Wednesday, April 29, 2026
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कैसा समय

  • प्रीति साव

कैसा समय?
कैसा समय यह आ गया हैं,
कि चारों ओर दिख रहा
अंधकार ही अंधकार,

आया यह जब से
कोरोना वायरस जैसी महामारी,
उतार रहा मनुष्यों को मौत के घाट ,

अभी चिन्ता नहीं है
किसी को अपने कामों की,
न ही व्यापार की और न राजनीति की
केवल चिन्ता है, खुद के सुरक्षा की।

कैसा समय यह आ गया
कि लोग कैद हुए घरों में,
और आजाद हुए
उन पिंजड़ों में कैद पंक्षियां

कैसा समय यह आ गया हैं,
दिन हुआ सन्नाटा और
रातों में हो रहा है
चहल-पहल।

कैसा समय यह आ गया है,
कि मौत होने के पहले ही,
घरों से कर दिया जा रहा बेदखल
होने पर यह कोरोना जैसा वायरस।

कैसा समय यह आ गया हैं
कि खेल के मैदानों को भी ,
बनाया जा रहा अस्पताल।

हो गएं चिन्तित
पूरे विश्व के लोग,
एक कोरोना जैसे
विषाणु से,

यह विषाणु मार रहा,
पूरे विश्व के लोगों को,
एक नहीं, दो नहीं,
बल्कि लाखों-लाखों की
हो रही मौत।

ऐसा लग रहा है कि
यह वायरस केवल सबको
मौत देने तक ही नहीं ,
बल्कि पूरे सृष्टि का
एक विनाशकारी रूप
बन आया है इस पृथ्वी पर।

कैसा समय यह आ गया है
कि लोगों की मौत हुए
शवों को दफनाने के लिए ,
बच नहीं रहा,
कोई स्थान।

कैसा समय?
कैसा समय यह आ गया है ।।

अन्तर्यामी

शरतचंद्र चट्टोपाध्याय

 अनुवाद – शुभस्वप्ना मुखोपाध्याय
(१)
भीमचाँद अपना एक हाध दूसरे हाध के ऊपर ज़ोर से रखकर, गम्भीर स्वर में अपनी सोलह वर्ष की पत्नी विनोदिनी से कहता है,”इन आँखों से किसी के चेहरे को पढ़कर यदि उसके मन के भावों को समझ ही न पाऊँ तो ये आँखें किस काम की । इस दुनिया में मुझे बेवकूफ बनाना बहुत कठिन है। क्या समझी?”

विनोदिनी गुस्से से लाल होकर कहती है,”उसी घमंड की आग में आप गल न जाए किसी दिन । मुझे तो लगता है आपको बुद्धू बनाना दुनिया में सबसे आसान काम है ।”

भीमचाँद कुछ देर ज़ोर से हँसकर कहता है, गलत, गलत बिल्कुल गलत। मैं भले ही भोला-भाला दिखूँ पर हूँ वैसा नहीं । एकबार मैं जिसे देख लूँ , उसके पेट के अन्दर से सारी बातें निकाले बिना मैं रहता नहीं । यह जान के रखना ।”

“जी जान ली” विनोदिनी बोली। फिर कुछ क्षण मौन रहने के बाद काफी उदास होकर कहती है, “ऐसा कर सकते हैं तो आपका ही भला है , मेरा क्या । आप मेरे पति हैं जो आप सोचे वही सही । आप ही तो मुझे खिलाते-पिलाते हैं । लेकिन एक बात कह दूँ , आपकी सौतेली माँ ने यदि आपको धोखा न दिया, तो मेरे नाम पर एक कुत्ता पालिएगा ।”

इसके बाद भीम कुछ पल आपनी पत्नी के चेहरे को देखा , फिर कहा ,”ठीक है, मैं आज अभी नयी माँ के पास जाकर, वह क्या खेल रच रही हैं, यह जानकर तुम्हें आकर न बता दूँ तो मेरा नाम भी भीमचाँद नहीं।”

