Tuesday, April 28, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 509

एक दूजे से सैकड़ों किलोमीटर दूर कोरोना को हराने में जुटे चिकित्सक दम्पति

कालांवाली : एक कर्ज जो देश का अदा करना है। डॉक्टर बनकर अपना फर्ज अदा करना है। देश सेवा का संकल्प लेकर शहर के डॉ. जैकी गर्ग और उसकी पत्नी डॉ. श्वेता लखनऊ के अलग-अलग अस्पताल में कोरोना महामारी की चुनौती को स्वीकार करते हुए जंग लड़ रहे हैं। ये दोनों अपने घर, परिवार और शहर से करीब 850 किलोमीटर दूर रहकर कोरोना की चपेट में आने वाले मरीजों को हाई रिस्क जोन में अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं।

कोरोना वार्ड के अधीक्षक हैं डॉ. जैकी
अनाज मंडी में आढ़त का काम करने वाले चरण दास गर्ग के छोटे बेटे डॉ जैकी गर्ग जोकि लखनऊ के के.के. अस्पताल व उनकी पत्नी डॉ श्वेता किंग जोर्ज मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं। कोरोना महामारी के चलते सरकार ने लखनऊ के के.के अस्पताल में कोरोना वार्ड बनाया गया है जहाँ पर कोरोना के पॉजिटिव मरीजों के इलाज के लिए डॉ जैकी गर्ग को उक्त वार्ड का अधीक्षक नियुक्त किया गया। इसके अलावा उनकी पत्नी डॉ श्वेता को भी किंग जोर्ज मेडीकल कॉलेज में कोरोना के पॉजिटिव मरीजों के इलाज के लिए नियुक्त किया गया है।
पिता को पुत्र और पुत्रवधू पर गर्व है
डॉ जैकी के पिता चरण दास गर्ग ने बताया कि उक्त बीमारी को देखते हुए उनके पुत्र व पुत्रवधु ने देश हित मे मरीजों की सेवा के लिये वहां पर ड्यूटी शुरू की। उन्हें उन दोनों पर गर्व है, जोकि आपदा के समय अपनी सेवाएं दे रहे है। डॉ. जैकी गर्ग व उनकी पत्नी डॉ. श्वेता गर्ग ने कहा कि कोरोना संक्रमण के इस दौर में काफी चुनौतियां हैं, लेकिन समाज के लिए हमारा खड़ा होना बेहद जरूरी है। हर पल हमें सतर्क रहना पड़ता है। वे लोगों को लगातार स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहे हैं। स्थिति अभी ये हो चली है कि अस्पताल से घर जाने का कोई समय नहीं है। घर की चिंता लगी रहती है, लेकिन समाज भी हमारा परिवार है।
यही तो हमारी परीक्षा की घड़ी है
उन्होंने कहा कि हमने तो सेवा के संकल्प के साथ ही पढ़ाई की है, ऐसे में कोरोना से डरकर अपना संकल्प तोड़ देंगे, ऐसा हो ही नहीं सकता। यही तो हमारी परीक्षा की घड़ी है और हमें इसमें हर हाल में पास होना है। इसके अलावा उन्होंने देशवासियों खासकर शहरवासियों से अपील की हैं कि आप अपने घर पर रहें। इस समय सबसे बड़ी सेवा व सच्ची देशभक्ति यही है कितना भी जरूरी काम हो प्लीज घर से बाहर न जाएं। हम सबने मिलकर कोरोना को फैलने से रोकना है। ताकि हम और हमारा देश स्वस्थ रहे।

