हर्जाना राशि में 3 हजार रुपए परिवादी और तीन हजार रुपए राजस्थान राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश
अधिक वसूले गए 5 रुपए भी नौ प्रतिशत की वार्षिक ब्याज की दर से लौटाने होंगे
जयपुर : जिला उपभोक्ता मंच तृतीय ने डिश वॉश टब के 5 रुपए अधिक वसूलने वाले वीकेआई स्थित रिलायंस मार्केट पर 6 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। हर्जाना राशि में 3 हजार रुपये परिवादी और तीन हजार रुपए राजस्थान राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश दिया है। अधिक वसूले गए 5 रुपये भी नौ प्रतिशत की वार्षिक ब्याज की दर से लौटाने होंगे। शास्त्री नगर निवासी वीरेंद्र सिंह ने 12 सितंबर, 2017 को वीकेआई रिलायंस मार्केट से घरेलू सामान खरीदा था। इसमें आधा किलो का एक डिश वॉश टब भी था। इसकी कीमत 45 रुपये अंकित थी और उस पर दो रुपये की छूट देकर 43 रु. बिल में जोड़ रखे थे। डिश वॉश टब पर एमआरपी 45 रुपये पर 7 रुपए छूट देना अंकित था। इस हिसाब से 38 रुपए लिए जाने थे, लेकिन वसूले गए 43 रुपये। रिलायंस ने जवाब में कहा कि परिवादी ने पूर्व में ही किसी अन्य बिल से सामान खरीदा है। वह बिल का दुरुपयोग कर रहा है। मंच के अध्यक्ष केदारलाल गुप्ता व सदस्य भावना भाटी ने फैसले में कहा कि डिशवॉश टब का अवलोकन करें तो उसपर 7 रुपये की छूट लिखा हुआ है। डिशवॉश पर अंकित बार कोड ही बिल पर अंकित है। जिससे यह साबित है कि इसी बिल से यह डिश वॉश खरीदा है और रिलायंस ने परिवादी से 5 रुपये की राशि अधिक वसूल की है। जो अनुचित व्यापार प्रथा है। मंच ने पांच रुपए लौटाने के साथ छह हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया।
जयपुर / डिशवॉश टब के 5 रुपये ज्यादा लिए, रिलायंस पर 6 हजार हर्जाना
गोइन्का राजस्थानी साहित्य पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न
जयपुर : चूरू जिले के सम्मानित विधायक श्री राजेन्द्रसिंह जी राठौड़ की अध्यक्षता में “मातुश्री कमला गोइन्का राजस्थानी साहित्य पुरस्कार” वितरण समारोह जयपुर (राजस्थान) में भारतीय विद्या भवन के “महाराणा प्रताप सभागृह” में संपन्न हुआ। इस अवसर पर फाउण्डेशन के प्रबंध न्यासी श्री श्यामसुन्दर गोइन्का द्वारा कोटा राजस्थान के सुप्रसिद्ध साहित्यकार अंबिका दत्त को पुरस्कार स्वरूप एक लाख ग्यारह हजार एक सौ ग्यारह रुपये के साथ राजेन्द्रसिंह जी के हाथों शॉल, श्रीफल व स्मृतिचिन्ह भेंट कर पुरस्कृत किया गया। जयपुर की स्वनामधन्य साहित्यकार सावित्री चौधरी जी को भी “रानी लक्ष्मीकुमारी चूण्डावत महिला साहित्यकार पुरस्कार” के तहत पुरस्कार स्वरूप इकतीस हजार रुपये के संग समारोह अध्यक्ष के हाथों शॉल, श्रीफल व स्मृतिचिन्ह भेंट कर पुरस्कृत किया गया।
समारोह आयोजक श्री गोइन्का जी ने पुरस्कार व फाउण्डेशन के कार्यकलापों के बारे में जानकारी दी तथा आये हुए अतिथियों व साहित्यकारों का स्वागत किया। सम्मानित साहित्यकारों ने अपने सम्मान का आभार व्यक्त करते हुए कमला गोइन्का फाउण्डेशन को धन्यवाद दिया। समारोह अध्यक्ष श्री राजेन्द्रसिंह राठौड़ जी ने सम्मानमूर्ति साहित्यकारों का अभिनन्दन किया तथा गोइन्का जी को साहित्यिक गतिविधयों के लिए बधाई देते हुए हिन्दी, राजस्थानी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल एवं मलयालम आदि साहित्य के प्रति किये जा रहे कार्यों की भरपूर सराहना की। समारोह के अंत में श्यामसुन्दर शर्मा ने समारोह की सफलता के लिए विशिष्ट अतिथियों के प्रित आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. उमेद गोठवाल ने सुचारू रूप से किया। इस अवसर पर जोधपुर से पधारे “माणक” पत्रिका के प्रबंध संपादक पदम मेहता जी, जयपुर के सुप्रसिद्ध कवि श्री केशरदेव मारवाड़ी, चूरू से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार श्री दुलाराम सहारण के संग नन्दकिशोर मोजासिया, श्री अरूण अग्रवाल तथा फाउण्डेशन की सहन्यासी व समारोह आयोजन में कर्मठ भूमिका में रहने वाली श्रीमती ललिता गोइन्का सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए आगे बढ़ने वाले को कोई नहीं रोक सकता-मकराना
अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह में जुटी देश भर की वीरांगनाएं
हावड़ा : अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह में देश विदेश से जुटे क्षत्रिय समाज के लोगों ने शिरकत की। यह शरत सदन में शनिवार की शाम को आयोजित था। यह छठवां अंतरराष्ट्रीय समारोह था। समारोह की मेजबानी वीरांगना की पश्चिम बंगाल इकाई ने प्रख्यात गायिका प्रतिभा सिंह के नेतृत्व में किया। स्वागत भाषण वीरांगना की अंतरराष्ट्रीय महासचिव भारती सिंह ने तथा संस्था का परिचय राष्ट्रीय महामंत्री डॉ.एमएस सिंह मानस ने दिया। इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकार डॉ.कुसुम खेमानी ने कहा वीरांगनाओं को आशीर्वाद की जरूरत नहीं। वे प्रकृति व ईश्वर की ओर से मनुष्य जाति को मिला सबसे बड़ा आशीर्वाद हैं। मुख्य अतिथि श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि जो नारी सम्मान की रक्षा के लिए आगे बढ़ता का है, उसके विकास को कोई रोक नहीं सकता। अखिल भारतीय क्षत्रिय समाज के महासचिव शंकर बख्श सिंह ने कहा कि क्षत्रियों ने जाति नहीं धर्म की बात शुरू से ही की है। और क्षत्रिय धर्म का एक ही अर्थ है-राष्ट्रसेवा। समारोह में उद्घाटनकर्ता अखिल भारतीय क्षत्रिय समाज के मुख्य संरक्षण जय प्रकाश सिंह, विशिष्ट अतिथि प्रहलाद सिंह खींची, विशिष्ट अतिथि राजपूत एसोसिएशन आफ नार्थ अमेरिका की प्रमुख रम्भा सिंह, विशिष्ट अतिथि फ़िल्मकार डॉ.सुदीप रंजन सरकार व अंतरराष्ट्रीय हिन्दी परिषद के राष्ट्रीय चेयरमैन हृदय नारायण मिश्रा थे। समारोह में नारी गौरव सम्मान-डॉ.कुसुम खेमानी-साहित्य, रीता झंवर-फ़िल्म निर्माण, मृणालिनी ठाकुर-सिनेमा में अभिनय-गुजरात, काकोली रायचौधुरी-समाजसेवा,भारती सिंह-व्यवसाय व समाजसेवा-जमशेदपुर, रेणु सिंह-समाजसेवा-जमशेदपुर, प्रतिभा सिंह-समाजसेवा को दिया गया। महर्षि विश्वामित्र शौर्य सम्मान-जय प्रकाश सिंह-समाजसेवा, महाराणा प्रताप शौर्य सम्मान-महिपाल सिंह मकराना-समाजसेवा, जयपुर, डॉ.एमएस सिंह मानस-समाजसेवा-जमशेदपुर, क्षत्रिय रत्न सम्मान-डॉ.सुधीर कुमार सिंह-चिकित्सा व समाजसेवा-वाराणसी, प्रहलाद सिंह खिंची-समाजसेवा-राजस्धान को प्रदान किया गया। दुर्गावती शौर्य सम्मान-रम्भा सिंह-व्यवसाय एवं समाजसेवा-अमेरिका, रानी पद्मिनी शौर्य सम्मान-सुलेखा सिंह-समाजसेवा-वाराणसी को मिला। नारी शक्ति सम्मान-निशा सिंह-समाजसेवा-पटना, राजश्री-मानवाधिकार-पटना, मनोरमा सिंह-समाजसेवा-पटना, इंदु सिंह-समाजसेवा-पटना, प्रभा सिंह-समाजसेवा-कोल्हान-झारखंड को दिया गया। समारोह में आकाश मिश्र के गायन ने लोगों का दिल जीत लिया।
समारोह को सफल बनाने में प्रतिमा सिंह, रीता सिंह, पूजा सिंह, सुमन सिंह, मीनू सिंह, पूनम सिंह, आशा सिंह, सुनीता सिंह, इंदु सिंह, किरण सिंह आदि वीरांगनाओं ने मुख्य भूमिका निभाई।
एचआईटीके के हल्ट प्राइज में युवाओं को मिले सामाजिक उद्यमी होने के गुर
