कोलकाता : रिजर्व बैंक के गर्वनर की घोषणाओं के साथ ही यह धारणा टूट गयी कि अधिकारियों ने केवल जीवन बचाने पर ध्यान दिया जीविका पर नहीं। यह घोषणा असाधारण परिस्थितियों में प्रवाह को बढ़ाने और आर्थिक स्थिरता लाने वाला है। एसोचेम और एन नरेडको के अध्यक्ष डॉ. निरंजन हीरानंदिनी से यह बात कही।
“नियामक मानदंडों के दृष्टिकोण से आर्थिक पुनरुद्धार के लिए किये गये उपायों के तहत व्यवस्था में पर्याप्त लिक्विडिटी यानी तरलता बनाए रखने, बैंक ऋण प्रवाह को सुविधाजनक बनाने और वित्तीय तनाव कम करने का प्रयास किया गया है। डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि ये पूरी तरह से स्वागत योग्य है, यह देखते हुए कि आर्थिक गतिविधियां बंद होने की स्थिति में हैं।
रियल इस्टेट के लिए की गयी घोषणा के अनुसार एन बी एफ सी द्वारा रियल इस्टेट कम्पनियों कों समान लाभ मिलेंगे औऱ शेड्यूल्ड कर्मशियल बैंक सकारात्मक थे। आरबीआई ने पहले परिसंपत्ति वर्गीकरण में गिरावट के बिना एक साल के लिए विस्तार की अनुमति दी थी। यह राहत अब एनबीएफसी के लिए भी मिली है। एनबीएफसी द्वारा वाणिज्यिक अचल संपत्ति के लिए ऋणों को समान राहत मिलेगी। यह कदम एनबीएफसी और रियल एस्टेट को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा, ” उन्होंने रिवर्स रेपो रेट को 4 प्रतिशत से घटाकर 3.75 प्रतिशत करने का भी स्वागत किया।
आरबीआई द्वारा दी गयी राहत आर्थिक स्थिरता लायेगी : एसोचेम
जीएचसीएल लिमिटेड लगातार चौथी बार बना सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थल
कोलकाता : जी एच सी एल ने लगातार चौथी बार भारत के सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थलों की सूची में जगह बना ली है। ग्रेट प्लेस टू वर्क इन्स्टीट्यूट द्वारा किये गये एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है। कम्पनी के अनुसार यह मान्यता जी एच सी एल द्वारा विश्वास भरा वातावरण बनाने, आदर, निष्पक्ष मुआवजे, प्रशिक्षण और विविधता की स्वीकृति है। संस्थान के रूप में जी एच सी एल ने अपनी स्थिति मजबूत की है और अपने कर्मचारियों को उनकी प्राथमिकताओं पर ध्यान केन्द्रित करने को कहता है जिससे वे किसी भी खलल के बगैर रणनीतिक और नवीन सोच की दिशा में आगे बढ़ सकें। जीएच सीएल के प्रबन्ध निदेशक आर एस, जालान ने कम्पनी को एक परिवार बताते हुए कहा कि कम्पनी काम और जिन्दगी के बीच सन्तुलन पर जोर देती है जिससे कर्मचारी का व्यक्तिगत विकास हो सके और इस उपलब्धि पर हमें गर्व है। ग्रेट प्लेस टू वर्क इन्स्टीट्यूट ने यह अध्ययन कर्मचारियों से बातचीत, कार्य प्रणाली और संस्थान द्वारा प्रदत्त कई अन्य तथ्यों के आधार पर किया है।
कोरोना आपदा से प्रभावित लोगों के लिए बीएफएस की हेल्प लाइन
कोलकाता : कोरोना आपदा से प्रभावित लोगों की मदद कर रहे गैर सरकारी संगठन बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी बेरोजगारों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को काफी मदद पहुँचायी है। अब तक टीम ने 1200 से अधिक लोगों को भोजन, किराने का सामान, दवाएँ और अन्य जरूरी चीजें उनके दरवाजे तक दी हैं। बीएफएस फूड पैकेट्स भी वितरित कर रहा है जिसमें चावल, आटा, दाल, तेल, चीनी, चाय, नमक और बेबी फूड शामिल हैं । ये पैकेट कचरा चुनने वालों, बस्तियों के निवासियों, दिहाड़ी मजदूरों को वितरित किये जा रहे हैं। बीएफएस की सह संस्थापक शगुफ्ता