कोलकाता : पेट्रोल और डीजल को शीघ्र ही जीएसटी के दायरे में लाना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर होगा क्योंकि जीएसटी में करों में बदलाव जीएसटी काउंसिल में वृहद चर्चा के बाद ही होती है। एसोचेम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि केन्द्र तथा राज्य सरकारें, दोनों ही राजस्व के लिए पेट्रोल और डीजल पर अत्याधिक निर्भर हैं और इस स्थिति में कमी लानी होगी। ऑटोमोबाइल ईंधन की कीमतों में समानता लाने के लिए यह जरूरी है वरना जीएसटी का वृहद उद्देश्य पूरा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कोविड 19 के कारण हुए 42 दिनों के लॉकडाउन से प्रभावित उद्योग जगत साहसिक कदमों और पैकेज की प्रतीक्षा में है मगर कर बढ़े तो माँग में कमी आयेगी जिससे अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा। एसोचेम ने कहा कि किसी भी स्थिति में पम्प प्राइस बढ़ाए बगैर अगर क्रूड ऑयल की कीमतों में अत्प्रत्याशित गिरावट आई तो बाजार संचालित मुद्रा नीति यानी मार्केट ड्राइवेन प्राइसिंग पॉलिसी के विरुद्ध होगा।
कोटैक सिल्क ने किया माताओं को सलाम
कोलकाता : महिलाओं के लिए संचालित बैंकिंग प्रोग्राम कोटैक सिल्क ने मातृ दिवस अनूठे तरीके से मनाया। इस अवसर पर कठिन समय में अपनी सेवा प्रदान करने वाली माताओं के लिए विशेष रूप से एक वीडियो हैश टैग मॉम्स ऑन ड्यूटी जारी किया। यह डिजिटल अभियान दो माताओं का उदाहरण देता है जिसमें एक चिकित्सक और दूसरी पुलिस अधिकारी है। दोनों अपने परिवारों का ध्यान रखते हुए सभी बाधाओं को तोड़कर जोखिम उठाते हुए अपना कर्तव्य निभाती हैं। कोटैक महेन्द्रा बैंक की ज्वाएन्ट प्रेसिडेंट (कन्ज्यूमर, कमर्शियल एंड वेल्थ मार्केटिंग) एलिजाबेथ वेंकटरमण ने कहा कि कोटैक सिल्क प्रोग्राम सभी महिलाओं के लिए है जो आर्थिक स्वतन्त्रता की यात्रा में उनका सहभागी है। इस अभियान के अतिरिक्त महिला ग्राहकों के लिए मई महीने में पूरे देश में वेबिनार और लाइव लेसन आयोजित कर रहा है।
रेडिंग्टन ला रहा है नया आई फोन एस ई
कोलकाता : रेडिंग्टन नया और किफायती आई फोन एस ई ला रहा है। इसमें ए 13 बायोनिक है जो किसी भी स्मार्टफोन में सबसे अधिक तीव्र गति वाली चिप है। कम्पनी का दावा है कि लम्बे दिनों तक चलने वाली बैटरी वाला यह फोन पानी और धूल से बेअसर है। इसमें सिंगल कैमरा सिस्टम है जो पोट्रेट मोड के लाभ देगा। यह आई फोन देश भर के 3500 से अधिक खुदरा विक्रय स्थानों पर उपलब्ध होगा। फोन की शुरुआती कीमत 38900 रुपये है। एचडीएफसी बैंक डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स पर 3600 रुपये के कैशबैक के साथ यह फोन उपलब्ध होगा।
कोविड -19 संक्रमण की जाँच के लिए रैपिड किट विकसित करेगी एडमास यूनिवर्सिटी
कोलकाता : एडमास यूनिर्वसिटी कोविड -19 की जाँच करने के लिए रैपिड किट विकसित कर रही है। इसके लिए विश्वविद्यालय ने ईक्यूरा लैब्स प्राइवेट लिमिटेड से हाथ मिलाया है और दोनों ही साझा तौर कोरोना की जाँच के लिए सस्ता औऱ त्वरित डिटेक्टशन किट विकसित करेंगे। इस बाबत एडमास यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार अरूप कुमार सील तथा सेन्टर फॉर रिसर्च एंड इनोवेशन के चेयरमैन अभिज्ञान बसु और ईक्यूरा लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के चीफ साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. अनिमिख दे के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये। एडमास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की टीम भी इस परियोजना में सक्रिय सहयोग करेगी। कार्य इसी माह शुरू हो गया है।
डेविड एंड गोलिएथ फिल्म्स ने जारी किया ‘उम्मीद’ गीत
कोलकाता : डेविड एंड गोलिएथ फिल्म्स उम्मीद और दृढ़ संकल्प से भरा गीत ‘उम्मीद’ जारी कर दिया है। इस गीत में कोलकाता को एक अनदेखे अन्दाज में दिखाया गया है। गीत के बोल मृत्युन्जय कुमार सिंह ने लिखे हैं और परिशा सेन ने आवाज दी है। वीडियो की पटकथा और निर्देशन जयदीप सेन ने दिया है।