कोलकाता : हेरिटेज इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कोलकाता (एचआईटीके) में हाल ही में हल्ट प्राइज का आयोजन किया गया। हल्ट प्राइज सोशल ऑन्ट्रेप्रेनियरशिप यानी सामाजिक उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बनाया गया मंच है जिसमें दुनिया भर से उद्यमी हिस्सा लेते हैं। इस आयोजन का आरम्भ बी. टेक के विद्यार्थियों द्वारा किये गये प्रेजेन्टेशन से हुआ। इस अवसर पर निर्णायक की भूमिका में अमर ग्रुप ऑफ कम्पनीज के सीईओ तथा एचआईटीके के पूर्व छात्र राहुल बसाक, स्टार्टअप विशेषज्ञ रवि रंजन, थिंक अगेन लैब के सीईओ अरिजीत हाजरा और अमर ग्रुप ऑफ कम्पनीज के सीओओ अमित दास शामिल थे। विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रकार की परियोजनाएँ प्रदर्शित कीं। इनमें इस्तेमाल किये गये कपड़ों से पेपर बैग्स बनाना, ऑर्गेनिक कचरे से जैव ईंधन यानी बायो फ्यूल बनाना, प्लास्टिक से पेविंग ब्लॉक जैसी कई परियोजनाएँ शामिल थीं। निर्णायकों ने पेविंग प्लस को विजेता चुना गया और उसे हल्ट प्राइज एचआईटीके मिला। पेविंग प्लस बेकार प्लास्टिक के इस्तेमाल से बनाया गया है जो भारी दबाव झेल सकता है और घरों के निर्माण में इस्तेमाल हो सकता है। रियल इस्टेट के क्षेत्र में इसका उपयोग होगा। यह परियोजना एचआईटीके के बी. टेक के विद्यार्थियों, रंजन कुमार गुप्ता, अनुष्का नायक और उपमन्यु चटर्जी द्वारा प्रस्तुत की गयी है। द्वितीय पुरस्कार इकोस्मार्ट को मिला जिसने बेकार कागज से पेपर बैग बनाया और तीसरा पुरस्कार ऑर्गेनिक कचरे से जैव ईंधन बनाने वाले वेस्ट चार्जर की टीम को मिला। इन दोनों टीमों में एचआईटीके के बी.टेक के विद्यार्थी शामिल थे। हेरिटेज इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सीईओ पी. के. अग्रवाल ने कहा कि संस्थान जीवन को बेहतर बनाने वाले आविष्कारों को प्रोत्साहित करता है।
यह कदम्ब का पेड़

यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।
मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे।
ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली।
किसी तरह नीची हो जाती यह कदंब की डाली।
तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके-चुपके आता।
उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर चढ़ जाता।
वहीं बैठ फिर बड़े मजे से मैं बांसुरी बजाता।
अम्मा-अम्मा कह वंशी के स्वर में तुम्हे बुलाता।
बहुत बुलाने पर भी माँ जब नहीं उतर कर आता।
माँ, तब माँ का हृदय तुम्हारा बहुत विकल हो जाता।
तुम आँचल फैला कर अम्मां वहीं पेड़ के नीचे।
ईश्वर से कुछ विनती करतीं बैठी आँखें मीचे।
तुम्हें ध्यान में लगी देख मैं धीरे-धीरे आता।
और तुम्हारे फैले आँचल के नीचे छिप जाता।
तुम घबरा कर आँख खोलतीं, पर माँ खुश हो जाती।
जब अपने मुन्ना राजा को गोदी में ही पातीं।
इसी तरह कुछ खेला करते हम-तुम धीरे-धीरे।
यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।
जामुन का पेड़

रात को बड़े जोर का अंधड़ चला। सेक्रेटेरिएट के लॉन में जामुन का एक पेड़ गिर पडा। सुबह जब माली ने देखा तो उसे मालूम हुआ कि पेड़ के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है।
माली दौड़ा दौड़ा चपरासी के पास गया, चपरासी दौड़ा दौड़ा क्लर्क के पास गया, क्लर्क दौड़ा दौड़ा सुपरिन्टेंडेंट के पास गया। सुपरिन्टेंडेंट दौड़ा दौड़ा बाहर लॉन में आया। मिनटों में ही गिरे हुए पेड़ के नीचे दबे आदमी के इर्द गिर्द मजमा इकट्ठा हो गया।
“बेचारा जामुन का पेड़ कितना फलदार था।” एक क्लर्क बोला।
“इसकी जामुन कितनी रसीली होती थी।” दूसरा क्लर्क बोला।
“मैं फलों के मौसम में झोली भरके ले जाता था। मेरे बच्चे इसकी जामुनें कितनी खुशी से खाते थे।” तीसरे क्लर्क का यह कहते हुए गला भर आया।
“मगर यह आदमी?” माली ने पेड़ के नीचे दबे आदमी की तरफ इशारा किया।
“हां, यह आदमी” सुपरिन्टेंडेंट सोच में पड़ गया।
“पता नहीं जिंदा है कि मर गया।” एक चपरासी ने पूछा।
“मर गया होगा। इतना भारी तना जिसकी पीठ पर गिरे, वह बच कैसे सकता है?” दूसरा चपरासी बोला।
“नहीं मैं जिंदा हूं।” दबे हुए आदमी ने बमुश्किल कराहते हुए कहा।