हनाफी से प्राप्त जानकारी के मुताबिक संगठन ने अनाथालयों तथा वृद्धाश्रमों के 300 जरूरतमंद लोगों हैंड वॉश, हैंड सैनेटाइजर और बैक्टेरिया निरोधी साबुन भी दिये। संस्था कोलकाता में कुछ रसोईयों को भी सहयोग दे रही है और रोज 4 हजार लोगों ताजा खाना खिला चुकी है। बीएफएस ने अब तक दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, हरियाणा, हिमाचल, पुणे, मुम्बई, झारखंड, बिहार और पूरे पश्चिम बंगाल में सहायता पहुँचा चुकी है। बीएफएस सेवामूलक कार्य से जुड़ा रहा है जो कई स्तरों पर वॉलेन्टियरों, संगठनों, शेल्टर और होम्स के साथ काम करता रहा है जिसका मुख्य क्षेत्र जरूरतमंदों तक शिक्षा और स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधायें पहुँचाना है। पी आर की प्रमुख शगुफ्ता हनाफी को इस क्षेत्र में 17 साल का अनुभव है और उनको एक केन्द्रित टीम से सहायता मिलती है।
बीएफएस की हेल्प लाइन 9831362042 है और ई मेल [email protected] है।
प्रधानमंत्री मोदी ने तीन मई तक लॉकडाउन बढ़ाने का किया ऐलान
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे लोग जो रोज की कमाई से अपनी जरूरतें पूरी करते हैं, ऐसे लोगों और किसानों के जीवन में आई मुश्किलों को कम करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर सिर्फ आर्थिक दृष्टि से देखें तो अभी ये मंहगा जरूर लगता है लेकिन भारतवासियों की जिंदगी के आगे, इसकी कोई तुलना नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि भारत कई विकसित देशों की तुलना में महामारी के फैलाव को रोकने में सफल रहा है । भारत ने समग्र एवं समन्वित उपाय एवं पहल नहीं की होतीं… तेजी से फैसले नहीं लिये होते, तो आज भारत की स्थिति कुछ और होती । लेकिन बीते दिनों के अनुभवों से ये साफ है कि हमने जो रास्ता चुना है, वो सही है ।
मोदी ने कहा कि राज्यों एवं विशेषज्ञों से चर्चा और वैश्विक स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारत में लॉकडाउन को अब 3 मई तक और बढ़ाने का फैसला किया गया है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लागू 21 दिन के लॉकडाउन का वर्तमान चरण आज (14अप्रैल) समाप्त हो रहा है ।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के अब तक 10,363 मामले सामने आए हैं और इसके कारण अब तक 339 लोगों की मौत हो चुकी है । कम से कम आठ राज्यों तमिलनाडु, पंजाब, ओडिशा, महाराष्ट्र, अरूणाचल प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक ने पहले ही लॉकडाउन को 30 अप्रैल तक बढ़ा दिया है ।
केंद्र सरकार के सूत्रों ने संकेत दिया कि लॉकडाउन को 3 मई तक इसलिये बढ़ाया गया क्योंकि 1 मई को सार्वजनिक अवकाश है और 2 एवं 3 मई को सप्ताहांत है ।कुछ वर्गो की ओर से आर्थिक गतिविधियों की अनुमति दिये जाने की मांग के बीच मोदी ने कहा कि लॉकडाउन का कठोरता से पालन किया जायेगा और कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति देने से पहले उस क्षेत्र का मूल्यांकन किया जायेगा ।
उन्होंने कहा, ‘‘ अगले एक सप्ताह में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कठोरता और ज्यादा बढ़ाई जाएगी। 20 अप्रैल तक हर कस्बे, हर थाने, हर जिले, हर राज्य को परखा जाएगा कि वहां लॉकडाउन का कितना पालन हो रहा है, उस क्षेत्र ने कोरोना से खुद को कितना बचाया है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि जो क्षेत्र इस अग्नि परीक्षा में सफल होंगे, जो हॉटस्पाट : अधिक खराब हालात वाले क्षेत्र : में नहीं होंगे, और जिनके हॉटस्पाट में बदलने की आशंका भी कम होगी, वहां पर 20 अप्रैल से कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है ।
