिली ईंटों पर भी हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि ये ईंटें लगभग दो हजार साल पहले की हैं। दरअसल, फरीदपुर गांव के पास रेत की खदान में खुदाई के दौरान शिवलिंग व मूर्तियां निकली थीं। सूचना के बाद जाँच के लिए प्रशासन व पुरातत्व विभाग की टीम गांव में पहुंची। पुरातत्व विभाग हरियाणा के अधिकारी शुभम मलिक व बीडीपीओ प्रेम सिंह जांच दल के साथ रेत की खान में गए। अधिकारियों ने उस जगह का मुआयना किया, जहां पर खुदाई में शिवलिंग व स्तंभ मिले थे। पुरातत्व विभाग के दल ने खुदाई में मिलीं ईंटों का निरीक्षण किया। खदान के बाद पुरातत्व विभाग की टीम गांव के देवी मंदिर में पहुंचीं, जहां पर ग्रामीणों ने शिवलिंग व नंदी की मूर्तियों को स्थापित कर दिया था।
पुरातत्व अधिकारी शुभम मलिक ने बारीकी से पौराणिक धरोहरों की जाँच की। उन्होंने कहा कि यहां मिली प्राचीन कला कृतियों का ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत अधिक महत्व है। शुभम मलिक ने कहा कि सभी कला कृतियों का विस्तृत अध्ययन होना है। ऐसे में इनकी सुरक्षा बेहद अहम है। मूर्तियों की कस्टडी को लेकर ग्रामीणों व अधिकारियों के बीच लंबी बातचीत हुई। ग्रामीण किसी भी सूरत में शिव स्वरूप को पुरातत्व विभाग को सौंपने को तैयार नहीं हैं।
लोगों की आस्था को देखते हुए प्रशासन के अधिकारियों ने बीच का रास्ता निकाला। प्राचीन कला मूर्तियों की सुरक्षा के मद्देनजर गांव में 14 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। यह मूर्तियां कमेटी की कस्टडी में रहेगी और इनके स्वरूप में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
शिपिंग कॉर्पोरेशन में सरकार बेचेगी 63.75 फीसदी हिस्सेदारी
नयी दिल्ली : शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में सरकार अपनी 63.75 हिस्सेदारी बेचने जा रही है। एयर इंडिया समेत कई कंपनियों और बैंकों में हिस्सेदारी घटाने के बाद अब इस सरकारी कंपनी में विनिवेश होगा। जहाजरानी मंत्रालय ने कहा है कि वो इस कंपनी में हिस्सेदारी घटाने को लेकर के किसी तरह का कोई विरोध नहीं करेगा।
2017 में किया था विरोध
मंत्रालय ने 2017 में कंपनी के विनिवेश करने को लेकर के काफी विरोध किया था। लेकिन अब मंत्रालय सचिवों के एक समूह द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव का किसी तरह से कोई विरोध नहीं किया जाएगा। इस प्रस्ताव को हाल ही में मंजूरी दी है। अब इस बारे में कैबिनेट जल्द फैसला लेगा।
सचिवों के समूह ने शिपिंग कॉर्पोरेशन के अलावा भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकोर), नीपको और टीएचडीसी में सरकारी हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव दिया है। वित्त मंत्रालय के अधीन डिपार्टमेंट ऑफ इंवेस्टमेंट एंड पब्लिक असेट मैनेजमेंट (दीपम) ने इन कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने के लिए आवेदन मंगाए हैं।
इतनी है इन कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी
सरकार की शिपिंग कॉर्पोरेशन में 63.75 फीसदी, बीपीसीएल में 53.29 फीसदी, कॉनकॉर में 30 फीसदी, नीपको में 100 फीसदी और टीएचडीसी में सरकारी हिस्सेदारी 75 फीसदी है। माना जा रहा है कि दीपम पहली तीन कंपनियों को निजी कंपनियों को बेचना चाहती है जबकि नीपको और टीएचडीसी को अन्य पीएसयू को बेचना चाहती है। इनकी संभावित खरीदार एनटीपीसी हो सकती है।
टेक स्टार्टअप्स में 500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी पेटीएम
नयी दिल्ली : डिजिटल पमेंट कंपनी पेटीएम टेक स्टार्टअप्स में 500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। पेटीएम ने बताया कि डिजिटल ईकोसिस्टम में तकनीक को बढ़ावा देने वाले स्टार्टअप्स में निवेश की योजना है। इसके तहत रोजगार के मौके देने वाले इनोवेशन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित तकनीक और बिग डेटा सॉल्यूशंस पर फोकस किया जाएगा। पेटीएम का कहना है कि वह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में दबादबा बनाना चाहती है। कंपनी के सीएफओ विकास गर्ग ने कहा- हम डिजिटल क्रांति का फायदा कोने-कोने तक पहुंचाने के देश के मिशन के लिए अच्छी तरह तैयार हैं। हमने ऐसे स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी की है जिनमें डिजिटल ईकोसिस्टम को बढ़ाने की क्षमताएं हैं।