“जिंदा है?” एक क्लर्क ने हैरत से कहा।
“पेड़ को हटा कर इसे निकाल लेना चाहिए।” माली ने मशविरा दिया।
“मुश्किल मालूम होता है।” एक काहिल और मोटा चपरासी बोला। “पेड़ का तना बहुत भारी और वजनी है।”
“क्या मुश्किल है?” माली बोला। “अगर सुपरिन्टेंडेंट साहब हुकम दें तो अभी पंद्रह बीस माली, चपरासी और क्लर्क जोर लगा के पेड़ के नीचे दबे आदमी को निकाल सकते हैं।”
“माली ठीक कहता है।” बहुत से क्लर्क एक साथ बोल पड़े। “लगाओ जोर हम तैयार हैं।”
एकदम बहुत से लोग पेड़ को काटने पर तैयार हो गए।
“ठहरो”, सुपरिन्टेंडेंट बोला- “मैं अंडर-सेक्रेटरी से मशविरा कर लूं।”
सुपरिन्टेंडेंट अंडर सेक्रेटरी के पास गया। अंडर सेक्रेटरी डिप्टी सेक्रेटरी के पास गया। डिप्टी सेक्रेटरी जाइंट सेक्रेटरी के पास गया। जाइंट सेक्रेटरी चीफ सेक्रेटरी के पास गया। चीफ सेक्रेटरी ने जाइंट सेक्रेटरी से कुछ कहा। जाइंट सेक्रेटरी ने डिप्टी सेक्रेटरी से कहा। डिप्टी सेक्रेटरी ने अंडर सेक्रेटरी से कहा। फाइल चलती रही। इसी में आधा दिन गुजर गया।
दोपहर को खाने पर, दबे हुए आदमी के इर्द गिर्द बहुत भीड़ हो गई थी। लोग तरह-तरह की बातें कर रहे थे। कुछ मनचले क्लर्कों ने मामले को अपने हाथ में लेना चाहा। वह हुकूमत के फैसले का इंतजार किए बगैर पेड़ को खुद से हटाने की तैयारी कर रहे थे कि इतने में, सुपरिन्टेंडेंट फाइल लिए भागा भागा आया, बोला- हम लोग खुद से इस पेड़ को यहां से नहीं हटा सकते। हम लोग वाणिज्य विभाग के कर्मचारी हैं और यह पेड़ का मामला है, पेड़ कृषि विभाग के तहत आता है। इसलिए मैं इस फाइल को अर्जेंट मार्क करके कृषि विभाग को भेज रहा हूं। वहां से जवाब आते ही इसको हटवा दिया जाएगा।
दूसरे दिन कृषि विभाग से जवाब आया कि पेड़ हटाने की जिम्मेदारी तो वाणिज्य विभाग की ही बनती है।
यह जवाब पढ़कर वाणिज्य विभाग को गुस्सा आ गया। उन्होंने फौरन लिखा कि पेड़ों को हटवाने या न हटवाने की जिम्मेदारी कृषि विभाग की ही है। वाणिज्य विभाग का इस मामले से कोई ताल्लुक नहीं है।
दूसरे दिन भी फाइल चलती रही। शाम को जवाब आ गया। “हम इस मामले को हार्टिकल्चर विभाग के सुपुर्द कर रहे हैं, क्योंकि यह एक फलदार पेड़ का मामला है और कृषि विभाग सिर्फ अनाज और खेती-बाड़ी के मामलों में फैसला करने का हक रखता है। जामुन का पेड़ एक फलदार पेड़ है, इसलिए पेड़ हार्टिकल्चर विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है।
रात को माली ने दबे हुए आदमी को दाल-भात खिलाया। हालांकि लॉन के चारों तरफ पुलिस का पहरा था, कि कहीं लोग कानून को अपने हाथ में लेकर पेड़ को खुद से हटवाने की कोशिश न करें। मगर एक पुलिस कांस्टेबल को रहम आ गया और उसने माली को दबे हुए आदमी को खाना खिलाने की इजाजत दे दी।
माली ने दबे हुए आदमी से कहा- “तुम्हारी फाइल चल रही है। उम्मीद है कि कल तक फैसला हो जाएगा।”
दबा हुआ आदमी कुछ न बोला।
माली ने पेड़ के तने को गौर से देखकर कहा, अच्छा है तना तुम्हारे कूल्हे पर गिरा। अगर कमर पर गिरता तो रीढ़ की हड्डी टूट जाती।
दबा हुआ आदमी फिर भी कुछ न बोला।
माली ने फिर कहा “तुम्हारा यहां कोई वारिस हो तो मुझे उसका अता-पता बताओ। मैं उसे खबर देने की कोशिश करूंगा।”
“मैं लावारिस हूं।” दबे हुए आदमी ने बड़ी मुश्किल से कहा।
माली अफसोस जाहिर करता हुआ वहां से हट गया।
तीसरे दिन हार्टिकल्चर विभाग से जवाब आ गया। बड़ा कड़ा जवाब लिखा गया था। काफी आलोचना के साथ। उससे हार्टिकल्चर विभाग का सेक्रेटरी साहित्यिक मिजाज का आदमी मालूम होता था। उसने लिखा था- “हैरत है, इस समय जब ‘पेड़ उगाओ’ स्कीम बड़े पैमाने पर चल रही है, हमारे मुल्क में ऐसे सरकारी अफसर मौजूद हैं, जो पेड़ काटने की सलाह दे रहे हैं, वह भी एक फलदार पेड़ को! और वह भी जामुन के पेड़ को !! जिसके फल जनता बड़े चाव से खाती है। हमारा विभाग किसी भी हालत में इस फलदार पेड़ को काटने की इजाजत नहीं दे सकता।”