उन्होंने कहा कि अगर लॉकडाउन की नियमों को तोड़ा गया और कोरोना वायरस के फैलने का खतरा हुआ तब तत्काल ही छूट वापस ले ली जायेगी । उन्होंने कहा कि भारत कई विकसित देशों की तुलना में महामारी के फैलाव को रोकने में बेहतर स्थिति में है ।
बहरहाल, भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने लोगों से सरकार के निर्णय का पालन करने की अपील की, वहीं कांग्रेस ने मोदी के संबोधन की आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने लोगों को बताया कि वह उनसे क्या उम्मीद करते हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि सरकार लोगों के लिए क्या कर रही है और इसमें वित्तीय पैकेज या अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये ठोस कदम का उल्लेख नहीं है ।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सवाल किया कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई का देश का खाका कहां है । जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट किया कि गरीबों को लॉकडाउन की अवधि में अकेला छोड़ दिया गया है ।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘गरीबों को 40 दिनों (21+19) के लिए अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। पैसा है, खाद्य सामग्री है, लेकिन सरकार इन्हें जारी नहीं कर रही।’ प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा के बाद नागर विमानन मंत्रालय ने भी ऐलान किया कि 3 मई तक अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्री उड़ानें स्थगित रहेंगी । पहले यह 25 मार्च से 14 अप्रैल तक स्थगित थी ।
भारतीय रेलवे ने भी 3 मई तक यात्री सेवा निलंबित रखने की घोषणा की जबकि माल एवं पार्सल सेवा जारी रहेंगी ताकि देश के विभिन्न हिस्सों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके । रेलवे ने यह भी कहा कि रेलवे स्टेशनों और रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर सभी रेल काउंटरों पर रेल यात्रा टिकट की बुकिंग 3 मई तक बंद रहेगी ।
उल्लेखनीय है कि टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री अपने चेहरे पर ‘गमछा’ लपेट कर आए थे और संबोधन शुरू करने पर उन्होंने इसे हटा लिया । उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर इस संबंध में एक चित्र भी जारी किया ।
मोदी ने कहा, ‘‘ 3 मई तक हम सभी को, हर देशवासी को लॉकडाउन में ही रहना होगा। इस दौरान हमें अनुशासन का उसी तरह पालन करना है, जैसे हम करते आ रहे हैं ।
उन्होंने कहा कि हमें अधिक संवेदनशील स्थानों : हॉटस्पॉट: को लेकर बहुत ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी। जिन स्थानों के हॉटस्पॉट में बदलने की आशंका है, उन पर भी हमें कड़ी नजर रखनी होगी। नए हॉटस्पॉट का बनना, हमारे लिए और चुनौती खड़ी करेगा।
उन्होंने लॉकडाउन के दौरान लोगों के संकल्प, बलिदान की भी सराहना की ।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई, बहुत मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है । लोगों की तपस्या, त्याग की वजह से भारत अब तक, कोरोना से होने वाले नुकसान को काफी हद तक टालने में सफल रहा है ।