अब मैं थोड़ा पीछे जाकर इस बातचीत का मूल कारण को स्पष्ट करता हूं ।
भीमचाँद के पिता शिवदास बाबू एक सुसंपन्न वक्ति थे । जब भीम सात साल का था तभी उसकी माँ चल बसी। पत्नी शोक शिवदास से और सहा नहीं जा रहा था इसलिए वे अपने ही गांव की एक गरीब विधवा की बेटी सुखदा से विवाह कर ले आए और उन असहाय माँ-बेटी को अपने घर में आश्रय दे दिया । लेकिन भीमचाँद के नटखटपन से वे दोनों माँ बेटी त्रस्त थी इसलिए भीम को उसके मामा के घर भेज दिया शिवदास ने । भीम के मामा ने उसे पाल-पोषकर बड़ा किया और जूट के काम-काज में नियुक्त कर दिया ।
इसी तरह वषों बीत गए । तीन साल पहले भीमचाँद अपनी पत्नी के साथ मामा घर से लौटा । अब नयी बहू की अपनी सौतेली सास से न बनती थी और न ही भीम की अपने तीनों सौतेले भाइयों से बनती थी । अतः वृद्ध शिवदास ने यह ऐलान कर दिया कि भीम एवं उसकी पत्नी उस घर में नहीं रह सकते  इसलिए वह अपना पैतृक घर छोड़ कर किराए के घर में पत्नी के साथ रहने लगा । बहुत ही कष्ट से उन दोनों के दिन बीत रहे थे । मैं उसी समय का इतिहास बता रहा हूँ ।

कुछ महीनों से बीमारी ने शिवदास को ऐसे जकड़ लिया कि शिवदास अब बिस्तर से उठने की क्षमता भी खो चुके। उनके जीने की कोई आशा भी नहीं है । भीमचाँद अपना सारा काम छोड़कर दिन-रात बीमार पिता की सेवा में लगा रहता है । सुबह कुछ देर के लिए पत्नी के पास आता है , उसके रोज़मर्रे का समस्त बन्दोबस्त करके , वापस पिता के पास चला जाता है।
लोग कहने लगे कि भीम की अनुपस्थिति में शिवदास ने एक वसीयतनामा तैयार किया है जिसमें उनके जेष्ठपुत्र भीमचाँद का अंश शून्य पड़ा है ।
आज सुबह भीम के घर आते ही विनोदिनी ने यह बुरी खबर उसे दीऔर इसी के उत्तर में अन्तर्यामी भीम कहने लगे ,”मेरी गैर मौजूदगी में ऐसी घटना घटी होती तो मुझे मेरी सौतेली माँ की नज़रों से ज़रूर मालूम पड़ता। मेरे आँखों से कभी भी चूकता नहीं ।”

भीम भागता हुआ अपने पैतृक घर में आया । इधर- उधर देखे बिना ही रसोई घर में चला गया । उस वक्त सुखदा अपने बीमार पति के लिए पथ्य बना रही थी। भीम ने आवाज लगायी, “सुनती है माँ ।” सुखदा ने थकी हुई दृष्टि उठायी । तीखी नज़रों से माँ के चेहरे को देखते हुए भीम बोला,”क्या पिताजी ने वसीयतनामा तैयार किया है?” एक लम्बी साँस छोड़कर सुखदा कहती है,” कैसे जानूँ बेटा उन्होंने क्या किया है। मैं जिस दुःख से मर रही हूँ वह केवल भगवान ही जाने।” भीम ने थोड़ी-सी नरम आवाज में कहा, “नहीं मतलब, सुना कि यह सब आपकी बातों के अनुसार हो रहा है और उसमें मेरा नाम तक नहीं है?” सुखदा ने आँचल से आँसू पोंछते हुए कहा ,”लोग तो ऐसा कहेंगे बेटा , मैं जो तुम्हारी सौतेली माँ ठहरी । लेकिन वे अभी भी जिंदा हैं , चाहो तो जाकर पूछ सकते हो।”