“अब क्या किया जाए?” एक मनचले ने कहा- “अगर पेड़ नहीं काटा जा सकता तो इस आदमी को काटकर निकाल लिया जाए! यह देखिए, उस आदमी ने इशारे से बताया। अगर इस आदमी को बीच में से यानी धड़ की जगह से काटा जाए, तो आधा आदमी इधर से निकल आएगा और आधा आदमी उधर से बाहर आ जाएगा और पेड़ भी वहीं का वहीं रहेगा।”
“मगर इस तरह से तो मैं मर जाऊंगा !” दबे हुए आदमी ने एतराज किया।
“यह भी ठीक कहता है।” एक क्लर्क बोला।
आदमी को काटने का नायाब तरीका पेश करने वाले ने एक पुख्ता दलील पेश की- “आप जानते नहीं हैं। आजकल प्लास्टिक सर्जरी के जरिए धड़ की जगह से, इस आदमी को फिर से जोड़ा जा सकता है।”
अब फाइल को मेडिकल डिपार्टमेंट में भेज दिया गया।
मेडिकल डिपार्टमेंट ने फौरन इस पर एक्शन लिया और जिस दिन फाइल मिली उसने उसी दिन विभाग के सबसे काबिल प्लास्टिक सर्जन को जांच के लिए मौके पर भेज दिया गया। सर्जन ने दबे हुए आदमी को अच्छी तरह टटोल कर, उसकी सेहत देखकर, खून का दबाव, सांस की गति, दिल और फेफड़ों की जांच करके रिपोर्ट भेज दी कि, “इस आदमी का प्लास्टिक ऑपरेशन तो हो सकता है, और ऑपरेशन कामयाब भी हो जाएगा, मगर आदमी मर जाएगा।
लिहाजा यह सुझाव भी रद्द कर दिया गया।
रात को माली ने दबे हुए आदमी के मुंह में खिचड़ी डालते हुए उसे बताया “अब मामला ऊपर चला गया है। सुना है कि सेक्रेटेरियट के सारे सेक्रेटरियों की मीटिंग होगी। उसमें तुम्हारा केस रखा जाएगा। उम्मीद है सब काम ठीक हो जाएगा।”
दबा हुआ आदमी एक आह भर कर आहिस्ते से बोला- “हमने माना कि तगाफुल न करोगे लेकिन खाक हो जाएंगे हम, तुमको खबर होने तक।”
माली ने अचंभे से मुंह में उंगली दबाई। हैरत से बोला- “क्या तुम शायर हो।”
दबे हुए आदमी ने आहिस्ते से सर हिला दिया।
दूसरे दिन माली ने चपरासी को बताया, चपरासी ने क्लर्क को और क्लर्क ने हेड-क्लर्क को। थोड़ी ही देर में सेक्रेटेरिएट में यह बात फैल गई कि दबा हुआ आदमी शायर है। बस फिर क्या था। लोग बड़ी संख्या में शायर को देखने के लिए आने लगे। इसकी खबर शहर में फैल गई। और शाम तक मुहल्ले मुहल्ले से शायर जमा होना शुरू हो गए। सेक्रेटेरिएट का लॉन भांति भांति के शायरों से भर गया। सेक्रेटेरिएट के कई क्लर्क और अंडर-सेक्रेटरी तक, जिन्हें अदब और शायर से लगाव था, रुक गए। कुछ शायर दबे हुए आदमी को अपनी गजलें सुनाने लगे, कई क्लर्क अपनी गजलों पर उससे सलाह मशविरा मांगने लगे।
जब यह पता चला कि दबा हुआ आदमी शायर है, तो सेक्रेटेरिएट की सब-कमेटी ने फैसला किया कि चूंकि दबा हुआ आदमी एक शायर है लिहाजा इस फाइल का ताल्लुक न तो कृषि विभाग से है और न ही हार्टिकल्चर विभाग से बल्कि सिर्फ संस्कृति विभाग से है। अब संस्कृति विभाग से गुजारिश की गई कि वह जल्द से जल्द इस मामले में फैसला करे और इस बदनसीब शायर को इस पेड़ के नीचे से रिहाई दिलवाई जाए।
फाइल संस्कृति विभाग के अलग अलग सेक्शन से होती हुई साहित्य अकादमी के सचिव के पास पहुंची। बेचारा सचिव उसी वक्त अपनी गाड़ी में सवार होकर सेक्रेटेरिएट पहुंचा और दबे हुए आदमी से इंटरव्यू लेने लगा।
“तुम शायर हो उसने पूछा।”
“जी हां” दबे हुए आदमी ने जवाब दिया।
“क्या तखल्लुस रखते हो”
“अवस”
“अवस”! सचिव जोर से चीखा। क्या तुम वही हो जिसका मजमुआ-ए-कलाम-ए-अक्स के फूल हाल ही में प्रकाशित हुआ है।
दबे हुए शायर ने इस बात पर सिर हिलाया।
“क्या तुम हमारी अकादमी के मेंबर हो?” सचिव ने पूछा।
“नहीं”
“हैरत है!” सचिव जोर से चीखा। इतना बड़ा शायर! अवस के फूल का लेखक!! और हमारी अकादमी का मेंबर नहीं है! उफ उफ कैसी गलती हो गई हमसे! कितना बड़ा शायर और कैसे गुमनामी के अंधेरे में दबा पड़ा है!