उन्होंने कहा, ‘‘ लॉकडाउन के इस समय में देश के लोग जिस तरह नियमों का पालन कर रहे हैं, जितने संयम से अपने घरों में रहकर त्योहार मना रहे हैं, वो बहुत प्रशंसनीय है ।’’ आज पूरे विश्व में कोरोना वैश्विक महामारी की जो स्थिति है, उसे देखते हुए अन्य देशों के मुकाबले, भारत ने कैसे अपने यहां संक्रमण को रोकने के प्रयास किए, उसके सभी साक्षी रहे हैं ।
मोदी ने कहा कि जब हमारे यहां कोरोना के सिर्फ 550 केस थे, तभी भारत ने 21 दिन के संपूर्ण लॉकडाउन का एक बड़ा कदम उठा लिया था। भारत ने समस्या बढ़ने का इंतजार नहीं किया, बल्कि जैसे ही समस्या दिखी, उसे तेजी से फैसले लेकर उसी समय रोकने का प्रयास किया ।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्थिति से स्पष्ट होता है कि प्रति 10 हजार मरीजों के लिये 1500 से 1600 बेड की जरूरत होती है और हमने एक लाख से अधिक बिस्तरों की व्यवस्था की है और कोरोना वायरस के उपचार के लिये 600 समर्पित अस्पताल तैयार किये हैं ।
लोगों खासतौर पर गरीबों को पेश आने वाली परेशानियों को स्वीकार करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें भोजन, एक स्थान से दूसरे स्थान पर आने जाने, परिवार के लोगों से दूर रहने सहित उनकी परेशानियों का आभास है लेकिन एक अनुशासित सिपाही की तरह उन्हें अपने कर्तव्य का पालन करना है ।
बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हम भारत के लोगों की तरफ से अपनी सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन संकल्प के साथ करें, यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है ।
मोदी ने लोगों से 7 विषयों पर सहयोग भी मांगा जिसमें बुजुर्गो का ध्यान रखने, गरीबों के प्रति संवेदनशील नजरिया अपनाना, सामाजिक दूर बनाना आदि शामिल है।
पिछले महीने सरकार ने 1.7 लाख करोड़ रूपये के पैकेज की घोषणा की थी जिसका मकसद लॉकडाउन से प्रभावित तबके को राहत देना और वायरस प्रभावित लोगों की देखरेख करने वालों सहित स्वास्थ्य कर्मियों को बीमा कवर प्रदान करना है।
कोरोना से लड़ने में काम आ रही है 100 साल पुरानी उपेक्षित दवा
नयी दिल्ली: एक बात तो सभी वैज्ञानिक जानते हैं कि कोरोना वायरस की कोई भी नयी दवा साल भर से पहले आना मुमकिन नहीं. लेकिन इस बीच एक उम्मीद की किरण नजर आई है। वैज्ञानिक अब 100 साल पहले तैयार किए गए टीके में जिंदगी देख रहे हैं। ताजा शोध में सामने आया है कि कोरोना वायरस से लड़ने में टीबी की सबसे पुरानी दवा कारगर साबित हो रही है।
बीसीजी की दवा में दिख रही उम्मीद
पिछले चार महीनों से कोरोना वायरस के विभिन्न इलाजों के शोध में वैज्ञानिकों ने पाया है कि बीसीजी (BCG) का टीका काफी प्रभावशाली है। ऐसे देश जहां अभी भी टीबी रोग से बचाव के लिए बीसीजी का टीका लगाया जाता है, वहाँ कोरोना वायरस का संक्रमण अन्य देशों के मुकाबले कम फैला है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों पर इस टीके से फायदा कम नजर आ रहा है. लेकिन एक अच्छी बात ये है कि जिनकों टीबी के बचाव के लिए बीसीजी के टीके लगे हैं उनमें कोरोना वायरस अटैक करने में कामयाब नहीं हो पा रहा है।
भारत भी कर रहा इसकी जांच
