Friday, April 24, 2026
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रक्तदान शिविर के माध्यम से छात्राओं ने दिया मानवता का सन्देश

कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की सामाजिक सेवा इकाई स्नेह कमेटी ने हाल ही में रक्तदान शिविर आयोजित किया। शिविर का उद्घाटन स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट के वरिष्ठ सलाहकार सी वी मुरलीधर ने किया। इस अवसर पर प्रोजेक्ट लाइफ फोर्स के संस्थापक सदस्य दानिश सेठ ने प्रेरक वक्तव्य दिया। कार्यक्रम में सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की अध्यक्ष एस. बिड़ला भी उपस्थित रहीं। यह रक्तदान शिविर गैर सरकारी संगठन प्रोजेक्ट लाइफ फोर्स के साथ साझा तौर पर आयोजित किया गया था।

हर साल की तरह इस बार यह आयोजन एक विषय यानी थीम पर केन्द्रित था और वह थीम थी ‘कुरुक्षेत्र…द बैटल फॉर ब्लड’ मगर इस कुरुक्षेत्र का अन्दाज बहुत अलग था और कार्यक्रम स्थल की सजावट भी इस थीम को ध्यान में रखकर की गयी थी..यहाँ रक्तदान के माध्यम से जीवन बचाने का संकल्प था..जीवन देने की दृढ़ता थी। पहली बार रक्तदान करने वाले रक्तदाताओं को उत्साहित करने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किये गये। रक्तदान शिविर में 142 लोगों ने रक्तदान किया। यह थीम भी छात्राओं का ही विचार थी। शिविर को सफल बनाने में स्नेह कमेटी की सभी सदस्याओं तथा शिक्षिकाओं का योगदान रहा।

मृत्युंजय कुमार सिंह को साहित्य सेवी सम्मान

देवघर : देवघर में चल रहे 19वें पुस्तक मेला में इस बार मृत्युंजय कुमार सिंह महाविद्या संस्था की ओर से ‘साहित्य सेवी” सम्मान से नवाजे जायेंगे। मृत्युंजय जी पश्चिम बंगाल कैडर के आई.पी.एस. अधिकारी हैं। वे वर्तमान में कमांडेंट जनरल एवं पुलिस महानिदेशक (होमगॉर्ड), पश्चिम बंगाल के पद पर कार्यरत हैं। वे हिन्दी और भोजपुरी के लेखक, कवि, स्तंभकार, गीतकार और लोक गायक भी हैं। जवाहरलाल नेहरू भारतीय संस्कृति केन्द्र एवं संस्कृति मंत्रालय में भी उनका अहम योगदान रहा है। मृत्युंजय सिंह 23 जनवरी 2020 को पुस्तक मेला में उस दिन के विशेष सम्मानित अतिथि होंगे। साथ ही भारत की भाषा नीति और भारतीय संस्कृति पर परिचर्चा के मुख्य वक्ता होंगे। उनके लेखन, उपन्यास और कवि हृदय के प्रसंगों पर तो चर्चा होगी ही, साथ ही उनका विरल भोजपुरी गायन के रसास्वादन का भी अवसर मिलेगा। इसी दिन समारोहपूर्वक उन्हें “साहित्य सेवी” सम्मान से अलंकृत किया जायेगा

आधुनिक भारत के निर्माता पंडित जवाहर लाल नेहरू

पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 इलाहाबाद के एक धनाढ्य परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम मोतीलाल नेहरू और माता का नाम स्वरूपरानी था। पिता पेशे से वकील थे। उनकी 3 पुत्रियां थीं और जवाहरलाल नेहरू उनके इकलौते पुत्र थे। वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। बच्चों के प्यारे ‘चाचा नेहरू’ के रूप में पंडित जवाहरलाल नेहरू देश को प्रगति के पथ पर ले जाने वाले खास पथप्रदर्शक थे।

जवाहरलाल नेहरू को दुनिया के बेहतरीन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिला था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो और कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज, लंदन से पूरी की थी। उन्होंने अपनी लॉ की डिग्री कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पूरी की। हैरो और कैम्ब्रिज में पढ़ाई कर 1912 में नेहरूजी ने बार-एट-लॉ की उपाधि ग्रहण की और वे बार में बुलाए गए।