“गुमनामी के अंधेरे में नहीं बल्कि एक पेड़ के नीचे दबा हुआ… भगवान के लिए मुझे इस पेड़ के नीचे से निकालिए।”
“अभी बंदोबस्त करता हूं।” सचिव फौरन बोला और फौरन जाकर उसने अपने विभाग में रिपोर्ट पेश की।
दूसरे दिन सचिव भागा भागा शायर के पास आया और बोला “मुबारक हो, मिठाई खिलाओ, हमारी सरकारी अकादमी ने तुम्हें अपनी साहित्य समिति का सदस्य चुन लिया है। ये लो आर्डर की कॉपी।”
“मगर मुझे इस पेड़ के नीचे से तो निकालो।” दबे हुए आदमी ने कराह कर कहा। उसकी सांस बड़ी मुश्किल से चल रही थी और उसकी आंखों से मालूम होता था कि वह बहुत कष्ट में है।
“यह हम नहीं कर सकते” सचिव ने कहा। “जो हम कर सकते थे वह हमने कर दिया है। बल्कि हम तो यहां तक कर सकते हैं कि अगर तुम मर जाओ तो तुम्हारी बीवी को पेंशन दिला सकते हैं। अगर तुम आवेदन दो तो हम यह भी कर सकते हैं।”
“मैं अभी जिंदा हूं।” शायर रुक रुक कर बोला। “मुझे जिंदा रखो।”
“मुसीबत यह है” सरकारी अकादमी का सचिव हाथ मलते हुए बोला, “हमारा विभाग सिर्फ संस्कृति से ताल्लुक रखता है। आपके लिए हमने वन विभाग को लिख दिया है। अर्जेंट लिखा है।”
शाम को माली ने आकर दबे हुए आदमी को बताया कि कल वन विभाग के आदमी आकर इस पेड़ को काट देंगे और तुम्हारी जान बच जाएगी।
माली बहुत खुश था। हालांकि दबे हुए आदमी की सेहत जवाब दे रही थी। मगर वह किसी न किसी तरह अपनी जिंदगी के लिए लड़े जा रहा था। कल तक… सुबह तक… किसी न किसी तरह उसे जिंदा रहना है।
दूसरे दिन जब वन विभाग के आदमी आरी, कुल्हाड़ी लेकर पहुंचे तो उन्हें पेड़ काटने से रोक दिया गया। मालूम हुआ कि विदेश मंत्रालय से हुक्म आया है कि इस पेड़ को न काटा जाए। वजह यह थी कि इस पेड़ को दस साल पहले पिटोनिया के प्रधानमंत्री ने सेक्रेटेरिएट के लॉन में लगाया था। अब यह पेड़ अगर काटा गया तो इस बात का पूरा अंदेशा था कि पिटोनिया सरकार से हमारे संबंध हमेशा के लिए बिगड़ जाएंगे।
“मगर एक आदमी की जान का सवाल है” एक क्लर्क गुस्से से चिल्लाया।
“दूसरी तरफ दो हुकूमतों के ताल्लुकात का सवाल है” दूसरे क्लर्क ने पहले क्लर्क को समझाया। और यह भी तो समझ लो कि पिटोनिया सरकार हमारी सरकार को कितनी मदद देती है। क्या हम इनकी दोस्ती की खातिर एक आदमी की जिंदगी को भी कुरबान नहीं कर सकते।
“शायर को मर जाना चाहिए?”