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PHFI) के प्रमुख डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी ने ज़ी न्यूज डिजिटल से बातचीत में कहा कि बीसीजी का टीका देश में हर बच्चे को लगाया जाता है. इससे टीबी को दूर भगाने में मदद मिलती है. हाल ही में कोरोना वायरस पर बीसीजी टीके के असर पर भारतीय वैज्ञानिक भी नजर बनाए हुए हैं. कोरोना संक्रमण के बचाव में इस टीके पर सटीक शोध के बाद ही कुछ ठोस कहना मुमकिन होगा। उल्लेखनीय है कि भारत में राष्ट्रीय टीकाकरण के तहत सभी बच्चों को अनिवार्य रूप से बीसीजी के टीके लगाए जाते हैं। बच्चों को टीबी से बचाने के लिए ही ये टीके टीकाकरण में शामिल हैं। अमेरिका, इटली, इंग्लैंड और फ्रांस समते पूरे यूरोप में कोरोना वायरस का संक्रमण बहुत अधिक है. इन देशों ने कई दशक पहले ही बीसीजी के टीके लगाना बंद कर दिया था. अब यही टीका वैज्ञानिकों के शोध का केंद्र बना हुआ है।
लॉकडाउन के बाद ऑटो इंडस्ट्री को सस्ते उत्पाद और मेक इन इंडिया पर देना होगा जोर
मुम्बई : देश की ऑटो इंडस्ट्री को कोविड-19 के बाद कारोबार में स्थिरता के लिए सस्ते प्रोडक्ट, लोकलाइजेशन और ऑटोमेशन पर जोर देना होगा। नॉमुरा रिसर्च इंस्टीट्यूट कंसल्टिंग एंड सॉल्यूशंस इंडिया की मंगलवार को जारी रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद ऑटो इंडस्ट्री को मजदूरों के प्लांट में ही रुकने, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा बढ़ाने के साथ ही डिजिटाइजेशन में निवेश करने जैसे कदम उठाने की जरूरत होगी।
आने वाले दिनों कोविड-19 का आर्थिक असर बढ़ेगा
रिपोर्ट में ऑटो इंडस्ट्री के लिए राहत पैकेज की सिफारिश भी की गई है क्योंकि, इस सेक्टर का इंडस्ट्रियल जीडीपी में 50% योगदान होता है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली इंडस्ट्री भी यही है। कोविड-19 से पहले भी करीब डेढ़ साल से ऑटो इंडस्ट्री में स्लोडाउन चल रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर कोविड-19 का असर साफ दिख रहा है, आने वाले महीनों में इसका असर और बढ़ेगा।
भारतीय ऑटो पार्ट्स मेकर के पास चीन का विकल्प बनने का मौका
नॉमुरा की रिसर्च के मुताबिक मौजूदा संकट देश के ऑटो पार्ट्स मेकर के लिए एक मौका भी है। वे ग्लोबल वैल्यू चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर चीन का विकल्प बन सकते हैं। इसके लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है। रिपोर्ट में यह सलाह भी दी गई है कि दुनियाभर में आर्थिक संकट को देखते हुए देश की मजबूत कंपनियां दूसरे देशों की फर्मों और तकनीक को खरीद सकती हैं। इससे दूसरे देशों का विकल्प बनने के लिए उनकी स्थिति मजबूत होगी और मेक इन इंडिया को भी बढ़ावा मिलेगा।
मार्च में यात्री वाहनों की बिक्री 51% घटी
कोविड-19 के असर और लॉकडाउन की वजह से मार्च में यात्री वाहनों की घरेलू बिक्री में 51% कमी आई। पिछले महीने 1 लाख 43 हजार 14 वाहन बिके। पिछले साल मार्च में यह आंकड़ा 2 लाख 91 हजार 861 यूनिट था। कमर्शियल वाहनों की बिक्री 88.95% घटकर 13 हजार 27 यूनिट रह गई, मार्च 2019 में 1 लाख 9 हजार 22 वाहन बिके थे। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबिल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम) ने सोमवार को मार्च के आंकड़े जारी किए थे।
लॉकडाउन के अनचाहे तनाव से बच्चों को बचाने के साथ ही सक्रिय रखने में भी मददगार होंगे ये तरीके