कोरोनावायरस लॉकडाउन में जोमैटो और स्विगी ने की पहल, 80 शहरों में पहुँचाएगा राशन

नयी दिल्ली : ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म जोमैटो (Zomato) और स्विगी (Swiggy) से अब आप सिर्फ खाना ही नहीं बल्कि ग्रॉसरी का सामान भी ऑर्डर सकेंगे। जोमैटो ने घोषणा की है कि उसने देशभर में 80 से अधिक शहरों में किराने का सामान पहुँचाना शुरू कर दिया है ताकि लोगों को कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुएं मिलती रहें। इसके लिए कंपनी ने एक नया फीचर- जोमैटो मार्केट लॉन्च किया है। जोमैटो यूजर्स होमस्क्रीन पर उपलब्ध जोमैटो मार्केट सेक्शन में जाकर अपने ऐप के जरिए ग्रोसरी डिलीवरी का लाभ उठा सकते हैं। किराने की डिलीवरी के अलावा, जोमैटो ने जोमैटो गोल्ड की सदस्यता को भी बिना किसी शुल्क के दो महीने तक आगे बढ़ा दिया है।
जोमैटो भारत के 80 शहरों में पहुँचाएगा राशन
कंपनी के सीईओ और संस्थापक दीपिंदर गोयल ने अपे ब्लॉग के जरिए बताया है, ”हमने जरूरी सामानों की आपूर्ति में मदद करने के लिए पूरे भारत में 80 से ज्यादा शहरों में किराने की डिलीवरी शुरू कर दी है। जरूरी सामान को लेकर किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए कंपनी हर संभव प्रयास करेगी।’ इसके लिए कंपनी विभिन्न स्थानीय किराना स्टोर, एफएमसीजी कंपनियों और विभिन्न स्टार्टअप के साथ साझेदारी की है।
डेयरी उत्पादों की भी डिलीवरी
बता दें कि जोमैटो कई राज्यों में ग्रोसरी के साथ डेयरी प्रोडक्ट्स की भी होम डिलीवरी की सुविधा दे रही है। इसके लिए फिरोजपुर में जिला प्रशासन ने जोमैटो का टॉयअप शहर के बड़े ग्रोसरी स्टोर्स व डेयरियों के साथ करवा दिया है। अब कंपनी की तरफ से जरूरी वस्तुओं की होम डिलीवरी मुहैया करवाई जाएगी और कंपनी के होम डिलीवरी सिस्टम के साथ जुड़ने वाले स्टोर्स का विवरण भी कंपनी के मोबाइल एप पर अपडेट कर दिया गया है।
स्विगी ने भी शुरू कर दी आश्वयक वस्तुओं की होम डिलीवरी
जोमैटो की तरह ही, प्रतिस्पर्धी ऐप स्विगी ने भी अपने ग्राहकों के लिए किराने की डिलीवरी शुरू कर है। कंपनी के पास फरवरी 2019 से ही किराने का सामान और अन्य आवश्यक घरेलू सामान पहुंचाने के लिए स्विगी स्टोर्स उपलब्ध हैं। महामारी के कारण लोगों को घर से बाहन ना निकलने में मदद करने के लिए शॉपक्लूज़ और पेटीएम ने भी अपने प्लेटफार्मों के माध्यम से किराने का सामान डिलिवर करना शुरू कर दिया है।
ऑनलाइन ऑर्डर में 70 फीसदी की गिरावट आई है
बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए पूरे देशभर में 21 दिनों का लॉकडाउन जारी है। जरूरी सामानों को छोड़ दिया जाए, तो सारे व्यापार बंद हो चुके हैं। ऐसे में अब इस महामारी का असर जोमैटो और स्विगी जैसी ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों के व्यापार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। लॉकडाउन के चलते लोगों ने ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना कम कर दिया है। इसके चलते पिछले दस दिनों में जोमैटो और स्विगी को मिलने वाले ऑन-लाइन ऑर्डर में 70 फीसदी की गिरावट देखने को मिला है। लॉकडाउन से पहले इन कंपनियों को रोज 25 लाख ऑर्डर मिलते थे।

(साभार – दैनिक भास्कर)

किशोर गोल्फर अर्जुन भाटी ने अपनी ट्राॅफियां बेचकर पी एम केयर्स में दिये 4.30 लाख रुपये