पंडित नेहरू शुरू से ही गांधीजी से प्रभावित रहे और 1912 में कांग्रेस से जुड़े। 1920 के प्रतापगढ़ के पहले किसान मोर्चे को संगठित करने का श्रेय उन्हीं को जाता है। 1928 में लखनऊ में साइमन कमीशन के विरोध में नेहरू घायल हुए और 1930 के नमक आंदोलन में गिरफ्तार हुए। उन्होंने 6 माह जेल काटी। 1935 में अलमोड़ा जेल में ‘आत्मकथा’ लिखी। उन्होंने कुल 9 बार जेल यात्राएं कीं। उन्होंने विश्वभ्रमण किया और वे अंतरराष्ट्रीय नायक के रूप में पहचाने गए। उन्होंने 6 बार कांग्रेस अध्यक्ष के पद (लाहौर 1929, लखनऊ 1936, फैजपुर 1937, दिल्ली 1951, हैदराबाद 1953 और कल्याणी 1954) को सुशोभित किया। 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में नेहरूजी 9 अगस्त 1942 को बंबई में गिरफ्तार हुए और अहमदनगर जेल में रहे, जहां से 15 जून 1945 को रिहा किए गए।

नेहरू ने ‘पंचशील’ का सिद्धांत प्रतिपादित किया और 1954 में ‘भारतरत्न’ से अलंकृत हुए नेहरूजी ने तटस्थ राष्ट्रों को संगठित किया और उनका नेतृत्व किया। सन् 1947 में भारत को आजादी मिलने पर जब भावी प्रधानमंत्री के लिए कांग्रेस में मतदान हुआ तो सरदार वल्लभभाई पटेल और आचार्य कृपलानी को सर्वाधिक मत मिले थे, किंतु महात्मा गांधी के कहने पर दोनों ने अपना नाम वापस ले लिया और जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया।

‘स्वाधीनता और स्वाधीनता की लड़ाई को चलाने के लिए की जाने वाली कार्रवाई का खास प्रस्ताव तो करीब-करीब एकमत से पास हो गया। …खास प्रस्ताव इत्तफाक से 31 दिसंबर की आधी रात के घंटे की चोट के साथ, जबकि पिछला साल गुजरकर उसकी जगह नया साल आ रहा था, मंजूर हुआ।’ -लाहौर अधिवेशन में स्वतंत्रता प्रस्ताव पारित होने के बारे में नेहरू की ‘मेरी कहानी’ से।

नेहरू के कार्यकाल में लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करना, राष्ट्र और संविधान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को स्थायी भाव प्रदान करना और योजनाओं के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को सुचारु करना उनके मुख्य उद्देश्य रहे।

नेहरू पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के संबंधों में सुधार नहीं कर पाए। उन्होंने चीन की तरफ मित्रता का हाथ भी बढ़ाया, लेकिन 1962 में चीन ने धोखे से आक्रमण कर दिया। चीन का आक्रमण जवाहरलाल नेहरू के लिए एक बड़ा झटका था और शायद इसी वजह से उनकी मौत भी हुई। जवाहरलाल नेहरू को 27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ा जिसमें उनकी मृत्यु हो गई।

पंडित नेहरू के निधन के बाद सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था- ‘जवाहरलाल नेहरू हमारी पीढ़ी के एक महानतम व्यक्ति थे। वे एक ऐसे अद्वितीय राजनीतिज्ञ थे जिनकी मानव-मुक्ति के प्रति सेवाएं चिरस्मरणीय रहेंगी। स्वाधीनता-संग्राम के योद्धा के रूप में वे यशस्वी थे और आधुनिक भारत के निर्माता थे।’

पंडित जवाहरलाल नेहरू 1947 में स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। आजादी के पहले गठित अंतरिम सरकार और आजादी के बाद 1947 में भारत के प्रधानमंत्री बने और 27 मई 1964 को उनके निधन तक वे इस पद पर बने रहे।

नहीं रहीं बांग्ला साहित्यकार नवनीता देव सेन

कोलकाता : मशहूर साहित्यकार नवनीता देव सेन का निधन हो गया। वे कैंसर से पीड़ित थीं। वह 81 वर्ष की थीं। अपने पीछे वह दो बेटियों को छोड़ गई हैं। बेटी अंतरा लेखिका हैं, वहीं दूसरी बेटी नंदना एक्ट्रेस हैं। कैंसर की वजह से पिछले 10 दिनों से उनकी हालत बेहद खराब हो गई थी। नवनीता देव कविता, उपन्यास, लघु कथाओं के साथ ही कॉलम भी लिखती थीं। उनकी कई कविताएं और उपन्यास पाठकों के बीच खासे लोकप्रिय रहे। उनकी लेखनी की धार की वजह से उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार के साथ ही पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया था। नवनीता ने ऑक्सफोर्स यूनिवर्सिटी और यूएस के कोलोरेडो कॉलेज में शिक्षक के तौर पर भी सेवाएं दी थीं। उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी में भी कई लेक्चर दिए।