जिस तरह हम लॉकडाउन संभालने के लिए तैयार नहीं थे। इसी तरह हमारे बच्चे भी तैयार नहीं थे, जहाँ उन्हें बंद स्कूल, बाहर खेलने न जा पाने, कोई रियल-लाइफ दोस्ती न होने का सामना करना पड़ रहा है। बतौर पैरेंट्स बच्चों को इस अनचाहे तनाव से उबरने और सामान्य जीवन जीने के लिए गाइड करना मुश्किल काम हो गया है। खासतौर पर तब, जब बच्चे मिडिल या प्राइमरी स्कूल में पढ़ते हों। यही वह उम्र है, जब हम उन्हें जिंदगी के लिए तैयार करते हैं। तो सवाल यह उठता है कि हम बतौर पैरेंट्स इस स्थिति में उनकी मदद कैसे कर सकते हैं। विशेषज्ञों ने कुछ सिंपल टिप्स दिए हैं, जिससे बच्चे एक्टिव रह सकते हैं।
डिवाइस से दूरी – हमारी ही तरह बच्चे भी तनाव महसूस कर रहे होंगे और अपने डिजिटल गैजेट्स में व्यस्त होंगे। वे पहले की तुलना में ज्यादा ऑनलाइन होंगे। अभी की स्थिति में बहुत-सी चीजें ऐसी हैं जो आम दिनों की तुलना में अनियंत्रित हैं, लेकिन फिर भी कुछ बातें अब भी नियंत्रण में रखी जा सकती हैं। हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि बच्चों की नींद अच्छी हो। इसके लिए बेडरूम्स में कोई डिवाइस या गैजेट नहीं होना चाहिए। इसके अलावा हमें बच्चों को अच्छा खाने और एक्सरसाइज करने के लिए भी प्रोत्साहित करना चाहिए।
बच्चों से बात – हमें बच्चों की भावनाओं का सम्मान कर उन्हें स्वीकार करना चाहिए। हो सकता है कि कुछ मामलों में यह सही न हो, लेकिन आमतौर पर हम माता-पिता बच्चों की भावनाएं नहीं समझते हैं। उन्हें सोशल मीडिया का इस्तेमाल न करने और लोगों से व्यक्तिगत रूप से बात करने के फायदों के बारे में बताएं।
इंडोर गेम्स – मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रहने के लिए बच्चों को ऑनलाइन गेम्स खेलने या नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम आदि पर पसंदीदा सीरीज देखने के बजाय कुछ इंडोर गेम्स खेलने के लिए प्रोस्ताहित करें। जैसे चेस, कैरम, लूडो आदि।
अच्छे शौक – बच्चों की अच्छे शौक पैदा करने में मदद करें। जैसे पढ़ना, बागबानी और कुकिंग। अच्छी किताबें और उपन्यास पढ़ने से उन्हें अच्छा ज्ञान पाने में मदद मिलेगी और वे बेहतर इंसान बन पाएंगे। हालांकि बाकी शौक भी पढ़ने जितने ही जरूरी हैं। यह उनकी रुचि पर निर्भर करता है। शौक जो भी हो, पैरेंट को उसे विकसित करने में मदद करनी चाहिए।
अनुशासित दिनचर्या – हमें बच्चों की अनुशासित और लक्ष्य आधारित जीवन अपनाने में मदद करनी चाहिए। बच्चों को अच्छी सेहत, ज्ञान और सामाजिक जिम्मेदारियों के महत्व के बारे में पता होना चाहिए। और यह सब तभी हासिल किया जा सकता है, जब वे अनुशासन में हों और उनका ध्यान केंद्रित हो।
मनोवैज्ञानिक तैयारी – कोविड-19 बीमारी की वजह से हुए इस लॉकडाउन के बाद कई बच्चे जो 15 साल से कम उम्र के हैं, वे अब तनाव में हैं क्योंकि उनकी रोजाना की आदतों और रुटीन में बहुत कुछ बदल गया है। इस मुश्किल परिस्थिति में बतौर पैरेंट्स हमें बच्चे की सायकोलॉजी पर काम करना होगा और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उसे सकारात्मक दिशा देनी होगी।
हमें उन्हें यह समझाना होगा कि इस तरह की समस्याएं भविष्य में भी आ सकती हैं और उन्हें इनका सकारात्मक रवैये के साथ सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। पैरेंट्स के लिए बच्चों को यह बताना अब आवश्यक हो गया है कि वे मन पर गैरजरूरी बोझ या तनाव न लें क्योंकि इससे उनकी नींद, खाने की आदतों पर असर हो सकता है और कई गंभीर बीमारियों की भी आशंका है। इस परिस्थिति में हमें उनके साथ बात करने के लिए और खेलने के लिए ज्यादा से ज्यादा वक्त देना होगा।