नयी दिल्ली : युवा गोल्फर अर्जुन भाटी ने विश्व जूनियर गोल्फ चैंपियनशिप के तीन खिताब और एक राष्ट्रीय खिताब सहित अपनी सभी 102 ट्राफियों  को बेचकर कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई के लिये 4.30 लाख रुपये जुटाये। यूएस किड्स जूनियर विश्व चैंपियनशिप में 2016 और 2018 के विजेता और पिछले साल एफसीजी कॉलवे जूनियर विश्व चैंपियनशिप जीतने वाले इस 15 वर्षीय गोल्फर ने इस धनराशि को आपात स्थिति प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स फंड) में दान किया।
अर्जुन ने कहा कि उन्होंने धनराशि जुटाने के लिये अपनी ट्राफियां अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के परिजनों में बेच दी। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘पिछले आठ साल में देश विदेश में जीतकर कमायी गयी 102 ट्राफियां मैंने देश में इस संकट के समय 102 लोगों को दे दी। उनसे कुल 4,30,000 रुपये की धनराशि मिली जो आज मैंने पीएम केयर्स फंड में देश की मदद के लिये दिये। ’अर्जुन ने कहा, ‘‘मेरे योगदान के बारे में सुनने के बाद दादी पहले रोयी और फिर बोली ‘तू सच में अर्जुन है। आज देश के लोग बचने चाहिए, ट्राफियां तो फिर आ जाएंगी। ’ इस तरह से यह युवा गोल्फर भी उन भारतीय खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अपना योगदान दिया।

पूर्व पेशेवर गोल्फर सेंडर्स का निधन

लास एंजिलिस : अमेरिका के पूर्व दिग्गज पेशेवर गोल्फर डग सेंडर्स का रविवार को निधन हो गया। सेंडर्स 86 वर्ष के थे। पीजीए टूर पर सबसे लोकप्रिय खिलाड़ियों में से एक रहे सेंडर्स ने 1956 में कनाडा ओपन सहित अपने पेशेवर करियर में 20 खिताब जीते। वह गोल्फ जगत में ‘पीकॉक आफ द फेयरवेज’ के नाम से मशहूर थे। सेंडर्स मेजर चैंपियनशिप में चार बार उप विजेता रहे जिसमें 1970 की ब्रिटिश ओपन चैंपियनशिप भी शामिल है जहां वह काफी करीब से खिताब से चूक गए थे। सेंडर्स ने इसके अलावा सीनियर चैंपियन्स टूर पर भी 218 प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और अपने स्वयं के टूर्नामेंट ‘डग सेंडर्स सेलीब्रिटी क्लासिक’ की भी मेजबानी की।