(२)
भीम के मन से समस्त ग्लानि पिघल गयी । सौतेली माँ के आँसू और आवाज़ ने उसका सारा संदेह मिटा दिया कि ये सब झूठ है । वह तुरंत पश्चाताप भरे स्वर में कहने लगा ,”मैंने यकीन नहीं किया, यकीन नहीं किया माँ । मुझे किसी से कुछ पूछने की जरूरत नहीं है । मुझे पता है कि ये सारी बातें झूठ है।” इतना कहकर वह वहाँ से चला गया । पिता के घर में जाकर मृत्युपथगामी पिता को ममता और श्रद्धा के साथ देखता रहा । अपने हाथों को उनके पैरों पर सहलाने लगा , उन्हें दूध पिलाया। तीन साल पहले उसके पिता की स्पष्ट बातों से जब उसे सपत्नीक घर से निकालना पड़ा था तब उसे पिता से अत्यंत अभिमान हुआ था पर आज उस अभिमान को याद करते हुए उसे बहुत अनुताप होता है । वह पिता से मन ही मन क्षमा भिक्षा मांगने लगा तथा मुँह फेरकर अपने आँसू पोंछने लगा ।
वह वहाँ भी ज्यादा देर टिक न पाया । जब तक वह विनोदिनी को वह खुशखबरी नहीं देता तबतक वह स्थिर नहीं हो सकता । घर पहुँचकर , बाहर चप्पल खोले बिना ही बैठक में चला गया । तब विनोदिनी खाना पका रही थी। दरवाज़े के सामने खड़े होकर ऊँची आवाज़ लगायी, “अरे सुनती हो !” विनोदिनी आँख उठाकर बोली,”अब क्या है?” भीमचाँद ने बत्तीस दाँतों को निकाल कर कहा,”झूठ, झूठ , सब कुछ झूठ।” “क्या झूठ ?” विनोदिनी ने पूछा । भीम ने उत्तर दिया,”वह जो तुम्हारे वसीयतनामा की बातें । मैं कह रहा था न तुम्हें , यह कैसे हो सकता है? मैं पूरा दिन उस घर में रहता हूँ। मुझे कोई धोखा देगा , यह मैं जान ही न पाऊँ और पड़ोसी सबकुछ जान गए!?”

विनोदिनी को पति की बातों का यकीन नहीं हुआ , वह पूछी,”तुम क्या पता करके आए यह बताओ न।” वैसे ही भीम गुस्से से टूटकर कहने लगा,”यह बात झूठ है , यही जानकर आया और क्या।” विनोदिनी कुछ बोले बिना सिर्फ पति का मुँह ताकती रही। भीम बोलता रहा,”मैंने जाकर कहा, माँ सुनती हो । फिर जैसे ही वह आँख उठाकर देखी । मैं सबकुछ समझ गया । अरे यह मेरी दैवीय शक्ति , जानकर रखो । इन्सान कोई भी हो, जब एकबार मैं उसकी आँखों के तरफ देख लूँ , उसके मन की सारी बातें को मैं छपे हुए अक्षरों की तरह पढ़ सकता हूँ। उनका भी पढ़ लिया।”
विनोदिनी एक लम्बी साँस छोड़कर बोला,”बहुत अच्छा किया । मैं सोची कि ये सचमुच कुछ जानकर आए हैं ।”
भीम अब भयंकर रूप से उत्तेजित हो उठा और बोला,” इससे बढ़कर और क्या सत्य है? एक वसीयतनामा बन गया, वहाँ बैठकर मुझे मालुम नहीं पड़ा , माँ नहीं जान पाई और यहाँ बैठकर तुम जान गयी ? मेरी माँ रो-रोकर बोली,”बेटा मैं तुम्हारी सौतेली माँ हूँ..।” अब इससे आगे और क्या चाहती हो तुम ?” विनोदिनी ने और तर्क न किया। वह अपने पति को भी जानती थी और सौतेली सास को भी। वह सिर्फ बोली, “ठीक है, ऐसा होने से ही अच्छा है। तुम अब जाओ जा के नहा लो । खाना तैयार है।”
पत्नी की शक्ल देखकर भीम जान गया कि विनोदिनी को तनिक भी विश्वास नहीं हुआ । इसलिए नाराज़गी के साथ उत्तर दिया,”मेरी बातों का यकीन नहीं होता तो दूसरों की ही सही लेकिन मैं यहाँ खाना खा नहीं सकता । मुझे लौटना होगा।”
वह जिस गति से आया था , उतनी ही तेज़ गति में चप्पल की पटपट आवाज़ के साथ लौट गया ।