(साभार – दैनिक भास्कर)
22 दिन के बच्चे को साथ लेकर काम पर लौटीं आईएएस सृजना गुम्माला
देशभर में कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग में सभी अपना योगदान दे रहे हैं। ऐसे में कई लोग खुद से पहले ड्यूटी को आगे रख देश सेवा की मिसाल कायम कर रहे हैं। हाल ही में ऐसा ही एक उदाहरण आंध्र प्रदेश में देखने को मिला। यहां आईएएस अधिकारी और ग्रेटर विशाखापट्टनम नगर निगम की आयुक्त सृजना गुम्माला मां बनने के 22 दिन बाद ही वापस अपने काम पर लौट आईं।
पिछले महीने ही बनीं माँ
दरअसल सृजना ने पिछले महीने ही एक बेटे को जन्म दिया, लेकिन देश में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए उन्होंने 6 महीने की अपनी मेटरनिटी लीव खत्म कर काम करने का फैसला लिया। इतना ही नहीं काम के समय वह अपने 1 महीने के बच्चे को भी साथ लाती है और काम के साथ ही बच्चे की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं। साल 2013 बैच की आईएएस सृजना ने परिवार से पहले अपने कर्तव्य को आगे रखा और कोरोनावायरस महामारी के खिलाफ जारी लड़ाई में शामिल हो गई।
बेटे को भी लाती हैं दफ्तर
बेटे को जन्म देने के तुरंत बाद ही कोरोनावायरस की वजह से लॉकडाउन की घोषणा हो गई, जिसके बाद उन्होंने अपना मातृत्व अवकाश खत्म कर ड्यूटी जॉइन कर ली। अपने फैसले पर सृजना बताती है कि वह छुट्टी पर थी, लेकिन उनका मन नहीं लग रहा था। एक जिम्मेदार अधिकारी के तौर पर वह घर नहीं रुक सकती थी। ऐसे में अपने मातृत्व के साथ ही फर्ज की अहमियत को समझते हुए छुट्टियां निरस्त कर दी और काम पर लग गई। परंतु 22 दिन के बच्चे को घर नहीं छोड़ सकती थी, इसलिए सावधानियों को ध्यान में रखते हुए बच्चे को भी साथ ऑफिस ले आई।
पति और माँ का मिल रहा सहयोग
दफ्तर में अपनी जिम्मेदारी निभा रही सृजना बच्चे का भी बखूबी ध्यान रखती हैं। काम के साथ ही वह बीच-बीच में बच्चे को फीड कराती है। भले ही एक अधिकारी के तौर पर वह सख्त हैं, लेकिन एक मां के रूप में संवेदनशील भी हैं। उनका कहना है कि इमरजेंसी के समय में लोगों को साफ पानी मुहैया कराना और साफ सफाई सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उनका कहना हैं कि जब प्रदेश के मुख्यमंत्री दिन रात मेहनत कर रहे हैं तो राज्य के लिए वह थोड़ा सा योगदान क्यों नहीं दे सकती हैं। खास बात यह है कि उनके फर्ज को निभाने में उन्हें उनके वकील पति और मां का काफी सहयोग मिल रहा है।
मॉडलिंग छोड़ मरीजों का इलाज कर रहीं पेशे से डॉक्टर, पूर्व मिस इंग्लैंड भाषा मुखर्जी
कोलकाता : साल 2019 में मिस इंग्लैंड का ताज जीतने वाली भाषा मुखर्जी पेशे से श्वसन तंत्र डॉक्टर भी हैं। फिलहाल उन्होंने मिस इंग्लैंड का अपना ताज उतारकर कोरोनावायरस से जूझ रहे इंग्लैंड में डॉक्टर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है। इसके लिए मुखर्जी ने उस अस्पताल से संपर्क किया जहां वह पहले काम कर रही थी। उन्होंने अस्पताल को बताया कि वह डॉक्टर के तौर पर फिर से काम पर लौटना चाहती हैं।
अपने डॉक्टरी कॅरियर से ब्रेक लेकर मॉडलिंग करियर में आने वाली भाषा ने अब यह तय कर लिया है कि कोरोनावायरस महामारी के संकट में वह अपनी महत्वाकांक्षाओं को पीछे रखकर डॉक्टर होने का फर्ज निभाएंगी।
दिसंबर 2019 में बनीं मिस इंग्लैंड