ऑनलाइन लूडो खेलकर एक-दूसरे से जुड़ी हैं भारतीय महिला क्रिकेटर

नयी दिल्ली : स्टार सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने खुलासा किया कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी कोविड-19 महामारी के कारण लाकडाउन के बीच आनलाइन लूडो खेलकर एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनिया भर में क्रिकेट गतिविधियों को या तो रद्द कर दिया गया है या फिर वे स्थगित कर दी गई हैं। बीसीसीआई ने सोमवार को मंधाना का वीडियो ट्वीट किया जिसमें वह बता रही हैं कि वह मैदान के बाहर समय कैसे बिता रही हैं।
मंधाना ने कहा, ‘‘हम सभी दोस्त एक साथ ऑनलाइन लूडो खेलते हैं जिससे हम सभी आपस में जुड़े रहते हैं, टीम के सभी साथी।’’
अन्य खिलाड़ियों की तरह यह दिग्गज बल्लेबाज भी शारीरिक रूप से फिट रहने के लिए घर में ही ‘वर्कआउट’ कर रही है।
मंधाना ने कहा, ‘‘फिट रहना महत्वपूर्ण है इसलिए मैं घर पर ही वर्कआउट कर रही हूं। मैं ट्रेनर के संपर्क में रहती हूं। वह हमें वे सभी वर्कआउट भेजते हैं जो फिट रहने के लिए हमें करने की जरूरत है।’’
तेइस साल की यह खिलाड़ी अपने परिवार के साथ समय बिताने का लुत्फ उठा रही है और इस दौरान खाना बनाने में हाथ आजमाने के अलावा वह घर के अन्य कामों में भी मदद कर रही हैं।
इस सलामी बल्लेबाज ने कहा, ‘‘इसके अलावा जो मुझे पसंद आ रहा है वह परिवार के साथ समय बिताना है। हम एक साथ कार्ड खेलते हैं। मैं खाना बनाने में माँ की मदद कर रही हूं। बर्तन साफ करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है और इसके अलावा मुझे अपने भाई को परेशान करना भी पसंद है। समय बिताने के लिए यह मेरा पसंदीदा काम है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘तीसरी चीज जो मुझे पसंद है वह फिल्म देखना है। मैं फिल्मों की बड़ी प्रशंसक हूँ। मैं सुनिश्चित करती हूं कि मैं हफ्ते में दो से तीन फिल्म देखूं, काफी अधिक नहीं क्योंकि मैं नहीं चाहती कि मैं इसकी आदी हो जाऊं। मैं अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहती हूँ।’’दुनिया की चौथे नंबर की एकदिवसीय बल्लेबाज ने साथ ही कहा कि उन्हें घंटों सोते रहना सबसे अधिक पसंद है।
उन्होंने कहा, ‘‘घर में जो चीज मुझे सबसे अधिक पसंद है वह सोना है। मैं सुनिश्चित करती हूं कि मैं कम से कम 10 घंटे सोती रहूँ जिससे कि पूरे दिन खुश रहूं।’ मंधाना ने साथ ही लोगों से अपील की कि वे सामाजिक दूरी का पालन करें और लाकडाउन के दौरान घर में रहें।
उन्होंने कहा, ‘‘घर में रहें, सुरक्षित रहें और स्वयं को शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रखें।’’
कोरोना वायरस से दुनिया भर में एक लाख 80 हजार से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और एक लाख 14 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई है।
कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए भारत में 25 मार्च से लाकडाउन घोषित किया गया है और अब यह 3 मई तक बढ़ा दिया गया है।

कोरोना परीक्षण प्रयोगशाला शुरु करने में मेडिकल कॉलेजों की मदद करेंगे 14 शीर्ष चिकित्सा संस्थान

नयी दिल्ली : देश में चिन्हित 14 उत्कृष्ट चिकित्सा संस्थान सभी मेडिकल कॉलेजों को कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिये इसके परीक्षण के दायरे को बढ़ाने के तरीकों से अवगत करायेंगे जिससे देशव्यापी स्तर पर कोविड-19 की जांच की व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इसके लिये दिल्ली स्थित एम्स, चंडीगढ़ में पीजीआई और बेंगलुरु स्थित निमहांस सहित 14 उत्कृष्ट चिकित्सा संस्थानों को देश के सभी निजी और सरकारी मेडिकल कॉलेजों को कोरोना वायरस के परीक्षण हेतु प्रयोगशालायें शुरु करने में तकनीकी एवं कौशल संबंधी मदद मुहैया कराने के लिये चिन्हित किया है। देश में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों के मद्देनजर आईसीएमआर ने पूरे देश में विषाणु विज्ञान प्रयोगशालाओं का दायरा बढ़ाने के लिये यह पहल की है। इसका मकसद कोविड-19 की परीक्षण सुविधाओं को विस्तार देते हुये सभी मेडिकल कॉलेजों के आसपास इस प्रकार की प्रयोगशालायें स्थापित करना है। आईसीएमआर के एक अधिकारी ने बताया कि परिषद ने सभी सरकारी और निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों से कोरोना वायरस के परीक्षण की सुविधा शुरु करने के लिये आवेदन भी मांगे हैं।
उन्होंने कहा कि इस सुविधा को देश के सभी हिस्सों तक पहुंचाने के लिये आईसीएमआर द्वारा चिन्हित 14 चिकित्सा संस्थानों को जिम्मेदारी दी गयी है कि वे सभी मेडिकल कॉलेजों को उन्नत प्रयोगशालायें स्थापित करने के लिये प्रेरित करते हुये इस दिशा में हरसंभव मदद भी मुहैया करायें।
इसके लिये आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने सभी 14 संस्थानों के निदेशकों को पत्र लिखकर प्रयोगशालाओं के विस्तार में मेडिकल कॉलेजों को ढांचागत सुविधाओं से लेकर प्रशिक्षण तक हर प्रकार की मदद देने को कहा है। उन्होंने इन संस्थानों से मेडिकल कॉलेजों के मार्गदर्शक के रूप में इस दायित्व का निर्वाह करने का अनुरोध किया है।
इन संस्थानों को कहा गया है कि प्रयोगशालाओं का नेटवर्क बढ़ाने में समान भौगोलिक वितरण का भी ध्यान रखा जाये, जिससे देश के सभी इलाकों में समान रूप से परीक्षण की सुविधा का विस्तार हो सके।
इन संस्थानों को भी भौगोलिक आधार पर जिम्मेदारी दी गयी है कि वे किस राज्य के मेडिकल कॉलेजों की मदद करेंगे। मसलन, पीजीआई चंडीगढ़ को जम्मू कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों की जिम्मेदारी दी गयी है। वहीं, एम्स दिल्ली को बिहार और दिल्ली के मेडिकल कॉलेजों की मदद करने को कहा गया है।