‘उम्मीद’ गीत डेविड एंड गोलिएथ फिल्म्स की ब्रांड अम्बास्डर ऋचा शर्मा पर फिल्माया गया है। डेविड एंड गोलिएथ के निर्माता लाल भाटिया और इमरान जाकी ने कहा कि कोविड -19 के कारण हमारा जीवन बदल रहा है मगर तमाम दिक्कतों के बावजूद परिस्थितियों को स्वीकार करने और खुश रहने का हमारा मिशन खत्म नहीं हुआ है।
संदीप मोहन ने की अगली फिल्म ‘निर्मल आनन्द की पप्पी’ की घोषणा
कोलकाता : होला वेन्की और रिंकल फ्री जैसी फिल्मों के बाद निर्देशक संदीप मोहन ने अपनी अगली फिल्म ‘निर्मल आनन्द की पप्पी’ की घोषणा कर दी है। यह फिल्म शहरी मध्य वर्ग के रिश्तों के इर्द – गिर्द घूमती है। फिल्म में करणवीर खुल्लर, जिलियन पिंटो, खुशबू, सलमेन शेरिफ और विपिन हीरो ने काम किया है। फिल्म का पार्श्व संगीत विवेक फिलिप ने दिया है। फिल्म का निर्देशन संदीप मोहन ने किया है। फिल्म गीजू जॉन और संदीप मोहन ने सहायक निर्माता फ्रांसिस वर्गीज और अभिलाष नन्दा के साथ बनायी है। फिल्म का ट्रेलर जारी हो चुका है।
कोरोना से प्रख्यात इतिहासकार हरिशंकर वासुदेवन का निधन
कोलकाता : कोरोना से पीड़ित प्रख्यात इतिहासकार हरिशंकर वासुदेवन का निधन हो गया है। वे 68 वर्ष के थे। सॉल्टलेक के सी डी ब्लॉक में रहने वाले वासुदेवन को 4 तारीख को एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। 6 तारीख को उनकी रिपोर्ट पॉजेटिव आई। अगले दिन से उनको सांस की समस्या होने लगी। गत शनिवार को देरा 1 बजे उनका निधन हुआ। वासुदेवन को रुस और मध्य एशिया के अग्रणी इतिहासकारों में की जाती है। वासुदेवन संस्कृति मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय औऱ विदेश मंत्रालय की परियोजनाओं तथा कई संस्थानों में सलाहकार भी रहे। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय और मौलाना अबुल कलाम आजाद इन्स्टीट्यूट ऑफ एशियन स्टडीज से जुड़े रहे हैं। वर्ष 2005 से 2015 तक राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद के समाज विज्ञान पाठ्यपुस्तक कमेटी के चेयरमैन भी रहे। राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने वासुदेवन के निधन पर शोक जताया है।