मिस इंग्लैंड का खिताब जीतने के बाद भाषा मुखर्जी को कई देशों में चैरिटी के लिए न्यौता दिया गया था। इसी सिलसिले में वह पिछले महीने ही भारत में थीं। 24 वर्षीय भारतीय मूल की भाषा मुखर्जी ने अपने भारत प्रवास के दौरान कई स्कूलों का दौरा किया था। जहाँ उन्होने विद्यार्थियों को किताबें और दूसरी पढ़ाई- लिखाई की चीजे दान की। इसके अलावा वह तुर्की, अफ्रीका और पाकिस्तान भी गई थीं। नौ साल की उम्र में इंग्लैंड आई भाषा ने अपनी पढ़ाई- लिखाई इसी देश में की है। दुनिया के अलग- अलग देश घूम रही मुखर्जी को अपने डॉक्टर दोस्तों से वहां की हालत के बारे में लगातार मैसेज मिल रहे थे। जिसके बाद इंग्लैंड में विकराल होती कोरोना महामारी को देखते हुए भाषा ने वापस डॉक्टरी में लौटने का मन बना लिया।
भाषा मुखर्जी का मानना है कि बेशक वो मिस इंग्लैंड के तौर पर इंसानियत के लिए ही काम कर रही थीं। लेकिन जब दुनिया भर में लोग कोरोना वायरस से मर रहे हैं और उनके डॉक्टर साथी इतनी मेहनत कर रहे हैं, उनका ताज पहन कर घूमना शायद सही नहीं होगा। इसलिए अब वह महत्वाकांक्षाओं को पीछे रखकर डॉक्टर होने का फर्ज निभा रही है।
कोविड-19 महामारी से जंग में बनीं असली नायिका ये 5 नेत्रियाँ
कोरोना महामारी से दुनिया का हर देश अपने-अपने तरीके से जूझ रहा है। ऐसे संकट के समय महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। कोरोना से जंग में ये महिलाएं असली हीरो की तरह काम कर रही हैं, जिनकी जमकर तारीफ हो रही है।
मेरिलिन एडो – कोरोना वायरस से फैली महामारी से दुनिया का पीछा तब तक पूरी तरह नहीं छूटेगा जब तक इसका टीका नहीं बन जाता। जर्मन सेंटर फॉर इन्फेक्शन रिसर्च की प्रोफेसर मेरिलिन एडो इस काम में जुटी हुई हैं। वे अपनी टीम के साथ मिलकर कोरोना वायरस से बचाने का टीका विकसित करने में लगी हैं। इससे पहले वे इबोला और मर्स के टीके भी विकसित कर चुकी हैं।
एंजेला मर्केल – कोरोना के चलते जर्मनी की कम मृत्यु दर दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस के लिए चांसलर मैर्केल की रणनीति की चारों तरफ तारीफ हो रही है। मैर्केल ने शुरुआती दौर में ही चेतावनी दे दी थी कि देश की 60 %आबादी कोरोना से संक्रमित हो सकती है। औपचारिक रूप से उन्होंने “लॉकडाउन” शब्द का उपयोग भी नहीं किया।
त्साई इंग वेन – चीन के करीब होते हुए भी ताइवान ने खुद को कोरोना से बचा लिया। वहां कोरोना संक्रमण के 400 से भी कम मामले सामने आए, जबकि जानकारों का मानना था कि ताइवान सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में से एक हो सकता था। वेन की सरकार ने वक्त रहते चीन, हांगकांग और मकाऊ से आने वालों पर ट्रैवल बैन कर दिया था।
जेसिंडा आर्डर्न – 14 मार्च को न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने घोषणा की कि देश में प्रवेश करने वाले किसी भी व्यक्ति को दो हफ्तों के लिए सेल्फ आइसोलेट करना होगा। उस वक्त देश में कोरोना के महज छह मामले सामने आए थे। आँकड़ा 100 के पार जाते ही उन्होंने देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी।
मेट फ्रेडेरिक्सन – डेनमार्क की अब तक की सबसे कम उम्र की इस प्रधानमंत्री ने मार्च माह की शुरुआत से ही कोरोना के प्रकोप से बचने के लिए कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए थे। 14 मार्च तक देश की सीमाओं को सील भी कर दिया गया था। डेनमार्क में अब तक कोरोना संक्रमण के 5,800 मामले ही सामने आए हैं।