भीमचाँद ने अपने पिता का शोभामय श्राद्ध करना चाहा । हाल ही में हुई विधवा सुखदा ने , रो-धो कर बताया कि लोहे के संदूक में फूटी कौड़ी तक नहीं है। भीम जेष्ठ पुत्र था अतः सभी दायित्व-कर्तव्य उसी के ऊपर था , जिसके कारण उसे अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखकर तथा कागज पर दस्तखत करके सेठ से कुछ पैसे उधार लेकर श्राद्ध के खर्च मिटाने पड़े ।
श्राद्ध काम सम्पन्न होने पर वकील आया और वसीयतनामा पढ़़ कर सुनाया , जिसमें, शिवदास अपने द्वितीय पक्ष के तीन लड़के के नाम पर ज़ायदाद समान रुप से बाँट दिए हैं लेकिन ज्येष्ठ पुत्र भीमचाँद के लिए कुछ नहीं फूटी कौड़ी तक नहीं रखकर गए । बेचारा भीमचाँद , वह तब और क्या करता । बूद्धू की तरह मुँह लटकाए बैठा रहा ।

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कोरोना के प्रति सचेत करने वाली शार्ट फिल्म

कोलकाता : कोरोना वायरस के के विश्वव्यापी संकट पर देशवासियों को सचेत करने के उद्देश्य से शिव जायसवाल के निर्देशित व लिखित शार्ट फिल्म ‘बच के रहना रे बाबा’ का निर्माण किया है। यह फिल्म यूट्यूब चैनल पर जारी की गयी है। फिल्म में गोविंद घोष, सुनिता जायसवाल, शिव जायसवाल, सौमेन घोष, विनय विनायक, प्रशांत कुमार, भूषण, अयोध्या जायसवाल, अभिषेक जायसवाल, रुद्र जायसवाल आदि ने अभिनय किया है। फिल्म का संपादन विनय विनायक ने किया है। यह फिल्म शिव जायसवाल प्रोडक्शन की प्रस्तुति है।

 

नहीं रहीं मशहूर रंगकर्मी ऊषा गांगुली

कोलकाता : देश की जानी-मानी रंगकर्मी ऊषा गांगुली का गत 23 अप्रैल की सुबह कोलकाता में निधन हो गया। उनकी उम्र 75 वर्ष थी। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक ऊषा गांगुली रीढ़ की हड्डी की समस्या से लंबे वक्त से परेशान थीं। शहर के लेक गार्डेंस इलाके में स्थित अपने फ्लैट में वह गुरुवार को सुबह सात बजे उनकी घरेलू सहायिका को अचेत अवस्था में मिलीं। उन्होंने बताया कि डॉक्टर को बुलाया गया जिसने बताया कि कुछ समय पहले दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई थी। गांगुली का एक बेटा है, लेकिन वह फ्लैट में अकेली रहती थीं। उनके पति कमलेन्दु का कुछ साल पहले निधन हो चुका है। तीन दिन पहले ऊषा गांगुली के भाई का भी निधन हो गया था। ऊषा गांगुली का जन्म 1945 में उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था।

ऊषा गांगुली के निधन से पूरा रंगजगत स्तब्ध है। ऊषा गांगुली रंगकर्म से जुड़ी हुई थी। उन्होंने कोलकाता स्थित श्री शिक्षायतन कॉलेज से स्नातक किया था। बाद में उन्होंने कोलकाता को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। कोलकाता जहां बंगाली थियेटर का बोलबाला था वहां उन्होंने हिंदी थियेटर को स्थापित किया। कोलकाता की मशहूर रंगकर्मी उमा झुनझुनवाला ने बताया कि 1976 में ऊषा ने रंगकर्मी नामक एक संस्था बनाई थी, जिसके बैनर तले वो देश की प्रसिद्ध रंगकर्मी बनीं। महाभोज, होली, रुदाली, कोट मार्शल जैसे नाटकों के लिए ऊषा हमेशा याद रखी जाएंगी। वहीं ऊषा का पहला नाटक ‘मिट्टी की गाड़ी’ था। काशीनाथ सिंह के उपन्यास पर आधारित उनका बहुचर्चित नाटक काशी का अस्सी बहुत चर्चित रहा, पूरे देश में इसका मंचन हुआ।

 अंतरकथा उनका एकल नाटक था।  रंगमंच में अतुल्य योगदान के चलते उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। ऊषा गांगुली के निधन पर  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, फिल्म अभिनेत्री शबाना आज़मी समेत थिएटर जगत से जुड़े विशिष्ट जनोंं ने अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है। गांगुली को बंगाल में वैकल्पिक हिंदी रंगमंच के एक नए रूप को लाने का श्रेय जाता है।

सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से बांँटी गयी राहत सामग्री

कोलकाता : कोलकाता की सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्था सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से पहले चरण में हुगली जिले के रिसडा, गोंदलपाड़ा ,तेलिनीपाडा और नंदीपुकुर में 150 जरूरतमंद लोगों के बीच राहत सामग्री वितरित की गयी ।कोरोना महामारी के कारण उपस्थित स्थिति से निपटने के लिए संस्था के सदस्यों ने लोगों से आग्रह किया कि वे लॉकडाउन का पालन करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग रखें ।यह समय डरने का नहीं बल्कि समझदारी के साथ लड़ने का है ।रिसडा में राहत सामग्री बांटने का काम संस्था के सदस्य रामाशंकर सिंह, प्रकाश त्रिपाठी, पंकज पांडे, दीपक ठाकुर,अवधेश मिश्र, शंभु सिंह और हरीश तिवारी एवं गोंदलपाड़ा और तेलिनीपाडा में शिवप्रकाश दास, पंकज सिंह, विवेक कुमार, अमित ठाकुर तथा नंदीपुकुर में राहुल शर्मा, सुरेश दास,रमेश पांजा,दीपक तांती और अनिल दास ने किया।

चार तकनीक जिससे बढ़ेगी आपके व्यापार की ऑनलाइन मुख्यता 

सन्ध्या सुतौदिया

रास्ते आसान हो जाते हैं. जब कोई राह बताने वाला हो…और यह तभी होगा जब कोई ऐसा मंच अथवा माध्यम हो…जब परामर्श सही जगह पर और सही समय पर पहुँचे। शुभजिता का प्रयास हमेशा से ही ऐसी सकारात्मकता को आगे ले जाना रहा है तो हम कर रहे हैं एक नये स्तम्भ की शुरुआत विशेषज्ञ परामर्श..। इसके तहत अलग – अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के परामर्श आपके लिए लाने का प्रयास रहेगा। शुभ सृजन सम्पर्क में पंजीकरण करवाने वाले विशेषज्ञों को आप तक पहुँचाया जायेगा और हमारा प्रयास इससे भी आगे होगा। तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक, संध्या सुतोदिया  बता रही हैं इस बार डिजिटल मार्केटिंग में अवसर के बारे  में। अगर आपके पास कोई प्रश्न हों, अपने प्रश्न आप हमारे सोशल मीडिया पेज पर भी भेज सकते हैं या शुभजिता को टैग करके अपनी बात कह सकते हैं –

चाहे यह एक छोटा व्यापार हो या एक मल्टी मिलियन कंपनी किसी भी मार्केटिंग दल का सर्वप्रथम लक्ष्य मुख्यता बनाना है। यहाँ तक कि एक खोज के अनुसार, 61% मार्केटर्स कहते हैं कि उनके द्वारा झेली जाने वाली सबसे बड़ी चुनौती है अच्छी मुख्यता हासिल करना। आगे भी, किसी भी व्यापार के लिए मुख्यता बनाना ही अधिक महत्वपूर्ण है, यही अधिकतर मार्केटिंग संचार नीतियों की आधारशिला है। बिना मुख्यता के अधिकतर व्यापार डूबने के कगार पर आ जाते हैं।

मुख्यता से ही वह योग्य संभावनाएं हैं जिससे आप अपने सामग्री और सेवाओं के इच्छाओं को व्यक्त कर सकते हैं। अगर आप सही पत्ते चलेंगे तो वह आपके ग्राहक और एंबेसडर भी बन सकते हैं। मुख्यता कई माध्यमों की सहायता से प्राप्त की जा सकती है जैसे कि कम्पनी वेबसाइट शब्दों के जाल से, फोन कॉल यहां तक कि ईमेल मार्केटिंग। एक कंपनी के पास कई महत्वपूर्ण लक्ष्य होते हैं, लेकिन मुख्यता प्राप्त करना ही सर्वप्रथम प्राथमिकता है।