महाभारत
- राम दत्त दाधीच
सदाचार हारा और मर गयी शराफत,
सब जगह मचा हुआआज महाभारत।
दुर्योधन पर शकुनि का है बंधन ,
विदुर बेबस मन कर रहा क्रंदन ,
धृतराष्ट्र मोहवश बिलकुल अंधा,
भीष्म का बहाना प्रतिज्ञा का फंदा,
द्रोण कृप निरीह बन चुप रहे सारे,
जलते लाक्षागृह को विचारते बेचारे,
धर्म और कर्तव्य विमुख क्या विचारे,
पांडवों के भाग्य को दूजे क्यों सवारे ।
अभिमन्यु दे रहे विरोचित बलिदान,
द्रोपदियाँ मांग रही अपना सम्मान,
कृष्ण कर्ता नहीं वो तो करवाता,
खुद के वंश को भी लड़वा मरवाता,
बेबस जहाँ भगवान भी हो जाते हैं,
अपने हीअपनों की मारकाट मचाते हैं ,
जीते हुए भी यहाँ सबकुछ हार जाते है,
निज प्रियजनों को चिता में जलाते हैं ।
कुटिल अपमानो का यह कैसा जमाना,
स्वार्थ ही हो रहा हैं आज अपना तराना,
कौन मन से माने आज गीता का ज्ञान,
लूट और खसोट से बन जाऔ धनवान,
धर्माचरण को मान लो है रात का सपना,
पराया माल साम दाम बन जाए अपना,
शंख छोड़ कन्हैया अब बांसुरी बजाओ,
रामायण गान कर महाभारत से बचाओ।
सदाचार हारा और मर गयी शराफत,
सब जगह मचा हुई आज महाभारत।
बुद्ध की 10 विभिन्न मुद्राएं एवं हस्त संकेत और उनके अर्थ
आप सभी ने बुद्ध की मूर्तियों को कई मुद्राओं के साथ देखा होगा। इन अलग-अलग मुद्राओं में बुद्ध की मूर्तियों को देखकर आपके मन में इन मुद्राओं का अर्थ जानने की इच्छा तो उत्पन्न होती ही होगी। इस लेख में, हम जानेंगे बुद्ध की 10 विभिन्न मुद्राएं एवं हस्त संकेत और उनके अर्थ।
भारतीय मूर्तिकला देवत्व का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करती है, जिसका मूल और अंत, धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के माध्यम से व्यक्त किया जाता है। इसलिए बुद्ध के अनुयायी, बौद्ध ध्यान या अनुष्ठान के दौरान शास्त्र के माध्यम से विशेष विचारों को पैदा करने के लिए बुद्ध की छवि को प्रतीकात्मक संकेत के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