“बिलकुल”
अंडर सेक्रेटरी ने सुपरिंटेंडेंट को बताया। आज सुबह प्रधानमंत्री दौरे से वापस आ गए हैं। आज चार बजे विदेश मंत्रालय इस पेड़ की फाइल उनके सामने पेश करेगा। वो जो फैसला देंगे वही सबको मंजूर होगा।
शाम चार बजे खुद सुपरिन्टेंडेंट शायर की फाइल लेकर उसके पास आया। “सुनते हो?” आते ही खुशी से फाइल लहराते हुए चिल्लाया “प्रधानमंत्री ने पेड़ को काटने का हुक्म दे दिया है। और इस मामले की सारी अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी अपने सिर पर ले ली है। कल यह पेड़ काट दिया जाएगा और तुम इस मुसीबत से छुटकारा पा लोगे।”
“सुनते हो आज तुम्हारी फाइल मुकम्मल हो गई।” सुपरिन्टेंडेंट ने शायर के बाजू को हिलाकर कहा। मगर शायर का हाथ सर्द था। आंखों की पुतलियां बेजान थीं और चींटियों की एक लंबी कतार उसके मुंह में जा रही थी।
उसकी जिंदगी की फाइल मुकम्मल हो चुकी थी।
सुशीला बिड़ला के ‘इम्बार्क 0.1’ में छात्राओं को मिली प्रेरणा
कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल ने हाल ही में ‘इम्बार्क 0.1’ आयोजित किया। यह एक ऑन्ट्रेप्रेनियरशिप मीट थी जिसमें ग्यारहवीं और बारहवीं की छात्राओं ने भाग लिया। इस दौरान छात्राओं को टव्विर्ल की सुजाता चटर्जी, एस आर सी फार्म्स, अरुण टी स्टॉल के अरुण कुमार यादव, एकता क्रिएटिव की एकता भट्टाचार्य, ब्लू पॉपी की डोमा वैंग, मायरा की अभेरी सेन, नेसिसिटी की स्वाति गौतम ने अपने अनुभव साझा किये। हर एक सत्र 5 हिस्सों में बाँटा गया था जिनमें परिचयात्मक, प्रश्न – उत्तर राउंड, परिचर्चा, रैपिड फायर और अंतिम हिस्से में छात्राओं के लिए इन उद्यमियों के सुझाव शामिल थे। इस प्रेरक कार्यक्रम को सफल बनाने का दायित्व स्वाति गौतम और प्रिंसिपल शर्मिला बोस ने सम्भाला।
एनएसई ने पूरे किये 25 साल, वित्त मंत्री ने बजायी क्लोजिंग बेल
3 नवम्बर को खुदरा निवेशक दिवस मनायेगी एनएसई
मुम्बई : एनएसई ने अपने 25 साल पूरे कर लिये हैं। इस अवसर पर आयोजित समारोह में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहुँची जहाँ उन्होंने क्लोजिंग बेल बजायी। समारोह में सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी समेत कई हस्तियाँ पहुँचीं। वित्त मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए एनएसई को बधाई दी। एनएसई के प्रबन्ध निदेशक तथा सीईओ विक्रम लिमये ने कहा कि एनएसई ने पूँजी बाजार मे यूनिफाइड नेशनल मार्केट बनाया है। उन्होंने रजत जयन्ती वर्ष को विशेष बनाते हुए हर साल 3 नवम्बर को खुदरा निवेशक दिवस मनाने की घोषणा भी की। इस समय एनएसई 500 जिलों में 2500 कार्यक्रम संचालित कर रही है।
14 वीं वर्षगाँठ पर गो एयर की विशेष योजना
कोलकाता : गो एयर ने उड्डयन क्षेत्र में 14 साल पूरे कर लिये हैं। गत 4 नवम्बर को कम्पनी ने अपनी 14 वीं वर्षगाँठ मनायी। इस मौके पर 6 नवम्बर तक बुकिंग करवाने वालों को सभी 33 घरेलू और अन्तरर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए विशेष किराये की घोषणा की है। इसके तहत निर्धारित उड़ानों के किराये के अंतिम दो अंक 14 होंगे। 4 से 6 नवम्बर तक बुकिंग करवाने वालों को उनकी 13 नवम्बर से 31 दिसम्बर के बीच इस विशेष किराया योजना का लाभ मिलेगा। घरेलू उड़ानों के लिए यह किराया 1314 रुपये और अन्तरर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए 6714 रुपये से आरम्भ होगा। गो एयर ने अपने विमान बेड़े में नया एयरक्राफ्ट ए320 निओ भी शामिल किया है। इसके साथ ही बेड़े में विमानों की संख्या 54 हो गयी है। कोलकाता से सिंगापुर का किराया 6714 रुपये होगा जबकि घरेलू उड़ानों के लिए किराया 1314 रुपये से शुरू होगा। गो एयर के प्रबन्ध निदेशक जेह वाडिया ने कहा कि कम्पनी किफायती दरों पर उत्कृष्ट परिसेवा प्रदान करने की दिशा में लगातार अग्रसर है।
प्लास्टिक के बदले 250 बच्चों को मुफ़्त शिक्षा, किताबें और खाना दे रहा है यह स्कूल!