* ऑनलाइन मुख्यता बनाना क्या है? – ऑनलाइन मुख्यता बनाने का अर्थ है संभावित ग्राहकों को अपने सामग्री या सेवाओं के बारे में जानकारी प्रदान करके उनकी इच्छाओं को बढ़ाना, और अंततः ग्राहकों को उसे खरीदने के लिए प्रभावित करता है। यह ऑनलाइन मार्केटिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और आगे चलकर यह संभावित ग्राहक को हमेशा के लिए ग्राहक के रूप में बदलने का लक्ष्य रखता है। इसलिए एक व्यापारी में ऑनलाइन मुख्यता हासिल करने की रणनीति अवश्य होनी चाहिए।

मार्केटस विभिन्न माध्यमों के उपयोग से अपनी मुख्यता बढ़ाते हैं, पर ज्यादातर समय यह माध्यम चाहे गए परिणाम प्रदान नहीं करते है। तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी कि हमारी निष्ठित डिजिटल मार्केटिंग दल कुछ ऑनलाइन मुख्यता बनाने की प्रयास और शोध किए गए तकनीक लाती है।

1. विषय वस्तु मार्केटिंग:- मार्केटिंग की इस दुनिया में, एक बहुत ही लोकप्रिय कहावत है- ” विषय वस्तु ही राजा है|” खोज के अनुसार मुख्यता बनाने के लिए पारंपरिक मार्केटिंग से तीन गुणा बेहतर प्रभावी है विषय वस्तु। ब्लॉगिंग और विषय वस्तु मार्केटिंग से संभावित और मौजूदा ग्राहक आकर्षित होते हैं और आपकी कम्पनी द्वारा दिए जाने वाली सामग्री और सेवाओं का ज्ञान प्रदान करता है। इससे विक्रय दल यानी सेल्स टीम को उन ग्राहकों के लिए समान मुख्यता प्रदान करने में सहायता मिलेगी; जिन्हें पहले से ही अपने कंपनी की सामग्री और सेवाओं के बारे में प्राथमिक ज्ञान है।

2. सोशल मीडिया मार्केटिंग:- आजकल हर इंसान सोशल मीडिया पर है। अपने लक्ष्य दर्शकों से जुड़ने के लिए और अपने व्यापार के प्रचार के लिए यह बहुत अच्छा साधन है। जब की लिंकडइन व्यापार-से- व्यापार मुख्यता बढ़ाने के लिए एक प्रभावी माध्यम है, अन्य सोशल मीडिया मंच जैसे की फेसबुक, टि्वटर, स्नैपचैट और इंस्टाग्राम जैसे मंच व्यापार से ग्राहक मुख्यता के लिए है। सोशल मीडिया मंच के माध्यम से संभावित मुख्यता; के कार्य और विचार-विमर्श और अन्य सोशल मीडिया कार्यों से भावी ग्राहकों पर नजर रखना आसान हो जाता है।

3. सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन:-जब भी किसी ग्राहक को किसी तरह का प्रश्न होता है तो वह अपने उत्तर के लिए गूगल पर जाते हैं। यह कम्पनियों के लिए एक व्यवसाय संबंधी मौका बन जाता है और संभावित ग्राहक को मूल्यवान मुख्यता में बदला जा सकता है। अगर आप अपने वेबसाइट को जैविक ट्राफिक में प्रथम स्थान अधिग्रहण करा सके तो सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की सहायता से आपकी वेबसाइट की पद में बढ़ोतरी होगी। जितने बेहतर पद होंगे उतने बेहतर लोगों के पहुंचने की आशंका होगी जिसका अर्थ है मुख्यता। आपको पेड विज्ञापन से भी ऑनलाइन मुख्यता मिल सकती है जिससे आपको तीव्र लक्षित पहुंच मिलेगी।

4. मुख्यता बढ़ाने वाले विशेषज्ञों की भर्ती:- आप अपने व्यापार के लिए मुख्यता विशेषज्ञ की भर्ती करें, जो आपको अपने पुराने मुख्यता के साथ नए मुख्यता स्थान प्राप्त करने की सहायता करेंगे। अगर आप एक मुख्यता बढ़ोतरी विशेषज्ञ को ढूंढ रहे हैं तो आज ही तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी से संपर्क करें। एक मुख्य डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी होने के नाते, हम अपने विभिन्न मुख्यता बढ़ोतरी रणनीतियों से आपकी और आपके व्यापार की मुख्यता बढ़ाने में मदद करेंगे। याद रखें:- अधिक योग्य मुख्यता का अर्थ है अधिक ग्राहक और अधिक लाभ। यही कारण है कि व्यापार बढ़ाने के लिए मुख्यता बढ़ोतरी अति आवश्यक है।