इस मुद्रा का सर्वप्रथम प्रदर्शन ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ में बुद्ध ने अपने पहले धर्मोपदेश में किया था। इस मुद्रा में दोनों हाथों को सीने के सामने रखा जाता है तथा बायें हाथ का हिस्सा अंदर की ओर जबकि दायें हाथ का हिस्सा बाहर की ओर रखा जाता है।

इस मुद्रा को “समाधि या योग मुद्रा” भी कहा जाता है और यह अवस्था “बुद्ध शाक्यमुनि”, “ध्यानी बुद्ध अमिताभ” और “चिकित्सक बुद्ध” की विशेषता की ओर इशारा करती है। इस मुद्रा में दोनों हाथों को गोद में रखा जाता है, दायें हाथ को बायें हाथ के ऊपर पूरी तरह से उंगलियां फैला कर रखा जाता है तथा अंगूठे को ऊपर की ओर रखा जाता है और दोनों हाथ की अंगुलियां एक दूसरे के ऊपर टिका कर रखा जाता है।

इस मुद्रा को “पृथ्वी को छूना” (“टचिंग द अर्थ”) भी कहा जाता है, जोकि बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति के समय का प्रतिनिधित्व करती है क्योंकि इस मुद्रा से बुद्ध दावा करते हैं कि पृथ्वी उनके ज्ञान की साक्षी है। इस मुद्रा में सीधे हाथ को दायें घुटने पर रखकर हथेली को अंदर की ओर रखते हुए जमीन की ओर ले जाया जाता है और कमल सिंहासन को छूआ जाता है।

यह मुद्रा अर्पण, स्वागत, दान, देना, दया और ईमानदारी का प्रतिनिधित्व करती है। इस मुद्रा में दायें हाथ को शरीर के साथ स्वाभाविक रूप से लटकाकर रखा जाता है, खुले हाथ की हथेली को बाहर की ओर रखते हैं और उंगलियां खुली रहती है तथा बाये हाथ को बाये घुटने पर रखा जाता है।
5. करण मुद्रा

यह मुद्रा बुराई से बचाने की ओर इशारा करती है। इस मुद्रा को तर्जनी और छोटी उंगली को ऊपर उठा कर और अन्य उंगलियों को मोड़कर किया जाता है। यह कर्ता को सांस छोड़कर बीमारी या नकारात्मक विचारों जैसी बाधाओं को बाहर निकालने में मदद करती है।
6. वज्र मुद्रा

यह मुद्रा उग्र वज्र के पांच तत्वों, अर्थात् वायु, जल, अग्नि, पृथ्वी, और धातु के प्रतीक को दर्शाती है। इस मुद्रा में बायें हाथ की तर्जनी को दायीं मुट्ठी में मोड़कर, दायें हाथ की तर्जनी के ऊपरी भाग से दायीं तर्जनी को छूते (या चारों ओर घूमाते) हुए किया जाता हैं।
7. वितर्क मुद्रा

यह बुद्ध की शिक्षाओं के प्रचार और परिचर्चा का प्रतीक है। इस मुद्रा में अंगूठे के ऊपरी भाग और तर्जनी को मिलाकर किया जाता है, जबकि अन्य उंगलियों को सीधा रखा जाता है। यह लगभग अभय मुद्रा की तरह है लेकिन इस मुद्रा में अंगूठा तर्जनी उंगली को छूता है।
8. अभय मुद्रा

यह मुद्रा निर्भयता या आशीर्वाद को दर्शाता है जोकि सुरक्षा, शांति, परोपकार और भय को दूर करने का प्रतिनिधित्व करता है तथा “बुद्ध शाक्यमुनि” और “ध्यानी बुद्ध अमोघसिद्धी” की विशेषताओं को प्रदर्शित करती है। इस मुद्रा में दायें हाथ को कंधे तक उठा कर, बांह को मोड़कर किया जाता है और अंगुलियों को ऊपर की ओर उठाकर हथेली को बाहर की ओर रखा जाता है।
9. उत्तरबोधी मुद्रा

यह मुद्रा दिव्य सार्वभौमिक ऊर्जा के साथ अपने आप को जोड़कर सर्वोच्च आत्मज्ञान की प्राप्ति को दर्शाती है। इस मुद्रा में दोनों हाथ को जोड़ कर हृदय के पास रखा जाता है और तर्जनी उंगलियां एक दूसरे को छूते हुए ऊपर की ओर होती हैं और अन्य उंगलियां अंदर की ओर मुड़ी होती हैं।
10. अंजलि मुद्रा

इसे “नमस्कार मुद्रा” या “हृदयांजलि मुद्रा” भी कहते हैं जो अभिवादन, प्रार्थना और आराधना के इशारे का प्रतिनिधित्व करती है। इस मुद्रा में, कर्ता के हाथ आमतौर पर पेट और जांघों के ऊपर होते हैं, दायां हाथ बायें के आगे होता है, हथेलियां ऊपर की ओर, उंगलियां जुड़ी हुई और अंगूठे एक-दूसरे के अग्रभाग को छूती हुई अवस्था में होते हैं।
(साभार – दैनिक जागरण)