गया : बिहार के गया में सेवाबीघा गाँव के पद्मपनी स्कूल में हर सुबह स्कूल यूनिफार्म में अच्छे से तैयार बच्चों को आप स्कूल में अंदर आने से पहले ढेर सारा कचरा डस्टबिन में डालते हए देखेंगे।
पहली नज़र में आपको शायद लगे कि यह यहाँ का कोई अजीब रिवाज़ है। पर हक़ीकत में, इस कचरे के बदले स्कूल के 250 छात्रों को मुफ़्त में शिक्षा, किताबें, स्टेशनरी, यूनिफॉर्म और यहाँ तक कि खाना भी दिया जाता है। इस अनोखी पहल को शुरू किया है स्कूल के फाउंडर मनोरंजन प्रसाद समदरसी ने।
मनोरंजन ने बताया, “यहाँ इन इलाकों में पर्यावरण के प्रति सजगता बहुत ही कम है। ये बच्चे बहुत ही गरीब घरों से आते हैं और ज़्यादातर अपने परिवार की वो पहली पीढ़ी हैं जो कि पढ़ाई कर रही है। इसलिए हमने इस पहल को शुरू किया ताकि बच्चों को कम उम्र से ही साफ़-सफाई और पर्यावरण-अनुकूल जैसे कॉन्सेप्ट समझा सकें।”
एक समय था जब आस-पास के गाँवों को स्कूल से जोड़ने वाली कच्ची सड़क पर आपको सिर्फ़ कचरा दिखाई पड़ता था। इसकी वजह से हानिकारक कीड़े और जीव-जन्तु इस इलाके में पनपने लगे थे और वे अक्सर पास के खेतों में जाकर फसल आदि को ख़राब कर देते थे। बारिश के मौसम में यह इन्फेक्शन फैलाने वाले मक्खी-मच्छरों का घर हो जाता था। ग्राम पंचायत और गाँव के लोगों ने इस स्थिति को सुधारने के लिए कुछ नहीं किया। इसलिए मनोरंजन ने तय किया कि वे अपने छात्रों को बदलाव के सारथी बनाएंगे। इसी के तहत पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को सड़क को साफ़ रखने की ज़िम्मेदारी दी गयी।
“शुरू में, कचरा उठाने के विचार से ही बच्चों में काफ़ी प्रतिरोध था। फिर मैंने शांति से उन्हें समझाया कि अपने आस-पास के इलाके को साफ़ रखना कितना ज़रूरी है। फिर धीरे-धीरे वे इस गतिविधि में भाग लेने के लिए उत्साहित हो गए,” उन्होंने बताया।
तब से ही, हर दिन सभी छात्र रास्ते में पड़ी प्लास्टिक की बोतल, रैपर और ज़्यादातर सूखे कूड़े को इकट्ठा करके स्कूल के बाहर रखे डस्टबिन में डाल देते हैं। बाद में इस कचरे को अलग-अलग करके रीसाइक्लिंग यूनिट को दे दिया जाता है। साथ ही, स्कूल के छात्र भी अपने स्तर पर छोटा-मोटा रीसायकल प्रोजेक्ट करते हैं जैसे कि प्लास्टिक की बोतलों में पौधे लगाना आदि।
पौधारोपण अभियान
उनके प्रयासों की वजह से अब रास्ता ज़्यादा चौड़ा और एकदम साफ़ दिखने लगा है। यह देखकर बच्चों का आत्म-विश्वास भी बढ़ा है। कचरा इकट्ठा करने के अलावा इस स्कूल के छात्रों ने उसी रास्ते के दोनों तरफ 2, 000 पौधे भी लगाएं हैं। वे रोज़ स्कूल आते समय इन पौधों को पानी देते हैं। उनका उद्देश्य 2021 तक स्थानीय गांवों में पांच हज़ार पौधे लगाना है।
इन गतिविधियों के अलावा, मनोरंजन ने क्षेत्र में व्यक्तिगत रूप से कई सामाजिक पहल की हैं। उन्होंने आसपास के सूखाग्रस्त गांवों में 275 हैंडपंप लगवाएं हैं। साथ ही, उनके चारों तरफ की चारदीवारी को बड़ा किया है ताकि महिलाएं स्नान कर सकें। वे उन मृतकों का अंतिम संस्कार करने में भी मदद करते हैं जिनके परिवार वाले लकड़ियों की कीमत नहीं चुका सकते हैं। बिना किसी दिखावे के, मनोरंजन एक सकारात्मक सोच को बढ़ावा दे रहे हैं। इन बच्चों की उनकी सेना उनके सभी सामाजिक-पर्यावरणीय प्रयासों की प्रेरक शक्ति है। वह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करते हैं जहां ये बच्चे बड़े होकर आदर्श नागरिक बनेंगे और अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए एक उदाहरण बनेंगे।
(साभार – द बेटर इंडिया)