इसलिए तुरिया कम्युनिकेशन एल एल पी में हम सभी चीजों के लिए प्रतिबद्ध हैं जिससे हम सर्वोत्तम बनाते हैं। इसलिए अगर हम नहीं तो फिर कौन? तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी से जुड़े, जो बाकी के मार्केट से अधिक संचार की दुनिया को जानता है, जिससे आप अपने व्यापार को बढ़ावा दे सकते हैं। अपने व्यापार को तुरिया की रचनात्मकता की मदद से ऑनलाइन विस्तार कीजिए।

लेखिका तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक हैं
सम्पर्क- फोन: +91 89815-92855 / 9748964480
ई मेल : sandhya@ turiyacommunications.com
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नहीं रहे वरिष्ठ कवि नवल

कोलकाता :  कोलकाता के वरिष्ठ लोकप्रिय कवि नवल का निधन हो गया है। ‘आधी रात का शहर’ और ‘कालाहांडी’ एवं ऐसे ही कई काव्य-संग्रह उनकी कलम से निकले हैं। कवि नवल जी उर्फ जयप्रकाश खत्री का निधन हृदय गति रुक जाने से हुआ। लॉकडाउन के बीच शुक्रवार गत 24 अप्रैल 2020 को शाम 4:30 बजे कोलकाता के लेक गार्डेन्स स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वे  80 वर्ष के थे। वह अपने पीछे दो पुत्र-पुत्रवधुएं, दो पुत्रियां व नाती-पोतों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं। नवल जी अपनी कविताओं के साथ ही स्नेहिल व्यवहार के लिए भी याद किये जाते रहेंगे। वह अपनी पीढ़ी के रचनाकारों से काफी अलग थे और युवाओं को हमेशा प्रोत्साहित किया करते थे। साहित्य प्रेमियों को नवल जी के न रहने से गहरा झटका लगा है।

’भाग कोरोना’ गेम के जरिए शेयरचैट यूज़र ले रहे हैं कोरोना से बदला

गेम को शेयरचैट प्लैटफॉर्म  पर 40 लाख से अधिक पेज व्यूज़ मिल चुके हैं

कोलकाता : देश कोविड-19 संकट से जूझ रहा है, ऐसे में शेयरचैट यूज़र्स को कोरोना वायरस से बदला लेने का अनूठा तरीका मिल गया है। एक्स एल आर आई जमशेदपुर के दो विद्यार्थियों अकरम तारिक खान और अनुश्री वरदे बीते 10 दिनों से प्लैटफॉर्म पर ट्रैंड कर रहे हैं, क्योंकि इन्होंने एक गेम डैवलप किया है। इस गेम में नीचे की तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजुअल है जो कोरोना वायरस को हैंड सैनिटाइज़र की बूंदों से शूट कर रहे हैं। ’गो कोरोना, कोरोना गो’ इसका थीम म्यूज़िक है, इस गेम का इरादा कोविड19 के बारे में जागरुकता पैदा करना है। गेम के खत्म होने पर सलाह दी जाती है कि कोरोनावायरस को कैसे हराया जाए, इसके लिए ’स्टे होम’, ’वियर मास्क’, ’वॉश योअर हैंड्स’ आदि संदेश आते हैं। शेयरचैट पर लाइव होने के बाद से यह गेम प्लैटफॉर्म पर ट्रैंड कर रहा है और इसे 40 लाख से ज्यादा पेज व्यूज़ मिल चुके हैं। यूज़र्स लाखों बार इस गेम को खेल चुके हैं, इसका औसत प्रति यूज़र 3.2 बार है। औसत स्कोर 5.8 गेम प्रति गेम प्ले है।