पद्मश्रीसाहित्य अकादेमी पुरस्कार से हुईं थी सम्मानित

बांग्ला भाषा की प्रसिद्ध साहित्यकार रहीं नवनीता देव सेन को ‘नटी नवनीता’ के लिए साल 1999 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वहीं साल 2000 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया था। इसके अलावा पूरे जीवन काल में उन्हें अपनी कविता, लघु कथाओं और साहित्य रचना की वजह से कई बार पुरस्कृत किया गया। इनके निधन की खबर सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी शोक व्यक्त किया है। बनर्जी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘नवनीता देव सेन के निधन से दुखी हूं। उनकी कमी उनके चाहने वालों और उनके छात्रों को खलती रहेगी। मेरी उनके परिवार के सदस्यों और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं हैं।’ नवनीता देव सेन का 1958 में अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन से विवाह हुआ था। जिन्हें बाद में नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था। हालांकि साल 1976 में दोनों में तलाक हो गया था।

90 रुपये में खरीदा वास, 300 साल पुराना निकला, 4.4 करोड़ रु. में बिका

लंदन : यूनाइटेड किंगडम के एक व्यक्ति ने 90 (एक पाउंड) रुपए में हार्टफोर्डशायर चैरिटी शॉप की नीलामी में एक चीनी वास (फूलदान) खरीदा। तब व्यक्ति को वास के महत्व के बारे में पता नहीं था। कुछ दिन बाद व्यक्ति ने इसे ईबे पर बेचने की कोशिश की। यहां से उसे कई ऑफर मिले। इससे व्यक्ति की जिज्ञासा बढ़ी और उसने इसकी नीलामी का फैसला किया। वास को चीन के एक व्यक्ति ने 3.48 करोड़ रुपये में खरीदा। सभी तरह के टैक्स जमा करने के बाद वास की कीमत करीब 4.4 करोड़ रुपये तक पहुंच गयी।
नीलामी में पता चला वास का महत्व
पीले रंग के वास का महत्व जानने के लिए इसे स्टैन्स्टेड माउंटफिटचेट, एसेक्स स्थित स्वोर्डस फाइन आर्ट के नीलामी घर लाया गया। जहां नीलामी के दौरान इससे जुड़ी जानकारी मिली। यह 18वीं सदी के एक चीनी सम्राट कियानलोंग ( शासनकाल-1735 से 1796) के लिए बनाया गया था। वास पर कियानलोंग राजवंश मुहर की मुहर भी लगाई जाती थी। कियानलोंग सम्राट किंग वंश का छठवां सम्राट था। उन्होंने अपने बेटे जियाक्विंग को सम्राट बनाने के लिए राज्य 1796 में त्याग दिया था। इसके तीन साल बाद 1799 में 87 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई। कियानलोंग के शासन काल में वास का निर्यात विदेशों को नहीं बेचा जा सकता था। वास पर राजवंश की प्रशंसा में कविता अंकित की जाती थी। इन पर दो अन्य तरह के निशान भी होते थे जो सम्राट कियानलॉन चेन हां का शाही निशान होता था। इसे वेइजिंग वेइयी पढ़ा जाता है।
तीन के भविष्य पर खर्च होगी रकम
स्वोर्डस में एशियन आर्ट डिपार्टमेंट की प्रमुख येक्सू ली ने कहा, विक्रेता चैरिटी शॉप के समय मौजूद था। उन्हें वास के महत्व के बारे में जानकारी नहीं थी, उन्हें इसका डिजाइन पसंद था। बिक्री से मिली रकम का इस्तेमाल वह अपनी तीन साल की बेटी के भविष्य पर खर्च करेगा।