पूर्व अटार्नी जनरल अशोक देसाई का निधन

नयी दिल्ली : पूर्व अटार्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक देसाई का गत 6 अप्रैल सोमवार की सुबह निधन हो गया। देसाई नौ जुलाई, 1996 से छह मई, 1998 तक देश के अटार्नी जनरल थे। इससे पहले, 18 दिसंबर, 1989 से दो दिसंबर, 1990 तक वह सालिसीटर जनरल थे। पद्म भूषण से सम्मानित देसाई ने 1956 में बंबई उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की और आठ अगस्त, 1977 को वह वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किये गये। देसाई ने उच्च पदों पर व्याप्त भ्रष्टाचार और इस तरह के गंभीर आरोपों में घिरे उच्च लोकसेवकों के खिलाफ जाँच को लेकर बहुचर्चित विनीत नारायण प्रकरण में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर रखने, नर्मदा बांध प्रकरण और गैरकानूनी प्रवासी (अधिकरण द्वारा निर्धारण) कानून जैसे जनहित के अनेक मामलों में उच्चतम न्यायालय में बहस की।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने देसाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुये कहा कि उन्हें अपनी चुटीली वाक्पटुता और जनहित के मामलों की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित करने के लिये हमेशा याद किया जायेगा।

जब श्रीराम से मिले हनुमान

चित्रकार हैं – दिव्या अग्रवाल। दिव्या योग से स्नातक कर रही हैं और चित्रकला में दक्ष हैं।

 

शांत था गंगा का पानी

वसुन्धरा मिश्र

कलकल खल खल करती गंगा
आज शांति से बहती लगी
मन में हलचल मची
रोज मचलती लहरें बलखाती
नाव से अठखेलियाँ करती
पों पों की आवाज से लांच का चीरते हुए उस पार जाना
किनारे पर सर्कुलर ट्रेन का धड़ धड़ निकलना
हजारों की भीड़ की चिल्ल पों
गंगा आज चुपचाप लगी
गंगा सिर्फ़ धर्म की परिभाषा बनाई गई
जीवन की नैसर्गिक प्रकृति बन इंसानों की रक्षक बनी
किसी ने दरिया तो कहीं माँ बनी
सखी बन संस्कृति बनी
एक तट से दूसरे तट तक चुनरिया चढ़ न सकी
प्रेम और स्नेह में बंध न सकी
चांद की रोशनी में नहाई लहरों ने रास लीला रचाई
कभी लाल तो कभी सिंदूरी
बादलों के रंग में रंग जाती
विचित्रता से भरी शांत दिखी
बहुत खूबसूरत लगी खुश लगी
अंग अंग थिरकती लगी
बहुत वर्षों बाद लगा सूकून से भरी लगी
विश्राम मिला
भूल चुकी थी अपने अस्तित्व को
खो चुकी थी अपना प्रवाह
सूर्य की रोशनी में चांदी सी चिलकती
चांद की छिटकी किरणों में नहाई
अपने वक्षस्थल को निहारती
हिरनी सी चंचला लगी
नीले आसमान की छाया में श्वास लेती
हंस बत्तख और मछलियों की सहेली बनी
मचलती नवयौवना सी गंगा
आज शांति दूत लगी
इंसानों की बस्ती अब भाती नहीं
चिरना फाड़ना काटना नोचना फेंकना
कालिख पोतना मार काट से दूर
आज संवेदनशील और भावनाओं की देवी गंगा
अपनी दुनिया में  आज खुश है।