कोरोना वायरस के भय के चलते लॉकडाउन करना पड़ना है और लोग इससे नाखुश हैं, परेशान हैं, चिंतित हैं। यह देखते हुए कहा जा सकता है कि यह गेम शेयरचैट यूज़र्स के लिए राहत लेकर आया है, इसने उनका तनाव घटाया है। शेयरचैट यूज़र्स को एक नया तरीका मिला है कोरोना को परास्त करने का और इस गेम के माध्यम से इस वायरस के बारे में जागरुकता का प्रसार भी हो रहा है।

 

पेंट करने वालों की सहायता के लिए आगे आया कामधेनु

कोलकाता : पेंट बनाने वाली कम्पनी कामधेनु कोरोना आपदा के दौर में अपने साथ काम करने वाले पेंट करने वाले श्रमिकों की मदद के लिए आगे आयी है। कामधेनु पेंट्स का लक्ष्य ऐसे 4000 मजदूरों की सहायता करना है। इसके लिए वह आर्थिक सहायता राशि सीधे इन मजदूरों के बैंक खाते में डालेगी। अब तक 1500 मजदूरों की सहायता की जा चुकी है। कामधेनु लिमिटेड के निदेशक सौरभ अग्रवाल ने कहा कि आज कोरोना आपदा के खिलाफ सारा विश्व एक साथ खड़ा है और कामधेनु पेंट्स भी अपने साथ काम करने वाले लोगों की सहायता कर रहा है। गौरतलब है कि लॉकडाउन के कारण श्रमिक बड़ी तादाद में बेरोजगार हो गये हैं..और यह सहायता उनको लाभ पहुँचाएगी।

ऑक्सफोर्ड में कोरोना वैक्सीन बनाने वाली टीम में भारत की चन्द्रा भी

लन्दन : कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सारी दुनिया एक साथ आ रही है। दवा और वैक्सीन खोजने के लिए वैज्ञानिक काफी परिश्रम कर रहे हैं। ऑक्सफोर्ड में रहने वाली कोलकाता की चन्द्रा दत्त उन युवाओं में शामिल हैं जो कोरोना की वैक्सीन बनाने के प्रयासों में जुटी टीम का हिस्सा हैं। चन्द्रा इस टीम में शामिल एकमात्र भारतीय हैं। चन्द्रा क्वालिटी एश्योरेंस मैनेजर के तौर पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कार्य़रत हैं। यह टीम कोरोना से लड़ने के लिए प्रतिरोधक यानी एन्टी वायरल वेक्टर वैक्सीन बना रही है। चन्द्रा ने कोलकाता के गोखले मेमोरियल गर्ल्स स्कूल से पढ़ाई की है औऱ हेरिटेज इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में बी.टेक की पढ़ाई कर चुकी हैं।

लंदन में दो विश्वविद्यालयों में अलग अलग रूप से करोना वायरस प्रतिरोधक वैक्सीन बनाने का कार्य चल रहा है। करोना वैक्सीन पर शोधरत ऑक्सफोर्ड युनिवर्सिटी की एक टीम में चंद्रा दत्त भी हैं जो भारतीय हैं। गर्व की बात है कि चंद्रा दत्त के पिता डॉ समीर दत्त भवानीपुर एडूकेशन सोसायटी कॉलेज के साइंस विभाग के वाइस प्रिन्सिपल हैं। कोलकाता के गोखल मेमोरियल गर्ल्स स्कूल से 2004 में उच्च माध्यमिक में उत्तीर्ण कर चंद्रा दत्त ने हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी.टेक की डिग्री प्राप्त की। 2009 से ब्रिटेन लिडस विश्विद्यालय से एम एस सी किया। 2019 ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में जेनर इंस्टीट्यूट क्लिनिकल बायो मैनुफैक्चरिंग विभाग में कोविड 19 वायरस प्रतिरोधक वैक्सीन तैयार करने का कार्य कर रही हैं जो बहुत ही महत्वपूर्ण है। चंद्रा की माँ रेमी दत्त और डॉ समीर दत्त दोनों ही गर्वित हैं कि उनकी पुत्री उस टीम में इस भयानक वायरस पर विजय प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। 20 जनवरी से इस वायरस वैक्सीन पर युद्ध स्तर पर शोध चल रहा है। लोगों पर ट्रायल भी शुरू कर दिए गए हैं। भवानीपुर कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज डी शाह ने चंद्रा दत्त को बधाई और शुभकामनाएं दी।

(इनपुट – प्रो. वसुन्धरा मिश्र)