सफाई से होगी कमाई, रिसाइकिल प्लास्टिक का इस्तेमाल सड़क बनाने में होगा

उधमपुर :जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर जिले के गांव बट्‌टाल बालियां में जतिंदर बागरिया ने प्लास्टिक को रिसाइकिल करने की फैक्ट्री लगाई। यहां लगी मशीनें प्लास्टिक को रोड बनाने में इस्तेमाल होने वाले मटेरियल में बदल देती हैं। फैक्ट्री मालिक दिल्ली के जतिंदर ने कहा, हम केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित हैं और शहर को साफ रखना चाहते हैं। हम प्लास्टिक फ्री इंडिया कैम्पेन में भी योगदान दे रहे हैं। कुनाल प्लास्टिक इंडस्ट्रीज नाम की यह फैक्ट्री अभी 10 से 12 लोगों को रोजगार मुहैया करा रही है। हमारा लक्ष्य ऊधमपुर जिले को प्लास्टिक फ्री बनाकर क्लीन इंडिया और क्लीन सिटी को बढ़ावा देना है।  उधमपुर के डिप्टी कमिश्नर पीयूष सिंह के मुताबिक, बट्टाल बालियां गांव में उद्योगपति ने प्लास्टिक क्रेशर मशीन लगाई है। इससे रिसाइकिल किए गए प्लास्टिक का इस्तेमाल रोड बनाने में किया जाएगा। यह एक बेहतर प्रयास है।
फैक्ट्री में काम करने वाली खुर्शिदा बेगम कहती हैं, हम यहां से अच्छा पैसा कमा कर खुश हैं। ऐसी और भी फैक्ट्रियां लगना चाहिए, ताकि उनके जैसी कई और महिलाओं को रोजगार मिले। फैक्ट्री वर्कर मोहम्मद रफीक कहते हैं, हम अपने शहर को साफ करते हैं और उसी से रुपया कमाते हैं। इस तरह मैं अपने परिवार और बच्चों के लिए शहर साफ करता हूं और इससे आमदनी भी हो जाती है।

शेफाली बनीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक जड़ने वाली सबसे युवा भारतीय

  तेंदुलकर का रिकार्ड तोड़ा
ग्रोस आइलेट : पंद्रह साल की शेफाली वर्मा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक जड़ने वाली भारत की सबसे युवा खिलाड़ी बन गयी और उन्होंने सचिन तेंदुलकर का 30 साल पुराना रिकार्ड तोड़ दिया। शेफाली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 49 गेंद में 73 रन की पारी खेली, जिससे भारतीय टीम ने शनिवार को यहां 84 रन से जीत हासिल की। अपना पांचवां टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रही शेफाली ने अपनी पारी के दौरान छह चौके और चार छक्के जमाये। शेफाली ने यह उपलब्धि 15 साल और 285 दिन की उम्र में हासिल की। इस तरह उन्होंने महान क्रिकेटर तेंदुलकर को पीछे छोड़ा, जिन्होंने अपना पहला टेस्ट अर्धशतक 16 साल और 214 दिन की उम्र में बनाया था। हरियाणा की इस युवा खिलाड़ी ने पिछले महीने सूरत में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने कैरियर के दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 46 रन की पारी खेली थी।

अब चेहरा पहचानने के बाद मिलेगी ट्रेन में एंट्री, रेलवे लेकर आ रहा है खास प्रणाली

नयी दिल्ली  :  भारतीय रेलवे अपने यात्रियों की सुरक्षा के लिए फेस रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (Face Recognition Technology) का इस्तेमाल करने क तैयारी में है। वहीं, रेलवे इस एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित तकनीक से अपराधों पर लगाम लगाई जा सकेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) इस तकनीक को क्रिमिनल ट्रेकिंग सिस्टम के डाटा बेस के साथ लिंक करेगी, जिससे अपराधियों को पहचानने में आसानी होगी। वहीं, इस सिस्टम से आरपीएफ को पूरे डाटा बेस का एक्सेस मिल जाएगा।
एफआरएस तकनीक करेगी काम
फेस रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी अपराधियों की तस्वीरों को उनके चेहरे से मैच करेगी, जिसके बाद आरपीएफ को उसके पूरे बैकग्राउंड की जानकारी मिलेगी। सूत्रों की मानें तो इस तकनीक के आने से रेलवे स्टेशन अधिक सुरक्षित हो जाएंगे। इस प्लान को आरपीएफ द्वारा 26/11 आतंकी हमले के बाद पहली बार पेश किया गया था। वहीं, फेस रिकॉग्निशन तकनीक को बड़े रेलवे स्टेशन्स में इस्तेमाल किया जाएगा।
बंगलुरु के रेलवे स्टेशन में होगा इस तकनीक का इस्तेमाल
रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स फेस रिकॉग्निशन तकनीक को सबसे पहले बंगलुरु रेलवे स्टेशन में इस्तेमाल करेगी। इसके बाद इसका दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में उपयोग किया जाएगा। इस सिस्टम की खासियत की बात करें तो यह 10 साल पुरानी फोटो को भी पहचान सकेगा।
बंगलुरु एयरपोर्ट पर मौजूद है यह तकनीक
आपको बता दें कि इस समय बंगलुरु के अतंराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फेस रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है। इस सिस्टम को जुलाई में लॉन्च किया गया था।