कोरोना युद्ध : कई स्तरों पर चरणबद्ध तरीके से आर्थिक गतिविधियाँ आरम्भ हों : एसोचेम

कोलकाता : एसोचेम कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के बाद ठप पड़ी आर्थिक गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से आऱम्भ करने के पक्ष में है। इस परिप्रेक्ष्य में एसोचेम जाँचपरक तरीका ले आया है जिसमें अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की तुलना में आर्थिक गतिविधियाँ तथा निर्माण क्षेत्र चरणबद्ध तरीके से खोले जाने का प्रस्ताव है। इन गतिविधियों में कृषि, निर्यात, स्वचालित मशीनों द्वारा संचालित उद्योग और चयनित निर्माण भी शामिल है। इसे लेकर एसोचेम ने ‘इंडिया ओपेनिंग फॉर बिजनेस – सजेस्टेड कैलिबरेटेड अप्रोच एंड पोटेंशियल (सोप्स)’ रिपोर्ट जारी की है। सुरक्षा नियामको का ध्यान रखते हुए एसोचेम सोप्स में कोरोना खत्म होने तक सभी कर्मचारियों तथा अनुबंधित कर्मियों की मेडिकल जाँच बार – बार करवाने का प्रस्ताव है। एसोचेम के महासचिव दीपक सूद ने कहा, ‘हम केन्द्र एवं राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। चुनौतियों का सामना करते हुए अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित अपने सुझाव और परामर्श देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।’ पर्याप्त श्रमिकों की उपलब्धता वाले निर्माण स्थल, निर्यात केन्द्रित सरकारी कार्यालयों, ई -कॉमर्स और कृषि सम्बन्धित क्षेत्र प्रथम चरण में खोले जाने चाहिए। रावी की फसलों को देखते हुए खेतो पर मशीनरी के साथ श्रमिकों की जरूरत है। इस समय देश की खाद्य सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मसला है। सम्भव है कि जीडीपी की दृष्टि से कृषि का इस समय उतना योगदान न हो मगर यह क्षेत्र आधे से अधिक आबादी की जीवन रेखा है। सूद ने कहा कि कृषि क्षेत्र को राष्ट्रीय संसाधन और प्रतिबद्धता की जरूरत है और यह अच्छी बात है कि कुछ राज्य ऐसा कर रहे हैं। इसके बाद आई टी, पेशेवर सेवाएँ, फूड रिटेलिंग तथा होटल खोले जा सकते हैं। इसके बाद परिवहन सेवा के अन्तर्गत बस तथा एयरलाइनों को संचालन की अनुमति मिले। बड़े स्तरों पर अन्तरराष्ट्रीय उड़ानों को अंतिम चरण में अनुमति दी जा सकती है।
कोविड -19 संक्रमित लोगों को कार्यस्थल तथा हर जगह से अलग रखा जाये। सोप्स अनिवार्य मेडिकल जाँच के अतिरिक्त सरकार द्वारा स्वीकृत सामाजिक दूरी के नियम का पालन घर से लेकर कार्यस्थल तक हो। तम्बाकू और गुटखे पर जैसे उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबन्ध हो। आपात मेडिकल सुविधा के लिए कार्यस्थल के आस – पास कोविड -19 केन्द्रित अस्पतालों का होना सुनिश्चित किया जाये। एसोचेम ने निर्माण क्षेत्र की चुनौतियों को भी पहचाना है और इसका मानना है कि खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग), ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, रक्षा आयुध निर्माण, और इलेक्ट्रॉनिक निर्माण को फिर से शुरू करने की जरूरत है क्योंकि चीन कोरोना से उबरने के बाद इन क्षेत्रों में कड़ी टक्कर दे सकता है। इसके अतिरिक्त इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन की बहुलता भी है,इसलिए यह और भी जरूरी है।