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन का निधन

चेन्नई : भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन का रविवार को चेन्नई में निधन हो गया। शेषन ने 1990 के दशक में देश में चुनाव सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और बड़ी ही कठोरता से आदर्श आचार संहिता का पालन कराया था। वह 86 वर्ष के थे। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई- भाषा’ को बताया कि पूर्व चुनाव आयुक्त का स्वास्थ्य पिछले कुछ वर्ष से ठीक नहीं था। दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। अपनी स्पष्टवादिता के लिए प्रसिद्ध शेषन बढ़ती उम्र के कारण पिछले कुछ वर्ष से सिर्फ अपने आवास पर रह रहते थे। उनका बाहर आना-जाना लगभग ना के बराबर हो गया था। प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘चुनावी सुधार की दिशा में उनके प्रयासों ने हमारे लोकतंत्र को और मजबूत तथा भागीदारीपूर्ण बनाया। उनके निधन से दुख हुआ। ओम शांति।’’ शेषन 12 दिसंबर, 1990 से लेकर 11 दिसंबर, 1996 तक देश के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे और इस दौरान उन्होंने चुनाव सुधार की दिशा में काफी काम किया। शेषन ने अपने कार्यकाल में चुनाव में के दौरान बाहुबल और धन के महत्व को कम करने के लिए कठोर कदम उठाए। उनका जन्म केरल के पलक्कड़ जिले के तिरुनेल्लाई में हुआ था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, ‘‘स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के पक्षधर टी.एन. शेषन के निधन की सूचना से शोक संतप्त हूं। लोकतंत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं।’’ केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि शेषन ने भारत के चुनावी संस्थान को मजबूत बनाने में सुधारक की भूमिका निभायी है। शाह ने ट्वीट किया, ‘‘पूर्व मुख्य आयुक्त टी.एन. शेषन के निधन की सूचना से दुखी हूं। उन्होंने भारत की चुनावी संस्था के सुधार और उसे मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश उन्हें हमेशा लोकतंत्र के पथप्रदर्शक के रूप में याद रखेगा। मेरी प्रार्थना उनके परिवार के साथ है।’’

खाली कटोरे के साथ क्लासरूम में झांक रही थी बच्ची, स्कूल ने दिया दाखिला

हैदराबाद : भारत में 21.9 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं, जिनकी मजदूरी 150 रुपये प्रति दिन से कम है. ऐसी स्थितियों में जहां कई लोगों के लिए दो वक्‍त का भोजन जुटा पाना एक चुनौती है, वहीं शिक्षा किसी सपने से कम नहीं है. इसी बीच एक ऐसी तस्वीर वायरल हुई, जो बहुत कुछ बयां करती नजर आ रही है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, इस तस्वीर को तेलुगू डेली ने छापा है, साथ में आकाली चूपु यानी ‘भूखी निगाहें’ लिखा है। देखा जा सकता है कि एक बच्ची खाली कटोरा लेकर क्लासरूम में झांक रही है. तस्वीर को गुड़िमालकापुर के देवल झाम सिंह गवर्नेमेंट हाई स्कूल में लिया था। तस्वीर वायरल होने के बाद अब स्कूल ने बच्ची को दाखिला दिया है। बच्ची का नाम दिव्या बताया जा रहा है. शुक्रवार को उसे स्कूल में दाखिला मिल गया. पहले बच्ची स्कूल की छात्रा नहीं थी. वो खाने के लिए रोज स्कूल आती थी। दिव्या के माता-पिता पास ही की झुग्गी में रहते हैं. उसके पिता कचरा उठाने का काम करते हैं, जबकि माँ सफाईकर्मी है। स्कूल में जो मिड-डे मील बचता था, वो खाने के लिए दिव्या आती थी। एनजीओ एमवी फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक वेंकट रेड्डी ने फेसबुक पर इस तस्वीर को शेयर किया। एमवी फाउंडेशन बालिकाओं के अधिकारों के लिए काम करती है। तस्वीर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “एक बच्ची को देश में शिक्षा और भोजन नहीं मिलना शर्म की बात है। “सोशल मीडिया पर तस्वीर पोस्ट करने के बाद वो अपने वॉलिंटियर के साथ स्कूल पहुंचे और बच्ची का उसी स्कूल में एडमिशन कराया। इसी के साथ वो बच्ची के माता-पिता से भी मिले। जब दिव्या पहले दिन स्कूल पहुंची तो उन्होंने फोटो भी ली। उन्होंने बताया कि पहले दिन स्कूल जाकर दिव्या के चेहरे पर अलग ही मुस्कान थी।